भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल अखनो ५ जुलाई २००४ क पोस्ट'भालसरिक गाछ'- केर रूपमे इंटरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि जे विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,आ http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि।
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Friday, August 01, 2008
'विदेह' १५ जुलाई २००८ ( वर्ष १ मास ७ अंक १४ )श्री उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ नो एंट्री : मा प्रविश
श्री उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ जन्म-१९५१ ई. कलकत्तामे। १९६६ मे १५ वर्षक उम्रमे पहिल काव्य संग्रह ‘कवयो वदन्ति’। १९७१ ‘अमृतस्य पुत्राः’ (कविता संकलन) आऽ ‘नायकक नाम जीवन’ (नाटक)| १९७४ मे ‘एक छल राजा’/ ’नाटकक लेल’ (नाटक)। १९७६-७७ ‘प्रत्यावर्त्तन’/ ’रामलीला’(नाटक)। १९७८मे जनक आऽ अन्य एकांकी। १९८१ ‘अनुत्तरण’(कविता-संकलन)। १९८८ ‘प्रियंवदा’ (नाटिका)। १९९७-‘रवीन्द्रनाथक बाल-साहित्य’(अनुवाद)। १९९८ ‘अनुकृति’- आधुनिक मैथिली कविताक बंगलामे अनुवाद, संगहि बंगलामे दूटा कविता संकलन। १९९९ ‘अश्रु ओ परिहास’। २००२ ‘खाम खेयाली’। २००६मे ‘मध्यमपुरुष एकवचन’(कविता संग्रह। भाषा-विज्ञानक क्षेत्रमे दसटा पोथी आऽ दू सयसँ बेशी शोध-पत्र प्रकाशित। १४ टा पी.एच.डी. आऽ २९ टा एम.फिल. शोध-कर्मक दिशा निर्देश। बड़ौदा, सूरत, दिल्ली आऽ हैदराबाद वि.वि.मे अध्यापन। संप्रति निदेशक, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर।
नो एंट्री : मा प्रविश
(चारि-अंकीय मैथिली नाटक)
नाटककार उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ निदेशक, केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर
(मैथिली साहित्यक सुप्रसिद्ध प्रयोगधर्मी नाटककार श्री नचिकेताजीक टटका नाटक, जे विगत २५ वर्षक मौन भंगक पश्चात् पाठकक सम्मुख प्रस्तुत भ’ रहल अछि।)
चारिम कल्लोलक पहिल खेप जारी....विदेहक एहि चौदहम अंक १५ जुलाई २००८ सँ।
नो एंट्री : मा प्रविश
चारिम कल्लोल पहिल खेप
चतुर्थ कल्लोल
[जेना-जेना मंच पर प्रकाश उजागर होइत अछि त’ देखल जायत जे यमराज चित्रगुप्तक रजिष्टर केर चेकिंग क’ रहल छथि। आ बाँकी सब गोटे सशंक चित्र लए ठाढ़ छथि। किछुये देर मे यमराजक सबटा ‘चेकिंग’ भ’ जाइत छनि। ओ रजिष्टर पर सँ मुड़ी उठौने अपन चश्मा केँ खोलैत नंदी केँ किछु इशारा करैत छथि।]
नंदी : (सीना तानि कए मलेट्रीक कप्तान जकाँ उच्च स्वरमे) सब क्यो सुनै....
भृंगी : (आर जोर सँ) सुनू....सुनू...सनू- उ-उ-उ !
नंदी : (आदेश करैत छथि) “आगे देखेगा....! आगे देख !”
(कहैत देरी सब क्यो अगुआ कए सचेत भेने सामने देखै लागैत छथि ; मात्र यमराज आ चित्रगुप्त विश्रान्तिक मुद्रा मे छथि।)
भृंगी : (जे एक-दू गोटे भूल क’ रहल छथि हुनका सम्हारैत छथि---) ‘हे यू ! स्टैंड इरेक्ट... स्टैंड इन आ रो !’ (जे कनेको टेढ़-घोंच जकाँ ठाढ़ो छलाह, से सोझ भ’ जाइत छथि, सचेत सेहो आ लगैछ जेना एकटा दर्शक दिसि मुँह कैने ठाढ़ पंक्ति बना नेने होथि।)
नंदी : (पुनः सेनाकेँ आदेश देबाक स्वर मे) सा-व-धा-न! (सब क्यो ‘सावधान’ अर्थात् ‘अटेनशन’ केर भंगिमा मे ठाढ़ भ’ जाइत छथि।) वि-श्रा-म! (सब क्यो ‘विश्राम’ क अवस्थामे आबि जाइत छथि।)
भृंगी : (दहिना दिसि ‘मार्च’ क’ कए चलबाक आदेश दैत) दाहिने मुड़ेगा--दाहिने मोड़ ! (सभ क्यो तत्क्षण दहिना दिसि घुरि जाइत छथि।)
नंदी : (आदेश करैत) आगे बढ़ेगा ! आ-गे-ए-ए बढ ! (सब क्यो बढ़ि जाइत छथि।) एक-दो-एक-दो-एक-दो-एक ! एक ! एक !
[सब गोटे मार्च करैत मंचक दहिना दिसि होइत यमराज-चित्रगुप्त केँ पार करैत संपूर्ण मंचक आगाँ सँ पाछाँ होइत घुरि बाम दिसि होइत पुनः जे जतय छल तत्तहि आबि जाइत छथि। तखनहि भृंगीक स्वर सुनल जाइछ ‘हॉल्ट’ त’ सब थम्हि जाइत छथि.... नहि त’ नंदी एक - दो चलिये रहल छल।]
चित्रगुप्त : (सभक ‘मार्च’ समाप्त भ’ गेलाक बाद) उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति सँ हम कहै चाहैत छियनि जे एत’ उपस्थित सब क्यो एकटा मूल धारणाक शिकार भेल छथि—सभक मोन मे एकटा भ्रम छनि जे पृथ्वी पर सँ एतय एक बेरि आबि गेलाक मतलबे इयैह जे आब ओ स्वर्गक द्वार मे आबि गेल छथि। आब मात्र प्रतीक्षा करै पड़तनि... धीरज ध’ लेताह आ तकर बादे सभकेँ भेटतनि ओ पुरस्कार जकरा लेल कतेको श्रम ,कतेको कष्ट—सबटा स्वीकार्य भ’ जाइछ।
नेताजी : (आश्चर्य होइत) तखन की ई सबटा भ्रम मात्र छल, एकटा भूल धारणा छल---जे कहियो सत्य भ’ नहि सकैत अछि ?
चित्रगुप्त : ठीक बुझलहुँ आब---ई सबटा भ्रम छल।
नंदी : सपना नहि...
भृंगी : मात्र बुझबाक दोष छल...
वामपंथी : तखन ई दरबज्जा, दरबज्जा नहि छल....किछु आन वस्तु छल....?
चित्रगुप्त : ई दरबज्जा कोनो माया- द्वार नहि थिक....आई सँ कतेको युग पहिने ई खुजतो छल, बंदो होइत छल...!
नेताजी : मुदा आब?
अनुचर 1 : आब ई नञि खुजैत अछि की ?
अनचर 2 : जँ हम सब सामने जा कए तारस्वर मे पुकारि- पुकारि कए कही—‘खुलि जो सिमसिम्’ तैयहु नहि किछु हैत!
नंदी : ई कोनो ‘अलीबाबा चालीस चोर’ क खिस्सा थिक थोड़े…
भृंगी : आ ई कोनो धन-रत्नक गुफा थिक थोड़े !
वामपंथी : त’ ई दरबज्जाक पाछाँ छइ कोन चीज ?
नेता : की छइ ओहि पार ?
अनुचर 1 : मंदाकिनी ?
अनुचर 2 : वैतरिणी ?
अभिनेता : आ कि बड़का टा किला जकर सबटा कोठरी सँ आबि रहल हो दबल स्वरेँ ककरहु क्रन्दनक आहटि...नोर बहाबैत आत्मा सब...!
चोर : आ कि एकटा नदी-किनारक विशाल शमशान - घाट,जतय जरि रहल हो हजारक हजार चिता...हक्कन कानैत आत्मीय जन...?
बाजारी : नहि त’ भ’ सकैछ एकटा बड़का बजारे छइ जतय दिन-राति जबरदस्त खरीद-बिक्री चलि रहल हो।
भिख-मंगनी : इहो त’ भ’ सकैछ जे घुरिते भेटत एकटा बड़का टा सड़क बाट काटैत एकटा आन राजपथक आ दुनूक मोड़ पर हाथ आ झोरा पसारैत ठाढ़ अछि लाखो लोग- भुखमरी, बाढ़ि , दंगा फसाद सँ उजड़ल उपटल लोग....
रद्दीवला : नञि त’ एकटा ब-ड़-की टा केर ‘डम्पिंग ग्राउंड’ जतय सबटा वस्तु व्यवहार क’ क’ कए लोग सब फेकै जाय होइक—रद्दी सँ ल’ कए जूठ-काँट, पुरनका टूटल भाँगल चीज सँ ल’ कए ताजा बिना वारिसक लहास...
प्रेमिका : कि आयातित अवांछित सद्यः जनमल कोनो शिशु...
प्रेमी : कन्या शिशु, हजारोक हजार, जकरा सबकेँ भ्रुणे केँ कोखिसँ उपारि कए फेंकल गेल हो...
वामपंथी : अथवा हजारो हजार बंद होइत कारखानाक बजैत सीटी आ लाखो परिवारक जरैत भूखल-थाकल चूल्हि-चपाटी....
नेताजी : ई त’ अहीं जानै छी जे दरबज्जाक ओहि पार की छइ... हम सब त’ मात्र अन्दाजे क’ सकै छी जे भरिसक ओम्हर हजारोक हजार अनकहल दुःखक कथा उमड़ि-घुमड़ि रहल छइ अथवा छइ एकटा विशाल आनन्दक लहर जे अपनाकेँ रोकि नेने होइक ई देखबाक लेल जे दरबज्जा देने के आओत अगिला बेरि...
चित्रगुप्त : ई सबटा एक साथ छैक ओहि पार, ठीक जेना पृथ्वी पर रचल जाय छइ स्वर्ग सँ ल’ कए नर्क - सबटा ठाम ! जे क्यो नदीक एहि पार छइ तकरा लागै छइ ने जानि सबटा खुशी भरिसक छइ ओहि पार !
नंदी : भरिसक नीक जकाँ देखने नहि हैब ओहि दरबज्जा आ देबार दिसि !
भृंगी : एखनहु देखब त’ ऊपर एकटा कोना मे लटकि रहल अछि बोर्ड—“नो एन्ट्री!”
नेताजी : (आश्चर्य होइत) आँय!
(सब क्यो घुरि कय दरबज्जा दिस दैखैत छथि)
सब क्यो : “नो एंट्री ?”
(प्रकाश अथवा स्पॉट-लाइट ओहि बोर्ड पर पड़ैत अछि)
नेताजी : ई त’ नञि छल पता ककरहु.. नहि त’...
चित्रगुप्त : नहि त?
नेताजी : (विमर्ष होइत) नहि त’....पता नहि....नहि त’ की करितहुँ....
वामपंथी : मुदा आब ? आब की हैत ?
अभिनेता : आब की करब हम सब ?
नेता : आब की हैत ?
(चित्रगुप्त किछु नहि बाजैत छथि आ नंदी-भृंगी सेहो चुप रहैत छथि । एक पल केर लेल जेना समय थम्हि गेल होइक।)
अनुचर 1 : यमराजेसँ पूछल जाइन !
अनुचर 2 : (घबड़ा कए) के पूछत गय ? अहीं जाउ ने ! (केहुँनी सँ ठेलैत छथि।)
अनुचर 1 : नञि-नञि.... हम नञि ? (पछुआ अबैत छथि।)
अनुचर 2 : तखन नेताजीए सँ कहियनि जे ओ फरिछा लेथि !
अनुचर द्वय : नेताजी ! (नेताजीकेँ घुरि कए देखैते देरी दुनू जेना इशारा क’ कए कहैत होथि पूछबा दय।
नेताजी : (विचित्र शब्द बजैत छथि- कंठ सूखि जाइत छनि) ह..ह...!
[नेताजी किछु ने बाजि पबैत छथि आ ने पुछिए सकैत छथि। मात्र यमराजक लग जा कए
ठाढ़ भ’ जाइत छथि। यमराज रजिष्टर मे एक बेरि दैखैत छथि, एक बेरि नेताजी दिस]
यमराज : बदरी विशाल मिसर !
नेताजी : (जेना कठघरामे ठाढ़ अपन स्वीकारोक्ति दैत होथि) जी !
यमराज : आयु पचपन !
नेताजी : (अस्पष्ट स्वरेँ) साढ़े तिरपन !
नंदी : असली उमरि बताउ !
भृंगी : सर्टिफिकेट-बला नञि !
नेताजी : जी पचपन !
यमराज : जन्म भाद्र मासे, कृष्ण पक्षे, त्रयोदश घटिका, षड्-त्रिशंति पल, पंचदश विपल... जन्म-राशि धनु...लग्न-वृश्चिक, रोहिणी नक्षत्र, गण-मनुष्य, योनि-सर्प, योग-शुक्ल, वर्ग मार्जार, करण- शकुनि!
[जेना-जेना यमराज बाजैत चलि जाइत छथि—प्रकाश कम होइत मंचक बामे दिसि मात्र रहैत अछि जाहि आलोक मे यमराज आ मुड़ी झुकौने नेताजी स्पष्ट लखा दैत छथि। बाँकी सभक उपर मद्धिम प्रकाश। नंदी यमराजक दंड केँ धैने हुनकर पाछाँ सीना तानि कए ठाढ़ छथि, भृंगी टूल पर पोथीक विशेष पृष्ठ पर आँगुर रखने रजिष्टरकेँ धैने छथि। चित्रगुप्त लगे मे ठाढ़ छथि, यमराजक स्वर मे धीरे-धीरे जेना प्रतिध्वनि सुनल जाइत छनि-एना लागि रहल हो।]
नेताजी : जी !
यमराज : (हुंकार दैत) अहाँ केँ दैखैत छी ‘शश योग’ छैक...(श्लोक पढ़ैत छथि अथवा पाछाँ सँ प्रतिध्वन्त स्वरेँ ‘प्रि रिकॉर्डेड’ उच्चारण सुनल जाइत अछि-)
“भूपो वा सचिवो वनाचलरतः सेनापतिः क्रकूरधीःधातोर्वाद-विनोद-वंचनपरो दाता सरोषेक्षणः।
तेजस्वी निजमातृभक्तिनिरत¬: शूरोऽसितांग सुखी
जातः सप्ततिमायुरेति शशके जारक्रियाशीलवान्
अर्थात—नेता बनब त’ अहाँक भागमे लिखल अछि आ सदिखन सेवक आ अनुचर-अनुयायी सँ घेरल रहब सेहो लिखल अछि.... छोट-मोट अन्याय नहि कैने होइ—से नहि...मुदा बहुत गोटे अहाँक नाम ल’ कए अपराध करै जाइ छल—से बात स्पष्ट। वैह जे कतेको जननेता केँ होइ छनि..कखनहु देखियो कए अनठा दैत छलहुँ। बाजै मे बड़ पटु छी से त’ स्पष्टे अछि.. मुदा ई की देखि रहल छी—नुका चोरा कए विवाहक अतिरिक्तो प्रेम करबा दय.. सत्ये एहन किछु चलि रहल अछि की?”
नेता : (स्पष्टत¬: एहन गोपनीय बात सब सुनि कए अत्यंत लज्जित भ’ जाइत छथि। हुनक दुनू बगल मे ठाढ़ दुनू अनुचर अकास दिसि मूड़ी उठा कए एम्हर-ओम्हर देखै लागै छथि जेना ओसब किछु नहि सुनि रहल छथि) नहि...माने ..तेहन किछु नहि..
