भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल अखनो ५ जुलाई २००४ क पोस्ट'भालसरिक गाछ'- केर रूपमे इंटरनेटपर मैथिलीक प्राचीनतम उपस्थितिक रूपमे विद्यमान अछि जे विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका धरि पहुँचल अछि,आ http://www.videha.co.in/ पर ई प्रकाशित होइत अछि।
भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति
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Saturday, August 01, 2009
'विदेह' ३८ म अंक १५ जुलाइ २००९ (वर्ष २ मास १९ अंक ३८)-part iii
मैथिलीक मानक लेखन-शैली
1. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली आऽ 2.मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली
मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन
१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना-
अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।)
पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।)
खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।)
सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।)
खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।)
उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओलोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि।
नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोकबेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोटसन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽकऽ पवर्गधरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽकऽ ज्ञधरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।
२.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आनठाम खालि ढ लिखल जएबाक चाही। जेना-
ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि।
ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि।
उपर्युक्त शब्दसभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।
३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहिसभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।
४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएवला शब्दसभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, याबत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।
५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि।
प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि।
नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि।
सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्दसभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारूसहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि।
ए आ “य”क प्रयोगक प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।
६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।
७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।
८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि:
(क)क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमेसँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक।
अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक।
पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक।
(ख)पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह।
अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह।
(ग)स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि।
अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल।
(घ)वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि।
अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि।
(ङ)क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक।
अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ।
(च)क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि।
अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।
९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटिकऽ दोसरठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु(माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्दसभमे ई नियम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।
१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्दसभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषासम्बन्धी नियमअनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरणसम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्षसभकेँ समेटिकऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनिकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽवला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषीपर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़िरहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषतासभ कुण्ठित नहि होइक, ताहूदिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। हमसभ हुनक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ चलबाक प्रयास कएलहुँ अछि।
पोथीक वर्णविन्यास कक्षा ९ क पोथीसँ किछु मात्रामे भिन्न अछि। निरन्तर अध्ययन, अनुसन्धान आ विश्लेषणक कारणे ई सुधारात्मक भिन्नता आएल अछि। भविष्यमे आनहु पोथीकेँ परिमार्जित करैत मैथिली पाठ्यपुस्तकक वर्णविन्यासमे पूर्णरूपेण एकरूपता अनबाक हमरासभक प्रयत्न रहत।
कक्षा १० मैथिली लेखन तथा परिमार्जन महेन्द्र मलंगिया/ धीरेन्द्र प्रेमर्षि संयोजन- गणेशप्रसाद भट्टराई
प्रकाशक शिक्षा तथा खेलकूद मन्त्रालय, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र,सानोठिमी, भक्तपुर
सर्वाधिकार पाठ्यक्रम विकास केन्द्र एवं जनक शिक्षा सामग्री केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुर।
पहिल संस्करण २०५८ बैशाख (२००२ ई.)
योगदान: शिवप्रसाद सत्याल, जगन्नाथ अवा, गोरखबहादुर सिंह, गणेशप्रसाद भट्टराई, डा. रामावतार यादव, डा. राजेन्द्र विमल, डा. रामदयाल राकेश, धर्मेन्द्र विह्वल, रूपा धीरू, नीरज कर्ण, रमेश रञ्जन
भाषा सम्पादन- नीरज कर्ण, रूपा झा
2. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन
ठाम
जकर,तकर
तनिकर
अछि
अग्राह्य
अखन,अखनि,एखेन,अखनी
ठिमा,ठिना,ठमा
जेकर, तेकर
तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य)
ऐछ, अहि, ए।
2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय:भ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत:जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।
6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:-हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
20. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
21.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
VIDEHA FOR NON-RESIDENT MAITHILS
8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS
8.1.Original poem in Maithili by Ramlochan Thakur Translated into English by Gajendra Thakur
8.2.THE COMET- English translation of Gajendra Thakur's Maithili Novel Sahasrabadhani translated by Jyoti.
DATE-LIST (year- 2009-10)
(१४१७ साल)
Marriage Days:
Nov.2009- 19, 22, 23, 27
May 2010- 28, 30
June 2010- 2, 3, 6, 7, 9, 13, 17, 18, 20, 21,23, 24, 25, 27, 28, 30
July 2010- 1, 8, 9, 14
Upanayana Days: June 2010- 21,22
Dviragaman Din:
November 2009- 18, 19, 23, 27, 29
December 2009- 2, 4, 6
Feb 2010- 15, 18, 19, 21, 22, 24, 25
March 2010- 1, 4, 5
Mundan Din:
November 2009- 18, 19, 23
December 2009- 3
Jan 2010- 18, 22
Feb 2010- 3, 15, 25, 26
March 2010- 3, 5
June 2010- 2, 21
July 2010- 1
FESTIVALS OF MITHILA
Mauna Panchami-12 July
Madhushravani-24 July
Nag Panchami-26 Jul
Raksha Bandhan-5 Aug
Krishnastami-13-14 Aug
Kushi Amavasya- 20 August
Hartalika Teej- 23 Aug
ChauthChandra-23 Aug
Karma Dharma Ekadashi-31 August
Indra Pooja Aarambh- 1 September
Anant Caturdashi- 3 Sep
Pitri Paksha begins- 5 Sep
Jimootavahan Vrata/ Jitia-11 Sep
Matri Navami- 13 Sep
Vishwakarma Pooja-17Sep
Kalashsthapan-19 Sep
Belnauti- 24 September
Mahastami- 26 Sep
Maha Navami - 27 September
Vijaya Dashami- 28 September
Kojagara- 3 Oct
Dhanteras- 15 Oct
Chaturdashi-27 Oct
Diyabati/Deepavali/Shyama Pooja-17 Oct
Annakoota/ Govardhana Pooja-18 Oct
Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja-20 Oct
Chhathi- -24 Oct
Akshyay Navami- 27 Oct
Devotthan Ekadashi- 29 Oct
Kartik Poornima/ Sama Bisarjan- 2 Nov
Somvari Amavasya Vrata-16 Nov
Vivaha Panchami- 21 Nov
Ravi vrat arambh-22 Nov
Navanna Parvana-25 Nov
Naraknivaran chaturdashi-13 Jan
Makara/ Teela Sankranti-14 Jan
Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 20 Jan
Mahashivaratri-12 Feb
Fagua-28 Feb
Holi-1 Mar
Ram Navami-24 March
Mesha Sankranti-Satuani-14 April
Jurishital-15 April
Ravi Brat Ant-25 April
Akshaya Tritiya-16 May
Janaki Navami- 22 May
Vat Savitri-barasait-12 June
Ganga Dashhara-21 June
Hari Sayan Ekadashi- 21 Jul
Guru Poornima-25 Jul
Original poem in Maithili by Ramlochan Thakur
Translated into English by Gajendra Thakur
You and I
Creation
Anyone whatever be
Itihashanta, Gita or Gitanjali
Is not without purpose
The creator is not impartial
The only difference
That what I hold
You do not
Purposeful false talk
Yudhishthir does
Cheats teacher
You know too
But do not hold
Calling him out as Dharmaraja, the uprighteous
But not I.
The Comet
English Translation of Gajendra Thakur's Maithili Novel Sahasrabadhani translated into English by Smt. Jyoti Jha Chaudhary
Mother had hidden her sons inside the house. Once, Nand took Aaruni to the pillars of the bridge in the river by a steamer. Nand said, “see the pillar in construction of which many labours fell into the river, around hundred people or even more. Families of only a few dead workers could get compensation. Other names were not listed nor did anyone try to find those. In spite of that all engineers are still associated with the contractor.
Aaruni suddenly came out of those past memories. He got off the bus and revised the list of dead workers printed on the pillar. Names of a few people were listed there; perhaps people who couldn’t get compensation were not named in that list. Aaruni and Aazam Saheb caught the bus without delay when bus was to restart.
He asked again, “you say that you live in a rental house in Patna”.
“Yes, I went to the village for funeral of my father, mother will not be comfortable in that house after death of father. So she stayed in the village. Now I will search a new house in Patna. I however work in Calcutta.”
“Oh! After working for thirty years in P.W.D. he couldn’t make a single house. People did many things. I had started living with principles of your father after 1981. The houses I have made those are double storied for namesake only. There is one unfinished rooms in each of my houses. What had the government given to your father? He never worked to get fame. Everyone was wishing to go to works division but he always liked to go to non-works division.”
Then he asked Aaruni, “What do you do?”
“Father, mother and brother were living in Patna. I am in Intelligence Department in Calcutta. Sometimes I remain in uniform and sometimes I am not allowed to use that.”
“Visit me in Patna as well as in Darbhanga. Bring your mother. My wife will be very happy to see you. Nehal is in Patna nowadays.”
Then he got off the bus in Patna Harding Park Bus Stand by giving his both residential addresses with his hands having affectionate touch. Aaruni used to be happy by seeing Hording while coming from out of Patna. But after death of his father he lost his affection for this city and he will have to struggle to live in this city from now. Why such incidents were happening around him in sequence? How co-incidentally did Aazam Saheb meet him on that day? Why he did not meet him in last fifteen years? What does His grace wants from him?
He caught a rickshaw to go to his home. He restarted thinking. Father had once stomach pain at 2 o’clock in the night after eating jack fruit. He was too nervous to get the idea to ask Shravanji, his neighbour for help to call a doctor. Actually he had the idea but he never had talked to him before so he couldn’t dare to ask for help in need on that day. Mother knocked the doors of neighbours and kept on crying. One of the neighbours called the doctor then father’s life was saved. Mother was cursing as well as saying “people say not to cry because you have a five years old son and you all.....worthless, you will pay for everything, I will die.”
Sister was studying in college. She had to go on feet. The school of Aaruni and his brother was situated little bit further to the college. Sister said to both of them to go with her. They even went one day but both brothers kept on going fastly without talking to each other and they were trying not to be recognised by other boys as brothers of her. Now he thinks that what was wrong if people could have recognised them as brothers of her.
It was his personality disorder. When he grew up he started complaining about his parent’s over protective nature to him. According to him his parents tried to protect them from the evils of outside world. They didn’t allow him to talk to neighbours and didn’t make him bold enough to make friends. His parents such restrictions made him nostalgic and shy.
He used to dream about his parents fights and get up because of fear. Aaruni had many fights with his elder brother and sister. But once he cried and shouted a lot after witnessing quarrel between mother and father. Before that incident he had a conflict with his siblings and he was not talking to them. Every time, his elders were starting talk with him. But after that incident he cried and initiated talking to his sister and after they never fought. Brother was having very short age gap so he often had quarrels with him but with his sister that was reduced a lot.
For all those problems mother blamed his father. Mother never stopped him talking to neighbours, known people and relatives. It was father’s fault only.
Aaruni once wanted to buy Globe. The demand was postponed many times by saying that it would be bought next time. Aaruni stopped studying. Then he got the globe. Sister still says that during the process of fulfilling his desire to buy a globe Aauni lost his interest in studies. His rank in class fell down and father started finding Tantrik to cure that. He even found one Tantrik. They lived in village for quite a long period. There was an accountant babu in the Ganga Bridge Colony. He informed his father that he did not accept bribe but his wife did so. After that all of them were sent to village.
After that all of them were sent to village.
Salary was stopped for some period after transfer in all Bihar government jobs. So Nand sent his family to village after each transfer. One letter from Nand reached village addressing mother. Aaruni read that. It was written to his mother to return the money if she had taken the bribe. He had called the vigilance for clarification so if money would be found at home in raid then it would defame his name.
In such a stressful period Aaruni tried to forget all tension when he was in school. He had worn the artificial laughter in his face. He made that his habit. He started admiring his family. People were already praising Nand’s honesty. Aaruni was not intended to disclose the peaceless environment of his house as he thought people would laugh at that. He kept on surviving in the endangered reputation of honesty of his family. The habit of thinking and lack of confidence in decision making were associated with him in such a way that his all activities were affected either it was getting to sleep or reading and writing. He had just finished half yearly examination of class ten. He solved one question of Commerce but that was wrong. Then he tried twice and then thrice. He knew answers to all questions but he was stuck to the first question. He concealed the copy under his shirt. And when he came out to drink water he came direct to house. He often lost in thought while studying. He spent an hour in one page in such situation. He went to the zoo once. Some relatives met him there. They were very hi-fi people. However they did not say anything but their look and behaviour made Aaruni feeling inferior. He disappeared himself in crowd and returned home. He didn’t have money in his pocket so he walked. On the other hand everyone was wondering where he had gone. When everyone reached home then he accepted their guess that he was really lost. He didn’t reveal the truth to anyone.
All whom he met asked him if he was son of him and then praised his father by calling him Godlike person.
His father had to make payslip to withdraw salary in his office. Once, Aaruni got the job of getting payslip. The clerk requested staff to make his father’s play slip without taking money.
Colleagues as well as contractors were not happy with his father. The colleagues had problem that he was neither earning bribes himself nor was he giving others the chance to do so. Once, when all went village after transfer, the elder brother, who used to steal good plants from others to plant in own garden, had turned very timid and became one of those boys sitting on the back seat in the classroom within a year. That was unusually longer stay in the village after a transfer. Later on, a candidate of the Chief Minster’s post came to ask for vote then his uncle met that leader and requested for transfer of his father from works to non-works job for sake of children. The leader assured that if he would win he would do that. He said that he got many requests for transfer to works but that one first case where someone was asking for non-works job.
Fortunately that leader won the election and elected to be the Chief Minister. He did one favour to us after taking oath that he transferred Aaruni’s father to non-works job. Nand’s family came to the town again. Once, when they were living in village, a friend of brother of Aaruni said something on some other context.
According to that guy his mother’s behaviour was very aggressive and she was habituated to quarrel at the time of eating. But he had seen someone more aggressive than her on that day.
Aaruni was witnessing the quarrels resulting from financial crisis. He still becomes stressed when he recalls those two incidents. One was the month of deduction of income tax i.e. March. This incident repeats every year. But the tax increased enough to deduct all of salary of March in that year. Mother said that how all would get food. All would have to beg. But Nand sent a postcard to one of his nephews in the village and he dropped Rs. 800 to his door then she came out of fear of insecurity. Aaruni is still thrilled whenever he sees someone begging. Other incident was an accident that occurred in front of his house after which his brother had stopped eating and started crying that resulted in his red eyes. When Nand tried to console him then he asked that what would happen to all of them if Nand died.
Father, calculated insurance benefit, G.P.F., gratuity and told him that they would get Rs. 99,000 immediately. Father kept on informing the elder son for an hour.
Once Aaruni’s uncle (husband of sister of his father) visited him. All still felt much secured when someone visited them. Since Aaruni was brother-in-law of that person so japing was also included in their conversation.
He said that there was a B.D.O. sahib in Jhanjharpur who was as honest as Nand. His father was fisherman. He suffered a lot to survive and become an officer. But he also had only a cot in the name of possession like Nand had at his home. He also said to Nand that why he had become an officer. He should have stayed in the village to eat fish and rice on his cot. He could have found the business of fishery more profitable.
After marriage of Aaruni’s sister his brother-in-law often visited his house. Aaruni’s parents started quarrelling as soon as their son-in-law was seen because of lack of proper arrangements at home.
Father started his mission to punish the culprits accepting bribes after transfer. And when he lost his faith in system of the Government then he went to a tantrik. The conflicts between parents were increased. Once Aaruni had big argument with his father and he started crying by hugging his two siblings.
The quarrel between siblings vanished thereafter.
Aaruni reached home murmuring with confusion.
He had gone out to search a rental house between 2-3 pm and returned in the evening.
He was coming home from the school one day.
He was not feeling well while returning home. He was coming from school. Everyone was talking about possibility of happening of something impossible. Aaruni with his brother was reading in class seven, together. But since his elder brother was suffering from stomach ache on that day so he took leave from school after recession. Whenever he saw pupils laughing in the school he remembered the condition of his home. He was jealous of those children’s luck. Sometimes he wished that they should have same family condition as his. But he always pretended to be happy. He was scared of his parents’ quarrel at home. He often felt that such conditions would never leave him. He could neither discuss about that nor could he reveal his inner grief to anyone. He was too shy to call anyone for help in need. Mother was very honest to call him timid, coward etc. Outing in evening, visiting fair of Durga Puja , those things were far away from life. There was an earthquake in that area. Everyone came out of house by breaking the grill but Aaruni was resting on his bed. Some reason behind that was laziness and rest because of suicidal thought. He thought that there would be no harm if house would be broken and fallen down on him as he would get rid of his entire problem when he would die.
When he reached near his house he was in panic worrying about his father’s wellness. He asked his mother and sister that how his father was. When everyone started consoling him he became more irritated.
He cried loudly, “Is father dead? Where is his dead body?“
Then his sister replied, “No, nothing happened to him. Your friend, his younger brother, his father and the rickshaw driver all were going in the rickshaw. That poor rickshaw driver had just brought his newly wedded wife home. Four of them died on spot when a truck hit them.
Aaruni stopped crying. The misfortune had knocked other’s door that time. However, one of the dead persons had been his class mate for last eighteen months and they were going to school together daily. He was ringing door bell every morning and that boy was coming downstairs to accompany him to the school. He recalled that he as usual rang the call bell yesterday too and his sister who was wearing spectacles and was very high tempered informed Aaruni that her brother was coming and she also complained that he was pushing the bell for very long time and repeatedly.
He recalled that he as usual rang the call bell yesterday too and his sister who was wearing spectacles and was very high tempered informed Aaruni that her brother was coming and she also complained that he was pushing the bell for very long time and repeatedly. Aaruni waited for him yesterday but he clarified the fact that he would not ring the bell from the next day so if the boy wanted his company then he had to come before he left. Since, he hadn’t come on that day so he went to school without ringing the bell. It was the first time in past eighteen months when Aaruni had not rang the bell and he missed the school. Aaruni was frightened if that boy had told his family about his idea of not ringing the bell from the next time at the time of going to school. Then he thought that the boy might have some other work. After all he was going with in father and younger brother. In that way Aaruni was not sad but worried. To hide his thoughts he was standing calm with a mask of grief on his face. He only had the idea of not going to school with that boy from the next day. Let him go alone. But he had proven that he wouldn’t go school alone. The eyes of mother of Aaruni were filled up with tears but Aaruni was happy as his fear of father’s death was falsified.
As soon as they got new rental house both brothers shifted their house and brought their mother from the village. Aaruni joined his job.
“No, there is nothing like that, we have to do this as a part of our duty.”
“But, don’t you think you all have turned very rude this time?”
“There is no question of being rude. We take action on the basis of some reliable information.”
“Suppose I have enmity with someone and he uses your help to fulfil his personal enmity and selfishness.”
“Do you suspect any particular person?”
“No, I was just giving an example.”
“No, we don’t take action on the basis of any information. First we investigate that information then we get permission to search.”
“Will I ever be resuming my respect even if you will certify me faultless after this incident?”
“Will I ever be resuming my respect even if you will certify me faultless after this incident?”
“We will have to sit idle in this way. Well, your statement is also logical. If someone has done this out of envy then we will do needful work against him too.”
“What action will you take against him? Action is already taken on me. All byres are broken. We are so old in this business. We have been working in this business for last three generations. If possible then prefer clandestine removal. Who will believe that you didn’t get any thing after raiding all sheds?”
He was not wrong. That businessman of plywood was known for his class one work, but the information Aaruni got was just opposite. Anyways, that raid was in vain. Teams from factory, house, and dealers’ offices – all returned barehanded. The company was famous. Officers were scared and they had opted Aaruni for this job considering his personal reputation. Phone calls from the headquarter started coming to Aaruni one after one. Morning arrived while finishing raids. He had to submit report till 10 am. The owner of the factory had also expressed his anger to Aaruni. The company named Swarnaply had approach to Delhi too. Being tired of such situations Aaruni reached home in the morning. He switched off the mobile phone and tried to sleep after setting the alarm clock for 9 o’clock. The raid had been going on from yesterday. How can this happen? Why couldn’t any thing for clandestine removal found anywhere? Was that plan leaked before action? But that case was only known to the director of vigilance apart from Aaruni. He was thinking those things on the bed. He couldn’t sleep but alarm rang.
It seemed that everyone was waiting for him. Many people told him that intelligence information of such cases had been received by them too but they never tried to do that job as proving clandestine removal case was very tough in such situations. Gossips started that he was trying to be hero and finally would come out with a transfer order from the director’s room.
Aaruni entered the director’s room and asked for more time straight away. He diverted the topic and didn’t disclose his plan. He didn’t want to take any chance that time.
Aaruni started working away from the factory of Swarnaply and its dealers. He read all documents very carefully. He also noted something on paper. Then according to his plan he started from Kolkata to Patna and then from Patna to Arariya.
He didn’t chew beetle leaves and he liked to have tea only at home.
He didn’t chew beetle leaves and he liked to have tea only at home. But if he had to collect information from people then it was impossible to success without going to tea and paan shop. So he started chewing paan and sipping tea. And the pan with gulkand of Babul dada’s shop was tasty too. In return Babul dada had given him list of all plywood factories in that area. But the wrecked condition of roads was dependent on God’s grace. Aaruni managed to go through the path filled with dust and dirt to one factory that was supplying materials to the Swarnaply. The security guard at the gate said that the owner visited other factory. In that way Aaruni knew that there were two factories.
Aaruni reached another factory after a tiring journey where one Marwari guy was manager.
“Where are you coming from?”
“I am coming from Patna but don’t know how I will return.”
“Oh yes, one person assassinated a leader by firing gun. However, the leader was in jail but he came out of Purniya Jail to have a tour against the law. What can the jailor do? A jailor hadn’t allowed a prisoner to go out for a walk last month then the jailor was shot to death in the Bhatta bazaar. And this time the new jailer who gave permission to the prisoner to go out is suspended from his job. Curfew is announced in the town after that death. Stay with me. I am living in my guest house. My family is in Silliguri. I am not married yet. I have to go to Calcutta in the morning next day. I will go to Silliguri by my own vehicle so I will change my root while going there to drop you at Purniya bus stop.
Aaruni liked the fact that the youth was a chatty person. He had long chatting with him in the night at the guesthouse. The subduing workers of the leader were collecting subscription forcibly.
“There will be loss without applying clandestine in such situation. Yes, it is unavoidable. Such leaders are responsible for this. What can businessmen do? “
Then the Marwari guy named Naval had looked at Aaruni cunningly. Aaruni thought where that guy had some suspicion on him.
Aaruni thought that guy had some suspicion on him.
“No we have the principle of not going for clandestine. Some adjustments are needed to be done for this.”
Aaruni remembered how the owner of the Swarnaply said that he would like to go for clandestine removal.
Then how do they work? However that factory in Arariya was doing factory work of Swarnaply and all federal duties of that factory were handled by the Swarnaply. Even if he considered clandestine that was not useful as tax was paid by the Swarnaply.
Meanwhile, phone rang. Since ring sounded long so there was no doubt that it was an STD call. Suddenly that boy became silent by looking at Aaruni after receiving the call.
The cook who was addressed as Jha by Naval announced that food was ready. Aaruni and Naval had formal conversation. Both slept afterwards. As per he agreed that boy dropped Aaruni at Purniya bus stop in the morning. Aaruni asked Naval before getting off, “There is an office of Swarnaply in Calcutta. Are you going there?”
He laughed.
“You are in vigilance. The STD call I received yesterday was from Calcutta office. Someone from your department had revealed them about your Arariya trip. Look, I told you that I only do adjustment. What benefit do I get from that? I am not a tax payee. Yes, I get job because of that. And some provisions for petty expenses, leaders, departments etc are fulfilled from it. That’s all.”
The boy left after saying that.
When Aaruni reached Patna office everyone knew that Aaruni toured that factory at the cost of government for which tax was exempted by the government.
Aaruni returned to Calcutta after meeting the director in Patna. He kept on searching police stations to find whether any recorded case was present against the Swarnaply or any of its employees. But the Swarnaply had very well established goodwill there from the beginning. Now Sankarshan was inafixed. The company was hiding its tax liability worth crores of rupees by manipulating input output ratio but there was no proof.
Aaruni left his phone number at those police stations and instructed them to inform him if any case against the Swarnaply or its employe was found. He denied to submit closure report to his local director and said that he was still watching in case some information was fetched.
He denied to submit closure report to his local director and said that he was still watching in case some information would be fetched.
Six months later:
There was STD ring in the morning.
“I am calling from the Calcutta Salt Lake police station. Some has filed a case that he was robbed of his suitcase containing some cash and cheques by the auto rickshaw driver when he was returning from the Swarnaply office after receiving the payment.”
“How much cash and what value of cheques?”
“1 lakh and 79 thousands of Cash and cheques worth 1 lakh and 83 thousands of Rupees. Perhaps he has some insurance for cash so he filed F.I.R. Cheques can be stopped.”
Aaruni with his team made a raid on that person’s house whose money was stolen by the auto driver. He received a diary during the raid. He called the Patna office next and requested for the newest returns of removal of factory in Arariya to be availed to him. The person on whose house raid was made brought to his office. He came to know on the way that the person was brother-in-law of Naval. Apart from being the accountant of factory of Arariya he was a liaison officer of the Swarnaply Company and the factory in Arariya.
Now all facts were crystal clear. The diary retrieved had columns of cash and cheques. Details were present with dates. The cheque total was reconciled with clearance of the factory of Arariya and it was also proved that almost half payment of all transactions of the Swarnaply was paid in cash details of which were neither present in the books of the Swarnaply nor were those recorded in the books of the factory at Arariya. Swarnaply was paying tax for only cheque payments which was around half of the real transaction. Sankarshan had submitted that report to the local director.
The crime of the accountant was bail-able so the court released him on bail.
“Tell me about Naval. He is a good person. But he didn’t tell me anything.”
“He died in a road accident occurred or might me created intentionally while he was going to Silliguri from Arariya. I with my son-in-law will go directly to him after finishing here.”
One person who had come to receive the accountant informed excitedly. The son-in-law said, “You must agree that you got this opportunity only because of my foolishness. If I would have not been greedy for retrieving cash through insurance claim then this couldn’t happen.
The director ordered for action against the Swarnaply. The show-cause notice was also removed from the scandal of tax theft of crores of rupees by the Swarnaply. Aaruni was worried.
“Naval was right. He was only doing adjustment. The real theft was done by someone else. He was only a mediator. Even I feel to be a medium for Aaruni’s death.”
With the success in profession Aaruni’s success in job was also starts. Whether he would be a cause other’s problem or not he would never be defeated like his father. He recalled his past time to time.
“I say, do you listen to me. Our daughter is growing up. You have not done anything for your sons. Our house is also not possessed. Where will we live after retirement?”
“I say, do you listen to me. Our daughter is growing up. You have not done anything for your sons. Our house is also not possessed. Where will we live after retirement?”
“Don’t bother about daughter. Groom’s family will approach us. They are getting more facilities than what we got. Now putting effort in studies is up to them. We will live in the village after retirement. We won’t come to town in our next seven births.”
“If any relatives come we won’t have enough arrangement to welcome them.”
“Why do we need special arrangement? Just add some more rice in boiling water.”
Aaruni brought up by hearing such conversation. Once, one relative visited the hospital to see father. He was also talking in the same manner.
“What you did with your body? You didn’t even feel emotion for these kids. Where do they study? You didn’t have any facility nor did you have any responsibility. You have spoiled your life as well as theirs.
Meanwhile, they were interrupted. His wife informed him that there is a phone call for him on hold.
“Aaruni, a big politics is going on in the office. Conspiracy is being plotted against you. It’s my job to alarm you. But you don’t show any reaction.”
“What happened? Should I be scared like my father? To be a saint after being frustrated of a few defeats or to abolish the culprits- what would you have opted out of these two options.
“Don’t bother”, Aaruni said this with a chuckle and hanged up the phone. One lobby of office was following Aaruni. Aaruni was under pressure after transfer. Some people had complained baselessly against him. One office named Shashak was master mind behind that. His favoured staffs were not posted according to his suggestions so he was intended to stop Aaruni’s promotion. Aaruni’s phone connection was dead for some days during that period. Afterwards some calls to Abu Dhabi and Dubai were made from that phone. However, to make an ISD call from a government connection one had to take permission. One of the Administrative persons in Aaruni’s office had availed that facility to Aaruni’s connection by applying in writing without informing Aaruni. He said to the vigilance investigators that since Aaruni was senior to him he had to obey his verbal orders many times. So he had applied for ISD facility to Aaruni following his verbal order.
The mafia has induced him and that Administrative officer also got himself trapped into it.
A fax came on Monday and Aaruni was transferred.
“Represent against this order”, the same familiar voice of Manindra.
“Why are you involved in these matters? Everything will be fine”, Aaruni said.
