भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

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Saturday, August 30, 2008

कोसी- गजेन्द्र ठाकुर

(कोसी लोकगीत, मोरंग, नेपाल,नदियाँ गाती हैं, ओमप्रकाश भारती, २००२)
सगर परबत से नाम्हल कोसिका माता, भोटी मुख कयेले पयाम
आगू-आगू कोयला वीर धसना खभारल, पाछू-पाछू कोसिका उमरल जाय
नाम्ही-नाम्ही आछर लिखले गंगा माता, दिहलनि कोसी जी के हाथ
सात रात दिन झड़ी नमावल चरहल चनन केर गाछे ये
चानन छेबि-छेबि बेड़ बनावल, भोटी मुख देव चढ़ी आय ये
गहिरी से नदिया देखहुँ भेयाउन, तहाँ देल झौआ लगाय
रोहुआक मूरा चढ़ी हेरये कोसिका, केती दूर आबैय छे बलान
मार-मार के धार बहिये गेल, कामरू चलल घहराय
पोखरि गहीर भौरये माता कोसिका, कमला के देल उपदेस
माछ-काछु सब उसरे लोटाबय, पसर चरयै धेनु गाय
गाइब जगत के लोक कल जोरी, आजु मइआ इबु न सहाय।


मिथिलाक धरती बाढ़िक विभीषिकासँ आइ काल्हि जूझि रहल अछि। कुशेश्वरस्थान दिसुका क्षेत्र तँ बिन बाढ़िक बरखाक समयमये डूमल रहैत अछि। मुदा ई स्थिति १९७८-७९ केर बादक छी। पहिने ओऽ क्षेत्र पूर्ण रूपसँ उपजाऊ छल, मुदा भारतमे तटबन्धक अनियन्त्रित निर्माणक संग पानिक जमाव ओतए शुरू भए गेल। मुदा ओहि क्षेत्रक बाढ़िक कोनो समाचार कहियो नहि अबैत अछि, कहियो अबितो रहए तँ मात्र ई दुष्प्रचार जे ई सभटा पानि नेपालसँ छोड़ल गेल पानिक जमाव अछि। ओतुक्का लोक एहि नव संकटसँ लड़बाक कला सीखि गेलाह। हमरा मोन अछि ओऽ दृश्य जखन कुशेश्वरस्थानसँ महिषी उग्रतारास्थान जएबाक लेल हमरा बढ़िक समयमे अएबाक लेल कहल गेल छल कारण ओहि समयमे नाओसँ गेनाइ सरल अछि, ई कहल गेल। रुख समयमे खत्ता, चभच्चामे नाओ नहि चलि पबैत अछि आऽ सड़कक हाल तँ पुछू जुनि। फसिलक स्वरूपमे परिवर्तन भेल, मत्स्य-पालन जेना तेना कए ई क्षेत्र जबरदस्तीक एकटा जीवन-कला सिखलक। कौशिकी महारानीक एहि बेरक प्रकोप ओहि दुष्प्रचारकेँ खतम कए पाओत आकि नहि से नहि जानि!
पहिने हमरा सभ ई देखी जे कोशी आऽ गंडकपर जे दू टा बैराज नेपालमे अछि ओकर नियन्त्रण ककरा लग अछि। ई नियन्त्रण अछि बिहार सरकारक जल संसाधन विभागक लग आऽ एतए बिहार सरकारक अभियन्तागणक नियन्त्रण छन्हि। पानि छोड़बाक निर्णय बिहार सरकारक जल संसाधन विभागक हाथमे अछि। नेपालक हाथमे पानि छोड़बाक अधिकार तखन आएत जखन ओतुक्का आन धार पर बान्ह/ छहर बनत, मुदा से ५० सालसँ ऊपर भेलाक बादो दुनू देशक बीचमे कोनो सहमतिक अछैत सम्भव नहि भए सकल। किएक?
सामयिक घटनाक्रम- कोशीपर भीमनगर बैरेज, कुशहा, नेपालमे अछि। १९५८ मे बनल एहि छहरक जीवन ३० बरख निर्धारित छल, जे १९८८ मे बीति गेल। दुनू देशक बीचमे कोनो सहमति किएक नहि बनि पाओल? छहरक बीचमे जे रेत जमा भए जाइत अछि, तकरा सभ साल हटाओल जाइत अछि। कारण ई नहि कएलासँ ओकर बीचमे ऊंचाई बढ़ैत जाएत, तखन सभ साल बान्धक ऊँचाई बढ़ाबए पड़त। एहि साल ई कार्य समयसँ किएक नहि शुरू भेल? फेर शुरू भेल बरखा, १८ अगस्तकेँ कोशी बान्धमे २ मीटर दरारि आबि गेल। १९८७ ई.क बाढ़ि हम आँखिसँ देखने छी। झंझारपुर बान्ध लग पानि झझा देलक, ओवरफ्लो भए गेल एक ठामसँ, आऽ आँखिक सोझाँ हम देखलहुँ जे कोना तकर बाद १ मीटरक कटाव किलोमीटरमे बदलि जाइत अछि। २७-२८ अगस्त २००८ धरि भीमनगर बैरेजक ई कटाव २ किलोमीटर भए चुकल अछि। आऽ ई करण भेल कोशीक अपन मुख्य धारसँ हटि कए एकटा नव धार पकड़बाक आऽ नेपालक मिथिलांचलक संग बिहारक मिथिलांचलकेँ तहस नहस करबाक। नासाक ८ अगस्त २००८ आऽ २४ अगस्त २००८ केर चित्र कौशिकीक नव आऽ पुरान धारक बीच २०० किलोमीटरक दूरी देखा रहल अछि। भीमनगर बैरेज आब एकटा कोशीक सहायक धारक ऊपर बनल बैरेज बनि गेल।

