भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

(c)२०००-२०२३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur

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Wednesday, April 13, 2011

'विदेह' ८० म अंक १५ अप्रैल २०११ (वर्ष ४ मास ४० अंक ८०)- PART I



                     ISSN 2229-547X VIDEHA
'विदेह' ८० म अंक १५ अप्रैल २०११ (वर्ष ४ मास ४० अंक ८०)NEPALINDIA              
                                               
 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine   नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own script Roman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi
ऐ अंकमे अछि:-

१. संपादकीय संदेश


२. गद्य






  

३. पद्य








३.५.नवीन कुमार आशा- किया ने पावी तोहर टोन 


३.६.किशन कारीगर- किछु त हम करब


४. मिथिला कला-संगीत- १.अनुपमा प्रियदर्शिनी .श्वेता झा चौधरी .ज्योति सुनीत चौधरी .श्वेता झा (सिंगापुर)

 



 

. भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.]





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example

भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक मटम पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू।


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गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज'



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संपादकीय

विदेशी निवेशसँ मैथिलीपर अप्रत्यक्ष प्रभाव: मैथिलीपर विदेशी निवेशक अप्रत्यक्ष प्रभावक रूपमे मैथिली बाजैबलाक संख्याक घटोत्तरी आ मैथिलीक शब्दावलीक ह्रासकेँ राखल जाइत अछि। ओना ई सभ भारत आ नेपालमे पैघ नग्रक अनियन्त्रित विकास आ छोट नग्रक बिना अपन आर्थिक आधारक मात्र जमीनक खरीद-बिक्रीक कारणसँ विस्तारक कारण बेसी भेल अछि। मैथिली भाषीक एके खाढ़ीमे जतेक पड़ाइन भेल अछि से आन वर्गमे तीन-चारि खाढ़ीमे भेल (जेना तमिल वा बांग्लाभाषीकेँ लऽ सकै छी।)। मुदा आनो भाषा-भाषीमे विदेश पड़ाइनसँ भाषाक लोप भेल अछि मुदा संस्कृतिक लोप नै तँ आन वर्गमे भेल अछि आ ने मैथिलीभाषी वर्गमे। मैथिली भाषीकेँ लऽ कऽ दिल्लीमे ई कहबी भऽ गेल अछि जे आन वर्ग पाँच साल दिल्लीमे रहलापर पंजाबी बाजऽ लगै छथि आ हुनकर घरक स्त्रीगण करवा-चौथ करऽ लगै छथि मुदा मैथिलीभाषी नै तँ पंजाबी सिखै छथि आ ने हुनकर घरक स्त्रीगण करवा-चौथ करै छथि। हँ जखन अहाँ पत्नीसँ मैथिलीमे नै बजबै आ बच्चाकेँ गामक दर्शनो नै करऽ देबै तँ ओ मैथिली बाजब छोड़बे करत। विदेशी निवेश जाइ तरहेँ हिन्दी आ अंग्रेजी कार्टून चैनलमे भेल अछि, ओइसँ मैथिलीटा नै पंजाबीपर सेहो संकट आबि गेल अछि। मुदा ई एकटा फेज छिऐ, आ ई फेज बीस बर्खमे खतम भऽ जाएत। जे परिवार ऐ बीस बर्खमे मैथिली बाजब छोड़ि देताह हुनका हम मैथिली दिस सोझ रूपमे नै घुरा सकब। मुदा सांस्कृतिक सन्निकटताक कारणसँ मैथिलीक परियोजना, अनुवाद, ऒडियो-वीडियो आ संचार परियोजनाकेँ ओ समर्थन करबे करताह, तकरा सम्मान देबे करताह। आ ई अप्रत्यक्ष रूपमे मैथिली लेल वरदान सिद्ध हएत। आ एकटा पुनर्जागरणक काल अखन चलि रहल अछि तकर पुनरावृत्ति बीस बर्ख बाद हएत। मैथिली युद्धसँ बहार भऽ जीवित निकलत आ सुदृढ़ हएत।


( विदेह ई पत्रिकाकेँ ५ जुलाइ २००४ सँ एखन धरि १०९ देशक १,७४९ ठामसँ ५८, ९५६ गोटे द्वारा विभिन्न आइ.एस.पी. सँ २,९८,७९१ बेर देखल गेल अछि; धन्यवाद पाठकगण। - गूगल एनेलेटिक्स डेटा। )

 

२. गद्य






  
 
सुजीत कुमार झा


नेपालमे राष्ट्रिय जनगणना
मैथिलीकेँ स्थान दियावकेँ विशेष संकल्प

 

नेपालमे राष्ट्रिय जनगणना २०६८ शुरु करयकेँ तैयारी चलि रहल समयमे जनकपुरक युवा क्लबसभ नेपालक मिथिलाञ्चल क्षेत्रमे विशेष अभियान शुरु कएलक अछि । ओ अभियान तहत मातृभाषामे कोना मैथिल सँ मैथिली लिखावय ताहिकेँ लेल प्रयत्न करत । रामानन्द युवा क्लबक अध्यक्ष दिपेन्द्र कुमार ठाकुरक अनुसार ठामठाम गोष्ठी, सभा, सडक नाटक कएल जाएत । संगहि मैथिलीकेँ विरोध करयबलाकेँ प्रतिकार सेहो कएल जाएत ओ कहलन्हि ।

मैथिलीक लेल संकल्प
जनगणनाक क्रममे मैथिलीकेँ विशेष अभियान चलावयकेँ जनकपुरमे आयोजित एक कार्यक्रममे संकल्प लेल गेल अछि । रामानन्द युवा क्लब जनकपुरद्वारा आयोजित एक कार्यक्रममे मिथिला नाट्य कला परिषद, अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा कमिटी, मिथिला राज्य संघर्ष समिति, महावीर युवा कमिटी, राम युवा कमिटी, गणेश युवा कमिटी, महावीर नव युवा कमिटी सहितक कमिटीसभक प्रतिनिधि एवं मैथिली साहित्यकारसभक सहभागिता छल । बैसारक सहभागी एवं मिथिला नाट्य कला परिषदक अध्यक्ष सुनिल मल्लिक कहलन्हि –‘मैथिली संस्था एवं प्रेमीसभकेँ अखने जागयकेँ समय अछि, जनगणनामे चुक भेल तऽ बादमे पछतावा बाहेक किछ नहि रहि जाएत ।अहि दुआरे विशेष सर्तकता अपनाओल जा रहल अछि ओ कहलन्हि ।
 
मैथिलीक बाधक
जनगणनामे मैथिलीक बाधक सेहो देखाएल लागल अछि । नेपालक मधेशवादी दलसभ हिन्दी भाषाकेँ पक्षधर भेलाक कारण ओ सभ हिन्दी भाषामे जनगणना नहि लिखा दिए ताहिकेँ डर मैथिली आन्दोलनी संस्थासभकेँ रहल अछि । एखन जाहि रुप सँ सक्रियता देखाओल जा रहल अछि ओकर प्रमुख कारण ओहे रहल राम युवा कमिटीक अध्यक्ष सोहन ठाकुर कहलन्हि । अहि सँ पूर्व भेल जनगणनामे मैथिलीक स्थानपर नेपाल सदभावना पार्टी हिन्दी बहुतो गोटे सँ लिखवा देने छल । फेर सँ हिन्दी लिखावयकेँ प्रयत्न शुरु कएने अछि । सदभावना पार्टीक नेतासभ विभिन्न स्थानपर हिन्दीकेँ वकालत शुरु कऽ देने अछि । रामानन्द युवा क्लबक अध्यक्ष दिपेन्द्र कुमार ठाकुर कहलन्हि –‘जे जतेक करौक हमसभ मैथिलीक मामिलामे एक जुट छी, कियो कतबो चिचियाएत मैथिलक एकता बनल रहत ।
 
