भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

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Tuesday, December 23, 2008

नीक लोक

नीक लोक ओ
जे रहैत छैक ईमानदार
बेइमानी जखन धरि
रहैत अछि नुकायल

नीक लोक ओ
जे रहैत छैक सत्यवादी
पकड़ल नहि जाइत छैक
जखन धरि झूठ

नीक लोक ओ
जे रहैत छैक संस्कारी
जखन धरि आगू नहि
आबैत अछि राक्षसी प्रवृति
नीक लोक ओ
जे रहैत छैक विश्वासी
जखन धरि मुंह नहि
खोलैत अछि धोखा पाउल लोक
नीक लोक ओ
जे नहि करत अश्लील गप
जखन धरि आगू नहि
आबैत अछि कामक प्रस्ताव

नीक लोक ओ
जे करत लोक संग मीठ गप
जखन धरि आगू नहि
आबैत छैक प्रताड़ित पत्नी.

Saturday, December 20, 2008

मिथिलांचलक विकास

मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि लेकिन ओहियो स पैघ कारण एहि इलाका के मे कोनो नीक नेतृत्व के आगू नै एनाई अछि। आजादी के लगभग 60 वर्ष बीत गेलाक के बाद देश में जहि हिसाब स आर्थिक असमानता बढ़ि गेलैक अछि ओहि में बिहार आ खासक मिथिला के सामने एकटा बड्ड पैघ संकट छैक जे ई और पाछू नै फेका जाय। उदाहरण के लेल ई आंकड़ा आंखि खोलि दै बला अछि जे एकटा गोआ मे रहय बला औसत आदमी के प्रतिव्यक्ति आमदमी एकटा औसत बिहारी सं सात गुना बेसी छैक आ एकटा पंजबी के आमदनी पांच गुना बेसी छैक। बिहारो मे अगर क्षेत्रबार आंकड़ा निकालल जाय त बिहार के दक्षिणी( एखुनका गंगा पार मगध आ अंग) एवम पश्चिमी ईलाका बेसी सुखी अछि, आ ओकर जीवनशैली सेहो दू पाई नीक छैक। त एहन में सवाल ई जे फेर रस्ता की छैक। की मिथिलांचल के लोक एहिना दर-दर के ठोकर खाईके लेल दुनियां में बौआईत रहता अथवा हुनको एक दिनि विकास के दर्शन हेतन्हि।
मिथिलांचलक ई दुर्भाग्य छैक जे एकर एकट पैघ हमरा हिसाब सं आधा से बेसी इलाका बाढ़ि में डूबल रहैत छैक। बाढ़ि के समस्या के निदान सिर्फ राज्य सरकार के मर्जी सं नहि भ सकैत बल्कि अहि में केंद्रसरकार के सहयोग चाही। पिछला साठि साल मे बिहार के नेतागण अहिपर कोनो गंभीर ध्यान नहि देलन्हि जकर नतीजा अछि जे बाढ़ एखन तक काबू मे नहि आबि रहल अछि। पिछला कोसी के आपदा एकर पैघ उदाहरण अछि, आब नेतासब के आंखि कनी खुललन्हि अछि, लेकिन एखन सं मेहनत केल जायत त अहि मे कमस कम 20 साल लागत।
बाढ़ि सिर्फ संपत्ति के नाश नहि करैत छैक, बल्कि आधारभूत ढ़ांचा जेना सड़क, रलेवे आ पुल के खत्म क दैत छैक। एहन हालत मे कोनो उद्योग के लगनाई सिर्फ दिन मे सपना देखैक बराबर अछि।
किछु गोटाके कहब छन्हे जे बिहार मे उद्योग धंधा के जाल बिछाक एकर विकास केल जा सकैछ। लेकिन जखन सड़क आ विजलिये नहि अछि त केना उद्योग आओत। दोसर बात ई जे पिछला अविकासके चक्रक फलस्वरुप आबादीके बोझ एतेक बढ़िगेल अछि जे पूरा इलाका मे कोनो खाली जमीन नहि अछि जतय पैघ उद्योग लगायल जा सकय। सिंगूर के उदाहरण सामने अछि। महाशक्तिशाली वाममोर्चा के सरकार के जखन बंगाल मे 1000 एकड़ जमीन नै खोजल भेलैक त एकर कल्पना व्यर्थ जे दरभंगा आ मधुबनी मे सरकार कोनो पैघ उद्योग के जमीन दै। दोसर बात इहो जे पूरा मिथिला के पट्टी मे, मुजफ्फरपुर सं ल क कटिहार तक कोनो पैघ संस्था-चाहे ओ शैक्षणिक होई या औद्योगिक- नै छै जे एकमुश्त 3-4 हजार लोग के रोजगार द सकै। हमरा इलाका मे शहरीकरण के घनघोर अभाव अछि। जतेक शहर अछि ओ एकटा पैघ चौक या एकटा विकसित गांव स बेसी नहि।एकटा ढंग के इंजिनियरिंग या मेडिकल कालेज नहि, एकटा यूनिवर्सिटी नहि। कालेज सब केहन जे 4 साल में डिग्री द रहल अछि। एक जमाना मे प्रसिद्ध दरभंगा मेडिकल कालेज मे टीचर के अभाव छैक आ कालेज जंग खा रहल अछि। हम सब एहन अकर्मण्य समाज छी जे कोसी पर एकटा पुल बनबैक मांग तक नै केलहुं,हमर नेता हमरा ठेंगा देखबैत रहला। आब जा क रेलवे आ रोड पुल के बात भ रहल अछि।कुल मिलाकर इलाका मे सिर्फ 8-10 प्रतिशत लोक शहर में रहैत छथि, ई ओ लोक छथि जिनका सरकारी नौकरी छन्हि। ई शहर कोनो उद्योग के बल पर नहि विकसित भेल। बाकी आबादी-लगभग 40 प्रतिशत दिल्ली आ पंजाब मे अपन कीमती श्रम औने-पौने दाम मे बेच रहल अछि। मिथिला के श्रम पंजाब मे फ्लाईओवर आ शापिंग माल बनाब मे खर्च भ रहल अछि, कारण कि हमसब एहेन माहौल नहि बनौलिएकि जे ओ श्रम अपन घर मे नहर या सड़क बनब मे खर्च हुए।