राष्ट्रीय आपदा: जाहि राज्यमे आपदा अबैत अछि, से केन्द्रसँ सहायताक आग्रह करैत अछि। केन्द्रीय मंत्रीक टीम ओहि राज्यक दौरा करैत अछि आऽ अपन रिपोर्ट दैत अछि जाहिपर केन्द्रीय मंत्रीक एकटा दोसर टीम निर्णय करैत अछि, आऽ ओऽ टीम निर्णय करैत अछि जे ई आपदा राष्ट्रीय आपदा अछि वा नहि। बिहारक राजनीतिज्ञ अपन पचास सालक विफलता बिसरि जखन एक दोसराक ऊपर आक्षेपमे लागल छलाह, मनमोहन सिंह मंत्रीक प्रधानक रूपमे दौरा कए एकरा राष्ट्रीय आपदा घोषित कएलन्हि। कारण ई लेवल-३ केर आपदा अछि, कारण ई सम्बन्धित राज्यक लेल असगरे, नहि तँ वित्तक हिसाबसँ आऽ नहिए राहतक आबंटनक/ सक्षमताक हिसाबसँ , एहिसँ पार संभव अछिअछि। आब राष्ट्रीय आकस्मिक आपदा कोषसँ सहायता देल जाऽ रहल अछि, किसानक ऋण-माफी सेहो सम्भव अछि।

उपाय की हो? कुशेश्व्रर स्थानक आपदा सभ-साल अबैछ, से सभ ओकरा बिसरिए जेकाँ गेलाह। मुदा आब की हो? दामोदर घाटीक आऽ मयूरक्षी परियोजना जेकाँ कार्य कोशी, कमला, भुतही बलान, गंडक, बूढ़ी गंडक आऽ बागमतीपर किएक सम्भव नहि भेल? विश्वेश्वरैय्याक वृन्दावन डैम किएक सफल अछि। नेपाल सरकारपर दोषारोपण कए हमरा सभ कहिया धरि जनताकेँ ठकैत रहब। एकर एकमात्र उपाए अछि बड़का यंत्रसँ कमला-बलान आदिक ऊपर जे माटिक बान्ध बान्हल गेल अछि तकरा तोड़ि कए हटाएब आऽ कच्चा नहरिक बदला पक्का नहरिक निर्माण। नेपाल सरकारसँ वार्ता आऽ त्वरित समाधन। आऽ जा धरि ई नहि होइत अछि तावत जे अल्पकालिक उपाय अछि, जेना बरखा आबएसँ पहिने बान्हक बीचक रेतकेँ हटाएब, बरखाक अएबाक बाट तकबाक बदला किछु पहिनहि बान्हक मरम्मतिक कार्य करब। आऽ एहि सभमे राजनीतिक महत्वाकांक्षाकेँ दूर राखब। कोशीकेँ पुरान पथपर अनबाक हेतु कैकटा बान्ह बनाबए पड़त आऽ ओऽ सभ एकर समाधान कहिओ नहि बनि सकत।

स्कूल कॊलेजमे छुट्टी गर्मी तातिलक बदलामे बाढ़िक समए देबामे कोन हर्ज अछि, ई निर्णय कोन तरहेँ कठिन अछि?

Friday, August 29, 2008

मैथिल लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोकक संग्रह- गजेन्द्र ठाकुर

.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।

करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥

करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।


.संध्या काल दीप लेसबाक काल-

दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।

दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।


.सुतबाक काल-

रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।

शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥

जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।


. नहेबाक समय-

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।

नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥

हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।

.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।

वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥

समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।

.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।

पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥

जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।


.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।

कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥

अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।


.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी

उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।

सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः

जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥

. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।

अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥

१०.विश्वक प्रथम देशभक्त्ति गीत (मिथिलामे दूर्वाक्षत मंत्रक नामसँ प्रसिद्ध)

(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)

आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥

आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥

मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।

ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।

हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥

मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।

एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।

अन्वय-

ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म

रा॒ष्ट्रे - देशमे

ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त

आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए

रा॑ज॒न्यः-राजा

शुरे॑ऽ–बिना डर बला

इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण

ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला

म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर

दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)

धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित

सप्तिः॒-घोड़ा

पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री

जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला

र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर

स॒भेयो॒-उत्तम सभामे

युवास्य-युवा जेहन

यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे

वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला

निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे

नः-हमर सभक

प॒र्जन्यों-मेघ

वर्षतु॒-वर्षा होए

फल॑वत्यो-उत्तम फल बला

ओष॑धयः-औषधिः

पच्यन्तां- पाकए

योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा

नः॑-हमरा सभक हेतु

कल्पताम्-समर्थ होए

ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।

Thursday, August 28, 2008

मिथिला दर्शन- गजेन्द्र ठाकुर




१.मिथिलाक बीस टा सिद्ध पीठ- १.गिरिजास्थान(फुलहर,मधुबनी),२.दुर्गास्थान(उचैठ, मधुबनी),३.रहेश्वरी(दोखर,मधुबनी),४.भुवनेश्वरी स्थान(भगवतीपुर,मधुबनी),५.भद्रकालिका(कोइलख, मधुबनी),६.चमुण्डा स्थान(पचाही, मधुबनी),७.सोनामाइ(जनकपुर, नेपाल),८.योगनिद्रा(जनकपुर, नेपाल)९.कालिका स्थान(जनकपुर स्थान),१०.राजेश्वरी देवी(जनकपुर, नेपाल),११.छिनमस्ता देवी(उजान, मधुबनी),१२.बन दुर्गा(खररख, मधुबनी),१३.सिधेश्वरी देवी(सरिसव, मधुबनी),१४.देवी-स्थान(अंधरा ठाढ़ी,मधुबनी),१५.कंकाली देवी(भारत नेपाल सीमा आऽ रामबाग प्लेस, दरभंगा)१६.उग्रतारा(महिषी, सहरसा), १७.कात्यानी देवी(बदलाघाट, सहरसा),१८.पुरन देवी(पूर्णियाँ),१९.काली स्थान(दरभंगा),२०.जैमंगलास्थान(मुंगेर)|