A party was held in Shashank’s house.
“Mr. Aaruni didn’t even represent for this. He left being relieved. It was like he had surrendered.”
“Promotion will be stopped for next ten year. Seniority will be lost. His name was defamed in addition. He was caught for talking to the smugglers of Dubai.”
Aaruni recalled his father’s transfer, struggle for honesty, failure in struggle and involving himself in tantra and worship afterwards; then he lost interest in home, office and all worldly possessions. The lines of worries are drawn on the face of Aaruni. But that couldn’t stay longer. He had changed his defeat into his victory many times whether it was job or business.
“Hey! Manindra! No phone calls for a long time! You people have forgotten me after my transfer out of state.”
“Why me only, every one had forgotten you here.”
“What do you think? I forgot everything. Do you remember? When I have opted Arts subject against father’s will. I threw all books of science into the pond at 11 o’clock in the night. I had not even left any residue for those books. And when I got first division marks in Arts then I visited village. Before that I missed many marriages, deaths and births. But I didn’t go there.”
“Hey! Brother! You remember everything. I thought you were also turned like uncle. These people don’t deserve pity. Just teach them lesson. Now I have faith that something will happen.”
“Again the same thing! If you have not changed then how can I. I had left you free for some days. Now listen. Do what I tell you to do. Don’t speak a lot. You know very well that my phone was dead for the period when ISD calls were made from the phone. A complaint was also made to the telephone department for that from home. But that was made on phone. No evidence of written document or receipt is available. Just find out whether the telephone department has records of such complaints or not.”
Manidra informed that the telephone department restarted giving complaint number from one after one month. So that didn’t work.
“Well, then try to find out what numbers and who were called from my number. And what are the phone numbers where call had been made from that foreigner’s number.”
“Yes, I just missed this fact.”
Now when Manindra brought list of telephone numbers, all were numbers of the telephone booths. No call was made to Aaruni’s phone.
At the time of hearing of vigilance when Aaruni explained those facts then Shashank was shocked. It was good for him as Shashank’s men were in touch with those booth owners otherwise all of them as well as Shanshank would be trapped. So Aaruni was released from the enquiry.
“Buddy, this is Manindra. Nothing happened to them.”
“I am transferred to Delhi. I will see. Just relax.”
“I became relaxed when you recalled past that day. You had to take revenge of insult of Kaka (uncle). Faces are changed. Situation is the same.”
Aaruni was posted to the information technology department of vigilance in Delhi. The department was known as Shunting posting department. Even being released from the enquiry of vigilance, Aaruni opted for that department. That showed that he was tired. He will be sitting at the corner for next five years. Shashank’s group was very happy.
On the other hand, Aaruni restarted his science that he had left in college. He was engaged with computer and its specialists for whole day. They had also seen such staff after a long time who was engaged in work so dedicatedly. Other people were merely completing their terms.
However, that department was very sensitive. Now, Aaruni was very friendly with his colleagues. All applications were being forwarded in time. New equipments were installed in the office. Earlier, officers were intended to pass the office hours and rush out of office. They were not even fulfilling the necessary necessities of the office.
One phone was installed in the office to practice anti-corruption. It had facility to record telephone calls of smugglers.
Time passed like that for some days.
“Manindra! No phone calls from you”.
“I am relaxed now”.
“Yes, it is time now. Do one thing. Publish the news of relation between Shashank and the smugglers in the news paper. Everything is ready for next.”
No sooner the news was published, the public relation officer of the Minister, who had work of informing the minister about news by submitting the clippings of the news had submitted the clipping of that news to the Minister. Time was not good so there were many charges on the area Minister; session of the parliament was going on those days so the Minister didn’t take any chance. He ordered for the enquiry on the issue.
The case came to the vigilance department. There was an interim meeting for that in which the department of information technicians were also invited.
Date of appointment was fixed. Aaruni attended the meeting as a member of vigilance committee. In most of the cases the department usually gives no objection certificate.
“No charge on Shashank is proved. Aaruni, your department was availed with Telephone Taping equipment. But in our office, even a fax machine is installed after six months of purchase. Then this machine must be kept uninstalled or any conversation is recorded.”
“Sir, this machine was brought on the 1st of this month and its use was started on the same date. The name of the smugglers involved in this case calls of whom were permitted to be recorded by me is given to you. Shashank had first conversation with some of them for a negligible length of time- two conversations each for only half a minute. The second dialogue was at 9 p.m. and the call goes to our staff after that conversation for only half a minute.”
“What is date of this?”
“Fifth”
“There was a raid on the sixth and nothing was found on that day. Give me details of these phone calls, Aaruni.”
“Shashank says on first conversation to come to his house at eight o’clock and meet him. It was important talk. In the second call he is angry and says that it is night o’clock and he has not yet come. There is a reply from the smuggler in this call that he is on the gate of Shashank’s house.”
“What is the third conversation?”
“The third call is made by the smuggler to the office staff. He orders to come to the office and he is also coming there. There is nothing more. No evidence could be found for this so if you allow me I can give no objection certificate.”
“Aaruni! What are you saying? Your department had not done anything so useful until today. You have discovered all links. Shashank says to meet him. The smuggler says that he is at the gate. Why does the employee go to the office so late? Shashank leaked the plan of raid and the employee removed all evidences. My staff returned empty handed when they made raid next morning. Now make one more call. Shashank’s number was not taped so according to law the sound in tape should match with his sample voice. When he picks the phone up just say wrong number and hang up.”
“As you wish.”
The procedure was rendered immediately.
“This is open and shut case.” The chief of the vigilance committee informed the fact to the director. The director called Shashank and gave him two options,
“Shashank! After these evidences you have only two options. You have to take compulsory retirement or the enquiry will be carried on.”
Shashank went for compulsory retirement. He left the department.
“Brother Manindra! No phone calls from you.”
“Brother I am relaxed from that day when I found that you remember everything of your childhood. There is no difference between you and Kaka. Only your ways are different. To make you to go for this way of victory I had prompted you many times. Do you remember that? But when you started telling me everything of your childhood I became relaxed from then only.”
“The progress graph of his study was fluctuating with his father. But he retreated to get success. Such incident happened even when he was in job. An accident occurred after a government tour. He stood on his feet after staying 15 days in ventilator and one year on support. He defeated the death. But when he returned office after one and half a year then no one believed. He had same familiar smile on his face. People said that the accident was not by chance but it was planned. Because it happened just after the accident of Naval.
VIDEHA MAITHILI SANSKRIT TUTOR- XXIII
संस्कृत शिक्षा च मैथिली शिक्षा च- २३
(मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत् - हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्)
-गजेन्द्र ठक्कुरः
(आगाँ)
ENGLISH संस्कृतम् मैथिली
Have you finished your household chores? गृहकार्यं समाप्तं किम्? घरक काज खतम कऽ लेलहुँ?
Yes, almost finished. आम्, समाप्तप्रायम्। हँ, प्रायः खतमे अछि।
Where were you for last two three days? गतानि द्वित्राणि दिनानि कुत्र आसीत् भवती? अहाँ दू-तीन दिनसँ कत्तऽ छलहुँ?
I had gone to my mother’s place. अहं मातृगृहं गतवती। हम अपन नैहर गेल रही।
Did you meet Shyamala recently? एषु दिनेषु श्यामलया मिलितवती किम्? श्यामलासँ अहाँक भेट हाल-फिलहालमे अछि?
I’ve had a lot of work since morning. मम प्रातः आरभ्य बहु कार्याणि। हमरा भोरेसँ बहुत कार्य रहै-ए।
Again today the maid-servant didn’t come. कर्मकरी अद्य पुनः न आगतवती। काज करएबाली आइ फेर नै आएल।
Guests will come tomorrow. अतिथयः श्वः आगमिष्यन्ति। पाहुन सभ काल्हि आबि रहल छथि।
Shall we go to the vegetable market today? अद्य शाकविपणिं गच्छामः किम्? आइ तरकारी बजार चली की?
I don’t have time today let’s go tomorrow. अद्य मम समयः नास्ति भोः श्वः गमिष्यामः। हमरा आइ समय नहि अछि, हमरा सभ काल्हि चलब।
Next month we will buy a washing machine. अग्रिम-मासे वयं वस्त्रप्रक्षालनयन्त्रं क्रेष्यामः। अगिला मास हम सभ एकटा वाशिंग मशीन कीनब।
A new departmental store has opened nearby. समीपे एकः नूतनः सर्ववस्तु-आपणः उद्धाटितः अस्ति। एकटा नव डिपार्टमेन्टल स्टोर बगलेमे खुजल अछि।
I heard that Rama’s daughter’s marriage is fixed. रमायाः पुत्र्याः विवाहः निश्चितः इति श्रुतवती। हमरा सुबामे आएल अछि जे रमाक बेटीक बियाह ठीक भऽ गेलै।
From today there is a sale of glass wares in that shop. अद्य आरभ्य तस्मिन् आपणे काचपात्राणां न्यूनमूल्येन विक्रयणम् अस्ति। आइसँ ओहि दोकानमे शीसाक समानक बिक्री शुरू छै।
Would you lend me some sugar? किञ्चित् शर्करां ददाति किम्? कनी चिन्नी देब?
Would you tell me it’s recipe? एतस्य पाककृतिं मां वदति किम्? हमरा एकरा बनेबाक ढ़ंग बताएब?
Come, let’s go to the temple. आगच्छतु, देवालयः गच्छामः। आऊ, हम सभ मन्दिर चली।
त्रयोविंशतितमः पाठः
भीमः दुर्योधनस्य अपेक्षया बलवान्।
राकेशस्य अपेक्षया नवीनः बलवान्।
अनीतायाः अपेक्षया तेजस्वनी उन्नता।
पाकिस्थानस्य अपेक्षया भारतम् विशालम्।
कावेर्याः अपेक्षया गङ्गा दीर्घा।
शख्याः अपेक्षया लया सुन्दरी।
सीताया अपेक्षया मालती सुन्दरी।
उन्नता
गुणी
चतुरः
ज्येष्ठः
सुन्दरी
सहनशीला
अलसः
वीरः
दीर्घा
विशालम्
वयम् पूर्वतन् पाठे अपेक्षया इत्यंशम् ज्ञातवन्तः। इदानीम् अस्मिन् विषये एव पुनः किंचित् अभ्यासं कुर्मः। इदानीम् भवन्तः अपेक्षया उपयुज्य वाक्यानि वदन्तु। वदन्ति वा ?
अहम् इदानीम् किमपि श्रावयामि। भवन्तः श्रुणवन्तु।
गीतम् मधुरम् अस्ति खलु।
रघुवंशम् उत्तमम् काव्यम् खलु।
कालिदासः श्रेष्ठः कविः खलु।
आम् कालिदास श्रेष्ठ खलु।
रामायणम् आदि काव्यम् खलु।
पुष्पम् सुन्दरम् अस्ति खलु।
भवन्तः खलु योजयित्वा वदन्तु।
अद्य शैत्यम् अधिकम् अस्ति खलु।
भोजन उत्तमम् अस्ति खलु।
परीक्षा सन्निहिता खलु।
माता कुशलिनी खलु।
पिता वित्तकोषे कार्यम् करोति खलु।
अनुजः विदेशम् गतवान् खलु।
-अत्र एव गणद्वयम् कुर्मः। भवत्यः एकम् वाक्यम् वदन्तु। भवन्तः खलु योजयित्वा तदैव वाक्यम् पुनः उच्चारयन्तु। अनन्तरम् भवन्तः एकम् वाक्यम् वदन्तु-भवत्यः खलु योजयित्वा पुनः उच्चारयन्तु। आरम्भः कुर्मः।भवान् आगमिष्यति खलु।
कुक्कुरः भौ भौ भौ इति भषति।
कुक्कुरः किम् करोति।
कुक्कुरः गृहस्य रक्षणम् करोति।
व्याघ्रः वने भवति।
व्याघ्र गर्जयति।
व्याघ्रः मृगम् मारयति।
गजः स्थूलः अस्ति।
गजः वस्तु नयति।
गजः ब्रिम्भति?
मार्जालः म्यों वदति।
मार्जालः किम् पिबति।
मार्जालः दुग्धम् पिबति।
मार्जालः मूषकम् खादति।
धेनुः अम्बा वदति।
धेनुः किम् ददाति।
धेनुः दुग्धम् ददाति।
धेनुः किम् खादति।
धेनुः तृणम् खादति।
अश्वः धावति।
अश्वः कथम् धावति।
अश्वः शीघ्रम् धावति।
अश्वः हेसते?
इदानीम् केशाञ्चित् पक्षिणाम् नाम् अपि जानीमः।
काकः रटति। काकः कथम् रटति। काकः का का का इति रटति।
शुकः सुन्दरः अस्ति- खलु।
शुकस्य वर्णः कः। शुकस्य वर्णः हरितः।
हंसः जले संचरति। हंसः जले संचरति।
चटकः चिल्लति।
सिंहः गर्जति।
व्याघ्रः गर्जति।
हंसः जले संचरति।
गजः ब्रिम्हति।
वृषभः नर्दति।
अश्वः हेसते।
मार्जालः वदति।
कुक्कुरः भषति।
काकः रटति।
चटकः चिल्लति।
काकः रटति का का
धेनुः वदति अम्बा
विडालः वदति कथम् म्यां
चटकः वदति कथम् चिं चि
कुक्कुरः भषति कथम् भौं भौं
बे (भे)गः करति कथम् बै बै
अजः वदति कथम् मैं मैं
सर्पः करति कथम् भुस् मुस्
पिकः कूजति कथम् पो पे
सुभाषितम्
सुलभाः पुरुषाः लोके सततं प्रियवादिनः।
अप्रियस्यय च पर्थ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभः॥
इदानीम् यत् सुभाषितम् श्रुतवन्तः तस्य तात्पर्यम् एवम् अस्ति।
लोके प्रिय वाक्यानि वक्तुम् सर्वे उत्सहन्तु एव। तथैव श्रोतुम् अपि बहुजनाः सज्जाः भवन्ति। अप्रियम् किन्तु हितकरम् तादृश वचनानि केचनेव वदन्ति। तथैव तानि वचनानि श्रोतुम् केचन् एव उत्सहसन्तु। अतः एव लोके अप्रियस्य पथ्यस्य वचनस्य श्रोता वक्ता द्वौ अपुइ दुर्लभम्।
कथा
महाराजस्य विक्रमादित्यस्य औदार्यम् प्रसिद्धमेव। विक्रमादित्यः परम् उदारः प्रजारंजकः च आसीत्। सः प्रजानाम् कष्ट परिहारार्थम् सर्वत्र सदा सञ्चारम् करोति स्म।
एकदा अश्वारोही विक्रमादित्यः अरण्यमार्गे एकाकी एव गच्छन् आसीत्। संध्याकालः सन्निहतः इति शीघ्रम् वनात् बहिः गच्छामि-इति चिन्तयन् आसीत्। तावता एव दूरे कश्याश्चित् गोहोर आक्रन्दनम् श्रुतम्। ताम् दिशाम् अनुश्रित्य एव विक्रमादित्यः तत्र गतवान्। तदा वर्षाकालः आसीत्। अतः नदीषु प्रवाहः आसीत्। भूमिः सर्वथा पंकिला आसीत्। सर्वे गर्ताः अपि जलेन् पूर्णाः आसन्। एतादृशे कश्मिंश्चित् मलिन् गर्ते काचित् गौं पतित्वा आक्रन्दति स्म।एतद् दृष्टवा महाराजः गौः रक्षनार्थम् स्वयमेव पंकम् अवतीर्णवान्। किन्तु स्वोपि पंके निमग्नः इव अभवत्। रात्रिः इत्यत् एकाकी एव धेनुम् रक्षितुम् सह न शक्तवान्। धेनुः अपि प्राण भीत्या उच्चैः आक्रन्दति स्म। तत् श्रुत्वा कश्चन् सिंहः तत्र आगतः। सः गाम् खादितुम् इष्टवान् च। तदा तत्र विद्यमानः अश्वः सिंहम् दृष्ट्वा पलायनम् कृतवान्। इदानीम् एकाकी महाराजः गाम् रक्षितुम् इच्छति, किन्तु सिंहः गाम् खादितुम् इच्छति। अतः महाराजः सिंहस्य भय जननार्थम् स्वस्य कोषात् खड्गम् स्वीकृतवान्। यदा यदा सिंहः गाम् खादितुम् आगच्छति तदा तदा एषः महाराजः खड्गम् दर्शयन् तम् सिंहम् भाययति स्म। गर्तस्य समीपे एकः वटः वृक्षः आसीत्। ततस्थितः कश्चन् शुकः एत सर्वम् पश्यन् आसीत्। सः महाराजम् उक्तवान्- भोः राजन्। अस्याः गोः मरणम् सन्निहितम् अस्ति। भवान् एताम् सिंहात् रक्षति चेत् अपि किमपि प्रयोजनम् नास्ति। यतः पंके पतिता धेनुः प्रातःकालात् पूर्वमेव निमज्जयति। वृथा भवतः प्राणम् त्यागम् करोति। अतः भवान् व्यर्थम् कार्यम् त्यजतु। इदानीम् सिंहः एकः एव अस्ति। घण्टाभ्यन्तरे सिंही अपि अत्र आगच्छति। किंचित् कालानन्तरम् अन्य क्रूर जन्तवः अपि आगच्छन्ति। अतः व्यर्थकार्यम् परित्यजतु। भवतः प्राण रक्षणार्थम् अस्य वृक्षस्य उपरि उपविशतु। इति। शुकस्य वचनम् श्रुत्वा महाराजः उक्तवान्- भो शुका। मद् विषये तव प्रीतिम् ज्ञात्वा संतुष्टः अहम्। किन्तु अनीति मार्गम् भवान् न उपदिशतु। यतः स्वस्य प्राण रक्षणार्थम् क्रीमि कीटादयः अपि यतन्ते। किन्तु यः अन्येषाम् रक्षणार्थम् जीवति सः एव धन्यः। मम् प्रयत्नेन् लाभः भवति वा न वा अहम् न जानामि। किन्तु गोः रक्षणम् मम् कर्तव्यम् – मम् प्राणान् परिकृत्यवा अहम् एताम् धेनुम् रक्षामि एव। इति उक्तवान्।ततः राजा प्रातःकाल पर्यन्तम् अपि गोः रक्षणम् कृतवान्। प्रातः काले सिंहरूपेण स्थितः देवेन्द्रः स्वस्य रूपम् प्राकट्यत्। गोरूपेण स्थिता भूदेवी शुकरूपेण स्थितः धर्मः चापि स्व स्वरूपम् प्रकटतिवन्तः। ते सर्वेपि विक्रमस्य त्याग शौर्यम् च श्लाघित्वा तम् अभिनन्दितवन्तः। एवम् विक्रमस्य औदार्यम् लोकोत्तरम् आसीत्।
१.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions
२.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download,
३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads,
४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos
५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos
"विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाऊ।
६.विदेह मैथिली क्विज :
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७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर :
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८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित :
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९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" :
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१०.विदेह इंडेक्स :
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११.विदेह फाइल :
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१२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग)
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१३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा
http://videha-braille.blogspot.com/
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१८. 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला
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२०.श्रुति प्रकाशन
http://www.shruti-publication.com/
२१.विदेह- सोशल नेटवर्किंग साइट
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२४.गजेन्द्र ठाकुर इडेoक्स
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२५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइटhttp://videha123radio.wordpress.com/
२६. नेना भुटका
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महत्त्वपूर्ण सूचना (१):महत्त्वपूर्ण सूचना: श्रीमान् नचिकेताजीक नाटक "नो एंट्री: मा प्रविश" केर 'विदेह' मे ई-प्रकाशित रूप देखि कए एकर प्रिंट रूपमे प्रकाशनक लेल 'विदेह' केर समक्ष "श्रुति प्रकाशन" केर प्रस्ताव आयल छल। श्री नचिकेता जी एकर प्रिंट रूप करबाक स्वीकृति दए देलन्हि। प्रिंट संस्करणक विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे।
महत्त्वपूर्ण सूचना (२): 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. प्रकाशित कएल जा रहल अछि: लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-1 e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com website:http://www.shruti-publication.com
महत्त्वपूर्ण सूचना:(३). पञ्जी-प्रबन्ध विदेह डाटाबेस मिथिलाक्षरसँ देवनागरी पाण्डुलिपि लिप्यान्तरण- श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत। पञ्जी-प्रबन्ध (शोध-सम्पादन, डिजिटल इमेजिंग आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- तीनू पोथीक शोध-संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा Combined ISBN No.978-81-907729-6-9
महत्त्वपूर्ण सूचना:(४) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा' रहल गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे।कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)-लेखक गजेन्द्र ठाकुर Combined ISBN No.978-81-907729-7-6विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे ।
महत्त्वपूर्ण सूचना (५): "विदेह" केर २५म अंक १ जनवरी २००९, प्रिंट संस्करण विदेह-ई-पत्रिकाक पहिल २५ अंकक चुनल रचना सम्मिलित। विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे।
महत्त्वपूर्ण सूचना (६):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे
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कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर
गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७
Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding:
Language:Maithili
६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india)
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विदेह: सदेह: 1: तिरहुता : देवनागरी
"विदेह" क २५म अंक १ जनवरी २००९, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिकाक पहिल २५ अंकक चुनल रचना सम्मिलित।
विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/
विदेह: वर्ष:2, मास:13, अंक:25 (विदेह:सदेह:1)
सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर
गजेन्द्र ठाकुर (1971- ) छिड़िआयल निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) ,पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण),महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक (खण्ड 1 सँ7 ) नामसँ। हिनकर कथा-संग्रह(गल्प-गुच्छ) क अनुवाद संस्कृतमे आ उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) क अनुवाद संस्कृत आ अंग्रेजी(द कॉमेट नामसँ)मे कएल गेल अछि। मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली शब्दकोश आ पञ्जी-प्रबन्धक सम्मिलित रूपेँ लेखन-शोध-सम्पादन-आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण। अंतर्जाललेल तिरहुता यूनीकोडक विकासमे योगदान आ मैथिलीभाषामे अंतर्जाल आ संगणकक शब्दावलीक विकास। ई-पत्र संकेत- ggajendra@gmail.com
सहायक सम्पादक: श्रीमती रश्मि रेखा सिन्हा
श्रीमति रश्मि रेखा सिन्हा (1962- ), पिता श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिन्हा, पति श्री दीपक कुमार। श्रीमति रश्मि रेखा सिन्हा इतिहास आ राजनीतिशास्त्रमे स्नातकोत्तर उपाधिक संग नालन्दा आ बौधधर्मपर पी.एच.डी.प्राप्त कएने छथि आ लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर आलेख-प्रबन्ध सेहो लिखने छथि।सम्प्रति “विदेह” ई-पत्रिका(http://www.videha.co.in/ ) क सहायक सम्पादक छथि।
मुख्य पृष्ठ डिजाइन: विदेह:सदेह:1 ज्योति झा चौधरी
ज्योति (1978- ) जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी ; आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी); निवास स्थान- लन्दन, यू.के.; पिता- श्री शुभंकर झा, ज़मशेदपुर; माता- श्रीमती सुधा झा, शिवीपट्टी।ज्योतिकेँ www.poetry.comसँ संपादकक चॉयस अवार्ड (अंग्रेजी पद्यक हेतु) ज्योतिकेँ भेटल छन्हि। हुनकर अंग्रेजी पद्य किछु दिन धरि www.poetrysoup.com केर मुख्य पृष्ठ पर सेहो रहल अछि।
विदेह ई-पत्रिकाक साइटक डिजाइन मधूलिका चौधरी (बी.टेक, कम्प्यूटर साइंस), रश्मि प्रिया (बी.टेक, कम्प्यूटर साइंस) आ प्रीति झा ठाकुर द्वारा।
(विदेह ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ http://www.videha.co.in/ पर ई-प्रकाशित होइत अछि आ एकर सभटा पुरान अंक मिथिलाक्षर, देवनागरी आ ब्रेल वर्सनमे साइटक आर्काइवमे डाउनलोड लेल उपलब्ध रहैत अछि। विदेह ई-पत्रिका सदेह:1 अंक ई-पत्रिकाक पहिल 25 अंकक चुनल रचनाक संग पुस्तकाकार प्रकाशित कएल जा रहल अछि। विदेह:सदेह:2 जनवरी 2010 मे आएत ई-पत्रिकाक26 सँ 50म अंकक चुनल रचनाक संग।)
Tirhuta : 244 pages (A4 big magazine size)
विदेह: सदेह: 1: तिरहुता : मूल्य भा.रु.200/-
Devanagari 244 pages (A4 big magazine size)
विदेह: सदेह: 1: : देवनागरी : मूल्य भा. रु. 100/-
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पेपरबैक संस्करण
उपन्यास
मोनालीसा हँस रही थी : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.100.00
कहानी-संग्रह
रेल की बात : हरिमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2007मूल्य रु. 70.00
छछिया भर छाछ : महेश कटारे प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 100.00
कोहरे में कंदील : अवधेश प्रीत प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 100.00
शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00
आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 90.00
कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 90.00
मैथिली पोथी
विकास ओ अर्थतंत्र (विचार) : नरेन्द्र झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 250.00
संग समय के (कविता-संग्रह) : महाप्रकाश प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00
एक टा हेरायल दुनिया (कविता-संग्रह) : कृष्णमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 60.00
दकचल देबाल (कथा-संग्रह) : बलराम प्रकाशन वर्ष2000 मूल्य रु. 40.00
सम्बन्ध (कथा-संग्रह) : मानेश्वर मनुज प्रकाशन वर्ष2007 मूल्य रु. 165.00 शीघ्र प्रकाश्य
आलोचना
इतिहास : संयोग और सार्थकता : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर
हिंदी कहानी : रचना और परिस्थिति : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर
साधारण की प्रतिज्ञा : अंधेरे से साक्षात्कार : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर
बादल सरकार : जीवन और रंगमंच : अशोक भौमिक
बालकृष्ण भट्ïट और आधुनिक हिंदी आलोचना का आरंभ : अभिषेक रौशन
सामाजिक चिंतन
किसान और किसानी : अनिल चमडिय़ा
शिक्षक की डायरी : योगेन्द्र
उपन्यास
माइक्रोस्कोप : राजेन्द्र कुमार कनौजिया
पृथ्वीपुत्र : ललित अनुवाद : महाप्रकाश
मोड़ पर : धूमकेतु अनुवाद : स्वर्णा
मोलारूज़ : पियैर ला मूर अनुवाद : सुनीता जैन
कहानी-संग्रह
धूँधली यादें और सिसकते ज़ख्म : निसार अहमद
जगधर की प्रेम कथा : हरिओम
अंतिका, मैथिली त्रैमासिक,सम्पादक- अनलकांत
अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4,शालीमारगार्डन,एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023,
आजीवन सदस्यता शुल्क भा.रु.2100/-चेक/ ड्राफ्ट द्वारा “अंतिका प्रकाशन” क नाम सँ पठाऊ। दिल्लीक बाहरक चेक मे भा.रु. 30/- अतिरिक्त जोड़ू।
बया, हिन्दी छमाही पत्रिका,सम्पादक- गौरीनाथ
संपर्क- अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4,शालीमारगार्डन,एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023,
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अंतिका प्रकाशन
सी-56/यूजीएफ-4, शालीमार गार्डन,एकसटेंशन-II
गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.)