जनगणनामे मातृभाषाक महत्व
कोन भाषाभाषीकेँ संख्या कतेक अछि एकर गिन्ती जनगणने करैत अछि । भाषाभाषीकेँ संख्या बेसी रहत तऽ ओकरा सरकारी सुविधा सेहो बेसी भेटैत अछि । अहिकेँ लेल सभ मातृभाषीबीच प्रतिस्पर्धा रहैत अछि । नेपालमे दोसर सभ सँ बेसी बाजयबला भाषा मैथिली अछि । इ स्थान एकरा फेर सँ प्राप्त भेल तऽ हरेक स्थानपर एकर महत्व बढत । आब तऽ हरेक निकायमे मैथिली बाजयबलाकेँ रोजगारी भेटत । फेर इ तखने भेट सकैत अछि जखन मैथिली भाषीक संख्या बेसी रहत । अगिलका जनगणनामे मैथिलीभाषीक संख्या १२ प्रतिशत रहल छल । अहिबेर २० प्रतिशतधरि होवयकेँ सम्भावना रहल अछि ।




 ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
गजेन्द्र ठाकुर
स॒हस्र॑ शीर्षा॒

मणिरत्नम लेल, जिनकर हिन्दुस्तानी हमरा अपन पिताक स्मरण करबैत अछि।


उपन्यास
स॒हस्र॑ शीर्षा॒
हजार माथ, हजार मुँह, हजार तरहक गप-खिस्सा, सत्य आ …|
(सहस्रशीर्षा पुरुष: सहस्राक्ष:सहस्रपात्। सभूमिग्वंसर्वतस्पृत्वात्यतिष्ठद्दशांगुलम्॥...)
पद्भ्यांशूद्रो अजायत|| ..पद्भ्यां भूमिर्दिशः ...||

