जे रहैत छैक ईमानदार
बेइमानी जखन धरि
भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल अखनो ५ जुलाई २००४ क पोस्ट'भालसरिक गाछ'- केर रूपमे इंटरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि जे विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,आ http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि।
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1.मराठी
“ऐँ यौ ई की देखैत छी , ऑफिसमे अफसर सेहो मिथिलाक आ बिहारक आ रिक्शाबला, खेनाइ बनबए बला सेहो सभ मिथिलाक आ बिहारक । से कोन गप भेल”।
पुणे मे सिंहजी केँ एक गोट मराठी सज्जन पुछलखिन्ह। बात सेहो ठीक रहए मुदा बाहरी लोककेँ बुझबामे नहि आबए ।
सिह साहेब भारतीय पुलिस सेवा मे रहथि आ हुनकर सहोदर भिखना-पहाड़ीमे प्रिंटिंग प्रेसमे क-ट सभ जोड़ैत छलाह, से हुनका कनेको अनसोहाँत नहि लागलन्हि। मैथिली साहित्यमे देखैत आएल छथि मात्र मैथिल ब्राहाण आ कर्ण कायस्थक लेखनीकेँ चमकैत। रिक्शाबला तँ दरभंगाक होए आकि कटिहारक, खेनाइ बनबएबला झौआ रहबे टा ने करैत अछि।ई मराठी सभकेँ पता नहि किएक अनसोहाँत लगैत छैक।
बड्ड जातिवादी सभ अछि ई मराठी सभ।
दू दिनसँ परबा असगरे बैसल रहए । ओकर कनियाँ उढ़रि कए कतहु चलि गैलैक । बच्चा सभ कतेको बेर ओकर खोपड़ीमे पानि आ दाना दऽ आएल रहए । मुदा आइ भोरे ओ खोपड़ी उजारि कतहु चलि गेल”।
“किए यै नानी । ओहो किएक नहि दोसर बियाह कऽ लेलक । बेशी प्रेम करैत रहए कनियाँसँ”।
“अहाँ नेना छी । ई कोनो थेथर मनुक्ख थोड़े छी जे कनियाँ मरए, माय-बाप मरए , बेटा-पुतोहु मरए , सर-समाज मरए , चारि दिन मुँह लटकाएत आ पाँचम दिनसँ फेर थेथर मऽ जाएत “।
“मरि गेलि बेचारी “। गौआँ सभ फलना बाबूक तेसर कनिआँक मुइलापर कहलन्हि ।
“फलना बाबू तेसर कनियाँक गरदनि काटि लेलन्हि “। एक गोटे कहलान्हि ।
“से ठीके कहैत छी । पहिल कनियाँमे बच्चा नहि भेलैक तँ दोसर बियाह कएलक । मुदा जखन दोसरोमे बच्चा नहि भेलैक तँ बुझबाक चाही छलए ने”।- दोसर गोटे कहलन्हि ।
“हँ आ उनटे तेसर कनियाँकेँ कहैत रहथि जे भातिज सभकेँ नहि मानैत छिऐक तेँ भगवान बच्चा नहि देलन्हि । बुझू”?-तेसर गोटे कहलन्हि ।
“हिजड़ासार”।- चारिम गोटे सभा समाप्त करैत बाजल ।
मुदा चारि गोटेक ई महा-सम्मेलन एहि गपपर सहमति मे छल जे पहिल दू टा बियाह करब उचित रहए।
“बाबूक संगे खाएब”।-बुचिया बाजलि ।
“हे आब तूँ छोट नहि छेँ, एम्हर बैस”। माए कहलन्हि ।
फेर भाए सभ खेनाइ खेलक आ आब बुचिया आ बुचिया माएक बेर आएल । तरकारी सठि जेकाँ गेल रहए , दूध तँ बाबू आ भाएकेँ मात्र भेटलैक । माए बुचियाकेँ सठल जेकाँ तरकारी लोहियामेसँ छोलनीसँ जेना –तेना निकालि ए देलन्हि आ अपने भात आ नून –तेल लए बैसलीह। दूधक बर्तनसँ दाढ़ी खखोड़ि कए बादमे बुचिया खेलक।
- ई खिस्सा सुनबैत मनोहर बजलाह जे हमरा सभ आब ई कऽ सकैत छी की ?
पहिने खेनाइ-पिनाइसँ लऽ कऽ पढ़नाइ-लिखनाइ धरि बेटीक संग अन्याय होइत रहए। अपाला-गार्गी-मैत्रेयीक समय तँ आब जाऽ कऽ फेरसँ आएल अछि ।
5. गोरलगाइ
जमाय पएर छूबि कए प्रणाम कएलन्हि तँ ससुर सए टका निकालि एक टाकाक नोटक सिक्काक लेल कनियाँकेँ सोर केलन्हि। खूब खर्च-बर्च कएने छलाह बेटीक बियाहमे पाइ अलग गनने छलाह आ नगरक चारि कठ्टा जमीन सेहो बेटीक नामे लिखि देने छलाह।
“नञि बाबूजी। ई गोर-लगाइक कोन जरूरी छैक”?
