भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल अखनो ५ जुलाई २००४ क पोस्ट'भालसरिक गाछ'- केर रूपमे इंटरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि जे विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,आ http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि।
भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति
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पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor:
Gajendra Thakur
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(पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव
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पत्रिकाकेँ मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
(c) २०००-२०२२ सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल http://www.geocities.com/.../bhalsarik_gachh.html, http://www.geocities.com/ggajendra आदि लिंकपर आ अखनो ५ जुलाइ २००४ क पोस्ट http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (किछु दिन लेल http://videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर, स्रोत wayback machine of https://web.archive.org/web/*/videha 258 capture(s) from 2004 to 2016- http://videha.com/ भालसरिक गाछ-प्रथम मैथिली ब्लॉग / मैथिली ब्लॉगक एग्रीगेटर) केर रूपमे इन्टरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितक रूपमे विद्यमान अछि। ई मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ "विदेह" पड़लै।इंटरनेटपर मैथिलीक प्रथम उपस्थितिक यात्रा विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,जे http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि। आब “भालसरिक गाछ” जालवृत्त 'विदेह' ई-पत्रिकाक प्रवक्ताक संग मैथिली भाषाक जालवृत्तक एग्रीगेटरक रूपमे प्रयुक्त भऽ रहल अछि। विदेह ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA
Sunday, July 27, 2008
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 PART II
गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आऽ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आऽ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आऽ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज'। http://www.videha.co.in/favorite.htm
मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण" । http://www.videha.co.in/feedback.htm
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VIDEHA ARCHIVE OF OLD ISSUES 'विदेह' पुरान अंकक आर्काइव
विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link.
विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे
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पुरान अंकक आर्काइव
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VIDEHA 43rd issue विदेहक तैंतालीसम अंक
Videha_01_10_2009.pdf Videha_01_10_2009_Tirhuta.pdf 43.pdf
VIDEHA 42nd issue विदेहक बियालीसम अंक
Videha_15_09_2009.pdf Videha_15_09_2009_Tirhuta.pdf 42.pdf
VIDEHA 41st issue विदेहक एकतालीसम अंक
Videha_01_09_2009.pdf Videha_01_09_2009_Tirhuta.pdf 41.pdf
VIDEHA 40th issue विदेहक चालीसम अंक
Videha_15_08_2009.pdf Videha_15_08_2009_Tirhuta.pdf 40.pdf
VIDEHA 39th issue विदेहक उनचालीसम अंक
Videha_01_08_2009.pdf Videha_01_08_2009_Tirhuta.pdf 39.pdf
VIDEHA 38th issue विदेहक अड़तीसम अंक
Videha_15_07_2009.pdf Videha_15_07_2009_Tirhuta.pdf 38.pdf
VIDEHA 37th issue विदेहक सैतीसम अंक
Videha_01_07_2009.pdf Videha_01_07_2009_Tirhuta.pdf 37.pdf
VIDEHA 36th issue विदेहक छत्तीसम अंक
Videha_15_06_2009.pdf Videha_15_06_2009_Tirhuta.pdf 36.pdf
VIDEHA 35th issue विदेहक पैंतीसम अंक
Videha_01_06_2009.pdf Videha_01_06_2009_Tirhuta.pdf 35.pdf
VIDEHA 34th issue विदेहक चौतीसम अंक
Videha_15_05_2009.pdf Videha_15_05_2009_Tirhuta.pdf 34.pdf
VIDEHA 33rd issue विदेहक तैंतीसम अंक
Videha_01_05_2009.pdf Videha_01_05_2009_Tirhuta.pdf 33.pdf
VIDEHA 32nd issue विदेहक बत्तीसम अंक
Videha_15_04_2009.pdf Videha_15_04_2009_Tirhuta.pdf 32.pdf
VIDEHA 31st issue विदेहक एकतीसम अंक
Videha_01_04_2009.pdf Videha_01_04_2009_Tirhuta.pdf 31.pdf
VIDEHA 30th issue विदेहक तीसम अंक
Videha_15_03_2009.pdf Videha_15_03_2009_Tirhuta.pdf 30.pdf
VIDEHA 29th issue विदेहक उनतीसम अंक
Videha_01_03_2009.pdf Videha_01_03_2009_Tirhuta.pdf 29.pdf
VIDEHA 28th issue विदेहक अट्ठाइसम अंक
Videha_15_02_2009.pdf Videha_15_02_2009_Tirhuta.pdf 28.pdf
VIDEHA 27th issue विदेहक सत्ताइसम अंक
Videha_01_02_2009.pdf Videha_01_02_2009_Tirhuta.pdf 27.pdf
VIDEHA 26th issue विदेहक छब्बीसम अंक
Videha_15_01_2009.pdf Videha_15_01_2009_Tirhuta.pdf 26.pdf
विदेहक सदेह (प्रिंट) अंक ई-पत्रिकाक पहिल 25 अंकक रचनाक संग
VIDEHA print form- containing matter from first 25 issues of e-magazine
देवनागरी वर्सन
SADEHA_VIDEHA_DEVNAGARIVERSION_PART_1.pdf SADEHA_VIDEHA_DEVNAGARIVERSION_PART_2.pdf
तिरहुता वर्सन
SADEHA_VIDEHA_TIRHUTAVERSION_PART_1.pdf
SADEHA_VIDEHA_TIRHUTAVERSION_PART_2.pdf
कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर
देवनागरी वर्सन KuruKshetramAntarmanak_GajendraThakur.pdf
तिरहुता वर्सन KuruKshetramAntarmanak_GajendraThakur_Tirhuta.pdf
ब्रेल वर्सन KuruKshetramAntarmanak_GajendraThakur_Braille.pdf
तिरहुता (मिथिलाक्षर) सीखू
Learn_MithilakShara_GajendraThakur.pdf
ब्रेल सीखू
LearnBraille_through_Mithilakshara.pdf
अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला सीखू
Learn_International_Phonetic_Alphabet_through_Mithilakshara.pdf
VIDEHA 25th issue विदेहक पचीसम अंक
Videha_01_01_2009.pdf Videha_01_01_2009_Tirhuta.pdf 25.pdf
VIDEHA 24th issue विदेहक चौबीसम अंक
Videha_15_12_2008.pdf Videha_15_12_2008_Tirhuta.pdf 24.pdf
VIDEHA 23rd issue विदेहक तेइसम अंक
Videha_01_12_2008.pdf Videha_01_12_2008_Tirhuta.pdf 23.pdf
VIDEHA 22nd issue विदेहक बाइसम अंक
Videha_15_11_2008.pdf Videha_15_11_2008_Tirhuta.pdf 22.pdf
VIDEHA 21st issue विदेहक एकैसम अंक
Videha_01_11_2008.pdf Videha_01_11_2008_Tirhuta.pdf 21.pdf
VIDEHA 20th issue विदेहक बीसम अंक
Videha_15_10_2008.pdf Videha_15_10_2008_Tirhuta.pdf 20.pdf
VIDEHA 19th issue विदेहक उन्नैसम अंक
Videha_01_10_2008.pdf Videha_01_10_2008_Tirhuta.pdf 19.pdf
VIDEHA 18th issue विदेहक अठारहम अंक
Videha_15_09_2008.pdf Videha_15_09_2008_Tirhuta.pdf 18.pdf
VIDEHA 17th issue विदेहक सत्रहम अंक
Videha_01_09_2008.pdf Videha_01_09_2008_Tirhuta.pdf 17.pdf
VIDEHA 16th issue विदेहक सोलहम अंक
Videha_15_08_2008.pdf Videha_15_08_2008_Tirhuta.pdf 16.pdf
VIDEHA 15th issue विदेहक पन्द्रहम अंक
Videha_01_08_2008.pdf Videha_01_08_2008_Tirhuta.pdf 15.pdf
VIDEHA 14th issue विदेहक चौदहम अंक
Videha_15_07_2008.pdf Videha_15_07_2008_Tirhuta.pdf 14.pdf
VIDEHA 13th issue विदेहक तेरहम अंक
Videha_01_07_2008.pdf Videha_01_07_2008_Tirhuta.pdf 13.pdf
VIDEHA 12th issue विदेहक बारहम अंक
Videha_15_06_2008.pdf Videha_15_06_2008_Tirhuta.pdf 12.pdf
VIDEHA 11th issue विदेहक एगारहम अंक
Videha_01_06_2008.pdf Videha_01_06_2008_Tirhuta.pdf 11.pdf
VIDEHA 10th issue विदेहक दसम अंक
Videha_15_05_2008.pdf Videha_15_05_2008_Tirhuta.pdf 10.pdf
VIDEHA 9th issue विदेहक नवम अंक
Videha_01_05_2008.pdf Videha_01_05_2008_Tirhuta.pdf 9.pdf
VIDEHA 8th issue विदेहक आठम अंक
Videha_15_04_2008.pdf Videha_15_04_2008_Tirhuta.pdf 08.pdf
VIDEHA 7th issue विदेहक सातम अंक
Videha_01_04_2008.pdf Videha_01_04_2008_Tirhuta.pdf 7.pdf
VIDEHA 6th issue विदेहक छठम अंक
Videha_15_03_08.pdf Videha_15_03_08_Tirhuta.pdf 6.pdf
VIDEHA 5th issue विदेहक पाँचम अंक
Videha_01_03_08.pdf Videha_01_03_08_Tirhuta.pdf 5.pdf
VIDEHA 4th issue विदेहक चारिम अंक
Videha_15_02_08.pdf Videha_15_02_08_Tirhuta.pdf 4.pdf
VIDEHA 3rd issue विदेहक तेसर अंक
Videha_01_02_08.pdf Videha_01_02_08_Tirhuta.pdf 3.pdf
VIDEHA 2nd issue विदेहक दोसर अंक
Videha_15_01_08.pdf Videha_15_01_08_Tirhuta.pdf 2.pdf
VIDEHA Ist issue विदेहक पहिल अंक
Videha_01_01_08.pdf Videha_01_01_08_Tirhuta.pdf 1.pdf
विदेहक आठम अंक (१५.०४.२००८)मे मिथिलाक खोज (स्थान विवरण सहित), मिथिला रत्न, संपर्क-सूचना-खोजक मिथिला-मैथिलीसँ संबंधी साइटक संग्रह, मानक मैथिली, दूर्वाक्षत मंत्र (अर्थ सहित) आ बाल लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक, ई सभ देल गेल अछि। किएक तँ ई-सभ सभ अंकमे समान अछि, ताहि द्वारे आठम अंकक अतिरिक्त्त विदेहक दोसर आर्काइव अंकमे ई नहि देल गेल अछि। आठम अंककेँ समय-समय पर साइटक चित्र-सूचना-श्लोक-साइट-संग्रहमे परिवर्त्तनक स्थितिमे अपडेट सेहो कएल जाइत अछि।
8th issue of VIDEHA (15.04.2008) includes Discovery of Mithila, Mithila Ratn and other common parts of e journal. As these topics are common, in other issues these have not been included. Therefore, in the event of any change in those common topics, 8th issue of Videha is updated accordingly.
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बुद्ध अष्टधातु, सिसवबसंतपुर, बगहा
12 शताब्दी, कोइलख,मधुबनी
अग्नि बिदेश्वर स्थान,मधुबनी बुद्ध, मुंगेर
अहिल्या स्थान
अन्ध्राठाढी, मधुबनी
अशोक स्तंभ, बसाढ,वैशाली
बुद्ध
अवलोकितेश्वर तारा,भागलपुर
बसाढ, वैशाली
बुद्ध भूमिस्पर्श
बुद्ध, ताम्र
बुद्ध मस्तक,सुलतानगंज
वैशाली मूर्त्ति
चामुण्डा नाग-नागिनी,मुंगेर
मुकुटधारी बुद्ध,अंतीचक, भागलपुर
नाचैत गणेश, 10मशताब्दी, दरभंगा
दरभंगा म्युजियम
दरभंगा म्युजियम
दुर्गा, कार्त्तिकेय
10म शताब्दी, भीटभगवानपुर, अन्ध्रा ठाढी
गणेश बुद्ध
गौतम बुद्ध, वैशाली
हरिहर बुद्ध
चिड़ैकेँ खुआबैत महिला,राजमहल
लौरिया नन्दनगढ,अशोक स्तंभ
लोमश सुदामा गुफा
मुंगेर
नागराज तीर्थंकर
कुमारिल भटट फेकेलाह,नालन्दा
विक्रमशिलाविश्वविद्यालय, भागलपुर
ठाढ बुद्ध
पार्वती
रामायण
रामपुरवा वृषभ
रामपुरवा
बुद्धक अवशेष
संकिसा
सप्तमातृका
सर्वतो भद्र मण्डल
सूर्य
सूर्य
सूर्यक संगी
सूर्य, मधुबनी आभागलपुर
मूर्त्ति
मूर्त्ति
मूर्त्ति, वैशाली
उमा माहेश्वर,कल्याणसुन्दर
वैशाली वृषभ शीर्ष
वैशाली, शालभंजिकाभागलपुर
नाओक प्रकार
विष्णु बुद्धा
पाँखियुक्त्त महिला
अहिल्या
अष्टयोगिनी मन्दिर,सहरसा
बनगंगा
दरभंगा
दरभंगा नगर, 1934
दरभंगा मेडिकल कॉलेज
दुल्हदुल्हिन मन्दिर,जनकपुर
श्री यंत्र
गण्डीश्वर
गंगासागर पोखरि,मधुबनी
हनुमान मन्दिर,मधुबनी
हरिहरस्थान
मधुबनी हॉस्पीटल
जनकपुर जानकीमन्दिर
जानकी मन्दिर
जानकी मन्दिर,सीतामढी
जानकी मन्दिर,सीतामढी
जिला स्वास्थ्यकार्यालय राजबिराज,नेपाल
कलनेश्वर बाबा
कपिलेश्वर
कोषलेखाकार्यालय,राजबिराज, नेपाल
मिथिला विश्वविद्यालय,दरभंगा
लक्ष्मीश्वर पैलेस, 1934
माध्यमिकविद्यालय ,जनकपुर
महेन्द्र चौक, जनकपुर
जनकपुर मंडप
मिथिला, 1934
पगलाबाबा धर्मशाला,जनकपुर, नेपाल
पंडौल अहल्या
मधुबनी बस स्टैंड
राज हेड ऑफिस, 1934
राज हॉस्पीटल, दरभंगा, 1934
सौराठ सभा
शिव मन्दिर, 1934
शिवशंकर सिनेमा,मधुबनी
श्यामा मन्दिर
विद्यापति मूर्त्ति, बिस्फी
उग्रतारा, तारास्थान,महिषी, सहरसा
विद्यापति स्मारक,बिस्फी
विस्फी, उदना महादेव
बिस्फी, विश्वेश्वरीभगवती
अहल्या मन्दिर,अहियारी
अशोक स्तंभ, वैशाली
स्तूप अशोक स्तंभ,वैशाली
बलिराजपुर किला पूर्वीगेट
बलिराजपुर किला मीनार
चण्डी स्थान, बिराटपुर,सहरसा
गाँधी पोखरि, ढाका,मोतिहारी
गाँधी विद्यालय, ढाका,मोतिहारी
गिरिजा स्थान, मधुबनी
हरिहर मन्दिर, सोनपुर
जैन मन्दिर, भागलपुर
जैन मन्दिर, वैशाली
कमलादित्य स्थान
कपिलेश्वर शिव मन्दिर
लौरिया नन्दनगढ
मदनेश्वर शिव मन्दिर
मन्दार पर्वत, बाँका
मोतिहारी सत्याग्रहस्मारक
परमेश्वरी मन्दिर, ठाढी,मधुबनी
रामजानकी मन्दिर,सीतामढी
सत्याग्रह स्मारक,सीतामढी
शांति स्तूप, वैशाली
उच्चैठ भगवती
उच्चैठ मन्दिर
सिंघेश्वर स्थान, मधेपुरा
सूर्यधाम, परसा
उग्रतारा मन्दिर, महिषी,सहरसा
वैशाली स्तूप
विक्रमशिलाविश्वविद्यालय, भागलपुर
विराटपुर मन्दिर,मधेपुरा
वृषभ शीर्ष, रामपुरवा
सिंह शीर्ष, रामपुरवा
शरभ, नेपाल
पाँखियुक्त्त देवी, वैशाली
बाबा बडेश्वर, देवना,बनगाँव
वट वृक्ष, बनगाँव
भगवान विष्णु, देवना,बनगाँव
शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थानमहिषी
शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थानमहिषी
तारास्थान महिषी
माता तारा, तारास्थानमहिषी
उग्रतारा (खादर वाणी तारा) मूर्ति, महिषी
वशिष्ठ मुनि, तारास्थानमहिषी
आवर्धित काली उच्चैठ
बौद्धदेवी तारा वारीसमस्तीपुर
भगवती देकुली
भगवती गिरिजा फुल्हर
भगवती मृणमूर्तिगन्धबारि
भगवती वारीसमस्तीपुर
भुवनेश्वरी कोर्थ
देवीकाली कोर्थ
गंगामूर्ति नगरडीहदरभंगा
गोसाउनि मन्दिर कोर्थ
हैहट्ट देवी हाबीडीह
काली उच्चैठ
महिषासुरमर्दिनी बहेरीदरभंगा
महिषासुरमर्दिनीहाबीडीह
महिषासुरमर्दिनीनाहर-भगवतीपुर
उमा म्लेच्छमर्दिनीमिर्जापुर दरभंगा
यमुना भैरव बलियामधुबनी
अष्टभुज गणेश,कोर्थ
भैरव, भैरव-बलिया
नटराज, तारालाही
शिव-पार्वती मन्दिर,कपिलेश्वरस्थान
शिव-पार्वती मन्दिर,कपिलेश्वरस्थान
शिव मन्दिर, सिंगिया,विस्पी
उमामाहेश्वर, महादेवमठ
उमामाहेश्वर, तिरहुत
विष्णु, भवानीपुर
विष्णु, भीठ भगवानपुर
विष्णु, जयनगर
विष्णु, लदहो
विष्णु, साहो-पररी,हाबीडीह
शेषशायी विष्णु, सवास,मुजफ्फरपुर
वराह मूर्ति,तिलकेश्वरस्थान
मिथिलाक्षर अभिलेख,विष्णु बुद्ध मूर्ति
भगवती उच्चैठ,बेनीपट्टी
भगवती वाणेश्वरी,भंडारीसम
चामुण्डा मन्दिर, कटरा,मुजफ्फरपुर
अष्टभुज गणेश, हाबीडीह
अष्टभुज गणेश, कोर्थ
गंगा, आन्ध्रा-ठाढ़ी
महिषासुरमर्दिनी, दुर्गा
म्लेच्छमर्दिनी मन्दिर,मिर्जापुर, दरभंगा
नटराज
राममन्दिर,अहिल्यास्थान
सेहनी, वैशाली, विष्णुतिलक-यज्ञोपवीतधारी
रूपनगर शिव मन्दिर
सूर्य, देकुली
सूर्य मूर्ति, डिलाही
सूर्य मूर्ति, विष्णु,बरुआर
उमामाहेश्वर
यमुना, आन्ध्रा-ठाढ़ी
सिमरौनागढ़ मूर्ति
मिथिलाक खोज
ई आलेख हमर दशकसँ ऊपरक मिथिलाक यात्राक उपरान्तक सूत्र-वृत्तान्त अछि आ एहिमे एहि सभ स्थानक स्थानीय निवासी आ गाइड सभक अकथनीय योगदान छन्हि । कखनो कालतँ भाड़ाक गाड़ीक ड्राइवर लोकनि सेहो नीक गाइड सिद्ध भेलाह ।-गजेन्द्र ठाकुर
१.गौरी-शंकर स्थान- मधुबनी जिलाक जमथरि गाम आ हैंठी बाली गामक बीच ई स्थान गौरी आ शङ्करक सम्मिलित मूर्त्ति आ एहि पर मिथिलाक्षरमे लिखल पालवंशीय अभिलेखक कारणसँ विशेष रूपसँ उल्लेखनीय अछि। ई स्थल एकमात्र पुरातन स्थल अछि जे पूर्ण रूपसँ गामक उत्साही कार्यकर्त्ता लोकनिक सहयोगसँ पूर्ण रूपसँ विकसित अछि। शिवरात्रिमे एहि स्थलक चुहचुही देखबा योग्य रहैत अछि। बिदेश्वरस्थानसँ २-३ किलोमीटर उत्तर दिशामे ई स्थान अछि।
२.भीठ-भगवानपुर अभिलेख- राजा नान्यदेवक पुत्र मल्लदेवसँ संबंधित अभिलेख एतए अछि। मधुबनी जिलाक मधेपुर थानामे ई स्थल अछि।
३.हुलासपट्टी- मधुबनी जिलाक फुलपरास थानाक जागेश्वर स्थान लग हुलासपट्टी गाम अछि। कारी पाथरक विष्णु भगवानक मूर्त्ति एतए अछि।
४.पिपराही-लौकहा थानाक पिपराही गाममे विष्णुक मूर्त्तिक चारू हाथ भग्न भए गेल अछि।
५.मधुबन- पिपराहीसँ १० किलोमीटर उत्तर नेपालक मधुबन गाममे चतुर्भुज विष्णुक मूर्त्ति अछि।
६.अंधरा-ठाढ़ीक स्थानीय वाचस्पति संग्रहालय- गौड़ गामक यक्षिणीक भव्य मूर्त्ति एतए राखल अछि।
७.कमलादित्य स्थान- अंधरा ठाढ़ी गामक लगमे कमलादित्य स्थानक विष्णु मंदिर कर्णाट राजा नान्यदेवक मंत्री श्रीधर दास द्वारा स्थापित भेल।
८.झंझारपुर अनुमण्डलक रखबारी गाममे वृक्षक नीचाँ राखल विष्णु मूर्त्ति, गांधारशैली मे बनाओल गेल अछि।
९.पजेबागढ़ वनही टोल- एतए एकटा बुद्ध मूर्त्ति भेटल छल, मुदा ओकर आब कोनो पता नहि अछि। ई स्थल सेहो रखबारी गाम लग अछि।
१०.मुसहरनियां डीह- अंधरा ठाढ़ीसँ ३ किलोमीटर पश्चिम पस्टन गाम लग एकटा ऊंच डीह अछि।बुद्धकालीन एकजनियाँ कोठली, बौद्धकालीन मूर्त्ति, पाइ, बर्त्तनक टुकड़ी आ पजेबाक अवशेष एतए अछि।
११.भगीरथपुर- पण्डौल लग भगीरथपुर गाममे अभिलेख अछि जाहिसँ ओइनवार वंशक अंतिम दुनू शासक रामभद्रदेव आ लक्ष्मीनाथक प्रशासनक विषयमे सूचना भेटैत अछि।
१२.अकौर- मधुबनीसँ २० किलोमीटर पश्चिम आ उत्तरमे अकौर गाममे एकटा ऊँच डीह अछि, जतए बौद्धकालक मूर्त्ति अछि।
१३.बलिराजपुर किला- मधुबनी जिलाक बाबूबरही प्रखण्डसँ ५ किलोमीटर पूब बलिराजपुर गाम अछि। एकर दक्षिण दिशामे एकटा पुरान किलाक अवशेष अछि। किला चारि किलोमीटर नमगर आ एक किलोमीटर चाकर अछि। दस फीटक मोट देबालसँ ई घेरल अछि।
१४.असुरगढ़ किला- मिथिलाक दोसर किला मधुबनी जिलाक पूब आ उत्तर सीमा पर तिलयुगा धारक कातमे महादेव मठ लग ५० एकड़मे पसरल अछि।
१५.जयनगर किला- मिथिलाक तेसर किला अछि भारत नेपाल सीमा पर प्राचीन जयपुर आ वर्त्तमान जयनगर नगर लग। दरभंगा लग पंचोभ गामसँ प्राप्त ताम्र अभिलेख पर जयपुर केर वर्णन अछि।
१६.नन्दनगढ़- बेतियासँ १२ मील पश्चिम-उत्तरमे ई किला अछि। तीन पंक्त्तिमे १५ टा ऊँच डीह अछि।
१७.लौरिया-नन्दनगढ़- नन्दनगढ़सँ उत्तर स्थित अछि, एतए अशोक स्तंभ आ बौद्ध स्तूप अछि।
१८.देकुलीगढ़- शिवहर जिलासँ तीन किलोमीटर पूब हाइवे केर कातमे दू टा किलाक अवशेष अछि। चारू दिशि खधाइ अछि।
१९.कटरागढ़- मुजफ्फरपुरमे कटरा गाममे विशाल गढ़ अछि, देकुली गढ़ जेकाँ चारू कात खधाइ खुनल अछि।
२०.नौलागढ़-बेगुसरायसँ २५ किलोमीटर उत्तर ३५० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि।
२१.मंगलगढ़-बेगूसरायमे बरियारपुर थानामे काबर झीलक मध्य एकटा ऊँच डीह अछि। एतए ई गढ़ अछि।
२२.अलौलीगढ़-खगड़ियासँ १५ किलोमीटर उत्तर अलौली गाम लग १०० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि।
२३.कीचकगढ़-पूर्णिया जिलामे डेंगरघाटसँ १० किलोमीटर उत्तर महानन्दा नदीक पूबमे ई गढ़ अछि।
२४.बेनूगढ़-टेढ़गाछ थानामे कवल धारक कातमे ई गढ़ अछि।
२५.वरिजनगढ़-बहादुरगंजसँ छह किलोमीटर दक्षिणमे लोनसवरी धारक कातमे ई गढ़ अछि।
२६.गौतम तीर्थ- कमतौल स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पश्चिम ब्रह्मपुर गाम लग एकटा गौतम कुण्ड पुष्करिणी अछि।
२७.हलावर्त्त- जनकपुरसँ ३५ किलोमीटर दक्षिण पश्चिममे सीतामढ़ी नगरमे हलवेश्वर शिव मन्दिर आ जानकी मन्दिर अछि। एतएसँ डेढ़ किलोमीटर पर पुण्डरीक क्षेत्रमे सीताकुण्ड अछि। हलावर्त्तमे जनक द्वार हर चलएबा काल सीता भेटलि छलीह। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) आ जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) पर एतए मेला लगैत अछि।
२८.फुलहर-मधुबनी जिलाक हरलाखी थानामे फुलहर गाममे जनकक पुष्पवाटिका छल जतए सीता फूल लोढ़ैत छलीह।
२९.जनकपुर-बृहद् विष्णुपुराणमे मिथिलामाहात्म्यमे जनकपुर क्षेत्रक वर्णन अछि। सत्रहम शताब्दीमे संत सूर किशोरकेँ अयोध्यामे सरयू धारमे राम आ जानकीक दू टा भव्य मूर्त्ति भेटलन्हि, जकरा ओ जानकी मन्दिर, जनकपुरमे स्थापित कए देलन्हि। वर्त्तमान मन्दिरक स्थापना टीकमगढ़क महारानी द्वारा १९११ ई. मे भेल। नगरक चारूकात यमुनी, गेरुखा आ दुग्धवती धार अछि। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी),जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) आ विवाह पंचमी (अगहन शुक्ल पंचमी) पर एतए मेला लगैत अछि।
३०.धनुषा- जनकपुरसँ १५ किलोमीटर उत्तर धनुषा स्थानमे पीपरक गाछक नीचाँ एकटा धनुषाकार खण्ड पड़ल अछि। रामक तोड़ल ई धनुष अछि। एहिसँ पूब वाणगंगा धार बहैत अछि जे लक्ष्मण द्वारा वाणसँ उद्घाटित भेल छल।
३१.सुग्गा-जनकपुर लग जलेश्वर शिवधामक समीप सुग्गा ग्राममे शुकदेवजीक आश्रम अछि। शुकदेवजी जनकसँ शिक्षा लेबाक हेतु मिथिला आएल छलाह- एहि ठाम हुनकर ठहरेबाक व्यवस्था भेल छल।
३२.सिंहेश्वर- मधेपुरासँ ५ किलोमीटरपर गौरीपुर गाम लग सिंहेश्वर शिवधाम अछि।
३३.कपिलेश्वर-कपिल मुनि द्वार स्थापित महादेव मधुबनीसँ ६ किलोमीटर पश्चिममे अछि।
३४.कुशेश्वर- समस्तीपुरसँ उत्तर-पूब, लहेरियासरायसँ 60 किलोमीटर दक्षिण-पूब आ सहरसासँ २५ किलोमीटर पश्चिम ई एकटा प्रसिद्ध शिवस्थान अछि। एतए चिड़ै-अभ्यारण्य सेहो अछि जतए उज्जर आ कारी गैबर, लालसर, दिघौछ, मैल, नकटा, गैरी, गगन, सिल्ली, अधानी, हरिअल, चाहा, करन, रतबा चिड़ै सभ अनायासहि नवम्बरसँ मार्च धरि देखबामे आएत ।
३५.सिमरदह-थलवारा स्टेशन लग शिवसिंह द्वारा बसाओल शिवसिंहपुर गाम लग ई शिवमन्दिर अछि।
३६.सोमनाथ- मधुबनी जिलाक सौराठ गाममे सभागाछी लग सोमदेव महादेव छथि।
३७.मदनेश्वर- मधुबनी जिलाक अंधरा ठाढ़ीसँ ४ किलोमीटर पूब मदनेश्वर शिव स्थान अछि।
३८.कुन्दग्राम:हाजीपुरसँ बत्तीस किलोमीटर उत्तर-पूर्वमे बसाध-वैशाली आ लगमे वासोकुण्ड लग गाम गढ़-टीलासँ २ कि.मी. उत्तर-पूर्व अछि कुन्दग्राम , जतए जैनक २४म तीर्थंकर महावीरक जन्म भेल छलन्हि। एतए बुद्धक छाउर, अभिषेक पुषकरणी (राजा अभिषेकसँ पूर्व एतए नहाइत रहथि), अशोक स्तम्भ आ संसद-भवन (राजा विशालक गढ़) अछि।
३९.चण्डेश्वर- झंझारपुरमे हरड़ी गाम लग चण्डेश्वर ठाकुर द्वारा स्थापित चण्डेश्वर शिवस्थान अछि।
४०.बिदेश्वर-मधुबनी जिलामे लोहनारोड स्टेशन लग स्थित शिवधामक स्थापना महाराज माधवसिंह कएलन्हि। ताहि युगक मिथिलाक्षरक अभिलेख सेहो एतए अछि।
४१.शिलानाथ- जयनगर लग कमला धारक कातमे शिलानाथ महादेव छथि।
४२.उग्रनाथ-मधुबनीसँ दक्षिण पण्डौल स्टेशन लग भवानीपुर गाममे उगना महादेवक शिवलिंग अछि। विद्यापतिकेँ प्यास लगलन्हि तँ उगनारूपी महादेव जटासँ गंगाजल निकालि जल पिएलखिन्ह। विद्यापतिक हठ कएला पर एहि स्थान पर उगना हुनका अपन असल शिवरूपक दर्शन देलखिन्ह।
४३.उच्चैठ छिन्नमस्तिका भगवती- कमतौल स्टेशनसँ १६ किलोमीटर पूर्वोत्तर उच्चैठमे कालिदास भगवतीक पूजा करैत छलाह। भगवतीक मौलिक मूर्त्ति मस्तक विहीन अछि।
४४.उग्रतारा- मण्डन मिश्रक जन्मभूमि महिषीमे मण्डनक गोसाउनि उग्रतारा छथि।
४५.भद्रकालिका- मधुबनी जिलाक कोइलख गाममे भद्रकालिका मंदिर अछि।
४६.चामुण्डा- मुजफ्फरपुर जिलामे कटरागढ़ लग लक्ष्मणा वा लखनदेइ धार लग दुर्गा द्वारा चण्ड-मुण्डक वध कएल गेल। ओहि स्थान पर ई मन्दिर अछि।
४७.परसा सूर्य मन्दिर- झंझारपुरमे सग्रामसँ पाँच किलोमीटर पूर्व परसा गाममे साढ़े चारि फीटक भव्य सूर्य मूर्त्ति भेटल अछि।
४८.बिसफी- मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी थानामे कमतौल रेलवे स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पूब आ कपिलेश्वर स्थानसँ ४ किलोमीटर पश्चिम बिसफी गाम अछि। विद्यापतिक जन्म-स्थान ई गाम अछि। एतए विद्यापतिक स्मारक सेहो अछि।
४९.मंदार पर्वत-बांका स्थित स्थलमे मिथिलाक्षरक गुप्तवंशीय ७म् शताब्दीक अभिलेख अछि। समुद्र मंथनक हेतु मंदारक प्रयोग भेल छल। निकटमे बौंसीमे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक दूटा मूर्त्ति अछि, पैघ मूर्ति लाल पाथरक अछि तँ दोसर काँसाक जकर सोझाँ दूटा पदचिन्ह अछि। जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक जन्म चम्पानगरमे आ निर्वाण एतहि भेल छलन्हि।
५०.विक्रमशिला-भागलपुरमे स्थित प्राचीन विश्वविद्यालय। भागलपुर जिलाक अंतीचक गाममे राजा धर्मपालक बनाओल बुद्ध विश्वविद्यालय अछि। १०८ व्याख्याता लेल रहबाक स्थान आ बाहरसँ पढ़ए बला लेल सेहो स्थान एतए निर्मित अछि
५१. मिथिलाक बीस टा सिद्ध पीठ- १.गिरिजास्थान(फुलहर,मधुबनी),२.दुर्गास्थान(उचैठ, मधुबनी),३.रहेश्वरी(दोखर,मधुबनी),४.भुवनेश्वरीस्थान(भगवतीपुर,मधुबनी),५.भद्रकालिका(कोइलख, मधुबनी),६.चमुण्डा स्थान(पचाही,मधुबनी),७.सोनामाइ(जनकपुर,नेपाल),८.योगनिद्रा(जनकपुर,नेपाल)९.कालिका स्थान(जनकपुर स्थान),१०.राजेश्वरी देवी(जनकपुर,नेपाल),११.छिनमस्ता देवी(उजान,मधुबनी),१२.बनदुर्गा(खररख, मधुबनी),१३.सिधेश्वरी देवी(सरिसव, मधुबनी),१४.देवी-स्थान(अंधरा ठाढ़ी,मधुबनी),१५.कंकाली देवी(भारत नेपाल सीमा आ रामबाग प्लेस,दरभंगा)१६.उग्रतारा (महिषी,सहरसा),१७.कात्यानी देवी(बदलाघाट, सहरसा),१८.पुरन देवी(पूर्णियाँ),१९.काली स्थान(दरभंगा),२०.जैमंगलास्थान(मुंगेर)।
५२. जनकपुर परिक्रमाक १५ स्थल आ ओतुक्का मुख्य देवता १. हनुमाननगर- हनुमानजी २.कल्याणेश्वर- शिवलिंग ३.गिरिजा-स्थान- शक्ति ४.मटिहानी- विष्णु मन्दिर ५.जालेश्वर- शिवलिंग ६.मनाई- माण्डव ऋषि ७. श्रुव कुण्ड- ध्रुव मन्दिर ८.कंचन वन- कोनो मन्दिर नञि मात्र मनोरम दृश्य ९.पर्वत- पाँच टा पर्वत १०.धनुषा- शिवधनुषक टुकड़ी ११.सतोखड़ी- सप्तर्षिक सात टा कुण्ड १२.हरुषाहा- विमलागंगा १३. करुणा- कोनो मन्दिर नहि मात्र मनोरम दृश्य १४. बिसौल- विश्वामित्र मन्दिर १५.जनकपुर।“मिथिलायदयश्च मध्यंते रिपवो इति मिथिला नगरी” - मिथिला जतए शत्रुकेँ मथल जाइत अछि- पाणिनीक विवरण ।
५३. चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर, संगमे आदिकालीन भव्य काली-मन्दिर सेहो एहि गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि।
५४.धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँमे नरसिंह अवतारक स्थान अछि, एकटा खोह जेकाँ पैघ पाया अछि जाहिमे जे किछु फेकबैक तँ बड़ी काल धरि गों-गोँ अबाज होइत रहत। ई स्थान आब नरसिंह भगवानक मूर्ति आ मन्दिरक कारणसँ बेश विकसित भए गेल अछि।
५५.नेऊरी: दरभंगाक बिरौल प्रखण्डसँ १३.किलोमीटर पश्चिममे एकटा गढ़ अछि जे लोरिकक मानल जाइत अछि।
५६.दरभंगा कैथोलिक चर्च: १८९१मे स्थापित ई चर्च १८९७ केर भूकम्पमे क्षतिग्रस्त भए गेल। एकरा होली रोजेरी चर्च सेहो कहल जाइत अछि।
५७.सेंट फांसिस ऑसिसी चर्च मुजफ्फरपुरमे अछि।
५८.भिखा सलामी मजार: गंगासागर पोखरि दरभंगाक महारपर ई मजार अछि।
५९.दरभंगा टावर मस्जिद इस्लाम मतावलम्बीक एकटा भव्य मस्जिद आ धार्मिक स्थल अछि।
६०. मकदूम बाबाक मजार:ललित नारायण मिथिला विश्ववविद्यालय आ कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगाक बीच स्थित ई मजार हिन्दू आ मुस्लिम मतावलम्बीक एकटा पावन स्थान अछि।
६१.चम्पानगर:भागलपुरक पश्चिममे, आब नगरसँ सटि गेल अछि। ई जैन लोकनिक एकटा पवित्रस्थल अछि, एतए महावीर तीनटा बस्सावास कएने रहथि। दू टा जैन मन्दिर एतए अछि, जे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथकेँ समर्पित अछि।