तखन सवाल ई जे फेर उपाय की अछि। हमरा ओतय पैघ उद्योग नहि लागि सकैछ, रोड नहि अछि बाढ़ि के समस्या विकराल अछि, त हमसब की करी। लेकिन नहि, मिथिला के विकास एतेक पाछू भ गेलाक बाद एखनों कयल जा सकैछ। आ अहि विषय मे कय टा विचार छैक।

किछु गोटा के कहब छन्हि जे एखुनका बिहारक सरकार मगध आ भोजपुर के विकास पर बेसी ध्यान द रहल छैक। एकर वजह जे सत्ता मे पैघ नेता ओही इलाका के छथि, लेकिन दोसर कारण इहो जे ओ इलाका बाढ़िग्रस्त नहि छैक। पैघ प्रोजेक्ट के लेल ओ इलाका उपयुक्त छैक। उदाहरणस्वरुप-एनटीपीसी, नालंदा यूनिवर्सिटी आ आयुध फैक्ट्री-ई तमाम चीज मगध मे अछि। दोसर बात ई जे नीक कनेक्टिविटी भेला के कारणे भविष्य मे जे कोनो निवेश बिहार मे हेतैक ओ सीधे एही इलाका मे जेतैक। कुलमिलाक आबै बला समय मे बिहार मे क्षेत्रीय असमानता बढ़य बला अछि। एहि हालत मे किछु गोटा अलग मिथिला राज्यक मांग क रहल छथि, आ हमरा जनैत संस्कृति स बेसी -अपन आर्थिक विकास के लेल ई मांग उचित अछि।

मिथिला के विकास के माडेल की हुअके चाही।मिथिला के जमीन दुनिया के सबस बेसी उपजाऊ जमीन अछि। हमसब पूरा भारत के सागसब्जी आ अनाज सप्लाई क सकैत छी। लेकिन ओ सब्जी दरभंगा सं दिल्ली कोना जायत। एहिलेल फोरलेन हाईवे आ रेलवे के रेफ्रजेरेटर डिब्बा चाही। दोसर गप्प हमर इलाका के एकटा पैघ रकम दोसर राज्य मे इंजिनियरिंग आ मेडिकल कालेज चल जाईत अछि। हमरा इलाका मे 50 टा इंजिनीयरिंग कालेज आ 10 टा मेडिकल कालेज चाही। ई कालेज भविष्य में विकास के रीढ़ साबित होयत। हमरा इलाका मे छोट-छोट उद्योग जेना स़ाफ्टवेयर डेवलपमेंट या पार्टपुर्जा बनबै बला फैक्ट्री चाही जहि मे 100-200 आदमी के रोजगार भेटि जाय। लेकिन एहिलेल 24 घंटा विजली चाही। ई कतेक दुर्भाग्य के बात जे बगल के झारखंडक कोयला के उपयोग त पंजाब में बिजली बनबैक लेल भ जाय छैक लेकिन हमसब एकर कोनो उपयोग नहि क रहल छी। आई अगर हमरा अपन इलाका मे 24 घंटा बिजली भेटि जाय़ त पंजाब जाय बला मजदूर के संख्या में कम सं कम आधा कमी त पहिले साल भ जायत। भारत के दोसर राज्य सिर्फ आ सिर्फ अही इलाका के सस्ता श्रम के बले तरक्की क रहल अछि। हमसब ई जनतौ किछु नहि क रहल छी, ई दुर्भाग्य के गप्प।