तावत कनियाँ आबि गेल रहथिन्ह, एक टकाक सिक्का लऽ कए।
एक सए एक टाका जमायक हाथमे रखैत ससुर महराज बजलाह- –
“राखू-राखू । ई तँ पहिनहियो ने सोचितियैक”।
मसूरीमे आइ.ए.एस. आ आइ. पी. एस. प्रोबेशनर सभक दारु पार्टी चलि रहल छल ।
“हम सभ एतेक तेज छी एक सय प्रश्नक सेट बना कऽ तैयारी कएलहुँ तखन जा कए सफल भेलहुँ । के अछि हमरासँ बेशी तेज?”।
“रौ दिनेसबा । सतमामे तूँ पास नहि भेलँह , अठमामे सेहो एक बेरे पास नहि भेलँह । दसमामे द्विती श्रीणी भेलापर तोरा स्कूलसँ निकालि देलकऊ। प्रश्नक पैटर्नक हम आ तूँ प्रैक्टिस केलहुँ आ सफल भेलहुँ तँ एहिमे तेजी केर कोन बात आएल”।
7.जाति
हैदराबाद पुलिस एकेडमीमे दारूक पार्टी चलि रहल छल ।
“क्यो किछु नहि बाजत, बस हमही टा बाजब”।
छाती पिटैत- “राजपूतक छाती छी ई, क्यो किछु नहि बाज “।
“:भाइ यैह तँ अंतर छैक, दुनू गोटे आइ.पी.एस.छी , दुनू गोटे पीने छी। मुदा की हम ई कहि सकैत छी छाती पीटि कए- जे हम डोम छी, क्यो किछु नहि बाज”!:
नगरमे डकैतीक घटना भेल । नूतन मीडिया अपन-अपन चैनलमे सर्वप्रथम ओकरे चैनलपर एकर सूचना देल जा रहल अछि ई ब्यौरा दैत, दू-दिनमे एकोटा गिरफतारी नहि होएबाक आ पुलिसक अक्षमताक-चर्च करैत गेलाह।
पुलिस हेडक्वार्टरमे बैठकी भेल । सभ टी.वी. चैनल कहि रहल छल जे चारि गोटे मिलि कए डकैती केलन्हि मुदा एखन धरि एको गोटेक गिरफतारी नहि भेल अछि। एनकाउन्टर स्पेशलिस्ट बजाओल गेलाह। जेना सभ बेर होइत रहए एहि बेर सेहो ओ एक गोटेँ पकड़ि कए अनलन्हि। चारि डाँग पड़बाक देरी छल आकि ओ अपन डकैत होएबाक गप स्वीकार कए लेलक। फेर एनकाउन्टर स्पेशलिस्टक संग ऑफिसर लोकनि कैमराक सोझाँ फोटो खिचबेलन्हि। ओ डकैत अपन डकैत होएबाक गप सेहो स्वीकार कएलक।
चारि दिन आर बीतल। सभ दिन तरह-तरह सँ ओहि कथित डकैतकेँ पीटल जाइत रहल,
-“बता अपन तीन संगीक नाम जकरा संगे डकैती कएने छलह”।
-“सरकार चारिए डाँगमे अपन डकैत होएबाक गप स्वीकार कए लेलहुँ, हम डकैत रहितहुँ तँ ई करितहुँ। मुदा आर तीनटा संगीक नाम कतए सँ आनू आ ककरा फुसियाहींकेँ फसाऊ”।
सप्ताह भरिक बाद मीडिया एकटा बम विस्फोटक अन्वेषणमे बाँझि गेल । मुख्य डकैत तँ पकड़ाइये ने गेल से आब डकैतीक कॉवरेज दर्शक नहि ने देखए चाहैत छथि! पब्लिक डिमान्ड नहि छैक से ओहि डकैतकेँ बेल भेटलैक आकि नहि से कोनो समाचार नहि आएल।
10.उद्योग
गममे चौधरीजीक बड्ड रूतबा, डरे सभ सर्द रहैत छल । ककर दीन अछि जे हुनकर गम्हरायल धान काटि लेत आकि ... ।
ओ एकटा बस खोललन्हि-
“दरभंगासँ गाम धरि चलत । सेकेंड हैंडमे भेटल अछि । पुरनका मालिकक लाइसेंस काज देत। संगमे बसक पुरनका मालिक तीन मासक लेल अपन ड्राइवर आ खलासी सेहो देलक अछि, तकर बाद अपन ताकि लेब”
चौधरीजी मन्दिरपर बसक पूजा करैत काल गौआँ सभ़सँ बजलाह ।
“सुनैत छिऐक बस-स्टैण्डमे बड़ बदमस्ती करैत जाइत छैक”। एक गोटे गौआँ बजलाह
