भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

(c)२०००-२०२३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur

रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) editorial.staff.videha@gmail.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकै छथि। एतऽ प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक/संग्रहकर्त्ता लोकनिक लगमे रहतन्हि। सम्पादक 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऐ ई-पत्रिकामे ई-प्रकाशित/ प्रथम प्रकाशित रचनाक प्रिंट-वेब आर्काइवक/ आर्काइवक अनुवादक आ मूल आ अनूदित आर्काइवक ई-प्रकाशन/ प्रिंट-प्रकाशनक अधिकार रखैत छथि। (The Editor, Videha holds the right for print-web archive/ right to translate those archives and/ or e-publish/ print-publish the original/ translated archive).

ऐ ई-पत्रिकामे कोनो रॊयल्टीक/ पारिश्रमिकक प्रावधान नै छै। तेँ रॉयल्टीक/ पारिश्रमिकक इच्छुक विदेहसँ नै जुड़थि, से आग्रह। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।

 

(c) २००-२०२ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि।  भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.htmlhttp://www.geocities.com/ggajendra  आदि लिंकपर  आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html  (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html  लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha  258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/  भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर  मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/  पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA

Sunday, August 12, 2012

'विदेह' ११२ म अंक १५ अगस्त २०१२ (वर्ष ५ मास ५६ अंक ११२) PART I



                     ISSN 2229-547X VIDEHA
'विदेह' ११२ म अंक १५ अगस्त २०१२ (वर्ष ५ मास ५६ अंक ११२)India Flag Nepal Flag

 

ऐ अंकमे अछि:-

१. संपादकीय संदेश


२. गद्य













३. पद्य








३.७. १.कपि‍लेश्वर राउतमातृभाषा २.जगदानन्द झा 'मनु' -हम एहन किएक छी?/ कोना मदर डे हैप्पी ? ३.राजेश कुमार झा (कन्हैया)- देश भक्ति

३.८.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल’- की भेटल आ की हेरा गेल  (आत्म गीत)- (आगाँ)२. नारायण झा- एखनहुँ जकड़ल छी/ एकता



४. मिथिला कला-संगीत १.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) . उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी)

 

५.गद्य-पद्य भारती:१.प्रो. चम्पा शर्माक डोगरी कविताक हिन्दी अनुवाद: श्रीमती रजनी शर्मा आ मैथिली अनुवाद : डॉ. शंभु कुमार सिंह, २.कुमार संभव भारद्वाज क हिन्दी कविताक मैथिली अनुवाद: मैथिली अनुवादक: डॉ. शंभु कुमार सिंह


 

६.बालानां कृते-अमित मिश्र- १५ अगस्तपर एकटा गजल आ एकटा कविता

७. भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.]



विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link.

ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a  Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add  बटन दबाउ।


विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट



मैथिली देवनागरी वा मिथिलाक्षरमे नहि देखि/ लिखि पाबि रहल छी, (cannot see/write Maithili in Devanagari/ Mithilakshara follow links below or contact at ggajendra@videha.com) तँ एहि हेतु नीचाँक लिंक सभ पर जाउ। संगहि विदेहक स्तंभ मैथिली भाषापाक/ रचना लेखनक नव-पुरान अंक पढ़ू।
http://devanaagarii.net/
http://kaulonline.com/uninagari/  (एतए बॉक्समे ऑनलाइन देवनागरी टाइप करू, बॉक्ससँ कॉपी करू आ वर्ड डॉक्युमेन्टमे पेस्ट कए वर्ड फाइलकेँ सेव करू। विशेष जानकारीक लेल ggajendra@videha.com पर सम्पर्क करू।)(Use Firefox 4.0 (from WWW.MOZILLA.COM )/ Opera/ Safari/ Internet Explorer 8.0/ Flock 2.0/ Google Chrome for best view of 'Videha' Maithili e-journal at http://www.videha.co.in/ .) 

Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Book/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ (उच्चारण, बड़ सुख सार आ दूर्वाक्षत मंत्र सहित) डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ।
 VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव

example

भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू।


example

गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज'



मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण"

विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ।
"मैथिल आर मिथिला" (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) पर जाउ।


ऐ बेर मूल पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ?
Thank you for voting!

श्री राजदेव मण्डलक अम्बरा” (कविता-संग्रह)  12.82%   
 
श्री बेचन ठाकुरक बेटीक अपमान आ छीनरदेवी”(दूटा नाटक)  9.69%   
 
श्रीमती आशा मिश्रक उचाट” (उपन्यास)  6.55%   
 
श्रीमती पन्ना झाक अनुभूति” (कथा संग्रह)  4.56%   
 
श्री उदय नारायण सिंह नचिकेतानो एण्ट्री:मा प्रविश (नाटक)  5.41%   
 
श्री सुभाष चन्द्र यादवक बनैत बिगड़ैत” (कथा-संग्रह)  5.13%   
 
श्रीमती वीणा कर्ण- भावनाक अस्थिपंजर (कविता संग्रह)  5.41%   
 
श्रीमती शेफालिका वर्माक किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा)  8.83%   
 
श्रीमती विभा रानीक भाग रौ आ बलचन्दा” (दूटा नाटक)  6.84%   
 
श्री महाप्रकाश-संग समय के (कविता संग्रह)  5.41%   
 
श्री तारानन्द वियोगी- प्रलय रहस्य (कविता-संग्रह)  5.13%   
 
श्री महेन्द्र मलंगियाक छुतहा घैल” (नाटक)  9.4%   
 
श्रीमती नीता झाक देश-काल” (कथा-संग्रह)  5.7%   
 
श्री सियाराम झा "सरस"क थोड़े आगि थोड़े पानि (गजल संग्रह)  7.12%   
 
Other:  1.99%   

 

ऐ बेर युवा पुरस्कार(२०१२)[साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन कोन लेखक उपयुक्त छथि ?

Thank you for voting!
श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक अर्चिस” (कविता संग्रह)  28.21%   
 
श्री विनीत उत्पलक हम पुछैत छी” (कविता संग्रह)  7.69%   
 
श्रीमती कामिनीक समयसँ सम्वाद करैत”, (कविता संग्रह)  6.41%   
 
श्री प्रवीण काश्यपक विषदन्ती वरमाल कालक रति” (कविता संग्रह)  4.49%   
 
श्री आशीष अनचिन्हारक "अनचिन्हार आखर"(गजल संग्रह)  18.59%   
 
श्री अरुणाभ सौरभक एतबे टा नहि” (कविता संग्रह)  6.41%   
 
श्री दिलीप कुमार झा "लूटन"क जगले रहबै (कविता संग्रह)  7.69%   
 
श्री आदि यायावरक भोथर पेंसिलसँ लिखल” (कथा संग्रह)  6.41%   
 
श्री उमेश मण्डलक निश्तुकी” (कविता संग्रह)  12.18%   
 
Other:  1.92%   
 
   
 
 
 

ऐ बेर अनुवाद पुरस्कार (२०१३) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे के उपयुक्त छथि?

Thank you for voting!
श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर)  33.33%   
 
श्री महेन्द्र नारायण राम "कार्मेलीन" (कोंकणी उपन्यास श्री दामोदर मावजो)  12.75%   
 
श्री देवेन्द्र झा "अनुभव"(बांग्ला उपन्यास श्री दिव्येन्दु पालित)  12.75%   
 
श्रीमती मेनका मल्लिक "देश आ अन्य कविता सभ" (नेपालीक अनुवाद मूल- रेमिका थापा)  14.71%   
 
श्री कृष्ण कुमार कश्यप आ श्रीमती शशिबाला- मैथिली गीतगोविन्द ( जयदेव संस्कृत)  14.71%   
 