चित्रगुप्त : (मुस्की दैत) मुदा कनी-मनी...?.नहि?
नेता : हँ, वैह.... बुझू जे...
यमराज : सब बुझि गेलहुँ....
चित्रगुप्त : मुदा ओ कहै छथि हुनकर उमर भेलनि पचपन और शश-योग कहै छइ जीवित रहताह सत्तरि सँ बेसी उमरि धरि तखन ?
यमराज : तखन बात त’ स्पष्ट जे समय सँ पहिनहि अहाँ कोनो घृण्य राजनैतिक चक्रांतक शिकार बनैत एतय पठाओल गेल छी। (मोटका रजिष्टर केँ बन्न करैत छथि--)
नेता : तकर माने ?
यमराज : तकर माने ठीक तहिना जेना एहि चारि गोट सैनिक केँ एत’ ऐबाक आवश्यकता नहि छल... ओहो सब अहीं जकाँ .. माने इयैह जे अहाँ मुक्त छी, घुरि सकै छी राजनीतिक जगत मे... एतय कतारमे ठाढ़ रहबाक कोनो दरकारे नहि...
नेता : आँय ! (कहैत देरी दुनू अनुचर आनन्दक अतिरिक्त प्रकाश करैत हुनका भरिपाँज पकड़ि लैत छथि। संगहि कनेक देर मे नारेबाजी सेहो शुरू क दैत छथि।)
[नेताजीक आगाँ दूटा सैनिक सेहो मंच सँ निष्क्रांत होइत छथि।]
यमराज : (नेताजीक संगहि खिसकि जा रहै चाहै छथि से देखि कए, दुनू अनुचर सँ) अहाँ सभ कत’ जा रहल छी ? (दुनूक पैर थम्हि जाइत छनि।) की ? नहि बाजलहुँ किछु ?
अनुचर 1 : आ.. जी.. हम सब..नेताजी... जा रहल छथि तैं...
यमराज : कोनो तैं-वैं नहि चलत..(घुरि कए) चित्रगुप्त !
चित्रगुप्त : जी ?
यमराज : नीक जकाँ उल्टा-पुल्टा कए, देखू त’ रजिष्टर मे हिनका सब दय की लिखल छनि...
चित्रगुप्त : जी !....(अनुचर 1 केँ देखा कए) राजनीतिक जगतमे बदरी विशाल बाबू जतेक मार-काट कैने- करौने छथि—से सबटा हिनके दुनूक कृपासँ होइ छलनि....
अनुचर 1 : (आपत्ति जताबैत) नहि... माने...
यमराज : (डाँटैत) चोप! कोनो-माने ताने नहि...
चित्रगुप्त : (आदेश दैत) सोझे भुनै केर कड़ाही मे ल’ जा कए फेंकल जाय !
(कहैत देरी नंदी आ भृंगी अनुचर 1 आ अनुचर 2 केँ दुनू दिसि सँ ध’ कए बाहर ल’ जाइत छथि—ओम्हर बाँकी मृत सैनिक मे सँ दू गोटे हिनका ल’ कए आगाँ बढ़ैत छथि आ नंदी-भृंगी अपन-अपन स्थान पर घुरि आबैत छथि।)
प्रेमी युगल : (दुनू आर धीरज नहि राखि पबैत छथि) आ हम सब ?
प्रेमी : हमरा दुनूकेँ की हैत ?
प्रेमिका : ई हमरा कतेको कालसँ घुरि चलबा लेल कहैत छलाह... मुदा हमही नहि सुनि रहल छलियनि !
प्रेमी : की एहन नहि भ’ सकैत अछि जे.....
बाजारी : (आगाँ बढ़ैत) हे.... हिनका दुनू केँ अवश्य एकबेर जिनगी देबाक मौका देल जाइन...
चित्रगुप्त : से कियै ?
बाजारी : देखू...एत त’ हम कन्यादान क’ कए विवाह करबा देलियनि... मुदा वस्तुतः त’ ई दुनू गोटे अपन-अपन परिवारक जे क्यो अभिभावक छथि तनिका सभक आशीर्वाद नहि भेटि सकलनि।
भद्र व्यक्ति 2 : ...आ तैं दुनू गोटे निश्चित कैने छलाह जे जीयब त’ संगहि आ मरब त’ संगहि..मुदा आब त’ हम सब विवाह कैये देने छी...
बाजारी व्यक्ति : तैं हमरा लगैछ जे दुनू परिवारो आब मानि लेताह...
भद्र व्यक्ति 1 : भ’ सकैछ आब पश्चातापो क’ रहल छथि।
यमराज : बड़ बेस...
चित्रगुप्त : आ जँ एखनहु अक्खड़ दैखौता त’ अहाँ सब हुनका लोकनिकेँ समझा बुझा’ सकबनि कि नहि ?
भद्र व्यक्ति 1,2 : अवश्य...अवश्य !
यमराज : बेस... तखन (नंदी-भृंगीकेँ) एहि दुनू बालक-बालिका आ हिनका दुनूक एतहुका अभिभावक लोकनिकेँ रस्ता देखा दियन्हु...
[नंदी-भृंगी प्रेमी-प्रेमिका आ ओहि तीनू गोटेकेँ (दुनू भद्र व्यक्ति आ बाजारी वृद्धकेँ) रस्ता देखा कए बाहर ल’ जाइत छथि...पाछू-पाछू ढोल-पिपही बजा कए ‘मार्च’ करैत बाहर ल’ जाइत छथि। तखन रहि जाइत छथि जेसब ताहि सबमे सँ अभिनेता अगुआ आबै छथि।]
चित्रगुप्त : (जेना यमराज केँ अभिनेताक परिचय द’ रहल छथि) ई विवेक कुमार भेलाह... (नंदी सँ) पृष्ठ पाँच सौ अड़तीस...
अभिनेता : (आश्चर्य-चकित होइत, चित्रगुप्त सँ) अहाँ केँ हमर पृष्ठो मोन अछि...करोड़ो मनुक्खमे....? ई त’ आश्चर्यक गप्प भेल...
चित्रगुप्त : एहि मे अचरजक कोन बात? एतेक किछु करैत रहैत छी जे बेरि-बेरि ओहि पृष्ठ पर ‘एन्ट्री’ करै-टा पड़ै अछि...तैं.....
नंदी : (जेना घोषणा क’ रहल होथि...) पृ. 538, विवेक कुमार उर्फ.....?
अभिनेता : (टोकैत) हे कथी लय दोसर-दोसर नाम सब लै जाइ छी ? बड़ मोसकिल सँ त’ अपन जाति-पाति केँ पाछाँ छोड़ा सकल.... आ तखन एत्तहु आबि कए....?
चित्रगुप्त : आगाँ बढ़’! नाम छोड़ि दहक !
नंदी : आगाँ रिकार्ड त’ ई कहै अछि जे ओना ई छलाह त’ बड्ड मामूली व्यक्ति, तखन अपन कुशलता सँ, आओर सौभाग्यो सँ, पहुँचि गेल छथि शिखर पर... पाइ बहुत कमौलनि.. (झुकि कए नीक जकाँ रजिष्टर मे सँ पढ़ैत...) दान-ध्यान सेहो कैने छथि... ततबा नहि जतबा क’ सकैत छलाह अनेक महिला सँ हिनक नाम केँ जोड़ल जाइ छनि...अफवाहि केँ अपने पसिन्न करै छथि... एहि मामलामे बदनामे रहलाह... आ तैं पारिवारिक जीवन सुखद नहि छलनि... निःसंतान छथि, पत्नीकेँ त्यागि देताह ताहिसँ पहिनहि वैह छोड़ि कए चलि गेलीह...वस्तुतः पत्नीक कहब छलनि ई असलमे नपुंसक छलाह...
अभिनेता : (नंदी केँ थम्हबैत) की सभक सामने अंट-संट पढ़ि रहल छी पोथासँ ? पत्नी छोड़ि कए चलि गेलीह… नीक कैलीह, एखन सुखी छथि एकटा अधेड़ उमरक नवयुवकक संगे.... मीडिया बला सभसँ पाइ भेटलनि आ कि कहानी बनबै लगलीह... ‘अफसाना’.... जे बिकत बड्ड बेसी।
चित्रगुप्त : से ओ सब जाय दहक ...ई कह आर कोन विशेष बात सभ दर्ज छैक..
भृंगी : (ओहो झुकि कए देखि रहल छलाह रजिष्टर मे, आब रहल नहि गेलनि---) हिनक जत्तेक मित्र छनि, शत्रुक संख्या ताहिसँ बहुत गुना बेसी छनि।
यमराज : से त’ स्वाभाविके.....
भृंगी : हिनक शत्रुपक्ष कहैत अछि ई नुका–चोरा कए कतेको वामपंथी गोष्ठी केँ मदति करैत छलाह.... बहुतो ताहि तरहक संगठन केँ ....
वामपंथी : (प्रतिवादक स्वरमे) कथमपि नहि... ई सब फूसि बाजि रहल छी अहाँसब....
भृंगी : बाजि कहाँ रहल छी यौ कामरेड? हम त’ मात्र पढ़ि रहल छी--!
वामपंथी : हिनका सन ‘बुर्जोआ’ गोष्ठीक सदस्य कखनहु करत गै मदति कोनो साम्यवादीक ? असंभव !
अभिनेता : कियै ? साम्यवाद पर अहींसभक जन्मसिद्ध अधिकार छै की ? आन क्यो ‘साम्य’ क कल्पना नहि क’ सकैत अछि ?
वामपंथी : (व्यंग्यात्मक स्वरें) कियैक नहि ? कल्पनाक घोड़ा पर के लगाम लगा सकैत अछि ?
करू, जतेक मर्जी कल्पना करै जाऊ ! मुदा हम सब छी वास्तविक जगत् मे वास्तव केँ भोगि रहल छी...
अभिनेता : वास्तवमे भोगी छी अहाँ सब, भोगक लालसा मे ‘साम्य’ दय गेलहुँ बिसरि ‘वाद’टा मोन रहल ... वाद-विवाद मे काज मे आबैत अछि....!
चित्रगुप्त : वाद-विवाद सँ काज कोन ? कहबाक तात्पर्य ई जे विवेक कुमार जीक विवेक भरिसक बड़ बेसी काज करैत छनि...तैं.....
यमराज : (गंभीर मुद्रामे) हुम्-म्-म् ! (नंदी सँ) तखन देखै छी विपक्ष सँ बैसी सपक्षे मे सबटा पढ़ि रहल छी...
चित्रगुप्त : तकर अलावे ...ई हिनक अकाल आगमन थिकनि.... स्टंटमैनक बालक छल अस्वस्थ, गेल छल छुट्टी ल’ क’ अपन घर... त’ ई अपनहि स्टंट करै लगलाह...
अभिनेता : (बिहुँसैत) कनियें टा चूक भ’ गेलैक कि पहाड़ी पर सँ खसि पड़लहुँ....
यमराज : कनिये-कनिये भूल-चूक मे बदलि जाइत अछि इतिहास आ पुराण...सबटा पुण्य बहा जाइत अछि तनिके पापसँ ! मुदा जे हो (नंदी सँ) हिनका एखनहुँ अनेक दिन जीबाक छनि.. पठा दियौक पृथ्वी पर...
वामपंथी : (अगुआ कए) आ हम ? हमर की हैत ? (एक बेरि यमराज तँ एक बेरि चित्रगुप्त दिसि देखैत छथि। मात्र भृंगी ससम्मान अभिनेताकेँ बाहर पहुँचाबै जाइत छथि।)
यमराज : अहाँक कथा मे तँ स्वर्ग-नर्क कोनो टा नहि अछि...ने छी हम आ ने चित्रगुप्त...
वामपंथी : जी, से त’...(कहै जाइत छलाह ‘अवश्य !’ मुदा ताहि सँ पहिनहि टोकल जाइत छथि।)
चित्रगुप्त : सैह जखन बात छैक त’ अहाँ अपने विचार करू अपन भविष्य....(पॉकिट सँ एकटा मुद्राकेँ ‘टॉस’ करबाक भंगिमा मे.....) कहु की कहै छी ‘चित’ की ‘पट’?
वामपंथी : हमर विश्वास आ हमर शिक्षा किछु आने तरहक छल, मुदा जे प्रत्यक्ष क’ रहल छी (कहैत देवार....यमराज...चित्रगुप्त आदि केँ देखाबैत छथि) तकरे अस्वीकार कोना करू ?
यमराज : कियैक ? ईहो त’ भ’ सकैछ जे आँखि धोखा द’ रहल अछि...ई सबटा एकटा दुःस्वप्न मात्र थिक... कल्पलोक मात्र थिक...ई, जतय घुसै जायब त’ देखब बोर्ड पर टांगल अछि---‘नो एन्ट्री’!
वामपंथी : तखन ?
चित्रगुप्त : तखन की ?
वामपंथी : तखन हम की करू ?
यमराज : (गंभीर मुद्रामे) पहिने ई कहू... विषम के थिक ? मनुक्ख कि प्रकृति ?
वामपंथी : दुनू...
यमराज : के कम के बेसी ?
वामपंथी : प्रकृति मे तैयहु कत्तहु ‘प्राकृतिक न्याय’ (नैचरल जस्टिस)
काजक’ रहल अछि, मुदा मनुक्खक स्वभावक आधारे
अन्याय पर ठाढ़ अछि...
यमराज : की अहाँक राजनीति एहन अन्याय केँ दूर नहि क’ सकैत अछि ?
वामपंथी : प्रयास करैत अछि...
यमराज : ठीक अछि... तखन हिनको तीनू गोटे केँ नेने जाऊ ! (चोर उचक्का आ पॉकिट-मारक दिसि देखा क’ बाजैत छथि) आ देखू हिनका सब केँ बदलि सकै छी वा नहि ?
वामपंथी : बेस....
[कहैत पॉकिट-मार आ उचक्का हुनका लग चलि आबै छथि। चोर कनेक इतस्ततः करैत छथि आ अंत मे पूछि दैत छथि जाय सँ पूर्व…]
चोर : तखन एहि सँ आगाँ ?
यमराज-चित्रगुप्त-नंदी : (एक्कहि संग) ‘नो एनट्री’...
[कहैत देरी तीनू गोटे केँ साथ ल’ कए वामपंथी युवा वाहर जैबाक लेल उद्यत होइत छथि कि तावत् अभिनेता केँ छोड़ि कए भृंगी घुरि कए मंच पर प्रवेश क’ रहल छलाह।]
यमराज : मा प्रविश....
चित्रगुप्त : कदाचन!
[चारू गोटे एक पलक लेल चौंकैत थम्हैत छथि ....तकर बादे निष्क्रांत होइत छथि। हुनका सभक प्रस्थानक पाछाँ भृंगी आगाँ बढ़ैत छथि यमराजक दिसि।]
(क्रमश:)
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
'विदेह' १५ जुलाई २००८ ( वर्ष १ मास ७ अंक १४ ) १५.मैथिली भाषापाक इंग्लिश-मैथिली कोष मैथिली-इंग्लिश कोष
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kachh-heri कछहेरि व्यारप्तं। [ कक्षस्थ्ली] See कछेर।
kachhuà कछुआ काछु tortoise. [कच्छ.प] n ~डवर adj काछुक खपलोह-सन नतोदर। concave like tortoise shell. ~पीठ adj काछुक पीउ-सन, उन्नaतोदर। convex, shaped like tortoise-back.
kachhubi कछुवी काछु-सन। tortoise-like. adj
kachhèr कछेर तट, जलाशयमे जलक समीपवर्ती भीजल-सन भूमि। shore. n Cf कछहेरि।
kachòâa कछोटा कच्छीâ। See [कक्षपट] कछोटी d
kachhaur कछौर काँखतर/पॉंजमे जतवा अँटए ततबा पुरैनिक पातक बोझ। a quantity of lotus leaf, afmful bundle. See T.I.X. [कक्षपूर] n
kajgati कजगति परिस्थिति, हाल। state of affairs [कार्यगति] obs n
kajarkaâhi कजरकाठी काजर करवाक काठी। stick for applying eye-liner. n
kajargaur कजगौर एक धान। a rice. n
kajranki कजरड़्की कारी गाए। black cow. [कज्जwलाड़्गी] n
kajra कजारा धानक एक रोग। a post of paddy. n Also कजला।
kajràeb कजराएब 1. आंखि में काजर करब।
2. काजर-सन कारी होएब। 1. "apply black eye-liner.