पहिल कल्लोल
गढ़ नारिकेल- महिसबाड़ ब्राह्मणक गाम
चारू कात गाछ-बृच्छ, पोखरि। गाममे एक..दू..तीन आ एकटा आर, चारि टा पोखरि।
ओना तँ तीन टा आर पोखरि अछि। एकटा उत्तरबरिया पोखरिक उत्तरभर बड़का डकही पोखरि। लोक बजै छथि जे कोनो डकैत एक्के रातिमे खुनने रहए ई पोखरि। मुदा तकर प्रमाण पुछने यैह पता लागत जे आन तँ कोनो प्रमाण नहि मुदा खुनैत-खुनैत भोर भऽ गेल रहै आ तइ कारणसँ ओ डकैत पोखरिमे जाइठ नै गारि सकल रहए। हड़बड़ीमे ओहि डकैतक, डकैत की राक्षस कहू, एक पएरक पनही सेहो छुटि गेलै पोखरिक कातमे। बड्ड दिन धरि पोखरिक कातेमे रहै मुदा फेर बाढ़िमे ओहो बहि गेल। से जे एकटा प्रमाण रहए सेहो नै बचल। गामसँ दूर अछि से छठिक पाबनिसँ कोनो सम्बन्ध आइ धरि एहि पोखरिक नहि स्थापित भऽ सकल अछि। हँ उपनयन बिध-बाधमे धरि एकर उपयोग होइतहि अछि। किसिम-किसिमक माँछ रहै छै एहि पोखरिमे। माँछक कोनो कमी नहि। कहियो डकही पोखरिमे जीरा देबाक खगताक अनुभव नहि कएल गेल। सालना मछहरि होइत अछि आ सभ टोलक लोककेँ-दछिनबाइ टोलकेँ छोड़ि कऽसभ दिन अपन-अपन टोलक माँछक हिस्सा देल जाइत छै।
दछिनबरिया पोखरिक दक्षिणमे अछि बुचिया पोखरि।
गामसँ दुरगर अछि मुदा जाठि छै बीचोबीच। काठक एहि जाठिकेँ गारबा काल पीअर बच्चाक, आइक जमीन्दार, अति वृद्ध प्रपितामह एकटा बड्ड पैघ आयोजन कएने छलाह। बस्तीसँ दुरगर आ खेतक बीचमे रहबाक कारणसँ एतहु लोक सभ स्नानक लेल कम्मे-सम अबैत छथि। मछहरि सेहो होइत अछि मुदा से मात्र एहि दछिनबरिया टोलक लेल। एहि पोखरिक एकटा आर विशेषता अछि। जखन दुर्गापूजाक दिनमे दुर्गाजी फेरसँ नैहरसँ सासुर दसम दिन जकरा जतरा सेहो कहल जाइत अछि, बिदा होइत छथि तँ हुनकर मूर्तिक भसान अही पोखरिमे होइत अछि। पुरुखपात्र तँ नहि, हँ महिला लोकनि दुर्गाजीक भसानपर हबोढ़कार भऽ कनैत छथि। दुर्गाजी एहि टोलकेँ के पूछए, एहि गामेमे नहि बनै छथि। ओ बनै छथि पड़ोसक गढ़ टोलीमे। एहि गामक लोक तँ अगत्ती सभ। खष्ठी दिन धरि दुर्गाजीकेँ झाँपि कऽ राखल जाइत अछि, मात्र मूर्तिकार हुनका उघारि कऽ देखि सकैए, कारण ओ नहि देखत तँ फेर दुर्गाजी बनतीह कोना। आन कियो देखत तँ आन्हर भऽ जएत। हँ, खष्ठी दिन बेलनोतीक बाद मूर्तिक अनावरण बाद हुनकर दर्शन लोक कऽ सकैए। आ ओही दिनसँ मेला सेहो लगैत अछि। एहि गाममे दुर्गा बनतीह तँ कतेक लोक खष्ठीक पहिनहिये आन्हर भऽ जएत। आ पड़ोसक गाम कम अगत्ती अछि। मुदा पूजाक नामपर देखू सभ सञ्च-मञ्च भऽ जाइत अछि। नाममे टोल लागल छैक- गढ़ टोल मुदा अछि गाम। अही गाम जेकाँ महीसबार ब्राह्मणक गाम। अगतपनामे हम आगू आकि हम- एकर तँ बुझु प्रतियोगिता होइत रहैत छैक दुनू गामक मध्य। गढ़ टोलाक गाम दऽ कऽ जाऊ तँ ओहि गामक बान्हक क्लातक दलानपर बैसल छौड़ा सभ किछु ने किछु सुनेबे टा करत। मुदा एहि गामक फसादी प्रकृतिक छौड़ा सभ अरबधि कऽ ओहि गाम बाटे जएबे टा करत। हँ, सध-बध सभ अही बुचिया पोखरिक बाटे गेनाइ श्रेयस्कर बुझैत अछि, भने कनी हटि कऽ रस्ता छै। तेँ की।
गाममे एकटा आर पोखरि होइत छल। मुदा गामक पूबमे कमला आ बलान एहि दुनू धारकेँ नियन्त्रित करबा लेल दू टा बान्ह बान्हल गेल। गामसँ सटल पूब दिस उत्तर-दक्षिण दिशामे एकटा छहर, फेर छथि कमला महरानी, फेर कमला महारानीक भाइ बलान धार आ तखन जा कऽ फेर ओहिसँ पूब उत्तर-दक्षिण दिशामे दोसर छहर। अही दुनू बान्हक बीचमे दोसर छहर अछि बल्ली पोखरि। एहि विशाल पोखरिक सटले रहए एकटा फुटबॉल क्रीडाक्षेत्र- विशाल रमना। किछु तँ बालू जमा भेने आ किछु जमीन्दारक करतब सँ ई पोखरि आ रमना पीअर बाबूक चकबन्दी बला खेतमे चलि गेल। सरकार सेहो ओहि बीचमे नहि जानि कोन कारणसँ चकबन्दीपर जोर देने रहए। सुरुजू भाइक गोबरसँ सीटल खेत सेहो चकबन्दीमे पीअर बच्चाक खेतमे मिलि गेल छल। दुनू छहरक बीच महिसबार सभक मालक लेल बौआचौड़ी अछि। महिसबार एतए अबैत छथि, खेलाइत छथि आ कमलामे हेलैत छथि। कखनो अपना-अपनीकेँ कमलाक धारमे बिना प्रतिरोधक ओ सभ बहए दैत छथि तँ कखनो धारक प्रवाहक उनटा हेलैत छथि। दुनू बान्हक बीच गुअरटोली। पहिने ई गामक टोल छल मुदा आब एतुक्का मतदाता सूची झंझारपुर बजारमे चलि गेल छै। गामक स्कूलपर वोटक बूथ रहने पहिने, बहुत पहिने, एकरा सभकेँ वोट नहि देमए दैत रहए। आब तकर उल्टा छै।
बौआ चौरीक ई स्नातक सभ- आब कियो दिल्ली-बम्मै मे तँ कियो सउदियामे छथि। कियो सेक्युरिटी गार्ड छथि तँ कियो सेक्युरिटी गार्डक कम्पनी खोलि लेने छथि।
गामक आमक गाछी सभ, कैक टा। बड़का कलम। खढ़ोरिक नवगछली। भोरहा कातक कलम। पोखरिक महार सभपर गाछी। खढ़ोरिमे खेत रहए। मुदा एक गोटे जे नवगछली लगेलन्हि से छाह भेने दोसर खेतमे धानक खेती दबि गेल। से ओहो कने चौक-चौराहापर अनट-बनट बजैत आमक गाछी लगा देलन्हि।
एक टा जमबोनी सेहो अछि। नमगर-नमगर गाछ सभ। पीपरक गाछ सभ डिहबारक स्थानसँ लऽ कऽ स्कूलक प्रांगण धरि एत्तऽ ओत्तऽ पसरल अछि। पीपर गाछक जड़ि एत्तऽ आ शिरा सभ दहोदिस।
बान्ह सभक कातमे बोनसुपारीक गाछ, साहर दातमनिक झोँझ, बँसबिट्टी आ मारिते रास फूल आ काँट सभ। लजबिज्जी तँ सभ कलममे। चाकर आमक गाछपर रखबार सभ ओछैन कऽ सुति रहैत छथि। वरक गाछ मुदा एक्केटा, पीचक कातमे मीआँटोली लग।
खेत पथार सेहो कैक तरहक। दुनू बान्हक बीचक खेतकेँ आब सभ ओइ पार बला खेत कहए जाइत छथि। बलुआही खेत। परोर, तारबूज, फुइट, अल्हुआक खेती, सभसँ सस्त खेत जे किनबाक हुअए तँ एतए आऊ। मुदा बाढ़िक बाद खेतक आरिक मूह-कान बदलल भेटत। कोनो साल बाढ़िक बाद खेतक रकबा घटि जाए तँ अराड़ि नहि ठाढ़ कऽ लेब। अगिला बाढ़िमे भऽ सकैए कमला महारानी ओकर रखबा बढ़ा सकै छथि। खेती ओना तँ धानोक होइत छै। मुदा से सुतारपर छै। कोनो बर्ख तीन बेर रोपलोपर बेर-बेर बाढ़िमे दहा जएत तँ कोनो साल कमला महारानी खेतमे ततेक पाँक भरि देतीह जे जतेक मोनक कट्ठा मोनमे सोचब ताहिसँ बेशी उपजत।
कनेक महग खेत किनबाक हुअए तँ मोड़ बला आ गम्हारिक गाछ लग बला खेत कीनू। एतए लोक खेतीसँ बेशी बसोबास लेल जमीन कीनि रहल छथि।
डकही पोखरि बला खेतकेँ बढ़मोतर कहल जाइत अछि। पहिने ब्रह्मोत्तर रूपमे किनको मँगनीमे राजा द्वारा भेटल होएतन्हि। पहिने सुनैए छियै नीक खेती रहए मुदा आइ काल्हि पानि भरल रहै छै। इलाकामे जे छिटुआ धानक खेती होइत अछि से अही बाधमे।
बड़का कोला, धूरपर, भोरहा आ पुर्णाहा बाधक अतिरिक्त आइ काल्हि किछु गोटे छहरक ढलानपर सेहो खेती-बारी शुरु कऽ देने छथि, सीढ़ी बना कऽ खेती केनिहारक संख्या भूगोलक पोथीमे भने पहाड़पर मात्र देखौने होथि। महीसक मरलापर कन्नारोहटक स्वर आ जादूटोना, ककरो दरबज्जापर पूजल फूल रातिमे फेकब। आब लोको मुदा बूझि गेल अछि जे ई कोनो छौड़ाक किरदानी अछि।
कृषि-मत्स्य-पशुपालन आधारित महिसबार ब्राह्मण बहुल एहि गामक चारूकात पढ़ल लिखल (मुदा एकटा चोरक टोल सेहो अछि ओतए), ततेक नहि पढ़ल लिखल आ मुहदुब्बर गाम सभ अछि। पड़ोसक चोर सभक हिम्मत नहि छन्हि जे एहि गाममे कोनो जातिक घरमे चोरि कऽ लेथि। एहि गाममे जे बियाह भऽ गेल तँ सभटा फसादी जमीनक निपटार भऽ जाइत अछि, लोक समंगर भऽ जाइत अछि। एतएसँ हसेरी दूर-दूर धरि जाइत अछि। कुटुमक जमीनक झगड़ाक निपटारासँ लऽ कऽ वोट लुटबा धरि हसेरी बहराइत अछि।  जमीन एहि गाममे पचीस हजारक कट्ठा अछि, वैह जमीन पड़ोसक गाममे दस हजार रुपैये कट्ठा। उँचगर जमीन गाममे सस्त कारण बर्खाक पानिसँ पटौनी नहि भऽ सकैए उत्थर जमीनक। मुदा बान्ह बनलाक बाद बनराहा गाम सभक जमीन सभ सेहो महग भऽ गेल अछि। पहिने घटक अबैत रहए तँ एहि गामक लड़कापर जे दस कट्ठा आ बनराहा गमक लड़कापर एक बीघा हिस्सा देखै छल तैयो अही गाममे कुटमैती करैत छल। कारण बनराहा गाममे दसो बीघा खेत हिस्सा रहने गुजर कठिन छलै। मुदा आब ओकर सभक भाग्य खुजि गेल छै। जखन बाढ़ि अबै छै तँ ओकर सभक खेतक पटौनी भऽ जाइ छै। बनराहा.. बुझलहुँ नहि, ओहि गाम सभक गाछीमे बानर सभ भरल छै आ लोको सभ बानरे सन पीअर कपीश। कपीश ! आ मास्टरी पहिने कियो करै नहि से सभटा बनराहा सभ मास्टर भऽ गेलै। आ आब मास्टरक दरमाहा देखू। सभटा बनराहा धोआ धोती पहिरि जे निकलैए तँ देहे जरि जाइ छै एहि गौँआक।
धरि दुर्गापूजा एहि गाममे नहि शुरू भेल। मुहदुबरा गाममे सेहो शुरू भऽ गेल मुदा एत्तऽ। चाहबै तँ किएक नहि होयत। रामलीला एक महिना केलहुँ हम सभ आकि नहि। धू, बान्ह लगहीसँ घिना गेल। भने नहि होइए दुर्गा पूजा। एक तँ धी बेटीकेँ लियाउन करेबाक झमेला रहत आ जे मेलपेँचसँ रहै जाइ छी सेहो पार्टी-पोलिटिक्स खतम कऽ देत।
गाम अछि महिसबार ब्राह्मणक गाम।
ब्राह्मणमे इन्द्रकान्त मिश्र, रमण किशोर झा आ अरुण झा। सुखराती दिन जे हूड़ा-हूड़ीक खेल जे एहि महिसबाड़ ब्राह्मण सभक देखब तँ पोलोक खेलमे कोनो रुचि नहि रहत। समियाक डोमसँ कीनल सुग्गरकेँ भाँग पीबि मातल महीस द्वारा हूड़ा लेब। चरबाह जे महीसक पहुलाठ पकड़ि कलाकारीसँ बैसल रहैत छथि सेहो अद्भुते। गाममे आनो जाति अछि।