२. जनकपुर परिक्रमाक १५ स्थल आऽ ओतुक्का मुख्य देवता १. हनुमाननगर- हनुमानजी २.कल्याणेश्वर- शिवलिंग ३.गिरिजा-स्थान- शक्ति ४.मटिहानी- विष्णु मन्दिर ५.जालेश्वर- शिवलिंग ६.मनाई- माण्डव ऋषि ७. श्रुव कुण्ड- ध्रुव मन्दिर ८.कंचन वन- कोनो मन्दिर नञि मात्र मनोरम दृश्य ९.पर्वत- पाँच टा पर्वत १०.धनुषा- शिवधनुषक टुकड़ी ११.सतोखड़ी- सप्तर्षिक सात टा कुण्ड १२.हरुषाहा- विमलागंगा १३. करुणा- कोनो मन्दिर नहि मात्र मनोरम दृश्य १४. बिसौल- विश्वामित्र मन्दिर १५.जनकपुर

३.हुलासपट्टी- मधुबनी जिलाक फुलपरास थानाक जागेश्वर स्थान लग हुलासपट्टी गाम अछि। कारी पाथरक विष्णु भगवानक मूर्त्ति एतए अछि।

४.पिपराही-लौकहा थानाक पिपराही गाममे विष्णुक मूर्त्तिक चारू हाथ भग्न भए गेल अछि।

५.मधुबन- पिपराहीसँ १० किलोमीटर उत्तर नेपालक मधुबन गाममे चतुर्भुज विष्णुक मूर्त्ति अछि।

६.अंधरा-ठाढ़ीक स्थानीय वाचस्पति संग्रहालय- गौड़ गामक यक्षिणीक भव्य मूर्त्ति एतए राखल अछि।

७.कमलादित्य स्थान- अंधरा ठाढ़ी गामक लगमे कमलादित्य स्थनक विष्णु मंदिर कर्णाट राजा नान्यदेवक मंत्री श्रीधर दास द्वारा स्थापित भेल।

८.झंझारपुर अनुमण्डलक रखबारी गाममे वृक्ष नीचाँ राखल विष्णु मूर्त्ति, गांधारशैली मे बनाओल गेल अछि।

९.पजेबागढ़ वनही टोल- एतए एकटा बुद्ध मूर्त्ति भेटल छल, मुदा ओकर आब कोनो पता नहि अछि। ई स्थल सेहो रखबारी गाम लग अछि।

१०.मुसहरनियां डीह- अंधरा ठाढ़ीसँ ३ किलोमीटर पश्चिम पस्टन गाम लग एकटा ऊंच डीह अछि।बुद्धकालीन एकजनियाँ कोठली, बौद्धकालीन मूर्त्ति, पाइ, बर्त्तनक टुकड़ी आऽ पजेबाक अवशेष एतए अछि।

११.भगीरथपुर- पण्डौल लग भगीरथपुर गाममे अभिलेख अछि जाहिसँ ओइनवार वंशक अंतिम दुनू शासक रामभद्रदेव आऽ लक्ष्मीनाथक प्रशासनक विषयमे सूचना भेटैत अछि।

१२.अकौर- मधुबनीसँ २० किलोमीटर पश्चिम आऽ उत्तरमे अकौर गाममे एकटा ऊँच डीह अछि, जतए बौद्धकालक मूर्त्ति अछि।

१३.बलिराजपुर किला- मधुबनी जिलाक बाबूबरही प्रखण्डसँ ५ किलोमीटर पूब बलिराजपुर गाम अछि। एकर दक्षिण दिशामे एकटा पुरान किलाक अवशेष अछि। किला चारि किलोमीटर नमगर आऽ एक किलोमीटर चाकर अछि। दस फीटक मोट देबालसँ ई घेरल अछि।

१४. असुरगढ़ किला- मिथिलाक दोसर किला मधुबनी जिलाक पूब आऽ उत्तर सीमा पर तिलयुगा धारक कातमे महादेव मठ लग ५० एकड़मे पसरल अछि।

१५.जयनगर किला- मिथिलाक तेसर किला अछि भारत नेपाल सीमा पर प्राचीन जयपुर आऽ वर्त्तमान जयनगर नगर लग। दरभंगा लग पंचोभ गामसँ प्राप्त ताम्र अभिलेख पर जयपुर केर वर्णन अछि।

१६.नन्दनगढ़- बेतियासँ १२ मील पश्चिम-उत्तरमे ई किला अछि। तीन पंक्त्तिमे १५ टा ऊँच डीह अछि।

१७.लौरिया-नन्दनगढ़- नन्दनगढ़सँ उत्तर स्थित अछि, एतए अशोक स्तंभ आऽ बौद्ध स्तूप अछि।

१८.देकुलीगढ़- शिवहर जिलासँ तीन किलोमीटर पूब हाइवे केर कातमे दू टा किलाक अवशेष अछि। चारू दिशि खाइ अछि।

१९.कटरागढ़- मुजफ्फरपुरमे कटरा गाममे विशाल गढ़ अछि, देकुली गढ़ जेकाँ चारू कात खधाइ खुनल अछि।
२०.नौलागढ़-बेगुसरायसँ २५ किलोमीटर उत्तर ३५० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि।

२१.मंगलगढ़-बेगूसरायमे बरियारपुर थानामे काबर झीलक मध्य एकटा ऊँच डीह अछि। एतए ई गढ़ अछि।

२२.अलौलीगढ़-खगड़ियासँ १५ किलोमीटर उत्तर अलौली गाम लग १०० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि।

२३.कीचकगढ़-पूर्णिया जिलामे डेंगरघाटसँ १० किलोमीटर उत्तर महानन्दा नदीक पूबमे ई गढ़ अछि।

२४.बेनूगढ़-टेढ़गछ थानामे कवल धारक कातमे ई गढ़ अछि।

२५.वरिजनगढ़-बहादुरगंजसँ छह किलोमीटर दक्षिणमे लोनसवरी धारक कातमे ई गढ़ अछि।

२६.गौतम तीर्थ- कमतौल स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पश्चिम ब्रह्मपुर गाम लग एकटा गौतम कुण्ड पुष्करिणी अछि।

२७.हलावर्त्त- जनकपुरसँ ३५ किलोमीटर दक्षिण पश्चिममे सीतामढ़ी नगरमे हलवेश्वर शिव मन्दिर आऽ जानकी मन्दिर अछि। एतएसँ देढ़ किलोमीटर पर पुण्डरीक क्षेत्रमे सीताकुण्ड अछि। हलावर्त्तमे जनक द्वार हर चलएबा काल सीता भेटलि छलीह। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) आऽ जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) पर एतए मेला लगैत अछि।