2. blacken.
[काजर-"lamp black" I nvt कजरी n 1. कज्जaली। lamp black, soot. 2. काइए एक जलजीवी वनस्पति जे ठोस धरातल पर मखमल जकॉं पसरैत अछि। moss, celadon, willowgreen. 3. एक धान। a rice.
kajrot कजरोट काजर रखबाक सम्पुmट। box/case for storing eye-liner. [कज्ज लपुट] n Also कजरैटी, कजरौट, कजरौटी।
kajlà कजला 1. एक बटेर।
2. एक धान।
1. a quail.
2. a rice n 3. See
kajat कजात कदाचिते। rarely. adv
kajià कजिआ झगड़ा। quarrel. n
kajai कजै See बैरूआ।
kajjak कज्जaक 1. एक रूखान।
2 हाथी हँकबाक ऑंकुस। 1. a chisel.
2. goad n
kajjal कज्जaल काजर, दीपमल। soot, lamp black. cye-liner. n
kajji कज्जी विकलाड़्ग कार्याक्षम। disabled, infirm. adj Also कज्जूi।
kaùsis कानुसिस See कओसिस।
kayòn obs See कोन
°kanch °कन्चh See हरिअर-कन्चू।
kanchgati कन्चhगति कन्चाgक हिसाबें, नगदी। in torms of money. adj
kachan कन्चaन स्वचर्ण। gold. n
kanchà कन्चाà धातुमुद्राए सिक्कास; नगदी धन। coin, cash, money. n
kanchu कन्चुu See अरिकोंच।
kanchuk कन्चुuक 1 चोली, नारीक अड़रखा: चोला, कोट।
2 सापक त्व,चावरण। 1. brassier, bodice, robe.
2. brough of snake. n कन्चुsकी d.
kanchha कन्चाh आकाड़क्षा, मनोरथ। aspiration. n
kanj कन्ज कमल। lotus. cls n
kanjùs कन्जूsस कृपण। tight fisted, miser, sitingy [कणचूस?] adj
kaâ कट 1 कगरी काल-सीमा।
2 शर्त, करार 1.stipulated period.
2. terms and conditions, grace in time-limit. n
kaâ-kaâ कटकट ध्वटनि जेहन दॉंत पर दॉंत बजरने होइत अछि। sound like clicking of teeth. nvt
kaâkirà कटकिरा सोनारक एक सॉंच। goldsmith's mould. n
kaâki कटकी सुइ;सन पातर काठी। wonden spike/pin. [कण्ट;कील] n
kaâkuâ कटकुट लिखलकें बेरि-बेरि कटबाक विकृति slipshod, scratch, clip. n
kaâkènà कटकेना वेचल वस्तुs करारी काल-सीमाक भीतर घुराए लेबाक शर्त पर खरीद। conditional sale. [कटक्रयण] n
kaâgar कटगर नीक काट ब गढनिबालाए सुन्दखर, सुरूप। well-shaped. [काट;"design"] adj
kaâgaini कटगैनी एक धनौपधि a hefb, Salanum iacquint [कण्टिकरिणी] n
kaâania कटनिआ 1 जलक तेज धागसं तटक कटनाइ, कटाओ।
2 खेतमे फसिल कदबाक काज।
3. जजा कटनिहार जन। 1. erosion of sil by flooded river.
2. harvest reaping; See
3. reaper. [कर्तनिका] n कटनी, n फासिल काट खरिहान आन। mowing reaping. कटनौत adj खण्डn काटि कार गन्हूल गेल (तरकारी) (vegetable) cooked alter cutting in pieces.
kaâab कटब काटल जाएब: कात ह्रदय रहब। be cut; remain cut off. [कृत-] vi
kaâ-bandhak कट;बन्धhक करारी अविधिक निर्भर घुराओल जाए सकबाक खर्तबाक पर गेल राखल बन्ध क। conditional martagage to be redeemed only within stipulated period. n
kaâbi कटवी एतेक ठोस जे चमचासँ काटिकें परसल जाए। (curd) solid enough to be served by making slices. adj (दहीक विषयमे) ~ वाजू n वाजूक एक प्रकार। an armlet.
kaâmaâ karab कटमट करब झगड़ब। prattle, squabble. vt कटमटी n.
kaâmti कटमटी किल्लiति। scarcity. n
kaâarni कटरनी सुतारी। cobbler's needle. n
kaâar-maâar कटर-मटर खएबाक एक ध्वमनि। sound produced in gulping. ono
kaâar-maâar कटरेडनी See कटगैनी।
kàâsari/°sair कँटसरि कण्ठरहार। a necklace. [कण्ठcश्री] n
kaâsaraidhà कटसरैया महासहाए एक बनौषधि। a herb: Globe amaranth. n
kaâ-har कटकर एक फल पनस। jack fruit. Alrocarpus intergrifolia ~ चूरा खसब vi (der) कष्टचमे पड़व। fall in trouble. [कण्टfफल] n
kaâ-harà कटहरा एक्काणक पृष्ठूभागक अड़ानी। backside railing of Ekka. n
kaâ-harià कटहरिआ कटहरक को-सन फीका पीअर रड़्गक। light yellow like pulp of jack fruit. adj n कटकर-सन सौरभवाला एक फूल। a flower.
kat-hà कटहा कटाह, दॉंतसँ कटबाक स्वाभावबाला (घोड़ा आदि)। inclined to bite. adj
kàâ-hà कँटहा कॉंटबाला। thorny, pricking. adj
kaâài कटाइ काटब: कटनी। cutting mowing, reaping. n
kaâàujh कटाउझ निष्काhरण अपनामे कुकुर-जकॉं लड़ब। scramble. [कृतकयुद्ध] n
kaâào कटाओ जलक तेल धारासँ माटिक कटब। erosion. n
kaâàkŸa कटाक्ष 1 ऑंखि टेढ कए देखब।
2 आक्षेप दोषारोपण, व्यंड़ग्यo। 1. glance, ogling.
2. taunt, aspersion, sarcasm. n Also कटाख obs
kaâàn कटान 1 कटनी।
2 कटाओ। 1. reaping mowing.
2. erosion. [कर्तन] n
kaâàr कटार 1. एक खड्ग।
2. एक वृक्ष।
3. कॉंटबाला झाड़। 1. a dagger.
2. a tree
3. thomy shrub; Asteracantha Longifolia. [कठार, काष्ठaवारक]
kaâàri कटारि 1 काटल आरि-धूर बाला क्षेत्र।
2 कटान। 1. land with boundaries removed.
2. erosion. [कृत्तालि] n
kaâàri कटारी 1 छोट कटार, खडग।
2 लदनिआ बड़वक पीठपर लटकल छोट झोड़ा जाहिमे व्याीपारी अपन वैयाक्तिक वस्तुेजात रखैत अछि। 1. a small dagger.
2. a small bag on the back of a pack ox containing driver's personal belongings. [कर्तरिका] n
kaâah कटाह दांतसँ कटबाक स्व]भावबाला। inclined to bite. adj n See कड़ाह।
kàâàh कँटाह कॉंटबाला। thorny. adj
kaâi कटि डॉंड़। waist. n~वद्ध adj फाइ बन्ह ने, दृढ़ सड़्कल्पवक सड़्ग करवा लेले प्रस्तुडत। well-prepared, determined. -वन्धक n पट्टी। zone.-सूत्र See डँडा डोरि।
kaâià कटिआ दूध रखबाक माटिक वासन। earthen milk can. [कटाहिका?] n
kaâu कटु कडू, अप्रियए तीव्र। pungent. unpleasant, offending. adj
kaâuà कटुआ कटटु, कॉंटु। See
kaâutà कटुता अप्रिय तीव्रता। bitterness. n
kaâubi कटुवी 1 एक गहनाए बाजू।
2 कुसिआरिक गेंडी। 1. an armlet
2. cuttings of sugar cane. n
kaâaià कटैआ 1 अनेक प्रकारक
कॉंटबाला झाडू।
2 कटबाक क्रिया। 1. several species of thorny shrubs.
2 reaping, cutting.
[कण्टgकिका] n
kaâail कटैल चूडि़क लाह, फूटल लहठी। lac, specially broken pieces of lac bangles. n
kaâira कटोरा छोटबाटी। cup. n कटोरी d
kaâauâi कटौटी कटु वाद-विवाद। hot discussion, controversy, [कटुक्ति] n
kaâauti कटौती [खर्च आदि काटिकें कम करता । deduction. n
kaââar कटटर अपना मतमे अटल। die-hard, fanatic, dogmatic (der). adj
kaââu कट्टू जे हारबाक कारण साहस गमाए बुकल अछि। dejected, defeatist. adj n कसाइ। butcher.
kaââha कट्ठा 1. क्षेत्रफलक एक मान।
2. अन्नत नपबाक एक मानए ओतवा अन्न. अंडबाजग मीनी। 1. a unit of land measure.
2. a unit of capacity, baskeetful; basket of one kattha capacity. [काष्ठाa] n See T.V.
kath° कठ° काठ; देखू आगा। wood. See below. [w of काठ] n [कृतक] adj कृत्रिम forced, pseudn artificial, See below.
kaâhkirà कठकीड़ा 1 काटक धुन जे रति भरि जागल सक्रिय रहैत अछि।
2 (लाख) रतिमें जगबाक स्वरभावबाला (बच्चां)। 1. weevil, wood worm.
2. (fig) habituated to remain awake even in dead night. n
kaâhkèà कठकेरा ऑंठीवाला केरा। banana having stones. [काष्ठvकदलक] n
kaâhkokari कठकोकॉंडि़ काठ-सन कठोर (निन्दाrमे)। as hard as wood, very difficult to understand. adj
kaâhkhurpi कठखुरपी काठक डब्बूt वा छोलनी जाहिसँ कुसिआरक रस निकालल जाइत अछि। wooden ladle. [काष्ठdक्षुरप्र] n
kaâhkhòdhi कठखोधी एक पक्षी। wood-pecker. [काष्ठiक्षोदिका] n
kathgar कठगर काठ-सन कड़ा विप धुलल (आम आदि फल) hard like wood (fruit). adj
kaâhghara कठघरा काठक घर/कोष्ठ), विशेषत: ओ जे न्या यालमे वादी-प्रतिवादीकें अवरूद्ध रखबाक हेतु वनल रहैछ। dock, bar, cage. [काष्ठ,गृह] n
kaâhchara कठचरा See कठखोधी।
kaâhjib कठजीव प्राणन्त क कष्ट- सहितहुँ नहि मुइनिहार। one who sustains life in spite of actue suffering. adj
kaâhtal कठताल काठक तालबाद्य। wooden cymbal. n
kaâhadhàrà कठधारा छोट बटिखरासँ वस्तुf तौलि बनाओल पैघ मान। devised measure of weight. n
kaâhpiju कठपीजु घाओक भीतर जानिकें कठगर भेल पीजु। hard pus. n
kaâhpiri कठपीरी एक फूल। a flower. n
kaâhputri कठपुतरी काटक मूर्ति जे डोनमे लटकाए नाटक देखाओल जाइछ। Puppet. [काष्ठइपुत्तलिका] n
kaâhpùt कठपूत पुरूषक एहन बेटा जे ओकर पत्नीा पूर्व पतिसँ जनमओने हो। step son. n
kaâhbandhan कठबन्धnन हाथीक पाएरसे लगएबाक काठन छान। wooden fetter for elephant. n
kaâhbad कठवाद तर्कहीन निरर्थक विवाद। dogmatic discussion. n
kaâhbap कठबाप माताक ओ पति जे जन्म.दाता नहि हो। step father. n
kaâhbèæ कठबेड़ बेड़क एक प्रभेद। toad. n
kaâhbèâà कठवेटा अपन पत्नीपसे आन पुरूसँ जनमल पुत्र। step son. n
kaâbel कठवेल 1 कथ।
2 बनैआ हीन कोटिक बेलए बेली। 1. See
2. wood apple, wild बेल fruit of inferior type. n
kaâhbèli कठवेली जड़ली बेली फूल। a wild variety of jasmine. n
kaâhbaid कठवैद छटाबैद्य। quack n
kaâhbòli कठबोली कटुवचन। harsh words. n
kaâhbhàe कठभाए भिन्नh पितासँ भेल भाए। brother born of different fathers. n
kaâham कठम पाकल किन्तुn गुलगुल नहि भेल (आम आदि फूल) not fully rupe (fruit). adj
kaâhmaæia कठमडि़या See कहाउत।
kaâhmàam कठमाम सतमाइक भाए। step mother's brother. n
kaâhmukhra कठमुखरा मुहदुव्बrर। meek. adj
kaâhrà कठरा 1 काष्ठ पन्ज र, उट्ठर।
2 कठघरा। 1. wooden frame.
2. See n
kaâharia कठरिआ See कटहरिआ।
kaâhlàj कठलाज कृत्रिम लज्जाआ। feigned shyness, forced modesty. n
kaâhsàr कठसार पत्नीàक वैमात्रेय भाए। wife's step brother. n
kaâhhar कठहर काठक फारबाला हर। plough with wooden share. [काष्ठiहल] n
kaâh-harià कठहरिआ See कठखोधी।
kaâhhàst कठहँसी कृत्रिम हास। forced/feigned smile n
kaâh-hi कठही एक कट्ठा नापक मौनी। basket for measuring grains in n कट्ठा। adj काठक बनल। wooden.
kaâhàin कठाइन अप्रिय, कृत्रिम, विकृत। unpleasant, offending (manners). adj
kaâhà कठार कठार, पघडि़आ [काष्ठ दारक] n
kaâhàri कठारी सजमनिक तुम्बाf। bottle gourd's shell n
kaâhàl कठाल लकड़ी का कठबाक स्था न। timber workshop [काष्ठाkलय] n
kaâhiari कठिआरी 1 दाह-संस्कानरमे गेनिहारक दल।
2 पसारी पर लगाओल एक वार्षिक कर। 1. cremation party.
2. a tax levied on artisans. n
kaâhin कठिन सकत, कठगर, कष्टेसाध्यo, गहन। sever, hard, difficult. adj कठिनाह adj कठिन-सन। seemingly difficult.
kaâhibal कठिबाल एक प्रकारक वस्त्रl। a kind of cloth [VR] obs n
kaâhuàeb कठुआएब 1 कठोर/कड़ा होएब।
2 अतिशैन्य/वश जमिकें कड़ा होएब।
3 लजाएब। 1. stiffen, harden.
2. be chilled, freeze.
3. freez in blush. [काष्ठi-] nvi कठुएनी n
kaâhuli कठुली 1. कोठुली, छोठ कोठी।
2. दूध नपबाक एक पात्र। 3. छोट कठौत।
1. small earthen granary.
2. a measuring pot.