दुनू बान्हक बीचमे उचका भीरपर गुअरटोली तँ अछिये। बाढ़ियो मे ओ टोल नहि डुमैत अछि। नाहसँ आबाजाही होइए। कमलाक नाह खेबाह मलाह नहि राउतजी छथि। गामक लोकसँ तकर बदलामे अन्न लैत छथि। अनगौँआसँ हँ धार पार करेबाक बदला पाइ लैत छथि।
कुञ्जड़ा टोलीमे मोहम्मद शमशूल। पीचपरक मिआँटोली बगलक गामक वोटर लिस्टमे अपन नाम अंकित करा लेने अछि। ओतहि डोमक चारिटा घर सेहो अछि। बगलक गामक वोटर लिस्टमे नाम अंकित करा लेबाक कारण कारण वैह जाहि कारणसँ गुअरटोली आब एहि गामक वोटरलिस्टमे नहि अछि। मुदा वोटरलिस्ट सँ गाम थोड़बेक बनै छै। ईहो दुनू टोल अही गामक सीमानमे अबैत अछि। डोमक काज पाबनि-तिहारमे तँ होइते अछि। पेटार बनेबासँ सूप, बीअनि सभ किछु बनेबामे डोमक काज आ पाहुन परख लेल आ बरियाती लेल जे खस्सी काटल जएत ताहि लेल मिआँटोलीक काज। खस्सीक मूड़ा दुर्गापूजाक बलिमे कमिटी लऽ लैत अछि। मिआँ जे खस्सी काटैत अछि से हलाल कऽ कऽ। गरदनि अदहा लटकले रहैत छै, मुदा बना सोना कऽ गरदनि लऽ जाइये आ खलरा सेहो। तखन महिसबार ब्राह्मणमे सँ जे हनुमानजी मन्दिरपर भजन आ अष्टजाम करैत छथि से ओही खलरासँ बनल ढोलक किनैत छथि।
फेर धनुख टोली। भगवानदत्त मंडल आ अधिकलाल मंडल-धानुक। पहिने यैह लोकनि भार उघैत रहथि मुदा पछाति दुसधटोलीक लोक सेहो भार उघए लागल छथि। खेती करब धनुकटोली आ दुसधटोलीक पुरान पेशा अछि। हँ पहिने ई सभ मात्र बोनिपर काज करैत रहथि आब बटाइपर करैत छथि। कोनो झगड़ा-झाँटी भेलापर महिसबार ब्राह्मणक चानि कारी खापड़िसँ तोड़ैत एहि दुनु टोलक महिलाकेँ अहाँ सालक कोनो एहन मास नहि अछि जाहिमे नहि देखि सकै छी। बकरी पोसब आ दुर्गापूजामे छागर बलिक लेल बेचब एहि दुनू टोलक पशुपालनमे अहाँ गानि सकै छी। एक-एकटा बरद सेहो कियो राखए लागल छथि आ पार लगा कऽ तकर उपयोग जोड़ा बरदसँ खेती करबामे करैत छथि।
तीन टा घरक रहलोपर धोबियाटोली एकटा टोल बनि गेल अछि। झंझारपुर धरिक मारवाड़ीक कपड़ा एतए साफ कएल जाइत अछि। महिसबार ब्राह्मण सभ जे बरियातीमे बेलबटम झाड़ि कऽ सीटि-साटिकऽ निकलैत छथि से कोनो अपन कपड़ा पहिरि कऽ। वैह मँगनिया कपड़ा, महगौआ मारवाड़ी सभक। मारवाड़ी सभक ई कपड़ा रजक भाइ दू दिन लेल भाड़ापर हिनका सभकेँ दैत छथिन्ह। कोरैल, बुधन आ डोमी साफी, धोबि। डोमी साफी आब डोमी दास छथि, कारण कबीरपंथी जोतै छथि।
नौआटोली सेहो तीन घरक। जयराम ठाकुर, लक्ष्मी ठाकुर आ माले ठाकुर, हजाम। बड़ बजन्ता सभ। कमाइलक लिस्ट लऽ कऽ तगेदा करैत छथि। दुर्गापूजामे जे बाहरी लोक अबैत छथि से कमाइल बिना देने घुरि नहि पबैत छथि। पहिने हप्तामे एक बेर दलाने-दलाने केश कटबा लऽ जाइत रहथि मुदा आब जिनका केश कटेबाक छन्हि से आबथु हमर दुअरा। हँ बर-बरियाती जएबाक होएत तँ से सालमे अकाध बेर टोल सभक दलानपर चलि जेताह। मुदा सेहो एके ठाम। जिनका कटेबाक हेतन्हि पंक्तिबद्ध भऽ बैसथु। ई नहि जे क्यो अखन आबि रहल छी तँ क्यो तखन आबि रहल छी। आब सभ घरसँ एक-एक गोटे झंझारपुरमे सेहो सैलून खोलि लेने छथि। सैलून कोन एकटा प्लास्टिक पटरी कातमे ठाढ़ कऽ देने जाइ छै? नहरनीक प्रयोग तँ बन्ने भऽ गेल अछि। नह अपना-अपनीकऽ काटै जाऊ। छुतकामे बौआसीनक आँगुर कनियाँ आबि कऽ काटि देत, बस। आ पिजेलहा अस्तूरासँ दाढ़ी काटब। खून खसि रहल अछि से कोनो हम छह मारि देने छी। फोँसरी रहए। नञि बाबू, टोपाजबला अस्तूरा झंझारपुरक सैलून लेल छै।
फेर एकटा आर टोल अछि। चर्मकार, मुखदेव राम आ कपिलदेव राम । पहिने गामसँ बाहर रहए, बसबिट्टीक बाद। मुदा आब तँ सभ बाँस काटि कऽ खतम कऽ देने अछि आ लोकक बसोबास बढ़ैत-बढ़ैत एहि चर्मकारक टोल धरि आबि गेल अछि घरहट आ ईँटा पजेबा सभ अगल-बगलमे खसिते रहैत अछि। ढोलहो देबासँ लऽ कऽ धोल-पिपही बजेबा धरिमे हिनकर सभक सहयोग अपेक्षित। माल मरलाक बाद जाधरि ई सभ उठाकऽ नहि लऽ जाइत छथि लोकक घरमे छुतका लागले रहैत अछि।
जोगिन्दर ठाकुर गढ़ नारिकेल गामक कमारसारिक बड़ही कमारमे सभसँ प्रतिष्ठित परिवार। माइनजन मुदा जखन अबै छथि तखन लगैए जे जोगिन्दर बाबूक सरस्वती मन्द पड़ि जाइ छन्हि आ नीक आ अनर्गल दुनू गपपर खाली हँ निकलै छन्हि। जोगिन्दरकेँ तीनटा सन्तान- बिहारी, अर्जुन आ शिवनाराएण। काठक व्यावसायमे लागल छथि सभ गोटे मुदा बिहारी संगमे लोहाक काज सेहो करि छथि आ अर्जुन साइकिल मिस्त्री सेहो बनि गेल छथि आ रिक्शा साइकिलक छोट-मोट भङठीसँ लऽ कऽ पेन्चर साटब धरि सभ काज करै छथि। बच्चा सभक लेल क्रिकेटक ओधिक गेन्दसँ लऽ कऽ लोहाक तारकेँ नीचाँमे मोड़ि लकड़ीक पहियाकेँ गुड़काबए बला खेल आ कतेक आर खेलाक इजाद केने छथि शिवनाराएण। से लोक कहितो अछि- देखियौ, पढ़ला लिखलासँ नोकरीये टा भेटै छै से धारणा बदलू। देखियौ शिवनाराएणकेँ। की-की फुराइत रहै छै, कुकाठसँ की-की बना लैए । मुदा बिहारीक हाथक ईलम ककरोमे नै, आराकाट , सोझकटाइ , खड़ाकाट , फेँटकटाइ सभमे शिव नाराएणसँ आगाँ। शिवनाराएण आविष्कार करैए आ तकर बाद ओकर देखा-देखी वएह बौस्तु बिहारी ओकरासँ नीक बना लैए। आब गाममे कोनो बौस्तुक कॉपीराइट आविष्कारककेँ थोड़बेक भेटतैक। पथरौटी लकड़ीपर शिवनाराएणक आरी, बसुला मुरुछि जाइ छै मुदा बिहारी नै जानि कोना सम्हारि लैत अछि। टोनाह लकड़ीसँ सेहो किछु ने किछु बाना कऽ मेला ठेलामे बेचि अबैत छथि। तकथा चिरबाक लेल नम्हर आरी सोझाँमे नहि रहने छोटको आरिसँ चीरि दैत छथि। लकड़ीक कामिल भागकेँ असरासँ अलग करबामे बिहारीक जोड़ नहि।
पटवा-मोट सूतक बनल अँचरी भगवतीकेँ खोइँछ देबाक लेल जगदीश माइलकेँ ताकल जाइत छन्हि, पटमीनी बड्ड काजुल।
भोला पंडित कुम्हार, माटिक कोहा सभसँ लऽ कऽ बच्चा सभक लेल चिड़ै चुनमुनी सभ धरि बनेबाक इन्तजाम छन्हि। मटिकममे कोनो जोड़ नहि।
सत्यनारायण यादव, राउतजी आ गुआरसँ आब यादव। दुग्धक व्यापारसँ खेतीबारी आ गामक सड़कक माँटि भराई, सभ काज हाथमे छन्हि।
बासू चौपाल, खतबे, भार उघैत रहथि, माँछ सेहो उघै छथि आ बेचैयो लागल छथि।
चलित्तर साहु आ लड्डूलाल साहु हलुआइ, दुर्गापूजामे दोकान लगबै छथि। काज उद्यममे सब्जी-तरकारी बनेबाक ठीका-पट्टा सेहो लेमए लागल छथि।
शिवनारायण महतो, सूरी।
लछमी दास, ततमा।
लाल कुमार राय, कुर्मी।
भोला पासवान आ मुकेश पासवान- दुसाध।
सत्यनारायण कामत; किओट, दरभंगा महाराजक कामतपर रहैत छलाह।
रामदेव भंडारी। किओटक प्रकार भंडारी जे दरभंगा महाराजक भनसाघर सम्हारैत छलाह।
कपिलेश्वर राउत आ रामावतार राउत, बरइ पानक खानदानी पेशा।
डोममे बौधा मल्लिक। कोइर, दुखन महतो। भुमिहार, राधामोहन राय। सोनार, अशोक ठाकुर।
तेली, रामचन्द्र साव, बौकू साव आ कारी साव।
मलाह जीबछ मुखिया। डकही पोखरिमे सालमे एक बेर मछहरि-पन्द्रह दिनसँ मास दिन धरि मलाह एहिमे महाजाल खसबैत छथि। मलाहक टोल जुमि अबैए।
पोखरिक कातमे मास दिन लेल मलाहक गाम बसि जाइत अछि। पहिने तँ मास भरिसँ ऊपर ई सालाना मछहरि चलैत रहए मुदा आब घीच तीर कऽ बीस दिन। फेर मलाहक सरदार घोषणा करैत छथि- जे आब माँछ शेष भऽ गेल। आब जे मारब तँ महाजालमे तँ एको टा बड़का माँछ नहि आओत। भौरी जालसँ मारब तँ सभटा छोटका माँछ मरि जएत आ अगिला साल तखन जीरा देमए पड़त। ओहि पन्द्रह-बीस दिनमे गाममे उत्सवक वातावरण रहैत अछि। अही बहन्ने पोखरिक साफ-सफाई सेहो भऽ जाइत अछि। भोरे चारि बजे सँ दुपहरिया धरि माँछ मारल जाइत अछि । आ फेर बेरू पहर धरि सभ टोलक लोककेँ-दछिनबाइ टोलकेँ छोड़ि कऽ- अपन-अपन टोलक हिस्सा दऽ देल जाइत छै। सभ अपन-अपन हिस्सा लऽ गामपर अबैत छथि। ओतए टोलक सभ परिवार अपन-अपन हिस्सा बाँटि लैत छथि। टोलक माँछक कतेक कूड़ी लागत, एहि विषयपर कहियो काल विवाद सेहो भऽ जाइत अछि। जिबैत भने मसोमात काकीसँ टोका-बज्जी नहि होइन्हि। मरबा काल बेटीकेँ हिस्सामे सँ किछु देबाक मसोमातक इच्छाकेँ कंठ मचोड़ि देने होथि। आ बेचारी मसोमातक मुइल शरीरक औँठा स्टाम्प पेपरपर लगबेने होथि। हुनकर स्मरण आन काल भने नहि अबैत होइन्हि मुदा डकही पोखरिक हिस्सा लेबा काल सभकेँ अपन-अपन मसोमात काकी मोन पड़िये जाइत छन्हि। एहिपर विरोध व्यक्त सेहो होइत अछि आ पहलमान जिनका सभ प्रेमसँ खलिफ्फा सेहो कहैत छन्हि, केँ छोड़ि किनको एहि प्रकारक हिस्सा नहि भेटैत छन्हि- भने खलिफ्फाक अँगनाक ओ मसोमात बीस बर्ख पहिनहिये मरि गेल होथि। डकही पोखरिक एकटा आर विशेषता अछि। एहिमे माँछ, काछु सभ स्वयम बढ़ैत अछि। पोखरिक कातमे मलकोका सभ अनेरुआ, मारते रास लीढ़ केचुलीलीक प्रकार। कातमे भेंट-कन्द महिसबार बच्चा सभक भोजन।
मुसहर बिचकुन सदाय। डकही पोखरिक सटल गड़खै सभ, थलथल करैत दलदली भूमि सेहो। ओहिमे बिसाँढ़ कोरि-कोरि कऽ मुसहर सभ खाइत छथि। १९६७ ई.क अकालमे जखन सभटा पोखरि, गड़खै सुखा गेल ई डकही पोखरि मुदा नहि सुखाएल। प्रधानमंत्री आएल रहथि तँ हुनका देखेने रहन्हि सभ जे कोना एतएसँ बिसाँढ़ कोड़ि कऽ मुसहर सभ खाइत छथि।
गढ़ नारिकेल गामक एहि सभटा जातिक ई मुँहपुरुख सभ।