मिथिला मे पढ़ाई लिखाई के प्राचीन परंपरा रहलैक अछि लेकिन सुविधा के अभाव मे ई धारा हाल मे कमजोर भेल अछि। खासकर महिला शिक्षा के दशा-दिशा त आर खराब अछि। एकटा लड़की कतेको तेज कियेक ने रहे ओ 10 सं बेसी नहि पढ़ि सकैत अछि कारण घर के पास कालेज नहि छैक। हमरा अगर तरक्की करय के अछि त इलाका मे एकटा महिला यूनिवर्सिटी त अवश्ये हुअके चाही, संगहि सरकार के ईहो दायित्व छैक जे हरेक ब्लाक में कमस कम एकटा डिग्री कालेज के स्थापना हुए। देश के विकास मे अहि इलाका के संग कतेक भेदभाव केल गेलैक आ हमर नेतागण कतेक निकम्मा छथि-एकर पैघ उदाहरण त ई जे इलाका मे एकहुटा केंद्रीय संस्थान नहि छैक। एकटा यूनिवर्सिटी नहि, एकटा कारखाना नहि। आब जा क कटिहार मे अलीगढ यूनिवर्सिटी, दरभंगा में आईआईआईटी आ बरौनी मे फेर सं खाद कारखाना के पुनर्जीवित करैक बात कयल जा रहल अछि। हमरा याद अछि जे साल 1996 तक दरभंगा तक मे बड़ी लाईन नहि छलैक। हमसब कुलमिलाकर कोनो तरहक संपत्ति के निर्माण नहि करैत छी। हमसब अपन आमदनी दोसर राज्य भेज दै छियैक-बेटा के बंगलोर मे इंजिनीयरिंग करबै सं ल क दियासलाई तक खरीदै मे। हमर पूंजी अपन राज्य, अपन इलाका के विकास में नहि लागि रहल अछि। एहि स्थिति के जाबत काल तक नहि बदलल जायत हम किछु नहि क सकैत छी।

Thursday, December 18, 2008

रेडिमेडक जमाना - मदन कुमार ठाकुर

( रेडिमेडक मतलब जे काम चलाऊ, कमसँ कम समय मे, कमसँ कम खर्चा मे, कमसँ कम मेहनत मे, निकसँ निक समान, निकसँ निक व्यवस्था निकसँ निक मनोरंजन होइत अछि ! रेडिमेड सभ तरहे सभ लोककें अपना तरफ आकर्षित करैत अछि ! जकर किछ उदहारण हम मैथिल आर मिथिला (मैथिली ब्लॉग) पाठक गन के बिच प्रस्तुत करे चाहय छी ) ....




() हमर विवाह छल पंडितजी के देखलियैन डेढ़ घंटाक अन्दर s विवाह दान सब करा' देलथि ! हम पंडितजी सँ कहलियनि पंडितजी हम छंदोगी ब्रह्मण छी, हमरा सभक विवाह कमसँ कम छः सात घंटा मेs समाप्त होइत छैक ! मुदा अहां दुई घंटाक भीतर सब किछ कोनाक करबा देलियइ ? पंडितजी बजलाह .... सुनु जमाय बाबु " आब अहां के नै बुझल अछि जे रेडिमेडक जमाना छैक " तहि द्वारे झट मंगनी पट विवाह होइत छैक !




() हमर काकाक एगो बेटा लंदन मे रहैत छल ! पढाई लिखाई मे बहुत होनहार छल ! ओकरा पर सभके विस्वास छल जे एक दिन खान्दानक नाम रोशन जरुर करत ! दुई सालक बाद गाम आयल संग मे ऐगो फोर्नर लड़की के सेहो s s आबी गेल छल ! तेँ ओकरा बाबु पुछलखिन्ह जे रौ बोउवा तू विवाह हमरा बिना कहने पंडितजी के बिना दिन तकेनै कोनाक s लेला ? बोउवा बजल ... "बाबु आहां के आब नै बुझल अछि जे रेडिमेडक जमाना छैक " बाबु हमर विवाह नै भेल हन हमर गर्लफ्रेंड छी !




() हम दिल्ली नए - नए आयल छलहुँ ! हम आर हमर भैया एगो विवाह मे सामिल भेल छलहुँ ! विवाह मे देखलहुँ सभकियो नाचैत छल ! सब कियो ठारे - ठार भोजन करैत छल ! हम भैयासँ पूछलहुँ भैया अहिठाम की s रहल छैक ? भैया कहलक ... रे बुरबक " आब तोरा नै बुझल छो जे रेदिमेडक जमाना छैक " आब लोकक पास ओतेक समय नै छैक जे बैस के भोजन चारि घंटा बैस के प्रोग्राम देखता !