“धुर, चौधरीजीक बस आ आदमीकेँ के छुबाक साहस करत”। दोसर गोटे प्रसाद लैत बजलाह।
बसक रूट आकि रस्ता यात्रीगणक लेल सुभितगर रहैक से ओहि गाड़ीमे पैसेन्जर भरि जाइत रहए। दोसर बसबला सभ दबंग सभ। शाहीजी आ मिश्राजीक स्टाफ सभ बड़ सञ्जत! से चौधरीजीक स्टाफकेँ गरगोटिया दऽ बस स्टैण्ड सँ बाहर निकालि देलकन्हि।
पोखरिक महारपरसँ चौधरीजीक बस खुजए लागल तँ ओतहु यात्री पहुँचए लगलाह।
आब तँ बस-स्टैण्डक दादा सभकेँ बड्ड तामस उठलन्हि । दुनु ड्राइवर आ खलासीकेँ पुष्ट पीटल गेल आ ईहो कहल गेल जे फेर एहि रूटपर चलताह तँ बसक एक्सीडेन्ट करबा देल जएतन्हि। शाही आ मिश्रा जीक तँ पचासो टा गाड़ी छन्हि एकटा थानामे एक्सीडेन्टक बाद पड़ले रहत तँ की।
गामक रोआब –दाब बला कौधरीजी बस-स्टेण्डक दादा सभक सोझाँ जेना बकड़ी बनि गेलाह। गाममे मन्दिरपर गाड़ी ठाढ़ छन्हि, ओहि पर कदीमाक लत्ती चढ़ि गेल अछि पैघ-पैघ कदीमासँ बस झपा गेल अछि।खूब फड़ल छैक। गौआँसभ हँसीमे कहि रहल छथि-
“चौधरीजीक बसक पाइ तँ एहि बेर कदीमा बेचिये कऽ उप्पर भऽ जएतन्हि”।
दरभंगाक इन्डस्ट्रीयल स्टेटमे सेहो फैक्ट्री सभ एहिना बन्द अछि आ ओकर देबाल सभपर एहिना तर-तीमनक लत्ती सभ भरल छैक”।- दोसर गौआँ कहलक।
मिथिलाक बोनमे रहनिहार जीव-जन्तु सभ आपसमे विचार कएलक- –
“अपन क्षेत्रक दादा सभ उद्योगक विनाश कएने अछि ओतुक्का भीरू लोक सभ उद्योग लगेबासँ परहेज करैत अछि”।- गीदड़ बाजल।
“तखन अपनहि सभ किएक नहि फैक्टरी खोलैत छी , कोन दादाक मजाल जे हमरा सभ लग आओत”।-बाघ कड़कल।
प्रस्ताव पास भेल जे आब जंगलमे फैक्ट्री खुजत आ नगर जा कए उद्योग विभागसँ एकर पंजीकरण करबाओल जाएत। ओतय भीरू मैथिल सभक राज अछि जे बड्ड ओस्ताज होइत अछि। गीदड़, बानर , लोमड़ि, नीलगाय संग गदहा सेहो पंजीकरण लेल अपन सेवा देबाक लेल अगू बढ़लाह। सभसँ पहिने लोमड़िकेँ मौका भेटल कारण ओ सेहो जंगलक ओस्ताज अछि।
किछु दुनुका बाद भागि,–दौग-बड़हा केलाक बाद ओ हारि मानि लेलक।
“यौ बाघ महाराज। बड्ड कोन-कोन तरहक दस्तावेज मँगैत अछि नहि भऽ सकत हमरा बुते”।
फेर एक – एक कए सभ जाइत गेलाह आ घुरि कए अबैत गेलाह । गदहा कहैत रहल जे एक मौका हमरो देल जाए मुदा सभ सोचथि जे बुझू एहेन पेंचीला सभ विफल भऽ आबि गेलाह मुदा फैक्टरीक पंजीकरण नहि करबाए सकलाह आ ई गदहा जे मूर्खताक लेल आ बोझ बहबाक लेल प्रसिद्ध अछि की कऽ सकत ?
“ठीक छैक”। अन्तमे हारि कए बाघ कहलन्हि- –
“जाउ अहूँ देखि आउ एक बेर”।
मुदा ई की ? साँझ होइत देरी गदहा महाराज जे छलाह से फैक्ट्रीक पंजीकरण प्रमाणपत्र लऽ सोझाँ हाजिर भऽ गेलाह।
बाघ पुछलन्हि- –“औ जी गदहा महाराज ! एतेक कलामी जन्तु सभ जतए विफल भऽ गेलथि ओतए अहाँक सफलताक मंत्र की”?
गदहा महाराज उत्तर देलन्हि,
“महाराज एकर मंत्र अछि जातिवाद आ भाइ-भतीजावाद। उद्योग विभागमे हमर सभ सरे-सम्बन्धी लोकनि छथि ने”!
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