दोसर कल्लोल
किशनगढ़मे बसि गेल गढ़ नारिकेल
किशनगढ़ गाम। दिल्लीक पौश एरिया वसन्तकुँजक बगलमे। पाइबला सभ सेक्टरमे रहै छथि आ गरीब सभ किशनगढ़ आ मसूदपुरमे। सेक्टरमे ओतुक्का लोक सभ कम्युनिटी हॉलमे खैराती हॉस्पीटल खोलने छथि। सेक्टरक पता देलापर फीस देमए पड़ैत अछि। गामक पतापर फीस तँ नहिए देमए पड़ै छै, दबाइयो मँगनीमे भेटै छै।
बगलमे मॉल अछि। दू तरहक। एकटा सामान्य लोक लेल। आ दोसर डी.एल.एफ.क इम्पोरिया, वसन्तकुँजक नेल्सन मंडेला मार्गपर। असमानताक आ अपार्थेइडक विरुद्ध संघर्ष करएबला नेल्सन मंडेला। मुदा हुनकर नामपर बनल एहि मार्गपर बनल एहि इम्पोरिया मॉलमे लाख रुपैयासँ कममे कोनो समान भेटब असंभव। सभसँ सस्त अछि लाख रुपैयाक लेडीज पर्स। बंगलोरक कस्तूरबा गाँधी मार्गपर शराबक फैक्ट्री आ महात्मा गाँधी मार्गपर बीयर बार सभ। गाइड लोक सभकेँ कहैत अछि- वर शराब बनबैत अछि आ कनिया बेचैत अछि कारण महात्मा गाँधी मर्ग स्थित ओहि बीयर बार सभमे शराबक बिक्री होइत अछि। तेहने सन कथा अछि नेल्सन मंडेला रोडक। मुदा समाजवाद अछि एतए। से पाइ अछि तँ सेक्टरमे रहू आ नहि अछि तँ गाममे, दुनु सटले-सटल। जमीनक दलाल एतुक्का सभसँ पाइबला लोक अछि। अपन बिजनेस कार्ड छपबैए ई सभ- रिअल एस्टेट एजेन्ट कऽ कऽ। बगलमे मेहरौली गाम सेहो अछि। माछ मुदा किशनगढ़ आ मेहरौली दुनू ठाम भेटत। दिल्लीक लोक माँछ कम खाइत अछि। अपने दिसुका लोक एकरा सभकेँ माँछ खेनाइ सिखेने छै।
आ अही बसन्तकुंज, मेहरौली आ किशनगढ़मे गढ़ नारिकेलक बहुत रास परिवार आबि गेल अछि।
ब्राह्मणमे इन्द्रकान्त मिश्रक बेटा उपेन्द्र बसन्तकुञ्जमे रहै छथि।
कुञ्जड़ा टोलीक मोहम्मद शमशूलक बेटा इकबाल मेहरौलीमे अछि।
धनुख टोलीक भगवानदत्त मंडलक बेटा राजा किशनगढ़मे अछि। धानुक अधिकलाल मंडलक बेटा सुखीलाल डॉक्टर छथिन्ह, रहै छथि बसन्तकुञ्जमे, काज करै छथि दू-तीनटा हॉस्पीटलमे, जेना बत्रा हॉस्पीटल, फोर्टिस, रॉकलैण्ड आ अपोलोमे। मुदा सप्ताहमे एक दिन सोसाइटीक खैराती हॉस्पीटलमे मुफ्त इलाज करै छथि।