3. wooden bowl. [ d of कोटी] n
kaâhait कठैत एक साप। a snake. n
kaâhor कठोर 1 कड़ा कठिन।
2 क्रूर, निर्दय। 1. hard, difficult
2. cruel.
adj
kaâhòà/°li कठोला/°ली See कठुली।
kaâhòh कठोह See कठुली।
kaâhòhi कठोहि गाछक धोधरिमे रहनिहार एक साप। a reptile that resides on tree [काष्ठ गोधिका]
kaâhaua कठौआ हत्थाu। bunch of plantain. n
kaâhaut कठौत अढि़आ-सन काठक पात्र। small wooden tub, platter. n
ka࢞hauli कठौली See कठुली।
kaûkaû कड़कड़ एक प्रकारक ध्वुनि जेहन कड़कैत तेलमे होइछ। sound of biling oil or breaing stick, cracling. ono कडूकड़ाएव nvi कड़कड़ ध्व नि करब। make such sound.
kaûkaûia कड़कडि़आ कड़गर, तेज (रौद)। hot (sun-rays); adj Also कड़कड़ौआ।
kaûkab कड़कव 1 उत्तेजित होएब, तमसाएब।
2 तेल आदिक अतितप्त, भेला पर सशब्दb खलबलाएब। 1. be excited/spirited.
2. bil noisily. vi
kaûgar कड़गर दृढ़, मजबूत, कड़ा, तीव्र। stiff, hard-hitting, tough. adj
kaûbà कड़वा नओमे देबालक सहाराक टोंटा/कड़ी। staff supporting the side planks of boat. n
kaâ-rab कड़रव 1 दाँतपर दॉंत धॉंस ध्वaनि करब, दॉंत कीचव।
2 ईर्ष्यादसँ निन्दाu करब, जरब। 1. chatter (teeth), a gesture of jealousy.
2. criticize with malice. vi
kaûarà कड़रा 1 एक प्रवासी पक्षी जे झुण्डड बान्हि उड़ैत शरदमे देखि पड़ैत अछि आ वर्षाक अन्त क सूचक मानल जाइत अछि
2 स्व त: यथावत् रूपमे सुखाएल गोबरक पिण्ड । 1. a migratory bird whose visibility indicates the end of rainy season; Prexdixsylvatica.
2. lump of dung dried in its natural form n Cf चिपड़ी। ~ पड़व vt ऑंतमे मल सुखाए कड़ा भए जाएब। (said of extra in the intestines) become dry and cause constipation.
kaûari/kaûair कड़रि केराक गाछ। banana tree. [कदली] n कड़रिक थम्हर n केराक गाछक स्तrमभाकर धड़। a pest that causes disease of banana tree.
kaû-ru कड़रू See पड़रू।
kaûaròà कड़रोआ केरा गाछक नाशक एक कीड़ा। a pest that causes disease of banana tree. [कठलिरोग] n
kàû-sar कँड़सर एक सॉंप। a snake. n
kàûsari कँउसरि अनेक छड़बाला एक हार। a necklace having several strings. [कण्ठcश्री] n
kaû-haûi कड़हड़ी बैलगाड़ीक एक अड़्ग। a part of bullock cart. n
kaûahar कड़हर मलकोकाक जे उसिनिकें खाएल जाइछ। edible tuber of fily. [करहाट] n
kaûahà कड़हा See काढ़ा।
kàûhàr कँड़हार नाविक। boatman. [कर्णधार] obs n
kaûahià कड़हिआ See कड़ाही।
kaû-hi कड़ही कढ़ी, दही दए बनाओल बेसनक झोर। a soup of gram-flour and curd. n See कढ़ी।
kaûà कड़ा सकत, दृढ, कठोर, कठिन। hard, stiff, strict, difficult. adj कड़ाइ n
kaûàækul कड़ाडकुल सारस, ढेक, विशाल टाड़बाला एक पक्षी; (लाक्ष) बहुत पातर;छीतर आ नमघोड़ व्यfक्ति। black red-crested curlew; Grus cinerea, crane; (fig) very tall and thin person [कारण्डaकुल] n
kaûàm कड़ाम दाउनिक डोरी जाहिमे अनेक बड़दकें बन्हिबाक गल-पाश रहैत अछि। rope tathering many bullocks for threating. [कणदाम] n
kaûàh कड़ाह तरकारी रन्हrबाक पैघ पात्र। cauldron. [कटाह] n
kaûiaut कडि़औत एक जड़ी। a herb. n
kaûi कड़ी 1 शृड़्खला।
2 वलय। 3 कविताक/गीतक टुकड़ी। 4 पाटन, पटोटन। 5 एक प्रकारक बन्हनन।
1. chain.
2. link, ring.
3. stanza.
4. rafter, joist..
5. a kind knot. n
kaûuàeb कडुआएब See कुडि़आएब।
kaûuàri/°air कड़आरि नाओ खेबबाक पत्तीबाला डण्टा्। rudder, helm. n
kaûù कडू कटु रवादबाला, जेना मेरिचाइ। pungent, spicy hot (as chilly). [कटु] adj ~तेल n सरिसओ/तोड़ीक झॉंसिगर तेल। mustard oil. कडू होएब। be pungent. 2. [कण्डूो] कुडि़आएब। itch.
kaûe kamàn कड़े कमान 'कठोर आदेश' परम सतर्कता। 'strict command', full aleriness. n
kaûori कड़ोरि एक यायावर जाति। a nomad caste. n Also कड़ोरिआ, कड़ोरी।
kaûaut कड़ौत मेहमे पैसाओल डोरीक वलय जाहि लगाए कड़ाम बान्हील जाइत अछि। a coil of rope around thresing pole; n Cf दाउनि।
kaûhai कढ़ाइ वस्त्रnपर सूइ-तागसँ शिल्पो करब। embroidery. n
kaûhi कढ़ी See कड़ही।
kaûhuà कढ़ुआ एहन बिआह जाहिमे कन्या वेदिए तरसँ सासुर जाए। a form of marriage in which bride is immediately taken to her husband's home. [कर्षुक] n Also कढ़ौआ।
kan कण 1 अन्नnक दाना।
2 अति छोट ठोस टुकड़ी। 1. grain.
2. very small particle. n Also कणा, कणिका।
kanaka कण्टkक 1 कॉंट।
2 कॉटी, पिन।
3 (लाक्ष) पीड़ादायक, बलाए, शत्रु। 1. thorn.
2. nail, pin.
3. (fig) enemy, nuisance. n कटगैनी। कण्टsकित adj रोमान्चित। thrilled.
kanâar कण्टaर तेल आदिक धातुपात्र टीन। [ E container/canister/decanter] n
kanâà कण्टाi n 1. See खखोरनी। 2. See कॉंकोड़ (2)।
kanâàh कण्टाhह श्राद्ध करओनिहार ब्राह्रमण, महापात्र। priest conducting funeral rite (der). n
kanâi कण्टि जमिन्दाcरीक बटबरामे प्रचलित टाकाक एक मात्रक। a unit of money. n See T. VIII.
kanâirbà कण्टिरवा सभसँ छोट सन्ता न। the yongest son. n Also कण्टी र।
kanâh कण्ठh 1 ग्रीवा, घेंट।
2 गल गलविवर। 1. neck.
2. throat. n °गत,~ ठेकल adj तुरन्ता अनिवार्यत: कर्तव्य्, टारवा योग्यन नहि। unavoidable (obligation). ~चढ़ब, ~ चढ़ब, ~ पकड़ब, ~पर सवार होएब vt अनुचित दबाव देव, बाध्य करब। give undue pressure. ~पर हाथ देव vt अपमानपूर्वक बैलाएब। kick out, expel disgracefully. °मलिआ n कण्ठlमे तुलसीक माला धारण कएनिहार, बैष्णलव सन्त (निन्दातमे)। saint bearing कण्डीव (der). ~मोकब See ~ चढ़ब। °स्थe adj रटल। learnt by rote.
kanâha कण्ठाa 1 पक्षीक गरदनिमे बलवाकार धारी।
2 कारी तागक हार।
3 घोड़ाक एक साज।
4 कण्ठामणि अड़्ग। 1. stripe round the neck (of bird).
2. necklace made of black thread.
3. an equitpment of horse.
4. Adam's apple. n
kanâhàgra कण्ठाàग्र कण्ठास्थर। committed to memory. n
कण्ठीt कण्ठीमे लपेटि पहिरबाक तुलसीक माले जे शाकाहारी होएबाक प्रमाण थिक। sacred string of beads worn round the neck by Vaisnavites who sun meat-eating. n Hence~तोड़ब vt वैष्ण व धर्मक त्याnग कए गाछ खाएब आरम्भt करब। begin taking nonvegetarian food. ~ वान्हtव vt वैष्ण व धर्म ग्रहण कए शाकाहारी होएब। shun non-vegtarian meal.
kanœali कण्डaली शिशुकन्दली, एम फूल। a plant. n
kanœ-hàr कण्ड हार [VR] obs n See कडुआर।
kanœa कण्डाR सरकण्डा , सरपतक डण्टाe। reed; See सरकण्डा ।
kanœàl कण्डाlल धुतहू, तूर्य। trumpet. n
kata कत कतेक। how much? [कियत्] obs, pro, adj बतए adv कोन ठाम। where? कतन obs adj कतेक। how much? कतवा adj कोन परिमाणक। how much? कती adj कतेक (काल, खन) how much? कतेक adj कए गोट, कोन मात्राक। how much, how many. कतोक adj कतिपय, किछु। some a number of.
katka कतका कात/पार्श्वपमे स्थित। of the side. [कन-] adj
katan+ कतन+ See under कृत।
katbàhi कतवाहि कातक जगह। side place, side n
kàtrab कतरब काटव, विशेषत: कैंचीसँ। trim, shear, pare clip. [कर्त-] vt कतरन n कतारिकें राखल टुकड़ा। cuttings. कतरनी n 1. कैंची विशेषत: कमचोक बनल। scissors, spl made of bamboo splits. 2. एक उत्कृ ष्टm धान। a superfine paddy.
katarbàh कतरवाह कोल्हू क बड़द हँकनिहार। operator of oil crusher. n
katarbeòt कतरवेओंत काट-छॉंट। curtailment. n
katrà कतरा कतारि/नरासिकें निकालल चापट खण्डिसभ (जेना सुपारीक, आमक)
2. ,एक माछ।
3 खस, एक तृण।
4 कुट्टी कटबाक हॉंसू।
5 पटबाक एक उपकरण।
6 आरी पिजएबाक रेती। 1. slice.
2. a fish.
3. khas plant;
4. grass-chooper
5. a tool of stringing ornaments.
6. afile for sharpening saw. n [A] See उशीर।
katràeb कतराएव कातर होएव, डरें काजसँ विरत होएव: कातरना देखाएव। show timidity. vi
katri कतरी 1 एक छोट माछ।
2 आरा पिजएबाक रेती।
3 कोल्हुजक पटरी जाहिपर पेरनिहार बैसल रहैत अछि। 1. a fish
2. a file for sharpening saw.
3. shaft of oil-crusher on which operator sits. n
katròhi कतरोही See कतरी (2)
katal कतल वध। murder. [A] n कतलेआम [A] n नर-संहार। mass murder.
katahu/katauh कतहु 1 कोनहु ठाम।
2 केनो ठाम।
3 कोनो स्थितिमे, कदचित। 1. somewhere.
2 anywhere
3 even. pro adv ever. Ex ई कतहु होअब "Is it ever possible?"
katàr कतार पॉंती, धारी। line, raw, queue. [A] n
kati कति कतेक। how much. obs adj कतिखन adv कतेक काल धरि। how long? कतिधा adv अनेक बेरि। often. कतिपय adj कतोक, किछु। some.
katia कतिआ छूरा कटार। dagger, hatchet. [कार्तिका] n
katikahar कतिकहर कावक ओ तकर असपासक समय, शरकाल। period of autumnal weather. [कार्तक-] n
katikà कतिका कालिकसे उपजल। reaped in adj n एक धान। a paddy
katikàbatar कतिकावर See कातकहर।
katiki कतिकी एक धान। a nce. n
katikhan+ कतिखन+ See under कान।
kati+ कती+ See under कन।
kattal कत्तल काटिकें मारल, निहत। slaughtered. [A कत्ल ] adj
kattà कत्ता हॉंस, कटारी खड्ग। hatchet. [कर्तक] n
kattin कत्तिन चरखा कदनिहारि। woman engaged in spinning profession. [H] n
kaâhak कत्थaक एक प्रकारक नाच, एकर नर्तक। a style of dance; dancer; of such style. n
katthà कत्थाà खाएरा कत्थीd, कत्थै। See See खएरा।
kath कथ कपित्थe, बेल-सन एक फल। elephant apple, Feronia elephantum n
kathak कथक 1 कत्थ क।
2 कथावाचक। 1. See
2. narrator of mythical/religious tales. n
kathkuââà कथकुट्टा पाथर/ईटा फोड़बाक हथौड़ा। stone breaker's hammer. n
kathankathamapi कथड़्कथमपि कोनहुना जेना-तेना। anyhow. adj
kathanchit कथन्चित् कोनहुना। in any way. adv
kathan कथन 1 उचित, वचन, वक्त।व्य- कथ्यट, आशय। statement, contention, version. n कथनी n चोल केवल कहनाइ, कएनाइ नहि। speech; opp करनी 'deed'.
kathmapi कथमपि कोनहु ना। anyway. adv
kathà कथा 1. कथन
2. खीसा, उपाख्याीन गल्प।
3. दुर्वचन, अपशब्द ।
4. विवाहक प्रस्ताpव वा तत्स म्बपन्धीय गपसप।
5 सुझाओ, उपदेश, आज्ञा। 1. See
2. tale, narrative, story, spl short story.
abusive words, aspersion
4. marriage negotiation/proposal.
5. advice, order.
n -कथान्तaर n विवादमे दूनू पक्षसँ अपशब्दi-सहित आरोप-प्रत्याारोग। altercation, discussion having no norm of eliquette. -वार्ता n गपसप, विचार-विनिमय। negotiation, talk, discussion. कथानक n परस्प.सन्वित मूल घटनावली जाहि आधार पर नाटक उपन्याीसादि रचल जाइछ। plot. कथान्तीर n भिन्नl बात, प्रसड़्गन्तधर। different thing, side-story. कथोपकथन n आलाप, गप-सप।dialogue, talk. कथ्यy n कहबाक आशय/लक्ष्य.। purport/object of saying, contention.
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
'विदेह' १५ जुलाई २००८ ( वर्ष १ मास ७ अंक १४ )१६. रचना लेखन-गजेन्द्र ठाकुर
(अनुवर्तते)
ज्योतिरीश्वर शब्दावली
गोण्ठि- मलाह
कबार- तरकारी बेचनिहार
पटनिआ- मलाह
लबाल- लबरा
लौजिह- ललचाइत जीह बला
पेटकट- जकर पेट काटल छैक/ अनकर पेट कटैत अछि।
नाकट- नककट्टा
बएर- बदरीफल
बाबुर- बबूर
खुसा- शुष्क
चुसा- चोष्य
फरुही- मुरही/ लाबा
करहर- कुमुदक कन्द
मलैचा- मेरचाइ
सारुक- भेँटा (श्वेत कुमुदक) कन्द
बोबलि- घेचुलि –खाद्य कन्द
बाँसी- वंशी
हुलुक- हुडुक्का (वाद्य यंत्र)
जोहारि – प्रणाम
तोरह – तौलह
बराबह- फुटा कए राखह
खुटी- महिला द्वारा कानक ऊर्ध्वभागमे पहिरए जायबला खुट्टी
सिङ्कली- सिकड़ी
चुलि- चूड़ी
त्रिका- माँग टीका
खञ्जरीट- खंजन पक्षी
मैथिलीक मानक लेखन-शैली
1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य अग्राह्य
एखन अखन,अखनि,एखेन,अखनी
ठाम ठिमा,ठिना,ठमा जकर,तकर जेकर, तेकर तनिकर तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) अछि ऐछ, अहि, ए।
2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय: भ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।
6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय(अपवाद-संसार सन्सार नहि), किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि।यथा- हिँ केर बदला हिं।
17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
20.