() साउथ अफ्रीका मे क्रिकेट मैच चलैत छल ! धोनीक टिम मैच खेलैत छल ! तहिसँ सभ टी.वी. समाचार चेनल पर धुवा - धार जय - जय कार होइत छल ! कियेकी २० - २० क्रिकेट मेच इंडिया जीत गेल छल ! हम अपन काका से पुछलियनि काका पहिने ५० - ५० ओभरक क्रिकेट मेच होइत छल ! आब २० - २० ओभरक खेल किये होइत अछि ? काका बजलाह ... बोउवा " आब अहाँ के नै बुझल अछि जे आब रेडिमेडक जमाना छैक " लोगक पास आब ओतेक समय नै छैक जे बैस केs पूरा ५० ओभर के खेलक आनंद लेता !




() एगो हमर साथी छलथि हुनकर विवाह के मात्र पाँचे महिना भेल छलनि ! ताहिक उपरांत हुनकर घरवाली के एगो बच्चा जनमलनि ! ओही बातसँ आस - पासक जतेक पड़ोसी छलनि सभ केs लगलनि कोना केs s गेल यो एखन विवाह के मात्र पाँचे महिना भेल हएँ ! हमर साथी बजला ... " आब अपने सभ के नै बुझल अछि जे रेडिमेडक जमाना छैक " जे जन्मल धिया पुता बसायल घर सब के मिलैत छैक !




() एक दिनक बात अछि ... बाबा आर हम दुनु आदमी दिल्ली गेलो ! लालकिला कुतुबमीनार देखैक लेल ! आबैत काल मे बाबा के लघुसंका लागी गेलनि ! बाबा हमरा कहलथि जे कनी पानिक व्यवस्था s दिअ जे हम लघुसंका करब ! हम एगो दूकान से १० रुपैया मे पानिक बोतल लेलहुँ बाबा के रोडक साइड मे जगह देखा देलियनि ! बाबा पानि s केs रोड के साइड मे बैस के लघुसंका करैय लागला ! ताबे मे किम्हरो से ऐगो सफाई करैय बला जमेदार आबिगेल बाबासँ कहलकनि ... आपको " अब मालूम नहीं हैं जो अब रेडिमेड का जमाना हैं " जो आप रोड को गन्दा करते हो ! इसके लिए सरकार ने रेडिमेड सुलभ सौचालय का व्यवस्था किया हैं !


(७) इलहाबादक एगो हमर पड़ोसी शर्माजी छलथि ! हुनका एगो २५ वर्षक लड़की छलनि जे डिग्री प्राप्त कs केs घर मे बैसल छलथि ! मुदा शर्माजी के अपन काज धंधा सँ फुरसते नै भेटैत छलनि जे ओ अपन बेटी मुन्नी के लेल वर तकता ! ओ बार बार हमरा परेसान करैत रहैत छलाह जे मदनजी कतौ हमरा मुन्नीक लेल योग्य लड़का देखियो ...... हम कहलियनि .... अपने केs " आब ई नै बुझल अछि जे आब रेडिमेडक जमाना छैक " आब इन्टरनेट के 'Shadi.com' पर वर आ कनियाँ रेडिमेड भेटैत छैक ! मुन्नी से कहबई जे अपन योग्य लड़का ताकि लेट !


(८) एकटा हमर डॉक्टर काका छलथि ! हुनका दिल्लीमे घर आँगन नै छलैन तहि सs ओ अपन परिवारक लेल काफी परेसान रहैत छलैथ ! एक दिन ओ हमरा कहलैथ जे मदनजी हमरा कतौ जमीं खरीद दिअ जे हम दू सालमे अपन घर आँगन बनबा लेब कियेकी आब हमहूँ वृद्ध अवस्थामे आयल जायत छी ..... हम कहलियनि .... काका जी अहाँ के " आब ई नै बुझल अछि जे रेडिमेडक जमाना छैक " कतेक आदमी के रेडिमेड घर आँगन रियल स्टेट कम्पनी द्वारा मिलैत छैक !


(९) हम टी.वी. पर आजतक समाचारक चेनक देखैत छलहुँ ! विषय छल मंत्री परिषद् मे चिंता .... कांग्रेस के पूर्ण रूपसँ बहुमत प्राप्त भs गेल छल ! मुदा विरोधी दल बी.जे.पी. ओही के समर्थन नै करैत छल ! कहैत छल जे विदेशी नेता सोनिया गाँधी हमर मंत्री आ हमर सरकार नै बनि सकैत अछि ! ओही सम्मेलन मे श्री लालू प्रसाद यादव सेहो बैसल छलथि ! लालू जी अंत मे बजलाह ... " आपलोगों को मालूम नहीं हैं की अब रेडिमेड का जमाना हैं " बहुमत किसी को भी मिले मंत्री कोई भी बन सकता हैं ! जैसे मैं जब चारा घोटाला के केस में जेल जाने वाला था तो अपनी पत्नी को मुखमंत्री का कुर्शी पर बैठा कर जेल गया था !


