भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल अखनो ५ जुलाई २००४ क पोस्ट'भालसरिक गाछ'- केर रूपमे इंटरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि जे विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,आ http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि।
भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति
(c)२०००-२०२५. सर्वाधिकार
लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली
पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor:
Gajendra Thakur
रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व
लेखक गणक मध्य छन्हि) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक
रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित
रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि। सम्पादक
'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऐ ई-पत्रिकामे ई-प्रकाशित/ प्रथम
प्रकाशित रचनाक प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ मूल आ अनूदित
आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। (The Editor, Videha
holds the right for print-web archive/ right to translate those archives
and/ or e-publish/ print-publish the original/ translated archive).
ऐ ई-पत्रिकामे कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/
पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन
संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक
अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह
(पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव
शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई
पत्रिकाकेँ मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
(c) २०००-२०२२ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html, http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
Saturday, November 01, 2008
कारी पौलनि करिखा- सन्तोष मिश्र, काठमाण्डू
भोगेन्द्रजी अपन गामक आंगुर पर गनाए बला धनीक मे सँ छथि । ओना त भोगेन्द्रजी बेशी पढला–लिखला नहि मुदा अपन दुनु पुत्र सुबोध आ विनोदकेँ एम. ए. तक पहुचैलनि । भोगेन्द्रजीक पुत्री आशा जखन आइ.ए. पास कऽ लेलनि तकर बाद हुनका लेल बर तकाय लगलनि। वर भेटलनि । गामक धनिक आ बि.ए. अनर्स कैल बरक माँग भेलनि तीन लाख पचहत्तर हजार भा.रु. । बड धुमधाम सँ विवाह भेलैक आ साते दिनपर विदागरी सेहो ।
आशाक स्वभाव आ विचारकेँ बारेमे जते वर्णन कैल जाए कमे रहत । आशाक स्वभाव सँ सब गोटे बड खुसी रहथि । समय वितैत गेल । आशाक गर्भ सँ एकटा पुत्रीक जन्म भेलैक । आशाक बर (बलराम) के कनिको अपनेसँ किछु अर्जन करय के चिन्ते नइ । पाईके जौं जरुरी बुझाय तँ गहना त छलैहे । भोर आ साँझ बिना दारुके नहि रहऽ वाला बलरामकेँ आशा कते सम्झा वुझाकऽ किछ अर्जन करबाक हेतु धनवाद पठौली । करिब डेढ महिनाक वाद बलराम गाम अएलाह । अगहन मास रहैक । दौनी, कटनी सब सेहो करबा के छलैक । मुदा एको सप्ताह नहि वितलै । बलराम तैयार भेलाह फेरु जएवाक लेल । आ आशाके सेहो चलए लेल कहलनि । बलरामकेँ बाबुजी घरक काजक बारेमे कते समझौलनि मुदा बलराम किछु मानऽ लेल तैयार नइं भेलाह । अन्ततः आशाके जाएबाक लेल तैयार होबहे परलनि ।
तीने दिन बितल रहैक बलरामकेँ गेला । चारिटा पुलिस सबसँ पुछैत रहैक बलरामक घरक बारेमे । ओमहर सँ अपन गम्छा मे तरकारी बन्हने बलरामक बाबुजी अवैत रहथि । एकटा पुलिश हुनकें सँ बलरामक घरक बारेमे पुछलकनि । बलरामक बाबुजी अपन परिचय देलथि । तखन जा कए ओ पुलिस सब कामेश्वर (बलरामक बाबुजी) के सब बात कहलनि आ ई सब सुनिते ओ लगला छाती–कपार पिटक कानऽ । कनिते–कनिते आँगन अएलाह आ कामेश्वर बाबुकेँ कनैत देखिकऽ घरक सब गोटा लग आबिकऽ सेहो कानय लगलाह । आ कनिते–कनिते बलरामक माय पुछलनि-
“आहाँ किया .......कनै छी ..........?”