६२.बसैटी अभिलेख- पूणियाँमे श्रीनगर लग मिथिलाक्षरक ई अभिलेख मिथिलाक पहिल महिला शासक रानी इद्रावतीक राज्यकालक वर्णन करैत अछि। एकर आधार पर मदनेश्वर मिश्र ’एक छलीह महारानी’ उपन्यास सेहो लिखने छथि।
बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर शिलालेख- रानी इन्द्रावती (१७८४-१८०२) जे फूड-फॉर-वर्क आ अन्य कल्याणकारी कार्यक प्रारम्भ कएलन्हि केर मिथिलाक्षर अभिलेख एतए एकटा मन्दिरक ऊपरमे कारी पाथरमे कीलित अछि जे निम्न प्रकारसँ अछि:-
बसैटी (अररिया) बिहार, शिव मन्दिरक मिथिलाक्षर शिलालेखक देवनागरी रूपान्तरण।
वंशे सभा समाने सुरगन बिदिते भू सूरस्यावतिर्ना।
राजाभूतकृष्णदेवोनृपति समरसिंहा मिधस्यात्मजातः॥
यस्मिन् राज्याभिषेकं फलयितु मिवतद्भक्तितुष्टोमहेशः।
कैलाशाद् भूगतेद्योप्यधिन सतितरा वैद्यनाथेन नाम्नाः॥
तस्य तनुजः सुकृतिनृपवरौ विश्वनाथ राजा भूत।
विरनारायण राजस्तस्याप्यासीद् सुतस्य॥
नरनारायण राजो नरपति कुल मौलि भूषणम् पुनः।
अर्थिनकल्पद्रूमदूव सुरगन वंसावतंसोत्भूत॥२॥
तस्मादि वैरिकुल सूदन रामचन्द्र नारायणो नरपतिस्तनयो वभूक।
संमोदिता दश दिशो निज कीर्ति चन्द्र ज्योतिस्नेहाभिरार्थ निवहः सुरिवतश्चयेण॥३।।
यद्दानवारि परिवर्द्धित वारि राशि सक्तान्त कीर्ति विमलेन्दु मरिचिकाभिः।
प्रोद्योतिता दशदिशः सतनुज इन्द्रनारायणोस्य कुलभूषण राजराजः॥४॥
तेनच सत्कुल जाता तनया मनबोध शझणिः कृतिनः।
परिणीता बन्धु यत्नैस्त्रिलोचननाद्रि पुत्रीव॥५॥
यस्या प्रतापतरणावुदितेऽपिचिते
चिन्तारजविन्द वनमालभते विकासम
सौहृदय हृदय मकरन्द च उद्येन
तत्रैव यद् गुणगणा मधुपन्ति योगात्॥६॥
यज्ञेवर्देव गणो द्विजाति निवहः सस्तायनत्यादरैः।
दर्दानैपूर्णः मनोरथोऽर्थपरन सन्तितिनिः सज्जना॥७॥
गर्ज्जद वैरि मदान्धवारण चपश्चञ्चःपेतापांकुरौ।
र्वस्याः सर्वदृशेकृतागुण चमेर्मस्याश्च भूमीतने॥८॥
श्री श्री इन्दुमति सतीमतिमती देवी महाराज्ञिका
जाता मैथिल माण्डराऽमिछकुलात् मोधोसरी जानयाः।
दानै कल्पलता मधः कृतवती श्री विष्णु सेवा परा
पातिव्रत्य परायणाच सततं गंगेर सम्पारणी॥९॥
शाकेन्दु नवचन्द्र शैलधरणी संलक्षित फाल्गुने
मासि श्रेष्ठतरे सिताहनि शितेपक्षे द्वितीयायां तिथौ।
भूदेवैर्वर वैदिकेर्म्मठमयं निर्भारय सच्चिनिमिः
तत्रे सेन्दुमति सुरस्य विधित्र प्राण प्रतिष्ठाव्यधात्॥१०॥
सोदरपुर सम्भव राजानुकम्पापजिवनिकृतिनः।
श्री शुभनायस्य कृतिर्मिदं विज्ञेक्षं सन्रन्तताम्॥११॥
भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभूमि रहल अछि। प्रस्तुत अछि मिथिला रत्नक एकटा छोट संग्रह। एहि संग्रहकेँ पूर्ण करबाक हेतु अपन बहुमूल्य संग्रहकेँ ggajendra@videha.com केँ पठाऊ।
वैदिक जनक
'वैदेह राजा' ऋगवेदिक कालक नमी सप्याक नामसँ छलाह, यज्ञ करैत सदेह स्वर्ग गेलाह, ऋगवेदमे वर्णन अछि। ओ इन्द्रक संग देलन्हि असुर नमुचीक विरुद्ध आ ताहिमे इन्द्र हुनका बचओलन्हि।शतपथ ब्राहम्णक माथव विदेह आ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छथि आ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ देखल जा सकैत अछि। माथवक पुरहित गौतम मित्रविन्द यज्ञक/बलिक प्रारम्भ कएलन्हि आ पुनः एकर पुनःस्थापना भेल महाजनक-२ केर समयमे याज्ञवल्क्य द्वारा। निमि गौतमक आश्रमक लग जयन्त आ मिथि -जिनका मिथिला नामसँ सेहो सोर कएल जाइत छन्हि, मिथिला नगरक निर्माण कएलन्हि।
’सीरध्वज जनक’ सीताक पिता छथि आ एतयसँ मिथिलाक राजाक सुदृढ़ परम्परा देखबामे अबैत अछि। ’कृति जनक’ सीरध्वजक बादक 18म पुस्तमे भेल छलाह।
कृति हिरण्यनाभक पुत्र छलाह, आ जनक बहुलाश्वक पुत्र छलाह। याज्ञवलक्य हिरण्याभक शिष्य छलाह, हुनकासँ योगक शिक्षा लेने छलाह। कराल जनक द्वारा एकटा ब्राह्मण युवतीक शील-अपहरणक प्रयास भेल आ जनक राजवंश समाप्त भए गेल (संदर्भ अश्वघोष-बुद्धचरित आ कौटिल्य-अर्थशास्त्र)
बाल्मीकि
सीतापति राम
वैदेही सीता
लव कुश
वाजसनेयी याज्ञवल्क्य
याज्ञवल्क्य मिथिलाक दार्शनिक राजा कृति जनकक दरबारमे छलाह। हुनकर माताक वा पिताक नाम सम्भवतः वाजसनी छलन्हि। ओना हुनकर पिता देवरातकेँ मानल जाइत छन्हि। याज्ञवल्क्य १. शुक्ल यजुरवेद, २. शतपथ ब्राह्मण, बृहदारण्यक उपनिषद आऽ याज्ञवल्क्य स्मृतिक दृष्टा/लेखक छथि।
याज्ञवल्क्य पत्नी मैत्रेयी
याज्ञवल्क्यक दू टा पत्नी छलथिन्ह, १. कात्यायनी आऽ दोसर मैत्रेयी। मत्रेयी ब्रह्मवादिनी छलीह। कात्यायनीसँ हुनका तीनटा पुत्र छलन्हि- चन्द्रकान्ता, महामेघ आऽ विजय।
अंगराज कर्ण
वैशेषिक दर्शन कणाद
महावीर जैन 599-527
गौतम बुद्ध BC 563-483
चाणक्य BC 350-283
धर्म आऽ विधिक क्षेत्रमे कौटिल्यक अर्थशास्त्र आऽ याज्ञवल्क्य स्मृतिमे बड्ड समानत अछि जे चाणक्यक मिथिलावासी होयबाक प्रमाण अछि।
अर्थशास्त्रमे(१.६ विनयाधिकारिके प्रथमाधिकरणे षडोऽध्यायः इन्द्रियजये अरिषड्वर्गत्यागः) कराल जनक केर पतनक सेहो चर्चा अछि।
तद्विरुद्धवृत्तिरवश्येन्द्रियश्चातुरन्तोऽपि राजा सद्यो विनश्यति- यथा
दाण्डक्यो नाम भोजः कामाद् ब्राह्मण कन्यायमभिमन्यमानः सबन्धराष्ट्रो विननाश करालश्च वैदेहः,...।
चन्द्रगुप्त मौर्य चाणक्यक शिष्य BC 340-293
आर्यभट्ट वैज्ञानिक 476-550
पञ्जीमे आर्यभट्टक विवरण- (२७) (३४/०८) महिपतिय: मंगरौनी माण्डैर सै पीताम्ब र सुत दामू दौ माण्ड्र सै वीजी त्रिनयनभट्ट: ए सुतो आर्यभट्ट: ए सुतो उदयभट्ट: ए सुतो विजयभट्ट ए सुतो सुलोचनभट (सुनयनभट्ट) ए सुतो भट्ट ए सुतो धर्मजटीमिश्र ए सुतो धाराजटी मिश्र ए सुतोब्रह्मजरी मिश्र ए सुतो त्रिपुरजटी मिश्र ए सुत विघुजटी मिश्र ए सुतो अजयसिंह: ए सुतो विजयसिंह: ए सुतो ए सुतो आदिवराह: ए सुतो महोवराह: ए सुतो दुर्योधन सिंह: ए सुतो सोढ़र जयसिंहर्काचार्यास्त्रस महास्त्र विद्या पारङगत महामहोपाध्या य: नरसिंह:।।
सिद्ध सरहपाद 700-780
सरहपाद-“सिद्धिरत्थु मइ पढ़मे पढ़िअउ ,मण्ड पिबन्तोँ बिसरउ एमइउ”।मिथिलामे अक्षरारम्भ सिद्धिरस्तु जकर पूर्वमे सिद्धिरस्तु, गणेशजीक अंकुश आँजी, लिखल जाइत अछि। मिथिलामे ई धारणा जे माँड़ पिलासँ स्मरण शक्ति क्षीण होइत अछि।
आदि शंकराचार्य 788-820 मंडन मिश्रसँ शास्त्रार्थ
महाकवि विद्यापति ठाकुर 1350-1450
मैथिली भाषाक आदि कवि। अनेक गद्यग्रन्थहुक प्रणेता । कालजयी पद रचनाक अमर कवि । कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पुरुष परीक्षा, गोरक्षविजय, लिखनावली आदि ग्रंथ समेत विपुल संख्यामे कालजयी मैथिली पदक रचयिता ।
शंकरदेव 1449-1569
गोनू झा करमहे सोनकरियाम 1450-1550
लक्ष्मीनाथ गोसाई 1793-1872
कवि चन्दा झा 1831-1907
मूलनाम चन्द्रनाथ झा, ग्राम- पिण्डारुछ, दरभंगा। कवीश्वर, कविचन्द्र नामसँ विभूषित। ग्रिएर्सनकेँ मैथिलीक प्रसंगमे मुख्य सहायता केनिहार।
कृति- मिथिला भाषा रामायण, गीति-सुधा, महेशवाणी संग्रह, चन्द्र पदावली, लक्ष्मीश्वर विलास, अहिल्याचरित आऽ विद्यापति रचित संस्कृत पुरुष-परीक्षाक गद्य-पद्यमय अनुवाद।
सर जी. ए. ग्रियर्सन मैथिली प्रेमी 1851-1941
महाकवि लालदास 1856-1921
हिनक जन्म खड़ौआ ग्राममे १८५६ ई. मे तथा मृत्यु १९२१ ई. मे भेलन्हि । हिनक अनेक रचना उपलब्ध होइत अछि, यथा—रमेश्वर चरित रामायाण,’ स्त्री शिक्षा,’ ’सावित्री-सत्यवान,’ ’चण्डी चरित,’ ’विरुदावली,’ ’दुर्गा सप्तशती,’ तन्त्रोक्त मिथिला माहात्म्य’ आदि । मैथिलीक अतिरिक्त ई संस्कृत, हिन्दी तथा फारसीक ज्ञाता छलाह । कविताक अतिरिक्त गद्यमे सेहो ई रचना कएल । रमेश्वर चरित रामायण हिनक सभसँ विशिष्ट ग्रन्थ अछि । राम-कथाक उल्लेखमे सीताक महिमाक महत्त्व दए मिथिला तथा मैथिलीक प्रति ई अपन श्रद्धा तथा भक्तिकेँ व्यक्त कएल अछि ।
म. म. परमेश्वर झा 1856-1924
जन्म 1856 ई. मे तरौनी ग्राम (दरभंगा) जिलामे भेल छलन्हि तथा निधन 1924 ई. मे । संस्कृत व्याकरणक ई दिग्गज विद्वान् छलाह तथा ‘वैयाकरण केशरी’ क उपाधिसँ विभूषित छलाह । मैथिली साहित्यमे अपन कृति ‘मिथिलातत्त्व विमर्श’ तथा ‘सीमंतिनी आख्यायिका’क कारणे महत्त्वपूर्ण स्थान रखैत छथि । ई महाराज रमेश्वर सिंहक दरवारमे राज-पंडितक पदपर अनेको वर्ष धरि सुप्रतिष्ठित छलाह ।
अवधबिहारी प्रसाद शाही 1859-1929
सर्वतंत्र स्वतंत्र बच्चा झा 1860-1921
मधुबनी जिलांतर्गत लवाणी(नवानी) गाममे हिनकर जन्म भेलन्हि।हिनक कृति सभ अछि। 1. सुलोचन-माधव चम्पू काव्य, 2.न्यायवार्त्तिक तात्पर्य व्याख्यान, 3.गूढ़ार्थ तत्त्वलोक(श्री मदभागवतगीता व्याख्याभूत मधुसूदनी टीका पर) 4.व्याप्तिपंचक टीका 5.अवच्छदकत्व निरुक्त्ति विवेचन 6.सव्यभिचार टिप्पण 7.सतप्रतिपक्ष टिप्पण 8.व्याप्तनुगन विवेचन 9.सिद्धांत लक्षण विवेक 10.व्युत्पत्तिवाद गूढार्थ तत्वालोक 11.शक्त्तिवाद टिप्पण 12.खण्डन-ख़ण्ड खाद्य टिप्पण 13. अद्वैत सिद्धि चन्द्रिका टिप्पण 14.कुकुकाञ्जलि प्रकाश टिप्पण।
म. म. शशिनाथ झा 1860-1930
मुंशी रघुनन्दन दास 1860-1945
डॉ. सर आशुतोष मुखर्जी मैथिली प्रेमी 1864-1924
मधुसूदन ओझा 1866-1939
मुकुन्द झा "बख्शी" 1869-1936
जन्म हरिपुर बख्शी टोल ग्राम (मधुबनी जिला) मे 1869 ई. मे भेल तथा हिनक निधन काशीमे 1937 ई. मे भेलन्हि । हिनक लिखल संस्कृत मे अनेक ग्रंथ अछि । मैथिलीमे हिनक महत्त्वपूर्ण कृति अछि ‘मिथिला भाषामय इतिहास’ । एकर अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक स्फुट निबन्ध सभ सेहो प्रकाशित भेल । मिथिलाक ऐतिहासिक वर्णन सभसँ पहिने हिनके प्रकाशित भेल । एहि इतिहासमे मिथिलाक सर्वतोमुखी परिचय प्रस्तुत कएल गेल अछि ।
डॉ. सर गंगानाथ झा 1871-1941
जन्म मधुबनी जिलाक सरिसब-पाही ग्राममे 1871 ई. मे भेल तथा निधन प्रयागमे 1941 ई. मे । ई अपना समयक संस्कृतक प्रकाण्ड विद्वान म. म. चित्रधर मिश्र, म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. शिवकुमार शास्त्नीसँ मीमांसा एवं दर्शनक अध्ययन कएलन्हि तथा दर्शनक विभित्र दुरूह ग्रंथक अङरेजीमे अनुवाद कए पाश्चात्य संसारक ध्यान आकृष्ट कएलन्हि । ई गवर्नमेन्ट संस्कृत कॉलेज बनारसमे 1917 सँ 1923 धरि प्रिसिपल छलाह तथा एलाहाबाद विश्वविद्यालयक 1923 सँ 1932 पर्यन्त कुलपति रहलाह । मैथिलीमे हिनक सम्पादित चन्दा झाक ‘महेशवाणी संग्रह’ तथा ‘गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली’ प्रकाशित अछि । मैथिली साहित्य परिषद् द्वारा प्रकाशित हिनक ‘वेदान्त दीपक’ (दर्शन) विषयक अपूर्व ग्रंथ अछि । एहिसँ भिन्न हिनक निबंध सभ सामयिक मैथिली पत्न-पत्निकामे प्रकाशित अछि ।
अरविन्द घोष मैथिली प्रेमी 1872-1950
जनार्दन झा जनसीदन 1872-1951
रासबिहारी लालदास,मिथिला दर्पण 1872-1940
रामचन्द्र मिश्र "चन्द्र" 1873-1937 मैथिल प्रभा
महावैय्याकरणाचार्य पं दीनबन्धु झा 1878-1955
भवनाथ मिश्र 1879-1933 मिथिला शब्द प्रकाश
कीर्त्यानन्द सिंह
टंकनाथ चौधरी 1884-1928
भवप्रीतानन्द ओझा 1886-1970
कपिलेश्वर मिश्र 1887-1987
बालकृष्ण मिश्र 1888-1948
सुनीति कुमार चटर्जी मैथिली प्रेमी 1890-1977
बलदेव मिश्र 1890-1975
हिनक जन्म सहरसा जिलाक वनगाँव ग्राममे 1890 ई. मे एवं निधन फरवरी, 1975मे भेलन्हि । प्रारम्भमे पं. गेनालाल चौधरीसँ ज्यौतिष पढ़ि ई काशीमे पं. सुधाकर द्विवेदीजीक शिष्य भेलाह । बहुत वर्ष धरि सरस्वती भवन (वाराणसी) मे हस्तलिखित विभागमे कार्य कएल । पश्चात् पटनाक काशीप्रसाद जयसवाल रिसर्च संस्थानमे अनेक प्राचीन तिब्बती हस्तलिपिकेँ देवनारीमे लिप्यन्तरित कएल। ’मिथिलामोद’ प्रकाशन एवं म.म. मुरलीधर झाक प्रोत्साहनसँ ज्यौतिषीजी १९१० ई.सँ ’मोद’मे लिखए लगलाह। हिनक प्रकाशित रचना अछि—’रामायण शिक्षा’, ’चन्दा झा’, ’संस्कृति’, ’भारत शिक्षा’, ’गप्प-सप्प विवेक’, ’समाज’ आदि । पण्डितजी यावत् धरि पटना रहलाह बराबरि ’मिहिर’मे लिखैत रहलाह ।
आचार्य रामलोचन शरण 1890-1971
सीताराम झा 1891-1975
जन्म चौगामा ग्राममे १८९१ ई.मे तथा निधन १९७५ ई. मे भेलन्हि । संस्कृतमे ज्योतिष शास्त्रक अनेक रचनाक .अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक ’अम्ब चरित’ (महाकाव्य), ’सूक्ति सुधा,’ लोक लक्षण,’ ’पढ़ुआचरित,’ ’पूर्वापर व्यवहार,’ उनटा बसात,’ ’अलंकार दर्पण’, ’भूकम्प वर्णन’, ’काव्य षट-रस’, ’मैथिली काव्योपवन’, आदि ग्रन्थ उपलब्ध अछि । हिनक गीताक मैथिली अनुवाद सेहो उपलब्ध अछि । मिथिला मोदक सम्पादन १९२० ई.सँ १९२७ ई. धरि ई कएल ।
ताराचरण झा 1892-1928
बद्रीनाथ झा 1893-1973
जन्म मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे १८९३ ई. मे भेलन्हि तथा १९१४ ई. मे ई काशी लाभ कएलिन्ह । बहुत दिन धरि ई मुजफ्फरपुरक धर्म्म समाज संस्कृत कॉलेजमे साहित्यक अध्यापक छलाह । मैथिलीक विख्यात कवि लोकनि यथा सुमनजी, मधुपजी, मोहनजी आदि हिनक शिष्य छथिन्ह । संस्कृत साहित्यमे हिनक अनेक रचना अछि । जाहिमे राधा परिणय’ (महाकाव्य) क स्थान विशिष्ट अछि । मैथिलीमे हिनक ’एकावली परिणय’ (महाकाव्य) एक नवीन कीर्तिमान स्थापित कएलक। कोनो अलंकारक दृष्टान्त तकबाक हेतु ’एकावली परिणय’ पर्याप्त अछि ।
जीवनाथ राय 1893-1964
उमेश मिश्र 1895-1967
जन्म मधुबनी जिलाक गजहरा ग्राममे 1895 ई. मे भेल छलन्हि । ई एकहतरि वर्षक आयुमे १९६७ ई. मे प्रयागमे स्वर्गवासी भेलाह । ई अपन स्वनाम-धन्य पिता म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. डा. गंगानाथ झाक सान्निध्यमे विद्यार्जन कएल। १९२३ सँ १९५९ धरि मिश्रजी एलाहाबाद विश्वविद्यालयमे संस्कृतक प्राध्यापक छलाह । दरभंगा ’मिथिला शोध संस्थान’क निदेशक पदपर किछु समय कार्य कए १९६२ सँ ६५ धरि कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालयक कुलपति रहलाह ।म. म. मुरलीधर झासँ प्रभावित भए ’मिथिलामोद’मे ई लिखब प्रारम्भ कएलन्हि तथा अपन विविध प्रकारक रचनासँ मैथिलीक गद्यकेँ समृद्ध् कएलन्हि । मैथिलीमे हिनक प्रसिद्ध ग्रन्थ अछि—’कमला’ (शेक्सपीयरक ’टेम्पेस्ट’क भावानुवाद), ’नलोपाख्यान’, ‘मैथिली-संस्कृति’ तथा अनेक वर्णनात्मक एवं आलोचनात्मक निबन्ध; मनबोधक कृष्णजन्मक सम्पादन, विद्यापतिक कीर्तिलता, कीर्तिपताका, गोरक्ष विजय आदिक अनुवाद-सम्पादन सेहो कएल।
बाबू धनुषधारी लाल दास 1895-1965
अमरनाथ झा 1897-1955
सरिसब पाहीटोल ग्राममे १८९७ ई. मे भेल । हिनक निधन पटनामे जखन ई बिहार लोक सेवा आयोगक अध्यक्ष छलाह, १९५५ मे भेलन्हि । ई एलाहाबाद विश्वविद्यालयक नओ वर्ष धरि कुलपति रहि पश्चात् हिन्दू विश्वविद्यालयक सेहो कुलपतिक पदकेँ सुशोभित कएलन्हि । ई अंगरेजीक प्रकाण्ड विद्वान् छलाह, ताहि संग हिन्दी, उर्दू, फारसी, संस्कृत, बङला एवं मैथिलीक सेहो अद्भुत विद्वान् छलाह ।मैथिलीमे हिनका द्वारा सम्पादित ‘हर्षनाथ काव्य ग्रन्थावली’ तथा ‘गोविन्ददासक श्रृग्ङारभजन’ महत्त्वपूर्ण अछि । एहिसँ भिन्न हिनक मैथिली साहित्य परिषदक अध्यक्षीय भाषण तथा अन्य लेख प्रकाशित अछि ।
भोलालाल दास 1897-1977
हिनक जन्म दरभंगा जिलाक कसरौर मे भेलन्हि । साहित्य सर्जनाक अतिरिक्त अपन संगठन क्षमता तथा मैथिली साहित्यक सर्वतोमुखी विकासक हेतु सतत तत्पर रहबाक कारणेँ भोला बाबू मैथिली संसारक एक स्तम्भक रूपमे रहलाह । हिनक निधन 1977 ई. मे भेल ।
मैथिलीक प्रचार-प्रसारमे ई अपन जीवन समपित कएने छलाह। पाठ्यक्रममे मैथिलीकेँ स्थान हो ताहि हेतु ई बीड़ा उठओलन्हि । विद्यालय स्तरक अनेक पोथीक निर्माण कएल । मैथिली साहित्य परिषदक ई संस्थापक मण्डलक सदस्य छलाह । 1931 सँ 1940 ई. पर्यन्त ओकर प्रधान मन्त्नी रहलाह । हिनक मन्त्नित्वकालमे ’भारती’ नामक मासिक पत्नक प्रकाशन भेल । एहिसँ पूर्व (१९२९-३१) कुशेश्वर कुमरजीक संग संयुक्त सम्पादनमे ’मिथिला’ नामक पत्न चलाओल ।
ई नवीन एवं प्रगतिशील विचारक लोक छलाह । ननव लेखककेँ प्रोत्साहित करब, शैलीमे एकरूपता आनब, नव प्रकाशनसँ मैथिलीक साहित्य भंडारक पूर्त्ति करब हिनक कर्त्तव्य बनि गेल छल ।
हिनक लिखल ‘मैथिली व्याकरण’ तथा हिनकहि द्वारा सम्पादित ‘गद्यकुसुमांजलि बहुत दिन धरि विद्यालयमे पढ़ाओल जाइत रहल । हिनक लिखल अनेक निबन्ध समालोचना, कविता, संस्मरण, जीवनी-साहित्य मैथिलीक पत्र-पत्निकामे छिड़िआएल अछि ।
कुमार गंगानन्द सिंह 1898-1971
जन्म—बनैली राजपरिवारमे 24-9-1898, मृत्यु:-श्रीनगर पूर्णिञा 17-1-1970 । भूतपूर्व शिक्षामंत्नी, बिहार एबं कुलपति, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ।रचना—अगिलही (उपन्यास) तथा अनेक कथा एवं एकांकी । साहित्यकारक रूपमे अगिलही लएकेँ विशेष रव्याति । युगक अनुरूप सामाजिक कुरीति आदिकेँ आधार बनाए सुधारवादी दृष्टिएँ कथा सभहिक रचना ।
ब्रजमोहन ठाकुर 1899-1977
रामवृक्ष बेनीपुरी 1899-1967
भुवनेश्वर प्रसाद 1902-
जयनारायण झा 'विनीत' 1902-1991
सुधाकर झा "शास्त्री" 1904-1974
दामोदर लाल दास विशारद 1904-1981
बबुआजी झा 'अज्ञात' 1904-1996
२००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार।
बल्लभ झा हाटी 1905-1940
रमानाथ झा 1906-1971
जन्म दरभंगा जिलाक उजान (धर्मपुर) ग्राममे 1906 ई. मे एवं हिनक निधन दरभंगामे १९७१ ई. मे भेलन्हि । 1930 ई. मे अङरेजीमे एम. ए. कएलाक बाद ई कतोक वर्ष धरि मधेपुर उच्च विद्यालयक प्रधानाध्यापक छलाह, तकरा बाद दरभग्ङा-राज-लाइब्रेरीक पुस्तकालयाध्यक्षक रूपमे 1936 सँ अन्तिम समय धरि रहलाह । 1952 सँ 62 चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे प्रो. झा अङरेजीक प्राध्यापक रूपेँ काजka पश्चात् ओही कॉलेजमे मैथिली विभागाध्यक्ष बनाओल गेलाह । 1965 मे रमानाथ बाबू साहित्य अकादमीक मैथिलीक प्रतिनिधि निर्वाचित भेलाह जाहि पद पर ओ जीवनक अन्त समय तक रहलाह ।
हिनक रचनाक क्षेत्न बहुत व्यापक छल । हिनक अनुसंधानात्मक निबंक दू गोट संग्रह ‘निबन्धमाला’ तथा ‘प्रबंध संग्रह’ प्रकाशित अछि । संकलित सम्पादित पुस्तक सभमे ‘मैथिली पद्य-संग्रह’, ‘मैथिली गद्य-संग्रह’, ‘प्राचीन गीत’, ‘कथा काव्य’, ‘नवीन गीत’, ‘कविता कुसुम’, ‘कथा संग्रह’ आदि अछि । ‘कथासरित्सागर’क आधार पर प्राञ्जल गद्य शैलीमे हिनक ‘उदयन-कथा’ तथा ‘बररुचि-कथा’ बेश ख्याति पओलक । व्याकरणक ‘मिथिला भाषा प्रकाश’, ‘अलक्ङारप्रवेश’ आदि अनेक ग्रन्थ प्रकाशित अछि । ‘मैथिली साहित्य पत्र’ त्नैमासिक पत्रिकाक संपादक।
काशीकान्त मिश्र "मधुप" 1906-1987
१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य) पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त मैथिलीक प्रशस्त कवि आ मैथिलीक प्रचार-प्रसारक समर्पित कार्यकर्ता ’झंकार’ कवितासँ क्रान्ति गीतक आह्वान कएलनि । प्रकृति प्रेमक विलक्षण कवि । ’घसल अठन्नी कविताक लेल कथ्य आ शिल्प-संवेदना—दुहू स्तर पर चरम लोकप्रियता भेटलनि।
कांञ्चीनाथ झा "किरण" 1906-1988
जन्म स्थान-धर्मपुर,लोहना रोड, दरभंगा बिहार । मैथिली भाषा आंदोलनमे महत्वपूर्ण भूमिका। ’पराशर’ महाकाव्य लेल साहित्य अकादमी ओ ’कथा किरण’ लेल वैदेही पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चंद्रग्रहण (उपन्यास), वीर-प्रसून (बालकथा), जय जन्मभूमि (एकांकी), विजेता विद्यापति (नाटक), कथा-किरण (कथा-संग्रह), किरण-कवितावली, कतेक दिनक बाद (कविता-संग्रह), पराशर (महाकाव्य) ओ किरण-निबंधावली (निबंध-संग्रह) आदि।१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)पर मैथिली मे साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित।
श्यामानन्द झा 1906-1949
रमाकांत झा, नेपाल 1907-1971
ईशनाथ झा 1907-1965
बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन पद्धतिक काव्य-रचनाक विलक्षण संयोग हिनकर कवितामे भेटैत अछि । दलित वर्ग, शोषणक समस्या, स्वदेश प्रेमक यथार्थवादी रचनाक संग संग व्यक्तिनिष्ठ कल्पनाक अनेक विशिष्ट कविता मैथिलीमे लिखलनि ।
भुवनेश्वर सिंह 'भुवन' 1907-1944
अपन खाढ़ीक बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन रीतिक कविताक रचना विपुल संख्यामे कएलनि । ’भुवन भारती’ कविता संकलन प्रकाशनसँ मैथिली ओज आ नव चेतनाक शंख फुकलनि।
हरिमोहन झा 1908-1984
हिनकर मैथिली कृति १९३३ मे “कन्यादान” (उपन्यास), १९४३ मे "द्विरागमन”(उपन्यास), १९४५ मे “प्रणम्य देवता” (कथा-संग्रह), १९४९ मे “रंगशाला”(कथा-संग्रह), १९६० मे “चर्चरी”(कथा-संग्रह) आऽ १९४८ ई. मे “खट्टर ककाक तरंग” (व्यंग्य) अछि। मृत्योपरांत १९८५मे (जीवन यात्रा, आत्मकथा)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित।
रामधारी सिंह 'दिनकर' मिथिला रत्न 1908-1974
माँगनि खबास 1908-1943 संगीतज्ञ
सुभद्र झा 1909-2000
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित।
स्नेहलता 1909-1993
कालीकान्त झा 1909-
तंत्रनाथ झा 1909-1984
जन्म १९०९ ई मे दरभंगा जिलाक धर्मपुर ग्राममे भेलन्हि मुत्यु ४-५-’८४,चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे अर्थशास्त्नक प्राध्यापक छलाह । अवकाश ग्रहण क काव्य साधनामे लागल रहलाह । महाकाव्य, मुक्तक, एकांकी सभ विधामे ई सिद्ध हस्त छलाह । हिनक ’कीचक वंध’ महाकाव्य अङरेजीक ‘ब्लैक्ङ भर्स’ (अमित्नाक्षर छन्द) म लिखल अछि । मैथिलीमे ’सौनेट’ एवं ब्लैक्ङ भर्स’क ई प्रथम प्रयोक्ता थिकाह । संस्कृत परम्परामे काव्य रचना करितहुँ पाश्चात्य शैलीक नवीनता हिनका रचनामे भेल । हिनक ’कीचक वध’ ओ ’कृष्ण चरित’ महाकाव्य—‘मङ्गल-पञ्चाशिका’ एवं ‘नमस्या’ मैथिली साहित्यमे अपन विशिष्ट स्थान रखैछ । तकर अतिरिक्त मुक्तक काव्यमे विषय वस्तुक व्यापकता एवं शिल्प शैलिक प्रचुरता अबैत अछि । एक दिश यदि प्राचीन ढंगक ईश्बर वन्दनाक रचना कएलन्हि तँ दोसर दिस ‘सौनेट’ (चतुर्दशपदी) ‘बैलेड’ आदि लिखबामे पूर्ण सफलता प्राप्त कएलन्हि ।‘कृष्ण चरित’ महाकाव्य पर हिनका 1979 ई क साहित्यक अकादमी पुरस्कार भेटलन्हि । 1980 ई. मे हिनका अभिनन्दन ग्रन्थसमर्पित कएल गेलन्हि ।
जीवनाथ झा 1910-1977
सुरेन्द्र झा 'सुमन' 1910-2002
जन्म: ग्राम : बल्लीपुर, जिला-समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: प्रतिपदा, अर्चना,साओन-भादव,अंकावली, अन्तर्नाद, पयस्विनी, उत्तरा आदि तीससँ अधिक मौलिक कविता-पुस्तक;पुरुष-परीक्षा, अनुगीतांजलि, ऋतु श्रृंगार तथा वर्णरत्नाकर, पारिजात-हरण, कृष्णजन्म, आनन्द-विजय आदि कतिपय ग्रन्थक अनुवाद-संपादन; ’मैथिली काव्य पर संस्कृतक प्रभाव’ नामक समीक्षा-ग्रंथ। ’पयस्विनी’ लेल १९७१ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा ’उत्तरा’ पर १९१८ मे मैथिली अकादेमीक विद्यापति पुरस्कार प्राप्त । मैथिलीक प्रथम दैनिक पत्र ’स्वदेश’क लब्धप्रतिष्ठ सम्पादक।१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। २००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;यात्री-चेतना पुरस्कार।
'नागार्जुन' वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' 1911-1998
जन्म अपन मामागाम सतलखामे भेलन्हि, जे हुनकर गाम तरौनीक समीपहिमे अछि, जिला-दरभ्गा । मूल नाम: वैद्यनाथ मिश्र । हिन्दीमे नागार्जुन नामे प्रख्यात । प्रकाशित कृति: चित्रा, पत्रहीन नग्न गाछ (मैथिली कविता-संग्रह); पारो, बलचनमा, नवतुरिया (मैथिली उपन्यास); युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आंखें, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार हजार बाहो वाली, पुरानी जूतियो का कोरस, रत्नगर्भा, ऐसे भी हम क्या ! ऐसे भी तुम क्या ! (हिन्दी कविता-संग्रह); रतिनाथ की चाची, बलचनमा, नई पौध, बाबा बटेसरनाथ, वरुण के बेटे, दुखमोचन, कुम्भीपाक, अभिनन्दन, उग्रतारा, इमरतिया (हिन्दी उपन्यास); आसमान में चन्दा तैरे (कहानी संग्रह); भस्मांकुर (हिन्दी खण्ड काव्य); अन्नहीनम् क्रियाहीनम् (निबन्ध-संग्रह); गीत गोविन्द; मेघदूत; विद्यापति के गीत, विद्यापति की कहानियां (अनुवाद) । ’पत्रहीन नग्न गाछ’ लेल १९६८ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त । यायावरी जीवन । मैथिली प्रतिनिधिक रूपमे रूस भ्रमण ।
आरसीप्रसाद सिंह 1911-1996
जन्म: ग्राम-एरौत, जिला-समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: माटिक दीप, पूजाक फूल, सूर्यमुखी (कविता-संग्रह), मेघदूत (अनुवाद), आरसी, नन्ददास, संजीवनी (हिन्दी काव्य संग्रह)। ’सूर्यमुखी’ लेल १९८४ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त ।
गुरु जयदेव मिश्र 1911-1991 शिष्य गंगानाथ झा
यशोधर झा
मिथिला वैभव, दर्शन मैथिली पोथीपर 1966 मे पहिल साहित्य अकादमी पुरस्कार मैथिली लेल प्राप्त।
वैद्यनाथ मल्लिक 'विधु' 1912-1987
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य) लेल मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कार।
भीम झा 1912-
उपेन्द्र ठाकुर 'मोहन' 1913-1980
जन्म १९१३ ई. मे दरभंगा जिलाक चतरिया ग्राममे भेलन्हि । मृत्यु २४-५-१९८० । संस्कृत शिक्षामे साहित्याचार्य ओ बड़ौदा राजक विद्वत्-परीक्षासँ ‘साहित्य-रत्न’क उपाधिसँ विभूषित भेलाह । दैनिक आर्यावर्तमे आदिअहिसँ, पश्चात् १९६० सँ मिथिला मिहिरक उप-सम्पादक एवं सह-सम्पादक रूपेँ कार्य करैत १९७७ मे सेवा निवृत भेलाह ।मोहनजी करीब पचास वर्ष साहित्य साधनामे लागल रहलाह । विजयानन्द, कुंजरंजन, सुदर्शन, पुण्डरीक, शास्त्नी, बामन आदि छद्म नामसँ पत्न-पत्निकामे विविध विषयपर हिनक लेख सभ प्रकाशित भेल अछि ।मोहन जीक ‘बाजि उठल मुरली’मे १०१ गोट कविताक संकलन अछि जाहिमे हिनक सुदीर्घ काव्य-आराधनाक विभित्र विचारधाराक ओ विभित्र अनुभूतिक सामग्री उपलब्ध अछि । एहि पुस्तकपर मोहन’जीकेँ १९७८ मे साहित्य अकादम् पुरस्कार भेटलन्हि। एहिसँ बहुत पूर्व हिनक ’फुलडाली’ नामक कविता संग्रह सेहो प्रकाशित भेल छल ।
जयनाथ मिश्र (1913-1985)
श्रीकांत ठाकुर "विद्यालंकार"
पञ्जीकार मोदानन्द झा 1914-1998
लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया। पिता-स्व. श्री भिखिया झा। गुरु- पञ्जीकार भिखिया झा। शास्त्रार्थ परीक्षा- दरभंगा महाराज कुमार जीवेश्वर सिंहक यज्ञोपवीत संस्कारक अवसर पर महाराजाधिराज(दरभंगा) कामेश्वर सिंह द्वारा आयोजित परीक्षा-1937 ई. जाहिमे मौखिक परीक्षाक मुख्य परीक्षक म.म. डॉ. सर गंगानाथ झा छलाह।
आनन्द झा 1914-1988
बाबू साहेब चौधरी 1916-1998
लक्ष्मण झा 1916-2000
शुद्धदेव झा 'उत्पल' 1916-
लक्ष्मीनाथ झा मिथिला चित्रकला 1917-1990
उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' 1917-2002
जन्म स्थान-हरिपुर वकशीटोल, मधुबनी, बिहार । १९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । साहित्य अकादेमीक अनुवाद पुरस्कार प्राप्त । प्रकाशित कृति: कुमार, दू पत्र (उपन्यास), विडंबना, भजना भजले (कथा-संग्रह), पतन संन्यासी, प्रतीक (काव्य), महाभारत (पहिल दू पर्व) आदि।
मनमोहन झा 1918-2009
जन्म सरिसबमे, अश्रुकण, वीरभोग्या, मिथिलाक निशापुरमे।२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)पर मृत्योपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार।
ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म' 1918-1986