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मोबाइल नं.9868380797,
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ई-मेल: antika1999@yahoo.co.in,
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श्रुति प्रकाशनसँ
१.पंचदेवोपासना-भूमि मिथिला- मौन
२.मैथिली भाषा-साहित्य (२०म शताब्दी)- प्रेमशंकर सिंह
३.गुंजन जीक राधा (गद्य-पद्य-ब्रजबुली मिश्रित)- गंगेश गुंजन
४.बनैत-बिगड़ैत (कथा-गल्प संग्रह)-सुभाषचन्द्र यादव
५.कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर
६.विलम्बित कइक युगमे निबद्ध (पद्य-संग्रह)- पंकज पराशर
७.हम पुछैत छी (पद्य-संग्रह)- विनीत उत्पल
८. नो एण्ट्री: मा प्रविश- डॉ. उदय नारायण सिंह “नचिकेता” प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (ISBN NO.978-81-907729-0-7 मूल्य रु.१२५/- यू.एस. डॉलर ४०) आ पेपरबैक (ISBN No.978-81-907729-1-4 मूल्य रु. ७५/- यूएस.डॉलर २५/-)
९/१०/११ 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर१.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-1 ३.पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर , नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा ।
१२.विभारानीक दू टा नाटक: "भाग रौ" आ "बलचन्दा"
१३. विदेह:सदेह:१: देवनागरी आ मिथिला़क्षर संकस्करण:Tirhuta : 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1:तिरहुता : मूल्य भा.रु.200/-
Devanagari 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1: : देवनागरी : मूल्य भा. रु.100/-
श्रुति प्रकाशन, DISTRIBUTORS: AJAI ARTS, 4393/4A, Ist Floor,AnsariRoad,DARYAGANJ. Delhi-110002 Ph.011-23288341, 09968170107.Website: http://www.shruti-publication.com
e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com
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२. संदेश
१.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत।
२.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी।
३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत।
४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।
५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह|
६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।
७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू।
८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।
९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना।
१०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।
१२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।
१३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।
१४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।
१५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी।
१६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक एहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।
१७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल।
विदेह
मैथिली साहित्य आन्दोलन
(c)२००८-०९. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। सहायक सम्पादक: श्रीमती रश्मि रेखा सिन्हा। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।
(c) 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ' संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु
'विदेह' ३८ म अंक १५ जुलाइ २००९ (वर्ष २ मास १९ अंक ३८)-part ii
१. मूल उपन्यास-कोंकणी-लेखक-तुकाराम रामा शेट, हिन्दी अनुवाद-डॉ. शंभु कुमार सिंह, श्री सेबी फर्नांडीस, मैथिली अनुवाद-डॉ. शंभु कुमार सिंह
मूल उपन्यास : कोंकणी
लेखक : तुकाराम रामा शेट
हिन्दी अनुवाद : डॉ. शंभु कुमार सिंह, श्री सेबी फर्नांडीस.
मैथिली अनुवाद : डॉ. शंभु कुमार सिंह
श्री तुकाराम रामा शेट (जन्म 1952) कोंकणी भाषामे ‘एक जुवो जिएता’—नाटक, ‘पर्यावरण गीतम’, ‘धर्तोरेचो स्पर्श’—लघु कथा, ‘मनमळब’—काव्य संग्रह केर रचनाक संगहि कैकटा पुस्तकक अनुवाद,संपादन आ प्रकाशनक काज कए प्रतिष्ठित साहित्यकारक रूपमे ख्याति अर्जित कएने छथि। प्रस्तुत कोंकणी उपन्यास—‘पाखलो’ पर हिनका वर्ष 1978 मे ‘गोवा कला अकादमी साहित्यिक पुरस्कार’ भेटि चुकल छनि।
डॉ शंभु कुमार सिंह
जन्म: 18 अप्रील 1965 सहरसा जिलाक महिषी प्रखंडक लहुआर गाममे। आरंभिक शिक्षा, गामहिसँ,आइ.ए., बी.ए. (मैथिली सम्मान) एम.ए. मैथिली (स्वर्णपदक प्राप्त) तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। BET [बिहार पात्रता परीक्षा (NET क समतुल्य) व्याख्याता हेतु उत्तीर्ण, 1995] “मैथिली नाटकक सामाजिक विवर्त्तन” विषय पर पी-एच.डी. वर्ष 2008, तिलका माँ. भा.विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। मैथिलीक कतोक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे कविता,कथा, निबंध आदि समय-समय पर प्रकाशित। वर्तमानमे शैक्षिक सलाहकार (मैथिली) राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर-6 मे कार्यरत।
सेबी फर्नांडीस
पाखलो
आइ रबि छैक। हमर निन्न कने देर सँ खुजल। हम अपन कम्मल सुलूकेँ ओढ़ा देलियैक। ओछाओन पर पड़ल-पड़ल हमर नजरि देवाल पर गेल। गोविन्द अपना संगहि भगवानक फोटो ल’ गेल छल। उज्जर रंगक देवाल पर आब कोनो फोटो नहि रहैक। ओ एकदम सुन्न बुझाइक।
हम ओछाओन पर बैसले-बैसल सोचैत रही। गोविन्द नोकरी करबाक लेल पणजी शहरमे छल। बाबूजीक मुइलाक पश्चात् ओ अपन मायकेँ अपना संगहि पणजी ल’ आएल छल। हम दुनू गोटे एहि तम्बू मे रहैत रही। हम आ हमर भगिनी।
हम उठलहुँ, खिड़की खोललहुँ आ दरबाजा खोलहि वला रही कि एतबहिमे आलेक्सक आवाज सुनलहुँ।
“यौ पाखलो ! एखन धरि सुतलहि छी? पाखलो... यौ पाखलो.....”
बिना किछु बाजनहि हम दरबाजा खोलि देलियैक। हम दरबाजा बन्न केलहुँ आ एकटा बासन ल’ कए लगीचक होटल जयबाक लेल ओकरा पाछू-पाछू चुपचाप चलि देलहुँ।
आलेक्स हमर नेनपनक मीत थिक। हमरा सभमे एखनहुँ घनिष्ठता अछि। एक्कहि ठाम काज करैत छी। ओहो ड्राइवर आ हमहूँ। एक्कहि कम्पनीमे नोकरी करैत छी आ एक्कहि रंगक ट्रक चलबैत छी।
हमरा गुमसुम चलैत देखि ओ बाजल...
औ जी ! कोन सोचमे डूबल छी?
किछुओ तँ नहि, हम अचकचा कए कहलहुँ।
किछु किऐक नहि? जँ अहाँक बियाह भ’ जाय तँ भगिनीकेँ देख’ वाली क्यो तँ भ’ जेतीह?
एहि बात पर हँसितहि हम पूछि देलियैक...
हमरा के अपन बेटी देत?
ई बात सुनितहि ओ जोर-जोरसँ हँस’ लागल।
ऐं यौ आलेक्स, अहाँक पासपोर्ट बनि गेल की? ओकर हँसी रोकबाक लेल आ किछु आर बाजबाक लेल हम ओकरा सँ पूछलहुँ।
हँ... आलेक्स बाजल।
तखन दुबई कहिया जाएब? हम पुछलियनि।
अगिला सप्ताह, प्रार्थनोत्सव केर बाद।
प्रार्थनोत्सव केर बाद?
हाँ बरु वैह दिन।
वैह दिन किऐक? उत्सवक बाद चलि जाएब...।
नहि, असलमे ओहि दिन हमर मीत जा रहल अछि एहि लेल हम ओकरहि संगे जा चाहैत छी।
तखन तँ अहाँकेँ हमरा कम्पनीक नोकरी छोड़’ पड़त।
जाय दिअ एहन भिखमंगा नोकरी केँ? ओहुना हमरा सन लोक भारतमे रहि कए पाइ अर्जित क’सकैत अछि की? ओतए मजूरीयो तँ बेसी छैक?
तखन अहाँक विदेश जायब एकदम पक्का, की ने?
हँ...।
विदेश जुनि जाउ, पछिला किछु दिनसँ आलेक्स हमरा यैह कहैत छल।
हमरा बाटमे अड़ँगा जुनि लगाउ, हम हुनका चेतबैत कहलियनि आ चुपचाप बाट चलए लागलहुँ।
जखन गोविन्दजी गाम छोड़ि पणजी शहर रहबाक लेल गेल छलाह तखनहुँ हमरा बड़ खराप लागल छल। मुदा आब तँ आलेक्स अपन गाम आ देश छोड़ि परदेस जाइत छल, आइ हमरा कनेको खराप नहि लागि रहल अछि।
हम दुनू गोटे होटल पहुँचलहुँ। भीतर जयतहि सभ क्यो हमरा घूरि-घूरि कए देखय लागल। बुझाइत अछि जे ओकरा सबहिक नजरि हमर कैल टनटन केश आ कैल रोइयाँ पर चलि गेल हो, ओ मोनहि-मोन सोचलक। हमर कूर आँखि, उज्जर चाम आ गसगर देह...
पाखलो, अहाँक बासनमे दूध ध’ दी वा चाह? होटलवला पूछलक। हम भरि बासन चाह ल’ लेलहुँ। दू टा बड़का पाँवरोटी आ एकटा कांकण (छोट पाँवरोटी) लेलहुँ। आलेक्स अपन मीतक संग दुबई जाइवला बात करैत रहल। ओकर मीत ओतएसँ ओकरा लेल कोनो विदेशी समान लएबा लेल कहैत रहैक। विदेश जयबासँ संबंधित बात करएवला आलेक्सकेँ छोड़ि हम अपना घरक बाट लेलहुँ।
पड़ोसक रुक्मिणी मौसी हमरा घर आयल छलीह। ओ सुलूकेँ उठा कए मुँह धोबाक लेल कहलथि। हमहुँ अपन मुँह धो लेलहुँ। दू टा कपमे चाह ढ़ारलहुँ आ रूक्मिणी मौसीकेँ चाह पीबाक लेल कहलियनि।
औ बाउ! हम एकनहि घरसँ चाह पीबि कए आएल छी, आ ओहुना की हम होटलक चाह पीबैत छी?रूक्मिणी मौसीक एहि जबाब पर हम चुप रहि गेलहुँ। ताधरि हम सुलूक मोन बहटारि नेने छलहुँ। ओ थपड़ी पाड़ैत हमरा लग आयलि आ पूछ’ लागल... मामा आइ रबि छियैक ने? आइ तँ अहाँ काज पर नहि जाएब?
हम हँ, कहि अपन माथ डोलौलहुँ।
मौसी आइ अहाँ हमरा अपना ओहिठाम नहि ल’ जाएब। आइ हम एतहि रहब...मामा लग। ओ मौसीसँ बाजलि।
हँ दाइ.... हम ओना अहाँकेँ किएक ल’ जाएब?
हम आ सुलू चाह पीबतहि छलहुँ तावत रुक्मिणी मौसी बरतन-बासन धोब’ चलि गेलीह।
सुलूक बाबूजी ओकरा सम्हारबाक लेल तैयार नहि रहथि। ओहि समय ओ केवल डेढ़ बरखक छलीह। नीक जकाँ बाजियो नहि होइक। केवल दूई चारि शब्दहि बाजि सकैत छलीह। आब तँ ओ साढ़े तीन बरखक भ’ गेल अछि, मुदा देखबामे पाँच-साढ़े पाँच बरखक बुझाइत छलीह। गोर-नार चेहरा। हम ओकरा माथ पर हाथ फेरलहुँ। मोम-सन नरम केश आ कूर आँखि। हम ओकरा आँखिमे देखलहुँ, ओहो हमरा आँखिमे देखलक। एक दोसराक आँखिमे हमरा सभक छवि समा गेल। ऐहन बुझाइत छल जेना ओ हमरा सँ किछु पुछ’ चाहैत अछि। हमरहुँ आँखिमे एकटा चमक सन आबि गेल। एहन बुझाइत छल जेना ओ पूछए चाहैत छलीह, "अहाँक आँखिसँ हमर कोनो पुरान संबंध अछि ?" हमर नजरि ओकरा कैल केश पर गेल। ने जानि किएक ओकर गोर-नार चाम, कैल केश आ कूर आँखि देखि हमरा एहन प्रतीत होमए लागल जेना पूरा आकाश मेघसँ आच्छादित भ’ गेल होअए, ठीक तहिना हमर मोन अतीतक स्मरणसँ भरि गेल...। एतबहिमे रुक्मिणी मौसी घरक काज पूरा क’ कए अपन घर जाहि पर रहथि कि हम सुलूकेँ हुनका संगहि जयबाक लेल कहलियनि।
हम नहि जायब, सुलू अपन माथ डोला कए जबाब देलक।
नहि, नहि हमरा काज पर जयबाक अछि, अहाँ मौसीक संग चलि जाउ। दूपहरमे हम जल्दीए आबि जाएब आ अहाँकेँ ल’ आएब, एतबा कहि हम सुलूकेँ समझएबाक प्रयास कएलहुँ।
सुलू कानय लागलीह। मुदा पछाति जा कए ओ मौसीक संगे जयबाक लेल तैयार भ’ गेलीह। रुक्मिणी मौसी सुलूकेँ ल’ कए चलि गेलीह। हम दरबाजा बन्न क’ लेलहुँ। हमरा दिमागमे आयल सभटा पुरान स्मृति एकटा भयंकर गरज केर संगहि बिखरि गेल। बुझू हम अपना आपकेँ पूर्ण रुपेण ओकरहिंमे ताक’ लागलहुँ.... अपन पहिचानक खोज करय लागलहुँ...।
गोविन्दक दादी द्वारा कहल गेल खिस्सा एखन धरि पाखलो केँ स्मरण छलनि।
शाली आ सोनू दुनू भाय-बहिन रहथि। गामक एकटा छोर पर हुनक घास-फूसक घर छलनि आ अपन किछु खेती-बारी सेहो रहनि। ओ अपनहुँ खेती-बारी करैत छल आ दोसरोक खेतमे काज करबाक लेल चलि जाइत छल। एकर अतिरिक्त ओ गरमीमे मजूरीयोक काज करैत छल।
एकदिन शाली लकड़ी काटबाक लेल जंगल गेलीह। कुमारि शालीक संग तीन टा आर स्त्री लोकनि छलीह। सभ दिनक भाँति ओ सभ लकड़ी काटि कए ओकर बोझ सेहो बना लेलथि, तखनहि ओकरा सभकेँ सीटी केर आवाज सुनबामे अयलनि। ओ चारू गोटे डरि गेलीह। ताहि दिन पाखलो (फिरंगी) जंगलमे शिकार करबाक लेल अबैत छलाह, ओ एहन सुनने छलीह। फिरंगी केर हो-हल्ला आ स्त्रीगण पर कयल गेल अत्याचारसँ ओ परिचित छलीह। ओहि सीटीक आवाज सुनि ओकर तँ जेना होशे-हवास गुम भ’ गेल। ओ बहुत घबरा गेलीह। तावत हाथमे बंदूक नेने तीनटा फिरंगी ओतए पहुँचि गेल। बाघक समक्ष आबि गेलाक पश्चात् जेना आन जानवर लंक ल’ लैत अछि ठीक ओहिना ओ सभ लकड़ीक बोझ छोड़ि भागल। तीनो फिरंगी ओकरा सभक पीछा करय लागल। अपन जान बचयबाक लेल भाग’ वाली शाली गिरैत-पड़ैत बहुत थाकि गेल छलीह। आब आर बेसी गतिएँ दौड़ सकब ओकरा बुता केर बात नहि रहि गेल छल। ओ पाछू ताकलक, तँ देखलक जे एकटा फिरंगी अपन कन्हा पर बंदूक आ छाती पर एकटा तमगा लगौने ओकरहि पाछू दौड़ल आबि रहल छल। ओहि फिरंगीकेँ देखि शाली अपन जान बचएबाक लेल अपन अंतिम शक्ति लगा कए दौड़लीह। ओ सभटा स्त्रीगणकेँ पाछू छोड़ि आर जी-जानसँ दौड़’ लागलीह। बहुत बेसी थकान हेबाक कारणेँ आब ओ थाकि कए चकनाचूर भ’ गेल छलीह, जोर-जोरसँ उपर नीचाँ होमए बला ओकर छाती आब फाटि कए बाहर निकलि जाएत, ओकरा एहने बुझाब' लागलैक। ओकर दौड़बाक गति मंद होम’ लागलैक आ एतबहिमे ओ फिरंगी ओकरा लगीच पहुँचि गेल। लगीचक आन-आन स्त्रीगणकेँ छोड़ि ओ फिरंगी शालिएक दिस बढ़ल आ अंततः ओ शालीकेँ अपन बाँहिमे जकड़ि लेलक।
एतबहिमे पाछूओक दू टा फिरंगी ओतए पहुँचि गेल। ओहो सभ शालीक दिस अपन हाथ बढ़ौलक, मुदा ओ फिरंगी ओहि दुनू फिरंगीकेँ पुर्तगाली भाषामे किछु कहलक। ई सुनि ओ दुनू पाछू हटल आ आगू भागए वाली स्त्री सभक पीछा करए लागल।
फिरंगीक बाँहिमे शालीक साँस फूल’ लागलैक आ ओकर वाक् सेहो बन्न भ’ गेलैक। ओहि फिरंगीक देहमे शैतान आबि गेल छलैक।
क्रमशः
२.मूल तेलुगु पद्य- अन्नावरन देवेन्दर-अंग्रेजी अनुवाद- पी.जयलक्ष्मी आ मैथिली अनुवाद-गजेन्द्र ठाकुर
कवि अन्नावरम् देवेन्दर आन्ध्र प्रदेशक करीमनगर जिलासँ छथि आ तेलुगु भाषाक तेलंगाना बोलीमे तेलंगाना राज्यक संवेदना आ संस्कृति आ ओकर अलग राज्यक लेल संघर्षकेँ स्वर दैत छथि। हुनकर छह टा कविताक संग्रह छपल छन्हि। महात्मा जोतिबा फुले फेलोशिप २००१, रंजनी कुन्दुरती कविता पुरस्कारम् २००६, डॉ. मलयश्री साहिति पुरस्कारम् २००६, रांगिनेनी येनम्मा साहित्य पुरस्कारम् २००७ पुरस्कारसँ सम्मानित। ओ जिला परिषद, करीमनगरक पंचायती राज विभागमे सीनियर असिस्टेन्ट छथि।
पी.जयलक्ष्मी, ओस्मानिया विश्वविद्यालयक , निजाम कॉलेज हैदराबादमे अंग्रेजी विभागमे एसोसिएट प्रोफेसर छथि। विगत ३० बरखसँ अंग्रेजीक अध्यापन। हुनकर विशेषज्ञता अंग्रेजीमे भारतीय कविता, अनुवाद आ अनुवादशास्त्र अछि।२००३ मे भार्गवी रावक संग मिलि कऽ शीला सुभद्रा देवीक सितम्बर ११ आ ओकर परिणामपर तेलुगु काव्यक अंग्रेजीमे वार अ हर्ट्स रैवेज नामसँ अनुवाद। २००७ मे गोपीक ननीलू केर अंग्रेजी अनुवाद। स्प्रिन्ग नामसँ अन्नावरम् देवेन्दरक कविताक अंग्रेजी अनुवाद प्रेसमे अछि।
(तेलुगु कविता: तेलुगुसँ अंग्रेजी पी.जयलक्ष्मी द्वारा, अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर द्वारा)
पानि अछि , मात्र आँखिक नोर
ठोप, ठोपे टा मे
टपटप खसैत पानि ठोपे-ठोपे,
हम नहि कऽ सकैत छी वर्णित,
पानि नहि बहैत अछि निरावरोध,
सुबर्ना नहि अछि भरैत कखनो।
कलसँ भनसाघर धरि,
भनसाघरसँ सोझाँक बारी धरि
भागैत एतएसँ ओत्तऽ
एम्हर-ओम्हर करघाक नमरैत ताग सन
वस्त्रक संरचना सन
एक्के घुमानमे हम जाइ छी घूमि।
कनैत बाल, पानि भरबाक अछि काल
दूधक झोँक आ हमर रजस्वला एकान्त
हुँह ! सभटा एक्के बेर !
पानि मात्र सप्ताहमे दू दिन,
छौँकी आ झगड़ा कलपर
तैयो छी हम सभ स्त्री
जे रहैत छी मिलि कऽ
बेकाल मे
दैत प्राणोक उत्सर्ग।
ई सभटा झंझवात पानिये टा लेल
नहि कहि सकैत छी अहाँकेँ अपन पानिक समस्या-
सम्पूर्ण भोर खतम होइत अछि एहि १५ मिनटक कार्यक लेल
कनेक काल भातक बिनु बिसरियो सकैत छी
मुदा बिनु पानिक जीवन चलत?
एकत्रित भेल जे नहि अछि हमर बेटोक लेल पर्याप्त
ताहि लेल, रस्सा भरि नमगर पाँति।
के अकानैत अछि संघर्ष?
घर भरल लोक
गाछ जेकाँ ठाढ़
आकि कुरसी जेकाँ बैसल
तमसाइत हमरापर जे हम छी पछुआएल
दौगैत छी बिनु लक्ष्यक।
मुदा नहि हिलबैत छथि आँगुरो हमरा सहायतार्थ
हमर हाथ ओहि बोरिंगकेँ ठीक करैत भेल जे चोटिल।
ओहि पम्पकेँ पीटैत निकलैत अछि मात्र छुच्छ ध्वनि
हमर प्राण बहार भऽ जाइत अछि ओतए काज करैत
कर्र कर्र कर्र कर्र
हमर बाँहिक दर्द आ छातीक पीड़ा
पाताल धरि
पानि बिला जाइत अछि कतहु गहींर नीचाँ
मुदा तैयो नहि बकसैत
जे हम काज करैत छी खतम करबाक लेल
चम्मच भरि पानिक बुन्द
सेहो गन्हाइत।
कान्ह भेल भोथ
ठेला परल सुवर्णा उघैत
ब्लाउज फाटल
एकटा अल्प जीवनक बाद
हमरामे नहि अछि एकर जोड़-तोड़ करबाक सक्क
हम की कऽ सकैत छी बहिन?
पानिक चरचे मात्र
मृत्युक डरकेँ अछि खोंचारैत
पानि अछि, आँखिक नोर मात्र...
“नीलान्टे कन्नीले...” मनकम्मा थोटा लेबर अड्डासँ
बालानां कृते-
1.देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स); 2. मध्य-प्रदेश यात्रा आ देवीजी- ज्योति झा चौधरी
1.देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स)
देवांशु वत्स, जन्म- तुलापट्टी, सुपौल। मास कम्युनिकेशनमे एम.ए., हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्र्रिकामे कथा, लघुकथा, विज्ञान-कथा, चित्र-कथा, कार्टून, चित्र-प्रहेलिका इत्यादिक प्रकाशन।
विशेष: गुजरात राज्य शाला पाठ्य-पुस्तक मंडल द्वारा आठम कक्षाक लेल विज्ञान कथा “जंग” प्रकाशित (2004 ई.)
नताशा: मैथिलीक पहिल-चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स)
नीचाँक दुनू कार्टूनकेँ क्लिक करू आ पढ़ू)
नताशा चौदह
नताशा पन्द्रह
2.
मध्य प्रदेश यात्रा- ज्योति
चौदहम दिन
5 जनवरी 1992 रविदिन
आइ हमर सबहक पूरा दिन यात्रामे बीतल। रस्ता भरि हमसब अपन पुरान बातके मोन पाड़ैत रही। पूरा बॉगी हमरा सबलेल आरक्षित छल। लेकिन हमसब एक कम्पार्टमेट के इर्द गिर्द जमा रहै छलहुँ। पता नहिं फेर एहेन अवसर कहिया आयत। फेर विदाई के गीत गाबैत-गाबैत एक गोटै कानऽ लागल तऽ सब कियो भावुक भऽ गेल। अहि बीच एकटा बढ़िया घटना भेल। हमर सबहक हल्ला गुल्ला सुनिकऽ एक गोटय श्रीमान उधम सिंह जे एडवेञ्चर क्लऽब के प्रेसिडेण्ट छलैथ आ टिस्को द्वारा आमंत्रित भेलाक कारण टाटा जा रहल छलैथ सेहो अपन बॉगी छोड़ि हमर सबलग आबि गेला।ओ हमरा सब बीचम आर बच्चा बनि गेल छलैथ आर हमरा सबके आर मज़ा आबि रहल छल। रातिके 10ः15 बजे हमसब विलासपुर स्टेशन पहुँचलहुँ।चुंकि गाड़ी तीन घण्टा विलम्ब छल तैं नागपुर पैसेन्जर छुटि चुकल छल।आब हमसब बॉम्बे हावड़ाक प्रतीक्षामे छलहुँ।
देवीजी : ज्योति
देवीजी
देवीजी खेल प्रतियोगिता
बरसातक समयमे जहिया बरसात नहिं भेल रहैत अछि तहियाकेसमय बड्ड सुहावन होयत अछि। ताहि द्वारे देवीजी प्रधानाचार्य के सहमति सऽवार्षिक खेल प्रतियोगिता अहि समयमे राखैके विचार बनौली। मौसमक जानकारीपाबि किछु उचित दिन के खेल दिवस घोषित कएल गेल।सब बच्चा सब जेपहिनेहे सऽ जुटल छल तैयारीमे से आर जोर-सोर सऽ भीड़ गेलैथ।खेल शिक्षक-शिक्षिका सेहो व्यस्त छलैथ। देवीजी प्रतियोगिताक तथा ईनामक व्यवस्थामे जुटलछलैथ। हुन्कर सहयोगसऽ दौड़ , बाधा दौड़ , हाई जम्प, लांग जम्प, तैराकी,डाइविंग, बास्केट बॉल, बॉलीबॉल, बैडमिण्टन, टेबल टेनिस, हॉकी, फुटबॉल,थ्रो-बॉल, कबड्डी, खो-खो आदि खेलक प्रतियोगिता आयोजित भेल।
सबलग सुनिश्चित कार्यक्रमक जानकारी दैत काल देवीजीखेलकूदक महत्व बताबऽ लगली। देवीजी कहलखिन जे खेलकूद के लेल तेजदिमाग आ शारीरिक हरकत पर नियंत्रणके आवश्यकता होयत अछि।कोनो खेलकनियम के अनुशासनमे रहि जीत भाव सऽ उत्प्रेरित भऽ पूरा समूह स तालमेलबनाबैत अपन शारीरिक गतिविधि पर नियंत्रण राखैत खेल प्रतियोगितामेभागलेनाई बड्ड आसान नहि होयत अछि। अहिलेल स्वस्थ शरीर, लगातारशारीरिक श्रम करैके क्षमता तथा अभ्यास बहुत जरूरी होयत अछि।ताहिदृष्टिकोणसऽ खेल मे सफल भेनाई पढ़ाई लिखाई सऽ बेसी मुश्किल छै। जॅं पढ़ाईएकबेर केने छी तऽ जल्दी बिसरत नहिं लेकिन खेल मात्र दिमागेमे याद रहनेनहिं होयत छै। लगातार अभ्यास के बिना कोनो उच्च स्तरीय खेलमे सफलभेनाई असंभव होएत अछि।
देवीजी बालिका सबके प्रोत्साहित करैत कहलखिन जे बिहारकेबालिका सब सेहो खेलजगतमे बहुत उन्नति केने छथि।हालेमे बिहारक बालिकाकसमूह जूनियर नैशनल थ्रो बॉल प्रतियोगितामे, जे कि मुम्बई मे आयोजित छल,मध्यप्रदेशके पराजित कऽ राष्ट्रीय स्तर पर तेसर स्थान प्राप्त केलक। अहि टीममेश्वेता राय, नेहा रानी, सुमेधा तथा प्रियंका दयाल विशेष रूप सऽ नीक प्रदर्शनकेलैथ। देवीजी अहि बातक सम्भावना व्यक्त केलखिन जे भविष्यमे बिहार क्रिकेटएशोसियेशन सऽ आयोजित अण्डर १३, अण्डर १५ आदि क्रिकेट मैचमे अपनविद्यालयसऽ उपर्युक्त छात्रके अवसर देल जायत तथा अहिसब खेल प्रतियोगिताकबाद इनडोर खेल जेनाकि कैरम सतरंज इत्यादिक प्रतियोगिता सेहो आयोजितकैल जायत।
तदोपरान्त, निश्चित कार्यक्रमानुसार सब प्रतियोगिताक आयोजनभेल आ कखनो नीक आ कखनो कनिक भांगठ के संग सब पूरा भेल ।ग्रामवासी सब खूब भीड़ लगाकऽ देखऽ एलैथ जाहि सऽ बच्चा सबके खूबहिम्मत बढ़ल। अन्तमे जीतैबला बच्चासबके पुरस्कार सेहो भेटल। गामक लोकसब विद्यालयमे बच्चासबहक सर्वांगिक विकासलेल होयत विविध प्रयास सऽ बहुतप्रसन्न छलैथ। प्रधानाध्यापक, देवीजी आ पाठशालाक अन्य कर्मचारी लेल सबसऽपैघ पुरस्कार यैह छल।
बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
१.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽ–बिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।
Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवाफोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara orPhonetic-Roman.)
Language: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.)
इंग्लिश-मैथिली कोष/ मैथिली-इंग्लिश कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वाराggajendra@videha.com पर पठाऊ।
विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.