कामेश्वर बाबु जवाब देलनि-
“कनियाँ त......... ट्रेनमे पिचा गेलीह ।”
किछ पत्ता लगावक क्रममे ओहि पुलिस सबमे सँ किछु आशाक नैहर गेल । भोगेन्द्र जी सँ भेंटक पूरा घटना बतौलक । ई तँ सुनिते भोगेन्द्रजीक देहमे झुनझुनी भरि गेलनि आ गारा भुकुर सेहो लागि गेलनि । पुलिस भोगेन्द्रजी सँ पुछलक–
“..........आहाकेँ किछ कहवाक अछि ?....... बलराम त थानामे अछि ।”
त भोगेन्द्रजी जवाब देलनि–
“जी .......नहि हमर बेटिए बदमाश छल ।”
आशाकऽ नैहर पहुँचल पुलिस सब आशाक सासुर पहुँचल आ ओ कामेश्वर बाबुकेँ हथकड़ी लगाकऽ गामसँ लऽ गेलनि । गामसँ आगु एकटा बजार छलैक ओत स एकवेर कामेश्वर बाबु फोन कैलनि तँ ओहि पुलिस सबके एकटा आदेश भेटलैक जे ओ हथकड़ी खोलिकऽ इज्जतक संग लऽ जाइथ । पुलिस सब कामेश्वर बाबुकेँ इज्जत सँ थाना लऽ गेलनि ।
थानामे कामेश्वर बाबुक नजरि अपन पोती पर पड़लनि। ओ एक–एकटा कऽ मुरही पात परसँ विछ–विछक खाइत रहैक । कामेश्वर बाबु तुरते दुध मंगवौलनि आ वाद मे वेटालेल सेहो बहुत पाई खर्च कैलनि तखन जा कए हुनक वेटा थाना सँ छुटलनि । कामेश्वर बाबु अपन वेटा, आ पोती दुनुके लऽ कऽ गाम जाइत रहथि । वाटमे एक ठाम जखन ट्रेन रुकलैक तँ कामेश्वर बाबु अपन भेटासँ पुछलनि-
“तोहर .....सर–समान कि भेलौं ?”
बलराम बड सान सँ जबाब देलकै-
“बेचलिया । आ........ गहना नहि दिया तो ट्रेनमे धकेल दिया ।”
कामेश्वर बाबुके ई सुनिक बड दुःख लगलनि आ ओ कहलनि-
“जो ! रे कुपात्र । ......... तु जे मैरते त हम नौहकेश नहि करैबति ।”
गाममे सगरो ई बातक चर्चा भेलै आ अहि बेटाक कारण गामक लोक हिनका–सबकेँ बारि देलनि । लोकसब घृणा करऽ लगलनि ।
एक राति करिब बारह बजे बलराम चिचियाति घर सँ भागल । आ दलानपर अबैत–अबैत ओ बेहोस भऽ खसि पड़ल । हल्ला सुनि कय बलरामक बाबु आ माँ दुनु बाहर निकललनि । अन्हारक कारण सँ किछ सुझबो नहि करै । तावते मे एकटा महिला हाथमे लालटेन लेने, धोघ तनने अवैत रहै छै । इजोत पर बुढा–बुढी अप्पन बेटाकेँ देखलनि आ बेटाक दिस दौड़लनि । बेटा लग पहुँचते अन्हार फेर भ गेलैक । ई देखि कए बलरामक बाबुजी परोसी धामीके बजाब गेलाह । मानवताकेँ प्रथम स्थानपर रखैत ओ धामी अपन कर्तब्य पुरा करऽ अबए छैक । बलरामकेँ देखक धामी भुतक आशंका व्यक्त करैत छैक । तावतेमे फेरु बलराम होसमेँ अवैत छैक आ खुब जोर जोर स हल्ला आ बदमाशी कर लगैछै । हल्ला सुनिकऽपरोसक दु–तिन आदमी आरो अवैत छैक आ बलरामके बान्हिक राखि दैत छैक ।
दु–तीन आदमी सँ बलरामके जचाँबऽ लेल राँची ल जाइत छैक । डाक्टर के कहलापर पागलखानामे बलरामके भर्ना कर परैछनि ।
-
"भालसरिक गाछ" Post edited multiple times to incorporate all Yahoo Geocities "भालसरिक गाछ" materials from 2000 onwards as...
-
डाॅ. देव शंकर नवीन (जन्म: 2 अगस्त 1962) मैथिली तथा हिन्दी मे एम.एण्, पी-एच.डी., भौतिकी मे एमए स-सी. तथा पुस्तक प्रकाशन एवं अनुवाद मे पी.जी. ...
-
उमेश मंडल कोवर गीतश् (1) कोने बाबा बान्हल इहो नव कोवन हे जनकपुर कोवर। कोने अम्मा लिखल पूरैन हे जनकपुर कोवर। फल्लाँ बाबा बान्हल इहो नव कोवर फ...