२८.फुलहर-मधुबनी जिलाक हरलाखी थानामे फुलहर गाममे जनकक पुष्पवाटिका छल जतए सीता फूल लोढ़ैत छलीह।

२९.जनकपुर-बृहद् विष्णुपुराणमे मिथिलामाहात्म्यमे जनकपुर क्षेत्रक वर्णन अछि। सत्रहम शताब्दीमे संत सूर किशोरकेँ अयोध्यामे सरयू धारमे राम आऽ जानकीक दू टा भव्य मूर्त्ति भेटलन्हि, जकरा ओऽ जानकी मन्दिर, जनकपुरमे स्थापित कए देलन्हि। वर्त्तमान मन्दिरक स्थापना टीकमगढ़क महारानी द्वारा १९११ ई. मे भेल। नगरक चारूकात यमुनी, गेरुखा आऽ दुग्धवती धार अछि। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी),जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) आऽ विवाह पंचमी (अगहन शुक्ल पंचमी) पर एतए मेला लगैत अछि।

३०.धनुषा- जनकपुरसँ १५ किलोमीटर उत्तर धनुषा स्थानमे पीपरक गाछक नीचाँ एकटा धनुषाकार खण्ड पड़ल अछि। रामक तोड़ल ई धनुष अछि। एहिसँ पूब वाणगंगा धार बहैत अछि जे लक्ष्मण द्वारा वाणसँ उद्घाटित भेल छल।

३१.सुग्गा-जनकपुर लग जलेश्वर शिवधामक समीप सुग्गा ग्राममे शुकदेवजीक आश्रम अछि। शुकदेवजी जनकसँ शिक्षा लेबाक हेतु मिथिला आयल छ्लाह- एहि ठाम हुनकर ठहरेबाक व्यवस्था भेल छल।

३२.सिंहेश्वर- मधेपुरासँ ५ किलोमीटर गौरीपुर गाम लग सिंहेश्वर शिवधाम अछि।

३३.कपिलेश्वर-कपिल मुनि द्वार स्थापित महादेव मधुबनीसँ ६ किलोमीटर पश्चिमम्,मे अछि।

३४.कुशेश्वर- समस्तीपुरसँ उत्तर ई एकटा प्रसिद्ध शिवस्थान अछि।

३५.सिमरदह-थलवारा स्टेशन लग शिवसिंह द्वारा बसाओल शिवसिंहपुर गाम लग ई शिवमन्दिर अछि।

३६.सोमनाथ- मधुबनी जिलाक सौराठ गाममे सभागाछी लग सोमदेव महादेव छथि।

३७.मदनेश्वर- मधुबनी जिलाक अंधरा ठाढ़ीसँ ४ किलोमीटर पूब मदनेश्वर शिव स्थान अछि।

३८.बसैटी अभिलेख- पूणियाँमे श्रीनगर लग मिथिलाक्षर ई अभिलेख मिथिलाक पहिल महिला शासक रानी इद्रावतीक राज्यकालक वर्णन करैत अछि। एकर आधार पर मदनेश्वर मिश्र ’एक छलीह महारानी’ उपन्यास सेहो लिखने छथि।

३९.चण्डेश्वर- झंझारपुरमे हररी गाम लग चण्डेश्वर ठाकुर द्वारा स्थापितचण्डेश्वर शिवस्थान अछि।

४०.बिदेश्वर-मधुबनी जिलामे लोहनारोड स्टेशन लग स्थित शिवधाम स्थापना महाराज माधवसिंह कएलन्हि। ताहि युगक मिथिलाक्षरमे अभिलेख सेहो एतए अछि।

४१.शिलानाथ- जयनगर लग कमला धारक कातमे शिलानाथ महादेव छथि।

४२.उग्रनाथ-मधुबनीसँ दक्षिण पण्डौल स्टेशन लग भवानीपुर गाममे उगना महादेवक शिवलिंग अछि। विद्यापतिकेँ प्यास लगलन्हि तँ उगनारूपी महादेव जटासँ गंगाजल निकालि जल पिएलखिन्ह। विद्यापतिक हठ कएला पर एहि स्थान पर गना हुनका अपन असल शिवरूपक दर्शन देलखिन्ह।

४३.उच्चैठ छिन्नमस्तिका भगवती- कमतौल स्टेशनसँ १६ किलोमीटर पूर्वोत्तर उच्चैठमे कालिदास भगवतीक पूजा करैत छलाह। भगवतीक मौलिक मूर्त्ति मस्तक विहीन अछि।

४४.उग्रतारा-मण्डन मिश्रक जन्मभूमि महिषीमे मण्डनक गोसाउनि उग्रतारा छथि।

४५.भद्रकालिका- मधुबनी जिलाक कोइलख गाममे भद्रकालिका मंदिर अछि।

४६.चामुण्डा-मुजफ्फर्पुर जिलामे कटरगढ़ लग लक्ष्मणा वा लखनदेइ धार लग दुर्गा द्वारा चण्ड-मुण्डक वध कएल गेल। ओहि स्थान पर ई मन्दिर अछि।

४७.परसा सूर्य मन्दिर- झंझारपुरमे सग्रामसँ पाँच किलोमीटर पूर्व परसा गाममे सढ़े चारि फीटक भव्य सूर्य मूर्त्ति भेटल अछि।

४८.बिसफी- मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी थानामे कमतौल रेलवे स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पूब आऽ कपिलेश्वर स्थानसँ ४ किलोमीटर पश्चिम बिसफी गाम अछि। विद्यापतिक जन्म-स्थान ई गाम अछि। एतए विद्यापतिक स्मारक सेहो अछि।

४९.मंदार पर्वत-बांका स्थित स्थलमे मिथिलाक्षरक गुप्तवंशीय ७म् शताब्दीक अभिलेख अछि। समुद्र मंथनक हेतु मंदारक प्रयोग भेल छल।

५०.विक्रमशिला-भागलपुरमे स्थित ई विश्वविद्यालय बौद्ध नालन्दा विश्वविद्यालयक विपरीत सनातन धर्मक शिक्षाक केन्द्र रहल।

