भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

(c)२०००-२०२५. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur

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Monday, March 03, 2008

छोट - छोट बात

अपन सबहक़ जीवन इश्वर के देल एक सर्वश्रेष्ठ उपहार अछि ! अई जीवन रूपी उद्यान क सुगंध सs परिपूर्ण बनाबई हेतु आर खुद क संतुष्ट राखै के लेल किछ बात ध्यान म राखब अति आवश्यक अछि ! अगर हम सब इ बात क सदैव ध्यान म राखी त निश्चित रूप स हम सबतरह सs आत्मिक शांति के सुख प्राप्त के सकब ! कखनो किनको स किछ प्राप्त करे के आशा नै करबाक चाही ! कियेकी इ जरुरी नै अछि की किनको पर करल गेल अपने के अपेक्षा हरदम पूरे हुवे ! आशा के विपरीत भेला पर यदि आहा के मन मए दुःख होई या त किनको दोसर स हम कुनू अपेक्षा करबे किये करब ?

हमेशा धीरज स काम लेबाक चाही, कियेकी रास्ता लम्बा जरुर होइत अछि मुदा अंतहीन नै ! कुनू कदम उठावे स पहिने भली भाति सोइच - विचैर लेबाक चाही

क्रोध क अपन वश म राखी कियेकी क्रोध मुर्खता स आरंभ आर पश्चाताप पर समाप्त होइत अछि !

सदैव याद राखी की "मधुर वचन अछि औषधि आर कटू वचन अछि तीर" इ शब्द क ध्यान म रैख क बाजी !

शेक्सपियर कह्लाखिन रहे " संक्षेप बुद्धिमत्ता के आत्मा होइत अछि ! आवश्यकता स अधिक बात किनको सुने हेतु बाध्य नै कारियोंन ! कहल गेल अछि वार्तालाप जतेक लम्बा होइत अछि ओकर प्रभाव ओतेके कम होइत अछि !

अपन प्रशंसा करे के भूल नै करी ! आई स आहा दोसर पर प्रभाव नै डेल सकब, सामना बाला क खुद पता चले दीयोंन की आहा एहेंन सीधा सरल व्यक्तित्व कतेक गुण स परी पूर्ण छी ! हुनका आहाके बरे म खुद अनुमान लगबे दीयोंन !

परनिंदा, आलोचना नै करी, दोसर के दोष निकाले के पाछा नै रही ! इ सब आदत उन्नति आर सफलता म बाधक सिद्ध होइत अछि !

इष्या आदमी कs ओही तरह खोखला बनबैत अछि जय तरह लकड़ी क दीमक ! इ भावना नै हमरा प्रसन्नता देत अछि नै दोसर कए ! हमरा सब क दोसर के सुख म सुखी, आर दोसर के दुःख मए दुखी होबक चाही !

प्रेम जीवन के सब कठिनाई आर समस्या क आत्मसार करैत अछि ! सदैव प्रेम के भावना रख्बाक चाही !

हमेशा आत्मविश्वासी रही, आत्मविश्वास जीवन के हर क्षेत्र म सफलता के ले जरुरी अछि ! जखन धन , ज्ञान , साथ नै दै छई तखन आत्मविश्वास काज आबे य !

दोसर के हित म अपन हित देखल करू , किनको दोसर के दुःख म अपन सुख के त्याग बहुत संतोष दै छई ! इ सच्ची सेवा कह्लाबे य ! दोसर के सेवा करबाक चाही किये की हर मनुष्य म इश्वर विधमान रहे छथिन ! किन्कारो आंसू पोछब मुसीवत म सहायता करब इश्वर के प्रार्थना के तुल्य होई छई !

Friday, February 29, 2008

केना बची आलोचना के तीर सs

मिथिला "बहिन"

लोकेन के लेल खाश"