श्री रामनारायण सिंह "मलाहिन" (श्री तकषी शिवशंकर पिल्लैक मलयाली उपन्यास)  10.78%   
 
Other:  0.98%   
 
 
 
 



फेलो पुरस्कार-समग्र योगदान २०१२-१३ : समानान्तर साहित्य अकादेमी, दिल्ली

Thank you for voting!
श्री राजनन्दन लाल दास  54.12%   
 
श्री डॉ. अमरेन्द्र  23.53%   
 
श्री चन्द्रभानु सिंह  20%   
 
Other:  2.35%   
 
 

 

1.संपादकीय

ओइ समए ि‍नर्मलीसँ समस्‍तीपुर एकटा गाड़ी चलैत रहै। बड़ी लाइनक कतौ पता नै। मुदा कम्‍युनिस्ट पार्टीक लड़ाइक एकटा मुद्दा ईहो रहै। कखनो उग्र तँ कखनो धीमी गति‍सँ चलि‍ते रहए। ओना पूबोसँ आ पच्‍छि‍मोसँ अबैबला गाड़ीक मेल सकरि‍येमे रहै मुदा से नै भेलै। ककरघटीमे मेल भेने पछबरि‍या गाड़ी पछुआ गेलनि। जइ कारणे सभाक आयोजन कि‍छु बि‍लमि‍ कऽ भेल। सकरी स्‍टेशनसँ थोड़बे हटि‍ कऽ दछि‍नबारि‍ भाग सभाक आयोजन भेल। गाड़ीसँ उतरि‍ झंडा फहरबैत आ नारा लगबैत जूलूस बनि‍ सभा स्‍थल पहुँचला। तइ संग झंझारपुरक इर्द-ि‍गर्दक सेहो बहुत गोटे संग भऽ गेल रहथिन्ह‍। आयोजक रहथिन्ह‍ चीनी मि‍लक श्रमि‍क-संगी। ओइ समए छबे मास मि‍ल चलै। सालमे छह मास काज भेने छह मास बैसारीक समस्‍या रहबे करै। तइ संग कि‍सानकेँ नहि‍ये कुशि‍यारक कटनी होइ आ नहि‍ये समैपर दाम भेटै। सेहो सभ समस्‍या रहबे करै। कुशि‍यारक एके कि‍स्‍मक खेती होइ जे अगहनमे तैयार भऽ जाइ। मुदा नमहर इलाकामे खेती भेने, समैपर कटनी नै भऽ पबै। मि‍ले कम। जतबे ओ पेड़ि‍ सकत ततबे ने लेत। तहूमे चलाकी ओकर ई रहै जे शुरूमे तैयार भेने शुरूहेसँ नीक उत्‍पादन (चीनीक मात्रा) हुअए लगै आ जते पछुआइत तते रस गाढ़ भेने चीनीक मात्रा बढ़ि‍ जाइ।
पच्‍छि‍मसँ गाड़ी अबि‍ते दरभंगा-जालेक वि‍धायक खादि‍म हुसेन संगे भोगेन्‍द्र  जी हाथमे चमड़ाक बैग लटकौने आगू-आगू आ दस पनरह गोटे पाछू-पाछू स्‍टेशनसँ सभा स्‍थल पहुँचला। हाफ शर्ट धोती पहि‍रने। पएरमे चमड़ाक जूता। मंचपर सँ नारा हुअए लागल। आधासँ बेसी मंच भरल। जे वक्‍ता  बजैत रहथि‍ ओ अपन वि‍चार सम्‍पन्न केलनि‍। चीनी मि‍लक ट्रेड-युनि‍यनक जे नेता रहथि‍ ओ वि‍स्‍तारसँ अपन समस्‍या रखलनि‍। जगदीश प्रसाद मण्डल सभ आगूसँ नि‍च्‍चामे बैसल रहथि। भोगेन्‍द्रजी दिससँ बजैसँ पहि‍ने आने सभा जकाँ प्रश्नक आग्रह भेल। कि‍छु प्रश्न एबो कएल।
अढ़ाइ-तीन घंटाक पछाति‍ सभा वि‍सर्जन भेल। सभामे भाग लेनि‍हार चारू कातक लोक चलि‍ गेलाह, मुदा गाड़ीबला सभ स्‍टेशनपर आबि‍ गेला। दुनू गाड़ी (नि‍रम‍ली आ जयनगरवाली) मे एक-डेढ़ घंटा देरी रहै। स्‍टेशनेपर भोगेन्‍द्रजीसँ पहि‍ल भेँट आ सोझा-सोझी परि‍चए भेलन्हि।
