काठमाण्डूकेँ टुंडीखेलमे हम आ दुटा आओर हमर साथी बैसल छलहुँ । ताबते एकटा छौरी आबिकऽ हमरा सबके मुमफली खाएला कहलक । जेना मंगनीए दऽदेतै तहिना ओ हमरा आगुमे दु डिबा ममफली धऽ देलक । हम पाइकेँ लेल पुछली त बिस रुपैया कहलक । ममफली खाएवाक इच्छा त नहि, रहे मुदा साथी सबलग प्रतिष्ठाके देखकऽ जेबसँ पाइ निकालिकऽ दऽ देलहँु । करीब एक–डेढ घण्टाक बाद ममफली खतम भऽ गेल त हमसब ओतऽ सँ उठिकऽ रौदमे वैसऽ चैल गेलहु । फेर, एकटा दोसर छौरी आबिकऽ कागज निकालिकऽ ममफली छोटका डिब्वा सँ एक डिब्वा धऽ देलकै । हमहुँ सब ममफली खाए लगलहँु । ओ छौरी हमरा सवहक नजदिक बैसिकँ गीत गाबऽ लागल "यो मायाको सागर.....।" हमर साथी ओकरा भऽगाब केँ लेल "तो बड सुन्दर गीत गवैछ"े कह लगलैक । ई सुनिकऽ ओ छौरी कहैछै "एह, हम त........ गीते नहि नेपाली, हिन्दी, अंग्रेजी गीतमे डान्सो करैछी ।"फेर ओ अपन कुर्तीके उपरका बट्टम खोलिकऽ कहैय "आई कते गर्मी छै.........।"ई देखकऽ हमर साथी पुछलकै "एक दिनमे कते.......कमालैछही ।"ओ ढिठेसँ जाबाव देलक "मुला जौ फसिगेल त........हजारो भऽ जाइए ।"हम व्यंग करित कहलि " तब त हम अपनो घरवालीके ममफलीके व्यपार कऽ देबै.....।"फेर ओ कहली "आँहा सब तिन आदमी छि ..........मात्र तिन सय रुपैया जँ खर्च करब तऽ आइ राति आँहा सब साथे हम चैल सकैत छि ।"हम फेर व्यंग कैलिए "तोहर वाप कमाकऽ धऽ गेलछौ से......... ।"ओ हसऽ लगली आ फेरु थेथरियाएल जका बसिगेली । हमरा त बुझले नहि छल जे ओकर ई व्यपार होतैक । आ ओकर पहिरन–ओढ्न सँऽ बुझाय परैक जेना ओ कानो सेठकेँ वेटी होतैक । हमर साथी रामबाबु अपन जेबमे हाथ दैत कहैय "हे यो......हमरा लग त दु सय टका अछि.......आँहा लग एक सय अछि त दिअनै पैचे सही.....।"मुदा हम बड डटली ओ ओतऽ सँ उठिक तिनु आदमी भद्रकाली दने जाइत रही । भद्रकाली मन्दिर सँऽ कनिकें आगु आवीक रामबाबु कहलनि "अाँहा सब बढु ...........हम एक आदमी सँ भेटने अवैछी ।" हम आ संजय त बुझिगेलहु कि ई कतऽ गेल होएत ।करिब एक महिना वाद जखन हम ओहि दकऽ जाइत रही त ओही छौरी पर नजरि परल ओकर कपडा फटल रहैक मुदा ठोह् मे लाली बड. मोटसँऽ लगौने रहैक । आ जतेक आदमी ओइ दऽ कऽ जाइक सबके मुह पर तकै । ओही साँझमे हमर साथीरामबाबूकें फोन आयल आ कहलनि "हमर मोन खराब अछि ।"भोरमे हम ओकर डेरालग जाक ओकरा टिचिङ्ग अस्पताल जचाव लऽ गेलहु । डाक्टर बोखारक दवाइ दऽ पठादेलनि आ कहलनि जे एक हप्तावाद भेट करला । ओ, दवाइ खाइ, मुदा ओकर वोखार त ठिके नहि होइक । दिनदिने कमजोर भेल जाइक । फेर ओकरा लऽकऽ हम अस्पताल गेलहुँ । डाक्टर खुन, दिशा, पेशाब जचाबऽ लेल कहलनि । दिशा आ पिसाबक रिर्पोट तऽ तुरते दऽ देलक मुदा खुनक रिर्पोट ४२ दिनक वाद देबऽ कहलनि । ४२ दिन बाध हम रिर्पोट लऽकऽ डाक्टर लग गेलहुँ । वै दिन डाक्टर सब सँ अन्तमे हमरा बजौलनि । मितकेँ पकरिक डाक्टर लग लगेलियन । डाक्टर मित सँऽ पुछलनि "आहाँ बजारक लैरकी सँ..........सम्बन्ध रखैछी ।"किछ नहि बाजिकऽ ओ मुरी निचा कैने रहि गेलैक । आ, ई, सुनिक हम कहलियनि "डाक्टर साहेब,..................."डाक्टर हमरा किछ बाजऽ नहि देलनि आ हमरा कहलनि कृपया बिचमे नई, बाजल करी ।"फेर डाक्टर आवेशमे आविक कहलनि "हिनका छैन एड्स लागीगेल ।"ओ पुनः हमरा पर ताकिक कहलनि "ओना त एड्सकेँ इलाज त नहि छैक मुदा जौ संयम सँ रही त किछ दिन बाचि सकैछी । आँहा सब नयाँ उमेरक लरिका सब एना कर लगबै त कोना हेतैक ।"डाक्टर हाथमे कलम आ, आगामे सँ पुर्जी लैत कहलनि "देखु, आहाकेँ चित बुझावलेल किछ दवाई लिख दैछि ।"डाक्टर पुर्जी हमरा हाथमे देलाह । आ हम सब ओतऽ सँऽ निकलँहु । हमर मितत वड उदाश रहे भऽ गेल । ई देखक हम कहलियनि "चल वल्की गामे पर रहब ।"तखन त ओ हमरा हँ कहलक मुदा जखन हम तैयारी भऽ ओकरा डेरामे पहुचलहु त देखलहँु ओकरा खिरकी केवार चारु तर्फसँऽ लोक भरल । हमर मन धबरागेल । जखन हम नजदिक पहुचलहुँ त देखलहुँ एकटा हवलदार ओकरा गरदनिमे सँ डोरी खोलैतरहै । ओकरा शव बाहनमे धऽ कऽ अस्पताल लऽ गेलैक । आ हम ओकरा गामपर फोन कऽ कऽ ओकर बावुजीकँ खवर कऽ बजालेलियनि ।
भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल अखनो ५ जुलाई २००४ क पोस्ट'भालसरिक गाछ'- केर रूपमे इंटरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि जे विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,आ http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि।
भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति
(c)२०००-२०२५. सर्वाधिकार
लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली
पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor:
Gajendra Thakur
रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व
लेखक गणक मध्य छन्हि) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक
रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित
रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि। सम्पादक
'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऐ ई-पत्रिकामे ई-प्रकाशित/ प्रथम
प्रकाशित रचनाक प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ मूल आ अनूदित
आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। (The Editor, Videha
holds the right for print-web archive/ right to translate those archives
and/ or e-publish/ print-publish the original/ translated archive).
ऐ ई-पत्रिकामे कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/
पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन
संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक
अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह
(पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव
शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई
पत्रिकाकेँ मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
(c) २०००-२०२२ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html, http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
Monday, November 10, 2008
मुमफली बाली - सन्तोष मिश्र, काठमाण्डू
काठमाण्डूकेँ टुंडीखेलमे हम आ दुटा आओर हमर साथी बैसल छलहुँ । ताबते एकटा छौरी आबिकऽ हमरा सबके मुमफली खाएला कहलक । जेना मंगनीए दऽदेतै तहिना ओ हमरा आगुमे दु डिबा ममफली धऽ देलक । हम पाइकेँ लेल पुछली त बिस रुपैया कहलक । ममफली खाएवाक इच्छा त नहि, रहे मुदा साथी सबलग प्रतिष्ठाके देखकऽ जेबसँ पाइ निकालिकऽ दऽ देलहँु । करीब एक–डेढ घण्टाक बाद ममफली खतम भऽ गेल त हमसब ओतऽ सँ उठिकऽ रौदमे वैसऽ चैल गेलहु । फेर, एकटा दोसर छौरी आबिकऽ कागज निकालिकऽ ममफली छोटका डिब्वा सँ एक डिब्वा धऽ देलकै । हमहुँ सब ममफली खाए लगलहँु । ओ छौरी हमरा सवहक नजदिक बैसिकँ गीत गाबऽ लागल "यो मायाको सागर.....।" हमर साथी ओकरा भऽगाब केँ लेल "तो बड सुन्दर गीत गवैछ"े कह लगलैक । ई सुनिकऽ ओ छौरी कहैछै "एह, हम त........ गीते नहि नेपाली, हिन्दी, अंग्रेजी गीतमे डान्सो करैछी ।"फेर ओ अपन कुर्तीके उपरका बट्टम खोलिकऽ कहैय "आई कते गर्मी छै.........।"ई देखकऽ हमर साथी पुछलकै "एक दिनमे कते.......कमालैछही ।"ओ ढिठेसँ जाबाव देलक "मुला जौ फसिगेल त........हजारो भऽ जाइए ।"