समाज मs आहा कतो जाओ आहा क किछ लोग अई तरह के मिलये जेत जिनकर काजे सिर्फ दोसर के किछ नै किछ बुराई करब होई छैन ! इ हुनकर आदत होई छैन जकरा सूइन कs सायद आहा क गुस्सा होइत हेत ! हमर इ ब्लोग लिखे के मकसदे इ अछि की ओई समय आहा गुस्सा नै के क हुनकर बात कs नया मोड़ दीयोंन फेर हुनकर हालत देखु ! वास्तव मs अई तरहक लोग के उद्देश्य इये होई छैन की कुन तरह आहा के भाड़काबे ता की गुस्सा मs अपने हुनका किछ अनर्गल बात कैह दीयों ताकि हुनका आहा के बुराई दोसर लग करै के मोका मिलैंन ! ताहि लेल कहे छी यदि ओई समय आहा अपन गुस्सा पर काबू के लाई छी तस समझू आहा किला फतह के देलो ! किछ ऐहना हमर परोसी के संग भेल रहैंन, एक दिन ओ अपन ननद कs सबके सामना मए दुत्कारलखींन ताहिए सs हुनकर ख़ुशी क ग्रहण लैग गेलेंन ! दरअसल हुनकर ननद हुनका किछ स किछ गाहे - बगाहे सुनबैत रहथिन, बस एक दिन जखन घर म मेहमान रहैंन ओही समय ननद के कटाक्ष के ओ तहेंन जबाब देलखिन की ओही दिन सs ननद के नज़र म बुरा बैंन गेली ! सब मेहमान हुनकर बुराई केलखिन आर फेर त हर कियो हुनका स बात करे स पहिने इ धारणा बने लेल्खिं की ओ बहुत ख़राब छैथ ! हुनकर ककरो स नै बने छैन, हुनका स बात करबे बेकार अछि ! जखन की वास्तव म आई तरह के कुनू बात नै रहेंन ! दरअसल हर आदमी के तम्मना होई छैन की सब हुनका निक कहैंन ! असल म हम सब हमेशा इये समझे छी की सामनेवला जेहेंन हम चाहे छी ओहिना व्यवहार हमरा संग करैथ ! मुदा हमर सभक विरुद्ध कियो यदि किछ बाजेत छैथ ताए हमर सभक दिल तुइट जैत अछि ! हुनका स रिश्ता फीका परे लागे य ! यदि आहा अपन रिश्ता म खटास लाबे स बचे लाय चाहे छी, त किनको प्रति कुनू प्रतिक्रिया व्यक्त करे स पहिने इ जरुर सोइच ली की हुनका की पसंद छैन, आर की नापसंद, इ बात स अपने क खाली हुनकर खुबिया आर खामिया के बारे म पता नै चलत, बल्कि हुनका आहा स्वाभाविक गुण के साथ स्वीकारो के सकब ! आहा के अपेक्षा नै हेत नै टूटत, मगर एकर मतलब इ नै अछि की किन्कारो कुनू भी अनर्गल बात बर्दाश्त करेत रहू ! खाली आहा अपन मन म इ धारणा बने ली की आहा हुनकर बात कखन तक बर्दाश्त के सके छी ! बात सीमा पार होई स पहिने हुनका बाते दीयोंन की आहा हुनकर बहुत बात बर्दाश्त केलियेंन आब बर्दाश्त नै हेत ! आई स सामने बला क अपन गलती के अहसास भे जेतेंन आर आहा के रिश्ता बिगड़े स बैच जेत ! बहिन हमरा समझ स निक इये अछि की यदि कुनू तरहक विवाद स घिरल बात कियो कहा त निक इये हेत की अपने चूपी सैधली, सामने वला निराश भो क खुदे बाजब बंद के देती ! ओनैयो हर बात पार सवाल - जबाब करब कुनू निक बात थोरे न अछि ! एकर बावजुदो यदि अपने क गुस्सा आबे त अपन ध्यान कतो आर मोइड़ देल करू, जना की यदि घर म छी त बहर आँगन मए निकैल क किछ काज के लेल करू, टीवी खोइल क बैस सके छी ताकि ओई समय चलाई बला बात के रुख बदैल जाय ! कतेक बेर देखल गेल अछि की हम सब कुनू बात के प्रतिक्रिया क नकारात्मक ढंग स लैत छलो ! इ बात ठीक नै अछि ! ठंढा दिमाग स हमरा सब क सोच्बाक चाही की हम अपन आप कई कोना सुधारी कहावत अछि "आप भला तो जग भला" यदि कियो अपने स किछ कहेत अछि त पहिने हुनका बात पर नाराज़ होई के बदला अमल करैत सोचबाक चाही की बात म कतेक सत्यता अछि ! मिठास के संग जबाब दै के कला के साथे - साथ विनम्रता क अपन व्यक्तितत्व के अंग बनाबी इये हमर सब मिथिला बहिन स आग्रह अछि ! हमर धारणा यदि अपने क पसंद हुवे त टिप्पणी देब नै भुलब धन्यवाद !!

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