पहि‍ले-पहि‍ल भोगेन्‍द्रजी पार्लियामेंटक सदस्‍य भेल रहथि‍। जहि‍ना १९४२ई.मे अंग्रेजक खि‍लाफ देशक जन-जनमे राजनीति‍क नव चेतना जागल रहै तहि‍ना १९६७ ई.क चुनावक पछाति‍ सेहो भेल। बि‍हारोमे ओहन-ओहन राजनीति‍क पार्टी बहुमतमे आएल जे अखन धरि‍ (१९६७) वि‍धान सभामे नै पहुँचल छल। जे पार्टी (काँग्रेस) अखन धरि‍ बि‍हारोमे सत्ता-सीन रहल ओ नीक हारि‍क मुँह देखलक। ओना बि‍हारे मात्रमे नै आनो-आनो राज्‍यमे भेल। काँग्रेसो एक ग्रुप टूटि‍ कऽ जनक्रांति‍ दल कऽ कऽ पार्टीमे उतरल छल। काँग्रेस वि‍रोधी दलक स्‍पष्‍ट बहुमत भेल छल। मुख्‍य पार्टीक रूपमे सोशलि‍स्‍ट पार्टी आ कमो-बेशी आनो-आनो पार्टी जीतल। ि‍सर्फ वि‍धान सभामे एहेन परि‍वर्त्तन भेल से बात नै, गाम-गामक जन-गणमे अपन हार-जीत सेहो महसूस भेल। बेवहारि‍क दौड़मे जे कि‍छु मुदा भाषणक क्रम (सि‍द्धान्‍ति‍क) मे तँ जनताक सभ समस्‍या सामने ऐबे कएल। कारण जे सभ पार्टीक अपन-अपन वि‍चार तँ लोकक बीच पहि‍नेसँ आबि‍ रहल छल। ३४ टा सीट माने ३४ टा वि‍धायक वि‍धान सभामे आ पान-सातटा पार्लियामेंटोमे पहुँचलाह। आजादीक पछाति‍ पहि‍ल बेर आम जन सत्ता (शासन) दि‍स तकलक। ओना अखन धरि‍ सरकारक अर्थ आम जन-गण कोटाक शासनक मटि‍या तेल आ जे मुख्‍य वि‍न्‍दु कोटाक वस्‍तु बनल छल। डीलरक काजक लेखा-जोखा भरि‍ शासन चलै छल। आन-आन समस्‍या तँ भाषणेक क्रममे छल। कि‍छु-ने-कि‍छु बाढ़ि‍-रौदी चलि‍ते छल ओकरे बचबैक उपाए सरकारक कहब रहै छलै। नवका तूर (आजादीक करीब आ पछाति‍क) सेहो जुआन भेल। जइसँ आनो-आनो काज (सरकारक) सोझामे आएल। अखुनका मधुबनी जि‍ला जे ओइ दि‍नमे अनुमंडल छल। एगारहटा एम.एल.ए. आ दूटा एम.पी.मे बँटाएल छल। छह-छहटा एम.एल.ए. पर एम.पी. तँ दरभंगाक जाले क्षेत्र सेहो मधुबनि‍येमे।
ओना अखुनका मधुबनी जि‍लाक पछि‍मी भागमे जमीनक लड़ाई सेहो नीक जकाँ चलि‍ रहल छल, मुदा मुख्‍य छल पछि‍मी कोसी नहर। मि‍थि‍लांचलमे कोसी, कमला, बागमतीक जे उपद्रव साले-साल चलि‍ रहल छै आ क्षति‍ पहुँचबै छै, भरि‍सक ततेटा बजटो ने कते सरकारकेँ होइ छै। खैर जे होउ! उनैस सए साठि‍क दशकक सवाल, समस्‍या आ लड़ाई कम्‍युनिस्ट  पार्टीक मुख्‍य लड़ाई रहल जेकर दशा, मनुष्‍यक एक जि‍नगीक (६५-६६ बर्ख)  उपरान्‍तो कि‍ अछि‍, सबहक सोझेमे अछि‍। जौं योजना हि‍साबसँ काज होइत तँ आजुक मि‍थि‍ला ई मि‍थि‍ला नै, ओ मि‍थि‍ला बनि‍ गेल रहैत जइ मि‍थि‍लामे ऋृषि‍-मुनि‍ इच्‍छानुसार