जन्म स्थान-बहेड़ा, दरभंगा बिहार । १९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । उपन्यासकार, कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कोब्रागर्ल, कनकी, अर्द्धनारीश्वर, लोरिक विजय, नैका-बनिजारा, लवहरि-कुशहरि, राय रणपाल, आदिम गुलाम आदि उपन्यास ओ कंठहार (नाटक) आदि।
बुद्धिधारी सिंह रमाकर 1919-1991
जन्म मधुबनीमे 1919 ई. मे भेल । अपन पिता स्व. क्षेमधारी सिंहसँ विभित्र विषयक शिक्षा ग्रहण कएलन्हि । ई रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीक मैथिली विभागाध्यक्ष छलाह । जतएसँ अवकाश प्राप्त कएलन्हि । बाल्या-वस्थहिसँ ई कविकार्यमे लागल रहलाह अछि । संस्कृत तथा मैथिली दुनू भाषामे हिनक रचना प्रकाशित अछि । यथा—मैथिलीमे ‘प्रयास’ (कथा-संग्रह), ‘मधुमती’, ‘अमरबापू’ (कविता-संग्रह), ‘शरशय्या’ (खंड-काव्य) ‘स्मृति साहस्री’ (महाकाव्य) आदि ।
आद्याचरण झा 1920-
फणीश्वर नाथ 'रेणु' मिथिला रत्न 1921-1977
जयकान्त मिश्र, पुत्रीक संग आ' नेहरूक संग 1922-2009
चन्द्र भानु सिंह 1922-
२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार।
गोविन्द झा 1923-
जन्मस्थान-इसहपुर, सनकोर्थु सरिसब पाही, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्धकथाहार,उपन्यासकार, नाटककार, भाषा वैज्ञानिक ओ अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार, साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कारसँ सम्मानित। बिहार सरकारसँ कामिल बुल्के पुरस्कार, ग्रियर्सन पुरस्कार आदिसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: उपन्यास, नाटक, कथा, कविता, भाषा विज्ञान आदि विभिन्न विधामे अड़तीस टा पोथी प्रकाशित । प्रकाशन: सामाक पौती,नेपाली साहित्यक इतिहास (अनु) आदि । १९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)पुस्तक लेल सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2006 सँ सम्मानित।
सुधांशु शेखर चौधरी 1922-1990
जन्म दरभंगाक मिश्रटोलामे 1922 ई. मे भेलन्हि तथा मृत्यु 1990 ई. मे भेलन्हि । किछु दिन विभिन्न जीविकामे रहि पश्चात् साहित्यकारक जीवन प्रारम्भ कएल । किछु दिन ‘बैदेही’क सम्पादन श्री सुमनजी एवं श्री कृष्णकान्त मिश्रजीक संग कएल तत्पश्चात् 1960 ई. सँ 1982 ई. धरि पटनामे ‘मिथिला मिहिर’’क सफल सम्पादन कएल ।हिनक दू गोट नाट्यकृति-‘भफाइत चाहक जिनगी’, लेटाइत आँचर’, तथा ‘पहिल साँझ’ हिनक नाटकक नीक व्यावहारिक अनुभवक परिचायक अछि ।छद्मनामसँ हिनक दू गोट उपन्यास मिहिर’ मे प्रकाशित भेल अछि । हिनक उपन्यास ई वतहा संसार’ जे मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित भेल आ जाहि पर 1980 क साहित्य अकादमीक पुरस्कार देल गेल ।
योगानन्द झा 1923-1986
हिनक जन्म मधुबनी जिलाक कोइलख ग्राममे 1923 ई. मे भेलन्हि । मृत्यु 1986 मे भेलनि । अग्रेजीमे एम. ए. कएलाक पश्चात् ई किछु दिन चन्द्रधरी मिथिला कॉलेजमे प्राध्यापक रहलाह । बिहार प्रशासनिक सेवामे 1981 धरि विभिन्न पदपर कार्य कएल । तत्पश्चात्मैथिली अकादमीक निदेशक ’84 धरि ।योगानन्द झाजी मैथिली साहित्यमे अपन उपन्यास ‘भलमानुस’ एवं ‘पवित्ना’क हेतु ख्यात छथि । हिनक नाटक ‘मुनिक मतिभ्रम’ एवं कथा संग्रह ‘उड़ैत वंशी’ यथेष्ट प्रतिष्ठा प्राप्त कएने अछि । एकर अतिरिक्त ई महात्मा गान्धीक आत्मकथाक अनुवाद एवं ‘आमक जलखरी’ नामक एक कथा संग्रहक सम्पादन सेहो कएने छथि ।
रामकृष्ण झा 'किसुन' 1923-1970
आधुनिक धाराक विशिष्ट कवि, कथाकार, चिन्तक । प्रकाशित कृति: आत्मनेपद (कविता संग्रह), मैथिली नवकविता (सम्पादन)। मृतयुपरान्त ’किसुन रचनावली’ तीन खण्डमे प्रकाशित ।
उमानाथ झा 1923-2009
जन्म:-01-01-1923, मृत्यु 07-12-2009 महरैल, भधुबनी ।भूतपूर्व अङरेजी विभागाध्यक्ष एवं प्रति-कुलपति मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा । रचना:-रेखाचित्न, अतीत (कथा संग्रह); मैथिली नवीन साहित्य, इन्द्र धनुष, विद्यापति गीतशती (सम्पादन)।१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा) पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित।
ज़टाशंकर दास 1923-2006
प्रबोध नारायण सिंह 1924-2005
हिन्दी, संस्कृत, मैथिली, पाली एवं फारसीक विद्वान्। मिथिला, मैथिल एवं मैथिलीक ई अनन्य भक्त छथि । कलकत्ता रहि मिथिला दर्शन’, मैथिली कविता’, मैथिली रंगमंच’ आदि पत्निकाक प्रकाशनक माध्यमसँ श्री प्रबोधजी मैथिलीक जे सेवा कएल अछि तकर वर्णन थोड़मे सम्भव नहि । अनेक बङला कृतिक ई अनुवाद सेहो कएल अछि ।हिन्दीमे सेहो हिनक ‘कविता संग्रह’ प्रकाशित अछि ।कलकत्ता विश्वविद्यालयमे हिन्दीक पूर्व अध्यक्ष। २००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
अमोघ नारायण झा "अमोघ" 1924-
मुरलीधर सिंह, ब्रजमोहन ठाकुर, शुभंकर झा, मदनेश्वर मिश्र 1924-2004, ललित नारायण मिश्र, देवनाथ राय
मतिनाथ मिश्र मतंग 1924-
आनन्द मिश्र 1924-2007
चन्द्रनाथ मिश्र अमर 1925-
जन्म: खोजपुर, मधुबनी । वरिष्ठ कवि, कथाकार-उपन्यासकार । हास्य-व्यंग्यक कवितामे बेजोड़। मैथिलीक लेल समर्पित व्यक्तित्व । पांच दर्जनसं बेसी कथा आ विदागरी, वीरकन्या (उपन्यास) जल समाधि (कथा संग्रह) प्रकाशित ।१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। एम. एल. एकेडमी, लहेरिरियासरायसं शिक्षकक रूपमे अवकाश प्राप्त। आशा दिशा, गुदगुदी, युगचक्र, उनटा पाल आदि कविता संग्रह प्रकाशित। १९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
मुक्तिनाथ झा (1926-2009)
शुभंकर झा 1926-
दीनानाथ पाठक 'बन्धु' 1928-1962
बुचन भगत, संत 1928-1991
अनंत बिहारी लाल दास "इन्दु" 1928-
२००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
जगदानन्द झा 1928-
राजकमल चौधरी 1929-1967
महिषी, सहरसा। रचना:- आदि कथा, आन्दोलन, पाथर फूल (उपन्यास), स्वरगंधा (कविता संग्रह), ललका पाग (कथा संग्रह), कथा पराग (कथा संग्रह सम्पादन)। हिन्दीमे अनेक उपन्यास, कविताक रचना, चौरङ्गी (बङला उपन्यासक हिन्दी रूपान्तर) अत्यन्त प्रसिद्ध।
जयधारी सिंह 1929-2007
समीक्षक, कवि । प्रकाशन: बौद्धगानमे तांत्रिक सिद्धांत, समीक्षा शास्त्रा अदि । रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीमै मैथिली विभागक पूर्व अध्यक्ष ।
शैलेन्द्र मोहन झा 1929-1994
१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
विजयनाथ ठाकुर 1929-2008
सुन्दर झा "शास्त्री" 1930-1998
जनकपुर, नेपाल, युवावस्थाक जेलक दुर्लभ फोटो
रमेशचन्द्र वर्मा 1930-
गोपालजी झा 'गोपेश' 1931-2008
जन्म मधुबनी जिलाक मेहथ गाममे १९३१ ई.मे भेलन्हि।हिनकर रचित “सोन दाइक चिट्ठी”, “गुम भेल ठाढ़ छी”, “एलबम” “आब कहू मन केहन लगैए”, "मखानक पात" प्रकाशित भेल जाहिमे सोनदाइक चिट्ठी बेश लोकप्रिय भेल।२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार।
विवेकानन्द ठाकुर 1931-
२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार।
ताराकांत मिश्र 1931-
ललित 1932-1983
जन्म स्थान बसैठ चानपुरा मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रकाशित कृति: प्रतिनिधि, (कथा संग्रह), पृथ्वी-पुत्र (उपन्यास) आदि।
मुरारि मधुसूदन ठाकुर (1932- )
ताराशंकर बंदोपाध्यायक बंगला उपन्यास "आरोग्य निकेतन"क मैथिली अनुवाद लेल साहित्य अकादमीक अनुवाद पुरस्कार 1999 भेटल छन्हि।
विद्यानारायण ठाकुर 1933-
धूमकेतु 1932-2000
जन्म स्थान कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति : दू टा कथा संग्रह ओ एक टा उपन्यास ।
राजमोहन झा 1934-
जन्म स्थान कुमरबाजितपुर, वैशाली, बिहार । प्रख्यात कथाकार ओ संपादक । आइ काल्हि परसू (कथा-संग्रह) लेल १९९६ मे साहित्य अकादेमीसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति : एक आदि एकांत, झूठ साँच, एकटा तेसर, अनुलग्नक, आइ काल्हि परसू (कथा संग्रह), गलतीनामा, भनहि विद्यापति, टीप्पणीत्यादि (आलोचना)। ’आरम्भ’ पत्रिकाक संपादन।प्रबोध सम्मान 2009 सँ सम्मानित।
डॉ. धीरेन्द्र 1934-2004
जन्म स्थान लोहन, सरिसब पाही, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार,उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कुहेस आ किरण, पझाइत घूरक आगि, शतरूपा ओ मनु अपन मन्दिर (कथासंग्रह) हैंगरमे टाँगल कोट, काल्हि ओ आइ (कविता संग्रह) सहित कैक विधामे विभिन्न पोथी।
जमाहिरलाल जवाहरलाल नेहरू जयकान्त मिश्र बैद्यनाथ चौधरी
हरिमोहन झा, मायानन्द मिश्र, स्वरूप दास
मायानन्द मिश्र 1934-
हिनक जन्म १७ अगस्त १९३४ ई. केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलनि।भाङ्क लोटा, आगि मोम आ’ पाथर आओर चन्द्र-बिन्दु- हिनकर कथा संग्रह सभ छन्हि। बिहाड़ि पात पाथर , मंत्र-पुत्र ,खोता आ’ चिडै आ’ सूर्यास्त हिनकर उपन्यास सभ अछि॥ दिशांतर हिनकर कविता संग्रह अछि। एकर अतिरिक्त सोने की नैय्या माटी के लोग, प्रथमं शैल पुत्री च,मंत्रपुत्र, पुरोहित आ’ स्त्री-धन हिनकर हिन्दीक कृति अछि।१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित।
प्रबोध सम्मान 2007सँ सम्मानित।
हरिशंकर श्रीवास्तव "शलभ" 1934-
सोमदेव 1934-
उपन्यासकार ओ कवि । साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चानोदाइ, होटल अनारकली (उपन्यास), काल ध्वनि (कविता संग्रह), चरैवेति (गीति नाट्य) सोम सतसइ (दोहा)।२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। २००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;यात्री-चेतना पुरस्कार।
राजनन्दन लाल दास 1934-
रमानन्द रेणु 1934-
जन्म स्थान उसमामठ, दरभंगा, बिहार । वरिष्ठ कवि, कथाकार ओ उपन्यासकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: कचोट, त्रिकोण, अंतहीन आकाश (कथा-संग्रह), दूधफूल (उपन्यास), अंतत:, ओकरे नाम (कविता-संग्रह)। २०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार।
रामभद्र, धनुषा, नेपाल 1935-
साहित्य तथा अन्यान्य क्षेत्रक कतोक सफल व्यक्तिसभ अपन प्रेरणास्रोत आ पथ-प्रदर्शक मानैत छथि । मैथिली साहित्य-क्षेत्रमे हिनक परिचयक मादे एतबाए कहब पर्याप्त होएत जे मैथिलीक मूर्द्धन्य साहित्यकार डा. धीरेन्द्र हिनका मैथिली साहित्यक सर्वश्रेष्ठ कथाकार मानैत छथि ।हिनक कथामे प्रतीकात्मकताक अदभुत प्रयोगहिटा नहि, अपितु एकटा आदर्श कथाक समस्त वैशिष्टसभविद्यमान रहैत अछि । कथाकारक अतिरिक्त ई उत्कृष्ट समालोचक, नाटककार आ कवि सेहो छथि । नेपालमे मैथिलीक पहिल मोनोड्रामा लिखबाक श्रेय सेहो हिनका जाइत छनि ।सामाजिक कुरीतिसभकँ कुशलतासँ चित्रण करबामे, चिन्तनीय बनएबामे आ मन-मस्तिष्कपर अमिट छाप छोड़बामे रामभद्र सिद्धहस्त छथि । धनुषा जिलाक कुर्था गाममे जनमल रामभद्रक पूर्ण नाम रामभद्र कर्ण छनि । अग्ङरेजी विषयक अवकाशप्राप्त शिक्षक रामभद्र व्याकरण, पाठयपुस्तक आ सहायक पुस्तकसभ लिखबाक काजमे निरन्तर सक्रिय छथि।
केदारनाथ चौधरी 1936-
जन्म 3 जनवरी 1936 ई नेहरा, जिला दरभंगामे। 1958 ई.मे अर्थशास्त्रमे स्नातकोत्तर, 1959 ई.मे लॉ। 1969 ई.मे कैलिफोर्निया वि.वि.सँ अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर, 1971 ई.मे सानफ्रांसिस्को वि.वि.सँ एम.बी.ए., 1978मे भारत आगमन। 1981-86क बीच तेहरान आ प्रैंकफुर्तमे। फेर बम्बई, पुणे होइत 2000 सँ लहेरियासरायमे निवास। मैथिली फिल्म 'ममता गाबय गीत'क मदनमोहन दास आ उदयभानु सिंहक संग सह निर्माता। तीन टा उपन्यास 2004 मे चमेली रानी, 2006 मे करार, 2008 मे माहुर।
कालीकांत झा "बुच" 1934-2009
हिनक जन्म, महान दार्शनिक उदयनाचार्यक कर्मभूमि समस्तीपुर जिलाक करियन ग्राममे 1934 ई0 मे भेलनि । पिता स्व0 पंडित राजकिशोर झा गामक मध्य विद्यालयक प्रथम प्रधानाध्यापक छलाह । माता स्व0 कला देवी गृहिणी छलीह । अंतरस्नातक समस्तीपुर काॅलेज, समस्तीपुरसँ कयलाक पश्चात् बिहार सरकारक प्रखंड कर्मचारीक रूपमे सेवा प्रारंभ कयलनि । बालहिं कालसँ कविता लेखनमे विषेश रूचि छल । मैथिली पत्रिका - मिथिला मिहिर, माटि - पानि, भाखा तथा मैथिली अकादमी पटना द्वारा प्रकाशित पत्रिकामे समय - समय पर हिनक रचना प्रकाशित होइत रहलनि । जीवनक विविध विधाकेँ अपन कविता एवं गीत प्रस्तुत कयलनि । साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा प्रकाशित मैथिली कथाक इतिहास (संपादक डाॅ0 बासुकीनाथ झा ) मे हास्य कथा कारक सूची मे डाॅ0 विद्यापति झा हिनक रचना ‘‘धर्म शास्त्राचार्यक उल्लेख कयलनि । मैथिली एकादमी पटना एवं मिथिला मिहिर द्वारा समय - समय पर हिनका प्रशंसा पत्र भेजल जाइत छल ।श्रृंगाररस एवं हास्य रसक संग-संग विचार मूलक कविताक रचना सेहो कयलनि । डाॅ0 दुर्गानाथ झा श्रीश संकलित मैथिली साहित्यक इतिहासमे कविक रूपमे हिनक उल्लेख कएल गेल अछि ।
जीवकांत 1936-
पूर्ण नाम- जीवकान्त झा,पिता-गुणानन्द झा, माता-महेश्वरी देवी, जन्म-२५.०७.१९३६ अभुआढ़, जिला-सुपौल। नौकरी-विज्ञान शिक्षक (उ.वि.खजौली १९५७-८१), हिन्दी शिक्षक (उ.वि.डेओढ़ एवं उ.वि.पोखराम १९८१-९८)।पहिल रचना-इजोड़िया आ टिटही (कविता, जनवरी १९६५ मिथिला मिहिर)।पहिल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उपन्यास १९६८)।नवीनतम पोथी-खिखिरक बीअरि (२००७ बाल पद्य कथा), अठन्नी खसलइ वनमे (पद्य-कथा संग्रह) आ पंजरि प्रेम प्रकासिया (जीवन-वृत्तक अंश)।पुरस्कार-साहित्य अकादेमी 1998 तकै अछि चिड़ै, पद्य लेल, किरण सम्मान (१९९८), वैदेही सम्मान (१९८५)।प्रकाशित पोथी-
कविता संग्रह:
नाचू हे पृथ्वी (७१), धार नहि होइछ मुक्त (९१), तकैत अछि चिड़ै (९५), खाँड़ो (१९९६), पानिमे जोगने अछि बस्ती (९८), फुनगी नीलाकाशमे (२०००), गाछ झूल-झूल (२००४), छाह सोहाओन (२००६), खिखिरिक बीअरि (२००७)
कथा-संग्रह:
एकसरि ठाढ़ि कदम तर रे (७२), सूर्य गलि रहल अछि (७५), वस्तु (८३), करमी झील (९८)
उपन्यास:
दू कुहेसक बाट(६८), पनिपत(७७), नहि, कतहु नहि (७६), पीयर गुलाब छल (७१), अगिनबान (८१)
हिन्दी अनुवाद- निशान्त की चिड़िया (हिन्दी अनुवाद-तकैत अछि चिड़ै, साहित्य अकादमी, दिल्ली २००३)
देवकांत झा 1936-
डॉ अमरेश पाठक 1936-
हिनक जन्म सीतामढ़ी जिलाक अन्तर्गत सामारि ग्राममे १९३६ मे भेलन्हि । १९५७ मे पटना विश्वविद्यालयसँ मैथिलीक एम. ए. परीक्षामे प्रथम श्रेणीमे प्रथमस्थान पाओल । १९५७ सँ १९६० धरि रामकृष्ण महाविद्यालय, मधुबनीमे व्याख्याता रूपेँ तकरा बाद पटना विश्वविद्यालयमे व्याख्याता रूपमे कार्य करए लगलाह । पटना विश्वविद्यालयमे मैथिली विभागाध्यक्ष रूपेँ । मैथिली उपन्यासक आलोचनात्मक अध्ययन’ शोध प्रबन्धपर हिनका बिहार विश्व-विद्यालय द्वारा डि. लिट्क उपाधि भेटलन्हि । ई शोध प्रबन्ध पुस्तकाकार रूपेँ सेहो प्रकाशित भेल अछि बिहार राष्ट्रभाषा परिषदक विद्यापति ग्रन्थावलीक सम्पादक मण्डलक सदस्य । हिनक अन्य प्रकाशित रचना अछि ’निबन्ध संकलन’ । एकरा छोड़ि विभित्र पत्न-पत्निकामे हिनक कतेको निबन्ध प्रकाशित छन्हि । मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित कथा-संग्रहक इहो एक सम्पादक छथि । ई अधिकतर उच्च स्तरीय आलोचनात्मक निबन्ध लिखैत छथि । २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
बलराम 1936-2008
जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार । विशिष्ट कथाकार । प्रकाशित कृति : दकचल देबाल (कथा-संग्रह)।
मैथिलीपुत्र प्रदीप 1936-
रामदेव झा 1936-
कथाकर, समीक्षक, अनुवादक, ग्रंथ सम्पादक । साहित्य अकादेमीक मूल एवं अनुवाद पुरस्कार प्राप्त कर्त्ता ल. ना. मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगाक मैथिली विभागक पूर्व प्राचार्य । प्रकाशन: पसिझैत पाथर, (अनु.) आदि । १९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
रवीन्द्र नाथ ठाकुर 1936-
जन्म पूर्णिञा जिलाक धमदाहा ग्राममे 1936 ई. मे भेलन्हि । नेने अवस्थासँ गीत गएबामे एवं कविता लिखबामे विशेष रुचि । कोनो मंच पर ठाढ़ भेला पर ई सहजहि श्रीताकेँ आह्लादित करैत छथि । हिनक सात गोट मैथिलीक गीत संग्रह, एक मिनी महाकाव्य, एक प्रयोगधर्मी काव्य, एक उपन्यास, एक नाटक ‘एक राति’ एवं एक हिन्दी नाटक, प्रकाशित भेल छन्हि ।
बिनोद बिहारी वर्मा 1937-2003
मैथिल करण कायस्थक पाँजिक सर्वेक्षण, बलानक बोनिहार ओ पल्लवी तथा अन्य कथा (कथा संग्रह)
वीरेन्द्र मल्लिक 1937-
जन्म- 3 जनबरी 1937 ई. परसौनी, मधुबनीमे।कवि, सम्पादक, समीक्षक । आखर, अगनिपत्रक सम्पादन ।अग्नि-शिखा (कविता संग्रह)।
कीर्तिनारायण मिश्र 1937-
जन्म १७ जुलाई १९३७ ई. केँ ग्राम शोकहारा (बरौनी), जिला बेगूसरायमे भेलन्हि। हुनकर प्रकाशित कृति अछि सीमान्त,महानगर (दीर्घ कविता), हम स्तवन नहि लिखब, ध्वस्त होइत शांति स्तूप (एहि पोथीपर साहित्य अकादमी 1997 पुरस्कार), आदमीकेँ जोहैत (कविता संग्रह)। संस्मरण-अपन एकांतमे, स्मृति यात्रा, पत्रक दर्पणमे। सम्पादन- आखर मासिक पत्रिका, आधुनिक मैथिली साहित्य, '63, राजकमल जीवन आ साहित्य, '68, कथा-संकलन- काल कोठरी। आलोचना- अर्थांतर-2004
गौरीकांत चौधरीकांत 1937-2001
प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' 1938-
ग्राम+पोस्ट- हसनपुर, जिला-समस्तीपुर।मैथिलीमे १.नेपालक मैथिली साहित्यक इतिहास(विराटनगर,१९७२ई.), २.ब्रह्मग्राम(रिपोर्ताज दरभंगा १९७२ ई.), ३.’मैथिली’ त्रैमासिकक सम्पादन (विराटनगर,नेपाल १९७०-७३ई.), ४.मैथिलीक नेनागीत (पटना, १९८८ ई.), ५.नेपालक आधुनिक मैथिली साहित्य (पटना, १९९८ ई.), ६. प्रेमचन्द चयनित कथा, भाग- १ आऽ २ (अनुवाद), ७. वाल्मीकिक देशमे (महनार, २००५ ई.)।२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
महेश्वरनाथ मल्लिक 1938-
कुलानन्द मिश्र 1940-2000
जन्म पकड़ी कोठी, सीतामढ़ी, बिहार। सुविख्यात कवि,, संपादक, समालोचक। प्रकाशित कृति- तावत एतबे, भोरक प्रतीक्षामे (कविता संग्रह), भारतक भाषा सर्वेक्षण, पारो, राजकमल चौधरी की ग्यारह कहानियाँ (अनुवाद)।
बिलट पासवान 'विहंगम' 1940-
जन्म मधुबनी जिलाक एकहत्था ग्राममे १९४० ई. मे भेलन्हि।
फजलुर रहमान हासमी (1940-)
जन्म-पटना जिलाक बराह गाममे। वृत्ति अध्यापक। हिन्दी कविता संग्रह "रश्मि राशि" आ मैथिली कविता संग्रह "निर्मोही" प्रकाशित। १९९६मे अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दूसँ मैथिली अनुवादपर साहित्य अकादमीक मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
प्रभास कुमार चौधरी 1941-1998
गाम- पिंडारुछ, जिला- दरभंगा ।प्रख्यात कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रभासक प्रकाशित कृति : कथा-प्रभास, प्रभासक कथा, नव घर उठय पुरान घर खसय, दिदवल (कथासंग्रह), अभिशप्त, युगपुरुष, हमरा लग रहब, नवारम्भ, राजा पोखरिमे कतेक मछरी (उपन्यास) । विभिन्न महत्वपूर्ण पत्रिकाक सम्पादन । त्रैमासिक कथा गोष्ठी 'सगर राति दीप जरय' केर प्रारम्भ।१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।
साकेतानन्द (1940- )
वरिष्ठ कथाकार, गणनायक (कथा-संग्रह) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: मैथिली कथा साहित्यमे 1962 स’ सक्रिय । गोडेक चालिस_पचास टा कथा, रिपोर्ताज. संस्मरण, यात्रा_विवरण मैथिलीमे प्रकाशित अधिकांश पत्र_पत्रिकामे छपल । पहिल मैथिली कथा “ग्लेसियर” 1962मे ‘मिथिलामिहिर’मे प्रकाशित । हिन्दियोमे दू दर्जन कथा आदि प्रकाशित । सन 99मे छपल पहिल कथा_संग्रह “गणनायक’ के ओही वर्ष ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार। पैघ बान्ध’ स’ अबैबला विपत्तिके रेखांकित करैत, पर्यावरण के कथा वस्तु बना क’ राजकमल प्रकाशन स’ प्रकाशित एवं अत्यंत चर्चित उपन्यास (‘डौकूमेंट्री फिक्शन’) “सर्वस्वांत” ।आकाशवाणीक राष्ट्रीय कार्यक्रममे प्रसारित दू टा उल्लेखनीय वृत्त रूपक_ ‘महानन्दा अभयारण्य’ पर आधारित “जंगल बोलता है” एवं झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रक ज्वलंत डाइनक समस्या पर आधारित वृत्तरूपक “ नैना जोगन “ चर्चित एवं प्रसिद्ध ।
रामावतार यादव, मैथिली भाषिकी, नेपाल 1942-
देश-विदेशक भाषाविज्ञान जर्नलमे पचासो आलेखक द्वारा मैथिलीक विशिष्टताकेँ उजागर केनिहार। मैथिली ध्वनिशास्त्र 1984 ई. मे जर्मनीसँ आ मैथिलीक सन्दर्भ व्याकरण 1996 ई. मे बर्लिन आ न्यूयार्कसँ प्रकाशित। 2000 ई..मे लंदनसँ प्रकाशित भारतीय आर्यभाषा पुस्तक मे संकलित हिनकर मैथिली भाषा संबंधी आलेख विशेष उल्लेखनीय। नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानसँ पासाङ ल्हामु प्रज्ञा-पुरस्कारसँ सम्मानित।
गंगेश गुंजन 1942-
जन्म स्थान- पिलखबाड़, मधुबनी।श्री गंगेश गुंजन मैथिलीक प्रथम चौबटिया नाटक बुधिबधियाक लेखक छथि आऽ हिनका उचितवक्ता (कथा संग्रह) क लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल छन्हि। एकर अतिरिक्त्त मैथिलीमे हम एकटा मिथ्या परिचय, लोक सुनू (कविता संग्रह), अन्हार- इजोत (कथा संग्रह), पहिल लोक (उपन्यास), आइ भोर (नाटक)प्रकाशित। हिन्दीमे मिथिलांचल की लोक कथाएँ, मणिपद्मक नैका- बनिजाराक मैथिलीसँ हिन्दी अनुवाद आऽ शब्द तैयार है (कविता संग्रह)।१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)पुस्तक लेल सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।
प्रेमशंकर सिंह 1942-
ग्राम+पोस्ट- जोगियारा, थाना- जाले, जिला- दरभंगा।मौलिक मैथिली: १.मैथिली नाटक ओ रंगमंच,मैथिली अकादमी, पटना, १९७८ २.मैथिली नाटक परिचय, मैथिली अकादमी, पटना, १९८१ ३.पुरुषार्थ ओ विद्यापति, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर, १९८६ ४.मिथिलाक विभूति जीवन झा, मैथिली अकादमी, पटना, १९८७५.नाट्यान्वाचय, शेखर प्रकाशन, पटना २००२ ६.आधुनिक मैथिली साहित्यमे हास्य-व्यंग्य, मैथिली अकादमी, पटना, २००४ ७.प्रपाणिका, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००५, ८.ईक्षण, ऋचा प्रकाशन भागलपुर २००८ ९.युगसंधिक प्रतिमान, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८ १०.चेतना समिति ओ नाट्यमंच, चेतना समिति, पटना २००८। २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा यात्री-चेतना पुरस्कार।
मार्कण्डेय प्रवासी 1942-
जन्म ग्राम: गरुआर, जिला: समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: अगस्त्यायिनी (महाकाव्य); एतदर्थ (कविता संग्रह), अक्षर चेतना (काव्य संग्रह)। अभियान, हम कालिदास (उपन्यास)। ’अगस्त्यायिनी’ लेल १९८१मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त।
मोहन भारद्वाज 1943-
गाम- नवानी, जिला- मधुबनी । मैथिलीक प्रखर समालोचक।२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2008 सँ सम्मानित।
डॉ. भीमनाथ झा 1945-
जन्म:कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रखर कवि, समालोचक, प्राध्यापक । ’विविधा’निबन्ध पुस्तक लेल सन् १९९२मे सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: त्रिधारा, वीणा, की फुरैए की नहि, नाम तँ थिक ओएह (कविता संकलन), परिचायिका, सीताराम झा, कवि चूड़ामणिक काव्य साधना, विविधा (निबंध, आलोचना),टावर चौकसँ आदि ।
महेन्द्र मलंगिया 1946-
गाम- मलंगिया, जिला- मधुबनी । मैथिलीक सुपरिचित नाटककार, रंग निर्देशक एवं मैलोरंगक संस्थापक अध्यक्ष । लोक साहित्य पर गंभीर शोध आलेख । मैथिलीमे 13टा नाटक, 19टा एकांकी, 14टा नुक्कड़ आ 10टा रेडियो नाटक प्रकाशित आ आकाशवाणी सँ प्रसारित । सीनियर फेलोशिप (भारत सरकार), इंटरनेशनल थिएटर इंस्टिच्यूट (नेपाल), प्रबोध साहित्य सम्मान आदि सँ सम्मानित । संप्रति ज्योतिरीश्वर लिखित मैथिलीक प्रथम पुस्तक वर्णरत्नाकर पर शोध कार्य । श्री महेन्द्र मलगियाक जन्म २० जनबरी १९४६ मे मधुबनी जिलाक मलंगिया गाममे भेलन्हि। मलंगियाजी मैथिली हिन्दी, अंग्रेजी आ नेपाली भाषाक जानकार आ थियेटर शिक्षण, पटकथा लेखन आ तत्सम्बन्धी शोधक फ्रीलान्स शिक्षक छथि।२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;यात्री-चेतना पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2005 सँ सम्मानित।
डॉ रामदयाल राकेश, सर्लाही, नेपाल 1942-
मैथिली मातृभाषा, हिन्दीक प्राध्यापक आ नेपालीक लेखक ई तीनू भाषा ’राकेश’क व्यक्तित्वमे एना ने मिझराएल छैक जे कोनहुसँ हिनका भिन्न नहि कएल जा सकैत अछि । ई विशेषत: नेपालीमे लिखैत छथि, मुदा लेखनक विषय मूलत: मैथिलीए संस्कृति रहैत छनि । ओना मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे सेहो ई अनेक रचना कएने छथि ।नेपालक राजकीय-प्रज्ञा-प्रतिष्ठानक सदस्य ’राकेश’ दिल्ली विश्वविद्यालयसँ पीएचडी आ अमेरिकास्थित इण्डियाना यूनिभर्सिटीसँ पोस्ट डाक्टरल रिसर्च कएने छथि । डा. ’राकेश’क जन्म २५ जुलाइ १९४२ ई. कऽ सर्लाही जिलाक सिसौटियामे भेल छनि । नेपाली, मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे मौलिक, सम्पादित आ अनूदित कऽ करीब दू दर्जन पोथी प्रकाशित , दर्जनभरि देशक भ्रमण सेहो कएने छथि ।
उपेन्द्र दोषी 1943-2001
जन्म स्थान रामपुर-कोरिगामा, दरभंगा । कवि-कथाकार, गीत-गजलकार । प्रकाशित कृति: यंत्रणाक क्षणमे (कविता संग्रह)। हिन्दीमे अनेक पोथी प्रकाशित। ओड़ियासँ मैथिली अनुवाद हेतु मृत्युपरान्त साहित्य अकादेमीसँ पुरस्कृत। २००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
उदयचन्द्र झा "विनोद" 1943-
गाम- रहिका, मधुबनी । जन्म-ग्राम- दुलहा, मधुबनी । प्रकाशित कृति: संक्रान्ति, मौसम अयला पर, एहना स्थितिमे, भरि देह गौरा (कविता-संग्रह), धूरी (सहयोगी कविता संग्रह); जांत (कथा संग्रह) ’माटि पानि’क वरेण्य सम्पादक।२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार।
रेवती रमण लाल, जनकपुर 1943-
मंत्रेश्वर झा 1944-
जन्म ६ जनवरी १९४४ ई.ग्राम-लालगंज, जिला-मधुबनीमे। प्रकाशित कृति: खाधि, अन्चिनहार गाम, बहसल रातिक इजोत (कविता संग्रह); एक बटे दू (कथा संग्रह), ओझा लेखे गाम बताह (ललित निबन्ध)। मैथिली कथा संग्रहक हिन्दी अनुवाद “कुंडली” नामसँ प्रकाशित। दि फूल्स पैराडाइज (अंग्रेजीमे ललित निबन्ध)। २००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी यात्री-चेतना पुरस्कार। २००८- मंत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा) पर साहित्य अकादमी पुरस्कार।
रत्नेश्वर मिश्र 1945-
अनुवादक, निबंधकार । प्रकाशन: तमिल साहित्यक इतिहास,भवभूति (दुनू अनुवाद)।
जगदीश प्रसाद मंडल (1947- )
गाम-बेरमा, तमुरिया, जिला-मधुबनी। एम.ए.।कथाकार (गामक जिनगी-कथा संग्रह), नाटककार(मिथिलाक बेटी-नाटक), उपन्यासकार(मौलाइल गाछक फूल, जीवन संघर्ष, जीवन मरण, उत्थान-पतन, जिनगीक जीत- उपन्यास)। मार्क्सवादक गहन अध्ययन। मुदा सीलिंगसँ बचबाक लेल कम्युनिस्ट आन्दोलनमे गेनिहार लोक सभसँ भेँट भेने मोहभंग। हिनकर कथामे गामक लोकक जिजीविषाक वर्णन आ नव दृष्टिकोण दृष्टिगोचर होइत अछि।