धोबियाटोलीक डोमी साफीक बेटा ललन बसन्तकुँजमे ठेलापर कपड़ामे लोहा दैत अछि। ओकर कनियाँ बुधनी सेहो घरे-घर कपड़ा बटोरि आनैत अछि आ तकरा लोहा कऽ घरे घर दऽ अबैत अछि। ई सभ मुदा रहै जाइए बसन्तकुँजेमे। ककरो दूटा गैराज किरायापर लऽ लेने अछि, एकटा मे काज करै जाइए आ दोसरामे रहै जाइए।
नौआटोलीक  जयराम ठाकुरक माझिल बेटा बसन्त बसन्तकुञ्जक एकटा सेक्टरक सोझाँ गाछक तरमे सैलून खोलि लेने अछि। एकटा कुर्सी लगा देने अछि आ एकटा अएना लटका देने अछि। सोझाँक बजारमे केश कटाइ पचास टका लेत तँ मुक्ताकाशक ई सैलून पन्द्रह टाकामे केश काटि देत। रहैए मुदा किशनगढ़मे। बीचमे पुलिस तंग केने रहै तँ तीन मास गामसँ घुरि आएल छल। आब मुदा पुलिससँ सेटिंग कऽ लेने अछि।
चर्मकार मुखदेव रामक बेटा उमेश सेहो ओही मुक्ताकाश सैलूनक बगलमे अपन असला-खसला खसा लेने अछि, रहैए मुदा किशनगढ़मे। । चप्पल, जुत्ताक मरोम्मतिक अलाबे तालाक डुप्लीकेट चाभी बनेबाक हुनर सेहो सीखि लेने अछि। कुञ्जी अछि तँ ओकर डुप्लीकेट पन्द्रह टाकामे। कुञ्जी हेरा गेल अछि तँ तकर डुप्लीकेट सए टाकामे। आ जे घर लऽ जएबन्हि तँ तकर फीस दू सए टाका अतिरिक्त।
बड़ही कमार टोलक जोगिन्दर ठाकुरक बेटा नमोनारायण अंसल बिल्डर्समे नोकरी करै छथि। किशनगढ़मे मकान कीनि लेने छथि। मुदा ओतुक्का वातावरण देखि दुखी रहै छथि कारण ओतुक्का वातावरण गामोसँ बत्तर छै। जोगारमे छथि जे कतहु अपार्टमेन्टमे जगह भेटि जाए। आ से कनेक दुरगरो जेना गाजियाबाद धरि जएबाक लेल तैयार छथि।
पटवाटोलीक जगदीश माइलक बेटा महेश गामेमे रहै छन्हि।  
भोला पंडित कुम्हारक बेटा नवीन मेहरौलीमे जैन मन्दिरक सोझाँ अपन कलाकृतिक प्रदर्शन केने छथि। बगले रहै छथि, मेहरौलीक दूधवाली गलीमे।
सत्यनारायण यादवक बेटा बिपिन बसन्तकुञ्जक फ्लैटमे रहै छथि। रेलबीक ठिकेदारीमे खूब कमेने छथि।
बासू चौपालक बेटा सुरेन्द्र गामेमे छथि।
चलित्तर साहक बेटा सुरेश कुतुब मीनारक सोझाँ चलित हलुआइ दोकान खोलने छथि आ मेहरौलीमे रहै छथि।
सूरी शिवनारायण महतोक बेटा प्रशान्त डी.एल.फ. इम्पोरियामे काज करै छथि आ अपन दोकान खोलबाक मन्सूबा रखने छथि। रहै छथि किशनगढ़मे।
लछमी दास, ततमाक बेटा रामप्रवेश गामेमे छन्हि।
कुर्मी लाल कुमार रायक बेटा सुमन अफसर छथिन्ह आ बसन्तकुञ्जक क्वार्टरमे रहै छथि।
मुकेश पासवानक बेटी मालती आ जमाए मथुरानन्द बसन्तकुञ्ज लग फार्म हाउस लेने छथि आ ओतहि रहै जाइ छथि। मथुरानन्द मैथिलीक नीक लेखक छथि आ बसन्तकुञ्जक डी.पी.एस.स्कूलक प्रिंसिपल छथि। मालती बैंक अधिकारी छथि।
सत्यनारायण कामतक बेटा मदन किशनगढ़मे रहै छथि आ बसन्तकुञ्जक बिगबजार मॉलमे सेक्युरिटी गार्ड छथि।
रामदेव भंडारीक बेटा श्यामानन्द बिगबजार मॉलक के.एफ.सी.क चिकन एक्सपर्ट छथि। रहै छथि किशनगढ़मे ।
बरइ कपिलेश्वर राउतक बेटा पालन पानक गुमटी खोलि लेने छथि, मुक्ताकाश सैलूनक बगलमे। बिहारक लोकक पान खेबाक आवश्यकताक पूर्तिक लेल। रहै छथि किशनगढ़मे ।
डोमटोलीक बौधा मल्लिकक बेटा श्रीमन्त सेक्टरक मेन्टेनेन्सक ठेका लेने छथि। हुनका लग दू सए गोटे छन्हि जे सभ क्वार्टरक कूड़ा सभ दिन भोरमे उठेबाक संग रोड आ पार्किगक भोरे-भोर सफाइ करै छथि। एहिमेसँ किछु गोटे, विशेष कऽ नेपालक, भोरे-भोर लोकक कारक शीसा महिनबारी दू सए टाका पोछै छथि आ अखबारक हॉकर बनल छथि। रहै छथि किशनगढ़मे मुदा अपन मकानमे।
कोइर दुखन महतोक बेटा लखन ठेलापर तरकारी बेचै छथि आ रहै छथि किशनगढ़मे।
भुमिहार, राधामोहन रायक बेटा बसन्तकुञ्जमे रहै छथि। कन्सल्टेन्ट छथि, डोनेशन बला मेडिकल-इन्जीनियरिंग कॉलेज सभक।
सोनार, अशोक ठाकुरक बेटा महानन्द सोनाचानीक दोकानमे कारीगर छथि आ रहै छथि किशनगढ़मे ।
तेली, रामचन्द्र सावक बेटा मोहन फैक्ट्रीमे काज करै छथि, गुड़गाँवमे आ रहै छथि किशनगढ़मे ।
मलाह जीबछ मुखियाक बेटा रवीन्द्र किशनगढ़मे माँछ बेचै छथि आ रहितो छथि किशनगढ़मे ।
मुसहर बिचकुन सदायक बेटा रघुवीर ड्राइवरी सीखि लेने अछि। बसन्तकुञ्जक एकटा व्यवसायीक ओहिठाम ड्राइवरी करैए आ रहैत अछि किशनगढ़मे ।
बसन्तकुंज, मेहरौली आ किशनगढ़ आब गढ़ नारिकेल गामक एकटा छोट-छीन रूप बुझना जाइत अछि।