१.पञ्जी डाटाबेस आ
२.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.पञ्जी डाटाबेस-(डिजिटल इमेजिंग / मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण/ संकलन/ सम्पादन-पञ्जीकार विद्यानन्द झा , नागेन्द्र कुमार झा एवं गजेन्द्र ठाकुर द्वारा)
जय गणेशाय नम:
जय गणेशाय नम:
जय गणेशाय नम:
(1)
अथ पत्र पत्र्जी लिखते: अथ सरिसब ग्राम: देवादित्या रत्नाकरापत्यय-छादन।। प्रज्ञाकरापत्यन-बनौली नम समेत।। नितिकर सन्तiति केशवापत्यतदनाद-गंगेश्वसरा पत्य: गौरि शौरि कुलपति-बधवास।। महिपाणि सन्त।ति-खांगुड़ गयड़ा समेत।। ग्रहेश्व।रापत्यi-जोंकी।। गणेश्वतरापत्या-सकुरी।। सोने सन्तति-कटमा ओ सकुरी।। भवादित्यपपत्यु-सतैढ़।। रघुनाथापत्य -उल्लू-।। कौशिक-उल्लूे।। गिरीश्व्रापत्यM-सतैढ़।। वास्तुन सुत ऋषि-सतैढ़ सम्प्र ति-फरकीया शिवादित्याापत्यड-रतवाल मतहनी।। हरादित्याaपत्यश-बलिवास श्री करापत्य्-ननौरे।। शुचिकरापत्यढ-जगन्ना थपूर हल्लै़श्व्र-रूद्रपुर पैकटोल।। केशब बागे बसुन्धुर-नरघोघ रामदेवापत्यय-सिंडोआ।। कामदेवापत्यर-डीगरी गढपाणि सन्त।ति-गौर वोड़ा।। अथ नजिबाक ग्राम भासे सन्तणति वलिया रातु-दिगउन्धब।। कान्हर सन्तघति गोविन्दप-भड़ाम।। सोम सन्त ति-नाहस।। सुपन वासू-देउथि।। नारायण पुराई-ब्रह्मपुर।। मिश्र रामापत्यध-अचौढ़ी।। शुचिकरा पत्यव- बलिया ब्रह्मपुर।। छीतू पारू-पीलखा।। शिवाई-महूलिया जहरौली।। ईश्विर नारू-नोहड़।। श्री धरापत्यम-दिमन्दुरा-एते जजिवाल ग्राम-अय खण्डपबल ग्राम ठ. हराई सन्तति-भखराइन।। सोमेश्व-रापत्यी-बुलवन कधुवा समेत।। ठ. अनन्तज हरि-लखनौर।। भोगीश्व्रापत्यी गोपाल सन्त.ति-बथई-हरड़ी।। गढाघरापत्य-पौराम।। रत्नाकरापत्य--हलधर तेतरिया हरडी खण्डनबसा ।। ठ. दूबे सन्तशति भौर।। लाखूमशहिमति-बेहद यमुगाम।। योगीश्वहरापत्य।-सोन्दशपुर सरपरब कुरहनी वासी द्वीट खण्ड बला।। शुभद्रत्तापत्यड-देशुआल।। झाझू सन्तरति-रैयाक गुरदी सोनकहमेरी।। वास्तुई, वागू, हिरू-देउरी गोपालापत्यड-गढ़।। देने सन्त्ति-चनुआरी।। पक्षधरपल-तेतरिया।। दिनकरापत्यर-पोंसक, बथदी बिहारी-उभय गोरादी-साधु सन्रति-बथयी।। लक्ष्मीापति सन्तदति-खरसा गणेशवरापत्यझ-गणेश्व्रापत्य -गुलदी।। हल्लेरश्वभरापत्यई बेलारी।। जीवेश्वयरापत्य -अलय।।
(2) ''अ''
सोमकंठ-सरपरब।। रबि सन्तयति-गौर ब्रह्मपुर।। जयकर सन्त ति-सजनी।। भासे-डीह।। देवेश्व।रापत्या-देशुआल।। पक्षीश्वगरापत्य।-यमुगाम।। गिरीश्वसरा-मत्य-देशुआल विन्येन् श्वजरापत्ये-वैकुण्ठपपुर।। शितिकंठ सन्तुति-खुट्टी ।। रत्ननेश्वशरापसगुलदी।। अथ गंगोलीग्राम-महामहो सुपट सन्तसति-गोम कटमा।। होरे सन्तआति-बिसपी।। हारू सन्तेति- देशुआल।। हरि सन्त्ति-डुमरा।। दिवाकरापत्य्-दिगउन्धस।। गौरीश्विर सन्तपति जगनाथापत्यप-धर्मपुर।। कुमर-गंगोली वासी।। कमलपाणि-वैगनी, वड़ग्राम।। डालू सन्तति-सकुरी।। गयन सन्तधति-खरसौनी ।। एते गंगोली ग्राम।। अपथपबौली ग्राम-रवि सन्त-ति-बिरौलि।। उदयकरसन्तठति-सपता देशुआल।। महिपति सन्तति-कोशीपार डुमराही।। हरियाणि सन्तौति-गोधनपुर लक्ष्मीीदत्तापत्यम-गोनोली।। नारू सन्ताति भतौनी डहुआ।। रूद सन्तति-बछौनी।। रूद सुत पाठक भीम-भीरडोआ।। जागू सन्तधति-रयपुरा।। विशो सन्त।ति-चणौर।। बासु गौरि सन्तति-महरैल।। केशव गोविन्दाूपत्यी-राजे।। दामोदरापत्यर-राजे शिवदत्तापत्यत-बढि़याम।। गोगे सन्ताति-सहुड़ी।। यशोधरापत्य -मेयाम।। दामू सन्ततति-अम्माग।। पुण्यातकरपत्य-: पैकटोल पनिहथ उँदयी सन्तवति-धेनु।। मधुकर रत्नाकर प्रभा कर विभाकरापत्यत जगति।। एते पर्वपल्लीतग्राम।। अथ सोदपुर ग्राम-ग्रहेश्व-रापत्यद-धउल।। रूद्रेश्वतरापत्यन-विरपुर।। धीरेश्वभरापत्यड सुन्द र विश्वेेखरापत्यं भवे माधव-हसौली।। रामापत्यल-रमौली।। बाटू-बड़साम।। रूचि बासुदेव-कुसौली।। यटाधरापत्ये-पचही।। गयनापत्यर: रोहाड़:’बहेड़ा।। रति हरि-टाटी।। बास्तुा सन्तसति-तेतरिहार।। रूपे सन्ततति-सिमखाड़।। बसाउनापत्य-कन्हौ़ली।। कामेश्व।र सुरेश्ववर राम।।
(3)
नाथापत्य)-भौआल।। कान्हाापत्य -सुखेत।। त्रिपुरे-अकडीहा।। रतिनाथापत्यस डालू-कटका।। बाटू सुत हलधर श्रीधर-केउँटगामा।। सुधाकरा पत्य-गौर।। म. म. उ. श्विनाथपत्य-दिगउथ।। म. म. उ. भवनाथ प्र. अयाचीसुत म.म.उ. शंकर महो महादेव महो मासे महोदारो सन्तरति सरिसन अपरा भवनाथ प्र. अचाचीसुत शम्भुवनाथ रूद्रनाथापत्यि- बालि।। महामहो देवनाथापत्यव-दिगउन्धच।। महो रघुनाथापत्य्-रैयाम।। जोर सन्तमति-विठौली मिसरौली गोपीनाथापत्यप- मानी, जगौर।। म. म. उ. जीवश्व र सुत गणपति हरिपति-महिया।। लोकनाथापत्या-माझियाम खोरि। हरदत्त काधदापत्य शहड़ सुहथरि।। देवे सन्त ति-महिया।। एते सोदरपुर ग्राम।। अथ गंगोरग्राम—बीनू वासू कुरूम भौआल केशवापत्यम-अहियारी-पोनद।। सनाथ सन्तदति-विरनी वासी।। भोरे सन्तदति महिन्र् पुर।। विठू कादि बेकक।।
अय पल्ली ग्राम-हलधर सन्तकति-बनाइनि।। महामहो उँमापति समौलि,वारी, जरहरिया।। रूपनाथ सन्तीति गिरपति-समौलि’ पशुपति-समौलि।। महाप्रबंधक।। रघुनाथापत्यह: दड़मपुरा नरहरि, रघुपति सन्तदति-समौलि।। देवधरापत्यन- कछरा, देउरी।। गांगु सन्तवति-दोउरी।। दिवाकरापत्यघ-देउरी,सकुरी, मोहरी-कटैया।। घोटक रवि सन्ताति-कटैया।। ग्रहेश्वरापत्यप: कछरा।। रामकरापत्यव-भालय।। नितिवरापत्यप-राजोसतिश्व।रापत्यम-सिम्भुैनाम।। कान्हारपत्यन-पड़ौलि।। विरममिश्रापत्यप-ततैल।। रामदत्त सुत केशव सन्तयति-कान्ह।-हाटी।। महाई सन्तसति-फूलदाहा माधवापत्यय-दिवड़ा।। इबे सन्तमति-बेहरा।। नरसिंहापत्या हरिपुर।। मुरारी सन्ततति-मुराजपुर।। भोगीश्वपर राजेश्व्रापत्यल पुरे सन्तहति-अलयी।। वंशधरापत्यइ-अलय।। गोविन्दाह पत्यप-रैयम।। कीसे सन्तति राम सन्ततति वाटू सन्त।ति-नंगवाल।। प्रभाकरापत्यर-पर्जुआरि।। हिताई सन्तअति-विस्याौक्षापत्यन नकेसुता-बैकुंठपुर।। हारू सन्तसति-नैकंधा।। कविराज
(4) ''आ''
सन्त4ति-मछैटा।। सिंहेश्वभरापत्यम-ननौर।। मित्रकरापत्यी-ननौर-राजखंड,पाली।। जयकरापत्यब-कुसमाल, पिण्डाकरूछ, बारहता, रताहास पाली कछरा।। माधवा।। पत्यम गौरीश्वारापत्यम अहियारी, टूपाभारी।। गणपति, गांगु सन्तपति-अहियारी।। यशु, डगरू सन्तनति-कुरूम।। बागू सन्त।ति-रोहाल, कटैया।। गोविन्दाि पत्यर हचलू सुत दिवाकरा पत्यल-सुदई, षनिहथ।। होराइ सन्तरति-अडि़यारी।। रूद्रेश्वारा पत्यत-भड़गामा। बाटू सन्त।ति-सन्दतलाही, पाली पाली, विशानन्दस पत्यि-ब्रह्मपुर।। थेतनि सन्तिति-जलकौर पाली।। चन्दौरत पाली दुर्गादित्यव पत्य।-महिषी।। देवादित्योपत्या-बिहार, महिषी समेत।। रतनू प्रoरत्नादित्यप पत्य।-महिषी।। रत्नाकरापत्यत-यशारी।। ततो धोधनि सन्ताति-यशरि।। विशो, श्रीकर, शुचिकरापत्यर-पुरोठी।। जीवे सन्ततति-मोनि।। बादन सन्तोती आसी।। सुधाधरापत्यत मांगुसन्ततति-मोनी।। भवदत्तापत्यि-पुरोही।। (100/05) शुभंकरा पत्य - जमदौली।। पौथू सन्तिति-परसौनी, जरहटिया, सकुरी।। कुसमाकर सन्तति-जमदौली।। यटाघरा पत्यय-सकुरी।। श्रीवधर, वंशीधरापत्यय-सकुरी।। बुद्धिधरा पत्यि-ततैल।। कान्हा पत्यह-अलय, सकुरी।। इनसन्त्ति सकुरी।। मुरारी सन्ताति रामापत्य--महिन्द्र वाड़।। विशो सन्तवति रूद्रेश्वुरापत्यय-कोलहट्टा।। गणेश्वार नन्दी।श्वतरापत्य -महिन्द्र वाड़।। गोविन्दारयत्यह= हरिपुर।। विरेश्वरर नरसिंहापत्यय-रादी श्रीधरापत्यण बेलउँच राढ़ी।। गुणीश्ववरापत्य -कोइलखा।। ग्रहेश्व रापत्यस चहुँटा।। शोपालापत्य -समैया।। हरिपाणि सन्त ति-समैया।। बाछे सन्ताति होरेश्वार मतिश्वेर मंगरौनी।। बाटू सन्तलति-कटउना।। जसू, शतू सन्तोति-सकुरी।। गणपति सन्तिति भगवसन्त।ति-पचाढ़ी।। गुणाकरापत्यश-बरेहता सोन्दववाड़।। पुरादित्याख पत्य -मृगस्थाली एते पल्लीप ग्राम
(5)
हरड़ी।। धनेश्व र-मझियाम, कनईल, लोहना समेत।। लाखू सन्तपति-कनइल।। चाण सन्तवति रतिश्व।र-छामू।। रामकर कृष्णासकर-थुगाम वासी।। भोगे सन्तयति शंकर गुदे-दिवड़ा।। इबे-जरहरिया।। देवे सन्तनति-रहड़ा।। गोढ़े-रहड़ा।। गोन्दवन चाण- पुरोहित गोपाल सन्तोति मारू-वरूआड़ सुपे संखवाड।। श्रीकर-पेकटोल।। गौरीश्व्-रतेकुना।। मिश्र भगव-पुरामनिहरा।। चक्रेश्वणर सन्तरति-दहुड़ा करूहरा। देहरि-ततैल।। सोम-ततैल।। सान्हि सन्तति- गोधनपुर।। देवे सन्त।ति-कादिकापूर। (ताई-तत्रेव ।। ।। गोना सकराढ़ी-थितिकरापत्यू-आडू.गावासी-मझियाम समेत।। बुधौरा सकरादी, दूबा-सकरादी अन्हाकर बरगामा समेत।। एके सेकराढ़ी ग्राम।। अथ दरिहरा ग्राम-त्रिपुरारि सन्त ति-सिंहाश्रम।। हरिकर बुद्धिकर रूपनादि विजनपुर।। यशस्परति सन्तति गणपति भड़ैली।। गुणपति सन्तरति-पठोङगी)।। विद्यापति-पुडरीक-मछदी। केशव-अमरावती। शिरू-कुरूम सोने सन्त ति भौजाल।। शिव-यमुगाम।। गुणाकर पद्मकर मधुकरपट्टो। प्रज्ञाकरापत्यत-कुसुमाक-वड़गाम।। मित्रकरापत्यव-जरहिटआ।। प्रसाद गौरीश्वसरापत्य -भरउड़ा सन्हावा समेत।। दिवाकरापत्य -अलई।। दिनकरापत्यक सोनतौला।। रतिशर्म्माकवस-सकुरी।। भवशर्म्माआपत्यर-ब्रह्मपुर।। यटाधर-ब्रह्मपुर।। शशिधरापत्य -पनिहारी।। बागू गांगू तरहट।। गोविन्दह-कान्हा-पचही।। नारू-यशराजपुर।। बाटू-ब्रह्मपुर।। इन्द्रापति हरिनगर आग्नेशय।। झोंटपाली दरिहरा सिमसिम कोइलख विश्वटनाथापत्यत महिसान कोइलख समेत।। विधुपति-तत्रैव।। होरे उराढ़ वासी।। गांगू-कछरा।। रघुपति सेघ कठरा।। कान्ह्-कटैया जादू सरहरावासी कृष्ण पति गुणीश्व-र: फूलमति।। सुन्दरर गांगू-तंत्रैव।। मतीश्वगरापत्या-सुन्दकरअलई समेत।। सुरपति-गोलहरी, अलय समेत।। गिरीश्व।रापत्य -उडिसम।। पण्डोरलि दरिहरा-हरिकर सन्तरति सिहौली।। शंकरपरनामक गोदे-नवहथ।। कान्हा। पत्यस-नवहथ। आसो-चिलकौरि।। भाइ सन्ताति-ततैल, तेतरिया, सिमरि।।
(6) ''उ''
कनसम।। गोढि़ सन्त'ति-बढि़याम। सुपन सन्ताति-गांगू मिट्टी।। विशो-तत्रैव।। हिक सावे-दीघीया।। धीरेश्वतर सन्तलति-तारडीह, जलकौर-दरिहोश। मिश्र कान्हा-पत्यु-मतउना।। गंगेश्वगर सन्तहति मिश्र दुर्गादित्या।पत्यि-चडुआल।। देवधरापत्या।। अग्निहोत्रिक महामहोहरि सन्तिति-नेतवाड़।। नारू सुत रूचि-महुआल।। विभाकरापत्यी-सिंधिया।। प्रभाकर सुत जुधे-पटसा।। नोने-जगवाल।। नारू सुत बाटू प्रभृति-अन्दोेली।। गोढि़ सन्तहति-धनकौलि मिश्र हरि सुत चण्डेंश्वभर-चंडगामा।। नारायण-उने।। मिश्र मतिकर-बघोली।। धामू सन्तति-पोजारी।। शूलपाणि-रतौली नीलकंठ-पोखरिया रूपन-रतौली।। खांतर-बड़गाम।। बासू सन्त।ति-बाली मुनिप्रo विरश्वकरापत्य। दिवाकर-राजनपूरा।। रविकर-छत्रनछ राजनपुरा,सीसब समेत।। गुणाकर सिढि़बाला।। प्रसिढि़वाल।। हरिकर-जरहरिया,ततैल समेत।। ब्रह्मेश्वजरापत्यर रत्नाकरापत्या-पंत्र्चारी।। विश्विरूपसन्तढति-पनिहारी।। शूलपाणिभ्राता नीलकंठ-बोथरिया।। रूपन सुत भोग गिरी-रतोली।। यवेश्वदर-जरहरिया-ब्रहमेश्वनर तत्रैव।। एते दरिहरा ग्राम।। अपथ माण्डवर ग्राम-गढ़ माण्डयर कामेश्व रापत्यल-बथया।। महत्तक जोर सन्तमति-बघांत।। सुइ भवादित्प्त्या-कनैल, मुठौली समेत।। दिवाकरापत्यी- जोंकी,मढि झमना।। हरदत्त सन्तेति-खनतिया।। गुणाकर, जयकर-खनतिया।। माधवापत्यि-अरडिया।। रति, डालू-भौआल, दोलमानपुर।। बेगुडीहा।। खांतू। ठाकुर, सरवाई, केउट्रै सन्तजति-भौआल।। गदाई-दोलमानपुर-केशवापत्या-असमौ।। कानहापत्या-आसमा।। सूपे, विभू-कटमा विभू,भानुकर पिलरवा।। कविराज शुभंकरापत्यत-कटमा।। वागीश्वलरापत्यि-महिषी, गांगे।। रूपधरा पत्य =मङत्र्रौनी।। रविदत्तापत्य विशो-देउरी।।
(7)
हरिकर-विजहरा।। खांत-जरहरिया।। हरि-मङरौना।। होरे-केउँट गामा।। सुधाकर-वारी।। शुभंकर-सकुरी।। पशुपति सन्तलति गुणपति-ओकी।। (18/09) (18/09) शिवपति इन्द्र पति-रजौर। कृष्णीपति-पतौनी।। रघुपति-(18/03) जगौरा।। प्रजापति-अमरावती।। छीतर- जगौर।। आड़नि सन्ताति कुलपति कटैया।। नरपति-दहुला।। रविपति-कटका।। महादेव-सिर खडि़या (श्रीखंड)।। रतिपति-(18/03)-सिहौलि)। दूबे-दुबौली।। पौखू-बिठुआला।। धनपत्याि- सरहद।। विधूपति-पतनुका।। सुरपति, रतन-कनखम।। सोम-बेहद।। भवे, महेश-कटैया।। गुणीश्वखर-कटाई।। पीताम्ब रा पत्यस-कटाई, जमुआल।। देवनाथा पत्यर मिश्र नन्दीी सन्तंति-बेहटा।। जीवेश्वभरापत्यि-ओंराम।। सिंगाई-ननौरा।। दुगाई-तेतरिहार।। नगाई-कोइलख।। बागीश्वुरापत्य -सकुरी।। रूचिकराव शीरू-जरहरिया, मकुरी।। लक्षमीकांतापत्यप-त्रिपुरौली।। हरिकान्ताकपत्य। दहिला।। उमाकन्ता पत्यव ब्रहम्पुनर सुगन्ध। सन्तीति-कनसी।। महेश्वकरापत्या मझौली।। गुणे मिश्रापत्यी-थुबे, खरका ।। सोरि मिश्रापत्य्-ब्रहमपुर।। गयन मिश्रा पत्य्, वीरमिश्रापत्यन-वारी सकुरी।। हरिशर्म्माझपत्य सुधाकरादि-मृगस्थपली थेछ मिश्रापत्यन-अन्दौोली।। सुरेश्व रापत्यत। ग्रहेश्विरापत्यर-कटउना।।हरि मिश्रापत्य्-कटउना।। ऋषि मिश्रापत्यक-बेलउँजा।। यति मिश्रापत्यध-कटउना ।। कीर्तू मिश्राद मतीश्विरापत्यद-गोआरी।। गिरीश्वररा पख-मिश्ररौली।। हरे मिश्रापत्यर-खपरा ।। बाछेमिआपत्यर-हरखौली।। हेलन, नरदेव-लेखद्विया।। शिवाई सन्तीति-वलियास, धयपुरा।।
सर्वानन्दि-दलवय, सकुरी।। दलवय स्थित-असगन्धीउ।। चन्द्रेकरापल-कोवड़ा।। कुलधर, रामकरापत्य्-दिपेती, बेतावड़ी।। चोचू मोचू-पीहारपुर गोआरी समेत गोपाल सज्जुन-ब्रह्मपुर, जगतपुर।। मित्रकरापत्या,रूपनापत्यर-महिषी, सकुड़ी ।। सुथवय सन्त,ति-अपोरवारि, जहरौली।। रतिधरशुमे-कनपोरवरितरौनी।। हरि सन्त,ति-निकासी, यमुगाम।। एते माण्ड र ग्राम:।।
(8) ''ऊ''
अथ बलियास ग्राम:।। भिखे, चुन्नीर, नितिकारपत्य।-चुझनी।। दूबे सकुरी।। सुरानन्द -बैकक वासी।। रति सन्तथति-खड़का।। शिवादित्याग पत्यौ मुराजपुर, ओगही, यमुथरि।। शुभंकरापत्य-ततैल, कमरौली ।। नन्दीग सन्तकति-भौआल, अलय, सतलखा।। सुधाकरापत्य्-जरहरिमा।। राम शझपित्यु-जादू धरौरा।। केशव-यमसम।। शक्ति श्रीधर-सकुरी महिन्द्रनपुर समेत।। मद्दु सन्तसति नारायण सिमरी, जालय, खड़का।। महन्थी सन्तदतिमाड़र शिरू सन्तसति-बिशाढ़ी।। रूद्रादित्या्पत्यर-विठौली।। रूचि सन्तिति उदयकरापत्यर-नरसाम।। एते वलियास ग्राम:।।
अथ सतलखा ग्राम: गुणाकर-डोक्हहरवासी।। विभू सन्तिति भाष्करापत्य्-सतौलि।। दिवाकरापत्यप-सतौलि।। चन्द्रे श्वकरापत्यू-कञ्जोली।। शंकरापत्यप-सतलरवा लोहरा पत्यी, नन्दीडश्वषरापत्यप, यवेश्व।रापत्यप-कछरा।। अथ एकहरा ग्राम:-श्रीकर-तोड़नय।। जाटू सन्तोति-सरहद।। शुभेसन्तरति-मैनी।। सोने सन्तीति-मण्डतनपुरा लक्षमीकरापत्य-संग्राम।। रूद सन्तरति-आसी।। धाम-नरौंध, जमालपुर।। गढकू-कसरउढ़।। बाटू-सिंधाड़ी।। थिते-खड़का ।। मिते-कन्हौनली।। गणपति पतउना।। जाने-ओड़ा।। कोचे-रूचौलि।। शुचिकरापत्यु- मुराजपुर।। चित्रेश्विरपत्य़-नरौंछ।। एते एकहरा ग्राम।। अथ विल्व।पंचक (बेलउँच) ग्राम: धर्मादित्यालपत्य्-सिसौनी ।। रामदत्त हरदत्त, नोना दित्या। सन्तंति- रतिपाड़।। शुधे सन्त्ति-सुदई।। शिरू-द्वारम।। गयादित्यायपत्यर-ओगही।। महादित्या कर्म्मपुर बछौनी समेत।। जीवादित्यत-उजान।। रूद्रादित्यत-दीप सुदई।। सर्वादित-तडि़याड़ी।। देवादित्य।-ब्रह्मपुर।। स्त्ना।दित्यभ-काको।। मिचादित्या्पत्य़ नारू-काको वासू-देड़ारिया प्राणादित्य पस हरि, गयन-कन्हो्ली।। शुपे-कोलहट्टा।। रूकमादित्य।-ओझौली।। केउँदू-सकुरी।। महथू-सकुरी।। चौबे सन्त ति-सतलखा।।
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अथ हरिअम ग्राम-लाखू सन्तेति-रखवारी।। केशव-दामू-मंगरौना।। (25/07) मांगू-नरसिंह-शिवां।। (18/09)-हारू शिवा।। (27/05) नरहरिसन्तसति-वलिराजपुर चाण दिनू-कटमा।। परमू लाखू-आहिल।। रति गुणे-कटमा।। माधव सुत सन्तनति-भच्छी।।। एते हरिअम मूलग्रामा।। अथ टंकवासटाम् कविराज लक्ष्मीिपाणि-नीमा।। सुरेश्वूरापत्यत,दामोदरापत्या-पटनिया गंगोली।। रवि शर्मा खंग लक्ष्मीू शर्म्भां-ब्रहमपुर।। पतरू, शीरू-पटनियाँ पोखरौनी भौर, सकुरी।। जागे सन्तधति-रतनपुरा।। महाई सन्त ति-परिहार।। देवदत्तापत्य-पीलखवाड़।। रविदत्तापत्यर-बहेड़ा।। पाँखूसन्तनति-सिरखंडिया (श्रीखंड)।। सुषन, मारू सन्त्ति-नरधोध।। हराई, शुचिकर, प्रीतकरापत्य-अकुसी।। हरिप्रह्म- पोराम।। दामोदरपत्यि-बेहरा।। उँमापति सन्तुति-ततैल।। एते तंकवाल ग्रामा:।। अथ घोसोतग्राम: रतिकान्ह -पचही।। रूचिकरापत्यु-नगवाड़।। रूद सन्त।ति-यमुथरि।। रूद सन्तँति-गन्ध राइनि।। गणपति सन्तोति-घनिसमा।। कृष्णरपति सन्त।ति-खगरी।। पृथ्वी़घरापत्या-सकुरी।। रूद्र चन्द्र -डीह।। एते घोसोत ग्रामा:।।
अथ करम्बह्म ग्राम इन्द्रकनाथा पत्यत कोई लख।। शोरिनाथापत्यव-दीघही।। रामशर्म्माुपत्यच-ब्रह्मपुर।। रतिकरापत्यत-मझियामा बुदि़करैव।। बुद्धिकरापत्यम सन्तरति कान्हा पत्यल ककरौड़।। हचलू सन्तयति-कनपोखरि।। गणेश्व्रापत्यह-केडरहम।। लान्हीस सन्तिति-गोढि़-सैतालवासी।। सदु-रूचि सन्ततति हरदत्तापत्यख-घनकौलि।। नितिपत्यत-बछांत।। नोने सन्तँति-वेला।। लान्हि सन्त।ति मुरदी।। सादू सन्त।ति-ककरौड़।। मांगू सन्त ति-सोन, कोलखू, मघेता समेत।। मधुकरापत्य -दोलमानपुर।। सदुoगिरीश्व।र सन्त ति नरसिंह नडुआर।। श्रीवत्सत सन्तरति-बेहट।। सदुoकेशव-सिरखंडि़या (श्रीखंड)।। वराह सन्तति-तरौनी।। रामावत्यग-तरौनी।। कान्हक, श्रीधर-तरौनी।। रघुदत्त रूचिदत्त-रूचौलि।। सदुपाध्यायय
(10) ''इ''
माधवापत्य्-मझौरा।। सदु. रामापत्य -झंझारपुर।। गुणीश्व रापत्यी-झंझारपुर।। सदुo भवेशवरापत्यी-अनलपुर।। हरिवंशापत्य,-मुजौनिया।। शिववंशापत्य।-रोहाड़।। धूर्त्तराज म.म.उ. गोनू सन्त ति-पिण्डो खडि़।। एते करम्बुहा ग्राम:।। अथ बूधवाल ग्राम:।। रविकरापत्य -खड़रख सुरसर समेत ।। सुपे सन्ताति-ब्रहमपुर।। राम चाण-मझियाम।। ढोढ़े-बेलसाम।। उगरू-सतलखा।। कान्हापपत्यप-वेलसाम।। दूबे, हरिकर-हरिना।। दामोदर-सकुरी।। राम दिनू-सुन्दंरवाल।। गंगादित्यत विकम-सेतरी।। सदुoभानुसुत गणेश्वपरापत्यत-परिणाम।। गुणीश्वतरापत्यख उजान।। कोने-पीलखा।। गंगेश्वढर-मलिछाम।। रूचिकर रतिकर-गंगौरा।। महेश्व र-फरहरा।। गौरीश्वपर-मदिनपुर।। विशो सुधाकर-डुमरी।। सूर्यकर सन्तेति-सिडरी।। ग्रहेश्वर-महिषी।। भोगीश्वनर-चिलकौलि।। बासू-बोधाराम।। उदयकर-आड़ी।। पौथे धरमू-मुठौली।। कान्हा पत्य्-बुधवाल।। जगन्ना थापत्य-सिंधिया।। एते वुधवाल ग्राम।। अथ सकौना ग्राम-वाटन सन्तेति- सिंधिया।। हरिश्व्रपत्य्-दिवड़ा।। सोमेश्वथरापत्यछ-बघांत।। बाबू सन्तमति- डीहा।। रति’ गोपाल दिनपति-तरौनी।। रूद सन्ततति-जगन्नांथपुर।। गुणे-महिपति-सरिरम।। शुचिनाथपत्यश परसा।। गुणे भासे-ततैल।। एते सकौना ग्राम: अथ निसउँत ग्राम:- पण्डित सुपाई सन्ताति-तरौनी तरौनी।। रघुपति-पतउना।। जीउँसर सन्तरति-कुआ।। इतितिसॉं अथफनन्दाह ग्राम: श्रीकरापत्य -बथैया।। कुसुमाकर, मधुकर,किठो सन्ततति, विठो ब्रहनपुर।। हाठू-चाण।। बसौनी-ब्रह्मपुर ।। सुखानन्द: गुणे-सिसौनी गांगू-सकुरी।। सदुo गोंढि़-खनाम।। मतीश्विर, पौखू-चोपता।। शंकर-खयरा।। महेश्वनर-डीहा सोम गोम माधव केशव-भटगामा।। विरेश्व रापत्यड सिंहवाड़, सिन्हुतवार।। लक्ष्मी् सेवे-सकुरी।। भवाईरूद-वोरवाड़ी, भटुआल, दरिहरा, सिमरवाड़, मुजौना समेत।। एतेफनन्दाह राम:।।