मोहनानन्द झा 1955-
राज
महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह 1858-1898
महाराजाधिराज रमेश्वर सिंह 1860-1929
महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह 1907-1962
सर हरगोविन्द मिश्र, अलीगढ़ आ' कामेश्वर सिंह
बिनोदानन्द झा 1895-1971
ललित नारायण मिश्र 1922-1975
कर्पूरी ठाकुर 1921-1988
चतुरानन मिश्र
गजेन्द्र नारायण चौधरी, पत्रकार 1929-2008
रमाकांत मिश्र
रमानाथ मिश्र "मिहिर"
हीरानन्द झा "शास्त्री"
पद्म नारायण झा "विरंचि" 1941-
जन्म- गाम खोजपुर, जिला-मधुबनीमे । मिथिला मिहिरक प्रशस्त स्तंभकार । 1977 केर जनता आन्दोलनमे अग्रणी भूमिका, पार्टीक मुखपत्र "जनता"क सम्पादक। बादमे लोक दल (ब) मे हेमवतीनन्दन बहुगुणाक राजनीतिक सलाहकार।
दीनानाथ झा, पत्रकार
नरेन्द्र झा, पत्रकार
प्रेमशंकर झा, पत्रकार
सी.पी. झा, पत्रकार
शरदिन्दु चौधरी, पत्रकार
राधाकृष्ण चौधरी इतिहासकार 1921-1985
विजयकान्त मिश्र इतिहासकार 1927-1994
डॉ. विजयकांत मिश्रक जन्म १० अगस्त १९२७ मंगरौनी गाम - जे नव्य न्याय आ तांत्रिक साधनाक जन्म-स्थली अछि- (जिला मधुबनी) मे भेलन्हि। ओ 1948 मे प्राचीन भारतीय इतिहास आ संस्कृति विषयमे एलाहाबाद विश्वविद्यालयसँ सनात्तकोत्तर उपाधि कएलाक बाद कतेक बरख धरि बिहार सरकार आ पटना विश्वद्यालयसँ सम्बद्ध रहलाह आ 1957 ई. सँ भारतीय पुरात्तत्व विभागमे काज कएलन्हि आ ओकर शिशुपालगढ़, कौशाम्बी, वैशाली, हस्तिनापुर, कुम्हरार, पाटलिपुत्र, करियन, सोनपुर, बिलावली, नालन्दा, राजगीर, चन्द्रवल्ली, आ हम्पी खुदाइमे विभिना भूमिकामे भाग लेलन्हि।हिनकर लिखल-सम्पादित पोथी सभमे अछि: 1.वैशाली,1950 2.कुम्हरार एक्सकेवेशंस: 1950-1957 3.पुरातत्व की दृष्टिमे वैशाली 4.नागेश भट्टाज पारिभाषेन्दुशेखर 5.मिथिला आर्ट एण्ड आर्किटेक्चर (सम्पादित) 6.कल्चरल हेरिटेज ऑफ मिथिला 7.श्रृंगार भजनावली- एक अध्ययन 8.क्षेत्र पुरातत्वविज्ञान- 9.पुरातत्व शब्दावली।
द्विजेन्द्र नारायण झा, इतिहासकार
सुरेश्वर झा, राजनीति विज्ञान
२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
कुमार तारानन्द सिंह, संगीतज्ञ
संगीताचार्य रायबहादुर लक्ष्मीनारायण सिंह
रामचतुर मल्लिक ध्रुपद संगीत 1905-1990
रामाश्रय झा 'रामरंग' अभिनव भातखण्डे 1928-2009
जन्म ११ अगस्त १९२८ ई. तदनुसारभाद्र कृष्णपक्ष एकादशी तिथिकेँ मधुबनी जिलान्तर्गत खजुरा नामक गाममे भेलन्हि। अभिनव गीतांजलि, हुनकर उच्चकोटिक शास्त्र रचना अछि।मिथिलावासी श्री रामरंग राग तीरभुक्त्ति, राग वैदेही भैरव, आऽ राग विद्यापति कल्याण केर रचना सेहो कएने छथि आऽ मैथिली भाषामे हिनकर खयाल ’रंजयति इति रागः’ केर अनुरूप अछि।
अभयनारायण मल्लिक
पंडित परमानन्द चौधरी, संगीतज्ञ
मिथिलेश कुमार झा, तबला वादन
हृदयनारायण झा
लक्ष्मीकान्त झा रिजर्व बैंक गवर्नर 1913-1988
एन. एन. झा डिप्लोमेट
कामेन्द्रनाथ झा "अमल" 1938-
भाग्यनारायण झा 1941-
डॉ श्यामानन्द लाल दास
रमाकांत राय "रमा" 1947
महेन्द्र 1944-2009
जन्म मधुबनी जिलाक जमसम गाममे। प्रसिद्ध मैथिली गीतकार आ गायक।
योगेन्द्र प्रसाद यादव, भाषिकी,सिरहा, नेपाल 1946-
1998 ई. मे जर्मनीसँ प्रकाशित इशुज इन मैथिली सिंटैक्स आ टॉपिक्स इन नेपालीज लिग्विस्टिक्स, रीडिंग्स इन मैथिली लंगुएज- लिटरेचर एण्ड कल्चर आ लेक्सीग्राफी इन नेपाल (सम्पादित) प्रकाशित। नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानमे भाषा-विभागक प्राज्ञ रहि कतोक महत्वपूर्ण कार्यक सम्पादन।
सुभाषचन्द्र यादव 1948-
जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल।घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित।
रामलोचन ठाकुर 1949-
श्री रामलचन ठाकुर, जन्म १८ मार्च १९४९ ई.पलिमोहन, मधुबनीमे। वरिष्ठ कवि, रंगकर्मी, सम्पादक, समीक्षक। भाषाई आन्दोलनमे सक्रिय भागीदारी। प्रकाशित कृति- इतिहासहन्ता, माटिपानिक गीत, देशक नाम छल सोन चिड़ैया, अपूर्वा (कविता संग्रह), बेताल कथा (व्यंग्य), मैथिली लोक कथा (लोककथा), प्रतिध्वनि (अनुदित कविता), जा सकै छी, किन्तु किए जाउ(अनुदित कविता), लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता), जादूगर (अनुवाद), स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरणात्मक निबन्ध), आंखि मुनने: आंखि खोलने (निबन्ध)।
गंगा प्रसाद मंडल "अकेला", नेपाल 1944-
पं सुन्दर झा शास्त्री राष्ट्रिय प्रतिभा पुरस्कारसँ सम्मानित। मिथिलांचलक किछु लोक कथा (संकलन आ सम्पादन) आ शिरीषक फूल (अनुवाद) प्रकाशित।
महेन्द्रनारायण निधि, धनुषा, नेपाल
परमेश्वर कापड़ि, धनुषा, नेपाल
जयनारायण झा "जिज्ञासु", नेपाल
सुरेश झा, नेपाल 1920-1995
रोहिणी रमण झा 1950-
डॉ. कमलाकान्त भण्डारी 1952-
विनोद बिहारी लाल 1953-
जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार ।चर्चित कथाकार । सयसँ ऊपर कथा प्रकाशित ।
अरविन्द ठाकुर 1954-
परती टूटि रहल अछि (कविता संग्रह), अन्हारक विरोधमे (कथा संग्रह)
श्याम दरिहरे 1954-
जन्म स्थान बरहा, बेनीपट्टी मधुबनी, बिहार । कवि, कथाकार । प्रकाशित कृति : सरिसोमे भूत (कथा संग्रह) अनूदित कृति : कनिप्रिया (धर्मवीर भारती)
दिनेश कुमार झा
अशोक कुमार ठाकुर
प्रतापनारायण झा, नेपाल
शीतल झा, नेपाल
उग्रनारायण मिश्र "कनक"
देवनारायण यादव, निदेशक मिथिला शोध संस्थान
अमरजी, एस. एन. दास, गोविन्द झा, ब्रजेन्द्र त्रिपाठी
डॉ. शम्भूनाथ चौधरी 1920-2008
इन्द्रकांत झा
पंचानन मिश्र
प्रोफेसर गुरमैता
प्रोफेसर महेन्द्र 1947-
जन्म: भेलाही, सुपौल, बिहार । प्रसिद्ध कवि, कथाकार, आलोचक । वृत्ति: भू.ना. विश्वविद्यालयक स्नातकोत्तर केन्द्र, सहरसामे मैथिली विभागाध्यक्ष। प्रकाशित कृति साहित्य अकादेमीसँ प्राकाशित मोनोग्राफ शैलेन्द्र मोहन झा । सहयोगी संकलन-संकल्प । ’राजकमल जयन्ती प्रसंगक संपादन।
महेन्द्र नारायण सिंह "मगन"
सूर्यकांत झा, जनकपुर
विन्ध्यवासिनी देवी मैथिली लोकगीत 1920-2006
कामेश्वरी देवी 1922-
अणिमा सिंह 1924-
समीक्षिका, अनुवादिका, सम्पादिका । प्रकाशन: मैथिली लोकगीत, वसवेश्वर (अनु.) आदि। लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज, कलकत्तामे पूर्व प्राध्यापिका।
लिली रे 1933-
जन्म:२६ जनवरी, १९३३,पिता:भीमनाथ मिश्र,पति:डॉ. एच.एन्.रे, दुर्गागंज, मैथिलीक विशिष्ट कथाकार एवं उपन्यासकार । मरीचिका उपन्यासपर साहित्य अकादेमीक १९८२ ई. मे पुरस्कार । मैथिलीमे लगभग दू सय कथा आ पाँच टा उपन्यास प्रकाशित । विपुल बाल साहित्यक सृजन। अनेक भारतीय भाषामे कथाक अनुवाद-प्रकाशित। पहिल प्रबोध सम्मान 2004 सँ सम्मानित।
चित्रलेखा देवी 1935-
मोहिनी झा 1937-
डॉ. सावित्री झा
कविता देवी 1942-
प्रमिला झा
शान्ति सुमन 1942-
जन्म 15 सितम्बर 1942, कासिमपुर, सहरसा, बिहार, प्रकाशित कृति, “ओ प्रतीक्षित, परछाई टूटती, सुलगते पसीने, पसीने के रिश्त, मौसम हुआ कबीर, समय चेतावनी नहीं देता, तप रेहे कचनार, भीतर-भीतर आग, मेघ इन्द्रनील (मैथिली गीत संग्रह), शोध प्रबंध: मध्यवर्गीय चेतना और हिन्दी का आधुनिक काव्य, उपन्यास: जल झुका हिरन। सम्मान: साहित्य सेवा सम्मान, कवि रत्न सम्मान, महादेवी वर्मा सम्मान। अध्यापन कार्य।
प्रभावती झा 1945-1999
स्व. इलारानी सिंह 1945-1993
इलारानी सिंह: जन्म 1 जुलाई, 1945, निधन : 13 जून, 1993, पिता : प्रो. प्रबोध नारायण सिंह सम्पादिका : मिथिला दर्शन, विशेष अध्ययन : मैथिली, हिन्दी, बंगला, अंग्रेजी, भाषा विज्ञान एवं लोक साहित्य । प्रकाशित कृति : सलोमा (आस्कर वाइल्डक फ्रेंच नाटकक अनुवाद 1965), प्रेम एक कविता (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विषवृक्ष (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विन्दंती (1972), स्वरचित: मैथिली कविता संग्रह (1973), हिन्दी संग्रह।
उषाकिरण खान 1945-
जन्म:१४ अक्टूबर १९४५,कथा एवं उपन्यास लेखनमे प्रख्यात । मैथिली तथा हिन्दी दूनू भाषाक चर्चित लेखिका ।प्रकाशित कृति:अनुंत्तरित प्रश्न, दूर्वाक्षत, हसीना मंज़िल (उपन्यास), नाटक, उपन्यास ।
नीरजा रेणु 1945-
जन्म: ११ अक्टूबर १९४५,नाम: कामाख्या देवी,उपनाम:नीरजा रेणु,जन्म स्थान:नवटोल,सरिसबपाही ।शिक्षा: बी.ए. (आनर्स) एम.ए., पी-एच.डी.,गृहिणी ।प्रकाशित रचना : ओसकण (कविता मि.मि., १९६०) लेखन पर पारिवारिक, सांस्कृतिक परिवेशक प्रभाव । मैथिली कथा धारा साहित्य अकादेमी नई दिल्लीसँ स्वातन्त्र्योत्तर मैथिली कथाक पन्द्रह टा प्रतिनिधि कथाक सम्पादन ।सृजन धार पियासल कथा संग्रह,आगत क्षण ले कविता संग्रह,ऋतम्भरा कथा संग्रह,प्रतिच्छवि हिन्दी कथा संग्रह,१९६० सँ आइधरि सएसँ अधिक कथा, कविता, शोधनिबन्ध, ललितनिबन्ध,आदि अनेक पत्र-पत्रिका तथा अभिनन्दनग्रन्थमे प्रकाशित ।मैथिलीक अतिरिक्त किछु रचना हिन्दी तथा अंग्रेजीमे सेहो।२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार।
वीणा ठाकुर 1954-
जस्टिस मृदुला मिश्र
वीणा कर्ण
शेफालिका वर्मा 1943-
जन्म:९ अगस्त, १९४३,जन्म स्थान : बंगाली टोला, भागलपुर । शिक्षा:एम., पी-एच.डी. (पटना विश्वविद्यालय),सम्प्रति: ए. एन. कालेज मे हिन्दीक प्राध्यापिका ।प्रकाशित रचना:झहरैत नोर, बिजुकैत ठोर । नारी मनक ग्रन्थिकेँ खोलि:करुण रससँ भरल अधिकतर रचना। प्रकाशित कृति :विप्रलब्धा कविता संग्रह,स्मृति रेखा संस्मरण संग्रह,एकटा आकाश कथा संग्रह,यायावरी यात्रावृत्तान्त, भावाञ्जलि काव्यप्रगीत । ठहरे हुए पल हिन्दीसंग्रह ।२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;यात्री-चेतना पुरस्कार।
नीता झा 1953-
जन्म : २१-०१-१९५३,व्यवसाय:प्राध्यापिका । लेखन पर समाजक परम्परा तथा आधुनिकताक संस्कार सँ होइत विसंगतिक प्रभाव।प्रकाशित कृति : फरिच्छ, कथा संग्रह १९८४, कथानवनीत १९९०,सामाजिक असन्तोष ओ मैथिली साहित्य शोध समीक्षा ।
सुशीला झा 1945-
आशा मिश्र 1950-
जन्म:६-७-१९५० ई.,प्रकाशित कथा मे मैथिकीक संग हिन्दी मे सेहो । सभसँ पैघ विजय मैथिली कथा संग्रह ।
डॉ. सुनीति झा
प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' 1948-
जन्मस्थान:रहिका,माता:श्रीमती वृन्दा देवी,पिता:पं. दीनानाथ झा,शिक्षा:एम.ए., बी.एड.,प्रसिद्ध अभिनेत्री दू सयसँ बेशी नाटकमे भाग लेलनि ।भंगिमा (नाट्यमंच) क भूतपूर्व उपाध्यक्षा, पत्रिकाक सम्पादन, कथालेखन आदिमे कुशल । ’अरिपन’ आदि अनेक संस्था द्वारा पुरस्कृत-सम्मानित।
डॉ. इन्दिरा झा 1957
मेनका मल्लिक 1966-
शारदा सिन्हा मैथिली लोकगीत 1953-
लालपरी देवी
शकुंतला चौधरी
राजेन्द्र प्रसाद सिंह, लिली रे, शशिकान्ता चौधरी, गोविन्द झा, शिवशंकर श्रीनिवास
सीता देवी, मिथिला चित्रकला
सरस्वती चौधरी, जनकपुर
डॉ. अरुणा चौधरी
विभा रानी 1959-
मैथिली के 3 साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखकक 4 गोट किताब "कन्यादान" (हरिमोहन झा), "राजा पोखरे में कितनी मछलियां" (प्रभास कुमार चाऊधरी), "बिल टेलर की डायरी" व "पटाक्षेप" (लिली रे) हिन्दीमे अनूदित छन्हि।2 गोट लोककथाक पुस्तक "मिथिला की लोक कथाएं" व "गोनू झा के किस्से"। मैथिली कथा संग्रह "खोहसँ निकसैत"।
ज्योत्सना चन्द्रम 1963-
जन्मतिथि: १५ दिसम्बर, १९६३,जन्मस्थान : मरूआरा, सिंधिया खुर्द, समस्तीपुर,पिता : श्री मार्कण्डेय प्रवासी,माता: श्रीमती सुशीला झा,अध्यापन ।सुपरिचित कवयित्री, कथाकार । प्रकाशित कृति: बोनसाई (कविता संग्रह), झिझिरकोना (कथासंग्रह)।
वन्दना झा
सुस्मिता पाठक 1962-
जन्म: सुपौल, बिहार । परिचिति कविता संग्रह प्रकाशित । कथावाचक, कथासंग्रह प्रकाशनाधीन । राजनीति शास्त्रमे एम.ए.। संगीत, पेंटिंगमे रुचि । मैथिलीक पोथी पत्रिका पर अनेक रेखाचित्र प्रकाशित । समकालीन जीवन, समय, आ तकर स्पंदनक कवयित्री । अनेक भाषामे रचनाक अनुवाद प्रकाशित।
गोदावरी दत्ता, मिथिला चित्रकला
उर्मिला देवी, मिथिला चित्रकला
यमुना देवी, मिथिला चित्रकला
यशोदा देवी, मिथिला चित्रकला
उषा वर्मा 1948-
रमा झा, सम्पादक मिथिला दर्पण
पन्ना झा
राधिका झा अंग्रेजी लेखिका
स्वयंप्रभा झा 1970-
युवा रचनाकार
रूपा धीरू 1973-
रूपा धीरू- जन्मस्थान-मयनाकडेरी, सप्तरी, श्रीमती पूनम झा आ श्री अरूणकुमार झाक पुत्री।स्थायी पता- अञ्चल- सगरमाथा, जिल्ला- सिरहा। प्रथम प्रकाशित रचना-कोइली कानए, माटिसँ सिनेह (कविता),भगता बेङक देश-भ्रमण (कनक दीक्षितक पुस्तकक धीरेन्द्र प्रेमर्षिसँग मैथिलीमे सहअनुवाद,सङ्गीतसम्बन्धी कृति- राष्ट्रियगान, भोर, नेहक वएन, चेतना, प्रियतम हमर कमौआ (पहिल मैथिली सीडी), प्रेम भेल तरघुस्कीमे, सुरक्षित मातृत्व गीतमाला, सुखक सनेस। सम्पादन-पल्लव, मैथिली साहित्यिक मासिक पत्रिका, सम्पादन-सहयोग,हमर मैथिली पोथी (कक्षा १, २, ३, ४ आ ५ आ कक्षा 9-10 क ऐच्छिक मैथिली विषय पाठ्यपुस्तकक भाषा सम्पादन), पल्लवमिथिला, प्रथम मैथिली इन्टरनेट पत्रिका,वि.सं. २०५९ माघ (साहित्यिक), सम्पादन-सहयोग।
रंजना झा, विद्यापति संगीत गायिका
रश्मि रानी, गायिका, जनकपुर
कामिनी कामायनी
मुन्नी झा युवा रचनाकार
कामिनी 1978- युवा कवियित्री
नेहा वत्स, रंगमंच
नेहा वर्मा, रंगमंच
सविता
बनारसी पंडित,मिथिला चित्रकला, धनुषा, नेपाल
देवकला देवी कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल
मदनकला कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल
महासुन्दरी देवी,मिथिला चित्रकला
निर्जला झा, मिथिला चित्रकला, नेपाल
फुलो साह, मिथिला चित्रकला, महोत्तरी, नेपाल
मुरलीधर, मैथिली फिल्म निर्देशक
राजेन्द्र विमल, जनकपुर, नेपाल 1949-
मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक प्राज्ञ विमल शिक्षाक हकमे विद्यावारिधि (पी.एच.डी.)क उपाधि प्राप्त कएने छथि।कम्मो लिखिकऽ यथेष्ट यश अरजनिहार डा. विमलक लेखनीक प्रशंसा मैथिलीक सङ्गसङ्ग नेपाली आ हिन्दी साहित्यमे सेहो होइत रहलनि अछि। त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गत रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे प्राध्यापन कएनिहार डा. विमलक पूर्ण नाम राजेन्द्र लाभ छियनि। हिनक जन्म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अछि। साहित्यकारक नव पीढ़ीकेँ निरन्तर उत्प्रेरित करबाक कारणे ई डा.धीरेन्द्रक बाद जनकपुर-परिसरक साहित्यिक गुरुक रूपमे स्थापित भऽ गेल छथि।
रमेश रंजन, परवाहा, नेपाल 1966-
परवाहा, नेपालमे जन्म । नेपालीय कथा-जगतक नवीन मुदा सम्मानित नाम । जनपक्षधर कथा-दृष्टि आ मोहक शिल्प । थोड़ लिखलनि, मुदा बेर-बेर चर्चित रहलाह ।
डॉ. सुरेन्द्र लाभ, नेपाल
नरेश कुमार विकल
अशोक दत्त, जनकपुर
जनक किशोर लाल दास
कृष्णचन्द्र झा "मयंक"
लक्ष्मण झा "सागर" 1953-
रघुवीर मोची
शारदानन्द दास "परिमल"
शशिबोध मिश्र "शशि" 1946-
सुरेन्द्रनाथ
अमरनाथ
बच्चा ठाकुर
बुद्धिनाथ मिश्र
कुंज बिहारी, मैथिली गायक
टोक्यो हासेगावा, निदेशक मिथिला म्यूजियम, निगाटा
राजाराम सिंह राठौर, धनुषा
वैद्यनाथ विमल 1955-
डॉ वासुकीनाथ झा 1940-
जितेन्द्र मिश्र "जीवन"
वीरेन्द्र नारायण झा
वीरेन्द्र झा 1956-
बैकुण्ठ झा 1954-
श्री बैकुण्ठ झा,पिता-स्वर्गीय रामचन्द्र झा, जन्म-२४ - ०७ - १९५४ (ग्राम-भरवाड़ा, जिला-दरभंगा),शिक्षा-स्नात्कोत्तर (अर्थशास्त्र),पेशा- शिक्षक। मैथिली, हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा मे लगभग २०० गीत कऽ रचना। गोनू झा पर आधारित नाटक ''हास्यशिरोमणि गोनू झा तथा अन्य कहानी कऽ लेखन। अहि के अलावा हिन्दी मे लगभग १५ उपन्यास तथा कहानी के लेखन।
विद्यानन्द झा 'पञ्जीकार' 1957-
जन्म-09.04.1957,पण्डुआ, ततैल, ककरौड़(मधुबनी), रशाढ़य(पूर्णिया), शिवनगर (अररिया) आ सम्प्रति पूर्णिया। पिता लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया|पितामह-स्व. श्री भिखिया झा। पञ्जीशास्त्रक दस वर्ष धरि 1970 ई.सँ 1979 ई. धरि अध्ययन,22 वर्षक वयससँ पञ्जी-प्रबंधक संवर्द्धन आ संरक्षणमे संलग्न। कृति- पञ्जी शाखा पुस्तकक लिप्यंतरण आ संवर्द्धन।
महेन्द्र नारायण कर्ण
डॉ. विश्वेश्वर मिश्र
रमानन्द झा 'रमण'
जन्म: 02 जनबरी,1949, शिक्षा-एम.ए., पीएच.डी., आजीविका-भारतीय रिजर्व बैंक, पटना (सेवा निवृत्त)।
प्रकाशन: मौलिक- समीक्षा 1. नवीन मैथिली कविता,1982, 2. मैथिली नऽव कविता,1993, 3. मैथिली साहित्य ओ राजनीति, 1994, 4. अखियासल, 1995, 5. बेसाहल,2003, 6. भजारल, 2005., 7. निर्यात कैसे शुरू करें? हिन्दी- रिजर्व बैंक, पटनाक प्रकाशन सम्पादित 8. मैथिलीक आरम्भिक कथा, 1978 समीक्षा, 9. श्यामानन्द रचनावली, 1981, 10. जनार्दनझा‘ जनसीदनकृत निर्दयीसासु (1914) आ पुनर्विवाह (1926), 1984, 11. चेतनाथझाकृत श्रीजगन्नाथपुरी यात्रा (1910), 1994, 12. तेजनाथ झाकृत सुरराजविजय नाटक (1919), 1994, 13. रासबिहारीलाल दासकृत सुमति (1918), 1996, 14. जीबछ मिश्रकृत रामेश्वर (1916), 1996, 15. भेटघॉंट (भेटवार्ता), 1998, 16. रूचय तँ सत्य ने तँ फूसि, 1998, 17. पुण्यानन्द झाकृत मिथिला दर्पण (1925), 2003, 18. यदुवर रचनावली (1888-1934) 2003, 19. श्रीवल्लभ झा (1905-1940) कृत विद्यापति विवरण, 2005, 20. मैथिली उपन्यासमे चित्रित समाज, 2003, 21. पण्डित गोविन्द झाः अर्चा ओ चर्चा, 1997 प्रबन्ध सम्पादक, 22. कवीश्वर चेतना, 2008, चेतना समिति, पटना अनुवाद आदि।
कमल कांत झा 1943-
महाप्रकाश 1946-
जन्म: बनगांव, सहरसा, बिहार । वरिष्ट कवि ओ कथाकार। प्रकाशित कृति: कविता संभवा, संग समय के (कविता संग्रह)।
छत्रानन्द सिंह झा 1946-
अयोध्यानाथ चौधरी, धनुषा, नेपाल 1947-
मूलत: कविक रूपमे परिचित छथि । नेपालक आधुनिक कविताक क्षेत्रमे हिनक नाम उल्लेखनीय अछि । श्री चौधरीक लेखनमे मानवीय संवेदनाक प्रतिबिम्ब पाओल जाइत अछि । कविताक संग कथा आ निबन्धमे सेहो ई कलम चलबैत छथि । फड़िछाएल लेखन हिनक विशेषता थिकनि ।धनुषा जिलाक दुहबी गामक रहनिहार श्री चौधरीक जन्म ६अक्टुबर १९४७कऽ भेल छनि । हिनक क्षितिजक ओहिपार नामसँ एक कविता-सग्ङप्रह प्रकाशित छनि ।
विद्यानाथ झा 'विदित'
सियाराम झा "सरस" 1948-
जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी बिहार । प्रसिद्ध गीतकार, बादमे कथा लेखन प्रारम्भ केलनि । प्रकाशित कृति आंजुर भरि सिंगरहार, शोणिताएल उगैत सूर्यक धम्मक (कथा संग्रह)।
अग्निपुष्प 1948-
जन्म: तरौनी, दरभंगा। मूलनाम : महेन्द्र झा । मैथिलीमे सहस्त्रबाहु कविता संग्रह प्रकाशित । मुक्ति प्रसंगक अनुवाद प्रकाशित । वामपंथी आन्दोलनमे सक्रिय। शिक्षा, सम्वाद आदि पत्रिकाक सम्पादन । वामपंथी विचारधाराक सशक्त कवि।
मधुकांत झा 1949-
डॉ. रामबरन यादव, नेपाल राष्ट्रपति
हरेकृष्ण झा 1950-
जन्म १० जुलाई १९५० ई. गाम- कोइलखमे। अभियंत्रणक अध्ययण छोड़ि मार्क्सवादी राजनीतिमे सक्रिय। अनेक कविता आ आलोचनात्मक निबन्ध प्रकाशित। अनुवाद एवं विकास विषयक शोध कार्यमे रुचि। स्वतंत्र लेखन। प्रकृति एवं जीवनक तादात्म्य बोधक अग्रणी कवि। "एना त’ नहि जे" (कविता संग्रह)।२००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झाकेँ कविता संग्रह “एना त नहि जे”लेल कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान।
एस.एन.सत्यार्थी
महेन्द्र हजारी
उदय नारायण सिंह नचिकेता 1951-
जन्म-१९५१ ई. कलकत्तामे।पहिल काव्य संग्रह ‘कवयो वदन्ति’। १९७१ ‘अमृतस्य पुत्राः’ (कविता संकलन) आऽ ‘नायकक नाम जीवन’ (नाटक)| १९७४ मे ‘एक छल राजा’/ ’नाटकक लेल’ (नाटक)। १९७६-७७ ‘प्रत्यावर्त्तन’/ ’रामलीला’(नाटक)। १९७८मे जनक आऽ अन्य एकांकी। १९८१ ‘अनुत्तरण’(कविता-संकलन)। १९८८ ‘प्रियंवदा’ (नाटिका)। १९९७-‘रवीन्द्रनाथक बाल-साहित्य’(अनुवाद)। १९९८ ‘अनुकृति’- आधुनिक मैथिली कविताक बंगलामे अनुवाद, संगहि बंगलामे दूटा कविता संकलन। १९९९ ‘अश्रु ओ परिहास’। २००२ ‘खाम खेयाली’। २००६मे ‘मध्यमपुरुष एकवचन’(कविता संग्रह। २००८ ई. मे नाटक "नो एण्ट्री: मा प्रविश" सम्पूर्ण रूपेँ "विदेह" ई- पत्रिकामे धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित भए एकटा कीर्तिमान बनेलक।२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”केँ नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश लेल कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान।
अशोक अविचल
रविकांत नीरज
सत्यानन्द पाठक
शिव कुमार नीरव
विद्यानाथ झा
योगीराज
कुणाल 1951-
राम भरोस कापड़ि भ्रमर, धनुषा, नेपाल 1951-
जन्म-बघचौरा, जिला धनुषा (नेपाल)।बन्नकोठरी: औनाइत धुँआ (कविता संग्रह), नहि, आब नहि (दीर्घ कविता), तोरा संगे जएबौ रे कुजबा (कथा संग्रह, मैथिली अकादमी पटना, १९८४), मोमक पघलैत अधर (गीत, गजल संग्रह, १९८३), अप्पन अनचिन्हार (कविता संग्रह, १९९० ई.), रानी चन्द्रावती (नाटक), एकटा आओर बसन्त (नाटक), महिषासुर मुर्दाबाद एवं अन्य नाटक (नाटक संग्रह), अन्ततः (कथा-संग्रह), मैथिली संस्कृति बीच रमाउंदा (सांस्कृतिक निबन्ध सभक संग्रह), बिसरल-बिसरल सन (कविता-संग्रह), जनकपुर लोक चित्र (मिथिला पेंटिङ्गस), लोक नाट्य: जट-जटिन (अनुसन्धान)।
धीरेन्द्रनाथ मिश्र
शिवेन्द्रलाल कर्ण, धनुषा, नेपाल 1951-
लेखकसँ अधिक शिक्षकक रूपमे परिचित आ प्रतिष्ठित छथि । त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गतरा. रा. ब. कैम्पस, जनकपुर-धामक सह-प्राध्यापक श्री कर्णक ऐतिहासिक विषय-वस्तुपर लिखल कतोक लेख मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजी भाषामे प्रकाशित अछि । स्वान्त-सुखाय ई कहियो कालकऽ कविता-कथा सेहो लिखि लैत छथि । हिनक लेखन ज्ञानवर्द्धक, जानकारीमूलक एवं सोझारएल रहैत अछि । देखलापर बुझना जाइत अछि जे ई हिनक गम्भीर अध्ययनक परिणति थिक ।सामाजिक तथा साहित्यिक सङ्घ-संस्थासभमे सेहो सक्रिय प्राध्यापक कर्णक जन्म धनुषा जिलाक देवडीहा गाममे २ जनवरी १९५१ ई. कऽ भेल छनि ।
शैलेन्द्र कुमार झा 1952-
जन्म स्थान हरिपुर, वकशी टोल, मधुबनी बिहार। प्रकाशित कृति: आरोह अवरोह, दशम खुट्टी (कथा संग्रह), इकोनोमिक हिस्ट्री ऑफ मिथिला (अंग्रेजी) ।
शिवशंकर श्रीनिवास 1953-
जन्म स्थान लोहना मधुबनी, बिहार । चर्चित कथाकार ओ आलोचक । गीत ओ कविता सेहो कहियो काल लिखैत छथि । प्रकाशित कृति : त्रिकोण, अदहन, गाछ-पात, गामक लोक (कथा संग्रह)।
अशोक 1953-
जन्म स्थान लोहना, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, कवि ओ सम्पादक । प्रकाशित कृति : चक्रव्यूह (कविता संग्रह) त्रिकोण (सहयोगी कथा संग्रह), ओहि रातिक भोर (कथा-संग्रह), मातवर (कथा संग्रह)।
विभूति आनन्द 1953-
जन्म: शिवनगर, मधुबनी, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार, संपादक । प्रकाशित कृति टूटा उपन्यास टूटा समीक्षा, तीन टा कथ संग्रह, टूटा गीत-गजल संग्रह ओ चारिटा कथा-संग्रह प्रकाशित।२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार ।
डॉ. शशिनाथ झा 1954-
गाम-दीप, जिला- मधुबनी। मैथिली, बांग्ला, नेवारी आ देवनागरी पांडुलिपिक विशेषज्ञ। साहित्य अकादमीक भाषा सम्मान 2007 क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।
मानस बिहारी वर्मा, वैज्ञानिक
राजनन्द झा
२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
आद्यानाथ झा "नवीन"
अमलतास 1956-
डॉ. बैद्यनाथ चौधरी "बैजू"
यंत्रनाथ मिश्र
दिगम्बर ठाकुर
गणेश झा 1950-
स्व. जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज'
कन्दर्पनारायण लाल कर्ण
कीर्तिनाथ झा 1955-
शैलेन्द्र आनन्द 1955-
जन्म स्थान शिवनगर मधुबनी, दू टा समीक्षा, तीन टा कथा संग्रह, दू टा गीत-गजल संग्रह ओ चारि टा कथा-संग्रह प्रकाशित।
मंजर सुलेमान
रमण झा (1957- )
रचना: पश्चात्ताप (कथा-संग्रह)-1995, काव्य-वाटिका (कविता-संग्रह)- 1999, अलंकार-भास्कर (पूर्व-खण्ड) - 2002, अलंकार-भास्कर (अलंकार शास्त्र)- 2003, भिन्न-अभिन्न (समीक्षा)- 2008, संग सम्पादन: मैथिली (मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोध-पत्रिका) - 1996, सम्पादन: मैथिली (मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोध-पत्रिका)- 2007,2008
लल्लन प्रसाद ठाकुर 1951-1995
जन्म ५ फरबरी १९५१ मुंगेर मे श्रीमती सुभद्रा देवी आ श्री हीरानंद ठाकुरक द्वितीय बालक । हिनक ग्राम- समौल,जिला-मधुबनी। सिविल इंजीनियर, टाटा स्टीलमे चाकरी। प्रकाश झाक फ़िल्म "कथा माधोपुर की" मे मुख्य भुमिका। नाटककार आ मंच अभिनेता। हुनक लिखल किछु प्रसिद्ध मैथिली नाटक छन्हि :बडका साहेब,मिस्टर निलो काका, लोंगिया मिरचाई,बकलेल आदि वा अंत।
डॉ. कमलानन्द झा
लोकनाथ मिश्र
डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी
जितेन्द्र जीत
सुकांत सोम 1950-
जन्म दरभंगा जिलाक तरौनी गाममे 1950 ई. मे भेलन्हि । बी. ए. पास कए ई पटनाक दैनिक ‘जनशक्ति’क सहायक सम्पादक छलाह । फेर नव भारत टाइम्स, पटनामे।बाल्यवस्थासँ अपन पैतृक (पिता यात्नीजी) गुण कविता करबाक तथा कथा लिखबामे सेहो यश अर्जन कएलन्हि अछि । वर्त्तमान राजनीति सामाजिक विषयसँ सम्बद्ध व्यंग्यात्मक, सरल भाषामे लिखल नव कविता हिनक विशेषता छन्हि । गामघरक परिवेश तदनुकूल शब्द एवं बिम्ब रचनामे क्रमहि सिद्ध छथि ।
सुशील 1942-
विश्वनाथ झा "विषपायी"
ताराकान्त झा मैथिली भाषिकी (सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद)
२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
योगानन्द झा 1955-
२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार।
पशुपतिनाथ झा, महोत्तरी, नेपाल 1954-
हिनक लेखन विवरणात्मक होइत अछि आ सम्बद्ध विषयमे नीकजकॉ जानकारी दैत अछि । विभिन्न पत्र-पत्रिकामे हिनक लेख-रचना बरोबरि देखबामे अबैत रहैछ ।रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे मैथिली विषयक प्राध्यापनमे संलग्न श्री झा मैथिलीसम्बन्धी सग्ङठनात्मक गतिविधिसँ सेहो जुड़ल छथि । मैथिली भाषाक लोपोन्मुख अवस्थामे रहल अपन लिपि तिरहुतामे विशेषज्ञता रखनिहार श्री झा एकर संरक्षण-सम्बर्द्धनक दिशामे सेहो क्रियाशील छथि ।प्रध्यापक झा मैथिली महाकाव्यमे रस निरूपण विषयपर विद्यावारिधि कएने छथि आ शिक्षा तथा कानून विषयमे सेहो स्नातक छथि । महोत्तरी जिलाक एकरहिया रहनिहार श्री झाक जन्म ४ दिसम्बर १९५४ कऽ भेलछनि ।चेन्नैमे मिथिला रत्नसँ सम्मानित।
अनिलचन्द्र ठाकुर 1954-2009
वृखेश चन्द्र लाल, नेपाल 1955-
जन्म 29 मार्च 1955 ई. केँ भेलन्हि। पिताः स्व. उदितनारायण लाल,माताः श्रीमती भुवनेश्वरी देव। हिनकर छठिहारक नाम विश्वेश्वर छन्हि। मूलतः राजनीतिककर्मी । नेपालमे लोकतन्त्रलेल निरन्तर संघर्षक क्रममे १७ बेर गिरफ्तार । लगभग ८ वर्ष जेल ।सम्प्रति तराई–मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीक राष्ट«ीय उपाध्यक्ष । मैथिलीमे किछु कथा विभिन्न पत्रपत्रिकामे प्रकाशित । आन्दोलन कविता संग्रह आ बी.पीं कोइरालाक प्रसिद्ध लघु उपन्यास मोदिआइनक मैथिली रुपान्तरण तथा नेपालीमे संघीय शासनतिर नामक पुस्तक प्रकाशित । ओ विश्वेश्वर प्रसाद कोइरालाक प्रतिबद्ध राजनीति अनुयायी आ नेपालक प्रजातांत्रिक आन्दोलनक सक्रिय योद्धा छथि। नेपाली राजनीतिपर बरोबरि लिखैत रहैत छथि।