(१०) किछ दिन पहिनेक बात अछि ! हम गामे मs रही हमर काका अपन बेटिक कन्यादान ठीक केलथि ! मुदा वर पक्ष बला कहलकनि जे सरकार हमरा दहेजक पाई काल्हि साँझ तक चाही तखने हम विवाह करब ! नै तेँ दोसर गाम के घटक तैयार छथि ! ई बात शनिक साँझ के छी ! सब कियो परेसान भोs गेला कारण की काल्हि रवि छले आ रवि के बैंक बंद रहैत अछि, साँझ तक एक लाख रुपैया के कोना व्यवस्था हेत ! दोसर दिन काका गाम मे दुई चारी आदमी के पुछल्खिन सभ कियो कहलकनि जे हम सोम दिन बैंक सs पाई आनी के देब ! मुदा वर पक्षक शर्त रवि दिनक साँझ तक छलनि ! अंत मे हम कहलियनि.... " अहां सभ के ई नै बुझल अछि जे आब रेडिमेडक जमाना छैक " आब पाई मशीन सs निकलैत अछि ! तखने हम दू आदमी झंझार पूर ATM मशीन पर गेलहुँ आ चारि टा कार्ड के एक लाख रुपैया निकाली के आबि गेलहुँ सब गाम मे देखते रही गेल ....



जय मैथिली, जय मिथिला,


मदन कुमार ठाकुर, कोठिया पट्टीटोल, झंझारपुर (मधुबनी) बिहार - ८४७४०४,

मोबाईल +919312460150 , ईमेल - madanjagdamba@rediffmail.com

Wednesday, December 17, 2008

११ टा कथा- १.मराठी,२.थेथर,३.हिजड़ा, ४.बेटी ,५.गोरलगाइ,६.इंटेलीजेन्ट,७.जाति,८.कम्पेशनेट अप्वाइन्टमेन्ट,९.डकैती,१०. उद्योग,११.उद्योग-२










११ टा कथा- गजेन्द्र ठाकुर











1.मराठी

“ऐँ यौ ई की देखैत छी , ऑफिसमे अफसर सेहो मिथिलाक आ बिहारक आ रिक्शाबला, खेनाइ बनबए बला सेहो सभ मिथिलाक आ बिहारक । से कोन गप भेल”।

पुणे मे सिंहजी केँ एक गोट मराठी सज्जन पुछलखिन्ह। बात सेहो ठीक रहए मुदा बाहरी लोककेँ बुझबामे नहि आबए ।

सिह साहेब भारतीय पुलिस सेवा मे रहथि आ हुनकर सहोदर भिखना-पहाड़ीमे प्रिंटिंग प्रेसमे क-ट सभ जोड़ैत छलाह, से हुनका कनेको अनसोहाँत नहि लागलन्हि। मैथिली साहित्यमे देखैत आएल छथि मात्र मैथिल ब्राहाण आ कर्ण कायस्थक लेखनीकेँ चमकैत। रिक्शाबला तँ दरभंगाक होए आकि कटिहारक, खेनाइ बनबएबला झौआ रहबे टा ने करैत अछि।ई मराठी सभकेँ पता नहि किएक अनसोहाँत लगैत छैक।

बड्ड जातिवादी सभ अछि ई मराठी सभ।

 2.थेथर

 

दू दिनसँ परबा असगरे बैसल रहए । ओकर कनियाँ उढ़रि कए कतहु चलि गैलैक । बच्चा सभ कतेको बेर ओकर खोपड़ीमे पानि आ दाना दऽ आएल रहए । मुदा आइ भोरे ओ खोपड़ी उजारि कतहु चलि गेल”।

“किए यै नानी । ओहो किएक नहि दोसर बियाह कऽ लेलक । बेशी प्रेम करैत रहए कनियाँसँ”।

“अहाँ नेना छी । ई कोनो थेथर मनुक्ख थोड़े छी जे कनियाँ मरए, माय-बाप मरए , बेटा-पुतोहु मरए , सर-समाज मरए , चारि दिन मुँह लटकाएत आ पाँचम दिनसँ फेर थेथर मऽ जाएत “।

 3.हिजड़ा

 