हम व्यंग करित कहलि " तब त हम अपनो घरवालीके ममफलीके व्यपार कऽ देबै.....।"फेर ओ कहली "आँहा सब तिन आदमी छि ..........मात्र तिन सय रुपैया जँ खर्च करब तऽ आइ राति आँहा सब साथे हम चैल सकैत छि ।"हम फेर व्यंग कैलिए "तोहर वाप कमाकऽ धऽ गेलछौ से......... ।"ओ हसऽ लगली आ फेरु थेथरियाएल जका बसिगेली । हमरा त बुझले नहि छल जे ओकर ई व्यपार होतैक । आ ओकर पहिरन–ओढ्न सँऽ बुझाय परैक जेना ओ कानो सेठकेँ वेटी होतैक । हमर साथी रामबाबु अपन जेबमे हाथ दैत कहैय "हे यो......हमरा लग त दु सय टका अछि.......आँहा लग एक सय अछि त दिअनै पैचे सही.....।"मुदा हम बड डटली ओ ओतऽ सँ उठिक तिनु आदमी भद्रकाली दने जाइत रही । भद्रकाली मन्दिर सँऽ कनिकें आगु आवीक रामबाबु कहलनि "अाँहा सब बढु ...........हम एक आदमी सँ भेटने अवैछी ।" हम आ संजय त बुझिगेलहु कि ई कतऽ गेल होएत ।करिब एक महिना वाद जखन हम ओहि दकऽ जाइत रही त ओही छौरी पर नजरि परल ओकर कपडा फटल रहैक मुदा ठोह् मे लाली बड. मोटसँऽ लगौने रहैक । आ जतेक आदमी ओइ दऽ कऽ जाइक सबके मुह पर तकै । ओही साँझमे हमर साथीरामबाबूकें फोन आयल आ कहलनि "हमर मोन खराब अछि ।"भोरमे हम ओकर डेरालग जाक ओकरा टिचिङ्ग अस्पताल जचाव लऽ गेलहु । डाक्टर बोखारक दवाइ दऽ पठादेलनि आ कहलनि जे एक हप्तावाद भेट करला । ओ, दवाइ खाइ, मुदा ओकर वोखार त ठिके नहि होइक । दिनदिने कमजोर भेल जाइक । फेर ओकरा लऽकऽ हम अस्पताल गेलहुँ । डाक्टर खुन, दिशा, पेशाब जचाबऽ लेल कहलनि । दिशा आ पिसाबक रिर्पोट तऽ तुरते दऽ देलक मुदा खुनक रिर्पोट ४२ दिनक वाद देबऽ कहलनि । ४२ दिन बाध हम रिर्पोट लऽकऽ डाक्टर लग गेलहुँ । वै दिन डाक्टर सब सँ अन्तमे हमरा बजौलनि । मितकेँ पकरिक डाक्टर लग लगेलियन । डाक्टर मित सँऽ पुछलनि "आहाँ बजारक लैरकी सँ..........सम्बन्ध रखैछी ।"किछ नहि बाजिकऽ ओ मुरी निचा कैने रहि गेलैक । आ, ई, सुनिक हम कहलियनि "डाक्टर साहेब,..................."डाक्टर हमरा किछ बाजऽ नहि देलनि आ हमरा कहलनि कृपया बिचमे नई, बाजल करी ।"फेर डाक्टर आवेशमे आविक कहलनि "हिनका छैन एड्स लागीगेल ।"ओ पुनः हमरा पर ताकिक कहलनि "ओना त एड्सकेँ इलाज त नहि छैक मुदा जौ संयम सँ रही त किछ दिन बाचि सकैछी । आँहा सब नयाँ उमेरक लरिका सब एना कर लगबै त कोना हेतैक ।"डाक्टर हाथमे कलम आ, आगामे सँ पुर्जी लैत कहलनि "देखु, आहाकेँ चित बुझावलेल किछ दवाई लिख दैछि ।"डाक्टर पुर्जी हमरा हाथमे देलाह । आ हम सब ओतऽ सँऽ निकलँहु । हमर मितत वड उदाश रहे भऽ गेल । ई देखक हम कहलियनि "चल वल्की गामे पर रहब ।"तखन त ओ हमरा हँ कहलक मुदा जखन हम तैयारी भऽ ओकरा डेरामे पहुचलहु त देखलहँु ओकरा खिरकी केवार चारु तर्फसँऽ लोक भरल । हमर मन धबरागेल । जखन हम नजदिक पहुचलहुँ त देखलहुँ एकटा हवलदार ओकरा गरदनिमे सँ डोरी खोलैतरहै । ओकरा शव बाहनमे धऽ कऽ अस्पताल लऽ गेलैक । आ हम ओकरा गामपर फोन कऽ कऽ ओकर बावुजीकँ खवर कऽ बजालेलियनि ।
SOME NEW BOOKS FROM VIDEHA EJOURNAL ARCHIVE
SOME NEW BOOKS FROM VIDEHA EJOURNAL ARCHIVE I.A PARALLEL HISTORY OF MITHILA & MAITHILI LITERATURE [TOME 1-4; VOLUMES 1-100] BY GAJENDR...
-
"भालसरिक गाछ" Post edited multiple times to incorporate all Yahoo Geocities "भालसरिक गाछ" materials from 2000 onwards as...
-
डाॅ. देव शंकर नवीन (जन्म: 2 अगस्त 1962) मैथिली तथा हिन्दी मे एम.एण्, पी-एच.डी., भौतिकी मे एमए स-सी. तथा पुस्तक प्रकाशन एवं अनुवाद मे पी.जी. ...
-
उमेश मंडल कोवर गीतश् (1) कोने बाबा बान्हल इहो नव कोवन हे जनकपुर कोवर। कोने अम्मा लिखल पूरैन हे जनकपुर कोवर। फल्लाँ बाबा बान्हल इहो नव कोवर फ...