नारायणजी 1956-
जन्म: घोघरडीहा (मधुबनी)। मैथिली भाषा-साहित्यमे एम. ए., पी-एच. डी. कामेश्वर लता संस्कृत विद्यालय, घोघरडीहामे अध्यापन । प्रकाशित कृति: ’घरि घुरि रहल छी’ (काव्य-संग्रह)।
केदार कानन 1959-
जन्म स्थान सुपौल, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार ओ संपादक। प्रकाशित कृति : आकार लैत शब्द (कविता संग्रह), अनूदित कृति राजा राम मोहन राय, प्रायश्चित। सम्पादन संकल्प, भारती मंडन (पत्रिका)।
भक्तीश्वर झा "सारथी"
डॉ. श्री श्रीशंकर झा 1952-
जगदीपनारायण "दीपक"
राजदेव मंडल
शिक्षा- एम.ए.द्वय, एल एल बी.,पता- ग्राम-मषहूरनियाँ, रतनसारा(निर्मली)
प्रकाशित कृति- हिन्दी ,नाम-राजदेव प्रियंकर,उपन्यास- जिन्दगी और नाव,पिजरें के पंछी,दरका हुआ दरपन,अप्रकाशित कृति-मैथिली- कविता संग्रह
परमानन्द प्रभाकर
शिवप्रसाद यादव
हीरेन्द्र कुमार झा 1958-
मानेश्वर मनुज 1958-
जन्म गम्हरिया (मानपौर, मधुबनी)मे, 1978सँ 1992 धरि नौसेनामे विभिन्न जहाजपर कार्यरत, फेर यात्री रेलमे। सम्बन्ध (कथा संग्रह) प्रकाशित।
नबोनाथ झा
महेन्द्र नारायण राम 1958-
सम्पादन-“नव ज्योति” पत्रिका, “लोकशक्ति” सामाजिक मुख-पत्रक। लोकवृत्त ताहूमे लोकगाथाक अध्येता।
तारानन्द वियोगी 1966-
महिषी, सहरसामे जन्म।पहिल पोथी अपन युद्धक साक्ष्य (गजल संग्रह) १९९१ मे प्रकाशित। अन्य पुस्तक हस्तक्षेप (कविता-संग्रह), अतिक्रमण (कथा-संग्रह), शिलालेख(लघुकथा संग्रह), कर्मधारय।राजकमल चौधरीक कथाकृति एकटा चंपाकली एकटा विषधर संकलन-सपादन।
भालचन्द्र झा
मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आऽ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आऽ हिन्दी थिएटरमे निदेशक।बीछल बेरायल मराठी एकांकीक मैथिली अनुवाद।
कुमार शैलेन्द्र
रमेश 1961-
जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: समांग, समानांतर (कथा संग्रह), नागफेनी (गजल संग्रह), संगोर, समवेत स्वरक आगू, कोसी धारक सभ्यता, पाथर पर दूभि (काव्य संग्रह), प्रतिक्रिया (आलोचनात्मक निबंध)।
मेघन प्रसाद 1961-
प्रदीप बिहारी 1963-
जन्म स्थान कन्हौली मल्लिक टोल, खजौली, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, उपन्यासकार ओ रंगकर्मी । प्रकाशित कृति: गुमकी ओ बिहाड़ि, विसूवियस (उपन्यास), औतीह कमला जयतीह कमला, खण्ड-खण्ड जिनगी, सरोकार (कथा संग्रह)। २००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार ।
चन्देश्वर पर्वा, नेपाल
रोशन जनकपुरी, नेपाल
डॉ. अरविन्द अक्कू 1957-
फूलचन्द्र झा "प्रवीण" 1961-
गाम तुमौल दरभंगा, आयल नवल प्रभात, पांगल गाछक छाहरि, हमरा मोनक खजन चिड़ैया, बसंतक बजनिञा (कविता संग्रह), भूत होइत भविष्य़ (कथा संग्रह)।
देवशंकर नवीन 1962-
ओ ना मा सी (गद्य-पद्य मिश्रित हिन्दी-मैथिलीक प्रारम्भिक सर्जना), चानन-काजर (मैथिली कविता संग्रह), आधुनिक (मैथिली) साहित्यक परिदृश्य, गीतिकाव्य के रूप में विद्यापति पदावली, राजकमल चौधरी का रचनाकर्म (आलोचना), जमाना बदल गया, सोना बाबू का यार, पहचान (हिन्दी कहानी), अभिधा (हिन्दी कविता-संग्रह), हाथी चलए बजार (कथा-संग्रह)।
विद्यानन्द झा 1965-
बुद्धपूर्णिमा, १९६५कें कैथिनियाँ, झंझारपुर मुधुबनीमे जन्म। पराती जकाँ (कविता संग्रह) प्रकाशित । मूलतः कवि, थोड़ कथा लिखलनि, जे अपन मार्मिक अभिव्यक्तिक कारण बेस चर्चित भेल । विडम्बनापूर्ण परिस्थितिक पाछू जिम्मेवार समाजार्थिक कारणक खोज हिनकर मूल सृजन प्रेरणा थिक ।
किशोर कुमार झा "सिक्किन"
लाला पंडित, मिथिला मूर्तिकला
राजेन्द्र पंडित, मिथिला मूर्तिकला
बटोही झा, मिथिला चित्रकला
उदितनारायण फिल्म गायक
राजकमल झा अंग्रेजी लेखक पत्रकार
प्रकाश झा फिल्म निर्देशक
प्रकाश झा, मैथिली रंगमंच
सुपरिचित रंगकर्मी। राष्ट्रीय स्तरक सांस्कृतिक संस्था सभक संग कार्यक अनुभव। शोध आलेख (लोकनाट्य एवं रंगमंच) आ कथा लेखन। राष्ट्रीय जूनियर फेलोशिप, भारत सरकार प्राप्त। राजधानी दिल्लीमे मैथिली लोक रंग महोत्सवक शुरुआत। मैथिली लोककला आ संस्कृतिक प्रलेखन आ विश्व फलकपर विस्तारक लेल प्रतिबद्ध। अपन कर्मठ संगीक संग मैलोरंगक संस्थापक, निदेशक। मैलोरंग पत्रिकाक सम्पादन। संप्रति राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्लीक रंगमंचीय शोध पत्रिका रंग-प्रसंगक सहयोगी संपादकक रूपमे कार्यरत।
डॉ. धनाकर ठाकुर
ताराकांत झा
डॉ. नारायण कुमार झा
रामेश्वर प्रेम
नागेश्वर लाल कर्ण, तबला वादक
केष्कर ठाकुर
काश्यप कमल, रंगमंच
मुकेश कुमार झा, रंगमंच
मनीष झा फिल्म निर्देशक
संजय झा फिल्म निर्माता
कीर्ति आजाद क्रिकेट
श्रीराम झा शतरंज
अभिषेक झा गोल्फ
कुमार मनीष अरविन्द 1964-
मधुकर भारद्वाज
बदरी नारायण बर्मा
राजेन्द्र किशोर, नेपाल
धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सिरहा, नेपाल 1967-
वि.सं.२०२४ साल भादब १८ गते सिरहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाममे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि।कान्तिपुरसँ हेल्लो मिथिला कार्यक्रम प्रस्तुत कर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक धीरेन्द्रक अबाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। “पल्लव” मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ “समाज” मैथिली सामाजिक पत्रिकाक सम्पादन।
अमलेन्दु शेखर पाठक
श्याम सुन्दर शशि, नेपाल
श्याम सुन्दर शशि, जनकपुरधाम, नेपाल। पेशा-पत्रकारिता। शिक्षा: त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ,एम.ए. मैथिली, प्रथम श्रेणीमे प्रथम स्थान। मैथिलीक प्रायः सभ विधामे रचनारत। बहुत रास रचना विभिन्न पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित। हिन्दी, नेपाली आऽ अंग्रेजी भाषामे सेहो रचनारत आऽ बहुतरास रचना प्रकाशित। सम्प्रति- कान्तिपुर प्रवासक अरब ब्यूरोमे कार्यरत।
हिमांशु चौधरी, नेपाल
पिता : स्वर्गीय कामेश्र्वर चौधरी,माताः श्रीमती चन्द्रावती चौधरी,जन्मः वि स २०२०/६/५ लहान, सिरहा,शिक्षाः स्नातकोत्तर(नेपाली),पेशाः पत्रकारिता (सम्प्रति : राष्ट्रिय समाचार समिति ),कृति : की भार सांठू ? (मैथिली कविता संग्रह ),विगत दू दशकसं नेपाली आ मैथिली लेखन तथा अभियानमे निरन्तर क्रियाशील आ विभिन्न संघ संस्थासं आबद्ध ।
सत्यनारायण मेहता
कृष्ण मोहन झा 1968-
जन्म मधेपुरा जिलाक जीतपुर गाममे। “विजयदेव नारायण साही की काव्यानुभूति की बनावट” विषयपर जे.एन.यू. सँ एम.फिल आ ओतहिसँ “निर्मल वर्मा के कथा साहित्य में प्रेम की परिकल्पना” विषयपर पी.एच.डी.। हिन्दीमे एकटा कविता सँग्रह “समय को चीरकर” आ मैथिलीमे “एकटा हेरायल दुनिया” प्रकाशित। हिन्दी कविता लेल “कन्हैया स्मृति सम्मान”(1998) आ “हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार”(2003)। असम विश्वविद्यालय, सिल्चरक हिन्दी विभागमे अध्यापन।
सुनील कुमार मल्लिक, गायक, जनकपुर, नेपाल 1968-
मैथिलीक गायक-सग्ङीतकारक रूपमे प्रसिद्ध छथि । मैथिली भाषाक गीतसभमे मौलिक तथा सार्थक सग्ङीतक सृजनमे हिनक सक्रियता प्रशंसनीय छनि । सुनीलक गायन तथा सग्ङीतमे कैसेट एलबमसभ सेहो बाहर भेल अछि ।लेखनदिस हिनक सक्रियता परिमाणात्मक रूपमे कम रहितहुँ गुणात्मक दृष्टिएँ हृदयस्पर्शी मानल जाइत अछि ।पेशासँ विज्ञान-शिक्षक छथि ।
भुवनेश्वर पाथेय
राजेन्द्र झा धनुषा
अखिल आनन्द
अशोक कुमार मेहता
संजीव तमन्ना
धर्मेन्द्र विह्वल, सिरहा, नेपाल 1967-
रस्ता तकैत जिनगी, एक सृष्टि एक कविता, एक समयक बात, धुअनाएल आकृति सभ (मैथिली कविता संग्रह), भ्रमरका उत्कृष्ट नाटकहरु, गोनूझाका कथाहरु (मैथिलीसँ नेपाली अनुवाद), मैथिलीक कक्षा 1 सँ 5 आ बाल-साहित्य संदर्भक तीनटा पोथीक सह-लेखक। पत्रकारिताक मूल सिद्धांत (मैथिली, प्रेसमे), दलित रिपोर्टिंग मैनुअल (नेपाली, प्रेसमे)।
रघुनाथ मुखिया
भवप्रीतानन्द
धीरेन्द्र कुमार झा
गिरिजानन्दन सिंह
प्रेमचन्द्र पंकज
सच्चिदानन्द सच्चू
अरुण कुमार कर्ण 1961-
निमिष झा, नेपाल
रमण कुमार सिंह 1969-
अनलकांत (गौरीनाथ) 1969-
आशुतोष झा
नीरज कर्ण, धनुषा, नेपाल 1970-
समाजशास्त्रक छात्र आ गणित तथा विज्ञानक शिक्षक छथि, मुदा मैथिली साहित्य आ संगठनक क्षेत्रमे सेहो निरन्तर सक्रिय छथि । भाषा, व्याकरण आदिक मेंही पक्षसभपर सेहो ई पूर्ण अधिकार रखैत छथि । जन्म धनुषा जिलाक कुर्था गाममे भेल छनि । विभिन्न पत्रपत्रिकामे हिनक कथा, कविता, लेख-रचनासभ मैथिली, नेपाली आ अग्ङरेजी भाषामे प्रकाशित होइत रहैत छनि । अनुवादक क्षेत्रमे सेहो हिनक नीक अधिकार छनि ।
उपेन्द्र भगत नागवंशी, नेपाल
दमन कुमार झा 1969-
एम.ए.पी.एच.डी. (मैथिली), प्रकाशन: मैथिली बाल साहित्य(शोध-ग्रंथ)-2002 आ नेबोक चाह (कथा संग्रह) 2009. सम्प्रति जे.एन.क~ओलेज मधुबनीमे व्याख्याता।
श्रीधरम 1974-
शंकरदेव झा
अंशुमन पाण्डेय
पंकज पराशर 1976-
मोहनपुर, बलवाहाट चपराँव कोठी, सहरसा। प्रारम्भिक शिक्षासँ स्नातक धरि गाम आऽ सहरसामे। फेर पटना विश्वविद्यालयसँ एम.ए. हिन्दीमे प्रथम श्रेणीमे प्रथम स्थान। जे.एन.यू.,दिल्लीसँ एम.फिल.। जामिया मिलिया इस्लामियासँ टी.वी.पत्रकारितामे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। मैथिली आऽ हिन्दीक प्रतिष्ठित पत्रिका सभमे कविता, समीक्षा आऽ आलोचनात्मक निबंध प्रकाशित। अंग्रेजीसँ हिन्दीमे क्लॉद लेवी स्ट्रॉस, एबहार्ड फिशर, हकु शाह आ ब्रूस चैटविन आदिक शोध निबन्धक अनुवाद।
आनन्द कुमार
कमल मोहन चुन्नू
कुमार राहुल
अंशुमान सत्यकेतु
शुभेन्दु शेखर
वनदेवीपुत्र भवनाथ, नाटककार
अमरेन्द्र यादव, नेपाल
मिथिलेश कुमार झा (1970-)
पिता- श्री विश्वनाथ झा, जन्म-12-01-1970 केँ मनपौर(मातृक) मे पैतृक-ग्राम-जगति, पो*-बेनीपट्टी,जिला-मधुबनी, मिथिला, पिन*- 847223 शिक्षा :प्राथमिक धरि- गामहिक विद्यालय मे। मध्य विद्यालय धरि- मध्य विद्यालय, बेनीपट्टी सँ। माध्यमिक धरि- श्री लीलाधर उच्च विद्यालय,बेनीपट्टीसँ इतिहास-प्रतिष्ठाक संग स्नातक-कालिदास विद्यापति साइंस काँलेज उच्चैठ सँ, पत्रकारिता मे डिप्लोमा-पत्रकारिता महाविद्यालय(पत्राचार माध्यम) दिल्ली सँ, कम्प्युटर मे डी.टी.पी ओ बेसिक ज्ञान। रचना: हिन्दी ओ मैथिली मे कविता, गजल, बाल कविता, बाल कथा,साहित्यिक ओ गैर-साहित्यिक निबंध, ललित निबंध, साक्षात्कार, रिपोर्ताज, फीचर आदि।
अनमोल झा (1970- )
गाम नरुआर, जिला मधुबनी। एक दर्जनसँ बेशी कथा, लगभग सए लघुकथा, तीन दर्जनसँ बेशी कविता, किछु गीत, बाल गीत आ रिपोर्ताज आदि विभिन्न पत्रिका, स्मारिका आ विभिन्न संग्रह यथा- “कथा-दिशा”-महाविशेषांक, “श्वेतपत्र”, आ “एक्कैसम शताब्दीक घोषणापत्र” (दुनू संग्रह कथागोष्ठीमे पठित कथाक संग्रह), “प्रभात”-अंक २ (विराटनगरसँ प्रकाशित कथा विशेषांक) आदिमे संग्रहित।
मनोज मुक्ति, नेपाल
सत्येन्द्र कुमार झा, कथाकार
अजित कुमार आजाद
सुधीर कुमार झा 1970-
अशोक सिंह तोमर
चन्द्रेश
राम सेवक सिंह
आशीष अनचिन्हार
अभय कुमार यादव, मैथिली रंगमंच
डॉ. शम्भु कुमार सिंह
जन्म: 18 अप्रील 1965 सहरसा जिलाक महिषी प्रखंडक लहुआर गाममे। आरंभिक शिक्षा, गामहिसँ, आइ.ए., बी.ए. (मैथिली सम्मान) एम.ए. मैथिली (स्वर्णपदक प्राप्त) तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। BET [बिहार पात्रता परीक्षा (NET क समतुल्य) व्याख्याता हेतु उत्तीर्ण, 1995] “मैथिली नाटकक सामाजिक विवर्त्तन” विषय पर पी-एच.डी. वर्ष 2008, तिलका माँ. भा.विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। मैथिलीक कतोक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे कविता, कथा, निबंध आदि समय-समय पर प्रकाशित। वर्तमानमे शैक्षिक सलाहकार (मैथिली) राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर-6 मे कार्यरत।
अनिल कुमार चौधरी 1962-
मायानाथ झा 1946-
भुवन भूषण
चन्द्र किशोर लाल, पत्रकार, नेपाल
हरिकांत लाल दास, नेपाल
शशिनाथ ठाकुर, नेपाल
अशोक कुमार (1981- )
साधारण काष्ठकारक परिवारमे समस्तीपुर जिलाक मोखियारपुर सखलानी गाममे जनमल अशोक कुमार कहियो स्कूल नहि गेलाह। दिनमे पचास टाका कमेनिहार दिल्लीक एकटा गोल्फ क्लबक एहि कैडीकेँ 1994 ई. मे चोरिक मिथ्यारोप लगा कए गोल्फ कोर्ससँ बाहर कए देल गेल। वैह कैडी दस सालक भीतर भारतक नम्बर एक गोल्फर बनि गेल।
श्री उमेश मंडल
रत्नेश्वर प्रसाद सिंह
अनिल पतंग 1951-
ओमप्रकाश भारती 1968-
संजय कुन्दन 1969-
महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइटhttp://www.shruti-publication.com/ पर।
महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे।
मैथिली आ मिथिलासँ संबंधित किछु मुख्य साइट:- आन लिंकक विषयमे सूचना ggajendra@videha.co.in किंवाggajendra@yahoo.co.in केँ ई मेलसँ पठाबी।
http://www.videha.co.in/ ("विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका)
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कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर
गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७
Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding:
Language:Maithili
६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india)
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विदेह: सदेह : १ : तिरहुता : देवनागरी
"विदेह" क २५म अंक १ जनवरी २००९, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिकाक पहिल २५ अंकक चुनल रचना सम्मिलित।
विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/
विदेह: वर्ष:2, मास:13, अंक:25 (विदेह:सदेह:१)
सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर; सहायक-सम्पादक: श्रीमती रश्मि रेखा सिन्हा
Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com
"मिथिला दर्शन"
मैथिली द्विमासिक पत्रिका
अपन सब्सक्रिप्शन (भा.रु.288/- दू साल माने 12 अंक लेल
भारतमे आ ONE YEAR-(6 issues)-in Nepal INR 900/-, OVERSEAS- $25; TWO
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दर्शन"केँ देय डी.डी. द्वारा Mithila Darshan, A - 132, Lake Gardens,
Kolkata - 700 045 पतापर पठाऊ। डी.डी.क संग पत्र पठाऊ जाहिमे अपन पूर्ण
पता, टेलीफोन नं. आ ई-मेल संकेत अवश्य लिखू। प्रधान सम्पादक- नचिकेता।
कार्यकारी सम्पादक- रामलोचन ठाकुर। प्रतिष्ठाता
सम्पादक- प्रोफेसर प्रबोध नारायण सिंह आ डॉ. अणिमा सिंह। Coming
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कब लौटेगा नदी के उस पार गया आदमी : भोलानाथ कुशवाहा प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु.225.00
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कुर्आन कविताएँ : मनोज कुमार श्रीवास्तव प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 150.00
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उपन्यास
मोनालीसा हँस रही थी : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.100.00
कहानी-संग्रह
रेल की बात : हरिमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2007मूल्य रु. 70.00
छछिया भर छाछ : महेश कटारे प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 100.00
कोहरे में कंदील : अवधेश प्रीत प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 100.00
शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00
आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 90.00
कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 90.00
मैथिली पोथी
विकास ओ अर्थतंत्र (विचार) : नरेन्द्र झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 250.00
संग समय के (कविता-संग्रह) : महाप्रकाश प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00
एक टा हेरायल दुनिया (कविता-संग्रह) : कृष्णमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 60.00
दकचल देबाल (कथा-संग्रह) : बलराम प्रकाशन वर्ष2000 मूल्य रु. 40.00
सम्बन्ध (कथा-संग्रह) : मानेश्वर मनुज प्रकाशन वर्ष2007 मूल्य रु. 165.00 शीघ्र प्रकाश्य
आलोचना
इतिहास : संयोग और सार्थकता : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर
हिंदी कहानी : रचना और परिस्थिति : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर
साधारण की प्रतिज्ञा : अंधेरे से साक्षात्कार : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर
बादल सरकार : जीवन और रंगमंच : अशोक भौमिक
बालकृष्ण भट्ïट और आधुनिक हिंदी आलोचना का आरंभ : अभिषेक रौशन
सामाजिक चिंतन
किसान और किसानी : अनिल चमडिय़ा
शिक्षक की डायरी : योगेन्द्र
उपन्यास
माइक्रोस्कोप : राजेन्द्र कुमार कनौजिया
पृथ्वीपुत्र : ललित अनुवाद : महाप्रकाश
मोड़ पर : धूमकेतु अनुवाद : स्वर्णा
मोलारूज़ : पियैर ला मूर अनुवाद : सुनीता जैन
कहानी-संग्रह
धूँधली यादें और सिसकते ज़ख्म : निसार अहमद
जगधर की प्रेम कथा : हरिओम
अंतिका, मैथिली त्रैमासिक, सम्पादक- अनलकांत
अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4,शालीमारगार्डन,एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023,
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१.बनैत-बिगड़ैत (कथा-गल्प संग्रह)-सुभाषचन्द्र यादवमूल्य: भा.रु.१००/-
२.कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलनखण्ड-१ प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना
खण्ड-२ उपन्यास-(सहस्रबाढ़नि)
खण्ड-३ पद्य-संग्रह-(सहस्त्राब्दीक चौपड़पर)
खण्ड-४ कथा-गल्प संग्रह (गल्प गुच्छ)
खण्ड-५ नाटक-(संकर्षण)
खण्ड-६ महाकाव्य- (१. त्वञ्चाहञ्च आ २. असञ्जाति मन )
खण्ड-७ बालमंडली किशोर-जगत)- गजेन्द्र ठाकुर मूल्य भा.रु.१००/-(सामान्य) आ $४० विदेश आ पुस्तकालय हेतु।
३.विलम्बित कइक युगमे निबद्ध (पद्य-संग्रह)- पंकज पराशरमूल्य भा.रु.१००/-
४. नो एण्ट्री: मा प्रविश- डॉ. उदय नारायण सिंह “नचिकेता”प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (मूल्य भा.रु.१२५/- US$ डॉलर ४०) आ पेपरबैक (भा.रु. ७५/- US$ २५/-)
५/६. विदेह:सदेह:१: देवनागरी आ मिथिला़क्षर संस्करण:Tirhuta : 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1: तिरहुता : मूल्य भा.रु.200/-
Devanagari 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1: : देवनागरी : मूल्य भा. रु. 100/-
७. गामक जिनगी (कथा संग्रह)- जगदीश प्रसाद मंडल): मूल्य भा.रु. ५०/- (सामान्य), $२०/- पुस्तकालय आ विदेश हेतु)
८/९/१०.a.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश; b.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश आ c.जीनोम मैपिंग ४५० ए.डी. सँ २००९ ए.डी.- मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध-सम्पादन-लेखन-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा
P.S. Maithili-English Dictionary Vol.I & II ; English-Maithili Dictionary Vol.I (Price Rs.500/-per volume and $160 for overseas buyers) and Genome Mapping 450AD-2009 AD- Mithilak Panji Prabandh (Price Rs.5000/- and $1600 for overseas buyers. TIRHUTA MANUSCRIPT IMAGE DVD AVAILABLE SEPARATELY FOR RS.1000/-US$320) have currently been made available for sale.
११.सहस्रबाढ़नि (मैथिलीक पहिल ब्रेल पुस्तक)-ISBN:978-93-80538-00-6 Price Rs.100/-(for individual buyers) US$40 (Library/ Institution- Indian & abroad)
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I.गजेन्द्र ठाकुरक शीघ्र प्रकाश्य रचना सभ:-
१.कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सात खण्डक बाद गजेन्द्र ठाकुरक
कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक-२
खण्ड-८
(प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना-२) क संग
२.सहस्रबाढ़नि क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर उपन्यास
स॒हस्र॑ शीर्षा॒
३.सहस्राब्दीक चौपड़पर क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर पद्य-संग्रह
स॑हस्रजित्
४.गल्प गुच्छ क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर कथा-गल्प संग्रह
शब्दशास्त्रम्
५.संकर्षण क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर नाटक
उल्कामुख
६. त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन क बाद गजेन्द्र ठाकुरक तेसर गीत-प्रबन्ध
नाराशं॒सी
७. नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक तीनटा नाटक
जलोदीप
८.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक पद्य संग्रह
बाङक बङौरा
९.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक खिस्सा-पिहानी संग्रह
अक्षरमुष्टिका
II.जगदीश प्रसाद मंडल-
कथा-संग्रह- गामक जिनगी
नाटक- मिथिलाक बेटी
उपन्यास- मौलाइल गाछक फूल, जीवन संघर्ष, जीवन मरण, उत्थान-पतन, जिनगीक जीत
III.मिथिलाक संस्कार/ विधि-व्यवहार गीत आ गीतनाद -संकलन उमेश मंडल- आइ धरि प्रकाशित मिथिलाक संस्कार/ विधि-व्यवहार आ गीत नाद मिथिलाक नहि वरन मैथिल ब्राह्मणक आ कर्ण कायस्थक संस्कार/ विधि-व्यवहार आ गीत नाद छल। पहिल बेर जनमानसक मिथिला लोक गीत प्रस्तुत भय रहल अछि।
IV.पंचदेवोपासना-भूमि मिथिला- मौन
V.मैथिली भाषा-साहित्य (२०म शताब्दी)- प्रेमशंकर सिंह
VI.गुंजन जीक राधा (गद्य-पद्य-ब्रजबुली मिश्रित)- गंगेश गुंजन
VII.विभारानीक दू टा नाटक: "भाग रौ" आ "बलचन्दा"
VIII.हम पुछैत छी (पद्य-संग्रह)- विनीत उत्पल
IX.मिथिलाक जन साहित्य- अनुवादिका श्रीमती रेवती मिश्र (Maithili Translation of Late Jayakanta Mishra’s Introduction to Folk Literature of Mithila Vol.I & II)
X.मिथिलाक इतिहास – स्वर्गीय प्रोफेसर राधाकृष्ण चौधरी
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२. संदेश-
[ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ]
१.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत।
२.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी।
३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत।
४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन।
५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी।
६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।
७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू।
८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।
९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना।
१०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।
१२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।
१३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।
१४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी।
१५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी।
१६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिंट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाई। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे। ..सुभाष चन्द्र यादवक कथापर अहाँक आमुखक पहिल दस पंक्तिमे आ आगाँ हिन्दी, उर्दू तथा अंग्रेजी शब्द अछि (बेबाक, आद्योपान्त, फोकलोर..)..लोक नहि कहत जे चालनि दुशलनि बाढ़निकेँ जिनका अपना बहत्तरि टा भूर!..( स्पष्टीकरण- दास जी द्वारा उद्घृत अंश यादवजीक कथा संग्रह बनैत-बिगड़ैतक आमुख १ जे कैलास कुमार मिश्रजी द्वारा लिखल गेल अछि-हमरा द्वारा नहि- केँ संबोधित करैत अछि। मैथिलीमे उपरझपकी पढ़ि लिखबाक जे परम्परा रहल अछि तकर ई एकटा उदाहरण अछि। कैलासजीक सम्पूर्ण आमुख हम पढ़ने छी आ ओ अपन विषयक विशेषज्ञ छथि आ हुनका प्रति कएल अपशब्दक प्रयोगक हम भर्त्सना करैत छी-गजेन्द्र ठाकुर)...अहाँक मंतव्य क्यो चित्रगुप्त सभा खोलि मणिपद्मकेँ बेचि रहल छथि तँ क्यो मैथिल (ब्राह्मण) सभा खोलि सुमनजीक व्यापारमे लागल छथि-मणिपद्म आ सुमनजीक आरिमे अपन धंधा चमका रहल छथि आ मणिपद्म आ सुमनजीकेँ अपमानित कए रहल छथि।..तखन लोक तँ कहबे करत जे अपन घेघ नहि सुझैत छन्हि, लोकक टेटर आ से बिना देखनहि, अधलाह लागैत छनि..(स्पष्टीकरण-क्यो नाटक लिखथि आ ओहि नाटकक खलनायकसँ क्यो अपनाकेँ चिन्हित कए नाटककारकेँ गारि पढ़थि तँ तकरा की कहब। जे क्यो मराठीमे चितपावन ब्राह्मण समितिक पत्रिकामे-जकर भाषा अवश्ये मराठी रहत- ई लिखए जे ओ एहि पत्रिकाक माध्यमसँ मराठी भाषाक सेवा कए रहल छथि तँ ओ अपनाकेँ मराठीभाषी पाठक मध्य अपनाकेँ हास्यास्पदे बना लेत- कारण सभकेँ बुझल छैक जे ओ मुखपत्र एकटा वर्गक सेवाक लेल अछि। ओना मैथिलीमे एहि तरहक मैथिली सेवक लोकनिक अभाव नहि ओ लोकनि २१म शताब्दीमे रहितो एहि तरहक विचारधारासँ ग्रस्त छथि आ उनटे दोसराक मादेँ अपशब्दक प्रयोग करैत छथि-सम्पादक)...ओना अहाँ तँ अपनहुँ बड़ पैघ धंधा कऽ रहल छी। मात्र सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक।( स्पष्टीकरण- श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ- विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे http://www.videha.co.in/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि आ किएक रखने छथि वा आगाँसँ दाम नहि राखथु- ई सभटा परामर्श अहाँ प्रकाशककेँ पत्र/ ई-पत्र द्वारा पठा सकै छियन्हि।- गजेन्द्र ठाकुर)... अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग।
१७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल।
१८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई।
१९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत।
२०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ।
२१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ।
२२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य।
२३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई।
२४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि।
२५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक हमर उपन्यास स्त्रीधनक विरोधक हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए। ओना अहाँक मंत्रपुत्र हिन्दीसँ मैथिलीमे अनूदित भेल, जे जीवकांत जी अपन आलेखमे कहै छथि। एहि अनूदित मंत्रपुत्रकेँ साहित्य अकादमी पुरस्कार देल गेल, सेहो अनुवाद पुरस्कार नहि मूल पुरस्कार, जे साहित्य अकादमीक निअमक विरुद्ध रहए। ओना मैथिली लेल ई एकमात्र उदाहरण नहि अछि। एकर अहाँ कोन रूपमे विरोध करब?)