ग्राह्य अग्राह्य
1. होयबला/होबयबला/होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला होयबाक/होएबाक
2. आ’/आऽ आ
3. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ ल’/लऽ/लय/लए
4. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल
5. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
6. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’
7. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करै बला/क’र’ बला
8. बला वला
9. आङ्ल आंग्ल
10. प्रायः प्रायह
11. दुःख दुख
12. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
13. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन
14. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
15. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
16. चलैत/दैत चलति/दैति
17. एखनो अखनो
18. बढ़न्हि बढन्हि
19. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ
20. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ
21. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
22. जे जे’/जेऽ
23. ना-नुकुर ना-नुकर
24. केलन्हि/कएलन्हि/कयलन्हि
25. तखन तँ तखनतँ
26. जा’ रहल/जाय रहल/जाए रहल
27. निकलय/निकलए लागल बहराय/बहराए लागल निकल’/बहरै लागल
28. ओतय/जतय जत’/ओत’/जतए/ओतए
29. की फूड़ल जे कि फूड़ल जे
30. जे जे’/जेऽ
31. कूदि/यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद
32. इहो/ओहो
33. हँसए/हँसय हँस’
34. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/नौ वा दस
35. सासु-ससुर सास-ससुर
36. छह/सात छ/छः/सात
37. की की’/कीऽ(दीर्घीकारान्तमे वर्जित)
38. जबाब जवाब
39. करएताह/करयताह करेताह
40. दलान दिशि दलान दिश
41. गेलाह गएलाह/गयलाह
42. किछु आर किछु और
43. जाइत छल जाति छल/जैत छल
44. पहुँचि/भेटि जाइत छल पहुँच/भेट जाइत छल
45. जबान(युवा)/जवान(फौजी)
46. लय/लए क’/कऽ
47. ल’/लऽ कय/कए
48. एखन/अखने अखन/एखने
49. अहींकेँ अहीँकेँ
50. गहींर गहीँर
51. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
52. जेकाँ जेँकाँ/जकाँ
53. तहिना तेहिना
54. एकर अकर
55. बहिनउ बहनोइ
56. बहिन बहिनि
57. बहिनि-बहिनोइ बहिन-बहनउ
58. नहि/नै
59. करबा’/करबाय/करबाए
60. त’/त ऽ तय/तए
61. भाय भै
62. भाँय
63. यावत जावत
64. माय मै
65. देन्हि/दएन्हि/दयन्हि दन्हि/दैन्हि
66. द’/द ऽ/दए
किछु आर शब्द
मानक मैथिली_३
तका’ कए तकाय तकाए
पैरे (on foot) पएरे
ताहुमे ताहूमे
पुत्रीक
बजा कय/ कए
बननाय
कोला
दिनुका दिनका
ततहिसँ
गरबओलन्हि गरबेलन्हि
बालु बालू
चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
जे जे’
से/ के से’/के’
एखुनका अखनुका
भुमिहार भूमिहार
सुगर सूगर
झठहाक झटहाक
छूबि
करइयो/ओ करैयो
पुबारि पुबाइ
झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि
पएरे-पएरे पैरे-पैरे
खेलएबाक खेलेबाक
खेलाएबाक
लगा’
होए- हो
बुझल बूझल
बूझल (संबोधन अर्थमे)
यैह यएह
तातिल
अयनाय- अयनाइ
निन्न- निन्द
बिनु बिन
जाए जाइ
जाइ(in different sense)-last word of sentence
छत पर आबि जाइ
ने
खेलाए (play) –खेलाइ
शिकाइत- शिकायत
ढप- ढ़प
पढ़- पढ
कनिए/ कनिये कनिञे
राकस- राकश
होए/ होय होइ
अउरदा- औरदा
बुझेलन्हि (different meaning- got understand)
बुझएलन्हि/ बुझयलन्हि (understood himself)
चलि- चल
खधाइ- खधाय
मोन पाड़लखिन्ह मोन पारलखिन्ह
कैक- कएक- कइएक
लग ल’ग
जरेनाइ
जरओनाइ- जरएनाइ/जरयनाइ
होइत
गड़बेलन्हि/ गड़बओलन्हि
चिखैत- (to test)चिखइत
करइयो(willing to do) करैयो
जेकरा- जकरा
तकरा- तेकरा
बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
करबयलहुँ/ करबएलहुँ/करबेलहुँ
हारिक (उच्चारण हाइरक)
ओजन वजन
आधे भाग/ आध-भागे
पिचा’/ पिचाय/पिचाए
नञ/ ने
बच्चा नञ (ने) पिचा जाय
तखन ने (नञ) कहैत अछि।
कतेक गोटे/ कताक गोटे
कमाइ- धमाइ कमाई- धमाई
लग ल’ग
खेलाइ (for playing)
छथिन्ह छथिन
होइत होइ
क्यो कियो
केश (hair)
केस (court-case)
बननाइ/ बननाय/ बननाए
जरेनाइ
कुरसी कुर्सी
चरचा चर्चा
कर्म करम
डुबाबय/ डुमाबय
एखुनका/ अखुनका
लय (वाक्यक अतिम शब्द)- ल’
कएलक केलक
गरमी गर्मी
बरदी वर्दी
सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
एनाइ-गेनाइ
तेनाने घेरलन्हि
नञ
डरो ड’रो
कतहु- कहीं
उमरिगर- उमरगर
भरिगर
धोल/धोअल धोएल
गप/गप्प
के के’
दरबज्जा/ दरबजा
ठाम
धरि तक
घूरि लौटि
थोरबेक
बड्ड
तोँ/ तूँ
तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
तोँही/तोँहि
करबाइए करबाइये
एकेटा
करितथि करतथि
पहुँचि पहुँच
राखलन्हि रखलन्हि
लगलन्हि लागलन्हि
सुनि (उच्चारण सुइन)
अछि (उच्चारण अइछ)
एलथि गेलथि
बितओने बितेने
करबओलन्हि/ करेलखिन्ह
करएलन्हि
आकि कि
पहुँचि पहुँच
जराय/ जराए जरा’ (आगि लगा)
से से’
हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
फेल फैल
फइल(spacious) फैल
होयतन्हि/ होएतन्हि हेतन्हि
हाथ मटिआयब/ हाथ मटियाबय
फेका फेंका
देखाए देखा’
देखाय देखा’
सत्तरि सत्तर
साहेब साहब
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
'विदेह' १५ जुलाई २००८ ( वर्ष १ मास ७ अंक १४ ) १७. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILSVIDEHA MITHILA TIRBHUKTI TIRHUT-SahasraBarhani:The Comet --
VIDEHA MITHILA TIRBHUKTI TIRHUT---
Before King Nanyadeva Kirtivarma and Nrigavarma of the Karnat family ruled over some parts of Mithila.King Nriga was patron of Vachaspati.
Kirtivartnan I reigned from A.D. 567-68 to 597-98 and conquered Vatiga, Anga, Kalinga and other provinces of North India, later on Nrigvarman occupied a portion of Mithila.
Inscriptions relating to the Kadamb Kings of Goa .An inscription calls him descended from Trilocanakadamba.Kamala-devi the wife of the Permadi established seats of learn¬ing in many parts of the kingdom where Vedas, Vedangas, Nyaya, Mimamsa. Sankhya-yoga, Vedanta, Smriti, Itihasas and Puranas were taught besides astronomy.
Nanyadeva (A D 1097-1143) obtained the kingdom of Mithila in return for a tribute of I lakh, he calls himself " Mithilesvara " in his work on music. With founding of village Koili-Nanhapura (Nanyapura) near Nehra¬Raghopur ,Sakri his seat of government was Sivarampura-Simraon a village situated in Nepal 10 kms. North of the Purnahia factory in the Motihari Sub-division. He ruled for thirty six years in Mithila between the powerful Gahadwalas of Kasi and Senas of Magadha and Bengal. He clashed with Vijaya-sena, battle near Supaul and Nanyadeva was defeated in it. But his son Gangadeva and Malladeva defeated Vijayasena and towns of Malladiha and Gadgapar Rajani were established. Nanyadeva’ s minister was Sridhara Kayastha.
Nanyadeva wrote Sarasvati-bridaya Kanthahara, a work on music.Gangadeva (A.D. 1133-1174) secceded Nanyadeva. He introduced the system of fiscal divisions or parganas for the purposes of revenue administration. One tank near Laheriaserai and another in Anhara-Tharhi were constructed by him.
His brother ruled over Nepal.Malladeva another son of Nanyadeva is known through Vidyapati's Purushapariksha, the Yuddhavira. Malladeva served under Jayachandra of Kanauj .
Narasimhadeva I (A.D 1174-1226)succeded Gadgadeva. Called Satyavira by Vidyapati in his Purushapariksha. He quarreled with his kinsman, the king of Nepal and Mithila and Nepal were separated.Tughril Tughan (A.D. 1232-44) raided Tirhut. Ghias-ud-din I Uddin undertook an expedition to Mithila.
Ramasimhadeva came to the throne in 1226 A D. During his time commentaries on the Vedas were compiled. Village officers were appointed.Shaktisimhdeva (AD.1284-12.96) succeeded his father in 1284 A.D. his seat of government was near modern Sakri Railway Station. Harisimhadeva (A. D. 1296-1323) He was one of the most famous kings of Mithila. ¬He reorganised the social hierarchy of Maithil Brahmanas.In 1323 the Emperor of Delhi, Ghiyasuddin Tughlaq (A.D. 1320-1325) conquered Tirhut.Sultan Haji Shamsuddin of Bengal founded Hajipur and Shamsuddinpur (Samastipur) extended his conquests to Tirhut and Champaran while going to Nepal. In A.D. 1352 Firuz Tughlaq became angry and crossed Kosi and drove out Ilyas from Tirhut.Matisinha, Saktisinha and Syatirasimha ruled Mithila. The daughter of Syamasidhadeva is said to have been married to a descedant of the family of Mallas, who took over the rule of Nepal from the Karnata dynasty.The Sarqui rulers of Jannpur ruled over the greater part of North Bihar in the first half of the 15th centuries.
English Translation of Gajendra Thakur's Maithili Novel Sahasrabadhani by Smt. Jyoti Jha Chaudhary
Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London.
Jyoti received editor's choice award from www.poetry.com and her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.
SahasraBarhani:The Comet
Year 1885: A boy was born in Jhingur Thakur’s house. It was the same year when an historical event of formation of Congress Party was to be held later on. British rule could be said successful in establishing itself strongly in India. It was the period when the Indian rulers started feeling proud of being associated with British. Congress was noticeable in those days because of its disturbing attitude in the field of education. Ultimately, Congress had got recognition as assurer of undisturbed future to an Indian government compromising its freedom to British rule. To change its image of acceptor of the on going interference rather dominance of British rule, the Congress was to immerge as a revolutionary reformer. However, Sanskrit was dominating language but it was impossible to get a government job without learning English. The scope of government jobs rendered by Indians were related as well as limited to collecting money from Indian rulers. And, a post called Kirani Babu occupied by British people also immerged later on.
In such social condition the boy was kept away from the language of Sanskrit. English was not in use in Maithil families and that is why they were one generation backward in those days. But Jhingur Babu arranged a teacher from Kolkata to educate his son. A Bengali Teacher taught the boy English in Darbhanga afterwards. It was the effect of such education that Kalit became an expert orator with enchanting wittiness. The boy whom Jhingur Babu had seen as a newborn infant smiling while sleeping, then crawling and then toddling is now being educated. He remembered how the baby Kalit was bumping like a frog while learning how to crawl. That memory of his son brought a smile in his face. His wife asked him about the reason of that smile. After being failed in hiding the reason he told everything to his wife. That was enough reason to make the couple exploring the past, the childhood of their son.
“Once Kalit was crawling in the courtyard and after crossing the courtyard when he found pebbles he started crawling by lifting his knees up”, recalled his wife.
“One day I found him trying to stand on window by holding the wall. I decided to leave him trying. He couldn’t succeed two times and fell down on the bed. His hands couldn’t reach the windows but in his third attempt he jumped high enough to get a grip in widow and stood straight”, Jhingur Babu remembered.
“I was counting something oneday, suddenly a sound of oo followed when I said two. I repeated the word and my sound was followed by that sound again then I realised that Kalit was copying me.”
“One day after returning from field, I took bathe and ate lunch, and then I cleared my throat by making some sound. Kalit copied the same sound. When I looked back I found him playing with ball. I repeated my sound and he again copied me. I didn’t tell him anything but I understood that he is copying me. Everyone in guest hall started laughing. They started making such sound and Kalit didn’t stop copying them each time in his unique style. How old was he at that time- nine or ten months”
“And what I told you, at that time he must be six or seven months old”, said his wife. She was speaking to him directly when only two of them were having their private conversation; she was talking in different way in front in front of her in-laws or other person. Jhingur Babu was also not different from her and he was also talking in third person in presence of others. Everything remains normal in privacy. Jhingur Babu smiled again, vowed to keep Kalit out from this culture, afterall he should realise how backward is his father. Wife again questioned about his laughter but he didn’t disclose anything this time and went to outside.
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Monday, July 28, 2008
'विदेह' १ जुलाई २००८ ( वर्ष १ मास ७ अंक १३ )४.महाकाव्यमहाभारत –गजेन्द्र ठाकुर(आगाँ)
महाभारत –गजेन्द्र ठाकुर(आगाँ) ------
५.उद्योग पर्व
करए लगलाह पांडव युद्धक तैयारी विराट द्रुपदक संग पाबि
लगाए कुरुक्षेत्र लग पांडव रुकलाह शिविर पसारि।
दुर्योधनकेँ जखन लागल खबरि ओहो कएलक तैयारी,
संदेश पठाओल राजा सभकेँ कौरव पांडव तखन,
अपन पक्षमे करबा लेल युद्ध शुरु होएत जखन।
कुरुक्षेत्रक स्थलीमे सभटा जुटान लागल होए शुरू,
यादव गणकेँ पक्ष करबा लए दुर्योधन द्वारका गेल स्वयं।
पहुँचि दुर्योधन गेल देखल कॄष्ण छलाह सुतल ओतए,
अर्जुन सेहो पहुँचल पैर दिशि बैसि गेल ओऽ ओतए।
कृष्ण जखन उठि देखल अर्जुन छल ओतए,
कहू वत्स की चाही अहाँ आयल छी एतए।
युद्धमे संग अहाँक हमरा चाही हे नारायण,
अर्जुनकेँ बजिते दुर्योधन टोकल अएलहुँ पहिने एतए।
कृष्ण कहल हम शस्त्र नहि उठाएब युद्धमे,
नारायणी सेना चाही वा हमरा करब अँह पक्षमे।
दुर्योधन नारायणी सेना चुनि भेल संतुष्ट ऒऽ,
अर्जुनकेँ नारायण भेटल छल प्रफुल्लित सेहो।
पांडव मामा छलाह शल्य माद्रीक भाइ जे,
आबि रहल युद्धक लेल दुर्योधन सुनि गेल ओतए।
रस्तामे व्यवस्था-बात कएल तेहन छल,
शल्य कहल अछि मोन पुरस्कृत करी काज जकर।
दुर्योधन भेख बना जाए रहल छल ओतए,
प्रकट भए माँगल युद्धमे होऊ साहाय्य हमर,
एहि सभ व्यवस्थाक छी हमही निर्माण कएल।
शल्य दए स्वस्ति पहुँचलाह जखन कुरुक्षेत्र,
युधिष्ठिर सुनू छल भेल हमरा संग अतए।
कौरवक पक्षमे युद्ध करबा लए वचन बद्ध,
कहू कोन विध होए साहाय्य अहाँक व्त्स।
युधिष्ठिर कहल बनू सारथी कर्णक आऽ कर्रू,
हतोत्साहित कर्णकेँ गुणगान गाबि पांडवक।
शल्य कौरवक शिविर दिशि चललाह तखन,
युद्ध सन्निकट अछि कृष्ण अएलाह जानि सेहो,
एतए सुनल द्रुपदक पुरहित गेल छल धृतराष्ट्र लग।
संधिक प्रस्ताव पर देलक क्यो नहि टेर ओतए,
दुर्योधन कहल राज्य छोड़ू सुइयाक नोक देखने छी?