बर्खा बरि‍सबैत छलाह। एते पनि‍बि‍जलीक उत्‍पादन होइत जे घर-घरमे पहुँचल रहैत। जइसँ जापान जकाँ लघु-उद्योगक संग-संग भारि‍यो उद्योग लागि‍ गेल रहैत। मुदा आइ कि‍ देखै छी। चुनाव होइत रहल, एमेले-एमपी बदलैत रहलाह। मुदा समस्‍या  आइ ओहन वि‍कराल रूप लऽ लेलक अछि‍ जे आर्थिक तंगीक चलैत दि‍न-दहार लूट-पाट भऽ रहल अछि‍। जँ जापान, जर्मनी आ पड़ोसी देश चीनक जमीनक प्रति‍ एकड़ उपजाक तुलना अपन मि‍थि‍लांचलक भूमि‍सँ करब तँ आश्चये नै बि‍सवासो नै हएत। कि‍ मि‍थि‍लामे ि‍सर्फ साढ़े तीन हाथक मनुखेटा अछि‍ जेकरा मात्र पेटेटा छै आकि‍ ओकरा दूटा हाथो-पएर छै आ मातृभूमि‍यो छै। मि‍थि‍लांचलक ओ भूमि‍ आ जलवायु अछि‍ जे दुनि‍याँमे कतौ नै अछि‍। ने एते सुन्‍दर मुलाइम माटि‍ अछि‍ आ ने एहेन नीक पानि‍ अछि‍ आ ने एते रंगक मौसम अछि‍। मुदा आइ कि‍ देखै छी? ने अखन धरि‍ नेपाल सरकारसँ नीक जकाँ समझौता भेल अछि‍ आ ने कोसीक पछि‍मी-पूर्बी नहरि‍क समुचि‍त वि‍कास। एक तँ योजनाक काज पछुआएल तइपर काजक एहेन पेंच-पाँच अछि‍ जे एक नहर बनब कठि‍न अछि‍, दोसर बनलापर ओ समुचि‍त काज कठि‍न अछि‍। पानि‍ ऊपरसँ नि‍च्‍चाँ  असानीसँ अबैत अछि‍। मुदा नि‍च्‍चासँ ऊपर असानीसँ जाएत? नै जाएत। जँ गहींरमे नहर खुनि‍ देल जाए तँ ओकर पानि‍ ऊपर केना जेतइ। हँ मशीनक माध्‍यमसँ जा सकैए, मुदा घरमे फुसि‍-फासि‍, सोम दि‍न बि‍आह। जइठाम त्रेता युगक तीन ि‍वत्ता हर, आ सतयुगक बसहा बड़दसँ एखनो खेती होइए तइठाम केना मानल जाएत।
स्‍टेशनपर प्‍लेटफार्म आबि‍ सभ गोलि‍या कऽ बैसला। पल्‍था मारि‍ भोगेन्‍द्रजी सभकेँ सेहो तहि‍ना बैसए कहलखि‍न। गाड़ी पकड़ैले सबहक मन छनगल। पल्‍था माि‍र बैसैक अर्थ नि‍श्चि‍न्‍ती। पहि‍ने ओ सभकेँ नाओं-ठेकान पुछलखि‍न। नाओं-ठेकान पुछला उत्तर कहलखि‍न, कम्‍युनिस्ट अपन पार्टी छी, अपन पार्टीक ई अर्थ नै जे कोनो जाति‍-मजहबक होइ, मनुख-मात्रक पार्टी छी। हमरा सभकेँ ओहन समाज बनाएबाक अछि‍ जइमे ने कि‍यो भूखल रहत आ ने नांगट। सबहक बाल-बच्‍चा पढ़तै, सभकेँ रोग-व्‍याधि‍क इलाज हेतइ तखन ने सभ आगू मुँहेँ बढ़ैक कोशि‍श करता। अपना ऐठाम जे ऋृषि‍-मुनि‍ भेलाह, ओ की केलनि? हुनका नै अपन सुखक चि‍न्‍ता छलनि‍। कि‍अए ओ सभ अपन जि‍नगी गला लेलनि‍। ओ सभ बहुत केलनि‍। जँ से नै केलनि‍ तँ एक कट्ठा जमीनमे जीवन बसर करैत केना छला‍। मुदा अपन धरोहरि‍केँ जँ ताला लगा रखबै तँ के बूझत? लखनजी (डॉ. लक्ष्‍मण झा) मि‍थि‍लांचलक लेल जे जि‍नगी समर्पित केलनि‍ से कि‍ केलनि‍। के बूझत?