२६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक।
२७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत।
२८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी।
२९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना।
३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी।
३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि।
३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई।
३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई।
३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई।
३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक।
३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ।
३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम।
३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना।
३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ।
४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल।
४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई।
४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य।
४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना।
४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि।
४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक।
४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत।
४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि।
४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रशंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत।
४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना।
५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना।
५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना।
५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल।
५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना।
५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल।
५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना।
५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल।
५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई।
५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि।
५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी।
६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि।
६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब।
६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी।
६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही।
६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय।
६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना।
६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय।
६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह।
६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना ।
६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ।
७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक)
७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि।
७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि।
७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि।
७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना।
कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर
गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७
Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding:
Language:Maithili
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(कार्यालय प्रयोग लेल)
विदेह:सदेह:१ (तिरहुता/ देवनागरी)क अपार सफलताक बाद विदेह:सदेह:२ आ आगाँक अंक लेल वार्षिक/ द्विवार्षिक/ त्रिवार्षिक/ पंचवार्षिक/ आजीवन सद्स्यता अभियान।
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विदेह
मैथिली साहित्य आन्दोलन
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(c) 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ' संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु
विदेह
मानुषीमिह संस्कृताम् मैथिली साहित्य आन्दोलन
सिद्धिरस्तु
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 2. नाटक श्री उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’नो एंट्री : मा प्रविश
श्री उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ जन्म-1951 ई. कलकत्तामे।1966 मे 15 वर्षक उम्रमे पहिल काव्य संग्रह ‘कवयो वदन्ति’ | 1971 ‘अमृतस्य पुत्राः’(कविता संकलन) आ’ ‘नायकक नाम जीवन’(नाटक)| 1974 मे ‘एक छल राजा’/’नाटकक लेल’(नाटक)। 1976-77 ‘प्रत्यावर्त्तन’/ ’रामलीला’(नाटक)। 1978मे जनक आ’ अन्य एकांकी। 1981 ‘अनुत्तरण’(कविता-संकलन)। 1988 ‘प्रियंवदा’ (नाटिका)। 1997-‘रवीन्द्रनाथक बाल-साहित्य’(अनुवाद)। 1998 ‘अनुकृति’- आधुनिक मैथिली कविताक बंगलामे अनुवाद, संगहि बंगलामे दूटा कविता संकलन। 1999 ‘अश्रु ओ परिहास’। 2002 ‘खाम खेयाली’। 2006मे ‘मध्यमपुरुष एकवचन’(कविता संग्रह। भाषा-विज्ञानक क्षेत्रमे दसटा पोथी आ’ दू सयसँ बेशी शोध-पत्र प्रकाशित। 14 टा पी.एह.डी. आ’ 29 टा एम.फिल. शोध-कर्मक दिशा निर्देश। बड़ौदा, सूरत, दिल्ली आ’ हैदराबाद वि.वि.मे अध्यापन। संप्रति निदेशक, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर।
नो एंट्री : मा प्रविश
(चारि-अंकीय मैथिली नाटक)
नाटककार
उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’
निदेशक, केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर
(मैथिली साहित्यक सुप्रसिद्ध प्रयोगधर्मी नाटककार श्री नचिकेताजीक टटका नाटक, जे विगत 25 वर्षक मौनभंगक पश्चात् पाठकक सम्मुख प्रस्तुत भ’ रहल अछि।)
पहिल अंक जारी....विदेहक एहि आठम अंक 15 अप्रैल 2008 सँ|
नो एंट्री : मा प्रविश
(चारि-अंकीय मैथिली नाटक)
पात्र–परिचय
पर्दा उठितहि –
ढोल–पिपही, बाजा–गाजा बजौनिहार–सब
दूटा चोर, जाहि मे सँ एक गोटे पॉकिट–मार आ
एकटा उचक्का
दू गोट भद्र व्यक्ति
प्रेमी
प्रेमिका
बाजार सँ घुरैत प्रौढ़ व्यक्ति
बीमा कंपनीक एजेंट
रद्दी किनै–बेचैबला
भिख-मंगनी
रमणी-मोहन
नंदी–भृंगी
कैकटा मृत सैनिक
बाद मे
नेता आ नेताक एक-दूटा चमचा/अनुयायी
अभिनेता
वाम-पंथी युवा
उच्च–वंशीय महिला
अंत मे
यम
चित्रगुप्त
प्रथम कल्लोल
[एकटा बड़का–टा दरबज्जा मंचक बीच मे देखल जाइछ। दरबज्जाक दुनू दिसि एकटा अदृश्य मुदा सक्कत देवार छैक, जे बुझि लेबाक अछि– कखनहु अभिनेता लोकनिक अभिनय–कुशलता सँ तथा कतेको वार्तालाप सँ से स्पष्ट भ’ जाइछ। मंच परक प्रकाश–व्यवस्था सँ ई पता नहि चलैत अछि जे दिन थिक अथवा राति, आलीक कनेक मद्धिम, सुर–संगत होइत सेहो कने मरियल सन।
एकटा कतार मे दस–बारह गोटे ठाढ़ छथि–जाहि मे कैकटा चोर–उचक्का, एक-दू गोटे भद्र व्यक्तित मुदा ई स्पष्ट जे हुनका लोकनिक निधन भ’ चुकल छन्हि। एकटा प्रेमी–युगल जे विष-पान क’ कए आत्म-हत्या कैल अछि, मुदा एत’ स्वर्गक (चाही त’ नरकक सेहो कहि सकै छी) द्वार लग आबि कए कने विह्वल भ’ गेल छथि जे आब की कैल जाइक। एकटा प्रौढ व्यक्तित जे बजारक झोरा ल’ कए आबि गेल छथि–बुझाइछ कोनो पथ–दुर्घटनाक शिकार भेल छथि बाजार सँ घुरैत काल। एकटा बीमा कंपनीक एजेंट सेहो छथि, किछु परेशानी छनि सेहो स्पष्ट। एकटा रद्दीबला जे रद्दी कागजक खरीद–बिक्री करैत छल, एकटा भिखमंगनी–एकटा पुतलाकेँ अपन बौआ (भरिसक ई कहै चाहैत छल जे वैह छल ओकर मुइल बालक अथवा तकर प्रतिरूप) जकाँ काँख तर नेने, एक गोट अत्यंत बूढ़ व्यक्ति सेहो, जनिक रमणी–प्रीति एखनहु कम नहि भेल छनि, हुनका हमसब रमणी–मोहने कहबनि।
सब गोटे कतार मे त’ छथि, मुदा धीरजक अभाव स्पष्ट भ’ जाइछ। क्यो-क्यो अनकाकेँ लाँघि आगाँ जैबाक प्रयास करैत छथि, त’ क्यो से देखि कए शोर करय लागैत छथि। मात्र तीन–चारिटा मृत सैनिक–जे कि सब सँ पाछाँ ठाढ़ छथि, हुनका सबमे ने कोनो विकृति लखा दैछ आ ने कोनो हड़बड़ी।
बजार-बला वृद्ध : हे – हे – हे देखै जाउ... देखि रहलछी कि नहि सबटा तमाशा... कोना–कोना क’ रहल छइ ई सब !
की ? त’ कनीटा त’ आगाँ बढ़ि जाई !
[एकटा चोर आ एकटा उचक्का केँ देखा कए बाजि रहल छथि, जे सब ओना त’ चारिम तथा पाँचम स्थान पर ढ़ाढ छैक, मुदा कतेको काल सँ अथक प्रयास क’ रहल अछि जे कोना दुनू भद्र व्यक्ति आ प्रेमी–प्रेमिका युगलकेँ पार क’ कए कतारक आगाँ पहुँचि जाई!]
बीमा एजेंट : [नहि बूझि पबैत छथि जे ओ वृद्ध व्यक्ति हुनके सँ
किछु कहि रहल छथि कि आन ककरहु सँ। बजार-
बला वृद्ध सँ आगाँ छल रद्दी बेचैबला आ तकरहु
सँ आगाँ छलाह बीमा बाबू।] हमरा किछु कहलहुँ ?
बाजारी : अहाँ ओम्हर देखब त’ बूझि जायब हम की कहि
रहल छी आ ककरा दय...! [अकस्मात् अत्यंत
क्रोधक आवेश मे आबि ] हे रौ! की बुझै छहीं...
क्यो नहि देखि रहल छौ ? [बीमा बाबू केँ बजारक झोरा थम्हबैत -] हे ई धरू त’! हम देखै छी।
[कहैत शोर करैत आगाँ बढ़ि कए एकटा चोर आ उचक्का केँ कॉलर पकड़ि कए घसीटैत पुनः पाछाँ चारिम-पाँचम स्थान पर ल’ अबैत छथि, ओसब वाद–प्रतिवाद कर’ लगैत अछि -]
चोर : हमर कॉलर कियै धरै छी ?
उचक्का : हे बूढ़ौ ! हमर कमीज, फाड़ि देबैं की ?
बाजारी : कमीजे कियैक ? तोहर आँखि सेहो देबौ हम फोड़ि !
की बूझै छेँ ? क्यो किछु कहै बाला नहि छौ एत’?
उचक्का : के छै हमरा टोकै–बला एत’? देखा त’ दिय’ ?
चोर : आहि रे बा ! हम की कैल जे हमर टीक धैने छी?
दोसर चोर : (जे कि असल मे पॉकिट–मार छल) हे हे,
टीक छोड़ि दी, नंगड़ी पकड़ि लियह सरबा क !
चोर : (गोस्सा सँ) तोँ चुप रह ! बदमाश नहितन !
पॉकिटमार : (अकड़ि कए) कियै ? हम कियै नहि बाजब ?
उचक्का : (वृद्ध व्यक्तिक हाथ सँ अपना केँ छोड़बैत) ओय खुदरा !
बेसी बड़बड़ैलें त’... (हाथ सँ इशारा करैत अछि गरा
काटि देबाक)
पॉकिटमार : त’ की करबें ?
उचक्का : (भयंकर मुद्रामे आगाँ बढ़ैत) त’ देब धड़ सँ गरा केँ
अलगाय... रामपुरी देखने छह ? रामपुरी ? (कहैत एकटा
चाकू बहार करैत अछि।)
चोर : हे, की क’ रहल छी... भाइजी, छोड़ि दियौक ने !
बच्चा छै... कखनहु–कखनहु जोश मे आबि जाइ छै !
भद्र व्यक्ति 1 : (पंक्तिक आगाँ सँ) हँ, हँ... छोड़ि ने देल जाय !
उचक्का : [भयंकर मुद्रा आ नाटकीयता केँ बरकरार रखैत
पंक्तिक आगाँ दिसि जा कए... अपन रामपुरी
चाकू केँ दोसर हाथ मे उस्तरा जकाँ घसैत ] छोड़ि
दियह की मजा चखा देल जाय ? [एहन भाव–
भंगिमा देखि दुनू भद्र व्यक्ति डरै छथि–प्रेमी–
युगल अपनहिमे मगन छथि; हुनका दुनू केँ
दुनियाक आर किछु सँ कोनो लेन-देन नहि...] की ?
[घुरि कए पॉकिट–मार दिसि अबैत... तावत् ई
सब देखि बाजारी वृद्धक होश उड़ि जाइत छनि...
ओ चोरक टीक/कॉलर जे कही... छोड़ि दैत छथि
घबड़ा कए ] की रौ ? दियौ भोंकि ? आ कि…?
चोर : उचकू–भाइजी ! बच्चा छै... अपने बिरादरीक
बुझू...! [आँखि सँ इशारा करै छथि।]
उचक्का : [अट्टहास् करैत] ऐं ? अपने बिरादरीक थिकै ?
[हँसब बंद कए- पूछैत] की रौ ? कोन काज करै
छेँ?
[पॉकिट-मार डरेँ किछु बाजि नहि पबैत अछि–
मात्र दाहिना हाथक दूटा आङुर केँ कैंची जकाँ चला
कए देखबैत छैक।]
उचक्का : पॉकिट-मार थिकेँ रौ ? [पुनः हँस’ लागै छथि-छूरी केँ
तह लगबैत’]
चोर : कहलहुँ नहि भाईजी ? ने ई हमरा सन माँजल चोर
बनि सकल आ ने कहियो सपनहु मे सोचि सकल
जे अहाँ सन गुंडा आ बदमाशो बनि सकत !
उचक्का : बदमाश ? ककरा कहलेँ बदमाश ? आँय !
पॉकिट-मार : हमरा, हुजूर ! ओकर बात जाय दियह ! गेल छल
गिरहथक घर मे सेंध देब’... जे आइ ने जानि कत्ते टका-पैसा-गहना भेटत ! त’ पहिले बेरि मे
जागि गेल गिरहथ, आ तकर चारि–चारिटा
जवान-जहान बालक आ सँगहि आठ–आठटा
कुकुर... तेहन ने हल्ला मचा देलक जे पकड़ि कए
पीटैत–पीटैत एत’ पठा देलक ! [हँसैत... उचक्का
सेहो हँसि दैत अछि] आब बुझु ! ई केहन चोर थिक !
(मुँह दूसैत) हमरा कहैत छथि !
[कतारक आनो-आन लोक आ अंततः सब गोटे
हँसय लागैत छथि]
भद्र-व्यक्तित 1: आँय यौ,चोर थिकौं ? लागै त’ नहि छी चोर
जकाँ...
चोर : किएक ? चोर देख’ मे केहन होइत छैक ?
पॉकिट-मार : हमरा जकाँ...! (कहैत, हँसैत अछि, आरो एक-दू
गोटे हँसि दैत छथि।) चललाह भिखारी बौआ बन’... ?
की ? त’ हम तस्कर-राज छी ! [कतहु सँ एकटा
टूल आनि ताहि पर ठाढ़ होइत... मंचक आन
दिसिसँ भाषणक भंगिमा मे] सुनू, सुनू, सुनू, भाई–भगिनी! सुनू सब गोटे! श्रीमान्, श्रील 108
श्री श्री बुद्धि-शंकर महाराज तस्कर सम्राट आबि
रहल छथि! सावधान, होशियार! [एतबा कहैत टूल
पर सँ उतरि अपन हाथ-मुँहक मूकाभिनयसँ
एहन भंगिमा करैत छथि जेना कि भोंपू बजा
रहल होथि... पाछाँ सँ भोंपू – पिपहीक शब्द
कनिये काल सुनल जाइछ, जाबत ओ ‘मार्च’ करैत
चोर लग अबैत अछि...]
चोर : [कनेक लजबैत] नहि तोरा हम साथ लितहुँ ओहि
रातिकेँ, आ ने हमर पिटाइ देखबाक मौके तोरा
भैटतिहौक! [कहैत आँखि मे एक-दूइ बुन्न पानि
आबि जाइत छैक।]
पॉकिट-मार : आ-हा-हा! एहि मे लजबैक आ मोन दुखैक कोन
गप्प?
[थम्हैत, लग आबि कए] देखह! आइ ने त’
काल्हि-चोरि त’ पकड़ले जाइछ। आ एकबेर जँ भंडा-
फोड़ भ’ जाइत अछि त’ बज्जर त’ माथ पर खसबे
करत ! सैह भेल... एहि मे दुख कोन बातक ?
उचक्का : (हँसैत) हँ, दुखी कियै होइ छहक?
बाजारी : [एतबा काल आश्चर्य भए सबटा सुनि रहल छलाह।
आब रहल नहि गेलनि – अगुआ कए बाजय
लगलाह]
हे भगवान! हमर भाग मे छल स्वस्थहि शरीर मे
बिना कोनो रोग-शोक भेनहि स्वर्ग मे जायब... तैँ
हम एत’ ऐलहुँ, आ स्वर्गक द्वार पर ठ़ाढ छी
क्यू मे...! मुदा ई सब चोर–उचक्का जँ
स्वर्गे मे जायत, तखन केहन हैत ओ स्वर्ग
रहबाक लेल ?
पॉकिट-मार : से कियै बाबा ? अहाँ की बूझै छी, स्वर्ग त’ सभक
लेल होइत अछि ! एहि मे ककरहु बपौती त’ नञि।
बाजारी : [बीमा एजेंट केँ] आब बूझू ! आब....
चोर सिखाबय गुण केर महिमा,
पॉकिट–मारो करै बयान!
मार उचक्का झाड़ि लेलक अछि,
पाट–कपाट त’ जय सियाराम !
[चोर-उचक्का-पॉकिट-मार ताली दैत अछि, सुनि कए चौंकैत भिख-मंगनी आ प्रेमी-युगल बिनु किछु बुझनहि ताली बजाब’ लागैत अछि।]
चोर : ई त’ नीक फकरा बनि गेल यौ!
पॉकिट-मार : एम्हर तस्कर-राज त’ ओम्हर कवि-राज!
बाजारी : (खौंझैत’) कियै ? कोन गुण छह तोहर, जकर
बखान करै अयलह एत’?
पॉकिट-मार : (इंगित करैत आ हँसैत) हाथक सफाई... अपन
जेब मे त’ देखू , किछुओ बाकी अछि वा नञि...
बाजारी : [बाजारी तुरंत अपन जेब टटोलैत छथि – त’ हाथ
पॉकिटक भूर देने बाहर आबि जाइत छनि। आश्चर्य
चकित भ’ कए मुँह सँ मात्र विस्मयक आभास होइत छनि।] जा !
[बीमा बाबूकेँ आब रहल नञि गेलनि। ओ ठहक्का पाड़ि
कए हँस’ लगलाह, हुनकर देखा–देखी कैक गोटे बाजारी दिसि हाथ सँ इशारा करैत हँसि रहल छलाह।]
चोर : [हाथ उठा कए सबकेँ थम्हबाक इशारा करैत] हँसि त’
रहल छी खूब !
उचक्का : ई बात त’ स्पष्ट जे मनोरंजनो खूब भेल हैतनि।
पॉकिट-मार : मुदा अपन-अपन पॉकिट मे त’ हाथ ध’ कए देखू !
[भिखमंगनी आ प्रेमी-युगल केँ छोड़ि सब क्यो पॉकिट टेब’ लागैत’ छथि आ बैगक भीतर ताकि-झाँकि कए देख’ लागैत छथि त’ पता चलैत छनि जे सभक पाइ, आ नहि त’ बटुआ गायब भ’ गेल छनि। हुनका सबकेँ ई बात बुझिते देरी चोर, उचक्का, पॉकिट-मार आ भिख-मंगनी हँस’ लागैत छथि। बाकी सब गोटे हतबुद्धि भए टुकुर- टुकुर ताकिते रहि जाइत छथि]
भिखमंगनी : नंगटाक कोन डर चोर की उचक्का ?
जेम्हरहि तकै छी लागै अछि धक्का !
धक्का खा कए नाचब त’ नाचू ने !
खेल खेल हारि कए बाँचब त’ बाँचू ने !
[चोर-उचक्का–पॉकिट-मार, समवेत स्वर मे जेना धुन गाबि रहल होथि]
नंगटाक कोन डर चोर कि उचक्का !
आँखिएक सामने पलटल छक्का !
भिख-मंगनी : खेल–खेल हारि कए सबटा फक्का !
समवेत-स्वर : नंगटाक कोन डर चोर कि उचक्का ?
[कहैत चारू गोटे गोल-गोल घुर’ लागै छथि आ नाचि नाचि कए कहै छथि।]
सब गोटे : आब जायब, तब जायब, कत’ ओ कक्का ?
पॉकिट मे हाथ दी त’ सब किछु लक्खा !
नंगटाक कोन डर चोर कि उचक्का !
बीमा-बाबू : (चीत्कार करैत) हे थम्ह’ ! बंद कर’ ई तमाशा...
चोर : (जेना बीमा-बाबूक चारू दिसि सपना मे भासि रहल
होथि एहन भंगिमा मे) तमाशा नञि... हताशा....!
उचक्का : (ताहिना चलैत) हताशा नञि... निराशा !
पॉकिट-मार : [पॉकिट सँ छह-सातटा बटुआ बाहर क’ कए देखा –
देखा कए] ने हताशा आ ने निराशा, मात्र तमाशा...
ल’ लैह बाबू छह आना, हरेक बटुआ छह आना!
[कहैत एक–एकटा बटुआ बॉल जकाँ तकर मालिकक
दिसि फेंकैत छथि आ हुनका लोकनि मे तकरा
सबटाकेँ बटौर’ लेल हड़बड़ी मचि जाइत छनि। एहि
मौकाक फायदा उठबैत चोर–उचक्का-पॉकिटमार
आ भिख-मंगनी कतारक सब सँ आगाँ जा’ कए ठाढ
भ’ जाइत छथि।]
रद्दी-बला : [जकर कोनो नुकसान नहि भेल छल-ओ मात्र मस्ती क’ रहल छल आ घटनासँ भरपूर आनन्द ल’ रहल छल।] हे बाबू– भैया लोकनि ! एकर आनन्द नञि अछि कोनो जे “भूलल-भटकल कहुना क’ कए घुरि आयल अछि हमर बटुआ”। [कहैत दू डेग बढा’ कए नाचिओ लैत’ छथि।] ई जे बुझै छी जे अहाँक धन अहीं केँ घुरि आयल... से सबटा फूसि थिक !
बीमा-बाबू : (आश्चर्य होइत) आँय ? से की ?
बाजारी : (गरा सँ गरा मिला कए) सबटा फूसि ?
भद्र-व्यक्ति 1 : की कहै छी ?
भद्र-व्यक्ति 2 : माने बटुआ त’ भेटल, मुदा भीतर ढन–ढन !
रद्दी-बला : से हम कत’ कहलहुँ ? बटुओ अहींक आ पाइयो
छैहे! मुदा एखन ने बटुआक कोनो काज रहत’ आ
ने पाइयेक!
बीमा-बाबू : माने ?
रद्दी-बला : माने नञि बुझलियैक ? औ बाबू ! आयल छी सब
गोटे यमालय... ठाढ़ छी बन्द दरबज्जाक सामने...
कतार सँ... एक–दोसरा सँ जूझि रहल छी जे के
पहिल ठाम मे रहत आ के रहत तकर बाद...?
तखन ई पाइ आ बटुआक कोन काज ?
भद्र-व्यक्ति1 : सत्ये त’! भीतर गेलहुँ तखन त’ ई पाइ कोनो काज
मे नहि लागत !
बाजारी : आँय ?
भद्र-व्यक्ति2 : नहि बुझिलियैक ? दोसर देस मे जाइ छी त’ थोड़े
चलैत छैक अपन रुपैया ? (आन लोग सँ
सहमतिक अपेक्षा मे-) छै कि नञि ?
रमणी-मोहन : (जेना दीर्घ मौनता के तोड़ैत पहिल बेरि किछु ढंग
केर बात बाजि रहल छथि एहन भंगिमा मे... एहि
सँ पहिने ओ कखनहु प्रेमी-युगलक लग जाय
प्रेमिका केँ पियासल नजरि द’ रहल छलाह त’
कखनहु भिख-मंगनिये लग आबि आँखि सँ तकर
शरीर केँ जेना पीबि रहल छलाह...) अपन प्रेमिका
जखन अनकर बियाहल पत्नी बनि जाइत छथि
तखन तकरा सँ कोन लाभ ? (कहैत दीर्घ-श्वास
त्याग करैत छथि।)
बीमा-बाबू : (डाँटैत) हे...अहाँ चुप्प रहू! क’ रहल छी बात
रुपैयाक, आ ई कहै छथि रूप दय...!
रमणी-मोहन : हाय! हम त’ कहै छलहुँ रूपा दय! (भिख-मंगनी
रमणी-मोहन लग सटल चलि आबै छैक।)
भिख-मंगनी : हाय! के थिकी रूपा ?
रमणी-मोहन : “कानि-कानि प्रवक्ष्यामि रूपक्यानि रमणी च... !
बाजारी : माने ?
रमणी-मोहन : एकर अर्थ अनेक गंभीर होइत छैक... अहाँ सन
बाजारी नहि बूझत!
भिख-मंगनी : [लास्य करैत] हमरा बुझाउ ने!
[तावत भिख-मंगनीक भंगिमा देखि कने-कने बिहुँसैत’ पॉकिट–मार लग आबि जाइत अछि।]
भिख-मंगनी : [कपट क्रोधेँ] हँसै कियै छें ? हे... (कोरा सँ पुतलाकेँ
पॉकिट-मारकेँ थम्हबैत) हे पकड़ू त’ एकरा... (कहैत
रमणी-मोहन लग जा कए) औ मोहन जी! अहाँ की
ने कहलहुँ, एखनहु धरि भीतर मे एकटा छटपटी
मचल यै’! रमणी-धमनी कोन बात’ कहलहुँ ?
रमणी-मोहन : धूर मूर्ख! हम त’ करै छलहुँ शकुन्तलाक गप्प,
मन्दोदरीक व्यथा... तोँ की बुझबेँ ?
भिख-मंगनी : सबटा व्यथा केर गप बुझै छी हम... भीख मांगि-
मांगि खाइ छी, तकर माने ई थोड़े, जे ने हमर शरीर
अछि आ ने कोनो व्यथा... ?
रमणी-मोहन : धुत् तोरी ! अपन व्यथा–तथा छोड़, आ भीतर की
छैक, ताहि दय सोच ! (कहैत बंद दरबज्जा दिसि
देखबैत छथि-)
पॉकिट-मार : (अवाक् भ’ कए दरबज्जा दिसि देखैत) भीतर ? की
छइ भीतरमे... ?
रमणी-मोहन : (नृत्यक भंगिमा करैत ताल ठोकि- ठोकि कए) भीतर?
“धा–धिन–धिन्ना... भरल तमन्ना !
तेरे-केरे-धिन-ता... आब नञि चिन्ता !”
भिख-मंगनी : (आश्चर्य भए) माने ? की छैक ई ?
रमणी-मोहन : (गर्व सँ) ‘की’ नञि... ‘की’ नञि... ‘के’ बोल !
बोल- भीतर ‘के’ छथि ? के, के छथि?
पॉकिट-मार : के, के छथि?
रमणी-मोहन : एक बेरि अहि द्वारकेँ पार कयलेँ त’ भीतर भेटती
एक सँ एक सुर–नारी,उर्वशी–मेनका–रम्भा... (बाजैत- बाजैत जेना मुँहमे पानि आबि जाइत छनि--)
भिख-मंगनी : ईः! रंभा...मेनका... ! (मुँह दूसैत) मुँह-झरकी
सब... बज्जर खसौ सबटा पर!
रमणी-मोहन : (हँसैत) कोना खसतैक बज्जर ? बज्र त’ छनि देवराज
इन्द्र लग ! आ अप्सरा त’ सबटा छथि हुनकहि
नृत्यांगना।
[भिख-मंगनीक प्रतिक्रिया देखि कैक गोटे हँस’ लगैत छथि]
पॉकिट-मार : हे....एकटा बात हम कहि दैत छी – ई नहि बूझू जे
दरबज्जा खोलितहि आनंदे आनंद !
बाजारी : तखन ?
बीमा-बाबू : अहू ठाम छै अशांति, तोड़-फोड़, बाढ़ि आ सूखार ?
आ कि चारू दिसि छइ हरियर, अकाससँ झहरैत
खुशी केर लहर आ माटिसँ उगलैत सोना ?
पॉकिट-मार : किएक ? जँ अशांति, तोड़-फोड़ होइत त’ नीक... की
बूझै छी, एत्तहु अहाँ जीवन–बीमा चलाब’ चाहै छी की ?
चोर : (एतबा काल उचक्का सँ फुसुर-फुसुर क’ रहल
छल आ ओत्तहि, दरबज्जा लग ठाढ़ छल– एहि
बात पर हँसैत आगाँ आबि जाइत अछि) स्वर्गमे
जीवन-बीमा ? वाह ! ई त’ बड्ड नीक गप्प !
पॉकिट-मार : देवराज इंद्रक बज्र.. बोलू कतेक बोली लगबै छी?
उचक्का : पन्द्रह करोड़!
चोर : सोलह!
पॉकिट-मार : साढे-बाईस!
बीमा-बाबू : पच्चीस करोड़!
रमणी-मोहन : हे हौ! तोँ सब बताह भेलह ? स्वर्गक राजा केर बज्र,
तकर बीमा हेतैक एक सय करोड़ सँ कम मे ? [कतहु सँ एकटा स्टूलक जोगाड़ क’ कए ताहि पर चट दय ठाढ़ भ’ कए-]
पॉकिट-मार : बोलू, बोलू भाई-सब ! सौ करोड़ !
बीमा-बाबू : सौ करोड़ एक !
चोर : सौ करोड़ दू –
रमणी-मोहन : एक सौ दस !
भिख-मंगनी : सवा सौ करोड़ !
चोर : डेढ़सौ करोड़...
भिख-मंगनी : पचपन –
चोर : साठि –
भिख-मंगनी : एकसठि –
[दूनूक आँखि–मुँह पर ‘टेनशन’ क छाप स्पष्ट भ’ जाइत छैक। ]
चोर : (खौंझैत) एक सौ नब्बै...
[एतेक बड़का बोली पर भिख-मंगनी चुप भ’ जाइत अछि।]
पॉकिट-मार : त’ भाई-सब ! आब अंतिम घड़ी आबि गेल अछि –
190 एक, 190 दू, 190...
[ठहक्का पाड़ि कए हँस’ लगलाह बाजारी, दूनू भद्र व्यक्ति आ रद्दी-बला-]
पॉकिट-मार : की भेल ?
चोर : हँस्सीक मतलब ?
बाजारी : (हँसैते कहैत छथि) हौ बाबू ! एहन मजेदार मोल-
नीलामी हम कतहु नञि देखने छी !
भद्र-व्यक्ति 1 : एकटा चोर...
भद्र-व्यक्ति 2 : त’ दोसर भिख-मंगनी...
बाजारी : आ चलबै बला पॉकिट-मार...
[कहैत तीनू गोटे हँस’ लागै छथि]
बीमा-बाबू : त’ एहि मे कोन अचरज?
भद्र-व्यक्ति 1 : आ कोन चीजक बीमाक मोल लागि रहल अछि–
त’ बज्र केर !
भद्र-व्यक्ति 2 : बज्जर खसौ एहन नीलामी पर !
बाजारी : (गीत गाब’ लागै’ छथि)
चोर सिखाबय बीमा–महिमा,
पॉकिट-मारो करै बयान !
मार उचक्का झाड़ि लेलक अछि,
पाट कपाट त’ जय सियाराम !
दुनू भद्र-व्यक्ति : (एक्कहि संगे) जय सियाराम !
[पहिल खेप मे तीनू गोटे नाच’-गाब’ लागै छथि। तकर बाद धीरे-धीरे बीमा बाबू आ रद्दी-बला सेहो संग दैत छथि।]
बाजारी : कौआ बजबै हंसक बाजा
भद्र-व्यक्ति 1 : हंस गबै अछि मोरक गीत
भद्र-व्यक्ति 2 : गीत की गाओत ? छल बदनाम !
बाजारी : नाट-विराटल जय सियाराम !
समवेत : मार उचक्का झाड़ि लेलक अछि।
पाट-कपाटक जय सियाराम !