५१.भीठ-भगवानपुर अभिलेख- राजा नान्यदेवक पुत्र मल्लदेवसँ संबंधित अभिलेख एतए अछि। मधुबनी जिलाक मधेपुर थानामे ई स्थल अछि।

५२.गौरी-शंकर स्थान- मधुबनी जिलाक जमथरि गाम आऽ हैंठी बाली गामक बीच ई स्थान गौरी आऽ शङ्करक सम्मिलित मूर्त्ति आऽ एहि पर मिथिलाक्षरमे लिखल पालवंशीय अभिलेखक कारणसँ विशेष रूपसँ उल्लेखनीय अछि। ई स्थल एकमात्र पुरातन स्थल अछि जे पूर्ण रूपसँ गामक उत्साही कार्यकर्त्ता लोकनिक सहोयोगसँ पूर्ण रूपसँ विकसित अछि। शिवरात्रिमे एहि स्थलक चुहचुही देखबा योग्य रहैत अछि। बिदेश्वरस्थानसँ २-३ किलोमीटर उत्तर दिशामे ई स्थान अछि।

५३. चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर आ आदिकालीन भव्य काली मन्दिर सेहो एहि गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि।

Saturday, August 23, 2008

चारि टा टेलीग्राम- मदन ठाकुर

हमरा गाममे एक टा पुजेगरी बाबा छलथि ! ओऽ सभ भगवानक परम भक्त छलथि (खाश कs भैरब बाबाक बेसी पूजा पाठ करैत छलथि) मानू जेना ओऽ सभ देवता गणकेँ अपना बसमे कs लेने छथि ! गाममे बहुत प्रतिष्ठा आऽ मान सम्मान हुनका भेटैत छलनि, सभ कियो पुजेगरी बाबा पुजेगरी बाबा हरदम अनघोल करैत रहैत छल ! सबटा धिया पुता सभ साँझ-भोर-दुपहरिया बाबासँ कहानी आऽ चुटुक्का सुनए के लेल ललाइत रहैत छल ! बाबा सबकेँ केवल भलाई करैत छलखिन ! किएकी बाबा भैरबक परम भक्त छलखिन ! चारी घंटा केवल पूजा पाठ करयमे समय लागैत छलनि ! शीत-लहरी ठंढी रहए वा वर्षा होइत रहए, हुनका केवल पूजा पाठसँ मतलब रहैत रहनि ! खेती बारीसँ कुनू मतलब नञि रहैत रहनि, पूजा केलाक बाद केवल समाजक भलाईमे ध्यान दैत छलखिन ! जे की केला सँ, समाजमे यश आर प्रतिष्ठा रहत आऽ ग्रामीण लोकनिक भलाई होइत रहत! एतबे नञि दू चारि गाममे यदि किनको झगड़ा होइत छलनि तँ पुजेगरी बाबा पंचैती करैत छलखिन !



मुदा पुजेगरी बाबाकेँ एकटा बातक विशेष ध्यान रहैत छलनि, जे हम यदि मरि जायब तँ हमर समाजक की होयत ! हमर मृत शरीरकेँ केना अग्निमे जराओल जायत, ई सब बात हुनका परेशान केने रहैत छलनि !



एक दिन पुजेगरी बाबा यमराजसँ प्रार्थना आऽ विनती केलथि, जे हे यमराजजी, हमर मरए के समय जखन नजदीक आबए तँ हमरा डाक द्वारा टेलीग्राम, वा नञि तँ ककरो दिआ समाद पठा देब ! जाहिसँ हम निश्चिंत भs जायब आऽ अपन सबटा काजकेँ समेट लेब, आर हमर जे अपन सम्पति अछि (पूजा पाठक सब सामान) से हम कुनू निक लोककेँ दऽ देबैन जाहिसँ आगू ओऽ हमर काज धंधाकेँ देखताह !



समय बितल जाइत छल ! पुजेगरी बाबा वृद्ध सेहो हुअ लगलथि ! केश सेहो पाकि गेलनि ! दाँत सेहो आस्ते-आस्ते टूटए लगलनि आऽ डाँर सेहो झुकए लगलनि, ओऽ आब यमराजक टेलीग्रामक इंतजार करए लगलाह !



एक दिन पुजेगरी बाबा भगवानक पूजा-पाठ केलथि आऽ भैरब बाबाक सेहो ध्यान केलथि ! भोजन केलाक उपरांत कुर्सी पर बैसल छलथि, अचानक पेटमे दर्द उठलनि, ओहिसँ आधा घंटाक बाद हुनकर शरीरसँ प्राण निकलि गेलनि, सब ग्रामीण लोकनि मिलि कए हुनक अंतिम संस्कार कs देलकनि ! किएकी पुजेगरी बाबाकेँ किओ वंशज नञि छलनि,ताहि लेल ग्रामीणक सहयोगसँ पंचदान-श्राद्ध कर्म बिधि पूर्वक कs देल गेलनि !



पुजेगरी बाबा जखन स्वर्ग लोक गेलाह तँ हुनका लेल चारू द्वार खुजल छल! यमराज हुनका आदर पूर्वक सभा भवनमे लs गेलथि ! हिनकर बही खातामे सबटा नीके कर्म कएल गेल छलनि, ताहि लेल पुजेग्अरी बाबाकें निक स्थान निक व्यबहार आऽ निकसँ स्वागत कएल गेलनि!



हुनका स्वर्गमे कुनू तरहक कष्ट नञि होइत छलनि, मुदा ओऽ पूजा पाठ, पूजाक सामिग्री आर समाजक कल्याण लs कए बहुत चिंतित छलाह ! हुनका कनियोटा स्वर्गलोकमे मोन नञि लागए छनि ! एक दिन पुजेगरी बाबा खिसिआ कए यमराजसँ कहलखिन, जे हम अहाँकेँ कहने रही जे हमरा मरएसँ पहिने अहाँ टेलीग्राम भेज देब ताकि हम अपन काज धंधाकेँ सही सलामत कs कए स्वर्ग लोक आबितहुँ से अहाँ नञि केलहुँ ?