नहि भेटत पृथ्वी ओतबो राज्यक तँ छोड़ू बात ई।
युधिष्ठिर कहल श्रीकृष्णकेँ आध राज्य छोड़ैत छी,
जाऊ कृष्ण पाँच गाम दुर्योधन देत जौँ राखू ई प्रस्ताव,
ओतबहिमे करब हम सभ भाँय मायक संग निर्वाह।
सात्यकीक संग कृष्ण हस्तिनापुरक लेल चलला जखन,
द्रौपदी कहलन्हि देखू केश फुजले अछि ओहिना धरि एखन,
कानि कहल सँधि होयत युद्ध बिन खुजले रहत वेणी तखन।
कृष्ण कहल मानत नहि सँधिक गप कखनहु दुर्योधन,
युद्ध अछि अनिवार्य मनोरथ पूर्ण होयत द्रौपदीक अहँक।
कृष्ण जखन गेलाह हस्तिनापुर सभ प्रसन्न छल,
धृतराष्ट्र, दुःशासन-दुर्योधनक संग स्वागत कएल।
मुदा कृष्ण ओतए नहि ठहरि दीदी कुन्तीक लग गेलाह,
विदुरक गृहमे छलीह ओतए गप विस्तृत भेल आब।
कहल कुन्ती दीदी जाऽ कए कर्णकेँ परिचए दिअ,
आबि जाएत भ्रातृ-पाण्डव लग सत्य ओऽ जानि कए।
दोसर दिन सभामे पहुँचलाह कृष्ण छल ओतए मुदा,
दुर्योधन विचारल बान्हि राखब कृष्णकेँ अएताह जौँ।
भीष्म धृतराष्ट द्रोण कृप कर्ण शकुनि दुःशासन ओतए,
कृष्ण कहल शकुनिक चौपड़ दुर्योधनक दिशिसँ फेकब,
अन्यायपूर्ण छल ओहिना द्रौपदीक अपमान छल करब।
विराट पर आक्रमण पाण्डवकेँ सतेबाक उपक्रम बनल,
आध राज्य जौँ दए दी तखनो शान्तिसँ रहि सकैछ सभ।
सभ कएल स्वागत एकर दुर्योधन मुदा क्रोधित बनल,
कृष्णकेँ बन्हबाक आज्ञा देलक भीष्म तमसयलाह बड़।
तेज कृष्णक मुखक देखि कौरव भयसँ छल सिहरल।
दुर्योधन कहल पिता ज्येष्ठ हमर अंध छलाह से राज्य नहि भेटलन्हि,
हुनक पुत्र ज्येष्ठ हम से अधिकार हस्तिनापुर पर अछि सुनलहुँ।
पाण्डव अन्यायसँ लए राज्य करए छथि तैय्यारी युद्धक,
कृष्ण अछि पाछाँ ओकर हम तँ रक्षा राज्यक करए छी।
कृष्ण कहलन्हि तखन पाँच गाम दिअ करबाऽ लए निर्वाह,
मुदा दुर्योधन कहल राज्यक भाग नहि होएत गए आब।
कृष्ण बाजि जे हे दुर्योधन मदान्ध छी बनल अहाँ,
पाण्डवक शक्त्तिक सोझाँ नाश निश्चित बुझू अहाँक।
कुन्ती बादमे गेलीह कर्णकेँ कहल दुर्वासाक मंत्र भेटल,
पढ़ल सूर्यकेँ स्मरण कए पुत्र हमर भेलहुँ अहाँ तखन।
प्रणाम कएल माताकेँ कर्ण तखन बजलीह सुनू ई,
ज्येष्ठ पाण्डव छी अहाँ राज्य युधिष्ठिर देत अहीकेँ।
जखन नहि मानल कर्ण कुन्ती पुछल मातृऋणसँ,
उबड़ब कोना कर्ण बाजल हे माता तखन सुनू ई।
अर्जुनकेँ छोड़ि चारू पाण्डवसँ नहि लड़ब पूर्ण शक्त्तियेँ,
अर्जुनकेँ मारब तखन बनब पुत्र अहीकेँ।
वा मरब हम पुत्र तैयो पाँच टा रहबे करत,
ई प्रतिज्ञा हम करए छी माता कुन्ती अएलीह घुरि।
कृष्ण आबि घुरि पहुँचि शिविर पाण्डवक जखन,
पाण्डव युद्धक कएल प्रक्रिया शुरू ओतए तखन।
सात अक्षौहिणी सेना घोड़ा, रथ, हाथी, सैनिकक,
अर्जुन भीम सात्यिकि धृष्टद्युम्न द्रुपद विराट लग।
कौरव सेहो एगारह अक्षौहिणी सेना कृपाचार्य शल्य भूरिश्रवा,
भीष्म द्रोण कर्ण अश्वत्थामा जयद्रथ कृतवर्मा भगदत्त छल।
धृष्टद्युम्न सेनापति पाण्डवक भीष्म कौरवक बनल,
कर्ण शस्त्र नहि उठेबाक कएल प्रतिज्ञा
भीष्म यावत युद्धक्षेत्रमे रहताह गए।
भीष्म कहल मारब नहि पाण्डवकेँ एकोटा,
सेनाक संहार करब यथा संभव होएत।
ब्यास धृतराष्ट्रक लग गेलाह कहल ब्यासजी सुनू,
अंधत्व भेल वर हमर कुल संहार देखब नहि किएक।
मुदा वीरक गाथा सुनबाक अछि इच्छा बहुत,
ब्यास देल योगसँ दिव्यदृष्टि संजयकेँ कहल,
बैसले-बैसल देखि संजय वर्णन करताह युद्धक,
बाजि ई ब्यास बिदा भए गेलाह ओतएसँ।
६. भीष्म पर्व
(अनुवर्तते)
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'विदेह' १ जुलाई २००८ ( वर्ष १ मास ७ अंक १३ ) १२. पञ्जी प्रबंध-गजेन्द्र ठाकुरपंजी-संग्राहक- श्री विद्यानंद झा पञ्जीकार (प्रसिद्ध मोहनजी)
पञ्जी प्रबंध
पंजी-संग्राहक- श्री विद्यानंद झा पञ्जीकार (प्रसिद्ध मोहनजी)
श्री विद्यानन्द झा पञीकार (प्रसिद्ध मोहनजी) जन्म-09.04.1957,पण्डुआ, ततैल, ककरौड़(मधुबनी), रशाढ़य(पूर्णिया), शिवनगर (अररिया) आ’ सम्प्रति पूर्णिया। पिता लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया|पितामह-स्व. श्री भिखिया झा | पञ्जीशास्त्रक दस वर्ष धरि 1970 ई.सँ 1979 ई. धरि अध्ययन,32 वर्षक वयससँ पञ्जी-प्रबंधक संवर्द्धन आ' संरक्षणमे संल्गन। कृति- पञ्जी शाखा पुस्तकक लिप्यांतरण आ' संवर्द्धन- 800 पृष्ठसँ अधिक अंकन सहित। पञ्जी नगरमिक लिप्यान्तरण ओ' संवर्द्धन- लगभग 600 पृष्ठसँ ऊपर(तिरहुता लिपिसँ देवनागरी लिपिमे)। गुरु- पञ्जीकार मोदानन्द झा। गुरुक गुरु- पञ्जीकार भिखिया झा, पञ्जीकार निरसू झा प्रसिद्ध विश्वनाथ झा- सौराठ, पञ्जीकार लूटन झा, सौराठ। गुरुक शास्त्रार्थ परीक्षा- दरभंगा महाराज कुमार जीवेश्वर सिंहक यज्ञोपवीत संस्कारक अवसर पर महाराजाधिराज(दरभंगा) कामेश्वर सिंह द्वारा आयोजित परीक्षा-1937 ई. जाहिमे मौखिक परीक्षाक मुख्य परीक्षक म.म. डॉ. सर गंगानाथ झा छलाह।
द्वितीय छठि
वृद्ध पितामह राधानाथ झाक श्वसुर माड़रि वलियास मूलक इन्द्रपति झाक बालक धनपति झा होएताह से एहि प्रकारे गणना – धनपति-=१, जमाय=राधानाथ= २, तनिक बालक कंटीर=पीताम्बर=४, शशिनाथ-कन्या=६
तृतीय छठि
(अनुवर्तते)
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'विदेह' १ जुलाई २००८ ( वर्ष १ मास ७ अंक १३ ) १३. संस्कृत मिथिलायाज्ञवल्क्य-–गजेन्द्र ठाकुर
याज्ञवल्क्य
याज्ञवल्क्य मिथिलाक दार्शनिक राजा कृति जनकक दरबारमे छलाह। हुनकर माताक वा पिताक नाम सम्भवतः वाजसनी छलन्हि। ओना हुनकर पिता देवरातकेँ मानल जाइत छन्हि। हुनकर माता ऋषि वैशम्पायनक बहिन छलीह। वैशम्पायन याज्ञवल्क्यक मामा छलाह संझ्गहि हुनकर गुरु सेहो। हुनकर पिता खेनाइ पुरस्कारक रूपमे बँटैत रहथि आऽ तेँ हुनकर नाम बाजसनि सेहो छन्हि। ब्यासक चारू पुत्रसँ ओऽ चारू वेदक शिक्षा पओलन्हि। यजुर्वेद ओऽ वैशम्पायनसँ सेहो सिखलन्हि, वेदान्त उद्दालक आरुणिसँ आऽ योगक शिक्षा हिरण्यनाभसँ लेलन्हि।
याज्ञवल्क्यक दू टा पत्नी छलथिन्ह, १. कात्यायनी आऽ दोसर मैत्रेयी। मत्रेयी ब्रह्मवादिनी छलीह। कात्यायनीसँ हुनका तीनटा पुत्र छलन्हि- चन्द्रकान्ता, महामेघ आऽ विजय।
याज्ञवल्क्य १. शुक्ल यजुरवेद, २. शतपथ ब्राह्मण, बृहदारण्यक उपनिषद आऽ याज्ञवल्क्य स्मृतिक दृष्टा/लेखक छथि। याज्ञवल्क्य स्मृतिमे आचार, व्यवहार, आऽ प्रायश्चित अध्याय अछि।राजधर्म, सिविल आऽ क्रिमिनल लॉ एहिमे अछि।कौटिल्य जेकाँ याज्ञवल्क्य सेहो मानैत छथि जे राजा आऽ पुरहित दुनू दण्डनीतिक ज्ञान राखथि। याज्ञवल्क्य राज्यक सप्तांग सिद्धांतक चरचा सेहो विस्तारमे करैत छथि।
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विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
'विदेह' १ जुलाई २००८ ( वर्ष १ मास ७ अंक १३ ) १४.समयकेँ अकानैत- श्री पंकज पराशर पोथी समीक्षा
श्री पंकज पराशर (१९७६- )। मोहनपुर, बलवाहाट चपराँव कोठी, सहरसा। प्रारम्भिक शिक्षासँ स्नातक धरि गाम आऽ सहरसामे। फेर पटना विश्वविद्यालयसँ एम.ए. हिन्दीमे प्रथम श्रेणीमे प्रथम स्थान। जे.एन.यू.,दिल्लीसँ एम.फिल.। जामिया मिलिया इस्लामियासँ टी.वी.पत्रकारितामे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। मैथिली आऽ हिन्दीक प्रतिष्ठित पत्रिका सभमे कविता, समीक्षा आऽ आलोचनात्मक निबंध प्रकाशित। अंग्रेजीसँ हिन्दीमे क्लॉद लेवी स्ट्रॉस, एबहार्ड फिशर, हकु शाह आ ब्रूस चैटविन आदिक शोध निबन्धक अनुवाद। ’गोवध और अंग्रेज’ नामसँ एकटा स्वतंत्र पोथीक अंग्रेजीसँ अनुवाद। जनसत्तामे ’दुनिया मेरे आगे’ स्तंभमे लेखन। पराशरजी एखन हिन्दी पत्रिका ’कादम्बिनी’मे वरिष्ठ कॉपी सम्पादक छथि।
समयकेँ अकानैत
समयकेँ अकानैत
पंकज पराशरक पहिल मैथिली पद्य संग्रह ’समयकेँ अकानैत’ मैथिली पद्यक भविष्यक प्रति आश्वस्ति दैत मुदा एकर कविता सभ श्रीकान्त वर्माक मगधक अनुकृति होएबाक कारण आ रमेशक प्रति आक्षेपक कारण,( पहिनहियो अरुण कमल आ बादमे डगलस केलनर, नोम चोम्स्की, इलारानी सिंहक रचनाक पंकज पराशर द्वारा चोरिक कारण) मैथिली कविताक इतिहासमे एकटा कलंक लगा जाइत अछि।। एहिमे युवा कविक ४८ गोट पद्यक संग्रह अछि। एहिमे कविक १९९६ केर ३ टा, १९९८ केर ६ टा १९९९ केर ६ टा, २००० केर ५ टा, २००१ केर ३ टा, २००२ केर ३ टा, २००३ केर ९ टा आऽ २००४ केर १३ टा पद्य संकलित अछि। कवि नहिये जोनापुरकेँ बिसरैत छथि. नहिये द्वारबंगकेँ, नहिये गणेसरकेँ नहिये देवसिंहकेँ। ५ टा पद्यमे ओऽ बुद्धकेँ सेहो सोझाँ अनैत छथि| मुदा एतए ई देखब सेहो उचित होयत जे महावीर विदेहमे छह टा बस्सावास बितेलन्हि मुदा बुद्ध एकोटा नहि। से कवि जैन महावीरक प्रसंग जौँ बिसरल छथि, तँ हमरा सभ आशा करैत छी जे ई प्रसंग सभ कविक दोसर पद्य संग्रहमे सम्मिलित कएल जएतन्हि, कवि ताहि तरहक रचना सेहो रचथु।
एहि संग्रहक ४८म पद्य थीक ’समयकेँ अकानैत’ जकर नाम पर एहि पोथीक नामकरण भेल अछि।
सोहरक धुन पर समदाओन गबैत
पिंडदानक मंत्रकेँ सुभाषितानि कहैत
फेर किसिम-किसिम के तांत्रिक सब
छंदमे दैत अछि बिक्कट-बिक्कट गारि
आऽ अकानैत कवि अन्तमे कहैत छथि
कतेक आश्चर्ययक थिक ई बात
कि एहि छन्दहीन समयमे
छन्देमे निकलैत अछि
ई सबटा आवाज।
१.कजरौटी
काजर बनेबा लेल सरिसबक तेलक दीप जराओल जाइत अछि। कवि कहैत छथि,
काजरक लेल सुन्न हमर आँखि
कतेक दिनसँ तकैए कजरौटी दिस अहर्निश
मुदा मैञाक स्मृति दोषक कारणेँ वा सरिसबक तेलक
अभावक कारणेँ
हमर आँखि जकाँ आब कजरौटीयो
सुखले रहैत अछि सभ दिन
कविक संवेदना मोनकेँ सुन्न आकि झुट्ठ कए दैत अछि, के एहन संवेदनाक अनुभव नहि करत, कविताक पाठक नहि बनत?