[चोर-उचक्का-पॉकिट-मार ताली दैत अछि, सुनि कए चौंकैत भिख-मंगनी आ प्रेमी-युगल बिनु किछु बुझनहि ताली बजाब’ लागैत अछि।]
(क्रमश:)
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक3.शोध लेख मायानन्द मिश्रक इतिहास बोध (आँगा) प्रथमं शैल पुत्री च/ मंत्रपुत्र/ /पुरोहित/ आ' स्त्री-धन केर संदर्भमे
मायानन्द मिश्रक इतिहास बोध (आँगा)
प्रथमं शैल पुत्री च/ मंत्रपुत्र/ /पुरोहित/ आ' स्त्री-धन केर संदर्भमे
श्री मायानान्द मिश्रक जन्म सहरसा जिलाक बनैनिया गाममे 17 अगस्त 1934 ई.केँ भेलन्हि। मैथिलीमे एम.ए. कएलाक बाद किछु दिन ई आकाशवानी पटनाक चौपाल सँ संबद्ध रहलाह । तकरा बाद सहरसा कॉलेजमे मैथिलीक व्याख्याता आ’ विभागाध्यक्ष रहलाह। पहिने मायानन्द जी कविता लिखलन्हि,पछाति जा कय हिनक प्रतिभा आलोचनात्मक निबंध, उपन्यास आ’ कथामे सेहो प्रकट भेलन्हि। भाङ्क लोटा, आगि मोम आ’ पाथर आओर चन्द्र-बिन्दु- हिनकर कथा संग्रह सभ छन्हि। बिहाड़ि पात पाथर , मंत्र-पुत्र ,खोता आ’ चिडै आ’ सूर्यास्त हिनकर उपन्यास सभ अछि॥ दिशांतर हिनकर कविता संग्रह अछि। एकर अतिरिक्त सोने की नैय्या माटी के लोग, प्रथमं शैल पुत्री च,मंत्रपुत्र, पुरोहित आ’ स्त्री-धन हिनकर हिन्दीक कृति अछि। मंत्रपुत्र हिन्दी आ’ मैथिली दुनू भाषामे प्रकाशित भेल आ’ एकर मैथिली संस्करणक हेतु हिनका साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित कएल गेलन्हि। श्री मायानन्द मिश्र प्रबोध सम्मानसँ सेहो पुरस्कृत छथि। पहिने मायानन्द जी कोमल पदावलीक रचना करैत छलाह , पाछाँ जा’ कय प्रयोगवादी कविता सभ सेहो रचलन्हि।
प्रथमं शैल पुत्री च/ मंत्रपुत्र/ /पुरोहित/ आ' स्त्री-धन केर संदर्भमे
दोसर सहस्राब्दी ई.पूर्व अरायुक्त्त रथ , भारतीय देवनाम, भारतक धार, ऋगवेदिक तत्त्वचिंतन, अश्वविद्या, शिल्प-तकनीकी आ’ पुरातन् कथा भारतसँ पच्छिम एशिया, क्रीट-यूनान दिशि जाय लागल। कालक्रमसँ मिश्र, सुमेर-बेबीलोन, आदि सभ्यता आ’ मित्तनी आ’ हित्ती सभ्यतासँ बहुत पहिनहि ऋगवेदक अधिकांश मंडलक रचना भ’ गेल छल।
मायानन्दजीक एहि सीरीजक दोसर रचना मंत्रपुत्र अछि। एहिमे ऋगवैदिक आधार पर जीवन-दर्शनकेँ राखल गेल अछि।
ऋगवेद 10 मंडलमे (आ’ आठ अष्टकमे सेहो) विभक्त्त अछि। मायानन्द मिश्रजी मंडलक आधार पर मंत्रपुत्रक विभाजन सेहो 10 मण्डलमे कएलन्हि अछि। एहि पुस्तकक भूमिकाक नाम अछि, ऋचालोक आ’ ई पुस्तकक अंतमे 10म मण्डलक बाद देल गेल अछि।
प्रथम मण्डलमे काक्षसेनी पुत्री ऋजिश्वाक चर्च अछि, संगहि ऋतुर्वित पुत्री शाश्वतीक सेहो। जन सभा आ’ जन-समिति द्वारा राजाकेँ च्युत करबाक/निर्वासन देबाक आ’ दोसर राजाक निर्वाचन करबाक चर्चा सेहो अछि। नेत्रक नील रंग रहबाक बदला श्यामल भ’ जयबाक चर्चा आ’ एकर कारण खास तरहक विवाहक होयबाक चर्चा सेहो भेल अछि।वितस्ता तटसँ कृष्ण सभक निरन्तर उपद्रवक चर्चा सेहो अछि।सुवास्तु तटसँ रक्त्त मिश्रणक प्रक्रियाक वर्णन अछि। गोमेधकेँ वर्जित कएल जाय, ई विचार विमर्श कएल जाय लागल। दासक चर्चा सेहो अछि। हरिपूपियापतन आ’ ओकर विभिन्न नगर सभ उजड़ि जयबाक चर्चा अछि आ’ पश्चात् बल्बूथ द्वारा अनार्य सभक ध्वस्त वाणिज्य व्यवस्थाकेँ संगठित करबाक चर्चा अछि।
द्वितीय मण्डलमे
(अनुवर्तते)
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 4.उपन्यास सहस्रबाढ़नि -गजेन्द्र ठाकुर
सहस्रबाढ़नि -गजेन्द्र ठाकुर
गणित आ’ विज्ञानक अतिरिक्त्त कोनो आन विषयकेँ नहि तँ हम एक बेरसँ दोसर बेर पढ़ैत छलहुँ आ’ नहिये एहि हेतु मास्टर साहेबे कहैत छलाह। कोनो विद्यार्थीकेँ मास्टर साहेब इतिहास आ’ नागरिक शास्त्रक किताबकेँ एकसँ दोसर-तेसर बेर पढ़ैत देखि जाइत छलाह तखन तँ ओहि विद्यार्थीक नामे ओहि विषयसँ पड़ि जाइत छल। आब ओ’ गणितो पढ़त तँ ओकरा सुनय पड़तैक जे बाबू ई इतिहास नहि छियैक, जे कंठस्थ कए रहल छी। सैया-निनानबे अनठानबे- सन्तानबे-छियानबे-पनचानबे कहैत-कहैत आ’ बोराक आसनीकेँ बरषाक समयमे छत्ता बनओने पाँच चारि तीन दू एक-एक-एक करैत भागैत विद्यार्थी सभ। कहियो छुट्टीक दिन जौँ कबड्डी खेलाबय काल मास्टर साहेब साइकिल पर चढ़ल देखा पड़थि, तँ कबड्डी-कबड्डी, मास्टर साहेब प्रणाम कबड्डी-कबड्डी कहैत भागैत विद्यार्थी। आ’ एहने एकटा घटनामे हम मास्टर साहेबकेँ ठाढ़ भ’ कए साँस तोड़ि कए प्रणाम कएने रहियन्हि आ’ एहि क्रममे विपक्षी पार्टी द्वारा लोकि लेल गेल छलहुँ, तँ एहि पर कोइलख बला मास्टर साहेब प्रसन्न भेल रहथि, आ’ एकर चर्चा स्कूलमे सभक समक्ष कएने रहथि।
बुझु जे गामक प्रवास बादक समयमे एकटा पैघ संबल सिद्ध भेल छल।खड़ाम पहिरि कए गतिसँ दौगैत रही, फेर बर्षामे आरि पर पिच्छड़ पर खड़ाम पहिरि कए दौगैत रही।पिच्छड़ पर खड़ाम नहि पिछड़ैत छल। बादमे हवाइ चप्पलक आगमन भेलाक बाद कतेक गोटे खसि-खसि कए डाँर पर गरम पानिक भाप लैत छलाह। अगिलही, किरासन तेलक लाइन, रोशनाइक गोटी, लबनचूस, रबड़क बॉल, ओधिक गेंद, पसीधक रसक विषसँ पोखरिमे माछ मरलाक बाद भेल दू टोलक बीचमे बाझल मारि, बाढ़िक दृश्य देखबाक लेल जुटल भीड़,छोट-छोट गप पर होइत पंचैती, आमक मासक आमक जाबीसँ बहराइत गछपक्कू आमक छटा, ई सभ टा अलोपित तँ नहि भ’ जायत।
(अनुवर्तते)
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 5.महाकाव्य महाभारत –गजेन्द्र ठाकुर(आँगा)
महाभारत –गजेन्द्र ठाकुर(आँगा) ------
2.सभा पर्व
भय मदान्ध दुर्योधन कहल हे विदुर,
जाऊ समाचार ई द्रौपदीकेँ जाए सुनाऊ।
छथि ओ’ हमर दासी झाड़ू-बहारू करथि,
महलमे आबि हमर ई आदेश सुनाऊ।
विदुर कहल औ’ दुर्योधन घमण्ड छोड़ू,
स्त्रीक जुआरी अहाँ हमरा नहि बुझू।
देखि विदुरक ई रूप पठाओल विकर्णकेँ,
जाऊ दासी द्रौपदीकेँ जाय आनू गय,
विकर्ण ई द्रौपदी लग कहि सुनाओल।
चकित द्रौपदी कहल स्वयंकेँ जे हारल,
युधिष्ठिर कोनाकेँ अधिकार ई पाओल,
अपन हारिक बाद होयत क्यो सक्षम,
दोसरकेँ हेतु जुआमे लगाबए केहन।
ई प्रश्न जखन राखल विकर्ण सभा बीच आबि,
दुर्योधन कहल दुःशासन जाऊ पकड़िकेँ लाऊ।
बुझाओल द्रौपदी दुःशासनकेँ , जखन ने मानल,
भागलि गांधारीक भवन दिशि, दौगल दुःशासन,
खूजल केशकेँ पकड़ि घिसिअओने छल आनल।
सभा भवन महापुरुष नहि थोड़ जतय छल।
भीष्म, विदुर, द्रोण,कृपा लाजक लेल गोँतने,
गाड़ि माथ देखि रहल द्रौपदीक अश्रुपात।
सिंहनादमे भीम तखन ई बाजल,
सूर्य देवतागण रहब साक्षी अहाँ सभ,
हाथसँ दुःशासन केश द्रौपदीकेँ धएने,
उखाड़ि फेंकब हाथ ओकर ओ दूनू।
कौरव भय सँ भीत भेलाह नादसँ भीमक,
दुर्योधन देखल मुदा देखि ई छल बाजल,
जाँघ पर दैत थोपड़ी करैत घृणित इशारा,
द्रौपदीकेँ बैसबा लए ओतय कहैत छल।
गरजि कहल भीम अधम दुर्योधनसँ,
तोहर जाँघकेँ तोडब प्रचण्ड गदासँ।
खिसियाकेँ दुर्योधन देलक ई आज्ञा पुनः ई,
चीर-हरण करू दुःशासन द्रौपदी दासी छी।
द्रौपदी कएलन्हि नेहोरा श्रेष्ठ लोकनिसँ
विनय ई,लाज बचाऊ करैत छी विनती।
सभ क्यो झुका माथ अपन ओहि सभामे,
कृष्णा छोड़ल सभ आश सभ दिशासँ,
भक्त्त वत्सल अहाँसँ टा अछि ई आशा।
कोहुना राखू हमर ई लाज अछि प्रत्याशा।
आर्द्र-स्वरसँ छलि रहलि पुकारि द्रौपदी,
गोहाड़ि खसलि सभा-बिच, मूर्च्छित ।
लागल खीचय द्रौपदीक वस्त्र दुःशासन,
सभासद देखल चमत्कार ई प्रतिपल,
यावत रहल खिंचैत वस्त्रकेँ दुःशासन,
बढ़ैत रहल वस्त्र द्रौपदीक तावत खन।
थाकि-हाँफि बैसल जखन दुःशासन,
कहल भीम सुनू सभ एहि भवनमे,
यावत फाड़ि छाती दुःशासनक ऊष्म रुधिरकेँ,
पीयब, नहि पियास मेटत मृत्यु भेटत नहि।
सुनि प्रतिज्ञा ई सभ भयसँ थड़थड़ाय लागल छल।
धृतराष्ट्र देखि दुर्घटना द्रौपदीकेँ लगमे बजाओल,
सांत्वना दए शांत कएल युधिष्ठिरसँ छल बाजल,
बिसरि जाऊ इन्द्रप्रस्थ सुख-शांतिसँ रहए जाउ,
जे हाड़लहुँ,से बुझू देल हम ठामहि लौटायल ।
(अनुवर्तते)
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 6. कथा 8.भैयारी बिसरब नहि- गजेन्द्र ठाकुर
8.भैयारी बिसरब नहि- गजेन्द्र ठाकुर
“कहलहुँ सुनैत छियैक। बेटी पैघ भ’ रहल अछि। बेटा सभक लेल किछु नहि कएलहुँ। अपन घरो नहि बनल। रिटायर भेलाक बाद कतय रहब।“
” बेटीक चिन्ता नहि करू। बेटा बला’ अपने चलि कए आयत।हमरा सभकेँ जतेक सुविधा भेटल छल, ताहिसँ बेशी सुविधा हिनका सभकेँ भेटि रहल छन्हि। तखन पढ़्थु वा नहि से ई सभ जानथि। रिटायरमेन्टक बाद गाम जा’ कय रहब। सात जन्म शहर दिशि घुमि कए नहि आयब।“
” क्यो सर-कुटुम अबैत छथि तँ हुनका सत्कार करबा लेल घरमे इंतजामो नहि रहैत अछि।“
” इंतजाम करबाक की जरूरति अछि। एक पैली बेशी लगा’ दियौक अदहनमे।“
आरुणि मायबापक एहि तरहक वार्त्तालाप सुनि पैघ भेलथि। एक बेर हॉस्पीटलमे पिताजीकेँ देखय लेल एक गोट कुटुम्ब आयल रहथि। हुनकर गप सेहो किछु एहने बुझा पड़लन्हि।
” की क’ लेलहुँ शरीरकेँ। ई बच्चा सभकेँ देखि कए मोहो नहि भेल। कतय पढ़ैत जाइत ई सभ। आ’ कोनो टा सुविधा, नहिये कोनो टा चिन्ते छल अहाँकेँ।अपनो आ’ एकरो सभक जिनगी बर्बाद कएलहुँ।“
“आरुणि। एकटा पैघ राजनीति चलि रहल अछि ऑफिसमे। अहाँक विरुद्ध षड्यंत्र चलि रहल अछि। अहाँकेँ चेतेनाइ हमर काज छल। मुदा अहाँ तँ कोनो तरहक प्रतिक्रिया दैते नहि छी।“ फोन पर एक गोट हितैषीक आवाज सुनि रहल छलाह आरुणि।
”आरुणि। की भ’ गेल। बाबूजी जेकाँ डरायल रहब।किछु दिनुका बाद हारि मानि ऋषि भ’ जायब। आकि दुष्टक संहार करब। एहि दुनूमे की चुनब अहाँ।“
”चिन्ता नहि करू। “ हँसैत बजलाह आरुणि फोन पर, आ’ फोन राखि देलन्हि।
ऑफिसक एकटा लॉबी आरुणिक पाँछा पड़ि गेल छल। ट्रांसफर-पोस्टिंग केर बाद आरुणिक ऊपर दवाब आबि गेल छल।किछु गोटे हुनकर विरुद्ध बिना-कोनो आधारक किछु कम्प्लेन कए देने छलन्हि। एकटा ऑफिसर शशांक केर हाथ छलैक एहिमे। ओकर खास-खास आदमीक पोस्टिंग मोन-मुताबिक नहि भेल रहय आ’ ओ’ प्रोमोशनमे आरुणिकेँ पाँछा करए चाहैत छल।एहि बीचमे आरुणिक फोन किछु दिन डेड छलन्हि। तकरा बाद हुनकर फोनसँ अबुधाबी आ’ दुबइ फोन कएल गेल छल। मुदा ओहि समयमे सरकारी फोनमे आइ.एस.डी. केर सुविधाक हेतु टेलीफोन विभागकेँ सूचित करए पड़ैत छल। हुनकर ऑफिसक एकटा प्रशासनिक अधिकारी टेलीफोन विभागकेँ चिट्ठी लिखि कए ई सुविधा आरुणिक जानकारीक बिना करबाए देने छल। विजीलेंसक जाँचमे ओ’ बयान देने छल जे आरुणि एहि ऑफिसक मुख्य छथि, आ’ हुनकर मौखिक आदेशोक पालन करए पड़ैत छन्हि हुनका। से आइ. एस.डी. केर सुविधाक लेल टेलीफोन विभागकेँ ओ’ आरुणिक मौखिक आदेश पर चिट्ठी लिखने छलाह।माफिया ओकरा तोड़ि लेने छल आ’ ओहिमे ओ’ प्रशासनिक अधिकारी अपनाकेँ सेहो फँसा लेने छल।
सोम दिन फैक्स आयल आ’ आरुणिक ट्रांसफर भ’ गेल।
”रिप्रेसेंट करू एहि आदेशक विरुद्ध”। वैह चिरपरिचित स्वर, मणीन्द्रक।
“अहूँ कोन झमेलामे पड़ल छी। सभ ठीक भ’ जायत”। बजलाह आरुणि फोन पर।
शशांकक घर पर पार्टी भेल।
”मिस्टर आरुणि रिप्रेसेन्ट तक नहि कएलन्हि। रिलीव भ’ कए चलि गेलाह। बुझू सरेन्डर कए देलन्हि अपनाकेँ”।
”प्रोमोशन बुझू जे दस साल धरि रुकल रहतन्हि। सीनियरिटी मारल जएतन्हि। बदनामी भेलन्हि से अलग। सुनैत छी जे फोन पर दुबइक स्मगलर सभसँ गप करैत छलाह”।
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ओम्हर आरुणिकेँ अपन बाबूजीक ट्रांसफर, ईमानदारीक संग कएल संघर्ष, संघर्षक विफलता आ’ तकर बाद हुनकर तंत्र-विद्या आ’ पूजा-पाठक दिशि अपनाकेँ ओझरायब आ’ घर-द्वार,ऑफिस आ’ सांसारिकतासँ विरक्त्ति मोन पड़ि गेलन्हि। एहि सभ घटनाक्रमक बाद हुनकर मुँह पर जे चिन्ताक रेखा आयल छलन्हि,से बेशी दिन धरि नहि रहलन्हि आरुणिक मोन पर। हारिकेँ जीतमे कतोक बेर बदलने छलाह ओ’। पढ़ाइक ग्राफ पिताक मोनक संग बनैत-बिगड़ैत रहैत छलन्हि। मुदा घुरि कए पुनः लक्ष्य प्राप्त करैत छलाह। नोकरीमे रहितहु ई घटना एक बेर भेल छल। एकटा सरकारी यात्राक बाद भेल एक्सीडेन्ट, 15 दिन धरि वेंटीलेटर पर,फेर एक साल धरि बैशाखी पर रहलाक बाद, पुनः अपन पैर पर ठाढ़ भ’ गेलाह। मृत्यु पर विजय कएलन्हि।मुदा डेढ़ साल बाद जखन ऑफिस अएलाह तखन लोककेँ विश्वासे नहि भेलैक।मुख पर वैह चिरपरिचित हँसी।लोक सभ तँ ईहो कहैत छल जे ई एक्सीडेंट भेल नहि छल वरन् करबाओल गेल छल।
” की यौ मणीन्द्र। कोनो फोन-फान नहि। स्टेटसँ बाहर ट्रांसफर भ’ गेल तँ अहाँ सभ तँ बिसरिये गेलहुँ”।
” हम की सभ क्यो बिसरि गेल अहाँकेँ एतय।
“अहाँ की बुझलहुँ। जे हम सेहो बिसरि गेल छी। अहाँकेँ मोन अछि। हम जखन इंटरक बाद बाबूजीक इच्छाक विरुद्ध विज्ञान छोड़ि कए कला विषय लेने छलहुँ। विज्ञानक सभटा किताब 11 बजे रातिमे पोखड़िमे फेंकि देने छलियैक। कोनोटा अवशेषो नहि छोड़ने छलहुँ ओहि विषयक अपन घरमे। आ’ जखन कला विषयमे प्रथम श्रेणी आयल छल तखन गेल छलहुँ गाम। तकरा पहिने कतेक बरियाती छोड़ने छलहुँ, कतेक जन्म-मृत्यु। मुदा गाम नहि गेल छलहुँ”।
” एह भाई। अहाँकेँ तँ सभटा मोन अछि। हमरा तँ भेल जे अहूँ काका जेकाँ भ’ गेलहुँ। ई सभ क्षमाक योग्य नहि अछि। कनेक देखा’ दियौक। आब हमरा विश्वास भ’ गेल जे किछु होयत”।
” फेर वैह गप। जखन अहाँ नहि बदललहुँ तखन हम कोना बदलब। चोड़ने छलहुँ किछु दिन अपनाकेँ। आब सुनू। जे कहैत छी से टा करू। बेशी बाजब जुनि। जाहि समयक कॉल हमर टेलीफोनसँ बाहरी देश कएल गेल छल, ओहि समयमे तँ हमर टेलीफोन खराब छल, ई तँ अहाँकेँ बुझले अछि।घरसँ टेलीफोन विभागकेँ कम्प्लेन सेहो लिखबाओल गेल छल। मुदा से टेलीफोने पर लिखबाओल गेल छल। कोनो लिखित पत्र आ’ ओकर प्राप्ति रशीद तँ अछि नहि। मुदा ई पता करू जे एहि तरहक कम्प्लेनक कोनो रेकार्ड टेलीफोन विभागक लग रहैत छैक की नहि।“
मणीन्द्रक फोन आयल किछु दिनुका बाद जे फोन विभाग एक महीनाक बाद कम्प्लेन नंबर फेरसँ एक सँ देब शुरू कए दैत छैक। से ई काज नहि भेल।
” बेश तखन ई पता करू, जे हमर नंबरसँ ककरा-ककरा कोन-कोन नंबर पर विदेश फोन कएल गेल छल। आ’ ओहि विदेशीक फोन कोन-कोन नंबर पर आयल अछि”।
”हँ। एहि गपक तँ हमरा सुरते नहि रहल”।
आब मणीन्द्र जे टेलीफोन नंबरक सूची अनलन्हि, से सभटा टेलीफोन बूथ सभक छल। मुदा कोनो टा कॉल आरुणिक नंबर पर नहि आयल छल।
विजीलेंसक सुनबाहीमे ई सभ वर्णन जखन आरुणि कएलन्हि, तखन शशांक हतप्रभ रहि गेलाह। ई तँ नीक भेल जे हुनकर आदमी सभ बूथ बलासँ संपर्क रखने छल, नहि तँ ओहो सभ फण्सैत आ’ संगहि शशांकोक नाम अबैत एहि सभमे। अस्तु आरुणि जाँचसँ बाहर निकलि गेलाह।
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“ भाइ। हम मणीन्द्र। ओकरा सभकेँ तँ किछु नहि भेलैक।“
”हमर ट्रांसफर दिल्ली भेल अछि। देखैत छी। अहाँ निश्चिंत रहू।“
”हम तँ ओहि दिन निश्चिंत भ’ गेलहुँ जहिया अहाँ पुरनका गप सभ सुनेलहुँ। काकाक अपमानक बदला अहाँकेँ लेबाक अछि। मात्र व्यक्त्ति सभ बदलल अछि। चरित्र सभ वैह अछि”।
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दिल्लीमे आरुणि विजीलेंस विभागक सूचना-प्रौद्योगिकी शाखामे पदस्थापित भेलाह। एहि विभागकेँ शंटिंग पोस्टिंग मानल जाइत छल। विजीलेंसक एनक्वायरीसँ बाहर निकललाक बादो आरुणि एहि पोस्टिंगके चुनलन्हि, से एहिसँ तँ ईएह सिद्ध होइत अछि, जे आरुणि थाकि गेलाह। पाँच साल कोनमे बैसल रहताह। शशांकक ग्रुप प्रफुल्ल छल।
एम्हर आरुणि अपन विज्ञानक छोड़ल पाठ फेरसँ शुरू कएलन्हि। भरि दिन कम्प्युटर आ’ ओकर तकनीकी विशेषज्ञ सभसँ भिड़ल रहथि। ओहो लोकनि बहुत दिनक बाद एहन अधिकारी देखनी छलाह जे भिड़ल अछि, काजसँ। दोसरि लोकनि तँ कोहुना टर्म पूर्ण कए भागैत छथि।
ओना देखल जाय तँ ई विभाग बड्ड संवेदनशील छल। आब आरुणिक अपन विभागक सभ कर्मचारीसँ बेश निकटता भ’ गेल छलन्हि। सभक आवेदन समयसँ आगू बढ़ैत छल। सभटा ऑफिसक इक्विपमेंट नव आबय लागल। पहिलुका ऑफिसर सभ तँ समय काटि भागय केर फेरमे रहैत छल आ’ ऑफिसक आवश्यक आवश्यकता सेहो पूर्ण नहि करैत छल।
ऑफिसमे एकटा इक्विपमेन्ट आयल छल, एन्टी करप्शन रोकय लेल। एहिमे स्मगलर सभक फोन टेप करबाक सुविधा छल।
किछु दिन समय व्यतीत होइत रहल।
”मणीन्द्र। कोनो फोन-फान नहि”।
”हम आब निश्चिन्त छी”।
”हँ समय आबि गेल अछि। एकटा काज करू स्मग्लरक संग शशांकक संबंधक संबंधमे एकटा न्यूज निकलबा दिऔक अखबारमे।आगाँ सभ चीज तैयार अछि”।
ओम्हर अखबारमे खबरि निकलल, आ’ मंत्रीक जन संपर्क पदाधिकारी जकर काज विभागक खबरिकेँ अखबारसँ काटि कए मंत्री धरि पहुँचायब छल, ओ’ क्लिपिंग मंत्रीजी लग पहुँचाय देलन्हि। समय समीचीन छल कारण विभागीय मंत्रीजी पर ढेर आरोप ओहि समय आयल छलन्हि,संसदक सत्र चलि रहल छल, से ओ’ कोनो तरहक रिस्क नहि लेलन्हि। इंक्वायरीक ऑर्डर दय देलन्हि।
विजिलेंस विभागमे केश आयल। ओकर आंतरिक बैठकी होइत छल, जाहिमे प्रौद्योगिकी विभागकेँ सेहो बजाओल जाइत छल। सभ केशमे मोटा-मोटी प्रौद्योगिकी विभाग अनाधिकार प्रामाण पत्र दए दैत छल।आ’ केश इंक्वायरीक बाद समाप्त भ’ जाइत छल।
मीटिंगक तिथि तय भेल। मीटिंगमे आरुणि विजिलेंस कमेटीक सदस्यक रूपमे शामिल भेलाह।
”शशांक पर कोनो तरहक कोनो आरोप सिद्ध नहि होइत छन्हि। आरुणि अहाँक विभागकेँ टेलीफोन टैपिंगक उपकरण उपलब्ध करबाओल गेल छल। मुदा अपन ऑफिसमे तँ फैक्स मशीनो 6 मास किनाकय राखल रहलाक बाद लगाओल जाइत अछि, तखन ई मशीन एखनो राखले होयत आकि किछु कंवर्शेशन रेकार्डो भेल अछि”।
”श्रीमान। ई मशीन एहि मासक पहिल तिथिकेँ आएल आ’ ओहि तिथिसँ एकर उपयोग शुरू भ’ गेल। एहि केशमे जहि स्मगलरक नाम आयल अछि, ओकर नाम ओहि सूचीमे अछि, जकर कॉल रेकॉर्ड करबाक आदेश हमरा भेटल छल। शशांकक कंवर्शेशन एहि व्यक्त्तिसँ नहि केर बराबड़ अछि।आध-आध मिनटक दू टा कंवर्शेशन।दोसर कंवर्शेशन नौ बजे रातिक छी आ’ एहि कंवर्शेशनक बाद ओहि स्मगलरक फोन अपन कर्मचारीकेँ जाइत छैक, आ’ ताहूमे मात्र आध मिनट ओ’ लगबैत अछि”।
” ई कोन तारीखक अछि”।
”पाँच तारीखक”।
” छह तारीखक भोरमे एहि स्मगलरक ओहिठाम रेड भेल छल, आ’ किछु नहि भेटल छल। ई सभ फोनक डिटेल दिअ आरुणि’।
”पहिल कॉलमे शशांक कहैत छथि, जे साढ़े आठ बजे घर पर आबि कए भेंट करू।बड्ड जरूरी गप अछि। दोसर कंवर्शेशनमे ओ’ नौ बजे तमसाइत कहैत छथि, जे नौ बाजि गेल आ’ अहाँ एखन धरि नहि अएलहुँ। एहिमे उत्तर सेहो भेटैत अछि, जे ओ’ शशांकक गेट पर ठाढ़ अछि”।
” तेसर फोनमे की वार्त्तालाप अछि”।
” तेसर फोन ओ’ स्मगलर अपन ऑफिस स्टाफकेँ साढ़े नौ बजे करैत अछि। ओ’ कर्मचारीकेँ आदेश दैत अछि, जे तुरत ऑफिस आऊ, हमहुँ पहुँचैत छी। बस एकर अतिरिक्त किछु नहि। कोनो एवीडेंस नहि भेटि सकल एहि केसमे। कहू तँ हम नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दए दिअ”।
”आरुणि। की कहैत छी अहाँ। अहाँक विभाग तँ आइ तक कोनो काज नहि कएने छल, मुदा आइ तँ सभटा कड़ी जोड़ि देलहुँ अहाँ। शशांक फोन कएलक जे भेंट करू। दोसर फोन पर ओ’ व्यक्त्ति ओकर गेट पर ठाढ़ छल। तेसर फोनमे ओकर कर्मचारी ऑफिस ओतेक रातिमे की करए जाइत अछि। रेडक खबड़ि शशांक लीक कएलन्हि। ओ’ कर्मचारी सभटा कागज हटा देलक, आ’ हमर विभागक ऑफिसर भोरमे छुच्छ हाथ घुरि कए आबि गेलाह। आब एकटा फोन आर करू। शशांकक नंबर टेप तँ नहि भ’ सकल छल, मुदा प्रक्रियाक अनुसार ओकर आवाजक सैंपल मैच करबाक चाही। ओ’ फोन उठायत तँ गलत नंबर कहि काटि दियौक”।
”सैह होयत”।
तखने ई प्रक्रिया कएल गेल।
“ई तँ ओपन आ’ शट केस अछि”। विजीलेंस कमेटीक अध्यक्ष महानिदेशककेँ बतओलन्हि। महानिदेशक शशांककेँ बजबओलन्हि आ’ ओकरा दू टा विकल्प देलन्हि।
”शशांक एहि सभ घटनाक बाद अहाँ लग दू टा विकल्प अछि। विभागसँ कंपलसरी सेवा निवृत्ति लेबय पडत अहाँकेँ। नहि तँ इंक्वायरी आगाँ बढ़त”।
शशांक कंपलसरी सेवानिवृत्ति लए लेलन्हि। विभाग छोड़ि कए चलि गेलाह।
” भाइ मणीन्द्र। कोनो फोन-फान नहि”।
”भजार। हम तँ ओहि दिन निश्चिंत भ’ गेल छलहुँ जाहि दिन हमरा बुझबामे आओल, जे अहाँकेँ बच्चाक सभटा गप मोन अछि। काका आ’ अहाँमे कोनो अंतर नहि। मार्ग मात्र दू तरहक रहल। एहि विजयक मार्ग पर अहाँ चली ताहि हेतु, कतेक भरकाबैत छलहुँ अहाँकेँ से मोन अछि ने। मुदा ओहि दिन जखन हमरा अहाँ बच्चाक गप सभ कहए लगलहुँ तहिये निश्चिन्त भ’ गेल छलहुँ हम”।
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
(अनुवर्तते)
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 7. पद्य
नाम - ज्योति झा चौधरी ;जन्म तिथि -३० दिसम्बर १९७८;जन्म स्थान -बेल्हवार,मधुबनी ;शिक्षा - स्वामी विवेकानन्द मिडिल स्कूल़ टिस्को साकची गर्र्ल्स हाई स्कूल़,मिसेज के एम पी एम इन्टर कालेज़,इन्दिरा गान्धी ओपन यूनिवर्सिटी, आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी);;निवास स्थान - लन्दन, यू के ;पिता -श्री शुभंकर झा,ज़मशेदपुर ;माता -श्रीमती सुधा झा,शिवीपट्टी ; ।''मैथिली लिखबाक अभ्यास हम अपन दादी नानी भाई बहिन सबकेँ पत्र लिखबामे केने छी।।बचपनसँ मैथिली सँ लगाव रहल अछि।-ज्योति
आधुनिक जीवनदर्शन
अतिशयोक्ति सँ विरक्ति अछि
जाबे ओ' दोसरक प्रशंसा में होय
परञ्च निंदामे किएक कंजूसी
जखन अनकर करबाक होय ।
असभ्य तऽ ओकरा बुझब
जे हमर प्रशंसकके रोकयए,
ने हम्मर कियो प्रशंसक अछि
ने समाजमे कियो असभ्य बुझाइए ।
परोपकार करनिहारके आशिष
जे हमर काज बना गेल
अन्यथा ओ सब बेरोजगार
जे आनक काजमे लागि गेल ।
2. मिथिलाक ध्वज ग़ीत- गजेन्द्र ठाकुर
मिथिलाक ध्वज फहरायत जगतमे,
माँ रूषलि,भूषलि,दूषलि, देखल हम,
अकुलाइत छी, भँसियाइत अछि मन।
छी विद्याक उद्योगक कर्मभूमि सँ,
पछाड़ि आयत सन्तति अहाँक पुनि,
बुद्धि, चातुर्यक आ’ शौर्यक करसँ,
विजयक प्रति करू अहँ शंका जुनि।
मैथिली छथि अल्पप्राण भेल जौँ,
सन्ध्यक्षर बाजि करब हम न्योरा,
वर्ण स्फोटक बनत स्पर्शसँ हमर,
ध्वज खसत नहि हे मातु मिथिला।
Music Notation
राग वैदेही भैरव त्रिताल(मध्य लय)
स्थाई
सां
म
धसां धप म (-) रे – सा सा सा रे॒ म – प ध प म
सां
प ध – ध सां – सां धसां रें – सां सां धसां धप म, ध
सां धप म (-)
अन्तरा
प ध सां ध सां सां सां ध – रें॒ – मं रें॒ –सां सां
सां – ध प म - - प म रे॒ – सा रे॒ – सा सा
- रे॒ म - प ध ध सां ध सां- सां रें॒ रें॒ सां सां
मप धसां धसां रें॒सां धसां धप म,सां
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 8. संस्कृत शिक्षा(आँगा)-गजेन्द्र ठाकुरः
(आँगा)
गीतम्
-गजेन्द्र ठाकुर
पथिकः चलितुं गच्छति दूरे,
तत्र आगमिष्यति लक्ष्यम् एकम्।
किमपि न चलितुमं शक्नोमि मम,
इति चिन्तयति सः पथिकः भीते।
तत्र आगच्छति साहसम् एकम्,
पृच्छति वत्स चिन्तयति किम हृदयम्।
मस्तिष्के चिन्तयतु प्राप्नुम लक्ष्यम्,
पथिकः चलति गच्छति अग्रे शीघ्रम्,
प्राप्यते लक्ष्यं सिद्धयति स्वप्नम्।
सुभाषितम्
वयम् इदानीम् एकं सुभाषितं श्रुण्वः।
उपकारिषु यः साधुः साधुत्वे तस्य को गुणः।
आरिषु यः साधुः स सादुरिति कीर्तितः॥
वयम् इदानीम यत सुभाषितं श्रुतवन्तः तस्य अर्थः एवम् अस्ति। लोके केचन् जनाः अस्माकम् उपकारं कुर्वन्ति, अन्य केचन् अपकारं कुर्वन्ति। ये उपकारं कुर्वन्ति तेषां विष्ये सर्वे संतुष्टाः भवन्ति, तेषां विषये साधुत्वं दर्शयन्ति एव, किन्तु यः अपकारं करोति तस्य विषये अपि यः साधुत्वं दर्शयन्ति यः तस्यापि उपकारं करोति सः वस्तुतः साधुः। अन्यथा यः मम उपकारं करोति तस्य अहम् उपकारं करोमि चेत् तत्र साधुत्वं किमपि नास्ति। यः अपकारं करोति तस्यापि यः उपकारं करोति सः वस्तुतः साधुः।
कथा
अहम् इदानीम् एकं लघु कथां वदामि।
कश्चन् ग्रामः आसीत्। तस्मिन् ग्रामे एकः पण्डितः आसीत्। सः महान् विद्वान्, अनेकेषु शास्त्रेषु निष्णातः आसीत्। सः प्रतिदिनम् अध्ययनं करोति, प्रतिदिनम् अध्यापनम् अपि करोति, प्रतिदिनं पाठं करोति। दूर-दूरतः अपि छात्राः प्रतिदिनं तस्य समीपम् आगत्य शिक्षणं प्राप्तवन्ति।, प्रतिदिनं पाठार्थम् आगछन्ति। तस्य पण्डितस्य एकः पुत्रः आसीत्। पुत्रस्य विषये पण्डितस्य महती प्रीतिः आसीत्। सः पुत्रः अपि सम्यक पठति स्म। एकस्मिन् दिने छात्राः यथापूर्वं गुरोः समीपम् आगतवन्तः। गुरुः तान् सर्वान् यथापूर्वं पाठितवान्। व्याकरण वा न्यायशास्त्रं वा किंचित्
शास्त्रं सः सर्वान् छात्राण् यथापूर्वं पाठितवान्। छात्राः सर्वे पाठं श्रुत्वा सन्तुष्टाः स्व ग्रामम् अन्नतरं गतवन्तः। सायांकालः अभवत्।
तस्मिन् दिने अकस्मात् तस्य पण्डितस्य पुत्रस्य महान् ज्वरः आगच्छ। सः औषिधम् आनीतवान्। परन्तु प्रयोजनं न भवथ। रात्रि समये सः बालकः मृतः एव अभवत्। पण्डितस्य एकः एव पुत्रः। सः पुत्रः अपि मृतः अभवत्। पण्डितस्य महत् दुःखं जातम्। सहजं सः बहुदुःखेन् एव पुत्रस्य कार्याणि याणि करिणियानि तानि सर्वानि कृतवान्। तस्य शिष्याः सर्वे अन्य ग्रामेषु निवसन्तु। ते एतां वार्त्तां न जानन्तु। अनन्तर दिने प्रातः काले ते सर्वे यथा पूर्वं पाठार्थम् आगतवन्तः। गुरुः दृष्टवान्। सर्वे छात्राः पाठार्थम् आगतवन्तः। गुरुः स्वस्थाने उपविष्टवान्। सर्वानापि पाठितवान्। प्रतिदिनम् यथा पाठयति तथैव एक घण्टा पर्यन्तं पाठनं कृतवान्। पाठः समाप्ता छात्राः सर्वे गुरोः पुत्रं न दृष्टवन्तः। अद्य पुत्रः न दृश्यते। कुत्र इति तेषां संशयाः भवन्ति। ते गुरुं पृष्टवन्तः।
भवतः पुत्रः कुत्र।
तदा गुरुः सर्वम् उक्त्तवान्।
छात्राः उक्त्तवन्तः- कीदृशः भवान्।
किमर्थम् अस्मान् पूर्वमेव न उक्त्तवान्। तदा गुरुः उक्त्तवान्- भवन्तः सर्वे दूर-दूर ग्रामतः पाठं श्रोतुम् आगतवंटः। एतावंटः शिष्याःदूरतः पाठं श्रोतुम्
आगतवन्तः। अहं पाठं न करोति चेत्, भवताम् सर्वेषाम् समयः व्यर्थः न भवति ? अतः पाठनं मम् धर्मम्।
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सम्भाषणम्
वयम् आरम्भे पूर्वतन् पठस्य किंचित् स्मरण कुर्मः।
ददाति ददामि दापयामि दापयति
पठति पठामि पाठयामि पाठयति
अत्र बहूनि वस्तूनि सन्ति।
करदीपः अस्ति।
अहं करदीपं स्वीकरोमि।
अहं उपनेत्रं ददामि।
स्वीकरोतु।
करदीपं ददामि।
तथा वाक्यानि वदामः।
इदानीं भवन्तः एकम् एकं वाक्यं वदन्ति एव, किम् किम् ददति।
वदन्तु।
भवती फलं ददाति।
अहं लेखनीं ददामि।
कृपया उपनेत्रं ददातु।
मम् समीपे बहूनि वस्तूनि सन्ति।
अहम् एकम् एकं वस्तु दर्शयामि।
करदीपः- कृपया करदीपं ददातु।
दंतकूर्चः- कृपया दंतकूर्चं ददातु।
ध्वनिमुद्रिकाम्
सान्द्रमुद्रिकाम्
-अन्यम् एकम् अभ्यासम् कुर्मः।
-अहम् एकम् वाक्यं लिखामि।
मयूरः पठति।
अहम् अन्नं खादामि।
चिन्तयन्तु। अहल्याः मम् अतिथिः अस्ति। सा मम् गृहम् आगच्छति। अहं कथं सम्भाषणं करोमि । श्रुणवन्तु।
भो:। आगच्छतु। उपविशतु।
कुशलं वा। आम् सर्वं कुशलम्।
अत्रापि सर्वं कुशलं।
गृहे सर्वं कुशलम्।
माता कुशलिनी अस्ति।
किंचित् पानीयं ददामि।
संकोचं मास्तु।
मास्तु।
किंचित् स्वीकरोतु।
किंचित्।
चायं ददामि।
सम्यक् अस्ति।
किंचित् स्वीकरोतु। मास्तु।
किंचित् शर्करा आवश्यकी।
किंचित् न आवश्यकम्।
सावधानं स्वीकरोतु।
कः विशेषः।
मम् गृहे श्वः पूजा अस्ति।
कस्मिन् समये पूजा।
भगिनी नास्ति वा।
सर्वे आगच्छन्तु।
आगच्छामः।
पुनर्मिलामः।
आगच्छतु।
धन्यवादः।
कुशलम् वा।
आम कुशलम्।
कः विशेषः।
विशेषः कोपि नास्ति।
गृहे सर्वं कुशलम्।
आम् कुशलम्।
पिता कार्यालयं गतवान्।
अनुजस्य परीक्षा समाप्ता।
भो विस्मृतवान्।
किमपि।
पानीयं किम् स्वीकरोति। मास्तु।
संकोचः मास्तु।
किंचित् किंचित् ददातु।
स्वीकरोतु भोः।
किम् ददामि।
फलरसम् ददातु।
अस्तु ददामि।
अन्य विशेषः कः।