यमराज कहलखिन :



पुजेगरी बाबा हम अहाँकेँ चारि टा टेलीग्राम भेजलहुँ मुदा अहाँ ओकरापर ध्यान नञि देलहुँ से कहू हमर कोन कसूर अछि ? पुजेग्री बाबा सुनि कए चकित भs गेलाह, जे हमरा तँ कोनो टेलीग्राम नञि आयल! नञि यौ यमराज, अहाँ झूठ बजैत छी ! दुनु व्यक्तिकेँ आपसमे बहस चलए लगलनि तँ यमराज कहलखिन, सुनू पुजेगरी बाबा, हम अहाँकेँ कखन-कखन टेलीग्राम पठेलहुँ, अहाँ ओकर ध्यान राखब !



(१): हम पहिल टेलीग्राम जखन पठेलहुँ तखनसँ अहाँकेँ कारी केश पाकय लागल



(२): हम दोसर टेलीग्राम जखन पठेलहुँ तखनसँ अहाँक आस्ते-आस्ते सभ दाँत टूटय लागल



(३): हम तेसर टेलीग्राम जखन पठेलहुँ तखनसँ अहाँकेँ आस्ते-आस्ते डाँर झुकय लागल



(४): हम चारिम टेलीग्राम जखन केलहुँ, तखन अहाँ एतेक देरी कs कए हमरा ओहिठाम एलहुँ ! आब अहीँ कहू पुजेगरी बाबा, हमर कते गलती अछि ?



पुजेगरी बाबा कहलखिन :



यमराजजी अहाँ ठीके कहैत छी ! हम अपन काज-धंधामे लागल रही, ताहि द्वारे नञि ध्यान दए सकलहुँ आऽ नञि पढ़ि सकलहुँ अहाँक चारि टा टेलीग्राम ........



जय मैथिली, जय मिथिला



-: लेखक :-

मदन कुमार ठाकुर
कोठिया पट्टीटोल
झंझारपुर (मधुबनी)
बिहार - ८४७४०४
मो - ९३१२४६०१५०
ईमेल - madanjagdamba@yahoo.co

Wednesday, August 13, 2008

छोटका भैया (रक्षाबंधनपर विशेष)

घरक छोट-मोट बातपर छिड़ल बहससँ हमर मूड ख़राब भऽ गेल छल ! ताहि उपरान्त छोटका भैयाक फ़ोन आयल ! हमर उदासीसँ हुनका अंदाज भेलनि, की किछु बात अछि ! ओऽ हमरासँ पुछलथि, हुनकर स्नेहभरल शब्द सुनि कऽ हमरा कननाञि आबि गेल। हम कानए लगलहुँ हुनका किछु नञि कहि सकलहुँ ! ओहो फ़ोन राखि देलथि, करीब एक घंटाक बाद फेरसँ फ़ोन केलन्हि। तावत तक हमहूँ चुप भऽ गेल छलहुँ ! ओऽ दोबारा पुछलथि-
"अपनेकेँ घरक लोक किछु कहलथि की ?"
हम हुनकर बातकेँ बीचेमे काटैत हुनका कहलहुँ-
"कुनू खास बात नञि छल भईया, घरमे ई छोट-मोट बात होइते रहैत अछि !"
एहिपर ओऽ भीजल आवाज़मे कहलथि-
"यदि छोट-मोट बात अछि, तँ हमरा उम्मीद छल जे अपने समझदार छी, सम्हारि लेब, मुदा अगर हमर जरुरत पड़ए तँ बिना चिन्ताक कहब जे हम आबि जाञि ? ई नञि जे अहाँ असगर छी। हम सर्वदा अपनेक संग छलहुँ।"
ई गप सुनैत हमर आँखि डबडबा उठल ! लागल जेना भाइक सांत्वना भरल स्पर्श हमर पीठ थपथपा रहल अछि! ओही भाइक, जिनकर स्थानपर हम सर्वदा बहिनक कामना करैत छलहुँ !

हम चारि भाइ-बहिनमे सभसँ छोट रही। माँ बतबैत छलीह, जखन हमर जन्म भेल छल तीनो भईया हमरा (बहिन) पाबिकेँ बहुत खुश भेलथि ! सत्य पुछू तँ हम तीनो भईयाक आँखिक तरेगण रही! मुदा समयक संग-संग बड़का वा मंझिला भइयासँ दूर छोटका भईयाक हम बहुत करीब आबि गेलहुँ !किएक ई तँ पता नञि, मुदा अपन बचपनक जतेक गप हमरा मोन अछि,ओहिमे बेसी छोटके भईया शामिल छथि ! कुमर काकाक कलममे ठीक्-ठीक दुफरियाकेँ छोटका भईया जखन खजूर,जोम बिछबाक लेल जाइत रहथि, तँ हमरो अपन कान्हपर बैसाऽ कए लऽ जाइत रहथि !कन्हापर बैसेबाक कारण ई रहनि, की हमर पएर नञि पाकए! ओहि समय हमरा ओतेक ज्ञान कतए, की सोचि सकितहुँ आखिर भइयोक पएर पाकैत होएतन्हि!ई सभ बचपनक बात भेल, आगाँ चलि कए कनेक पैघ भेलहुँ, तँ भईया फाटल मोजामे रद्दी-चिन्द्दी भरि कए, गेंद बना कए हमरा संग खेलाइत छलाह ! हुनकर अथाह प्रेम भेटलाक बादो हम सोची, भगवान् हुनकर स्थानपर यदि हमर बहिन होएतथि तँ हम हुनका संग कपड़ाक गुरियासँ खेलाइतहुँ। तीनो भईया हमरासँ बहुत प्रेम करैत छलथि, बेशी कऽ कए छोटका भईया हमरा सदिखन अपने संग राखैत रहथि! माँ-बाबूजी दुनु नोकरी करैत छलाह, एक तरहेँ हम हुनके (छोटका भईया) जिम्मेदारी रही। सत्य पुछू तँ घरक सभ काज करब हमरा छोटके भईया सिखेलथि! किशोरावस्था आबैते-आबैत हमरा अपन सहेली वा मौसी/काकीक बेटीक संग निक लागए लागल! ईएह स्थिति युवावस्था तक रहल। हम सदैव एक बहिनक कमी अनुभव करैत रहलहुँ, आर एक छोटका भईया रहथि जे सदिखन एहि बातसँ दूर-अनभिज्ञ हमर साथ दैत रहलाह! हम अपन पसंदसँ प्रेम-विवाह केलहुँ, हम अपन पसंद हुनके लग बतेलिनि। छोटके भईया सभ-परिजनकेँ विवाहक लेल मनेलखिन। विवाहक उपरांत ओऽ हमरा सँ कहैत छलाह-
"कखनो कुनू तरहक तकलीफ हएत तँ ई नञि सोचब की अपने अपन पसंदसँ विवाह केलहुँ तँ हमरा नझि कहि सकैत छी। .... हम सदा अपनेक संग छी।"