२.खबरि
ओहिना खबरि देखैत रहब प्रूफ
भीजल जारनि जेकाँ धुँआइत-धुँआइत
जरि जायब एहिना एक दिन
एकटा समय अबैत अछि सभक जीवननमे जखन अपन कार्यक्षेत्रक नीरसताक प्रति लोक सोचए लगैत अछि, जहिना कवि एहि पद्यमे कएने छथि।
३.महापात्र
अश्पृश्यता जकर प्राचीन ग्रंथमे कोनो चरचा नहि तकर वीभत्स रूपक वर्णन १७ शब्दमे (पंक्ति ओना १२ टा अछि) कवि कएने छथि। चमैन बच्चाक जन्मसँ छठिहारि धरि सेवा करैत अछि आऽ तकर बाद अश्पृश्य भए जाइत अछि।
४.प्रेममे पड़ल लोक
प्रेममे पड़ल लोकक वर्णन मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोणसँ कवि कएने छथि।
५.हमर गाम
कवि ९ टा शब्दकेँ १० टा पाँतीमे लिखने छथि, दोसर रूपेँ कही तँ ’मोनमे” ई एकटा शब्द अछि मुदा कवि मोन आऽ मे केँ दू पाँतिमे दए गामक दृश्य उपस्थित कए देने छथि।
६. माधव हम परिणाम निरासा
विद्यापतिक जोनापुर (दिल्ली) आगमनक प्रसंग लए कवि विद्यापतिक कविताक शस्त्रक बहन्ने अपन पद्यक शस्त्र सक्षम रूपेँ चला रहल छथि।
शक्तिहीन सत्ताक दृष्टिहीन-चारण टहंकारसँ उठबैत
७.काहुक केओ नहि करए पुछारे
विद्यापतिकेँ तुरंत कयल जाय
देशसँ बाहर...
सदावत्सले मातृभूमिक बदलामे
कामिनीक नांगट देहक आ
नव अनुगामिनी राधाक कोनो बाधा नहि मानबाक
करैत अछि रसपूर्ण वर्णन
८.बोधगया ९.पुनर्निष्कासन ११. वैशाली १२.स्थविर १३.सारनाथ बुद्धक प्रसंग लए उठाओल गेल अछि।
१०.सैनिकोपाख्यानमे सैनिकक मनोव्यथा एहि रूपमे आयल अछि
बिसफीयो वला पंडितजी तँ महाराजे टा प्र लिखलनि..
आऽ
कास-पटपटीक जंगलमे
हम आइयो कटैत छी अहुरिया
१४.जुत्ता
हरिमोहन झाक जमाय पर लिखल कथा मोन पाड़ि दैत अछि।
१५.छठिहारसँ पहिने
छठिहारक राति बिधना भाग्य लिखैत छथि, मुदा कवि कहैत छथि जे जे बिधना की लिखत से हमर चानी आ तरहत्थ चीन्हैत अछि।
१६.बनारस : किछु चित्र
काशीक विश्वनाथक चित्र सोझाँ अबैत अछि वाराणसीक नाम लेने, मुदा कवि बनारसक चित्र खेंचि दैत छथि,
बनारस
बेर-बेर गनैत अछि लहास
१७.मनियाडरक दूपतिया
डाकपीन दू टाका सैकड़ाक दरसँ कमीशन पहिने कटैए
टाका दैत पढ़ि कए सुनबैए-
मनियाडर पाइक संगे संदेश सेहो अनैत अछि, ओहिमे जे छोट स्थान देल रहैत अछि अंदेशक लेल ताहिमे दुइये पाँति लिखल जा सकैत अछि तेँ कवि लिखैत छथि,दूपतिया।
१८.आँखि
नोनछाह नोरक स्वाद बुझनेँ रही अनचोक्के
जखन सिरमा लग बैसल माय कनैत छलीह
गिरैत नोरसँ अनजान..
फेर-
असहाय आ बेबस नजरिसँ दुलार करैत माय
कोना ल’ सकैत छलीह कोरामे हमरा
सबहक सोझाँ
दादी आ दीदीक नजरिसँ बाँचि कए?
आपात चिकित्सा कक्षसँ घुरैत बेटाक मायक प्रति भावनाक स्फोट अछि ई पद्य।
समयकेँ अकानैत
पंकज पराशरक पहिल मैथिली पद्य संग्रह ’समयकेँ अकानैत’ मैथिली पद्यक भविष्यक प्रति आश्वस्ति दैत मुदा एकर कविता सभ श्रीकान्त वर्माक मगधक अनुकृति होएबाक कारण आ रमेशक प्रति आक्षेपक कारण,( पहिनहियो अरुण कमल आ बादमे डगलस केलनर, नोम चोम्स्की, इलारानी सिंहक रचनाक पंकज पराशर द्वारा चोरिक कारण) मैथिली कविताक इतिहासमे एकटा कलंक लगा जाइत अछि।। (पोथीक शेष कविता पर समीक्षा अगिला अंकमे- अनुवर्तते)
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
'विदेह' १ जुलाई २००८ ( वर्ष १ मास ७ अंक १३ ) १६. रचना लेखन-गजेन्द्र ठाकुर/ विद्यापति शब्दावली
विद्यापति शब्दावली
एहि अंकमे विद्यापतिक मैथिली पदावलीसँ हुनकर शब्दावलीसँ परिचित करबाओल जाऽ रहल अछि जाहिसँ अहाँक लेखनी मृगमदमय भए जायत।
मृगमद = कस्तूरी
वासर = दिन
रैन = राति
लिधुर = रक्त
पुर नटी = नागर नटी
अवतरु = अवतरित होऊ
कनक भूधर = सुमेरु पर्वत
चन्द्रिका चय = चन्द्रिकाक समूह
निपातिनि = नाश करएबाली
भक्त भयापनोदन = भक्तक भए दूर करएबाली
दुरित हारिणि = विपत्तिक भार हरण करएबाली
दुर्गमारि = भयङ्कर शत्रु
विमर्द = विनष्ट
गाहिनी = विचरण करएबाली
सायक = वाण
सुकर = सुन्दर
पिसित = काँच मौस
पारणा = तृप्ति
रभसे = आनन्दित करएबाली
कृशानु = अग्नि
चुम्ब्यमान = चुम्बन करैत अछि
परिच्युति = नष्ट करैत अछि
आड़ = लाल
भागि = वक्र
गोए = नुका कए
सुधाए = अमृत
कुशेशय = शतपत्र कमल
अधबोली = असंपूर्ण वाक्य
खनेखन = क्षणे-क्षण
उचिक = चकित भावेँ
आरति = पीड़ा
अनानि = अज्ञानी
दन्द = झगड़ा
हेरैत = देखैत
मनसिज = कामदेव
गौरव = गुरुता
खीन = क्षीण
अओके = दोसराक
लहु = लघु
परगास = प्रकाश
सुरत विहार = काम-क्रीड़ा
नवरङ्ग = संतोला
सन्तापलि = कष्ट देनाइ
बाङ्क = वक्र
पसाह = प्रसाधन
भीति = भयसँ
तिष = तीक्ष्ण
सिझल = सिद्ध भेल
कोरि = बैर फल
ससन = वायु
धनि = नायिका
अम्बर = वस्त्र
रेह = रेखा
रङ्ग = आनन्द
अलका = लेप
मसि = सियाही
समरा = श्यामल
कचोरा = कटोरा
पहू = प्रभू
ससधर = चन्द्रमा
मनोभव = कामदेव
सउदामिनी = विद्युत
करिनि = हस्तिनी
वयन = मुख
परिमल = सुगन्धि
तनरुचि = शरीरक गोराइ
अरुझायल = ओझरा गेल
बिलास-कानन = प्रमद-वन
निविल = घनगर
विहि = विधि
निञ = निज
विद्रुम दले = मौसरीक पातमे
तिहुअन = त्रिभुवन
मल्ल = पहलबान
हाटक = सोना
थम्भ = स्तम्भ
चिकुर-निकर = केशपाश
विचरित = निअम विरुद्ध
कवरी = केशपाश
चामरि = चँवर गाय
सम्भसि = सम्भाषण
न जासि = नहि कएल जाऽ सकैछ
हुतासे = अग्नि
मो = हम
पीहलि = झाँपि देलक
पीहित = आच्छादित
कुहुकि = मायाविनी
जुड़ायब = शीतल करब
दहइ = जड़ायब
अवनत = नीचाँ झुकल
बारल = निवारण कएल
धाओल = दौगि पड़ल
पसाहिम = प्रसाधन
फुलग = रोमांच
बलाअ = वलय
पेखलि = देखल
बेढ़लि = लिपटल
थीर = स्थिर
पुछसि = पुछैत छह
परस = स्पर्श
झुरए = व्याकुल होइत अछि
अम्बुद = मेघ
धन्दा = संदेह
पुतलि = मूर्ति
इन्दु = चन्द्रमा
महि = पृथ्वी
माझ = मध्य
खिन = क्षीण
मधु = पुष्प रस
उपेखि = उपेक्षा करके
तरुअर = तरुवर
लेख = उल्लेख
परिहरि = छोड़कर
तोरिए = तोहर
पाछिलि = पाछाँक
सनि = सदृश
अछलिहुँ = हम छलहुँ
छाजत = शोभित होएत
घोसिनी – ग्वालिन
बथु = वस्तु
अरतल = अनुरक्त
रव = हल्ला
राहि = राधा
तापिनि = ज्वाला
बयने = वाणी
धरनि = पृथ्वी
इथि = एकर
जोतिअ = ज्योतिष
मुरछइ = मूर्च्छा
आइति = अधीनता
महते = महावतसँ
नव = झुकैत अछि
एहो = ई
बटमारी = रस्तामे लुटनाइ
तुलाएल = बढ़ाओल
पसार = दोकान
पढ़ओंक = बोहनी
कुंगयाँ = गमार (कुगामक)
आजि = लगा देब
आग = अङ्ग
गोए = नुका कए
इन्दुमुखी = चन्द्रमुखी
तहु = ताहि परसँ
परिहरिहह = त्यागि देब
सारी = सारिका
सेचान = बाज
भामि-भामि = भ्रमण कए
विरडा = विडाल
सुरते = काम-क्रीड़ा
काहिअ अवधारि = विश्वासपूर्वक कहैत अछि
अन्तर नारी = नारीक हृदय
रोखए = रोष
गंजए = गंजन
रंजए = प्रसन्न
साह = ओऽ
तरासे = भए
परुष = कठिन
सोस = शुष्क
चेतन = समर्थ
आथि = अछि
सारी = संग
दूषलि = दुःख
निमाल = निर्माल्य
अंसुक = वस्त्र
वाँलभु = वल्लभ
नठल = नष्ट
परबोध = प्रबोध
पांगुर = पैरक आंगुर
खिति = क्षिति
गीभ = ग्रीवा
अनुसए = पश्चाताप
अनुरञ्जब = हम सम्हारि सकब
विरमाने = विराम-स्थल
एहो पय = इस पर भी
जार = जलाकर
नखत = नक्षत्र
जुगुतिहि = तर्कसँ
दोहाए = शपथ
रङ्ग = अनुराग
गरुअ = गुरुतर
पिसुन = चुगलखोर
अरुझओहल = ओझरायल
कञोनकँ = ककर ऊपर
बारि = बचा कए
फुलधालि = फूल धारण कए
कैतवे = छलसँ
अह = दिन
सपजत = सपरज
वथु = वस्तु
मोन्ति = मोती
धम्मिल = केशपाश
धोएल = स्थापित कएल
अङ्गिरि = अंगीकार करब
पुनिमाँ = पूर्णिमा
विभिनावए = अलग कए सकैत अछि
आनन = मुख
तिमिशरि = अंधकारक बैरी
चालक = प्रेरक
बम = उगलि रहल
भीभ = भआवोन
ओल = अन्त
कवल = ग्रास
सरूप = सत्य
निसिअर = निशाचर
भुअङ्गम = भुजङ्गम
उजोर = प्रकाश
झाप = डुबनाइ
मेंदुर = घन
मुदिर = मेघ
पाउस = पावस
निसा = निशा
निबिल = निविड़
निचोल = साड़ी
जामिक = प्रहरी
थैरेज = स्थैर्य
थोइआ = स्थापयित्वा
रञनि = रात्रि
सिरहि = शोभामे
असिलाइ = म्लान भऽ गेलाइ
वालँभू = स्वामी
मुसए = चोरि करबाक लेल
छैलरि = छलियाक
अरथित = याचनासँ
जड़ाइअ = ठण्डा करू
विरत रस = जकर स्वाद खतम भए गेल
अचेतन = मूर्ख
कके = किएक
लाघव = अनादर
चिटि-गुड़े = गुड़-चीटी
चुपड़लि = ब्याज
लओले लोथे = बहन्ना करलो उपरान्त
झाल = शुष्क
दरनि = दरारि
असेखि = अशेष
असहति = असहनशील
तत्न = तन्त्र
भाझहि = मध्य
खीनी = क्षीण
झपावह = ढ़कैत होए
परिरम्भि = आलिङ्गन कए
फुजलि = खुजि गेल
घोषसि = घोषणा
नखर = नख
पाँच पाँच गुन दस गुन चौगुन आठ दुगुन = ५*५*१०*४*८*२=१६०००
नखर = नख
छाँद = शोभा
हिया = हृदय
सदय = सहाय
कानुक = कृष्णाक
निरसाओल = नीरस कएल
सखिता = साक्षित कएल
करवाल = तलवार
काँढ़ = निकलैत अछि
कार = कारी
उजागरि = उज्जर
परिपन्तिहि = प्रतिपक्षीकेँ
पयगन्ड = प्रौढ़
मधुमखिका = मधुमक्षिका
उधारल = उद्धार कएल
लागर = युक्त
पुरहर = विवाह अवसर पर मांगलिक कलश
मन्दाकिनी = गङ्गाजल
केसु = किंशुक
विथुरलहु = पसारि देल
भिति = दीवारि
पौञनाल = कमलनाल
रात = लाल
ऐपन = अरिपन
हथोदक = हस्तोदक
विधु = रस्ताक ठकान
कनए-केआ = चम्पा+केरा = कनक+कदली
जैतुक = दहेज
डिठि = दृष्टि
तुलइलिहुँ = शीघ्रतासँ
अनुबन्ध = लगओनाइ
बोल छड़ = मिथ्यावादी
मज्जि = मज्जन कए
विथरओ = पसरि जाय
पाड़रि = गुलाब = पाटली
भोपति = हमरा लेल
वाउलि = पगली
विधुन्तुद = राहु
सेरी = शरणार्थी
परभृतक = कोकिल
मतेँ = मन्त्र
कि रहसि बोरि = की हास्यमे बाजि रहल छी
बालहि तोरि = अहाँक प्रेमिकाकेँ
भर बादर = मेघसँ भरल
झम्पि = रहि-रहि जोरसँ
सघने खर = तीव्र आऽ घन खर
डाहुकि = जोरसँ
थेघा = टेक कए
पख = पक्ष
पिआञे = प्रियतम
पङ्का = लेप
तथुहु = ओहिमे सेहो
दर = अपूर्व
अपद = बिना कारणक
साती = तीव्र वेदना
अवथाञे = अवस्था
पसाइल = पसारल
रासे = रोष
बालभु = वल्लभ
आएत = अधीन
सपूने = सम्पूर्ण
दिगन्तर = दूर देशमे
अरुझाए = ओझरल
आधिन = अधीन
पललि = भेल
खेञोब = क्षमा
जल आजुरि = जलाञ्जलि
सुसेरा = सुन्दर आश्रय
गोए = नुका कए
सम्भ्रम = अतर्कित
कराडहार = कड़ुआर (तकड़ा पकड़ि यमुना पार करब)
लहु-लहु आखरे = लघु-लघु अक्षर
तामरस = कमल
घनसार = कर्पूर
वेपथु = कम्प
मसृण = चिक्कन
सुदति = सुन्दर दाँतबाली
सुति = श्रुति
जति = जतेक
घमिअ = फूँकल जाइत अछि
आनइति = परवशता
दीब = शपथ
बड़इ = बहुत
देव देयासिनि = झाड़-फूँक करए बाली स्त्री
जटिला = कर्कशा
फुकरि = चिकरि
बहुरि = पुत्रवधू
अङ्गा = चिन्ह
बेसर = नाकक आभूषण
यन्त्रिया = वीणा बजाबए बला
यन्त्र = वीणा
फोटा = ठीका
समत = सम्मत
मौलि = मस्तकमे
मुसरेँ = मूसल
जेमाओव = भोजन
नवइते = उतरैत
पडिचाँ = पटिआ
माड़व = मड़बा
उगारल = घेरिकए पकड़ब
आँजल = अंजन
डाढ़ल = दग्ध कएल
गौह = खोह/ गुफा
बिलुविअ = बाँटल जाए
मउल = मुकुट
डाढ़ति = जरि जायत
श्मश्रु = दाढ़ी (मुँह बला खए बला नहि)
अधँगँ = अर्धाङ्ग
गरुअ = अधिक
अभरन = पहिरबाक वस्त्र
बड़ाव = प्रशंसा
तौँ = तथापि
निसाकर = चन्द्रमा
सरिस = सदृश
तांतल = उत्तप्त
सैकत = बालू
हब = होएत
निधुवन = संभोग
आरा = आन
कहाओसि = कहबैत छथि
राजमराल = राजहंस
सारङ्ग = हाथी
सारङ्गवदन = गणेश
(अनुवर्तते)
मैथिलीक मानक लेखन-शैली
1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य अग्राह्य
एखन अखन,अखनि,एखेन,अखनी
ठाम ठिमा,ठिना,ठमा जकर,तकर जेकर, तेकर तनिकर तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) अछि ऐछ, अहि, ए।
2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय: भ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।
6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय(अपवाद-संसार सन्सार नहि), किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि।यथा- हिँ केर बदला हिं।
17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
20.