(11) अथ अलय ग्राम।। बाढ़ अप्रलय, उसरौली, बोड़वाड़ी, सुसैला,गोधोखीच।। शंकरापत्यर-गोधनपुर सिंधिया समेत।। श्रीकरापत्यफ-उजरा।। हेतू सन्ततति-सुखेत मिश्र (मिमांशक) हरि देवधरापत्यच-सिंघिया।। बासू सन्तनति: जरहरिया बाढ़ वासी। रविशर्म्मी-जरहरिया।। धारू सन्त ति-बेहट।। शिरू-धमडिहा, कादिपूरा गोविन्द् सन्तयति-बेहद।। म.म.उ. गदाघर-उमरौली।। परभू वुद्धिकर-बैगनी।। रत्नधर सन्ताति भवदत्त-भटपूरा।। शिवदत्त-अजन्ताक।। मिश्रा (मिमांशक) सुधाधरपत्य उसरौली।। लक्ष्मी धरापत्यद हलधर सन्तीति-यमुगाम।। शशिधर, रघु, जाटू-अलयी।। यवेश्वुर-अलयी।। गंगाधरापत्यय-यमुगाम।। मिश्र (मिमांशक) लाखू भूड़ी गणेश्वनर-परमगढ़।। सिधू-वाड़ेवन।। दोदण्ड- अलयी लोआमवासी।। जसाई-डीहा।। रूद-खड़हर।। रमाई-राजे सीत विश्वेशश्व्र मतिश्वनर-उसरौली।। वेद सन्तरति-मलंगिया नान्यीपुर अलई, सिमरी, रोहुआसमेत गंगुआल बाथ राजपुर वासी।। कितिधरापत्य -सकुरी जयकरापत्यी-कड़रायिनि।। सुधाकरापत्य़ कड़रायिनि, मुराजपुर।। गोनन-कटमा ढ़ीगंगोली बेकक समेत। कोठों कटमा।। साठू विशादी दोलमानपूर।। रूद-गंगोली।। कुशल गुणिया-भटगामानालय समेत एते बभनियाम ग्राम:।।
अथ खौआल ग्राम: श्रीकरापत्यो-महनौरा।। रतिकर सुधाकरापत्ये-महुआ।। चन्द्रटकरापत्यक: महुआ।। रूचिकरापत्य -महुआ मतिन्द्र पुर।। स्थितिकरापत्यय: महिन्द्रा दिवाकरापत्यय-कोवोली।। हरिकरापत्यत-महुआ।। आदावन-परसौनी।। (बाछे दोढ़े सन्त्ति-रोहुआ।। वेणी सन्तरति: रोहुआ।। उँमापति) (16/07) सन्तति-नाहस ।। विश्वयनाथापत्यह आहिल।। बुद्धिनाथ रूचिनाथापत्ये-खड़ीक।। रघुनाथापत्य।-द्वारम।। विष्णुा सन्तिति: द्वारम।। नोने जगन्नानथापत्य-वुसवन।। राम मुरारी शुक सन्त्ति-पण्डोतली।।
(12) ''ई''
बाटू सन्तघति-ब्रह्ममपुर तिरहर मौडु।। साधुकरापत्यि-दडि़मा।। हरानन्द ,सन्तनति-अहियारी।। भवादित्याापत्यु-नाहस देशुआल।। पॉंखू-बेहटा।। भवे सन्ततति धर्मकरापत्य -देशुआल।। डालू सन्त।ति-दडि़मा।। दामोदरा पत्यत-तरहट बह्ममपुर।। राजनापत्यय-यगुआल।। प्रितिकरापत्यन-पचाडीह (पचाढ़ी।। पतौना खौआल दिवाकरापत्य।-घुघुआ।। भवादित्याापत्यत-ककरौड़ खंगरैढा समेत।। बैद्यनाथ प्रजाकारक रघुनाथा कामदेव-मौनी,परसौनी।। गोपालापत्य कृष्णापत्यघ-कुमरि, खेलई।। शशिधरापत्य़ नरसिंहापत्य्-बोड़वाड़ी कोकडीह, छतौनिया।। दामोदरापत्यर-कोकडीह।। नयादित्याकपत्य।-बेजौली।। द्वारि सन्त ति जयादित्या़पत्यं = सुखेत,सर्वसीमा।। शुचिकरापत्यघ-दिगउन्धर।। आड़ू सन्तोति रघुनाथापत्या-मुराजपुर ब्रह्मपुर।। जीवेश्वरापत्यय-दिगुम्धन।। भवेसन्त़ति-मिट्टी, सतैढ़,बेहट।। दूबे-सन्तति-ब्रह्मपुर।। हेलु सन्तोति-सतैढ़ रविकर सन्त-ति तत्रैव।। प्रसाद मधुकर सन्तिति बेहटा।। दिवाकरापत्यु पिथनपुरा।। गंगेश्वपरापत्यन-कुरमा, लोहपुर।। लम्बोुदर सन्तकति-कुरमा।। नाइ सन्तमति-पिथनपूरा।। राजपण्डित सह कुरूमा।। रामकर सन्तगति मिट्ठी खंगरैठा, गनाम।। आङत्रनि सन्तुति-सौराठ।। मति गहाई, केउँदू सन्त ति-सिम्वतरवाड़।। एते खौआल ग्राम:।।
अथ संकराढी ग्राम:-महामहोकारू सन्तमति भगद्धर गोविन्दु सकुरी।। प्रितिकर-कादिगामा।। शुभे सन्तति-अलय महामहो हरिहरापत्य -सुन्दहरौ गोपालपुर।। जयादित्याधपत्यर-मलुनी सरावय।। परमेश्वार-नेयाम।। सदु सुपे-हरड़ी।। रामधरापत्या-अलय।। हरिशर्म्मय सन्तयति-सिधलमुरहदी।। रेकोरा संकख्दीन -होरे-चांड़ो-परहट।। सोम-गोम-शक्रिरायपुर।। हरिश्वर-सकराढ़ी वासी।। जीवेश्व्रापत्यन-बेला आधगाउ।। गयन द्वारिकादि।।
(13)
नोने विभू सिंधिया-गढ़ बेलउँच-सुपन अकुनौली।। कौशिक-कुसौली।। लक्षमीपाणि-सुशारी।। पाँवू-देयरही।। एते बेलउँचग्राम:।। अथन नरउनग्राम: बेलमोहन नरउन यटाधरापत्यी-मदनपुर।। रातूसन्तमति-करियन।। गर्व्वेतश्वीरापत्यग: सिंधिया।। डालू सन्त ति रूचिकर: मलिछाम।। चन्द्रमकर टुने सन्तीति-सुल्हनी।। विशोसन्तिति-त्रिपुरौली।। हेलूसन्तवति भखरौली।। दिवाकरा पत्यय: सुरसर, कवयी।। दिनकरापत्य्-पुडे।। खांतू कोने-वत्ससवाल।। शक्रिरायपुर नाउन-दामोदरापत्यट-जरहरिया। मुरारी=तेघरा।। योगीश्वभरापत्यद-ओझोलि कसियाम।। जगद्धरापत्यि-वोडि़याल।। चक्रेश्वपरापत्यि-शक्रिरायपुर।। नोने सन्तरति-मलंगिया, करहिया, पंचरूखी।। होरे सन्तपति नयूगामा।। कामेश्वयरापत्यत चकौती भवेश्वारापत्यप नयगामा भरवरौलीसमेत नयगामा भरवरौलीसमेत ।। एते नरउन शाम।। ।।अथ परिचोन ग्राम :- मधुकरापत्य = तरौनी झौआ, पद्मपुर ।। शिवपति, गुणेश्वगरपरा पौनी, सकिथाल।। देहरिसन्रति = कनौती तरौनी भवेश्वुरा (14 से) मैलाम।। जौन सन्तिति-आहिल।। यशु आदितू डीहाआहिल।। वावू पाठकादि-भैलाम, कटउना विसपी समेत।। कामेश्वेरापत्य पौनी, सकियाल।। देहरिसन्तनति-कनौती, तरौनी, लान्हूवसन्त।ति-उल्लूु।। जगन्नानथापत्या हरदत्त-खड़का, वगड़ा बयना समेत।। आङनिसुत पदमादित्यारपत्यि-मंगनी, सिरखडि़या, महालठी, लोही, चकरहट, कर्नमान तनकी समेत।। हरिनाथापत्यि मखनाहा, कत्र्जोली।। चण्डेाश्विरापत्या हरिवंश सुत रत्नाकरायपत्यि-बथैया ।। चक्रेश्वपर-कुरमा।। बाटू सन्त ति-चक्रहृदा, सिड़ली बासी।। विरपुर पनिचोभ-रातू सन्तरति-सुन्दसरवाल।। हारू सन्तरति करियन।। वास्तुस सन्ताति-मिट्टी।। महेश्वमरापत्यप-देशुआल।। दिनकर मधुकरापत्यप-जरहरिया ।। रामेश्वयरसन्तहति चन्द्रवकरापत्यौ-अलदाश।। विर सन्तति केशवापत्यस-भरौर, शहजादपुर, वलिया समेत।। वासुदेव सन्तपति ददरी।। सोनेसन्तरति-ब्रहमौलि।। धराई सन्तति-अमरावती-रातू सन्त्ति-करहि्या, उसरौली आदित्य डीह।। हरिश्वपरापत्यी-डीहा।। सोमेश्वहर-बधांतडीह।। रधु: रामपुर डीटा रवि गोपाल-तरौनी।। हरिशर्म्मा।पत्यु-महुआ।। बाटनापत्य।-तरौनी, बैगनी।। रूचिशर्म्माश-जगन्नााथ, भटिरभ।। शुचिनाथापत्यग-ततैल ।। शशिधर-ब्रह्मपुर नेहरा,भवनाथापत्यु पुरसौली।। देवादित्यापत्यौ-पुरूषौली।। ऐते पनिचोभ ग्राम:।। अथ कुजौली ग्राम:-गोपाल सन्तथति-हरिश यशोधर-बेहटा।। सुपन, नाँथू , पौथू लक्ष्मीकर-भरवरौली।। जीवे, जोर-मलंगिया।। मेधाकर-वनकुजौली।। रातू सिम्मुथनाम कन्धतराइन।। सुरपति।। वड़साम ।। गणपति-दिगउन्ध ।। लक्ष्मी्पति-महिन्द्र वाड़।। चण्डेोश्वररहरि-दिगउन्दन साने-लोड़ाम, महोखरि।। विष्णुिकर-परसौनी।। रूपन-कन्धनरानि।। सोम-लोआम।। राजूसन्ततति सुधाकर-सरावय।। लक्ष्मी्कर सुत प्रज्ञाकर अमृतकर-वेजौली। देवादित्या-दिशौडि़।। चन्द्र करापत्यौ-खयरा।। प्रितिकर-बेलहवाड़।। वेदग्डी्ह कुजौली।। विरेश्विर-रूदनिग्राम।। भव बैकक, मल्ददडीहा।। परान्तश सन्तआति-नेत्राम।। ऐते कुजौली।।
(14) ''14''
अथ गोत्र पत्र्जी लिखयते।।:-शाण्डिल्ये़ दिर्धोष: सरिसब, महुआ,पर्वपल्लीा (पबौली) खण्डोबला, गंगोली, यमुगाम, करियन, मोहरि,संझुआल, भडार:।। पण्डोीली जजिवाल, दहिमत, तिलई, माहव.सिम्मु्नाम सिहांश्रम, ससारव: (सोदरपुर) स्तथलित कड़रिया, अल्लाारि,होईया, समेत तल्हलनपुर, परिसरा, परसंडा, वीरनाम, उत्तमपु कोदरिया,धतिमन, बरेबा मधवाल, गंगोरश्रय, भटौरा, बुधौरा ब्रह्मपुरा कोइयार,केरहिवार, गंगुआलश्चा, धोसियाम, छतौनी, मिगुआल ननौती,तपनपुरश्रवा।। इति शाणि अथ वत्स गोत्र:-पल्लीि (पाली) हरिअम्बह,तिसुरी, राउढ़ टंकबाल धुसौत, जजुआल, पहद्दी जल्लरकी (जालय) मन्द वाल, कोइयार, केरहिवार, ननौर, उढ़ार प्रथि करमहाबुधवाल, भड़ार लाही, सोइनि सकौना, फनन्दहह, मोहरी, बढ़वाल तिसउँत वरूआली पण्डोदलि, बहेरादी, बरैवा, भण्डाढरिसम, बभनियाम, उचित, तपनपुरा,बिढुका नरवाल, चित्रपल्लीह, जरहरिया, रतवाल, ब्रह्मपुरा सरौनी।। एते वत्स गोत्र अथ काशयप गाम दानशौर्य्य प्रतापैश्र्च प्रसिद्धा यत्र पार्थिवा: ओइनिसा सर्वत: श्रेष्ठा, स्वनस्व, धर्म प्रवर्तिका:।। ओइनि, खौआला संकराढ़ी, जगति, दरिहरा, माण्डार बलियास, पचाउट, कटाई, सतलखा पण्डु।आ, मानिछा मेरन्दीह मडुआल: सकल पकलिया बुधवाल, पिमूया मौरि जनक भूतहरी महा काशयपे छादनश्चग, थरिया, दोस्ती , मरेहा,कुसुमालंच, नरवाल, नगुरदहश्रप ।। एते काश्युप गोत्रा:।।
(15)
अथ पराशरं गोत्र:-नरउन सुरगन सकुरी सुइरी पिहवाल, नदाम महेशरि सकरहोनश्र्च सोइनि तिलै करेवाचापि।। एतेपराशरगोत्र अथ कात्या यन गोत्र: कुजौली, ननौत, जल्ल की, वतिगामश्र्च।। एते कात्याायन गोत्रा:।। अथ सावर्ण गोत्र: सोन्दुपुर, पनिचोभ करेवा नन्दोोर मेरन्दीर।। अथ अलाम्वुरकाक्ष गोत्र: वक्ष्याेम्प्र्लाम्बुमकाक्ष कटाई, ब्रह्मपुरा चापि। ।। अथ कौशिक गोत्रे-निखूति अथ कृष्णानत्रयगोत्र: लोहना बुसवन सान्द्रा पोदोनी चo।। अथ गौतम गोत्र:-ब्रह्मपुरा उत्तिमपुर कोइयारं चापि गौतमो।। अथ भारद्वाज गोत्र: एकहरा बेलउँच (विल्व पंचक) देयामश्रापि कलिगाम भूतहरी गोढ़ार गोधोलिचा।। एते भारद्वाज गोत्रा अथ मोदगप्यैर गोत्र: मौदगल्यै: एतवालो मालिछस्त।था दीर्घोषोपि काप्यद जल्पिकी तत्र वर्त्तते।। एते मोद्गगल्यौत गोत्रा।। अथ वशिष्ठ गोत्र: कौशिल्ये पुनश्चय कोथुआ विष्णुमवृद्धि वाल।। एते वशिष्ठप गोत्रा:।। अथ कौण्डिल्यत गोत्र: एकहटयूविशल्यु पाउन स्पी: गोत्राश्र्च।। एते कौण्डिल्य गोत्र।। अथ परसातंडी गोत्र-केटाई।।
16 ''ऐ''
17
विशद कुसुम तुष्टाग पुण्ड री कोप विष्टाट धवल वसन वेषा मालतीवद्ध केशा।। शशिधर कर वर्णा शुभ्रजातुङत्रवस्थाह जयतिजीतसमस्ताय भारती वेणु हस्ताा।। सरस्वडती महामायै विद्याकमल लोचिनी। विश्वलरूप विशालाक्षि विद्यान्देभहि परमेश्वरी।। एकदन्तय महावुद्धिः सर्वाज्ञोगणनायक: सर्वसिद्धि करोदेवों गौरीपुत्र विनायक: गंगोली सै बीजी गंगाधर: ए सुतो वीर (05/04) नारायणों। तत्र नारायणसुत: (181/02) शूलपाणि। ए सुतो हाले शॉंईकौ।। थरिया सैकान्हा दौ।। खण्डुबला ग्रामोपार्यक:।। साइँक: शकर्कणा परनामा ए सुता भद्रेश्व1र दामोदर (05/06) बैकुण्ठं नीलकंठ श्रीकंठ ध्या नकंठा ।। तत्र (09/01/) दामोदर एकमावासी बैकुण्ठ सन्तमति पाठक वासी।। नीलकंठ संतति संसारगुरदी वासी।। श्रीकंठ संतति गुरदी, हरड़ी सरपरब, मौर वासिन्यप:।। श्रीकंठसुता श्याममकंठ हरिकंठ नित्यांनन्दग गंगेश्वरर देवानन्दरहरदत्त हरिकेशा: तत्रायो पत्र्चज्ये/ष्ठ। सकराढ़ी सै डालू सुत दौपतौनाखौआल सै गणपति द्दौणा अन्यो पतऔना खौआल सै गणपति दौ।। तत्र गंगेश्वर सुता हल्लेकश्वरर चक्रेश्व र पक्षीश्व0रा: सै सुत दौ सै द्दौणा हल्ले श्वोरो गुरदीवासी।। चक्रेश्वौरौ हड़री वासी।। ए सुतो पद्मनाम:।। डीहभण्डाचरिसम सै शौरि दौ।। तत्र पद्मनाम सुतो पुरूषोत्तम: गढ़बेउँच सै अभिनन्दर दौ।।
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पुरूषोत्तम सुतो ज्ञानपति: माउँबेहट सै हरिकर सुत बाटू दो।। ज्ञानपति सुतो उँमापति सुरपति एकमा बलियास सै आङनिसुत बाढ़ दौ।। एकमा वलियाससैबीजी धरणीधर। ए सुता पद्मनाम श्री निधि श्री नाथाः।। (15/04) पदमनाम सुतो शुक्ल हरिवंश (08/07) हरि शर्म्मणणौ बरेबा सै पुरूषोत्तम दौ शुकलहरिवंश सुतो आङनि जगन्नारथौ बाढ़ अपलय सै वर्द्धमान दौ।। सुतो बाढ़ूक: महुआ सै जगन्ना थ दौ।। बाढू सुता बरूआली सै देहरि दौ वरूआली मराढ़ सै बीजी दिवाकर: ए सुतो बाछ श्रीहर्ष:।। श्री हर्ष सन्त ति मराढ़वासी बाछ सन्तति बरूआली वासी।। बाछ सुतो।। ‘'आवस्थिक’’ चन्द्रीकर रत्नाकर (121/05) मधुकर साधुकर विरेश्व र धीरेश्व।र गिरीश्वसरा: धनौज सै जनार्दन दौ।। साधुकर सुतो धाम: पनिहारी दरिहरा सै गंगेश्व र दौ गंगेश्व2र दौ।। अपरौ देहरि: पनिचोभ सै विध्नेवश्वर दौ।। सुता दरिहरा सै गंगेश्वदर दौ।। ठ. सुरपति सुता दूबे ला (27) (34/08) महिपतिय: मंगरौनी माण्ड्र सै पीताम्ब र सुत दामू दौ माण्डवर सै वीजी त्रिनयनभट्ट: ए सुतो आदिभट्ट: ए सुतो उदयभट्ट: ए सुतो विजयभट्ट ए सुतो सुलोचनभट (सुनयनभट्ट) ए सुतो भट्ट ए सुतो धर्मजटीमिश्र ए सुतो धाराजटी मिश्र ए सुतोब्रह्मजरी मिश्र ए सुतो त्रिपुरजटी मिश्र ए सुत विघुजटी मिश्र ए सुतो अजयसिंह: ए सुतो विजयसिंह: ए सुतो ए सुतो आदिवराह: ए सुतो महोवराह: ए सुतो दुर्योधन सिंह: ए सुतो सोढ़र जयसिंहर्काचार्यास्त्र महास्त्र विद्या पारङगत महामहोपाध्याआय: नरसिंह:।।
19
तर्काचायस्त्रि महास्त्रच विद्या पारङगत महामहोपाध्यारय (10/06) नरसिंह सुता महामहो निधि (07/01)।। सुता महामहो (07/01) निधि शिलपाणि (16/01)।। कुलधरा:।। महामहो निधि सुतो श्री कुमार पाठक वासी कुलधरं कोड़रावासी शिलपाणि मङगरौनीवासी ए सुतो महोविभाकर: जजिवाल मातृक:।। ए सुता नारायण चन्द्रमकर विश्वेधश्वीरा: करिअन सै धर्माधिकरणीक महा महोपाध्यासय भरथ दौ।। महामहोपाध्याजय नारायण सुता महामहोपाध्यादय देवशर्म्मर हेलन जगतपुर नर देवा: म.म. उ. आदय: परली पाली सै जयशर्म्मय दो अन्योो केउँटी राउढ़ सै धराई दौ।। महामहोउपाō देवशर्म्मर सुता महामहो जगन्नािथ महांमहोउ. देवनाथ मिश्र (16/08) नन्दी मिश्र (18/09) गुणे मिश्र स्थितकरा:आद्यो पोखरौनी टंकवाल सै नरसिंह दौ अपरौ छादन सरिसब सै देवादित्ये दौ अन्यौ6 भण्डानरिसम सै रूचिकर दौ।। महामहोउ जगन्नादथ सुता सदुपाध्यािय (19/05) अमतू सदुपाध्यादय (09/06) विशो महामहोपाध्यायय बटेशा (18/02) गढ़निखूति सै महामहत्तक विद्याधर दौ मेरन्दीय सै श्रीधर द्दौणा।। अपरौ पीताम्बदर: चक्रहद पनिचोभ सै चन्द्र कर दौ।। पीताम्बरर सुतो दामू प्रo दामोदर: बेलउँच सै तीर्थङकर दौ भरेहास सै विश्वौनाथ द्दौणा (44/02) दामू सुता बाढ़ अपलय सै महामहोपाध्या य रामेश्वसर दौ: बाढ़ अप्रलयसै वीजी पंडित गंगा ए सुतो भरत: ए सुता सीते पदूमवर्द्धमान हाउँका:।। पदूम सुतो कमलपाणि। ए सुता रतनेश्वौर वत्सेदश्वपर यवेश्विर देवेश्वतरा: खौआल सै नयपाणि दौ एकहरी सै सोने द्दौणा वत्सेाश्व।र सुतो (57/08) वीरेश्वतर महामहोपाध्या्य रामेश्व्रौ आद्य: भाण्ड रसै श्यायमकंठ दौ अन्यो ततैल पण्डु आ सै महामहो दिवाकर दौ सोनकरियाम करमहा सै हरिकेश द्दौणा।।
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महामहोपाध्या)य (60/02) रामेश्वनर सुता महो (18/01) ग्रहेश्वर महो लक्ष्मीाघर (53/07) महो गंगाधरा: (163/03) मताउन दरिहरा सै रति दो।।: मताओन दरिहरा सै वीजीश्रीकर: ए सुतो गंगेश्वमर विश्वे श्वशरों।। गंगेश्वषर सुता विन्येसै श्वंर यटेश्वैर यवेश्वार परनामक सर्वेश्वोर पशुपति धर्मेश्वरर गिरीश्वमर गौरीश्वसरा: टकवालमातृक: गिरीश्वगर सुतो देवादित्यर दुर्गा दित्यों अलय सै रति दौ।। देवादित्य सुतो महो रति बिजूकौ: सरिसब सै भवदेव दौ।। महोरति सुता ठकुराइनि लरिवमा देयीका:।। कोइयार सै भवशर्म्म् दौ।। ठक्कुमर दुबे प्रo श्रीपतिसुता ठ. (15/09) हरपति ठ. (84/04) नरपति ठ. चन्द्रवपति प्रo चाण: प्र. चाण: सोन करियाम करमहा सै श्रीधर दौ सोन करियाम करमाहासै बीजी महामहोपाध्या य वंशधर: ए सुता महामहोहरिब्रहम महामहोहरिकेश म. म. धूर्त्तराज गोनूका: सकुरी सै महामहो देयी दौ।। महामहो हरिकेश सुतो (12/04) गोविन्दम नोने को खण्डिबला सै नित्याेनन्दर दौ।। अपरौ (11/02) लक्ष्मीैपति लक्ष्मीहकंठो कुजौली सै बाछे दौ।। अपरै लान्हि रूचिकर हरिवंशा: लखनौर सकराढ़ी सै पनिहथ दोंदे दौ।। रूचिकर सुतो हरदत्त नितिकरौ खण्डीबलासै विश्वीनाथ दौ।। अपरो गिरीश्व र: मनझीसै ज्ञातनाम सीत दौ।। गिरीश्वचर सुता गंगेश्वुर भवेश्वरर देवेश्व्रा: (33/06) लखनौर सकराढ़ी सै सर्वेश्वरर दौ।। (603/06) गंगेश्वरर सुता (21/08) नरसिंह श्रीवत्स केशवा: (26/09) (31/01) बेलासकo जीवेश्विर दौ अपरै (20/08) वाराह श्रीधर माधव (29/03) (35/03) रामा: पतौना खौआल सै आदू दौ।। पतऔना खौआल सै वीजी महामहोपाध्या:य प्रजापति सुतो महो वाचस्पoति महो उँमापति।। (127/05) वाचस्पवति सुतो गणपति।।
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धनौज सै त्रिपुरारि दौ।। गणपति सुता शशिधर (21/04) लक्ष्मीपधर सुरानन्दँ धर्मधिकरणिक महामहोपाध्या।य (03/05) हरिशर्म्म्णा:।। शशिधरसुतो गदाधर: मड़ार सै रविदौ ।। अपरौ महिघर पृथ्वी।घरौ गंगोली सै देवरूपदौ।। अपरै जयकर शिरू गोनू गंगाधरा: सै प्रियंकर दौ।। गदाधर सुतो महामहो नयपाणि महो हरिपाणि महुआएं भीखम दौ।। महो हरिपाणि सुतो लक्ष्मीगपाणि रतनपाणि उदनपुर जजिवाल सै शान्तिकर दौ।। अपरौ महिपाणि जयपाणि गंगोली सै मातृक:।। महामहो रत्नपाणि सुता महो हरादित्यि महामहो भवादित्यस (13/0/0) भवादित्य महामहो न्याादित्यस महामहो धरादित्याण गंगोली सै वंशधर दौ।। अपेरे जयादित्य महामहो (191/09) दैवादित्य3 महो गंगादित्याि मिगुआल सै चन्द्रहकर दौ।। महामहो जयादित्यय सुता लक्ष्मींकर शुचिकर आचार्य उदयकरा: बनाइनि पाली सै भोगीश्वनर दौ (20/01) शुचिकर सुता छीतू (71/06) बीकू आङूका: भुतहरी निखूति सै सुत दौ दिघोय सै पति द्दौणा।। आङ्त्र सुता महथौर अप्रलया गयशर्म्म् दौ: महथोरे अप्रलया बीजी बाढ़न: ए सुतो विश्वानाथ: ए सुतौ गयशर्म्म गुणाकरौ भिगुआल सै विरेश्वअर दौ।। गयशर्म्मा सुतोकारू वेदूकौ सकराढ़ी मात्रकौ।। श्रीधरसुतो (30/10) रतिध (53/106) महिधेरो नाउन सै मुरारि दौ: शक्रिरायपुर नरउनसै बीजी मनोधर: ए सुतो बलभद्र: ए सुतो पनाईत भद्रेश्व र: केउँटी सउढ़सै हरिहर दौ।। ए सुतो (10/01) रामेश्व र नन्दीपश्वजरौ अलयसै देवपति दौ।। नन्दी श्व र सुतो गौरीश्वईर गोविन्दोद करूआनी सकराढ़ीया सै रतिकर दौ: करूआनी सकराढ़ी सै बीजी हरदत्त: ए सुतो श्रीकरदशर: (13/04) मनोरथा:
(22)