मरि गेलि बेचारी “। गौआँ सभ फलना बाबूक तेसर कनिआँक मुइलापर कहलन्हि ।

“फलना बाबू तेसर कनियाँक गरदनि काटि लेलन्हि “। एक गोटे कहलान्हि ।

“से ठीके कहैत छी । पहिल कनियाँमे बच्चा नहि भेलैक तँ दोसर बियाह कएलक । मुदा जखन दोसरोमे बच्चा नहि भेलैक तँ बुझबाक चाही छलए ने”।- दोसर गोटे कहलन्हि ।

“हँ आ उनटे तेसर कनियाँकेँ कहैत रहथि जे भातिज सभकेँ नहि मानैत छिऐक तेँ भगवान बच्चा नहि देलन्हि । बुझू”?-तेसर गोटे कहलन्हि ।

“हिजड़ासार”।- चारिम गोटे सभा समाप्त  करैत बाजल ।

मुदा चारि गोटेक ई महा-सम्मेलन एहि गपपर सहमति मे छल जे पहिल दू टा बियाह करब उचित रहए।

 4.बेटी

“बाबूक संगे खाएब”।-बुचिया बाजलि ।

“हे आब तूँ छोट नहि छेँ, एम्हर बैस”। माए कहलन्हि ।

फेर भाए सभ खेनाइ खेलक आ आब बुचिया आ बुचिया माएक बेर आएल । तरकारी सठि जेकाँ गेल रहए , दूध तँ बाबू आ भाएकेँ  मात्र भेटलैक । माए बुचियाकेँ सठल जेकाँ तरकारी लोहियामेसँ छोलनीसँ जेना –तेना निकालि ए देलन्हि आ अपने भात आ नून –तेल लए बैसलीह। दूधक बर्तनसँ दाढ़ी खखोड़ि कए बादमे बुचिया खेलक।


 - ई खिस्सा सुनबैत मनोहर बजलाह जे हमरा सभ आब ई कऽ सकैत छी की ?

पहिने खेनाइ-पिनाइसँ लऽ कऽ पढ़नाइ-लिखनाइ धरि बेटीक संग अन्याय होइत रहए। अपाला-गार्गी-मैत्रेयीक समय तँ आब जाऽ कऽ फेरसँ आएल अछि ।

 5. गोरलगाइ

जमाय पएर छूबि कए प्रणाम कएलन्हि तँ ससुर सए टका निकालि एक टाकाक नोटक सिक्काक लेल कनियाँकेँ सोर केलन्हि। खूब खर्च-बर्च कएने छलाह बेटीक बियाहमे पाइ अलग गनने छलाह आ नगरक चारि कठ्टा जमीन सेहो बेटीक नामे लिखि देने छलाह।

“नञि बाबूजी। ई गोर-लगाइक कोन जरूरी छैक”?

तावत कनियाँ आबि गेल रहथिन्ह, एक टकाक सिक्का लऽ कए।

एक सए एक टाका जमायक हाथमे रखैत ससुर महराज बजलाह- –

“राखू-राखू । ई तँ पहिनहियो ने सोचितियैक”।

6.इंटेलीजेन्ट

मसूरीमे आइ.ए.एस. आ आइ. पी. एस. प्रोबेशनर सभक दारु पार्टी चलि रहल छल ।

“हम सभ एतेक तेज छी एक सय प्रश्नक सेट बना कऽ तैयारी कएलहुँ तखन जा कए सफल भेलहुँ । के अछि हमरासँ बेशी तेज?”।

“रौ दिनेसबा । सतमामे तूँ पास नहि भेलँह , अठमामे सेहो एक बेरे पास नहि भेलँह । दसमामे द्विती श्रीणी भेलापर तोरा स्कूलसँ निकालि देलकऊ। प्रश्नक पैटर्नक हम आ तूँ प्रैक्टिस केलहुँ आ सफल भेलहुँ तँ एहिमे तेजी केर कोन बात आएल”।

7.जाति

 

हैदराबाद पुलिस एकेडमीमे दारूक पार्टी चलि रहल छल ।

“क्यो किछु नहि बाजत, बस हमही टा बाजब”।

छाती पिटैत- “राजपूतक छाती छी ई, क्यो किछु नहि बाज “।

“:भाइ यैह तँ अंतर छैक, दुनू गोटे आइ.पी.एस.छी , दुनू गोटे पीने छी। मुदा की हम ई कहि सकैत छी छाती पीटि कए- जे हम डोम छी, क्यो किछु नहि बाज”!: 


8.कम्पेशनेट अप्वाइन्टमेन्ट

 “बड्ड दर्द भऽ रहल अछि बाबू, आब बर्दास्त नहि भऽ रहल अछि” ।

पता नहि कोन घाव रहैक । पुकार कुहरि रहल छथि । पिता स्वतंत्रता सेनानी रहथि, जखन डाक्टर आ कम्पाउन्डर मना कऽ देलक घाव छुबएसँ तँ अपने हाथे सेवा कऽ रहल छथि । उजरा पाउडरकेँ नारिकेरक तेलमे मिला कऽ घावक खपलौया हटा कऽ ओहिमे लगाबथि। पीजकेँ पोछथि। बाप आ छोट भाए दुनू सेवामे लागल रहथि ।