ग्राह्य अग्राह्य
1. होयबला/होबयबला/होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला होयबाक/होएबाक
2. आ’/आऽ आ
3. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ ल’/लऽ/लय/लए
4. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल
5. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
6. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’
7. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करै बला/क’र’ बला
8. बला वला
9. आङ्ल आंग्ल
10. प्रायः प्रायह
11. दुःख दुख
12. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
13. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन
14. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
15. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
16. चलैत/दैत चलति/दैति
17. एखनो अखनो
18. बढ़न्हि बढन्हि
19. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ
20. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ
21. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
22. जे जे’/जेऽ
23. ना-नुकुर ना-नुकर
24. केलन्हि/कएलन्हि/कयलन्हि
25. तखन तँ तखनतँ
26. जा’ रहल/जाय रहल/जाए रहल
27. निकलय/निकलए लागल बहराय/बहराए लागल निकल’/बहरै लागल
28. ओतय/जतय जत’/ओत’/जतए/ओतए
29. की फूड़ल जे कि फूड़ल जे
30. जे जे’/जेऽ
31. कूदि/यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद
32. इहो/ओहो
33. हँसए/हँसय हँस’
34. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/नौ वा दस
35. सासु-ससुर सास-ससुर
36. छह/सात छ/छः/सात
37. की की’/कीऽ(दीर्घीकारान्तमे वर्जित)
38. जबाब जवाब
39. करएताह/करयताह करेताह
40. दलान दिशि दलान दिश
41. गेलाह गएलाह/गयलाह
42. किछु आर किछु और
43. जाइत छल जाति छल/जैत छल
44. पहुँचि/भेटि जाइत छल पहुँच/भेट जाइत छल
45. जबान(युवा)/जवान(फौजी)
46. लय/लए क’/कऽ
47. ल’/लऽ कय/कए
48. एखन/अखने अखन/एखने
49. अहींकेँ अहीँकेँ
50. गहींर गहीँर
51. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
52. जेकाँ जेँकाँ/जकाँ
53. तहिना तेहिना
54. एकर अकर
55. बहिनउ बहनोइ
56. बहिन बहिनि
57. बहिनि-बहिनोइ बहिन-बहनउ
58. नहि/नै
59. करबा’/करबाय/करबाए
60. त’/त ऽ तय/तए
61. भाय भै
62. भाँय
63. यावत जावत
64. माय मै
65. देन्हि/दएन्हि/दयन्हि दन्हि/दैन्हि
66. द’/द ऽ/दए
किछु आर शब्द
मानक मैथिली_३
तका’ कए तकाय तकाए
पैरे (on foot) पएरे
ताहुमे ताहूमे
पुत्रीक
बजा कय/ कए
बननाय
कोला
दिनुका दिनका
ततहिसँ
गरबओलन्हि गरबेलन्हि
बालु बालू
चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
जे जे’
से/ के से’/के’
एखुनका अखनुका
भुमिहार भूमिहार
सुगर सूगर
झठहाक झटहाक
छूबि
करइयो/ओ करैयो
पुबारि पुबाइ
झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि
पएरे-पएरे पैरे-पैरे
खेलएबाक खेलेबाक
खेलाएबाक
लगा’
होए- हो
बुझल बूझल
बूझल (संबोधन अर्थमे)
यैह यएह
तातिल
अयनाय- अयनाइ
निन्न- निन्द
बिनु बिन
जाए जाइ
जाइ(in different sense)-last word of sentence
छत पर आबि जाइ
ने
खेलाए (play) –खेलाइ
शिकाइत- शिकायत
ढप- ढ़प
पढ़- पढ
कनिए/ कनिये कनिञे
राकस- राकश
होए/ होय होइ
अउरदा- औरदा
बुझेलन्हि (different meaning- got understand)
बुझएलन्हि/ बुझयलन्हि (understood himself)
चलि- चल
खधाइ- खधाय
मोन पाड़लखिन्ह मोन पारलखिन्ह
कैक- कएक- कइएक
लग ल’ग
जरेनाइ
जरओनाइ- जरएनाइ/जरयनाइ
होइत
गड़बेलन्हि/ गड़बओलन्हि
चिखैत- (to test)चिखइत
करइयो(willing to do) करैयो
जेकरा- जकरा
तकरा- तेकरा
बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
करबयलहुँ/ करबएलहुँ/करबेलहुँ
हारिक (उच्चारण हाइरक)
ओजन वजन
आधे भाग/ आध-भागे
पिचा’/ पिचाय/पिचाए
नञ/ ने
बच्चा नञ (ने) पिचा जाय
तखन ने (नञ) कहैत अछि।
कतेक गोटे/ कताक गोटे
कमाइ- धमाइ कमाई- धमाई
लग ल’ग
खेलाइ (for playing)
छथिन्ह छथिन
होइत होइ
क्यो कियो
केश (hair)
केस (court-case)
बननाइ/ बननाय/ बननाए
जरेनाइ
कुरसी कुर्सी
चरचा चर्चा
कर्म करम
डुबाबय/ डुमाबय
एखुनका/ अखुनका
लय (वाक्यक अतिम शब्द)- ल’
कएलक केलक
गरमी गर्मी
बरदी वर्दी
सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
एनाइ-गेनाइ
तेनाने घेरलन्हि
नञ
डरो ड’रो
कतहु- कहीं
उमरिगर- उमरगर
भरिगर
धोल/धोअल धोएल
गप/गप्प
के के’
दरबज्जा/ दरबजा
ठाम
धरि तक
घूरि लौटि
थोरबेक
बड्ड
तोँ/ तूँ
तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
तोँही/तोँहि
करबाइए करबाइये
एकेटा
करितथि करतथि
पहुँचि पहुँच
राखलन्हि रखलन्हि
लगलन्हि लागलन्हि
सुनि (उच्चारण सुइन)
अछि (उच्चारण अइछ)
एलथि गेलथि
बितओने बितेने
करबओलन्हि/ करेलखिन्ह
करएलन्हि
आकि कि
पहुँचि पहुँच
जराय/ जराए जरा’ (आगि लगा)
से से’
हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
फेल फैल
फइल(spacious) फैल
होयतन्हि/ होएतन्हि हेतन्हि
हाथ मटिआयब/ हाथ मटियाबय
फेका फेंका
देखाए देखा’
देखाय देखा’
सत्तरि सत्तर
साहेब साहब
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
'विदेह' १५ जून २००८ ( वर्ष १ मास ६ अंक १२ )
महत्त्वपूर्ण सूचना: २० म शताब्दीक सर्वश्रेष्ठ मिथिला रत्न श्री रामाश्रय झा 'रामरंग' जिनका लोक 'अभिनव भातखण्डे' केर नामसँ सेहो सोर करैत छन्हि, 'विदेह' केर हेतु अपन संदेश पठओने छथि आऽ ताहि आधार पर हुनकर जीवन आऽ कृतिक विषयमे विस्तृत निबंध विदेहक संगीत शिक्षा स्तंभमे ई-प्रकाशित करबाक हमरा लोकनिकें सौभाग्य भेटल अछि।
१.नो एंट्री: मा प्रविश श्री उदय नारायण सिंह 'नचिकेता'
मैथिली साहित्यक सुप्रसिद्ध प्रयोगधर्मी नाटककार श्री नचिकेताजीक टटका नाटक, जे विगत २५ वर्षक मौनभंगक पश्चात् पाठकक सम्मुख प्रस्तुत भ' रहल अछि। सर्वप्रथम विदेहमे एकरा धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित कएल जा रहल अछि। पढ़ू नाटकक तेसर कल्लोलक पहिल खेप।
२. शोध लेख: मायानन्द मिश्रक इतिहास बोध (आगाँ)
३. उपन्यास सहस्रबाढ़नि (आगाँ)
४. महाकाव्य महाभारत (आगाँ)
५. कथा - गंगेश गुंजन- गोबरक मूल्य
गजेन्द्र ठाकुर- पहरराति
६. पद्य
मैथिली हैकू पद्य- रवीन्द्रनाथ ठाकुर सेहो हैकू लिखलन्हि, मुदा मैथिलीमे पहिल बेर जापानी पद्य विधाक आधार पर "विदेह" प्रस्तुत कए रहल अछि ई विधा।
पद्य:
अ. विस्मृत कवि स्व. रामजी चौधरी,
आ.ज्योति झा चौधरी आऽ इ. गजेन्द्र ठाकुर
७. संस्कृत मैथिली शिक्षा(आगाँ)
८. मिथिला कला(आगाँ)
९.पाबनि-संस्कार- तीर्थ - डिस्कवरी ऑफ मिथिला
१०. संगीत शिक्षा -श्री रामाश्रय झा 'रामरंग' ११. बालानां कृते- मूर्खाधिराज/देवीजी: पिंजराक पक्षी
१२. पञ्जी प्रबंध (आगाँ) पञ्जी-संग्राहक श्री विद्यानंद झा पञ्जीकार (प्रसिद्ध मोहनजी )
१३. संस्कृत मिथिला १४.मैथिली भाषापाक
१५. रचना लेखन (आगाँ)
16. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS -Videha Mithila Tirbhukti Tirhut...
महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) विस्मृत कवि स्व. रामजी चौधरी (1878-1952)पर शोध-लेख विदेहक पहिल अँकमे ई-प्रकाशित भेल छल।तकर बाद हुनकर पुत्र श्री दुर्गानन्द चौधरी, ग्राम-रुद्रपुर,थाना-अंधरा-ठाढ़ी, जिला-मधुबनी कविजीक अप्रकाशित पाण्डुलिपि विदेह कार्यालयकेँ डाकसँ विदेहमे प्रकाशनार्थ पठओलन्हि अछि। ई गोट-पचासेक पद्य विदेहमे नवम अंकसँ धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित भ' रहल अछि।
महत्त्वपूर्ण सूचना:(२) 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर मैथिली-अंग्रेजी आऽ अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश (संपादक गजेन्द्र ठाकुर आऽ नागेन्द्र कुमार झा) प्रकाशित करबाओल जा' रहल अछि। प्रकाशकक, प्रकाशन तिथिक, पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत।
महत्त्वपूर्ण सूचना:(३) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा' रहल गजेन्द्र ठाकुरक 'सहस्रबाढ़नि'(उपन्यास), 'गल्प-गुच्छ'(कथा संग्रह) , 'भालसरि' (पद्य संग्रह), 'बालानां कृते', 'एकाङ्की संग्रह', 'महाभारत' 'बुद्ध चरित' (महाकाव्य)आऽ 'यात्रा वृत्तांत' विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे प्रकाशित होएत। प्रकाशकक, प्रकाशन तिथिक, पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत।
महत्त्वपूर्ण सूचना (४): श्री आद्याचरण झा, श्री प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' , श्री प्रेमसकर सिह, श्रीमति विभा रानी, श्री मैथिली पुत्र प्रदीप,श्री कैलाश कुमार मिश्र (इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र), श्री श्याम प्रकाश झा आऽ डॉ. श्री शिव प्रसाद यादव जीक सम्मति आयल अछि आऽ हिनकर सभक रचना अगिला १-२ अंकक बादसँ 'विदेह' मे ई-प्रकाशित होमय लागत।
विदेह (दिनांक १५ जून, २००८)
१.संपादकीय २.संदेश
१.संपादकीय वर्ष: १ मास: ६ अंक:१२
मान्यवर,
विदेहक नव अंक (अंक १२ दिनांक १५ जून २००८) ई पब्लिश भ’ रहल अछि। एहि हेतु लॉग ऑन करू http://www.videha.co.in |
नचिकेताजीक नाटक नो एंट्री: मा प्रविश तेसर कल्लोलक पहिल खेप ई-प्रकाशित भ’ रहल अछि। गगेुश गुंजन जीक कथा आऽ विस्मृत कवि रामजी चौधरीक अप्रकाशित पद्य सेहो ई-प्रकाशित भए रहल अछि।
रवीन्द्रनाथ ठाकुर सेहो हैकू लिखलन्हि, मुदा मैथिलीमे पहिल बेर जापानी पद्य विधाक आधार पर "विदेह" प्रस्तुत कए रहल अछि ई विधा।
शेष स्थायी स्तंभ यथावत अछि।
अपनेक रचना आऽ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे। वरिष्ठ रचनाकार अपन रचना हस्तलिखित रूपमे सेहो नीचाँ लिखल पता पर पठा सकैत छथि।
गजेन्द्र ठाकुर
३८९, पॉकेट-सी, सेक्टर-ए, बसन्तकुंज,नव देहली-११००७०.फैक्स:०११-४१७७१७२५
ggajendra@videha.co.in ggajendra@yahoo.co.in
२.संदेश
१.श्री प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।
२.श्री डॉ. गंगेश गुंजन- "विदेह" ई जर्नल देखल। सूचना प्रौद्योगिकी केर उपयोग मैथिलीक हेतु कएल ई स्तुत्य प्रयास अछि। देवनागरीमे टाइप करबामे एहि ६५ वर्षक उमरिमे कष्ट होइत अछि, देवनागरी टाइप करबामे मदति देनाइ सम्पादक, "विदेह" केर सेहो दायित्व।
३.श्री रामाश्रय झा "रामरंग"- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।
४.श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बाधाई आऽ शुभकामना स्वीकार करू।
५.श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।
६.श्री डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना।
७.श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
८.श्री विजय ठाकुर, मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
SOME NEW BOOKS FROM VIDEHA EJOURNAL ARCHIVE
SOME NEW BOOKS FROM VIDEHA EJOURNAL ARCHIVE I.A PARALLEL HISTORY OF MITHILA & MAITHILI LITERATURE [TOME 1-4; VOLUMES 1-100] BY GAJENDR...
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"भालसरिक गाछ" Post edited multiple times to incorporate all Yahoo Geocities "भालसरिक गाछ" materials from 2000 onwards as...
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डाॅ. देव शंकर नवीन (जन्म: 2 अगस्त 1962) मैथिली तथा हिन्दी मे एम.एण्, पी-एच.डी., भौतिकी मे एमए स-सी. तथा पुस्तक प्रकाशन एवं अनुवाद मे पी.जी. ...
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उमेश मंडल कोवर गीतश् (1) कोने बाबा बान्हल इहो नव कोवन हे जनकपुर कोवर। कोने अम्मा लिखल पूरैन हे जनकपुर कोवर। फल्लाँ बाबा बान्हल इहो नव कोवर फ...