कोपि नास्ति।
अस्तु अहं गच्छामि।
किंचित् कालं तिष्ठतु।
न गच्छामि।
अस्तु धन्यवादः।
आसन्दः मम् पुरतः अस्ति।
उत्पीठिका मम् पृष्ठतः अस्ति।
संगणकं पुरतः अस्ति।
कूपी पृष्ठतः अस्ति।
प्रिया मेघायाः पुरतः अस्ति।
अहल्या मेघायाः पृष्ठतः अस्ति।
विजयः पुरतः आगच्छतु।
न न पृष्ठतः गच्छतु।
प्रसन्नः दक्षिणतः अस्ति।
प्रिया मम् वामतः अस्ति।
मम् दक्षिणतः कः अस्ति।
मम् वामतः कः अस्ति।
स्वर्गः आकाशः उपरि अस्ति।
पातालं भूमिः अधः अस्ति।
रघुवंशः रामायणस्य उपरि अस्ति।
ब्रह्मसूत्रं महाभारतस्य उपरि/अधः अस्ति।
रामायणं महाभारतस्य अधः अस्ति।
पुरतः/पृष्ठतः/वामतः/दक्षिणतः/उपरि/अधः/
अहं पठयामि।
एवं तिष्ठतु।
पुरतः/पृष्ठतः/दक्षिणतः/वामतः/
हस्तम् एवं करोतु।
पुरतः/पृष्ठतः/दक्षिणतः/वामतः।
(अनुवर्तते)
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 9. मिथिला कला(आँगा)

9. मिथिला कला
(आँगा)
चित्रकार- प्रीति, गाम-जगेली(जिला पूर्णिया),बिहार, भारत)।
दशपात अरिपन
पछिला अंकमे स्त्रीगणक दशिपात अरिपन देल गेल छल। एहि बेर पुरुषक दशिपात अरिपन देल गेल अछि।
एकर नाम दसकर्मक बोध करएबाक कारण दशपात अछि, आ’ ई पुरुषक सभ संस्कारक अवसर पर लिखल जाइत अछि।
ऊपरी भागमे दू टा मयूर,कमलक फूल,शुभ मत्स्य,भीतरमे 12 टा माँछक चित्र आ’ दसटा डाढ़िक चित्र देल गेल अछि,आ’, बीचमे अष्टदल कमल।
10. संगीत शिक्षा-गजेन्द्र ठाकुर
वर्णसँ रागक रूप-भाव प्रगट कएल जाइत छैक। एकर चारिटा प्रकार छैक।
1.स्थायी-जखन एकटा स्वर बेर-बेर अबैत अछि।ओकर अवृत्ति होइत अछि।
2.अवरोही- ऊपरसँ नीचाँ होइत स्वर समूह, एकरा अवरोही वर्ण कहल जाइत अछि।
3.आरोही- नीचाँसँ ऊपर होइत स्वर समूह, एकरा आरोही वर्ण कहल जाइत अछि।
4.संचारी-जाहिमे ऊपरका तीनू रूप लयमे होय।
लक्षण गीत: रचना जाहिमे बादी, सम्बादी,जाति आ’ गायनक समय केर निर्देशक रागक लक्षण स्पष्ट भ’ जाय।
स्थायी: कोनो गीतक पहिल भाग, जे सभ अन्तराक बाद दोहराओल जाइत अछि।
अन्तरा: जकरा एकहि बेर स्थायीक बाद गाओल जाइत अछि।
अलंकार/पलटा: स्वर समुदायक नियमबद्ध गायन/वादन भेल अलंकार।
आलाप: कोनो विशेष रागक अन्तर्गत प्रयुक्त्त भेल स्वर समुदायक विस्तारपूर्ण गायन/वादन भेल आलाप।
तान: रागमे प्रयुक्त्त भेल स्वरक त्वरित गायन/वादन भेल तान।
(अनुवर्तते)
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 12. पञ्जी प्रबंध-गजेन्द्र ठाकुरपंजी-संग्राहक- श्री विद्यानंद झा पञ्जीकार (प्रसिद्ध मोहनजी)
पंजी-संग्राहक- श्री विद्यानंद झा पञ्जीकार (प्रसिद्ध मोहनजी)
श्री विद्यानन्द झा पञीकार (प्रसिद्ध मोहनजी) जन्म-09.04.1957,पण्डुआ, ततैल, ककरौड़(मधुबनी), रशाढ़य(पूर्णिया), शिवनगर (अररिया) आ’ सम्प्रति पूर्णिया। पिता लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया|पितामह-स्व. श्री भिखिया झा | पञ्जीशास्त्रक दस वर्ष धरि 1970 ई.सँ 1979 ई. धरि अध्ययन,32 वर्षक वयससँ पञ्जी-प्रबंधक संवर्द्धन आ' संरक्षणमे संल्गन। कृति- पञ्जी शाखा पुस्तकक लिप्यांतरण आ' संवर्द्धन- 800 पृष्ठसँ अधिक अंकन सहित। पञ्जी नगरमिक लिप्यान्तरण ओ' संवर्द्धन- लगभग 600 पृष्ठसँ ऊपर(तिरहुता लिपिसँ देवनागरी लिपिमे)। गुरु- पञ्जीकार मोदानन्द झा। गुरुक गुरु- पञ्जीकार भिखिया झा, पञ्जीकार निरसू झा प्रसिद्ध विश्वनाथ झा- सौराठ, पञ्जीकार लूटन झा, सौराठ। गुरुक शास्त्रार्थ परीक्षा- दरभंगा महाराज कुमार जीवेश्वर सिंहक यज्ञोपवीत संस्कारक अवसर पर महाराजाधिराज(दरभंगा) कामेश्वर सिंह द्वारा आयोजित परीक्षा-1937 ई. जाहिमे मौखिक परीक्षाक मुख्य परीक्षक म.म. डॉ. सर गंगानाथ झा छलाह।
पछिला अंकमे देल गेल श्रोत्रियक सातक बदलामे आठ श्रेणीमे ओ लोकनि क्रमबद्ध छथि- आ’ पञ्जीक कुल संख्या 185 अछि, जाहिमे 32 टा श्रोत्रिय आ’ 153 टा आन ब्राह्मणक श्रेणी अछि। जातुकर्ण गोत्र त्रिप्रवर जातुकर्ण/आंगीरस/भारद्वाज छथि। पहिने सभ क्यो अपन-अपन पुरखाक, आ’ वैवाहिक संबंधक लेखा स्वयं रखैत रहथि। हरसिंहदेवजी एहि हेतु एक गोट संस्थाक प्रारम्भ कलन्हि। मैथिल ब्राह्मणक हेतु गुणाकर झा, कर्ण कायस्थक लेल शंकरदत्त, आ’ क्षत्रियक हेतु विजयदत्त एहि हेतु प्रथमतया नियुक्त्त भेलाह। हरसिंहदेवक पंजी वैज्ञानिक आधार बला छल आ’ शुद्ध रूपेँ वंशावली परिचय छल। सभ ब्राह्मण कायस्थ आ’ क्षत्रिय एहिमे बराबर छलाह। मुदा महाराज माधव सिंहक समयमे शाखा पञ्जीक प्रारम्भ भेल आ’ श्रोत्रिय आदि विभाजन आ’ क्रमानुसारे छोट-पैघक आ’ ओहिसँ उपजल सामाजिक कुरीतिक प्रारम्भ भेल।
कर्ण कायस्थमे एकेटा गोत्र काश्यप अछि। मात्र मूलक अनुसारेँ उतेढ़ होइत अछि, मझौला दर्जाक गृहस्थ कहल जाइत अछि।
मूलसँ गोत्र सामान्यतः पता चलि जाइत अछि। किछु अपवादो छैक। जेना: ब्रह्मपुरा मूल, काश्यप/गौतम/वत्स/वशिष्ठ।(7टा)
करमहा- शाण्डिल्य (गौल शाखा)/ बाकी सभ वत्स गोत्री।
दुनू करमहामे विवाह संभव।
चैतन्य महाप्रभु: रमापति उपाध्याय करमहे तरौनी मूलक छलाह। ओ’ बंगाल चलि गेलाह, हुकर शिष्य रहथि चैतन्य महाप्रभु।
श्रोत्रियकेँ पुबारिपार आ’ शेषकेँ पछ्बारिपार सेहो कहल जाइत अछि।श्रोत्रियक पाँजिकेँ चौगाला(श्रेणी) मे विभक्त्त अछि। श्रोत्रिय पंञ्जीकेँ लौकित कहल जाइत अछि। कुल 8 टा चौगोल श्रेणी अछि।32 टा पञ्जी अछि। पञ्जी आ’ पानि अधोगामी होइत अछि। विवाह संबंधक कारणे समय बीतला पर उच्च श्रेणी समाप्त होइत जाइत अछि। प्रथम श्रेणी ताहि कारणसँ समाप्त भ’ गेल अछि।
शेष ब्राह्मण पछ्बारिपार कहबैत छथि। एहि मे 15 गोट श्रेणी अछि।153 टा पञ्जी अछि। एकरा नामसँ जेना महादेव झा पाँजि इत्यादि संबोधित कएल जाइत अछि।
(अनुवर्तते)
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 13. संस्कृत मिथिला –गजेन्द्र ठाकुरसर्वतंत्र स्वतंत्र श्री धर्मदत्त झा(बच्चा झा) (1860 ई.-1921 ई.)(भाग-3)
13. संस्कृत मिथिला –गजेन्द्र ठाकुर
सर्वतंत्र स्वतंत्र श्री धर्मदत्त झा(बच्चा झा) (1860 ई.-1921 ई.)
(भाग-3)
पं. रत्नपाणि झाक पुत्र केँ बच्चा झाकेँ अपर गङ्गेश उपाध्याय सेहो कहल जाइत अछि। हिनकर प्रारम्भिक अध्ययन गामे पर भेलन्हि। तकरा बाद ओ’ विश्वनाथ झासँ अध्ययनक हेतु ‘ठाढ़ी’ गाम चलि गेलाह। फेर बबुजन झा आ’ ऋद्धि झासँ न्यायदर्शनक विधिवत अध्ययन कएलन्हि। फेर धर्मदत्त झा प्रसिद्ध बच्चा झा काशी गेलाह। ओतय स्वामी विशुद्धानन्द सरस्वतीसँ मीमांसा, वेदान्तक अध्ययन कएलन्हि।
सन् 1886 ई. केर गप छी। एकटा पुष्करिणीक उद्घाटनक उत्सवमे दामोदर शास्त्री जी काशीसँ मिथिलाक राघोपुर ग्राममे निमंत्रित भेल छलाह। ओतय हुनकर शास्त्रार्थ परम्परानुसार बच्चा झाक विद्यागुरु ऋद्धि झासँ भेल छलन्हि। एहिमे ऋद्धि झा परास्त भेल छलाह। गुरुक पराजयक प्रतिशोध लेबाक हेतु सन् 1889 मे बच्चा झा काशी गेलाह। बच्चा झाक उम्र ओहि समयमे 29 वर्ष मात्र छलन्हि। ओ’ प्रायः दामोदर शास्त्रीकेँ लक्ष्य करैत छलाह, जे काशीक वैय्याकरणिक पण्डित लोकनिकेँ शब्द-खण्डक कोनो ज्ञान नहि छन्हि।बच्चा झा समस्त काशीक विद्वान् लोकनिकेँ शास्त्रार्थक हेतु ललकारा देलन्हि। दामोदर शास्त्रीसँ भेल शास्त्रार्थक वर्णन पछिला अंकमे कएल जा’ चुकल अछि। शास्त्रार्थ तीन दिन धरि चलल। ई शास्त्रार्थ सन्ध्यासँ शुरू होइत छल, आ’ मध्य रात्रि धरि चलैत छल।शास्त्रार्थक तेसर दिन दामोदर शास्त्री तर्क कएनाइ बन्न कए देलन्हि, आ’ श्रोताक रूपमे बच्चा झाक तर्क सुनैत रहलाह। पं शिवकुमार शास्त्री आ’ कैलाशचन्द्र शिरोमणि दू टा निर्णायक छलाह। शिरोमणिजीक दृष्टिमे वादी श्री बच्चा झाक पक्ष न्यायशास्त्रक दृष्टिसँ समुचित छल। शिवकुमारजीक सम्मतिमे प्रतिवादी श्री दामोदरशास्त्रीक पक्ष व्याकरणक मंतव्यानुसार औचित्यसम्पन्न छलन्हि।दुनू पण्डितक शास्त्रार्थ कलाक संस्तुति कएल गेल आ’ दुनू गोटेकेँ अपन सिद्धान्तक उत्कृष्ट व्यवस्थापनक लेल विजयी मानल गेल।
बच्चा झा गामेमे रहि कए अध्यापन करैत छलाह। मुदा महाराजाधिराज दरभंगा नरेश श्री रमेश्वरसिंहक अकाट्य आग्रहक कारणसँ मुजफ्फरपुरक धर्म समाज संस्कृत कॉलेजक प्रधानाचार्यक पद स्वीकार कएलन्हि।
मुदा एकर एकहि वर्षमे ओ’ शरीर त्याग कए देलन्हि। बच्चा झाजीकेँ समालोचकगण किछु उदण्ड आ’ अभिमानी मनबाक गलती करैत रहलाह अछि। मुदा एकटा उदाहरण हमरा लगमे एहन अछि, जाहिसँ ई गलत सिद्ध होइत अछि।
ई घटना एहन सन अछि। मुजफ्फरपुर धर्मसमाज संस्कृत विद्यालयमे बच्चा झा प्रधानाचार्य/अध्यक्ष पद पर छलाह, आ’ हुनकर शिष्य पं बालकृष्ण मिश्र ओतय प्रध्यापक छलाह। ओहि समय काशीक पण्डित-पत्रमे गंगाधर शास्त्रीक एकटा श्लोकक विषयमे बच्चा झा कहलन्हि, जे एहि श्लोकमे एकहि पदर्थ वारिधर एक बेर
मृदंग बजबय बला चेतन व्यक्त्तिक रूपमे आ’ दोसर बेर वैह अम्बुद- जवनिकारूपी अचेतन रूपमे वर्णित अछि। एतय पदार्थाशुद्धि अछि।
एहि पर हुनकर शिष्य बालकृष्ण टोकलखिन्ह- गुरुजी! एहिमे कोनो दोष नहि अछि। किएक तँ वारिकेँ धारण करए बला मेघ(वारिधर) केर स्थिति आकाशमे ऊपर होइत अछि, आ’ अम्बु(जल) केँ देबय बला मेघ (अम्बुद) केर स्थिति नीचाँ होइत अछि।अतः दुनूमे स्थानक भिन्नता अछि। वारिधर आ’ वारिद एहि दुनू शब्दसँ दू भिन्न अर्थ ज्ञात होइत अछि। ताहि हेतु एतय पदार्थक अशुद्धि नहि अछि।
ई श्लोक निम्न प्रकारे छल:-
मृदुमृदङ्गनिनादमनोहरे, ध्वनित वारिधरे चपला नटी।
वियति नृत्यति रङ्ग इवाम्बुदे, जवनिकामनुकुर्वति सम्प्रति॥
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विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 14. मैथिली भाषापाक (1)- गजेन्द्र ठाकुर
मूल्यांकन
अत्युत्तम- 14-15
उत्तम- 12-13
बड़-बढ़िया- 09-11
1.अरिया-दुर्भिक्ष: क. दाही ख. रौदी. ग. आरिक एक दिशि अकाल एक दिशि नहि घ. एहिमे सँ कोनो नहि।
2. कोलपति: क. चोकटल ख. फूलल ग. मसुआयल. घ. बसिया।
3. दकचब: क. यत्र-तत्र काटब ख. तोड़ब ग.फोड़ब घ. घँसब।
4. थकुचब: क. आघात पहुँचायब. ख.फेकब, ग. लोकब. घ. खसब।
5. निहुछल: क. फेकल. ख. राखल. ग. देवताकेँ पूजब. घ. देवताक प्रदानार्थ अलगसँ राखब।
6. ओड़हा: क. बदाम भूजल(घूरमे) ख. सुखायल दाना. ग. तरल दाना. घ. भीजल दाना।
7.खखड़ी: क. दानाविहीन धान ख.दाना सहित धान. ग. उसनल धान घ. भुस्सा।
8. गोजू: क. डंटाकेँ पानिमे भेसू. ख. डंटाकेँ जमीनमे भेसू. ग. डंटाकेँ हवामे भेसू. घ. डंटाकेँ आगिमे भेसू।
9. बर्जब: क. त्यागब. ख. आनब. ग. सहब. घ. हँसब।
10. सिटब: क. फेँकब ख. आनि कए राखब. ग. आनि कए फेंकब. घ. विन्यासयुक्त्त करब।
11. खुटब: क. लटकायब. ख. सुखायब. ग. खुट्टा गाड़ि नापब. घ.एहिमे सँ कोनो नहि।
12. गेँटब: क. एम्हर-ओम्हर एकत्र करब ख. तराउपड़ी एकत्र करब.ग. एक पंत्तिमे राखब. घ. एहिमे सँ कोनो नहि।
13. डपटब: क. हँसब. ख. कानब. ग. तमसायब घ. दुलार करब।
14. खटब: क. आलस्य करब. ख. फुर्ती करब. ग. अनवरत कार्य करब. घ. एहिमे सँ कोनो नहि।
15. हँटब: क. भागब. ख. दूर जायब. ग. दबाड़ब. घ. हँसायब।
उत्तर
मैथिली भाषापाक (1) केर उत्तर:
1. ग. (खेतक आरिक एक दिशि नीक खेती एक दिशि नहि)।
2. क. चोकटल आम।
3. क. यत्र-तत्र काटब।
4. क. आघात पहुँचायब.
5. घ. देवताक प्रदानार्थ अलगसँ राखब।
6. क. बदाम भूजल(घूरमे)-खेतमे।
7. क. दानाविहीन धान(दुद्धा धान बाढ़िक पानिमे पूराडूबि गेलाक परिणाम)।
8. क. डंटाकेँ पानिमे भेसू।
9. क. त्यागब।
10. घ. विन्यासयुक्त्त करब।
11. ग. खुट्टा गाड़ि नापब।
12. ख. तराउपड़ी एकत्र करब।
13. ग. तमसायब।
14. ग. अनवरत कार्य करब।
15. ग. दबाड़ब।
मूल्यांकन
अत्युत्तम- 14-15
उत्तम- 12-13
बड़-बढ़िया- 09-11
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
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विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 8 15. रचना लेखन-गजेन्द्र ठाकुर
मात्रिक छन्दक प्रयोग वेदमे नहि अछि, वरन् वर्णवृत्तक प्रयोग अछि। मुख्य छन्द गायत्री, एकर प्रयोग सभसँ बेशी अछि। तकर बाद त्रिष्टुप आ’ जगतीक प्रयोग अछि।
1. गायत्री- 8-8 केर तीन पाद।
2. त्रिष्टुप- 11-11 केर 4 पाद।
3. जगती- 12-12 केर 4 पाद।
4. उष्णिक- 8-8 केर दू तकर बाद 12 वर्ण-संख्याक पाद।
5. अनुष्टुप- 8-8 केर चारि पाद। एकर प्रयोग वेदक अपेक्षा संस्कृत साहित्यमे बेशी अछि।
6. बृहती- 8-8 केर दू आ’ तकरा बाद 12 आ’ 8 मात्राक दू पाद।
7. पंक्त्ति- 8-8 केर पाँच। प्रथम दू पदक बाद विराम अबैछ।
यदि अक्षर पूरा नहि होइत अछि, तँ एक वा दू अक्षर निम्न प्रकारेँ घटा-बढ़ा लेल जाइत अछि।
(अ) वरेण्यम् केँ वरेणियम् स्वः केँ सुवः।
(आ) गुण वृद्धिकेँ अलग कए लेल जाइत अछि।
’ए’ केँ ‘अ’, ‘इ’।
‘ओ’ केँ ‘अ’, ‘उ’।
’ऐ’ केँ ‘अ’, ‘आ’।
’ए’ ‘औ’ केँ ‘अ’, वा ‘आ’ आ’ ‘ओ’।
एहू प्रकारेँ नहि भेलासँ अन्य विराडादि नामसँ एकर नामकरण होइत अछि।
यथा- गायत्री(24), विराट् (22), निचृत्(23), शुद्धा(24),मुरिक् (25), स्वराट्(26) आदि।
वैदिक ऋषि स्वयंकेँ आ’ देवताकेँ सेहो कवि कहैत छथि। स्म्पूर्ण वैदिक साहित्य एहि कवि चेतनाक वाङ्मय मूर्त्ति अछि। ओतय आध्यात्म चेतना, अधिदैवत्मे उत्तीर्ण भेल अछि, एवम् ओकरा आधिभूतिक भाषामे रूप देल गेल अछि।
(अनुवर्तते)
मैथिलीक मानक लेखन-शैली
1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य अग्राह्य
एखन अखन,अखनि,एखेन,अखनी
ठाम ठिमा,ठिना,ठमाजकर,तकर जेकर, तेकरतनिकर तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य)अछि ऐछ, अहि, ए।
2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय:भ गेल, भय गेल वा भए गेल।जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि।कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत:जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।
6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:-हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे।’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय(अपवाद-संसार सन्सार नहि), किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि।यथा- हिँ केर बदला हिं।
17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
20.
ग्राह्य अग्राह्य
1. होयबला/होबयबला/होमयबला/ हेब’बला, हेम’बलाहोयबाक/होएबाक
2. आ’/आऽ आ
3. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए
4. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल
5. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
6. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’
7. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करै बला/क’र’ बला
8. बला वला
9. आङ्ल आंग्ल
10. प्रायः प्रायह
11. दुःख दुख
12. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
13. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन
14. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
15. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
16. चलैत/दैत चलति/दैति
17. एखनो अखनो
18. बढ़न्हि बढन्हि
19. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ
20. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ
21. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
22. जे जे’/जेऽ
23. ना-नुकुर ना-नुकर
24. केलन्हि/कएलन्हि/कयलन्हि
25. तखन तँ तखनतँ
26. जा’ रहल/जाय रहल/जाए रहल
27. निकलय/निकलए लागल बहराय/बहराए लागल निकल’/बहरै लागल
28. ओतय/जतय जत’/ओत’/जतए/ओतए
29. की फूड़ल जे कि फूड़ल जे
30. जे जे’/जेऽ
31. कूदि/यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद
32. इहो/ओहो
33. हँसए/हँसय हँस’
34. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/नौ वा दस
35. सासु-ससुर सास-ससुर
36. छह/सात छ/छः/सात
37. की की’/कीऽ(दीर्घीकारान्तमे वर्जित)
38. जबाब जवाब
39. करएताह/करयताह करेताह
40. दलान दिशि दलान दिश
41. गेलाह गएलाह/गयलाह
42. किछु आर किछु और
43. जाइत छल जाति छल/जैत छल
44. पहुँचि/भेटि जाइत छल पहुँच/भेट जाइत छल
45. जबान(युवा)/जवान(फौजी)
46. लय/लए क’/कऽ
47. ल’/लऽ कय/कए
48. एखन/अखने अखन/एखने
49. अहींकेँ अहीँकेँ
50. गहींर गहीँर
51. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
52. जेकाँ जेँकाँ/जकाँ
53. तहिना तेहिना
54. एकर अकर
55. बहिनउ बहनोइ
56. बहिन बहिनि
57. बहिनि-बहिनोइ बहिन-बहनउ
58. नहि/नै
59. करबा’/करबाय/करबाए
60. त’/त ऽ तय/तए
61. भाय भै
62. भाँय
63. यावत जावत
64. माय मै
65. देन्हि/दएन्हि/दयन्हि दन्हि/दैन्हि
66. द’/द ऽ/दए
तका’ कए तकाय तकाए
पैरे (on foot) पएरे
ताहुमे ताहूमे
पुत्रीक
बजा कय/ कए
बननाय
कोला
दिनुका दिनका
ततहिसँ
गरबओलन्हि गरबेलन्हि
बालु बालू
चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
जे जे’
से/ के से’/के’
एखुनका अखनुका
भुमिहार भूमिहार
सुगर सूगर
झठहाक झटहाक
छूबि
करइयो/ओ करैयो
पुबारि पुबाइ
झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि
पएरे-पएरे पैरे-पैरे
खेलएबाक खेलेबाक
खेलाएबाक
लगा’
होए- हो
बुझल बूझल
बूझल (संबोधन अर्थमे)
यैह यएह
तातिल
अयनाय- अयनाइ
निन्न- निन्द
बिनु बिन
जाए जाइ
जाइ(in different sense)-last word of sentence
छत पर आबि जाइ
ने
खेलाए (play) –खेलाइ
शिकाइत- शिकायत
ढप- ढ़प
पढ़- पढ
कनिए/ कनिये कनिञे
राकस- राकश
होए/ होय होइ
अउरदा- औरदा
बुझेलन्हि (different meaning- got understand)
बुझएलन्हि/ बुझयलन्हि (understood himself)
चलि- चल
खधाइ- खधाय
मोन पाड़लखिन्ह मोन पारलखिन्ह
कैक- कएक- कइएक
लग ल’ग
जरेनाइ
जरओनाइ- जरएनाइ/जरयनाइ
होइत
गड़बेलन्हि/ गड़बओलन्हि
चिखैत- (to test)चिखइत
करइयो(willing to do) करैयो
जेकरा- जकरा
तकरा- तेकरा
बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
करबयलहुँ/ करबएलहुँ/करबेलहुँ
हारिक (उच्चारण हाइरक)
ओजन वजन
आधे भाग/ आध-भागे
पिचा’/ पिचाय/पिचाए
नञ/ ने
बच्चा नञ (ने) पिचा जाय
तखन ने (नञ) कहैत अछि।
कतेक गोटे/ कताक गोटे
कमाइ- धमाइ कमाई- धमाई
लग ल’ग
खेलाइ (for playing)
छथिन्ह छथिन
होइत होइ
क्यो कियो
केश (hair)
केस (court-case)
बननाइ/ बननाय/ बननाए
जरेनाइ
कुरसी कुर्सी
चरचा चर्चा
कर्म करम
डुबाबय/ डुमाबय
एखुनका/ अखुनका
लय (वाक्यक अतिम शब्द)- ल’
कएलक केलक
गरमी गर्मी
बरदी वर्दी
सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
एनाइ-गेनाइ
तेनाने घेरलन्हि
नञ
डरो ड’रो
कतहु- कहीं
उमरिगर- उमरगर
भरिगर
धोल/धोअल धोएल
गप/गप्प
के के’
दरबज्जा/ दरबजा
ठाम
धरि तक
घूरि लौटि
थोरबेक
बड्ड
तोँ/ तूँ
तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
तोँही/तोँहि
करबाइए करबाइये
एकेटा
करितथि करतथि
पहुँचि पहुँच
राखलन्हि रखलन्हि
लगलन्हि लागलन्हि
सुनि (उच्चारण सुइन)
अछि (उच्चारण अइछ)
एलथि गेलथि
बितओने बितेने
करबओलन्हि/ करेलखिन्ह
करएलन्हि
आकि कि
पहुँचि पहुँच
जराय/ जराए जरा’ (आगि लगा)
से से’
हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
फेल फैल
फइल(spacious) फैल
होयतन्हि/ होएतन्हि हेतन्हि
हाथ मटिआयब/ हाथ मटियाबय
फेका फेंका
देखाए देखा’
देखाय देखा’
सत्तरि सत्तर
साहेब साहब
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
विदेह 15 अप्रैल 2008 वर्ष 1 मास 4 अंक 816. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS VIDEHA,MITHILA,TIRBHUKTI,TIRHUT……
VIDEHA,MITHILA,TIRBHUKTI,TIRHUT……
Mahabharata mentions King of Videha as a very pious king engaged in dis¬cussing with the sage Vasistha on some philosophical doct¬rines. Nimi Jataka says that Kalara Janaka renounced the world and brought his line to an end. On the other hand Arthasastra and Buddha Charita give a different story. In the Arthasastra it is stated that Bhoja, known by the name of Dundakya, making a lascivious attempt on a Brahmana maiden, perished along with his kingdom and relations; so also Karala, the Vaideha. The Jayamangala commentary of Bhikshu Prabha¬mati on the same passage of the Arthasastra further explains that the king Karala Vaideha on his pilgrimage to Yogesvara, seeing the crowd with curiosity, glanced a young and beautiful wife of a Brahmana, and being struck with passion, he took her forcibly to the city. The Brahmana went to the city crying angrily "Why does that town not crack where such an evil soul resides ?" Consequently the earth cracked and the king perished in it along with his whole family. Buddha Charita of Asvaghoshaalso says ‘ Karala Janaka took away a Brahmana maiden and gained nothing but ruin; still he did not give up passion.The Mahabharata refers to the old story of a great battle between Pratardana, king of Kasi according to the Ramayana, and Janaka, king of Mithila. In the time of the great Janaka, Ajatashatru, king of Kasi, could hardly conceal his jealousy of the Videhan king's fame. The list of the kings of Videha of Mithila found in the Dipavamsa later on seems to refer to kings of Varanasi, having mentioned the first and last kings of the Videha . Ajatasatru of Kasi was a rival of Janaka Vaideha on a spiritual level. He wanted to give a thousand cows to the describer of Brahma and be called by the people as a Janaka.
The heroes of -Kasi and Videha were expert bowmen. Lichchhavis had some blood relationship with the royal family of the Kasi. It is,however, nowhere , Lichchhavis put an end to the royal line of Videha.Much amity was there between Videha and Kasi,particularly in the post Bharata War period. In the pre-Bharata war period also the kings of Kasi, Vaisali and Videha had fought against their common enemies, the Haihayas and the Nagas. The use of Kali cloth by the Brahmanas of Videha shows that brisk trade was going on between these two terri¬tories. At Takshasila, princes of both the kingdoms went for completing their higher education. Nami (Nimi II), king of Videha, accepted Jainism according to the Jaina tradition and accepted the religion propagated by Parsvanatha,formerly a prince of Kasi. The compound name Kasi-Videha occurs in the Kaushitaki-Upanishad. The Sankhayana Srauta¬Sutra mentions one Purohita as acting for the kings of Kosala, Kasi and Videha. Kasi people had a share in the overthrow of the Janaka dynasty.The centre of gravity in North Bihar shifts from Mithila to Vaisali. Ramayana refers to Siradhvaja Janaka's father going to the forest after giving the throne to his elder son.
There were frequent renunciations by the kings of Mithila. The most celebrated among the post-Bharata War kings of Videha was the ruler Janaka Vaideha, whose reign saw an unusual outburst of learning, sacrificial cult and intellectual activity. This attitude of non attachment is most prominently reflect¬ed in the famous royal utterances about the burning of Mithila. "My wealth is boundless, yet I have nothing. If the whole of Mithila were burnt to ashes, nothing of mine will be burnt.
There were ten kingly duties in Jatakas."Alms, morals, charity, justice, penitence, peace, mildness, mercy, meekness, patience."
Mahajanaka II was sixteen years oldwhen he had learned the three Vedas and all the sciences.A Videhan princess used to go to Takshsila for higher education and it was usual for the princess to get married after their return from Takshsila. If there were two princes, the elder became Uparaja and the younger was given the post of Senapati. After the death of the King elder ascended to the throne as a king and the younger was appointed Uparaja.
The palaces of Mithila has been magnificently described in literature.The king rode on chariot drawn by four milkwhite thorough¬breds when making circuit of the capital city.The Videhan king had a Samiti, helped in administration by the Uparaja, the Purohita, the Ministers, Senapati and the Chief Judges, there was a treasurer, cashier, keeper of the umbrella,sword-bearer, female-attendants, noblemen, policemen, chariot-driver and village-heads.The army was under the Senapati having fourfold divisions, the chariots, elephants, horse¬-men and footmen. The people of Videha and Kasi used bows and arrows against their enemies. Right conduct was the only way to bliss.A thousand Vedas will not bring safety. When Uddalaka put forth the character of a Brahmana as he apparently sees in real life,i.e., as one who rejects all worldly thoughts, takes the fire with him, sprinkles water, offers sacrifices and sets up the sacrificial post, his father replies in his own way. A principal landowner of Mithila, Alara by name, becoming an ascetic. Sivah, a queen of Mithila, also adopted the ascetic life of a rishi.
The father was the first teacher. Direct contact between the teacher and the taught was emphasised. The period required for study was generally twelve years. Brahmanas did not hesitate to receive instruction from Kshatriya princess. The Brahmin of Mithila town are shown as dressed in Kasi cloth. The story of Mahajanaka II going to Suvarnabhumi (Myanmar) for trade purposes and lost his ship.There was availability of beautiful stone pieces in the Gandak river which were much later worshipped as Salagrama (a form of Vishnu). Videh contained 16000 villages, 16000 store-houses and 16000 dancing girls.Mithila city has four gates and there existed four market-towns.
(c)२००८. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।
विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.co.in केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx आ’ .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
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उमेश मंडल कोवर गीतश् (1) कोने बाबा बान्हल इहो नव कोवन हे जनकपुर कोवर। कोने अम्मा लिखल पूरैन हे जनकपुर कोवर। फल्लाँ बाबा बान्हल इहो नव कोवर फ...