परूकाँ प्रथम श्रेणीमे उत्तीर्ण भेल छलखिन्ह पैघ बेटा, सत्यनारायण भगवानक पूजा भेल रहए।

बूढ़ बापक पैघ आश रहथि बड़का बेटा। छोटका बेटा कोनो तेहन तेजगर नहि रहथिन। मुदा रोग एहन रहए जे एक दिन बड़का बेटाक प्राण लए लेलक अंग्रेजसँ लड़ैत खुशी-खुशी जेल गेल रहथि मुदा तखन युवा रहथि। बुढ़ारीमे ई शोक हुनका तोड़ि देलकन्हि । गुमशुम आ अपनेमे मगन रहए लगलाह । स्वतत्रता सेनानी पेंशनसँ घर चलाबथि । हँ छोटका बेटा पैघ भाएक सटिर्फिकेट लऽ कलकता गेलाह आ ओहि सटिर्फिकेटक आधारपर हुनका एकटा प्राइवेट कम्पनीमे नीक नोकरी भेटि गेलन्हि। माने मात्र नाम बदलि गेलन्हि।

लोककेँ बाप मरलापर नोकरी भेटैत छैक , हुनका भाएक मरलापर भेटलन्हि । 


9.डकैती

नगरमे डकैतीक घटना भेल । नूतन मीडिया अपन-अपन चैनलमे सर्वप्रथम ओकरे चैनलपर एकर सूचना देल जा रहल अछि ई ब्यौरा दैत, दू-दिनमे एकोटा गिरफतारी नहि होएबाक आ पुलिसक अक्षमताक-चर्च करैत गेलाह।

पुलिस हेडक्वार्टरमे बैठकी भेल । सभ टी.वी. चैनल कहि रहल छल जे चारि गोटे मिलि कए डकैती केलन्हि मुदा एखन धरि एको गोटेक गिरफतारी नहि भेल अछि। एनकाउन्टर स्पेशलिस्ट बजाओल गेलाह। जेना सभ बेर होइत रहए एहि बेर सेहो ओ एक गोटेँ पकड़ि कए अनलन्हि। चारि डाँग पड़बाक देरी छल आकि ओ अपन डकैत होएबाक गप स्वीकार कए लेलक। फेर एनकाउन्टर स्पेशलिस्टक संग ऑफिसर लोकनि कैमराक सोझाँ  फोटो खिचबेलन्हि। ओ डकैत अपन डकैत होएबाक गप सेहो स्वीकार कएलक।

चारि दिन आर बीतल। सभ दिन तरह-तरह सँ ओहि कथित डकैतकेँ पीटल जाइत रहल,

-“बता अपन तीन संगीक नाम जकरा संगे डकैती कएने छलह”।

-“सरकार चारिए डाँगमे अपन डकैत होएबाक गप स्वीकार कए लेलहुँ, हम डकैत रहितहुँ तँ ई करितहुँ। मुदा आर तीनटा संगीक नाम कतए सँ आनू आ ककरा फुसियाहींकेँ फसाऊ”।

सप्ताह भरिक बाद मीडिया एकटा बम विस्फोटक अन्वेषणमे बाँझि गेल । मुख्य डकैत तँ पकड़ाइये ने गेल से आब डकैतीक कॉवरेज दर्शक नहि ने देखए चाहैत छथि! पब्लिक डिमान्ड नहि छैक से ओहि डकैतकेँ बेल भेटलैक आकि नहि से कोनो समाचार नहि आएल।


  10.उद्योग

गममे चौधरीजीक बड्ड रूतबा, डरे सभ सर्द रहैत छल । ककर दीन अछि जे हुनकर गम्हरायल धान काटि लेत आकि ... ।

ओ एकटा बस खोललन्हि-

“दरभंगासँ गाम धरि चलत । सेकेंड हैंडमे भेटल अछि । पुरनका मालिकक लाइसेंस काज देत। संगमे बसक पुरनका मालिक तीन मासक लेल अपन ड्राइवर आ खलासी सेहो देलक अछि, तकर बाद अपन ताकि लेब”

चौधरीजी मन्दिरपर बसक पूजा करैत काल गौआँ सभ़सँ बजलाह ।

“सुनैत छिऐक बस-स्टैण्डमे बड़ बदमस्ती करैत जाइत छैक”। एक गोटे गौआँ बजलाह

“धुर, चौधरीजीक बस आ आदमीकेँ के छुबाक साहस करत”। दोसर गोटे प्रसाद लैत बजलाह।

 

