भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

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Friday, May 08, 2009

श्री भालचन्द्र झा

श्री भालचन्द्र झा

ए.टी.डी., बी.ए., (अर्थशास्त्र), मुम्बईसँ थिएटर कलामे डिप्लोमा। मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आ हिन्दी थिएटरमे निदेशक। महाराष्ट्र राज्य उपाधि १९८६ आ १९९९ मे। थिएटर वर्कशॉप पर अतिथीय भाषण आ नामी संस्थानक नाटक प्रतियोगिताक हेतु न्यायाधीश। आइ.एन.टी. केर लेल नाटक “सीता” केर निर्देशन। “वासुदेव संगति” आइ.एन.टी.क लोक कलाक शोध आ प्रदर्शनसँ जुड़ल छथि आ नाट्यशालासँ जुड़ल छथि विकलांग बाल लेल थिएटरसँ। निम्न टी.वी. मीडियामे रचनात्मक निदेशक रूपेँ कार्य- आभलमया (मराठी दैनिक धारावाहिक ६० एपीसोड), आकाश (हिन्दी, जी.टी.वी.), जीवन संध्या (मराठी), सफलता (रजस्थानी), पोलिसनामा (महाराष्ट्र शासनक लेल), मुन्गी उदाली आकाशी (मराठी), जय गणेश (मराठी), कच्ची-सौन्धी (हिन्दी डी.डी.), यात्रा (मराठी), धनाजी नाना चौधरी (महाराष्ट्र शासनक लेल), श्री पी.के अना पाटिल (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( नशा-सुधारपर), आहट (एड्सपर), बैंगन राजा (बच्चाक लेल कठपुतली शो), मेरा देश महान (बच्चाक लेल कठपुतली शो), झूठा पालतू(बच्चाक लेल कठपुतली शो),

टी.वी. नाटक- बन्दी (लेखक- राजीव जोशी), शतकवली (लेखक- स्व. उत्पल दत्त), चित्रकाठी (लेखक- स्व. मनोहर वाकोडे), हृदयची गोस्ता (लेखक- राजीव जोशी), हद्दापार (लेखक- एह.एम.मराठे), वालन (लेखक- अज्ञात)।

लेखन

बीछल बेरायल मराठी एकांकी, सिंहावलोकन (मराठी साहित्यक १५० वर्ष), आकाश (जी.टी.वी.क धारावाहिकक ३० एपीसोड), जीवन सन्ध्या( मराठी साप्ताहिक, डी.डी, मुम्बई), धनाजी नाना चौधरी (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( हिन्दी), आहट (हिन्दी), यात्रा ( मराठी सीरयल), मयूरपन्ख ( मराठी बाल-धारावाहिक), हेल्थकेअर इन २०० ए.डी.) (डी.डी.)।

थिएटर वर्कशॉप- कला विभाग, महाराष्ट्र सरकार, अखिल भारतीय मराठी नाट्य परिषद, दक्षिण-मध्य क्षेत्र कला केन्द्र, नागपुर, स्व. गजानन जहागीरदारक प्राध्यापकत्वमे चन्द्राक फिल्मक लेल अभिनय स्कूल, उस्ताद अमजद अली खानक दू टा संगीत प्रदर्शन।

श्री भालचन्द्र झा एखन फ़्री-लान्स लेखक-निदेशकक रूपमे कार्यरत छथि।सम्‍पादक


दू गो कविता

१. अपन अस्तीत्वक असली मोल

 

बुझबाक हुअए

यदि अपन अस्तीत्वक असली मोल

त पुछियौक सुकरातकें

देखबियौक ओकरा

विश्वक नक्शा पर

पहिने अपन देसक अस्तीत्व

ओहि देस मे अपन राज्यक अस्तीत्व

राज्य मे अपन जिलाक अस्तीत्व

जिला मे अपन गामक अस्तीत्व

गाम मे अपन घरक अस्तीत्व

आ तहन घर महुक अपन अस्तीत्व

आ ई सभ

विश्वक नक्शा पर

से बूझि लियौक...

२. हमर माय

गर्भगृहक सुखासन सँ बहरेलहुँ

त हमर जन्मदात्री अपसियाँत रहय

भनसिया घर मे

तीतल जारैन केँ धूआँ मे

करैत रहय धधराक आवाहन

देहक धौंकनी कऽकऽ

आ तहिया सँ लऽ कऽ आइ धरि

ओकरा आन कोनो ठाम नहिं देखलियैक

देखलियैक

त बस कोनटा घरक ऐँठार  पर

सभक ऐँठ पखारैत

कखनो अँगना बहारैत

त कखनो जारैन बीछैत

कखनो कपड़ा पसारैत

त कखनो नेन्नासभक परिचर्या करैत

खिन मे जाँत पर, त खिन मे ढेकी पर,

चार पर, चिनमार पर

अँगनाक मरबा पर, घरक असोरा पर

दिन-दुपहर, तीनू पहर जोतल

कखनो दाईक चाइन पर तेल रगड़ैत

त कखनो छौंरी सभक जुट्टी गूहैत

राति मे पहिने दाईकँ

आ तहन बाबूकें पएर दबबैत

एहि तरहें ओकर जीवनक आध्यात्म

भनसिया घर सँ शुरू भऽ कऽ

भनसिये घर मे समाप्त भऽ गेलैक

झुलसैत देखलियैक चूल्हिक आगि मे

नारीक स्वतंत्रता, ओकर अस्मिता

ओकर मान आ स्वाभिमानकेँ

कहाँ भेटलैक पलखतियो ओकरा

एहि सभ दिसि ताकहो केँ

आइ सोचै छी सेहो नीके भे्

अगिलुका पीढ़ी सचेत भऽ गेलैक

भलमनसियत सँ जँ नहिं भेटलैक

त छिनबाक ताकति भेटि गेलैक

मुदा ताँहिं की हमर मायक त्याग आ बलिदान

ईब्सेन कें नोरा सँ अथवा गोर्कीक माय सँ

रत्तियो भरि कम कहाओत?

हमरा जनितबे रत्ती भरि बेसिये बूझू

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