दशरथ सुता बलिदेव (8/05) राम नरसिंहा।। पचहीवासी नरसिहं सुतो शूलपाणि: सिंहाश्रम सैजाई दौ।। ए सुतो पद्मपाणि महामहोपाध्यािय कारूकौ आद्य: सुरगण सै गोवर्द्धन दौ।। अन्योो कोइयार सैदल्ह:न दौ।। महामहोपाध्या य कारू सुतोमहो गोविन्दामहो प्रितिकरमहो महो जगद्धरमहो (14/07) हरिहरा: करही सै हरिवंश दौ।। महोप्रितिकर सुतो लक्ष्मीयकर मधुकरौ सरिसब सैमहो हरादित्ये दौ।। सरिसबसै बीजी रत्नपाणि ए सुतो चक्रपाणि दीधीसै भीम दौ।। ए सुता श्रीवत्स हल्ले श्वकर वसुन्धार रामदेवकाम देवा: चक्रहद पनिचोभ सै छितिशर्म्म दौ।। श्री वत्स। सुता महो (11/02) देवादित्यु महो (14/07) जयादित्यद महो हरादित्या : मन्दनवाल जल्ल्की सै उद्योतकर दौ।। अपरौ शिवादित्यम: जलकौर पालीसै श्रीवत्सा दौ महो हरादित्य सुता नान्यदपुर सौआल सै बाछ दौ (03/0) म. म. धर्माधिकर्राणक हरिशर्म्म सुता राछे बाछे नोने गडूर (02/ 40/0) जयशर्म्मणा: नान्य3पुर कासिन्यय: तत्राद्यो गढ़ हृकहरी सै धनरजय दौ।। अपरौ मङार सै पीथो मागिनेयः बाछे (14/01) बाछे सुता जयदेव कापनि मधवा गंगोली सै भीम सुत शाकल्यत दौ धोसियाम सै धाम दौणा अपरौ धाम: अहपूर करमहा सै नारायण सुत हिंगू दौ।। गौरीश्वगर सुतो दामोदर मुरारि: टकबाल सैरूद दौ: टंकबाल सै बीजी हरियाणि: ए सुतो शंखपाणि: कीर्तिपाणि: पिहवाल सै झालोदो ।। गंखपाणि: नीमावासी।। कीर्तिपाणि सुतो गोविन्दप शूलपाणि: गोविन्दा पोखरौनीवासी।। ए सुतो नरसिंह: परिसरा सै उँमापति दौ।। ए सुतो वत्सेाश्व।र: बेला सकराढ़ी सैराउल मासो दौ।। अपरौशुक्लय (17/06) भिखारीक: गंगोली सै रतिदेव दौ ।। अपरै हरिहर मुरारी अनन्तश दमोदर श्रीनाथा।।
(23)
तेरहोत सकराढ़ी सै रामेश्वार दौ (03/09) वत्सेढश्वार सुतो रूद: नान्य।पुरखौआल सै होरिल दौ (03/05) गड़ूर सुतो धर्माधिकरणीक म.म. होरिल: विठुआल सै रैधर सुत मनोधर दौ।। ए सुतो धीरेश्वरर: सुइरी सै धर्माध्योक्षक देवे दौ।। अपरौ विन्येिक श्व र: ।। रूद सुता खझौली बेलउच सै कीर्तिशर्म्मर दौ।। अथ ठोम टेकारी ग्राम तत्र चतुर्वेदाध्याकयी कामदेवो बीजी।। ए सुतापाज्ञिक परशुराम दिक्षीत सोमत्रिपाठी कृष्ण ।। कलिगामौ पार्यक परशुराम सुतोश्रीधर बलभद्रो त्रिपाटीसै कुमर दौ बलभद्र सुता शारङ्त्र बनमाली उद्योतकरा: महुआ सै अग्निहोत्रिक धनञ्ज्यय दौ।। शारङ्त्र सुतो राम वामनौ।। वामन कांचगाम वासी।। महामहोपाध्याबय राम विल्व पंचक (बेलउँच) वासी। ए सुतो संतोष परितोषौ।। (151/01) सन्तोवष सन्तयति दक्षिण पाटकवासी चाक ग्राम सन्ति।। परितोष सुतो हरिहर नारायणो दुखनौरीसकराढ़ी सै बनमाली सुत हरानन्द। दौ।। अन्यौषौ।। दरिहरा सै मातृक:।। नारायण सुतो देवे (3/0) भवे कौ एकहरा वासिन्यो ।। हरिहर सुतो कुश लवौ सकoनित्याानन्द दौ लभस्ते बड़यि नाम्नाा प्रसिद्ध गढ़ वासी।। कुश सुतो शिवदाश कीर्तिशर्म्म णौ सकराढ़ी सै लक्ष्मी।पाणि दौ।। कीर्तिशर्म्म।सुता बलाइनि पाली सै भोगीश्वर दौ मुरारी सुता (62/02) सुता बागे गोगे मांगुका: तेरहोत सकराढ़ी सै जाई दौ।। तेरहोत सकराढ़ीसै बीजी गंगादित्यस एसुतो भवादित्यु एसुतो जाई माने कौ गंगोली सै पणिडत केशव दौ।।
(24) ''4''
जाई सुतो हारू गोनूकौ कुजौली सै राजू दौ।। कुजौली सै बीजी दान्तिय पुत्र पौत्रादय इन्द्र चन्द्रढ रूद्र तारापति दिनकर पहकरा।। दिनकर सुता कर्ण वासुदेव गंगाधर नरदेव मूलदेव।। कर्ण सुता हरिहर हरिब्रह्म शान्तिब्रह्म शूलपाणि नरसिंह शिवब्रह्माणा:।। शिवब्रह्म सुता (17/08) शुभंकर जयकर लक्ष्मी्कर नोने मेधाकर गुणाकरा: मोखरि सै मधुमन दौ सकुरी सै महामहो उ. देयी दौ।। मेधाकर सुतो जानूक: वनगांववासी बलाइनि वासी पासी सै देल्हकन दौ।। ए सुतो भीम नन्दीरश्वमरौ पकलिया सै कान्हु दौ।। नन्दी श्व7र सुतो (26/09) रूप पचटन पण्डुेआ सै मुरारी दौ अपरौ शिव: कप सिया मातृक: शिव सुतो राजूक: कुरिसमा सकराढ़ी सै श्यातमकंठ दौ।। राजू सुता सुधाकर अमृतकर (123/07) सोमकर विधुकर चन्द्ररकर शशिकरा: तत्राद्योरेकौरा गंगोली सै पण्डित केशव दौ।। सोइनि सै शंकरदाश द्दौणा।। ठ. (73/05) चन्द्र पति सुता महामहो महादेवा परनामक येध महामहो भगीरथा: परनामक मेध महामहो दामोदर (32/07) म.म. महेशा (30/05) रेकौरा सकराढ़ी सै वीर सुत रूद दौ: रेकौरा सकराढ़ी सै बीजी कपिलानन्दा ए सुतो जयपाणि ए सुतो ब्रह्मेश्व र: बरैवा सै त्रिलोचन दौ।। ए सुतो गोवर्द्धन नान्यौपुर अलय सै हरिपाणि दी ।। ए सुतोबन्धुन वर्द्धन: टूनी नाम्ना्रख्यादत: नरधोध टकबाल सै बनमाली दौ।। ए सुता बाटू गोविन्दय माधना चन्दौणत पाली सै गंगाधर दौ।। अथ पल्ली ग्राम बीजी कपिलदेव: ए सुतो सोमदेव ए सुतो वासुदेव: ए सुतोआदिदेव: ए सुतोराउल भृगुक: एतस्य।पत्नीय।। त्रयम एकस्यि सुतो अभिमन्युस (06/07) (21/04) पुरूषोत्तमौ
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अपरा सुतो ब्रहमेश्वार महेश्वगरौ।। अपरा सुता शंकरदेव बलदेव वरदेव वासुदेवा: मछैटा ग्रामोपार्यका:।। महेश्वैरसुता किर्तू गुणाकर दिवाकर गर्वेश्वेरा।। किर्त सुता नाइ साइ शिव छीतर नोनेका: सकराढ़ी सै नरसिंह दौ।। नादू सुतो चन्द्र्कर:चन्द्रोबतगामो पार्यक:।। ए सुता महो (19/86) प्रितिकर महामहो शुचिकर आचार्य लक्ष्मी कर महो गुणाकरा: तत्रादयास्मबय डीह दरिहरा सै अभिमन्युर दौ।। अन्यौ कि खौआल सै हरिपाणि दौ।। महामहे। गुंचिकर सुतो महोगंगाधर गणपति: आद्यो गंगोर सै रजदेव दौ अन्यो् नहरासै गांगू दौ।। महो गंगाधर सुतो महो (10/04) हलधर धर्माधिकरणिक म.म. (23/0/10) नरसिंह।। महामहो (20/01) बाछे का: तत्राद्यो मताओन दरिहरा सै शूलपाणि दौ अन्योध गोरा जजिवाल सै शिवदत्त दौ।। गोविन्द0 सुता (135/09) होरे चांड़ो सोम हरिश्वछर (30/01) हरिश्व र गोमा: गढ़ खण्डजबला सै कामेश्वगर दौ (01/05) बैकुण्ठ सुतो गंगेश्वार (06/09) भोगीश्वंरौ गढ़ वासिन्यो:।। गंगेश्वार सुता सिद्धेश्वअर सोमेश्व्र रतनेश्वैर नोने देवके तत्रादयाश्चरत्वा9रों नरवाल मात्रक: अन्योो हरिअम मातृक: ।। सिद्धेश्वनर सुता गढ़वय भगव शिवशर्म्मस विष्णुसर्म्मणा: नीमाटक. रत्नपाणिदौ।।भगव सुतो कामेश्वतर गढ़अलय सै देवशर्म्मे दौ।। (28/04) कामेश्वोर सुता फनन्दशहसै गंगेश्वषर दौ: अवहिखण्ड् भण्डाारिसम सै बीजी कुसुमादित्यव: ए सुतो श्रीधर कलपाणि:।। श्रीधर सुता।।
(26) ''5''
एकादाश: तत्रेक: मैनी वासी।। अपरौ वशिष्ठस: सुरगन सै सर्वाज ओङ्त्र दौ।। अपरौ ओहरी करहीवासी अपरौ रैधर: ए युतो गंगाधर: फनन्दकह वासी।। ए सुतो लरवाई शशिधरौ।। महो लखाई सुता रत्नेश्वरर (18/06) भवेश्वीर: ज्ञानेश्वुरा: बुजौली सै मेधाकर दौ।। अपरौ हल्लेनश्वहर बिरेश्वररौ मेंरन्दील सै हृषिकेश दौ हल्लेजश्व।र सुता गंगेश्वीर घनेश्व्र रामेश्वारा: तेरहोत सकराही सै कुलेश्वदर सुत भवनेश्वशर दो सकुरी सै महो नयपाणि द्दौणा।। (20/05) गंगेश्वतर सुता सुपरानी बंगोनी सै सुपर दौ (01/04) वी सुता देवधर मासो मुरारि गांगु शिवदेवा:।। देवधरसुता आदिदेव (34/07) विश्वहरूप पुरूषोत्तम: आदिदेव सुतो (07/02) विकर्ण वसुन्धेरौ।। तत्र बसुन्धेर सुतो देवपाणि:दरिहरा सै मांगु दौ।। ए सुता शारङ्त्रपाणि श्रीपाणि शूलपाणि वंशीधर धराधर हलधरा: तत्राद्यास्त्रौय बलहि।। टंकवाल सै वृहस्पदति दौ।। मित्रवंश भागिनेयो।। धराधर सुतो देवादित्यश: देवहार सरौनीसै देवनाम दौ।। लोहरा ग्रामोपार्यक ए सुतो शुज महामहोपाध्यादय सुपरौ रवौआल सै हरिपाणि दौ।। महामहोपाध्यादय सुपर सुतो तत्र (09/02) सोम गोमों बभनियाम सै भीखम दौ।। अपरै साबै वीर (20/02) धीर परम चांड़ौका बलहिट सै रतिकर दौ ।। अपरौ गौरीश्वपर: बलहिट सै (आनयादि सात्र) चांड़ो सुता वीर नन्दीु गुणेका: (40/06) (45/03) उचति सै अन्दूम सुत हटवय दौ
(27)
उचित भण्डायरिसमसै बीजी महिपाणि ए सुतो धर्मपाणि लखाईकौ:।। लरवाईक: सोहरावासी धर्मपाणि उचति वासी।। ए सुतो पद्मपाणि नरउन सै प्रियंकरदौ ए सुतो पुरूषोत्तम सरिसबसै कामदेव दौ।। ए सुतो अन्इौ नोने कौ मालिछ सै लक्ष्मीिकंठ सुत देवकंठ दौ।। अन्दूप सुतो (23/04) थानू हटवयकौ।। आद्यो: गोरा जीजवाल सै श्रीपति दौ।। अन्यो सु गुलदी खण्डसबला सै रत्नाकर दौ।। हटवय सुत (25/02) माधव दामोदर श्रीधर (28/07) हलधर केशवा: कुजौली सै शशिकर प्रo शंकर सुत रधु दौ दहिमत हरिहर द्दौणा (43/06) वीर सुता रूद्र (30/03) राजू सोने का: वभनियामसै गोनन सुत किहो दौ: वभनियामसै बीजी हरिशर्म्मह ए सुतो झालोक: महजौली मात्रिक: एक सुता शुभंकर जयकर प्रियंकर चोथेका (75/04) शुभंकर सुतो बाछे क: जगति सै महानिधि दौ।। ए सुतो रामब्रह्म कृष्णू ब्रहनौ।। रामब्रहम सुता भीम जाई जवे कांगूका: सुइरी सै कान्हे दौ।। जायी सुता गोर जयपति (22/10) गणपतिय:।। गोर सुतो वीर (14/06) गोननो कोड़रा माण्डइरसै रत्नेश्व र दौ अन्योे यमुगाम सै हरिहर दौ।। गोनन सुता (27/07) (92/09) महिपति किठो ऐंठोका: महवालसै दिवाकर दौ: महवालसै बीजी माहवमपत्याि: पत्नाै ए सुतो प्रभाकर ए सुतो बनमालीक: ए सुता ओहरि ढेहरि चक्रधरा:।। ओहरिप्रoरत्नाकर सुतो दिवाकर जीवाकौ हथियन सकुरी सै देवपति दौ।। किठो। सुता खण्डकवला सै रविकर दौ (05/06'') भोगीखर सुता नारायण रत्नाक दिवाकर (22/01) भवशर्म्म् गढ़ाधरा: नीमाटंक सउँथपाणि दौ।। रत्नाकर सुतो पक्षधर: कुर्रसमासकo राजू दौ।।
(28) ''6''
पक्षधर सुतो हलधर यशोधरौ दरिहरा सै रतनाकर दौ।। यशोधर विस्फीष सै सुतो रविकर पनिचोभ सै कोन दौ।। रविकर सुतो रूद्र श्रीकरौ गढ़ विस्फीा सै शंकर दौ।। सुलारूद्र श्री करौ गढ़ विस्फीप सै शंकर दौ बाढ़ विस्फी् सै बीजी विष्णुप शर्माबीज: ए सुतो हरादित्यर ए सुतो कर्मादित्यस:।। ए सुतो शान्ति विग्राहिक देवादित्यै राजवल्लसभ भवादिलो।। यदि विग्रहदेवादित्यर सुता पाएधारिक वीरेश्वर व्यरक्तिव नैवाधिक (64/05) धीरेश्वदर अप्रक्रयमहासमन्धिपति महामहत्तक गणेश्वार भाण्डा गरिक यटेश्व र स्थाानाकारि: हरदत्त सुंद्राहआक लक्ष्मी।दत्त शुभ दत्ता: तत्र पाण्डयका वीरेश्वभर अप्रक्रय गणेश्व्र राजवल्ल भ शुभदत्ता: नान्यापुर त्रिपाली सै कामेश्वीर दौ।। अपरौवर्तित धीरेश्वदर अनुक्रमांक जनेश्व्रों महपौरवासी माधवमभागिनेयो हरदत्त लक्ष्मीभदत्त: मह यौर वासी यमुगाम सै काटिर्य माने दौ।। हरदत्त सुतो मुरारीदत्त: बहेराढ़ी सै लड़ावन दौ।। अपरौ उँमापति दत वरूआली मातृक ।। अपरौ शंकरदत्त अलय सै देवे दौ।। अपरौ महत्तक होराइक: गढ़ बेल्उँेच सै शंकरदत्त दो।। शंकरदत्त सुता नरवाल सै दिवाकर दौ।। रूद सुतो वेणीक: बहेराढ़ीसै नरहरिसुत विश्वेम्भर दौ (04/09) अभिमन्युक सुता विकर्ण वरूरूचि सागर पीताम्पररा: भझौली सकराढ़ी सै दशरथ दौ।। वररूचिसुता देल्हरण सोल्हवण तिमे मुरारिय: देलहनो (09/07) वलाइनि वसी सोल्ह्नों मछाँटा वासी तिमे जलकोंर वासी मुरारी बहेराढ़ीवादी ए सुतो देवपाणि चन्द्र्पति।। देवपाणिसुतो हारिल देहरि: आद्य: सुरगनसै गोवर्द्धन दौ।।
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अन्यो9 भिन्नी मातृक:।। होरिल सुता लक्ष्मीेकंठ जयकंठ शितिकंठ सोखे (09/04) लड़ावन श्याइमकंठ हेलना: तत्राद्यो सरिसब सै कामदेव सुत कानह दौ अन्यो खैआल सै बाछे दौ।। जयकंठ सुतोस्था्नान्तयरिक रति: पवौली सै वीर दौ (05/04) विकर्ण सुतो गणपति वाचस्पाति।। वाचस्पयति पबौली गामोपार्यक: ए सुतौ हरदत्त।। बापरौ आद्य सुरगन सै गोवर्द्धन दौ अन्यन पंच जेठोरी सकरदीसै ऐलौदो।। हरदत्त सुता वीर देवे श्रीदत्ता: वीर सुतो महो (14/03) गंगाधरभन्दै. हरिदाशदौ।। जलवंयापट्ट राजवासी दामोदरो बीजी ए सुतो माधव बान्वौ्र ।। माधव सन्तहति भन्द3वालवासी ए सुतो जानु श्रुतिपरम त्रिलोचन:।। जानू सुता अमिनन्दग दाजू अच्युजत मूधरा:।। दाजू सुतो हरिदाश:।। हरिदाश सुता सै दौ।। स्था न्तारिक ठरति सुतो ठ. वासुकी: गढ़ निखूति सै यगद्धर दौ।। निखूति सै बीजी त्रिपाठी रूद्र: ए सुता महामहत्तक सुरेश्वैर रतनेश्वनर नोने देवेका: सरौनीमातृक: सरौनी मातृक:।। महामहत्तक सुरेश्विरसुता शान्ति विग्रहिक हरिहर विद्याधर देवधरा: डीह राउढ़ सै छीतर दौ।। महामहत्तक विधाधर सुता जगद्धर नोने प्रo रत्नधर देवधरा बुधौरा सकराढ़ी सै गणपति दौ।। छतौनी सै माधव द्दौणा।। महामहत्तक जगद्धरसुतो लक्ष्मीर शर्म्मो कीर्तिशर्म्मoणों सिंहाश्रम सै रत्नेश्व़र दौ दुवादए पार पुर सकराढ़ी सै अनन्त द्दौणा।। ठ. वासुकी सुता गोविन्दय नरहरि (11/0/10) जनार्दना: तल्ह नपुर सै रत्नाकर दौ : तल्ह नपुर सै बीजी विष्णुत शर्म्माष: ए सुता शुक्ल ज्ञान रत्नेश्वतर दामोदरा: तत्र दामोदर सुतो लोरिक: बेलासकराढ़ी सै मासो दौ।। ए सुतो चन्द्र कर धर्मकरौ कुजौली सै विकर्ण दौ।। चन्द्रणकर सुतो लगशर्म्मस रत्नाकरौ डीह दरिहरासै लक्ष्मेबश्वैर दौ।। रत्नाकर सुता पोखराम बसहासै राम सुत देवे दौ।। सुइरीसै कीर्तिदाश द्दौणा।। ठ. (25/02) नरहरि सुता विश्वकम्भर (30/04) विरखू (25/04) गदाधरा: गढ़ माण्ड।र सै नागे दौ
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(02/01) महामहो निधिसुतो श्री कुमार पाठक वासी गंगोभीर सै चन्द्र/कर दौ।। ए सुतो इबे (26/02) चौबेकौ टकबाल सै रत्नपाणि दिशि मित्रानन्दह दौ।। (09/05) इबे सुतो घृतिकर: केउँटराम पण्डो ली सै रूद दौ।। ए सुतो रविकर: अलय सै गोविनद दौ।। एक सुतो गुणीश्वनर (11/06) प्रo कोने बागेकौ तिसउँत सै जगद्धर सुत नारायण दौ निम्सै दुर्गादाश दौहित्र दौ।। बागे सुतो रातूक: गढ़ यमुगाम सै जीवेश्व1र दौ गढ़ यमुगाम सै बीजी श्रीकर: ए सुतो हरिकर: ए सुतो जीवेश्वदर: सकराढ़ीसै पदमपाणि दौ।। जीवेश्व:र सुतो आङनि: माङनि: अथरी दरिहरा सै नरसिंह दौ: दरिहरा सै बीजी कमल पाणि: ए सुता देवधर धरणीधर माहव (कनिष्ठान) अपरौ (14/07) चिन्ता मणि: (15/07) देवधर सुतो कुसुम (11/03) रेचन्द्रो कुसुमे सुता सागर पुराई सीधू का: ।। सागर सुतो पाई दामोदरौ।। दाम्मोादर सुतो बसाईक: ए सुतो राम: ए सुतो नरसिंह।। नरसिंह।। सुता दिधो सै कर्मादित्य दौ।। ठ. विश्व।म्भर सुतो नाथू (70/02) बाटू कौ (52/0/10) खौआल सै विकू सुत रघुपति दौ (03/06) विकू सुतो रघुपति: गंगोर सै भोरे दौ: गंगोर सै बीजी शाश्व त: ए सुतो दामोदर: ए सुता रघु माधव चन्द्रदधरा: छतौनी सै श्रृंगार दौ।। चन्द्रघधर सुतो विनू विदू कौ पण्डुिआ सै राम दौ।। (19/04) विदू सुता विश्वदनाथ (16/09) श्री नाथ जगन्नाणथ देवनाथा: सतलखा सै महिधर दौ।। श्री नाथ सुतो गुणीनाथ: राढ़ी कोइयार सै शान्ति दौ ए सुतो भोरेक: शीशे पालीसै ऐलौदौ।। भोरे सुता (17/01) शिवनाथ भवनाथ देवनाथा: छतौनी वासी सठवाल सै देवशर्म्मोदिशि कुसुमाकर दौ छतौनी सै परमेश्वुर द्वौणा (23/01) रघुपति सुतोहरिपति: (25/04) नरउन सै कोने दो नरउनसँ बीजी महामहोपाध्यासय महिधर: ए सुता श्री धर मनोबर लक्ष्मी0धरा:।। श्रीधर सुतो उदयकर प्रियंकरौ प्रियंकरें।। कुमुदी मातृको।। अपरो त्रिलोचन:।। उदयकर सुता रतनाकर पुण्याीकर रूचिकरा: लखनौर सक मातृ: रतनाकर सुता पदमाकर मक्रिकर।
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शुचिकर कीर्तिकरा: मक्रिकर सुतो जयशर्म्मय हरिशर्म्माुणौ।। बत्सोवाल वासिन्योु।। बुधौरा सकरादी सै प्रितिकर दौ।। (11/06) हरिशर्म्मर सुतो प्रितिशर्म्म : पचही जजिवाल सै लक्ष्मीणश्वतर दौ जजिवाल सै बीजी दण्डोपाणि: ए सुतो रत्नपाणिहर्षपाणि:।। रतनपाणि सुता शूलपाणि गोवर्द्धन महेश्वशर शीरू शारङ्त्र:।। शूलपाणि सन्त्ति पतखौरि वासी।। (09/01) गोवर्द्धनो गोरा वासी।। महेश्वथर सुतो उग्रेश्वगर: पचही वासी।। ए सुता (17/03) गौरीश्व र शुक्लि कान्ह् सुरेश्व र सोमेश्वारा:।। कान्हत सुतो लक्ष्मीाश्व6र हरिश्विरौ: सरौनी सै सर्वानन्दद दौ।। लक्ष्मीहश्व र सुतो पदमपाणि: पचही सकराढ़ी सै कारूदौ।। तिसउँत सै विश्वधम्भर द्दौणा।। प्रितिशर्म्म। सुतो डालू (08/02) कोने कौ करमहा सै नोने दौ।। (02/06) नोने सुता कीर्तिशर्म्मि (143/06) रामशर्म्म। मांगू का: आद्दय: मेरन्दील सै कुसुमाकर दौ।। अन्योो सुरगन सै विरेश्व र दौ।। मेरन्दीी सै बीजी जनार्दन: ए सुतौ बैकुण्ठ् हृषिकेशौ।। हृषिकेश सुता मानू पुण्याैकर दिवाकर गुणाकरा: परस्प्र भिन्नौ मातृका:।। पुण्यानकर सुता दहिभत सै कान्ह दौ (14/05) कोन सुतो उदयकर (23/06) श्री करौ वलियासै भीखे दौ।। (01/02) शुक्लृ हरिवंश सुता (09/03) सुता रतिकर सोमकर लक्ष्मी1कर (10/05) साधुकर दिवाकर शुंभकरा: आद्य सिधौली सै सुरेश्वकर दौ।। अपरैत्रय हडूरी खण्डरबला सै चक्रेश्वकर दौ।। अन्योृषि गढ़ बेलउँच सै चणाई दौ।। दिवाकर सुतो भिरवेक: तिसउँत सँग्रहेश्वसर दौ तिसउँत सै बीजी विश्वरम्भरर: ए सुता हरिहर हल्ले श्वृर (14/05) नारायण (10/05) पद्मनाम गोधन जीवन दिवाकरा: आद्दय सरिसब सै रामदौ।। अन्यौि करनैठा सकराढ़ी सै रत्नपाणि दौ।। हरिहर सुतो डालूक: विस्की सै मधुकर दौ।। डालू सुतो ग्रहेश्वमर: माण्डमर सै चन्द्र कर दौ।। ग्रहेश्व्र सुतो मोतीक:
(32) ''8''
माण्ड2र सै नारायण दौ।। (11/03) भिखे सुता रूद्रपुर सरिसब सै वीर सुत महादेव दौ वरूआली सै रामेश्वरर द्दौणा।। एवम ठ. महादेवादि मातृक चक्रम।। महामहोपाध्या(य ठ. भगीरथा परनामक मेघ सुतोमहामहोपाध्याैय ठ. रामभद्र: नाउन सै रतिपति शुत शोरे दौ (08/04) डालू सुता मधुकर (27/02) चन्द्रसकर (24/07) दिवाकरा: मड़ार सै सोम सुत यरेश्व र दौ।। पचदही सिंहाश्रम सै धाम द्दौणा।। मधुकर सुतो रूचिकर विश्वेाश्व रौ (56/07) करहिया पनिचोभ सै सोंसे दौ।। करहिया पनिचोभ सै बीजी चण्डेमश्वधर: ए सुतो भिखेक: ए सुतो गोंढि: केउँटराम पण्डौसली सै ग्रहेश्वीर दौ तल्हरनपुर सै महादेव द्दौणा।। गोंदि सुतो सोंसेक: सुइरी सै गुणकर सुत मधुकर दौ।। सोंसे सुतो प्रितिकर हारू कौ बेला सकo जीवेश्वमर दौ (03/01) रामौ बलहि टंकवाल मातृक: ए सुतौ मधुकर चांड़ौ।। (24/08) मधुकरसुतौ (59/04) राउल मासौ कौ बेलावासी पचही जजिवाल सै महेश्वहर दौ।। राहुल मासौ सुता त्रिलोचन कृष्णा नारायणा: कोइयार सै हरिश्वौर दौ।। त्रिलोचन सुता हरदत्त पुरोहित गोपाल साधुकरा: बुधौरा सै बुधौरासँ भोजू दौ।। हरदत्त सुतो चाण गोननो पनिचोभ सै सह देव दौ।। पनिचोभ सै बीजी मधुमन: ए सुताधूर्ज्जदटि वाचस्पौति वृहस्पहति भोजदेवा:।। तत्र धूर्ज्ज।टि सन्त ति तल्लिस्मा ग्रामोपार्यक:।। (10/02) वाचस्पसति सन्तणति वीरपुर ग्रामौं पार्यक:।। वृहस्पततिसन्तोति यमुनाग्रामौपार्यक:।। भोजदेव सन्तिति चक्रहृद वासी।। हरदत्त करहिया पद्मपुर वासी।। ए सुता छितिशर्म्मँवशिष्ठ्देवशर्म्मोणा:।। वशिष्ठौो हड़हृद वासी।। ए सुतो रवि शर्म्मस: ए सुतो महादेव ए सुता सहदेव श्रीदेव आदिदेवा:।। सहदेवसुता सान्हि देहरि आङूका: सै दौ।। गोनन सुतो जीवेश्वौर धारेश्ववरौ बरूआली सै चान्दी दौ।। जीवेश्व रसुतो गिरीश्व र:
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खण्ड3बला सै जाई दौ (07/05) दामोदर सुतो महो दधि: पाली मातृक:। ए सुतौ विश्वतनाथ गोननौ।। विश्वसनाथ सुतो जगन्नादथ शिवनाथौ कुजौली सै गोनन दौ अपरौ होरेक: दरिहरा सै विश्वभरूप दौ।। होरे सुतो जाई भवनाथौ।। गम्भीतर होरा वासियों ।। जाई सुता मातिछ सै देहरि दौ।। मालिछ सै बीजी वत्से:श्वार: ए सुतौ हललैश्वोर दण्डिका: सुरगन मातृक:।। ए सुतो पुरूषोत्तम प्रo देहरि: खण्डैबला सै कापनि माधव दौ।। देहरि सुतो करूणाकर: थुरी जालय सै धाम दौ।। (55/04) रूचिकर सुतो रतिपति: टकवाल सै शिरू दौ टकबाल सै बीजी हरिकंठ: ए सुतौ लक्ष्मीतकंठ: पण्डुजआ सै शंकर दौ।। ए सुतो बाढूक: देउरी सै श्रीनाथ दौ।। ए सुतौ माधव (25/06) केशवौ नरवाल सै यशुदौ भन्दौवाल परिसरा सै कृष्ण शर्म्मड द्दौणा।। बृहद ब्रहनपुरा सै विष्णुथकरकरत्तुत: माधव सुतो शिरू मांगु कौ जलकौर दरिहरासै अन्इ् सुत सोंदू दौ गाउल करमहा सै पागु छौणा शिरू सुता (24/08) रूद रति विश्वे/श्व रा: माण्डैर सै सुधाकर दौ।। (02/05) सदुपाध्या।य (27/03) विशोसुतौ (28/05) हरिकर सुधाकरौ पालीसै हलधर दौ (06/08) देल्ह न सुतो गंगादत्त हल्ले श्व रौ विलय सै हरि दौ।। गंगादत्त सुता धारेश्व र शंकर भोगीश्व0र यवेश्वुर (12/01) मोतीश्वरा: सिंहाश्रम सै महोदधि पौत्र देहरि सुत गदाधर दौ।। धारेश्विर सुतो धीरेश्वधर: दरिहरासै देव सन्तेति देवेश्व0र दौ।। ए सुता हलधर देवधर लक्ष्मीशधर (14/02) श्रीधरा: जगति सै धारेश्वधर दौ: जगति सै बीजी जयकर ए सुतो सगर: ए सुता जलसेन त्रिलोचन अरविन्दाम।। जलसेन सुता मधुकर गोधन श्रीकर देल्ह न जीवधरा:।। गोधन सुतो सिद्धेश्वैर गंगेश्वतरौ।। सिद्धेश्वनर सुता कृष्णी धारेश्वनर रूद्रेश्वररा: जगति वासन्यर:।। धारेश्वेर सुतो बोधी कोने को केउँटी एडढ़ सै हरिहर दौ
(34) ''9''
केउँटी राउढ़ सै बीजी मसबास बासूक: ए सुतो सिंगारूक: ए सुतोवाराह: ।। ए सुता श्री वत्सध जगद्धर श्रीधरा: ।।श्रीधर सुता विद्याद्यर लक्ष्मीजधर शशिधर महिधर हरिहरा: सिंहाश्रम सैगंगादित्यु दौ।। हरिहर सुता धोसियाम सै रतिनन्दन दौ।। हलधर सुतो (42/01) सौसेक: सुपटानी गंगोली सै गोम दौ (05/07) गोम सुतो जीवेक: एकमा वलियास सै रतिकर दौ (08/07) रतिकर सुता दिद्यो सै सान्हूम दौ।। (19/02) सुधाकर सुता मनोरथ (36/08) हरि कान्हु (28/01) सोमा बहेराढ़ी सै रवि दौ (07/01) लड़ावन सुतो राम सुपनो रूद्रपुर सरिसब सै वीर दौ।। राम सुतो (27/01) त्रिपुर रवि: डीह दरिहरासै विश्वलम्भ)र दौ पिहवाल सै लक्ष्मीनपति दौहित्र दे (19/08) रवि सुतो पुरेक: माण्ड सै विभू दौ (07/01) अपरा दूबे सुता गुणाकर शान्तिकरणीक (22/07) पौखू मित्रकरा: मघेटा पालीसै श्री कंठ दौ।। अपरौ सुपेक: घुसौत सै राम सुपे सुतो विभूक: दिघोय सै जगन्ना0थपुर वासी सुरेश्वतर दौ।। (10/10) विभू सुतो गोरा जजिवाल सै भवदत्त दौ (08/03) गोवर्द्धन सुतो कापनि प्रoब्राह्मण: भण्डा रिसम सै श्याशम कंठ दौ कोधुआ सै गोविन्दर द्दौणा।। कापनि सुता भवदत्त गंगादत्त जयदत्ता: सकराढ़ी सै शारङ्ग दौ।। मांडूल प्रo भवदत्त सुता दूबा सकरा लभशर्म्मक दौ।। श्री कर सुता जनक बैकुण्ठि धारेश्वदरा:।। जनक सुतो ऐलो बीठूकौ बरैबा सै कान्हो दौ।। ऐलो सुता आदिदेव जीवधर वंकेश्वसरा: जी सुताअनन्त रवि सुपेका इबावासिन्या:: चण्डीै बेहद हरिअमसै विद्यानिधि उक्ता महि निधि दौ।। रवि सुता शुचिकर गुणाकर शुभंकर लभशर्म्म णा: बलहिटिसै शिवादित लभशर्म्म् सुतो रामशर्म्मै: गढ़ बेलo लक्ष्मीापाणि सुत पौचू दौ।। एवम् रतिपति मातृक चंक्र।। रतिपति सुता (48/05) गोरे होरे बासू यशुका: बहेराढ़ी सै जनार्दन।।
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सुत गणपति दौ (07/08) (32/08) जनार्दन सुतो गणपति: शक्रिरायपुर नरउन सै हरिश्वोर दौ (03/08) रामेश्विर सुतो योगीश्वतर चक्रेश्विरों (64/03) विरपुर पनिचोभ सै रत्नेश्विर दौ (08/08) वाचस्पोति सुतो हरिशर्म्मद ए सुतो (18/03) देवशर्म्मत ए सुतो थानूक: ए सुतौ गौरीश्व र ए सुतौ महेश्व)र वीरपुर वासी ए सुतो कामेश्विर: ए सुतौरत्ने ततैल पण्डु आ सै गुणाकर दौ।। ए सुतौ विश्विनाथ (17/04) विकू कौ तत्रादयो रेकौरा गंगोली सै जाटू दौ अन्यौ् तल्हतनपुर सै लौरिक दौ।। अपरा सुता करूआनी सकराठी सै जगद्धर दौ सरिसब सै राम द्दौणा।। भन्दावाल जल्लीकी सै उद्योत करमतुत योगीश्वर सुतो हरिशऽवर: चन्दौसत पाली सै हलधर दौ (05/04) महो हलधर सुतो (12/0) प्राणधर: एकमा वलियास सै साधुकर दौ (08/07) (21/08) साधुकर सुतो मित्रकर (16/03) चण्डे4श्वदरौ तिसउँत सै पण्डित सुपाई दौ (08/09) नारायण सुतो पण्डित सुपाईक: पतऔना खौआ गदाधर दौ।। ए सुता भड़ार सै श्रीनिवास दौ।। हरिश्व्र (25/05) सुता चान्दोगवलियास सै शिवादित्यत दौ।। चान्दो बलियास सै बीजी पुरूषोत्तम: ए सुतामहादेव जयदे महेश्वदरा:।। जयदेव सुतो सुधानिधि एसुतौ महानिधि ए सुतो जयनिधि रत्नपुर तिलयली सै हरिहर दौ।। जयनिधि सुता अभयनिधि राजनिधि सुता लक्ष्मी:करा:।। तत्राद्यो बभनियाम सै राम दौ।। सुपर कोयली सै रवि भागिनेयो।। अन्यौि महुआ मातृकौ।। अभयनिधि सुता रत्नेश्व:र रामेश्वभर परमेश्व।रा: गंगो देवरूप दौ।। रत्नेश्वोर सुता सूर्यकर देवदत्त गौरीश्वुर शंकर गदाधरा: तत्राद्यो दिनारी सरीसव सै राम दो।। अपरै बभिनियाम सै नितिकर दौ।। सूर्यकरसुता (44/06) रूचिकर शिव (13/02) गंगादित्यद महो (28/03) हरादित्यस कान्हत प्रoकामेश्वशरा: मछैटा पाली सै गणेश्वएर दौ शोधवाल गंगोली सै गंगेश्वपर द्दौणा।। शिवादित्यर सुता होरे पुराई धारू भवाई दुर्गादित्या।।।
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धोसियाम सै जगन्ना थ सुता श्रीरंग दौ लाही सै श्रीधर दौणा (49/07) गणपति सुता रविकर अमरू कमलू का: बेलउँच सै महादित्यस दौ (04/07) शिवदाशु सुतो दुर्गादित्य( बo (14/05) तीथुकरौ डीह दरिहरा सै विकर्ण सुत नन्देन दौ सुरगन सै राय हरिकेश द्दौणा दुर्गादित्या सुतो धरादित्यद कपिलेश्व्रौ कुजौली सै रूचिकर दौ सरिसब सै वीर द्दौणा धरादित्यद सुता एकादश महो (16/05) धर्मादित्य् महो (30/09) जयादित्य महो (22/06) गयादित्यक महो महादित्यस महो जीवादित्य (19/06) (25/05) महो रूद्रादित्यण ।।25/05।। पद्मपुर पकलिया सै सीधू सुत बाछे दौ चिलकौर दरिo भव द्दौणा अपरे सुता रत्ना दित्यय महो मित्रादित्यग महो (20/02) महो प्राणादित्याय: (33/10/0) भरेहा सै गणपति दौ सोहन जल्लणकी सै लमशर्म्मय छौणा अपरौ रूक्मानदित्यि परनामक बाटू प्रo (35/02) लाला लहरा गंगोली सै बारू दौ।। महो महादित्य सुता विश्वतनाथ (50/02) इबे (66/02) मोखे चौबे का: माण्डपर सै गोपाल दौ (02/01) अपरा नरसिंह सुतो चोथू मोथू कौ ।। चौथू सुतो देहरि: जजिबालभातृक: ए सुतो देवदाश रामपति:।। देवदाश सुतो रत्नेश्विर ए सुतो सुथन सबवई कौ नान्यसपुर अलय सै पौखू भागिनेयो ।। सुथन सुतो गणेश्व र नर देवौ सै दौ।। नरदेव सुतो सज्जान गोपालौ अलयसै शूलपाणि दौ।। गोपाल सुतो हरिहर नरसिंहो सरपरब खण्डपबला सै होरे सुत परमेश्व र दौ बलहा बलियास सै महादेव द्दौणा।। एवम् शोरे मातृक चक्रं।। शोरे सुता वुधवाल सै कान्हा दौ।। बुधवालसै बीजी बासुदेव: ए सुतो विभाकरप्रभाकरौ।। प्रभाकर सुतो धारेश्वार: हरिपुर वासी. ए सुता धर्मेश्वीरबामन सोमा: गंगोली सै गणपति दौ बामनसुता पुराश कौशल इबे हिरू का: सुइरी सै प्रतिहस्तृ प्रज्ञाकर दौ।। पुराश सुता मधुकर सूर्यकर (38/08) उदयकरा: खौआल सै रत्नपाणि दौ।।
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मधुकरसुतो सटुपाध्या।यमानूक: एकमा खण्ड बला सै सुपे दौ (09/01) अपरा विश्वयनाथ सुतो सुपे गांगुकोदक्षिण खण्ड कटाई सै भीम दौ।। सुपे सुता जाटू मतिहार (20/07) (20/91) शतु लाखूका: करमहा सै लक्ष्मीटपति दौ।। (02/06) लक्षमीपति सुता सरिसब सै देवादित्या दौ (03/02) देवादित्य0 सुता (12/07) सुता खौआल सै नोने दौ (03/05) (33/04) नोने सुत: (16/05) कान्ह : गंगोर सै शाकल्ल यदौ।। सदुपाध्या य (191/03) भानू सुता (45/06) गणेश्वीर परियाणव (22/07) गुणीश्वतर महो गंगेश्व।र (35/01) रूचिकर: (43/04) रतिकरा: एकमा वलियास सै भीखे दौ (08/01) उपरा भीखे सुता चिन्ता मणि दिनमणि (19/09) हिरमणि धरार्माणय: त्रिलाठी धुसौत सै त्रिलोचन दौ।। त्रिलाठी धुसौत सै बीजी नरसिंह: ए सुतो केश्वू: ए सुता लक्ष्मीमकंठ श्याणमकंठ सुपटा: छतौनीसै विभू दौ।। लक्ष्मी्कंठ सुता चन्द्रसकर भवेश्वतर वसन्ताू: आद्यो गोधोली सै श्रीधर भागिनेयो।। अन्योिदहिमत सै राम दौ।। भवेश्वौर सुतो त्रिलोचन: दरि गौढि दौ त्रिलोचन सुता नाउन सै हरिशर्म्मव दौ (08/01/) जजिoलक्ष्मी श्व।र द्दौणा।। महो गंगेश्वनर सुतो हेलूक गढ़ माण्डनर सै जीवेश्व्र दौ (07/02) कोनेप्रo गुणीश्व र सुतो जीनेश्वमर: पवौली सै पुराश दै (07/03) वापट सुता यशोधर जगद्धर (17/05) हलधरा: कुसमाल सै मणिधर दौ।। अपरै उदयकर गुणाकर पद्मकरा: फनन्दीह सै लखाईभ्रातृ शशिधर दौ।। यशोधरा सुतो प्रितिकर पुराशो: नीमाटकबाल सै जगन्नारथ सुत भवनाथ दौ कुजौली सै पहकर द्दौणा वसुआल सै भवदाशकस्तुईत: पुराश सुतो देवशर्म्मप तिसउँत सै खुशे दौ।। अपरौ मोहन दामूकौ एकमा पलियास सै आनन्ददकर दौ भेरहा सै लड़ावन छौणा अपरौ वीठू पुण्याशकरौ सकराढ़ी सै हरपति दौ।। जीवेश्वोर सुता टकबाल सै गोपाल दौ।। अपरा जीवेश्वसर सुतो सोंसेक: बुधवालसै (59/07) मानू दौ।। जसानन्दौटकबाल सै बीजी:
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पाँखूक: ए सुतो श्री निवास: ए सुतो हरिहर: उदनपुरत्रजिवाल सै आवस्थिक माने दौ।। ए सुतो बाछेक: गढ़ यमुगाम सै हरिकर दौ।। सुतो गोपाल: मिगुआल सै जाटू सुत मितूदौ सोइनि सै शंकरदाश छौणा एकान्तिक गोपाल सुता (46/04) नारायण हरि बासुदेवा: नरवाल सै दिवाकरपौत्र मणिकरसुत होरे दौ भिखौनी कलिगाम सै कमलपाणि द्दौणा अपरौ सुपेक: हड़री खण्डाबला सै गोनन्दव द्दौणा तेलू सुतो कान्हि: दरिहरा सै पद्मकर दौ (07/04) रेचन्द्र सुतो योगु मन्डलनौ ।। योगू सुता आर्तिधर मनोधर चतुर्भूजा।। चतुर्भुज सुता पुराक मसवास देवधरा: पालीसै श्रीपाणि दौ।। पराक श्रीपत्याा: परनामा सुतो यशस्पुति सिंहाश्रम सै मनोधर दौ ए सुतो महामहो रतिपति महो रामपति महो (12/0/01) जानपतिय: ।। गोधूलि अलय सै शंखपाणि दौ।। ब्रह्मपुरादिधोय सै सोम छौणा।। महामहो रतियति सुता महामहो सुरपति महामहो इन्द्रदपति महामहो महो धृतिपतिय: जानी मराड़ सै लोचन प्रo चन्द्र कर दौ पिहवाल सै सीधू दौहित्र दौ।। महामहो सुरपति सुता महो किर्तिशर्म्मत महो प्रितिशर्म्मतमहो हरिशर्म्म मिश्र मित्रशर्म्मिणा: आद्यो महुआ सै छीतू दौ दरिहरा सै गंगेश्व र द्दौणा अन्योर करही भण्डा रिसम सै देकवंश सुतनयवंश दौ।। महामहो प्रितिशर्मा सुता रविकर गांगु दिवाकरा: तत्राद्यो यमुगाम सै जीवेश्व र दौ।। अन्योय वति गाम सै इशर वाट सुत जादू दौ।। रविकर सुता शुभंकर (34/05) गुणाकर प्रजाकर (24/09) कुसुमाकर पद्माकरा: नदाम सै महादेव सुत सुधाकर दौ इबा. सक. मतिदेव द्दौणा (38/01) पद्मकर सुतो बाटू प्रo हरीक: (73/07) तल्हमनपुर सै गढवय दौ (07/08) शुक्ल जान सुतो महादेव: चाण्डीन टकवाल सै सोम दौ।। महादेव सुता सोमदेव नरदेव गंगदेवा: कुजौली सै मनोरथ दौ।। सोमदेव सुतो चण्डे)श्वार बर्द्धमानौ।। चण्डे श्व र सुतो यवेश्वरर
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(21/09) वीरेश्वसरौ: जालय सै श्रीपति दौ।। यवेश्व र सुतो गढ़वयक: महियानी सै तारापति दौ।। गढ़वय सुता हरिरवि रतना: पाली सै छिताई दौ (09/07) मोतीश्वेर सुतो रत्नाकर: दरिo कान्ह् दौ।। ए सुतो छिताई हिताई कौ (43/02) को सिम्भुैनामकरमहा सै शंकर दौ।। छिताई सुतो प्रभाकर: पदमपुर पकलिया सै बाछेदौ।। पद्मपुर पकलिया सै बीजी बासुदेव: ए सुता महादेव गंगदेव रामदेव कामदेवा:।। रामदेव सुतो शितिकंठ श्यानमकंठौ।। शितिकंठौ सुतो सिधूक: यमुगाम मातृक: ए सुतो गणपति बाछे कौ।। अपेरो गिरीश्वदर: पाली सुइरी सै अभिनन्दा दौ।। बाछे सुता भाइ मासे चन्द्र करा: चिलकौर सै भव दौ।। माउँबेहट सै कान्हप द्दौणा कान्हत सुता हरि शिव शंकरा: उदनपुर जजिवाल सै गुणे दौ।। उदनपुर जजिवाल सै बीजी आवस्थिक मानेक: ए सुता शिनिकंठ रति कंठ मुयर कंठ होख कंठ अनन्तन कंठ मणि कंठा: तत्राद्यो मझौरा सकाढ़ी सै दौ।। अपरै बरेबा सै शंकर दौ।। शितिकंठ सुता धीर वीर भासे गोपाल हरिहरा: तेरहोत सै नारायण दौ।। देयाम सै प्रजाकर पौत्र श्री कर सुत हरिकर दौ।। अन्यौिकंठ के धौनी टकबाल सै गुणकर भागिनेयो: गोपाल सुतो कान्हक: वनाइनि पाली सै धीरेश्वमर दौ।। ए सुता गोविन्दौ (20/09) नारू पुराई रामा: तत्राद्यो जगति सै गणपति दौ।। अन्योतो करूआनी सकराढी सै नाइ दौ ।। बेलमोहन नरउन सै तपक सुत कार्य गंगादाश द्दौणा. पुराई सुतो बैजू शंकरों (38/04) उचति सै हखय दौ।। अपरौडालूक: झोंट पाली दरिहरा सै रविदत्त द्दौणा (11/05) जानपति झोंटपालीवासी ए सुता महो शिवपति कृष्णणपति वासुदेवा: हरिअमसै छीतू दौ।। हरिअम्बस सै बीजी दीक्षित झाँउँक: ए सुतौयाज्ञिक त्रिलोचन: एसुतौ विद्यानिधि देवनिधि।। देवनिधि सुतो विद्याधर छीतू प्रसिद्ध नामा: खण्ड बला सै नीलकंठ दौ।। सुता हरिहर (16/08) माधव गोविन्दाि सुइरी सै बहलचन्दौ।।
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सुइरी सै बीजी शेखर ए सुता रत्नपाणि वासुदेव लखपतिय:।। वासुदेव सुतो शंकर:।। ए सुता अमोध कुमार शारङ्त्रपाणिय: शारङ्त्र पाणि सुतौ गौर बहल चन्द्रो बहल चन्द्रा सुता सै दौ।। शिवपति सुता डालू विशो होरे हरदत्त जाटू का: आद्या छादन सरिसब सै गयन दौ।। अपरौगंगौर सै बराहनाथ दौहित्रदौ होरे सुतो रविदत्त: गाउल करमहा सै श्रीदेव दौ।। रविदत्त सुता गांगु कान्हन गोपाला: कोइयार सैहारू दौ।। अपरा सुता करमहा सै आङनि दौ (02/06) गौरी सुतो अमाँइका: नान्यिपुर खौआल सै जगदेव दौ।। ए सुतो आङनि बलहिर सै देवकंठ दौ।। ए सुतो हारू क: धोसिवाम सै पराशर दौ।। कलिगाम सै दिवाकर छौंणा (38/02) डालू सुता गौरी गुणे ग्रहेश्वपरा परनामक अमांइ का: बरूआली सै रूचिकर दौ (01/05) चन्द्र कर सुतो विश्वतनाथ: कन्जु ग्राम सकराढ़ी सै जगन्नासथ दौ गोविन्द् वन पनिचोभ सै नन्दइन सुत गंगेश्व र छौणा। विश्वइनाथ सुतो रविकर: (25/08) सेरी सिंहाश्रमसैभव दौ।। ए सुतो रूचिकर: दहिमत सै राम सुत इबे दौ भण्डाोरिसम सै हरिहर द्दौणा रूचिकर सुता सरिसब सै नाने दौ अपरौ देवादित्य। सुतो करूणाकर: करूआनी सकराढि सै मo मo उo कारू दौ।। करूणाकर सुतो रत्नाकर प्रज्ञाकरौं दहुला सै श्रीहर्ष दौ।। रत्नाकर सुतो हरिकर: कटाई सैभीभ दौ।। हरिकर सुतो नाने क: सरौनी सै श्रीकर दौ।। नोने सुतो भ्वा्दित्य् पुरादित्यौ: जालयभ सै राम दौ।। जल्लोकी (जालप) सै बीजी बान्धोन: एसुता खड़गधर चक्रधर शंखधरा जीवधरा: एतै मातृक कृष्ण :।। खड़गधर सुता विद्याधर कीर्तिघर गंगाधरा: मेरन्दीस मातृक विधाधर सुतो हरिहर रूचिकरौ विजनपुर दरिo सै वेद दौ।। हरिहर सुतो श्रीपति: ए सुतो विश्वेधश्वगर: मरियानी सै तारापति दौ।। ए सुतो भवेश्वचर रामेश्वयरौ वरूआली माण्डरर सै मo मo उo शंकर दौ।। मo मo उo रामेश्वतर सुता महामहत्तक गणपति महामहत्तक रतिधरसदुपाo महिधरा: आद्या पवौली सै महिपाणि सुत यूवे दौ अन्योसुत सकo धृतिकर दौ।। गुणे सुता अफेल लाखन रविय: पाली सै हलधर दौ।। (10/04) अपरौ महो हलधर सुतो।।
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मुरारी एकहरा सै दिवाकर दौ (04/06) देवे सुतो रत्नेश्वार: मझौरा सकराढ़ी सै श्रीकंठ सुत नीलकंठ दौ पवौली सै वाचस्परति द्दौणा अपरेसुता सोम धर्ममित्रेश्व्रा यशिया सै निलोचन दौ महुआ सै बर्द्धमान दौणा।। रत्नेश्ववरसुता दिवाकर रूचिकर (227/07) शुचिकर मतिकर मिश्र हरिकरा: मड़ार सै श्री हर्ष दौ।। दिवाकर सुतो स्थादनान्तवरिक सुधाकर रतिकरौ तिलय सै बराह सुत देवशर्म्मि दौ भण्डातरिसम सै धारेश्व र द्वौणा। अपरा सुता तेरहोत सकराढ़ी सै कुलेश्व र सुत भवेश्वुर दौ सकुरी सै लक्ष्मी द्दौणा मुरारी सुतो पौखूक: तेरहोत सकराढ़ी सै गाजो दौ (03/09) मनोरथ सुता वनमाली वशिष्ठ गोविन्दर शुभंकरा: अपरौ शकर्षण शुभंकर सुता भागीरथ दिवाकर रत्नपति नाईका: तेरहोत वासिन्य/:।। सिंहाश्रम सैविद्यापति छौणा भागीरथ सुतो कुलेश्वरर: ए सुता रामेश्वसर योगीश्वरर भवेश्वीर परमेश्व रा: रामेश्वार सुतो जीवधर रतिधरौ महुआ सै महादेव दौ।। जीवधर सुतो गाजोक: केउँटी तिलय सै रवलय लक्ष्मीीकर दौ।। ढ़ोढवाल पवलसै नयदेव दौणा।। गाजो सुतो गणपति: अलय सै यशोधरदौ अलय सै बीजी धरनीधर: धाउन प्रसिद्धनामा।। ए सुता मनोरथककत्र्जकअमॉइका:।। मनोरथ सुता प्रितिकर श्रीधर वावन रामा: वावन सुतो शंखधर पुरूषेत्तिमो।। गोधूलि वासिन्योंथ पुरूषोत्तम सुतो भोगीश्व र: पद्मपुर पकलियासै राम दौ।। ए सुतो यशोधर देवधरौ करूआनी सकराढ़ी सै मo मo उo कारू दौ करही सै नमवंश दौणा यशोधरा सुतोसाठूक. नाउन सै महिधर दौ अपरा सुता खौआल सै रूद्रिपाणि सुतखांजो दौ खण्ड बला सै होरे द्दौणा।। पौखूसुता गणेश्वोर नन्दीपश्वहर वीर गोविन्दै हरिश्वकर: पतऔना खौआल सै नरसिंह दौ (03/04) भवादित्यण सुतो रति: वभनियाम सै यवे दौ।। रति सुतो डालूक: सरौनी सै हाउँन दौ।। डालू सुतो शशिधर नरसिंहों तत्राद्यो नगवाड़ धोसोत सै रति दौ
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अन्यो2ों भण्डा रिसम सै सिरटि दौ।। नरसिंह सुतो नारायण दामोदरौ मुगे नी दिथोय सै कुमर सुत साठू दौ मूलहरी सै वल्ल भदाश दौणा।। गोविन्दद सुता होरे नोने भरैवा चान्दोट बलियास सै धारू दौ (10/10) गंगादित्यक सुता भबाई मंगलधरा परनामा।। भवाईं मिश्र, शिवादित्या दत्तकपुत्र: यमुगाम सै दिनकर दौ अन्यो(े द धोसियाम सै श्रीरंकदौ मंगलधर सुतो धारूक: फनन्द2ह सै परान सुत रूद दौ यमुगाम सै चतुर्भुज द्दौणा धारू सुतो चाको रत्नपाणि: कुरहरि करमहा सै धनेश्वौर दौ।। गाउल करमहा सै बीजी मुरारी।। एसुता जगद्धर हेमधर मनोधरा:।। हेमधर सुतो महिधर ए सुतो हरिहर ए सुतो रतिदेव जगदेव श्री देव वासुदेवा: तत्राद्यो पनिहारी दरिहरा सै कविराज मिसरदौ।। अन्तर शक्रिरायपुर नाउन सै बलभद्र दौ।। श्रीदेव सुतो चण्डेवश्वरर विश्वैतश्व रौ।। चण्डी्श्वार सुता प्राणेश्वरर नन्दीश्वयर महेश्वदर रामेश्वसरा: कुरहरिवासियों योग बेहद कुसमाल गोविन्दर दौ।। रामेश्व र सुता। गिरीश्वोर धनेश्वोर मतिश्वतर देवेश्व रा: यमुगाम सै बासुदेव दौ धनेश्वरर सुतो गुणीश्वीर: बेलमोहन नाउन सै नारायण दौ।। कीर्तिकर सुतो भीखन धाने कौ।। भीखनप्रo रत्नेश्व्र सुता प्रान्ध्न डगरू दर्व्वेेश्ववरा: नान्यरपुर विस्फीम सै गुणे दौ।। दर्व्वे्श्व र सुतो पीताम्बतर: गोविन्दनवन पनिचोभ लखन सुत लक्ष्मीवकर दौ।। ए सुतो भिखेक: मालिछ मातृक: ।। ए सुतो नारायण गोविन्दोप उपमन्यु गोत्रे गढ़ एकहरी सै हरिहर दौ। कर्वाचित्रा गुरू भद्रेश्वर दौणा।। नारायण सुतो लक्ष्मीरपति: मन्द।वाल परिसरा सै नयशर्म्मस द्दौ।। एवम् ठ. रामभद्र मातृक चक्रं।।