बसक रूट आकि रस्ता यात्रीगणक लेल सुभितगर रहैक से ओहि गाड़ीमे पैसेन्जर भरि जाइत रहए। दोसर बसबला सभ दबंग सभ। शाहीजी आ मिश्राजीक स्टाफ सभ बड़ सञ्जत! से चौधरीजीक स्टाफकेँ गरगोटिया दऽ बस स्टैण्ड सँ बाहर निकालि देलकन्हि।

पोखरिक महारपरसँ चौधरीजीक बस खुजए लागल तँ ओतहु यात्री पहुँचए लगलाह।

 

आब तँ बस-स्टैण्डक दादा सभकेँ बड्ड तामस उठलन्हि । दुनु ड्राइवर आ खलासीकेँ पुष्ट पीटल गेल आ ईहो कहल गेल जे फेर एहि रूटपर चलताह तँ बसक एक्सीडेन्ट करबा देल जएतन्हि। शाही आ मिश्रा जीक तँ पचासो टा गाड़ी छन्हि एकटा थानामे एक्सीडेन्टक बाद पड़ले रहत तँ की।

 

गामक रोआब –दाब बला कौधरीजी बस-स्टेण्डक दादा सभक सोझाँ जेना बकड़ी बनि गेलाह। गाममे मन्दिरपर गाड़ी ठाढ़ छन्हि, ओहि पर कदीमाक लत्ती चढ़ि गेल अछि पैघ-पैघ कदीमासँ बस झपा गेल अछि।खूब फड़ल छैक। गौआँसभ हँसीमे कहि रहल छथि-

“चौधरीजीक बसक पाइ तँ एहि बेर कदीमा बेचिये कऽ उप्पर भऽ जएतन्हि”।

दरभंगाक इन्डस्ट्रीयल स्टेटमे सेहो फैक्ट्री सभ एहिना बन्द अछि आ ओकर देबाल सभपर एहिना तर-तीमनक लत्ती सभ भरल छैक”।- दोसर गौआँ कहलक।

 

11.उद्योग-२

मिथिलाक बोनमे रहनिहार जीव-जन्तु सभ आपसमे विचार कएलक- –

“अपन क्षेत्रक दादा सभ उद्योगक विनाश कएने अछि ओतुक्का भीरू लोक सभ उद्योग लगेबासँ परहेज करैत अछि”।- गीदड़ बाजल।

“तखन अपनहि सभ किएक नहि फैक्टरी खोलैत छी , कोन दादाक मजाल जे हमरा सभ लग आओत”।-बाघ कड़कल।

प्रस्ताव पास भेल जे आब जंगलमे फैक्ट्री खुजत आ नगर जा कए उद्योग विभागसँ एकर पंजीकरण करबाओल जाएत। ओतय भीरू मैथिल सभक राज अछि जे बड्ड ओस्ताज होइत अछि। गीदड़, बानर , लोमड़ि, नीलगाय संग गदहा सेहो पंजीकरण लेल अपन सेवा देबाक लेल अगू बढ़लाह। सभसँ पहिने लोमड़िकेँ मौका भेटल कारण ओ सेहो जंगलक ओस्ताज अछि।

किछु दुनुका बाद भागि,–दौग-बड़हा केलाक बाद ओ हारि मानि लेलक।

“यौ बाघ महाराज। बड्ड कोन-कोन तरहक दस्तावेज मँगैत अछि नहि भऽ सकत हमरा बुते”।

 

फेर एक – एक कए सभ जाइत गेलाह आ घुरि कए अबैत गेलाह । गदहा कहैत रहल जे एक मौका हमरो देल जाए मुदा सभ सोचथि जे बुझू एहेन पेंचीला सभ विफल भऽ आबि गेलाह मुदा फैक्टरीक पंजीकरण नहि करबाए सकलाह आ ई गदहा जे मूर्खताक लेल आ बोझ बहबाक लेल प्रसिद्ध अछि की कऽ सकत ?

“ठीक छैक”। अन्तमे हारि कए बाघ कहलन्हि- –

“जाउ अहूँ देखि आउ एक बेर”।

मुदा ई की ? साँझ होइत देरी गदहा महाराज जे छलाह से फैक्ट्रीक पंजीकरण प्रमाणपत्र लऽ सोझाँ हाजिर भऽ गेलाह।

बाघ पुछलन्हि- –“औ जी गदहा महाराज ! एतेक कलामी जन्तु सभ जतए विफल भऽ गेलथि ओतए अहाँक सफलताक मंत्र की”?

गदहा महाराज उत्तर देलन्हि,

“महाराज एकर मंत्र अछि जातिवाद आ भाइ-भतीजावाद। उद्योग विभागमे हमर सभ सरे-सम्बन्धी लोकनि छथि ने”!    

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