आर ओऽ ठीकेमे सर्वदा हमर साथ रहलथि। समय बीतल गेल, बादमे हम सासुर बसए लागलहुँ। सासुरमे देखलहुँ की हमर दुनू ननदि आर हुनकर भईयामे कखनो पटरी नञि खाइत छनि। अनायासहि हमरा अपन भईयाक मोन आबि गेल, हमर आँखि भरि उठल। आई जखन हमर आँखि खुजल तँ एक हम बताहि रही जे सर्वदा भईयाक प्रेमसँ अनभिज्ञ एक बहिनक लेल दुखी रहैत छलहुँ, आइ हम छोटका भईयाक स्नेहक महत्त्वकेँ बुझलहुँ! ओना तँ जीवनक सभ मोड़पर पतिदेव सदा हमर साथ दैत छथि, मुदा जरुरत परलापर छोटका भईया माँ-बाबूजी, भाई-बहिन, सभक जिम्मेदारी सभ-तरहेँ निभबैत छथि! आइ रक्षा बंधनक उपलक्ष्यमे हुनकर चर्चा करैत हमरा बड़ गर्वक अनुभूति भए रहल अछि !

एहि पावन अवसरपर हुनका जेहेन हर भैयाक प्यारी-प्यारी बहिनियाकेँ सलाम .....


Tuesday, August 12, 2008

स्वतंत्रता दिवसपर १.चन्दा झा २.श्री आरसी प्रसाद सिंह -प्रस्तुति गजेन्द्र ठाकुर

१.चन्दा झा (१८३१-१९०७), मूलनाम चन्द्रनाथ झा, ग्राम- पिण्डारुछ, दरभंगा। कवीश्वर, कविचन्द्र नामसँ विभूषित। ग्रिएर्सनकेँ मैथिलीक प्रसंगमे मुख्य सहायता केनिहार।
कृति- मिथिला भाषा रामायण, गीति-सुधा, महेशवाणी संग्रह, चन्द्र पदावली, लक्ष्मीश्वर विलास, अहिल्याचरित आऽ विद्यापति रचित संस्कृत पुरुष-परीक्षाक गद्य-पद्यमय अनुवाद।



स्वतंत्रता दिवसपर

1
न्यायक भवन कचहरी नाम।
सभ अन्याय भरल तेहि ठाम॥
सत्य वचन विरले जन भाष।
सभ मन धनक हरन अभिलाष॥
कपट भरल कत कोटिक कोटि।
ककर न कर मर्यादा छोटि॥
भन कवि ’चन्द्र’ कचहरी घूस।
सभ सहमत ककरा के दूस।
2
रतिया दिन दुरगतिया हे भोला!
गैया जगतक मैया हे भोला
कटय कसैया हाथ
हाकिम भेल निरदैया हे भोला
कतय लगायब माथ
बरसा नहि भेल सरसा हे भोला
अरसा कए गेल मेह
रतिया दिन दुरगतिया हे भोला
जन तन जिवन संदेह
मुखिया बड़ बड़ सुखिया हे भोला
अन्नबक दुखिया डोल
के सह कान कनखिया हे भोला
सुखिया बिरना टोल



२.श्री आरसी प्रसाद सिंह (१९११-१९९६), एरौत, समस्तीपुर। मैथिली आऽ हिन्दीक गीतकार। मैथिलीमे माटिक दीप, पूजाक फूल, सूर्यमुखी प्रकाशित। सूर्यमुखीपर १९८४क साहित्य अकादमी पुरस्कार।

जन्मभूमि जननी

जन्मभूमि जननी!
पृथ्वी शिर मौर मुकुट
चन्दन सन्तरिणी
जन्मभूमि जननी।
वन-वनमे मृगशावक,
नभमे रवि-शशि दीपक,
हिमगिरिसँ सागर तक
विपुलायत धरणी,
जन्मभूमि जननी।
दिक्-दिक् मे इन्द्रजाल,
नवरसमय आलवाल,
पुष्पित अंचल रसाल,
नन्दन वन सरणी,
जन्मभूमि जननी।
शक्ति, ओज, प्राणमयी,
देवी वरदानमयी,
प्रतिपल कल्याणमयी
दिवा अओर रजनी,
जन्मभूमि जननी।



सत्यमेव जयते
***ई प्रस्तुति समर्पित अछि अभिनव बिन्द्राक नाम, जे भारतक लेल ओलम्पिक्समे २८ साल बाद स्वर्ण पदक जितलन्हि, आऽ ई स्वर्ण-पदक आइ धरिक ओलम्पिकक व्यक्तिगत-स्पर्धाक भारतक पहिल स्वर्ण-पदक अछि। हुनकर पिता श्री ए.एस.बिन्द्रा आऽ माता श्रीमति बबली बिन्द्राकेँ देशक एहि पुत्रक सफलतापर शुभकामना।
सत्यमेव जयते

Friday, August 08, 2008

“विदेह” मैथिली साहित्य आन्दोलन


“विदेह” मैथिली साहित्य आन्दोलन

http://www.videha.co.in/

“विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आऽ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आऽ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आऽ पाठक एके छथि। “विदेह”केँ एखन धरि ६७७२ पाठक द्वारा ३८३२८ बेर देखल गेल अछि, ४७ देशक २१८ स्थानसँ।(२८ जुलाई २००८ धरि, गूगल एनेलेटिक्स डाटा)आऽ तकर कारण अछि “विदेह” द्वारा पाठकक अन्तर्मनमे पैसबाक आकांक्षा। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आऽ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आऽ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आऽ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आऽ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आऽ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। मुदा ई तँ प्रारम्भ अछि। “विदेह” पढबाक लेल देखू-

http://www.videha.co.in/


आऽ अपन रचना-सुझाव-टीका-टिप्पणी ई-मेलसँ पठाऊ-


ggajendra@videha.com पर।


संदेश

१.श्री प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।

२.श्री डॉ. गंगेश गुंजन- "विदेह" ई जर्नल देखल। सूचना प्रौद्योगिकी केर उपयोग मैथिलीक हेतु कएल ई स्तुत्य प्रयास अछि। देवनागरीमे टाइप करबामे एहि ६५ वर्षक उमरिमे कष्ट होइत अछि, देवनागरी टाइप करबामे मदति देनाइ सम्पादक, "विदेह" केर सेहो दायित्व।