तीन दि‍नक व्‍यस्‍त कार्यक्रममे हुनकर पाँचठामक प्रोग्राम रहनि‍, ओइ समाप्‍ति‍क तारीख बिता तेसर दि‍नक प्रोग्राम ओ जगदीश प्रसाद मण्डलजी केँ दऽ देलनि‍।

जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी...गजेन्द्र ठाकुर द्वारा (अनुवर्तते...)


ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ।

 

गजेन्द्र ठाकुर

ggajendra@videha.com
 
http://www.maithililekhaksangh.com/2010/07/blog-post_3709.html

२.गद्य










No comments:

Post a Comment

"विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका http://www.videha.co.in/:-
सम्पादक/ लेखककेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, जेना:-
1. रचना/ प्रस्तुतिमे की तथ्यगत कमी अछि:- (स्पष्ट करैत लिखू)|
2. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो सम्पादकीय परिमार्जन आवश्यक अछि: (सङ्केत दिअ)|
3. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो भाषागत, तकनीकी वा टंकन सम्बन्धी अस्पष्टता अछि: (निर्दिष्ट करू कतए-कतए आ कोन पाँतीमे वा कोन ठाम)|
4. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो आर त्रुटि भेटल ।
5. रचना/ प्रस्तुतिपर अहाँक कोनो आर सुझाव ।
6. रचना/ प्रस्तुतिक उज्जवल पक्ष/ विशेषता|
7. रचना प्रस्तुतिक शास्त्रीय समीक्षा।

अपन टीका-टिप्पणीमे रचना आ रचनाकार/ प्रस्तुतकर्ताक नाम अवश्य लिखी, से आग्रह, जाहिसँ हुनका लोकनिकेँ त्वरित संदेश प्रेषण कएल जा सकय। अहाँ अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा editorial.staff.videha@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

"विदेह" मानुषिमिह संस्कृताम् :- मैथिली साहित्य आन्दोलनकेँ आगाँ बढ़ाऊ।- सम्पादक। http://www.videha.co.in/
पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://gajendrathakur.blogspot.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि।
अपन टीका-टिप्पणी एतए पोस्ट करू वा अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाऊ।