भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

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Monday, November 10, 2008

मुमफली बाली - सन्तोष मिश्र, काठमाण्डू

मुमफली बाली

काठमाण्डूकेँ टुंडीखेलमे हम आ दुटा आओर हमर साथी बैसल छलहुँ । ताबते एकटा छौरी आबिकऽ हमरा सबके मुमफली खाएला कहलक । जेना मंगनीए दऽदेतै तहिना ओ हमरा आगुमे दु डिबा ममफली धऽ देलक । हम पाइकेँ लेल पुछली त बिस रुपैया कहलक । ममफली खाएवाक इच्छा त नहि, रहे मुदा साथी सबलग प्रतिष्ठाके देखकऽ जेबसँ पाइ निकालिकऽ दऽ देलहँु । करीब एक–डेढ घण्टाक बाद ममफली खतम भऽ गेल त हमसब ओतऽ सँ उठिकऽ रौदमे वैसऽ चैल गेलहु । फेर, एकटा दोसर छौरी आबिकऽ कागज निकालिकऽ ममफली छोटका डिब्वा सँ एक डिब्वा धऽ देलकै । हमहुँ सब ममफली खाए लगलहँु । ओ छौरी हमरा सवहक नजदिक बैसिकँ गीत गाबऽ लागल "यो मायाको सागर.....।" हमर साथी ओकरा भऽगाब केँ लेल "तो बड सुन्दर गीत गवैछ"े कह लगलैक । ई सुनिकऽ ओ छौरी कहैछै "एह, हम त........ गीते नहि नेपाली, हिन्दी, अंग्रेजी गीतमे डान्सो करैछी ।"फेर ओ अपन कुर्तीके उपरका बट्टम खोलिकऽ कहैय "आई कते गर्मी छै.........।"ई देखकऽ हमर साथी पुछलकै "एक दिनमे कते.......कमालैछही ।"ओ ढिठेसँ जाबाव देलक "मुला जौ फसिगेल त........हजारो भऽ जाइए ।"हम व्यंग करित कहलि " तब त हम अपनो घरवालीके ममफलीके व्यपार कऽ देबै.....।"फेर ओ कहली "आँहा सब तिन आदमी छि ..........मात्र तिन सय रुपैया जँ खर्च करब तऽ आइ राति आँहा सब साथे हम चैल सकैत छि ।"हम फेर व्यंग कैलिए "तोहर वाप कमाकऽ धऽ गेलछौ से......... ।"ओ हसऽ लगली आ फेरु थेथरियाएल जका बसिगेली । हमरा त बुझले नहि छल जे ओकर ई व्यपार होतैक । आ ओकर पहिरन–ओढ्न सँऽ बुझाय परैक जेना ओ कानो सेठकेँ वेटी होतैक । हमर साथी रामबाबु अपन जेबमे हाथ दैत कहैय "हे यो......हमरा लग त दु सय टका अछि.......आँहा लग एक सय अछि त दिअनै पैचे सही.....।"मुदा हम बड डटली ओ ओतऽ सँ उठिक तिनु आदमी भद्रकाली दने जाइत रही । भद्रकाली मन्दिर सँऽ कनिकें आगु आवीक रामबाबु कहलनि "अाँहा सब बढु ...........हम एक आदमी सँ भेटने अवैछी ।" हम आ संजय त बुझिगेलहु कि ई कतऽ गेल होएत ।करिब एक महिना वाद जखन हम ओहि दकऽ जाइत रही त ओही छौरी पर नजरि परल ओकर कपडा फटल रहैक मुदा ठोह् मे लाली बड. मोटसँऽ लगौने रहैक । आ जतेक आदमी ओइ दऽ कऽ जाइक सबके मुह पर तकै । ओही साँझमे हमर साथीरामबाबूकें फोन आयल आ कहलनि "हमर मोन खराब अछि ।"भोरमे हम ओकर डेरालग जाक ओकरा टिचिङ्ग अस्पताल जचाव लऽ गेलहु । डाक्टर बोखारक दवाइ दऽ पठादेलनि आ कहलनि जे एक हप्तावाद भेट करला । ओ, दवाइ खाइ, मुदा ओकर वोखार त ठिके नहि होइक । दिनदिने कमजोर भेल जाइक । फेर ओकरा लऽकऽ हम अस्पताल गेलहुँ । डाक्टर खुन, दिशा, पेशाब जचाबऽ लेल कहलनि । दिशा आ पिसाबक रिर्पोट तऽ तुरते दऽ देलक मुदा खुनक रिर्पोट ४२ दिनक वाद देबऽ कहलनि । ४२ दिन बाध हम रिर्पोट लऽकऽ डाक्टर लग गेलहुँ । वै दिन डाक्टर सब सँ अन्तमे हमरा बजौलनि । मितकेँ पकरिक डाक्टर लग लगेलियन । डाक्टर मित सँऽ पुछलनि "आहाँ बजारक लैरकी सँ..........सम्बन्ध रखैछी ।"किछ नहि बाजिकऽ ओ मुरी निचा कैने रहि गेलैक । आ, ई, सुनिक हम कहलियनि "डाक्टर साहेब,..................."डाक्टर हमरा किछ बाजऽ नहि देलनि आ हमरा कहलनि कृपया बिचमे नई, बाजल करी ।"फेर डाक्टर आवेशमे आविक कहलनि "हिनका छैन एड्स लागीगेल ।"ओ पुनः हमरा पर ताकिक कहलनि "ओना त एड्सकेँ इलाज त नहि छैक मुदा जौ संयम सँ रही त किछ दिन बाचि सकैछी । आँहा सब नयाँ उमेरक लरिका सब एना कर लगबै त कोना हेतैक ।"डाक्टर हाथमे कलम आ, आगामे सँ पुर्जी लैत कहलनि "देखु, आहाकेँ चित बुझावलेल किछ दवाई लिख दैछि ।"डाक्टर पुर्जी हमरा हाथमे देलाह । आ हम सब ओतऽ सँऽ निकलँहु । हमर मितत वड उदाश रहे भऽ गेल । ई देखक हम कहलियनि "चल वल्की गामे पर रहब ।"तखन त ओ हमरा हँ कहलक मुदा जखन हम तैयारी भऽ ओकरा डेरामे पहुचलहु त देखलहँु ओकरा खिरकी केवार चारु तर्फसँऽ लोक भरल । हमर मन धबरागेल । जखन हम नजदिक पहुचलहुँ त देखलहुँ एकटा हवलदार ओकरा गरदनिमे सँ डोरी खोलैतरहै । ओकरा शव बाहनमे धऽ कऽ अस्पताल लऽ गेलैक । आ हम ओकरा गामपर फोन कऽ कऽ ओकर बावुजीकँ खवर कऽ बजालेलियनि ।

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