तेसर कल्लोल.....(आगाँ)

 
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बिपिन कुमार झा,
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई

ग्रन्थ समीक्षा- 'महाराज महेश ठाकुर ओ कंकाली भगवती'
{ग्रन्थसमीक्षक Bipin Jha, CISTS, IIT, Bombay में संगणकीय भाषाविज्ञन में शोध कय रहल छथि| इलाहावाद वि.वि. ओ जे.एन.यू. मे अध्यवसायरत रहैत मैथिली आ संस्कृति संवर्द्धन हेतु निरन्तर प्रयत्नशील रहल छथि| कोनो टिप्पणी kumarvipin.jha@gmail.com पर सादर आमन्त्रित अछि|}
ग्रन्थक परिचय एवं विभाग-
शीर्षक- 'महाराज महेश ठाकुर ओ कंकाली भगवती'
लेखक- डा० शान्ति सिंह ठाकुर
प्रकाशक- कंकाली संघ राजग्राम
प्रकाशन वर्ष- २०१०
विभाग-
आशीर्वचन- श्री जगदीश मिश्र
सम्मति- डा० किशोरनाथ झा
पोथीक प्रसंग- लेखक स्वयं
. महाराज महेश ठाकुर ो हुनक गाम
. .. महेश ठाकुर क पारिवारिक ो शैक्षिक परुष्टभूमि
. महेश ठाकुरक जीवन सं सम्बद्ध तथ्य
. राज्यप्राप्तिक ेवं कंकाली भगवतीक ाविर्भाव
. कंकाली माहात्म्य
. राजग्रामस्थित कंकाली परिसर
परिशिष्ट
दरिभंगास्थ महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह स्मारक महाविद्यालयीय मैथिली समाराधनतत्पर खण्डवलाकुलसमुद्भूत डा० श्री शान्तिनाथ सिंह ठाकुर द्वारा निबद्धग्रन्थ अछि -'महाराज महेश्वर सिंह कंकालीभगवती|
ग्रन्थ वर्ष २०१० में कंकाली संघ राजग्राम द्वारा प्रकाशित एकटा ऐतिहासिक ग्रन्थ अछि जे स्वरूपतः & 'भौर' ग्राम मैथिल राजवंश केर गौरवमयी आभाक परिचय दैत अछि प्रच्छन्नरूप ग्रन्थ आस्था तर्क केर मंजुल प्रयोगक दर्शन करवैत प्रातःकालीन भगवान भाष्कर समान मिथिलाराजवंश केर सांस्कृति स्वर्णिम युगक केर दर्शन करवैत नीतिशतक केर पद्य 'कालक्रमेण जगतः परिवर्तमाना...'' केरितार्थ करवैत प्रत्यक्षानुलम्बी, इतरप्रमाणविस्मरुत मूल्यविहीन आधुनिक समाज सँऽ अस्ताचलरूपिणी संस्करुति कें नवजीवन प्रदान करवाक हेतु अनुनय करैत बुझना जाइत अछि जे चीत्कार कय ई कहि रहल अछि जे हे मनुज स्मरण करू ओहि कीर्तिस्तम्भ के जेकर समक्ष भारतवर्षक राष्ट्राधीश सेहो नतमस्तक रहल अछि, आगू बढाउ ओहि गरिमा के मिथिला के इतिहास लिखत | ई त ध्रुव सत्य अछि जे एक दिन सभकिछु काल केर गाल मे विलीन भय जायत | एहि भौतिक जगत मे कोनो वस्तु संस्था अथवा कोनो समाज शाश्वत नहिं कहल जा सकैत अछि। ओ डायनासोर हो अथवा हडप्पा, मेसोपोटामिया अथवा कोनो लुप्तप्राय सम्प्रदाय सभ एक न एक दिन कालक गाल मे विलीन भय जायत ई ध्रुव सत्य अछि।
एहि प्रसंग मे यक्ष-युधिष्ठिर संवाद समीचीन प्रतीत होइत अछि-
यक्ष-युधिष्ठिर सम्वाद मे कहल गेल अछि जे- प्रतिदिन जीव मृत्यु कॆं प्राप्त करैत अछि मुदा ओतहि अन्य लोक ई बुझितो एतहि रहबाक इच्छा करैत अछि। एहि सँऽ आश्चर्य की भय सकैत छैक?
समीक्षा केर संकल्प, उद्देश्य आ विषयवस्तु-
संकल्प-
सतत अध्यवसायरत रहबाक क्रम में यदि कोनो नीक ग्रन्थ अनायास सुलभ भय जाय त& आनन्द स्वाभाविक छैक तहू में एहेन ग्रन्थ जे आस्था केर समक्ष तर्क के अथवा तर्कक समक्ष आस्था केर अवहेलना नहिं करैत हो| एहि ग्रन्थक प्रसंगशः उद्धरण, समुचित सन्दर्भ आदि एकर विश्वसनीयता केर प्रमाण अछि| ई सभ किछु कारण छल जे एहि ग्रन्थ दिस विशेष रुचि भेल|
उद्देश्य-
काव्यप्रकाश में कहल गेल अछि प्रयोजनमनुद्दिश्य मन्दो&पि न प्रवर्तते अस्तु समीक्षा केर उद्देश्य लिखब उचित बुझनाजाइत अछि- एकटा अभिनव ओ विश्वसनीय स्रोत केर जानकारी अधेyता केर समक्ष प्रस्तुत करब| आ संगहि अपन किछु मूल भूत प्रश्न केर उत्तर प्राप्त करबाक प्रयास[1]|
विषयवस्तु-
एहि समीक्षा में जेकर अंगीकार कयल जा रहल अछि ओ विषय वस्तु अछि-
.ग्रन्थक विभागश: संक्षिप्त परिचय
. ग्रन्थक वैशिष्ट्य
.१ ास्थागत -
.२ तर्कगत (शोध) -
. ग्रन्थक न्यूनता
.१ ास्थागत -
.२ तर्कगत (शोध) -
. ग्रन्थक ुपादेयता व्यावहारिक रूप में
अन्य विविध पक्ष
. दोषपरिहाराथ सम्भव ुपाय ा ौकित्यविमर्श|

शुभमस्तु

 

[1] श्रोत्रिय समाजक आरम्भ के कयलथि?  ई समाज कियाक अस्तित्व मे आयल? एकर संस्कृति की अछि? एकर विधि व्यवहार आदि शास्त्रसम्मत अछि अथवा मात्र परम्परा केर निर्वहण अभिप्राय रहि गेल? यदि शास्त्रसम्मत अछि तऽ कोन ग्रन्थ मे एकर चर्चा अछि? ओहि ग्रन्थ केर प्रामाणिकता निर्विवाद अछि अथवा नहिं? जाति, कुल, पाँजि, मूल, गोत्र की थीक? एकर की औचित्य छल? यदि औचित्य छल तऽ आब एकर अनौचित्य कोना निर्धारित भेल जा रहल अछि? श्रोत्रिय समाज सँ सन्दर्भित उक्त चर्चित किछु एहेन मूलभूत प्रश्न अछि जे आवश्यक अछि एहि समाजक Documentation हेतु।सारस्वत-निकेतनम्जे कि संस्कृत आ अपन संस्कृतिक अभ्युत्थान हेतु सतत् समर्पित अछि, अपन श्रोत्रिय समाज सन्दर्भित मूल स्रोतक आ एकर अक्षुण्ण संस्कृति केर विविध पक्षक Documentation  करय जा रहल अछि। एहि कार्य मे अपनें सभ सँऽ विशेषकर एहि समाजक इतिहासक ज्ञाता बुजुर्ग आ सक्रिय युवा कें सहयोगक सर्वथा अपेक्षा अछि। यदि उक्त सन्दर्भ मे कोनो जानकारी उपलब्ध करा (kumarvipin.jha@gmail.com) सकी तऽ एहि विशाल यज्ञ मे एकटा आहूति सदृश होयत।

           

 
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सन्तोष कुमार मिश्र
एकटा पत्र
ज्योतीकें चिट्ठी
काठमाण्डू
२१२०११
प्रिय ज्योती,
हम खुशीसँ आनन्दमय जीवन वितारहल छी । हँ, ई सच्च आ अवश्य समाजिक रुपे ठिक बात नइ छैक जे अहाँ हमरा लग नइ छी मुदा ई सुनि अहाँ आश्र्यचकित भऽजाएब जे हमर रक्तचापके अवस्था ठिक भऽगेल अछि । डाक्टरबाबु कहै छलाह जे अहिना परहेज कऽकऽ जँ रहब त बेशी दिन जीयब ।
अहाँके बुझल अछि, जे आइकाल्हि हम अफिस समयेपर पहुँच जाइछी । कोनो प्रकारक तनाब सेहो नहि रहैय । हाकिम कें त कि छैक, सहि समय पर सहि काज भऽजाय, बस, आओर कि ? आ हम अखन अहिमे सक्षम सेहो छी । काल्हि हाकिमसाहेब कहैत छलाह जे हमरामे एकटा परिवर्तण महसुश भऽरहल छैन्हि । हमर बनाओल रिर्पोटमे गल्ती त रैहते नइ छैक ।
आब ककरो पर कोनो प्रकारक आश नहि रहवाक कारण लगभग सबहे काज सहि समयपर ठिकठिक तरिकासँ हम अपने कऽ लैछी । अपना जते पाइ चाहि ताहिस बेशी कमालैछी । ते किछु बचत सेहो भऽजाइय आ घर एकटा होटल भऽगेल अछि तकर अनुभूति सेहो नइ होइय । घरमे अपन बाहेक आन कमे रहैय ते उधारक आश नहि रहैय । कनिञा, स्त्री आ घरवाली शब्दक अर्थ जे नहि बुझैत हुवे ओ कहियो नहि ओकर लायक भऽसकैय ।
वाथरुमसँ लऽकऽ भन्साघर धरि हम अपने करैछी मुदा सबहेकाज समय पर भऽजाइछैक । आ, अखन दिन २८ घन्टाक सेहो नहि होइछैक । एकटा आओर आश्र्यक बात सुनबैछी अहाँके; हम कपड़ा पर आइरण सेहो बड़ निकसँ कऽलैछी । शुरुवातके दूदूटा क्रिच बनिजाइछल मुदा एखन एकदम फिट ।
डाक्टर जेहने कहैछलाह, ओहने भोजन बनालैछी । एकटा शल्लाह त अहाँके सेहो देबऽचाहब, कृप्या अहाँ सेहो तरकारीमे मिरचाइ आ नोन बेशी नहि खाउ, ई नोक्सानटा मात्र करैछ ।
हमरा साँझक समयमे पढ़के समय सेहो भेट जाइए तें हम फेरसँ कोचिङ्गमे पढ़ाबऽ सेहो लगलिए । हमर पढ़ाबऽके तरिका तऽ अहाँके बुझले अछि; कमेन्टके कोनो चान्स नहि । आ, आब आओर निक किए त एखन हमरा मेन्टल आ सेन्टिमेन्टल टर्चर नहि रहैए ।
हम खुश छि, मुदा आओर विषेश खुशीक आवश्यक्ता अछि । किछु हुए लोक कहैछ बिना घरनि घरे नहि । बिषेश कि, बुद्धिमानकें लेल इशारा काफि होइछ ।
सदैब अहाँक प्रतिक्षामे, मात्र अहाँके
सन्तोष




 
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३. पद्य









३.५.नवीन कुमार आशा- किया ने पावी तोहर टोन 


३.६.किशन कारीगर- किछु त हम करब
 डॉ. शेफालिका वर्मा
 
बीतल इतिहास
हम पलक पाँखिमे पोसि रहल छी
बीतल युगक  नीरव  इतिहास  !
नयन  पथसँ  साँसमे  मिली 
सिखी  चुनैत  जलजात  रहल 
'आह'  सँ   निकलि  'चाह' मे खिली
टूटल    आस  पारिजात   रहल  !

चंचल   सपना  पुलक  भरल
   स्पन्दन   चिर व्यथाक
सुधिसँ  सुरभित  स्नेह घुलल
आखर  तितल हमर  कथाक  !

 नयनमे अनगिन   चुम्बन
 सजग स्मित रहल उन्मद
 सांसमे  सुरभि  वेदनाक क्षण
 चातकी सन  तकैत प्रिये-पद!!

आइ तँ सभ साँसमे भरल
मरण  त्योहारक निस्सीम जय
मौनमे प्राणक  तार  टूटल
निसाँस  भेल   पिआसमे  लय!

गहन  तम  - सिन्धुमे उमड़ल
अधरपर अंगारक   हास
बीतल  युगक  नीरव  इतिहास !!.......


 
पाथर

हम देखने छलौं अहाँ केँ
प्रज्ञा सँ  आलोकित
स्नेह  सँ  परिपूरित
आत्ममुग्ध
स्वयममे हेरायल
अपनामे डूबल
अहाँक ओ निर्लिप्त दृष्टि
जेना कोनो
सुरुज  उगि रहल हो
जेना
इजोरिया बरकि बरकि
चुबि रहल हो !

कतेको कमल दल  विहुँसि गेल
नील आकासक स्वप्न देखैत
हेरायल  भोतिआयल ...
हम डूबि  गेल छलौं
अपनाकेँ निस्सहाय  पाबि
रहल छलौं ....

ओहि  इजोरियाक  जलधारसँ
उबरबा  लेल 
वेगसँ बहैत प्रवाहसँ अपनाकेँ
समेटि नहि पाबि रहल छलौं
हम प्रवाहमे ,
किनार दूर भागल जा रहल छल
एकटा मृत्युक बाटपर ठाढ़ व्यक्तिक
अंतिम  इच्छा 
हमर  जीवन भऽ गेल छल
एकटा  बिरड़ो  उठल 
रेत आ बाउलक मध्य  नदीमे हमरा
पाथर बना देलक
आ आइ  
हम पाथर बनि गेल छी............

 
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