३.श्री रामाश्रय झा "रामरंग"- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।

४.श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बाधाई आऽ शुभकामना स्वीकार करू।

५.श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।

६.श्री डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना।

७.श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।

८.श्री विजय ठाकुर, मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।

९. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका ’विदेह’ क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आऽ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।

१०.श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका ’विदेह’ केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।

११.डॉ. श्री भीमनाथ झा- ’विदेह’ इन्टरनेट पर अछि तेँ ’विदेह’ नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।

१२.श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमर, जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत से विश्वास करी।

१३. श्री राजनन्दन लालदास- ’विदेह’ ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी,नातिक एहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रि‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।

१४. डॉ. श्री प्रेमशंकर सिंह- "विदेह"क निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी।


YEAR 2008-09 FESTIVALS OF MITHILA
मिथिलाक पाबनि-तिहार

Year 2008


ashunyashayan vrat- 19 july अशून्यशयन व्रत
mauna panchmi- 23 july मौना पंचमी
madhusravani vrat samapt 4 august मधुश्रावनी व्रत समाप्त
nag panchmi 6 august नाग पंचमी
raksha bandhan/ sravani poornima 16 august रक्षा बन्धन श्रावनी पूर्णिमा
kajli tritiya 19 august कजली त्रितीया
sri krishna janmashtami- 23 august श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
srikrishnashtami 24 august श्रीकृष्णाष्टमी
kushotpatan/ kushi amavasya 30 august कुशोत्पाटन / कुशी अमावस्या
haritalika vrat 2 september हरितालिका व्रत
chauth chandra 3 september चौठ चन्द्र
Rishi panchmi 4 september ऋषि पंचमी
karma dharma ekadasi vrat 11 september कर्मा धर्मा एकादशी व्रत
indrapooja arambh 12 september इन्द्रपूजा आरम्भ
anant pooja 14 september अनंत पूजा
agastya ardhdanam 15 september अगस्त्य अर्धदानम
pitripaksh aarambh 16 september पितृपक्ष आरम्भ
vishvakarma pooja 17 september विश्वकर्मा पूजा
indr visarjan 18 september इन्द्र विसर्जन
srijimootvahan vrat 22 september श्री जीमूतवाहन व्रत
matrinavmi 23 september मातृनवमी
somaavatee amavasya 29 september सोमावती अमावस्या
kalashsthaapana 30 september कलशस्थापन
vilvabhimantra/ belnauti 5 october विल्वाभिमंत्र/ बेलनौति
patrika pravesh 6 october पत्रिका प्रवेश
mahashtami 7 october महाष्टमी
mahanavmi 8 october महानवमी
vijayadasmi 9 october विजयादशमी
kojagra 14 october कोजगरा
dhanteras 26 october धनतेरस
deepavali- diyabati-shyamapooj a 28 october दीयाबाती/ श्यामापूजा/दीयाबाती
annakuta-govardhan pooja 29 october अन्नकूट गोवर्धन पूजा
bratridvitiya/ chitragupt pooja 30 october भ्रातृद्वितीया
khashthi kharna 3 november षष्ठी खरना
chhathi sayankalika arghya 4 navamber छठि सायंकालिक अर्घ्य
samaa pooja arambh- chhathi vratak parana 5 november सामा पूजा आरम्भ/ छठि व्रतक पारना
akshaya navmi 7 november अक्षय नवमी
devotthan ekadasi 9 november देवोत्थान एकादशी
vidyapati smriti parv11 november विद्यापति स्मृति पर्व कार्तिक धवल त्रयोदशी
kaartik poornima 13 november कार्तिक पूर्णिमा
shanmasik ravi vratarambh 30 november षाणमासिक रवि व्रतारम्भ
navan parvan 4 dec. नवान पार्वन
vivah panchmi 2 december विवाह पंचमी


Year 2009


makar sankranti 14 january मकर संक्रांति
narak nivaran chaturdasi 24 january नरक निवारण चतुर्दशी
mauni amavasya 26 january मौनी अमावस्या
sarasvati pooja 31 january सरस्वती पूजा
achla saptmi- 2 february अचला सप्तमी
mahashivratri vrat 23 february महाशिवरात्रि व्रत
janakpur parikrama 26 february जनकपुर परिक्रमा
holika dahan 10 march होलिका दहन
holi/ saptadora11 march होली सप्ताडोरा
varuni yog 24 march वारुणि योग
vasant/ navratrarambh 27 march वसंत नवरात्रारम्भ
basant sooryashashthi/ chhathi vrat 1 april बसंत सूर्यषष्ठी/ छठि व्रत
ramnavmi 3 april रामनवमी
mesh sankranti 14 april मेष संक्रांति
jurisital 15 april जूड़िशीतल
akshya tritiya 27 april अक्षय तृतिया
shanmasik ravivrat samapt 3 may षणमासिक रविव्रत समाप्त
janki navmi 3 may vatsavitri 24 may जानकी नवमी
gangadashhara 2 june गंगादशहरा
somavati amavasya 22 june सोमवती अमावस्या
jagannath rath yatra 24 june जगन्नाथ रथयात्रा
saurath sabha arambh 24 june सौराठ सभा आरम्भ
saurath sabha samapti 2 july सौराठ सभा समाप्ति
harishayan ekadashi 3 july हरिशयन एकादशी
aashadhi guru poornima 7 july आषाढ़ी गुरु पूर्णिमा

मैथिली भाषा Maithili_AkademiDelhi_I


























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