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अपरा ठ. महामहोपाध्या।य ठ. भगीरथ प्रo मेघ सुतो सुतो ठ. (100/09) कृष्णाानन्दम: खौआल सैनन्दढन सुत जगन्नारथ दौ।। (03/06) अपरा बाछे सुतो आङनि: पबौली सै वाचस्पवतिदे आङनि प्रo रत्नाकर सुता दिवाकर गदाधर धृतिकरा: केउँटी एउढ़ सै हरिहर दौणा अपरौ लक्ष्मीतकर: महुआ सै सिद्धेश्वेरा परनामक दौ।।
लक्ष्मी्कर सुतो नितिकर रूचिकरौ पनिचोभ सै हरिवंश दौ।। छितिशर्म्मर सुतो बैकुण्ठर हृषिकेशो:।। हृषिकेश सुतौ वृरिवंश माने कौ।। हरिवंश सुता दिवाकर रत्नाकर चन्द्रककर सूर्यकरा: बलठिरसै श्यातमकंठ दौ।। नितिकर सुतो साधुकर: सरौनीसैनाइ सुत भद्रेश्वखर महो (19/04) साधुकर सुतो महो (14/02) सुधाकर: तिसउँत सै शुचिकर दौ।। (08/09) हल्लेरश्वतर सुतोबाभन: महुआ सै बासुदेव दौ।। ए सुतौ गणपति तरूणी वरूआरी माण्डर सै विधू दौ।। गणपति सुता रघुपति रामपतिनन्दी श्व रा: भरेहा सै देवे दौ।। रघुपति सुतो बाछे शुचिकरौ सकराढ़ी सै महामहोपाध्यासय हरिहर दौ (03/02) महामहोपाध्यावय (128/04) हरिहर सुता सदुपाध्यााय (23/04) नाइ सदुपाध्यािय भादू सदुपाध्यामय (30/01) सुपे सदुपाध्या्य चांडोका: सरिसब सै जयादित्य दौ (03/04) महामहोजयादित सुतो (02/04) दामूक: देवहार सरैनि सै सर्वानन्द दौ।। कल्पित् व्रहमानन्दड दौ ।। शुचिकर सुता विहनगर दरिहरा सै भोगीश्व0र दौ।। (11/03) मण्डकन सुतो ऐलौक: भदुआ भदुआल वासी ए सुता जुहे पइम अनन्ताा:।। पइम सुता भवशर्म्मग उदयशर्म्मव जयशर्म्मा विष्णुो शमर्मणा तत्र सोम शर्म्मड सन्तोति बिहनगर वासी।। सोमशर्म्म सुता बासुदेव जयदेव कामदेव यशोदेवा: गंगोली सै पुरूषोत्तम दौ।। बासुदेव सुतो चण्डेरश्व र रातू कौ पण्डोगली वासी जल्लसकी सै।।
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शिवादित्यु दौ।। सेतू सुतो भोगीश्वार: कंत्र्जोली मातृक।। भोगीश्वनर सुता करमहा सै हरदत्त दौ।। हरदत्त सुतो लक्ष्मीरकर हरिकरौ दहुला सै श्रीहर्ष सुत भवदत्त दौ (14/05) (24/05) महो सुधाकर सुतो बुद्धिकर: पाली सै केशव दौ (09/08) श्रीधर सुतो रामदत्त: गढ़ माण्डार सै सुपे दौ दिघोय सै सुरेश्व/र द्दौणा रामदत्त।। सुता केशव (21/02) माधव नरसिहं मुरारिय: (20/09) पबौली सै बागे दौ (07/03) महो गंगाधर सुता पराउँ जीवे परवाईका: दरिo श्या)मकंठ दौ।। पराउँसुतो बागे क. गढ़ निखूति सै जगद्धर दौ (07/07) सिंहाश्रम सै रत्नेश्वहर द्दौणा बागे सुतो धराधर महिधरौ (19/07) बुधौरा सकराढ़ी सै प्रितिकर दौ।। केशव सुतो सदुपाध्याीय गोदेक: नरउन सै कोने दौ (08/07) अपरा कोने सुता सकoजीवेश्व र दौ (08/10/0) खण्ड्बला सै जाई द्दौणा।। महामहोपाध्या7य (42/07) बुद्धिकर सुता (29/06) (126/05) वृद्धिकर कृष्णिकरे नन्दाना: बभनिo रूचिकर दौ (06/06) वीर सुता भगव कुमार शीत कान्हा/ तत्राद्यास्त्रसय पण्डो/लि दरिहरा सै बाभन दौ अन्योवृद् डीहंदरिहरा सै लक्ष्मे/श्व र द्दौणा।। कुमर सुतो वसुकंठ: सकo गिरीश्व र दौ।। वासुकंठ सुता रूचिकर रामकर सुधाकर मित्रकरा दरिo वृद्धादित्यअ दौ (07/04) चिन्ताामणि सुतो अभिमन्युत विकर्णो।। अभिमन्यु सुतो दिवाकर (303/05) गुणाकरौ दिवाकर सुतो वाचस्पदति जन्मेृजमो भोरवरिसै प्रज्ञाकर दौ।। जन्मेणजय सुता महा महोपाo हरिदेव शितिकंठ श्या म कंठ लक्ष्मीककंठ नीलकंठा: अपरौ देवादित्य् गिरीश्व रौ।। महामहोउपाo हरदेवसुता यवेश्वार विश्व म्भिर लक्ष्मेतश्वररा रादी कोइयार सै सिंधुनाथ देल्हकन दौ।। अपरौ लक्ष्मीापाणि
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रत्नपाणि सबौर माठक:।। पाली सैगंगादित्यस दौ।। विश्व्म्भरर सुतो लौरिक वृद्धादित्य शिवादित्यवकोचे का (26/09) ।। तत्राद्यास्त्रेय रामपुर नरवाल सै सीनू सुत लक्ष्मीापतिदौ नरसिंह द्दौणा सुति श्रीधर पत्र्जी।। सीरदौ उति मंगलधर पत्र्जी।। अन्योदित् माहव जल्लयकी सै रविभातृ योगेश्वनर दौ।। लौरिक वृद्धादित्यह सुतो नारू (28/04) डालू कौ बुधवाल सै मधुकर दौ खण्डणबला सै सुपै द्दौणा।। अपरा सुता गोधुलि अलय सै साठ दौ।। (13/08) साढू सुतौ (21/06) नारायण (32/08) हरिकौ बलहा वलियास सै रामशर्म्मा दौ (01/02) श्री नाथ सुत जयशर्म्म3 सुतो रामशर्म्मौ:।। रामशर्म्मन सुता जाटू दूबे (37/06) (30/07) माधव बाटू का: टकबाल सै रत्नधर दौ।। (36/03) रूचिकर सुता शुभंकर हरिकर शंकरा: जगति सै केशव दौ।। धोधि सुतो गणपति नन्दीा कौ तत्राद्य: गंगोली मातृक अन्यो1/0 राउढ़ मातृक:।। नन्दीर सुता शिरू नारू (27/07) वाचू मांगुका: नेयाम सुरगन सै सुरेश्वार दौ।। शिरू सुतो माधव केशवौ मण्डा1रिसमसै धृतिकर द्दौणा।। केशव सुता गढ़ खण्डीबला सै अनन्तन सुत सुपन दौ फनन्दतह सै भवाई द्दौणा एवंनन्द न मातृक चक्र।। नन्दान सुता जगन्नारथ देवनाथ (136/03) हौरिला (112/02) सोदरपुर सै रातु सुत राम दौ।। सिंहाश्रम सै बीजी महामहोपाध्याशय हलायुधर ए सुतौ महो दधिए।। सुतो महो जाइक: ए सुतो महो महिधर ए सुतो गांगुक: ए सुतो वागीश्वभर ए सुतो रत्नेश्वतर रमेश्वारौ नगुरदह सै विसव दौ।। रत्नेश्वधर सुतो महामहोपाध्यारय हल्लेिश्वार महामहोपाध्याुय (18/09) सुरेश्व र महामहोपाध्याेय (21/01) जीवेश्वारा: पारपुरसकराढ़ी सै अनन्त् दौहित्री जयदेवीयुत्रा: सोदरपुर गामौ पचिका:।। महामहोपाध्याुय हल्लैईश्व र सुतो राजू हलधरौ गढ़ बेलउँच सै (28/07)
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हल्लै6श्व7र दौ (04/05) सन्तो ष सुतो लक्ष्मीवपाणि: पाली सै विकर्ण दौ।। ए सुता हल्लैुश्वौर पॉचू नीलकंठ देवकंठा पड़ारियॉं सै हासरू भवादित्य सुत केशव दौ हल्लै्श्वयर सुता बरैबा सँजयशर्म्म दौ सकराढ़ी सै धरानन्दु द्दौणा।। (221/05) राजू सुता सदुपाध्याकयभोगीश्वपर योगेश्वयर (03/03) महेश्वारा: गढ़ निखूति सै नाने प्रसिद्ध रत्नधर दौ अन्योी सकराढ़ी सै जीवधन द्दौणा तिलई सै लक्ष्मीयकर द्दौणा नोने प्रo रत्नधरसुता बहेराढ़ी सै ठ. जयकंठ द्दौणा (07/02) पबौली सै वीर द्दौणा सदुपाध्या य भोगीश्वसर सुता महामहो (21/07) ग्रहेश्वौर रूदेश्वयर हिरेश्व र (40/07) धीरेश्वँर विश्वे श्ववरा: (19/08) इबा सकराढ़ी सै विभू दौ।। बैकुण्ठ2 सुतो श्रीवत्स : ए सुतौ सोमेश्वनर ए सुतौ जागेश्वयर देवेश्व रौ देवेश्व्र।। देवेश्वशर सुतो विरेश्वार: छतौनी सै माधव दौ।। वीरेश्वार सुता धीरेश्व।र रजेश्व र यटेश्व्रा: वभनियाम सै राम दौ।। रजेश्व्र सुतौ वासुदेव विभूकौ छादन सरिसब सै शिवादित्यश दौ विभू सुतर बुधवाल सै हिरू दौ रेकौरा गंगोली सै मण्ड्न द्दौणा।। मण्डुवआ सै नित्याानन्द करतुतल सदुपाध्यायय विश्वेसश्व र सुतौ रातूक: पण्डौणली दरिहरा सै मुनिदौ (07/04) अपरा देवधर पण्डौालीवासी ए सुतौ उदयकर गौढि़जल्लनकी सै खड़गधर दौ।। गोढि़ सुतो वाभन: विठुवाल वासी भण्डाौरिसम सै जगाई दौ।। ए सुता सप्तम: धृतिकर गुणाकर सोमेश्वदर रत्नाकर भीमेश्विर गुणेश्व र रज्जेवश्वारा: तत्राद्यो गंगोर सै नारायणा दौ।। अपरै सुसैला खलय सै बलभद्रदौ सोमेश्वतर सुता वत्सेणश्वदर सिद्धेश्वीर (21/03) (22/04) वीरेश्विर जीवेश्व्रा: तत्राद्यास्त्राय अहपुर करमहा सै रूचिकर दौ अन्योद तपनपुर पाली सै नरसिंह दौ।।
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वीरेश्वपर सुतौ मुनिर्नाम्नाे (19/01) विदित: ए सुता दिवाकर (21/09) रविकर मित्रकरा: (56/05) बभनियाम सै गोनन दौ (06/07) महवाल सै दिवाकर द्दौणा।। अपरौ हरिकर: तल्ह(नपुर सै लमशर्म्मर दौ (07/09) लभशर्म्मा सुता चोटवाल सकराढी सै गोविनद दौ।। चोटवाल सकराढ़ी सै बीजी सिद्धेश्वणर: ए सुतौ धृतिवर्द्धन त्रिलोचन प्रo नामा: ए सुतौ हरदत्त: ।। ए सुता महादेव शिवदेव सिद्धेश्वारा:।। महादेव सुतौ व्या्स बासुदेवौ: बासुदेव सुतो कुसुमाकर: बहेराढ़ी सै जयकंठ दौ।। अपरौ कान्हु: अपरा नीमाटकबाल सै रत्नेश्ववर दौ।। ए सुता गोविन्दस माधवजगन्नाबथा: यमुगामसै हरदत्त दौ।। गोविन्दब सुता सुरगनसै दुर्गादत्तदौ रात सुता (135/06) (48/07) (135/02) भवे माधव रामा बेलउँच सै धर्मादित्यद दौ।। (10/03) (72/10) धर्मादित्यत सुतो रतिकर वागूकौ खौआल सै उँमापति दौ (11/02) कान्हर सुतो नरसिंह: सुइरी सै धर्माध्य0क्षक देवे दौ।। अपरौ (20/0/10) डालूक: सरौनी सै धर्माध्यनक्षक गढ़ाउन दौ।। नरसिंह सुतौ धर्माध्य2क्षक लभशर्म्मब: गोधेलि अलय सै भोगीश्वार दौ।। लभशर्म्मौ सुता पनिहत नोने उँमापतिय:गोधोलि खलप सै देवेस्मैिव दौ।। तैनेवदत्तक:।। अन्योमो न केथौनी टकबाल सै जगद्धर सुत कान्हम दौ।। उँमापति सुतो (25/03) रमापति केउँटराम पण्डोैली सै दामोदर दौ।। ब्रहमपुरा सै पृथ्वीोधर द्दौणा (27/04) राम सुता हरिअम सै नोने सुत दिनू दौ (12/0/10) (41/09) माधव सुतौ (18/08) माई नाई कौ पंचवक विस्फीअ सै असाउँन दौ।। नाई सुतो धारूक: गंगोर सै अनिरूद्ध दौ (07/07) विश्व1नाथ सुता लक्ष्मी नाथ शशिनाथ हरिनाथ भवनाथ जगन्नांथा: पाली सै ऐलो दौ।। शशिनाथसुतो अनिरूद्ध नोने कौ फनन्दसह सै लखाई दौ।।
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अनिरूद्ध सुतो लोकेक सै सुत दौ सै द्दौणा।। धारू सुतो नोनेक: माण्डवर सै कीर्तिधर दौ (02/02) अपर शिलपाणि सुतो शुभंकर: ए सुतौ रत्नाकर ए सुतौ चांड़ो कीर्तिधरौ नरवालसै नयधर दौ।। कीर्तिधरसुता श्रीधर पृथ्वीसधर प्राणधर मुक्रिधर धर्मधरा: पनिचोभसै हरिहर दौ (25/08) नोने सुता दिनू (26/04) रति मति गुणैका: (46/04) एकमा वलियाससै नितिकर दौ (10/05) मित्रकर सुतोनितिकर: ए सुतौ (306/01) चन्द्रुक्रर विभाकरौ (35/08) पालीसै भगवं दौ।। गणपति सुतौ भगव: दुबासै शुचिकर द्दौणा।। भगव सुता सिम्मुएनाम करमहासै चारूदत्त दौ।। शाण्डिल्यू गोत्रे करमह सै बीजी सुरेश्वपर: ए सुतो भूषण: ए सुतो अमोथ: ए सुतो गुणदेव: ए सुतौ देहरि: ए सुता महार्णव कारक मo मo उo नारायणा मुरारी खेते का महार्णव कारक महामर्होपाध्याथय नारायण सुतो हिंगूक:।। अहपुर वासी मुरारी सुतोश्रीधर ए सुतो वंशधर ए सुतौ हरदत्त: ए सुता वरदत्त चारूदत्त भवदत्ता: तत्राद पा भिन्न् अन्योा जगतिसै धारेश्वर दौ।। चारूदत्त सुता जयदत्त त्रिलाठी घुसौतसै देवदत्त दौ (11/04) सुपर सुतो देवदत्त खण्ड बलासै विश्वानाथ द्दौणा।। कटाईसै भीम द्दौणा (20/10) कटाईसै भीम द्दौणा मिश्र (20/09) दिनू सुता रामकर (72/0) हलधर दामोदरा: (57/03) माण्डारसै लगाई दौ (02/04) नन्दीटश्वदर सुतौ जीवेश्वसर वागीश्वुरौ तियुरी सैगंगेश्व)र दौ पदूमनामति वासी ए सुतौ लक्ष्मीगपति: विस्फीउसै मधुकर दौ।। ए सुतो भवेश्व र: खनौरी सकराढ़ीसै धर्माध्यवपक्षक सर्वानन्दव द्दौणा।। ए सुता गंगेश्ववर जगद्धर शिवशम्माौ सुरगनसॅ चाकौ दौ।।
(49)
गंगोर सै साबे द्दौणा।। गंगेश्व0र सुतो गिरीश्व़र नरसिंहो बेला सकराढ़ी सै हरदत्त दौ पनिचोभ सै महादेव द्दौणा।। (58/07) बागेश्व्र सुता दूबे नगाई हिराई का: कुजौली सै राजू दौ (04/05) गंगोली सै केशव द्दौणा।। नगाई सुता श्रीदत्त चाको नरसिंह विश्व5म्भगरा: दिनारी सरिसब सै चाको दौ।। दिनारी सरिसब सै बीजी जनार्दन।। जनार्दन सुतो माने देवे कौ।। माने सुतो प्राणधर: प्राणधर सुता चांड़ो जीवे दिने भिखे बिठूका: दहुला सै ब्रहमेश्वार दौ चांड़ो सुता रूद (23/01) जगन्नारथ भवेश्व्रा: मघेटा पाली सै महेश्वरर दौ।। एवं जगन्नाेथ मातृक का चक्र।। जगन्नाुथ सुतो (155/09) हरिकेश लक्ष्मीापति विरपुर पनिचोभ सै शम्भू दौ (10/03) विश्वएनाथ सुतो (41/05) राम: माण्ड5रसै कापनि माधवदौ।। राम सुतो बाटूक: पबौली सै मेढू दौ (11/07) हलधर सुता राम हेढ़मेढ़ का: डीह दरिहरा सै हरिहर मेढ सुता दो पोखरौ टकबाल सै शुक्लड भिखारी दौ (03/09) शुक्लश भिखारी सुतो चिलकौर दरिहरा सै गांगु दौ भानुर सरौनी सै हरिवंश द्दौणा।। बाढ़ सुता रातू (140/04) हारू महेश्वकर बागू फलहारी (27/08) दिनकर मधुकरा:।। तत्र द्यो: पंच पत्उंना खौआल सै राम दौ अन्यो(ै श गढ़ विस्फी्सैमहत्तक होराई दौ।। माहब बरेबा सै रूद द्दौणा।। सिद्धेश्वरर सुतो राम चाको कौ पिहवाल सै रूद दौ अलय सै रूद द्दौणा।। राम सुतो गोपाल मुरारि: कोइयार सै गुणाकर दौ।। कोइयार सै बीजी शूलपाणि: ए सुतो सिधूक: ए सुता देल्हपन विश्व:नाथ श्रीनाथा: सिंहाश्रम सै विद्यापति दौ।। देल्हून सुतो जीवधर: ए सुतौ पृथ्वीाधर ए सुतो गुणाकर: ए सुल हरिसिंहपुर निखूति सै जीवेश्वरर सुत गोंढि दौ।। बागू सुता खांतू (40/10) छीतर मितू (26/05) गोविन्दु (26/05) बाछ लाखू का: (30/01) तत्रादया पंच चान्दोि वलियास सै होरे दौ गंगोर सै विश्वदनाथ:।।
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(07/08) शिवनाथ सुतो पद्मनाथ: टकबाल सै सोनमनि दौ. चाउँटी टकबाल सै बीजी रत्नेश्वनर: ए सुतो गणेश्वोर: ए सुतो रत्नाकर प्रभाकर धर्मकर सूर्यकरा:।। रत्नाकर सुतो सोनमनि: दोहाइन विस्फीम सै अरविन्दा दौ।। सोनमनि सुतौ नरसिंह हरिसिंहो अलारि दिधोय सै श्रीधर दौ।। खांतू सुता (84/07) डालू महो सुपे महिधर पॉंखू शम्मू का: जजिवाल सै रतिकर दौ (08/03) (37/06) गौरीश्वैर सुतौ आवस्थिक सिद्धेश्व4र विन्यैालू श्व रो माड़र सै वाहन दौ।। आलपिक सिद्धेश्व र सुता गयन घनेश नोने कोचे इन्द्रेवका: पकलिया सै नयदेव दौ।। इन्द्र् सुतो सोम भवेकौ बसुआली सै छीतर दौ।। सोम सुता (36/02) गोपाल नारू भगव (31/05) दामूका: मण्डा्रिसम सै साठू दौ।। अपरौ रतिकर मांगुकौ पण्डौुली सै लक्ष्मीैकर दौ रतिकर सुतो मति हरि: करहिया पनिचोभ सै प्रितिकर दौ (08/05) प्रितिकर सुता थरिया सै आनू दौ।। थरिया सै: ए सुतौ होरेक: दिघोय मातृक:।। होरे सुता रविनाथ जगन्नाकथ नयनाथ शिक्रनाथ लक्ष्मीकनाथा बुजौलीता सै वर्द्धमान दौ।। रविनाथसुता आनू गोपाल वुद्धिकरा: फेनहथ गंगोली सै होरे भागिनेय: आनू सुता आदू नादू बासू गांगू का: खजूरी पानिचोभ सै रघुपतिसुत रताई दौ करहिया वासी बुजौली सै त्रिपुरे द्दौणा शम्भूर सुतो चिकूक: बुजौली सै जोर दौ (04/02) शुभंकर सुतो गोंढि पण्डोकली सै रूद्रभागिनेय: ए सुतौ महिपति वानू कौ विनती सै पराक् अच्युचत दौ।। बानू सुतो मानेक: निसूरी सै भवेश्व2र दौ।। माने सुतो गोपाल: टकबाल सै गुणाकर दौ शिलपाणि केथौनीवासी।। ए सुतो जगदेव वरदेवौ बुधौरा सै मणिकंठ दौ।। वरदेव सुतो गुणाकर: इबासै शिवशर्म्मे दौ।। गुणाकर सुता।।
(51)
जजिo भवदत्त दौ।। सकराढ़ी सै लभशर्म्मु द्दौणा गोपाल सुतो (22/08) (23/03) श्री वर्द्धनौ वंशवर्द्धन दूबा सकराढ़ी सै विम दौ (15/06) बुधवाल सै हिरू द्दौणा।। वंशवर्द्धन सुतो (35/09) (72/05) जीवे जोरो गढ़माण्डरर सै बागे दौ (07/03) यमुगाम सै जीवेश्व0र द्दौणा (72/05) जोर सुतो (153/08) गोविन्दौ: माण्डवर सै शिवपति दौ (02/05) महामहोपाध्यावय (20/01/0) मटेश सुता सदुo महो पशुपति महो रघुपति (23/06) महो आङनि महो (31/08) रतिपतिय: पनिचोभ सै जीवेश्वपर दौ (10/02) देवशर्म्म सुतो ब्रहमशर्म्मह ए सुतो जयशर्म्मा। सिंहाश्रम सै विधापति दौ मन्द्बाल सै विरदोहिब द्दौणा।। जयशर्म्मि सुतो जगद्धर रतिधरौ करमहा सै खेते दौ।। कलिया सै वीर द्दौणा।। अपरौ रामकर: दरिहरा सै जनमेजय दौ।। जगद्धर सुतौ जीवेश्वबर भवेश्वदरौ सरिसब सै गयपाणि सुत हल्लैाश्वौर दौ।। जीवेश्ववर सुता (241/01/27/04) मधुकर नोने नाथै का: ब्रह्मपुरा दिधोय सै मुझे सुत मासौ दौ पनिचोभ सै नयदेव द्दौणा अपरौ रातूक: कटाई सौ भीम दौ।। कटाई सै बीजी वाचस्प2ति: ए सुतौ देवपाणि ऐलपाणि।। ऐलपाणि सुतौ मौरीक: मौरी सुतो वीर: वीर सुता हरि पुरूषोत्तम श्रीपतिय:।। श्रीपति सुतो गंगाधर:।। गंगाधर सुतो कवि केशरी महामहोपाध्या यभीम: निखूति सै सुरेश्व र दौ।। भीम सुतो देवेश्वशर: निखूति सै रतिकर दौ।। सदुo महो पशुपति सुतो (26/04) तत्र कृष्णापति: अलय सै महामहोपाध्यारय रामेश्व र दौ दरिहरासै रति द्दौणा अपरा पशुपति सुतो महो गुणपति महो शिवपति महो (20/07) इन्द्रैपतिय: सोदरपुर सै महामहोपाठ विश्व्नाथ दौ।। (15/09) महामहोपाध्याशय सुरेश्व।र सुतौ महामहोपासरबए महामहोपाo विश्वरनाथौ आद्यो हथिबन सकरी सै देवपति दौ अन्यो् वलियास सै धर्मनिधि सुत हरिनिधिदौ अलयसँ द्दौणा मo मoउo विश्वमनाथ सुतौ रामनाथ रतिनाथौ खौआल सै दामोदर सुत दिवाकर (22/01/0) (23/09) (19/01)
(52)
दौ महवाल सै देहरि द्दौणा।। महो शिवपति (48/05) सुतौ यग्य पति (32/07) अलय सै बुद्धिधर प्रo वुधेदौ।। (02/01/11) महोग्रहेश्वदर सुता धर्माधिकरणिक महोमहोपाध्या य गदाघर (42/06) प्रo रातु रत्नघर वुद्धिकर प्रo वुधे सुद बेलउँच सै धरादित्य दौ (10/03) भरेहा सै गणपति द्दौणा (21/01) वुद्धिधर प्रo वुधे सुता रधु कान्ह गणपतिय: गंगोली सै शिरू दौ (01/04) अपरा शूलपाणि सुत शंखद कमलपाणि शारड़पाणिय: कुमर वासिन्या: पालीसै जयपाणि दौ।। कमलपाणि सुतौ रामदेव लक्ष्मीसकरौ।। लक्ष्मीवकर सुतौ डालूक: बेलउँच सै अभिनन्द दे डालू सुतौ शिरूक: सकुरी सै धृतिपाणि दौ सकुरीसै बीजी मo मo प्राo देयीक: ए सुतो हरदत्त लक्ष्मीदपाणि।। लक्ष्मीिपाणि सुतो गंगापाणि।। गंगापाणि धर्मपाणि।। ए सुतो धृतिपाणि रत्नपाणि जालयसै दाश दौ।। धृतिपाणि सुता थूवनिसैधाम दौ।। शिरू सुता महिधर हलधर रामधरा: फनन्दगह नरसिहं दौ (05/02) रत्नेश्वार सुतौ भीम (20/06) गुणे कौ तत्रादयो जगतिसै सिधू दौ अन्यो सुत गंगोर सै वाराह द्दौणा।। भीम सुतो नरसिहं किठौकौ मध्विल सै देहरिदौ।। नरसिंह सुता श्रीकर कुसुमाकर मुधकरा: करमौली गंगोली सै पण्डित करण सुत साधुकर दौ सै द्दौणा एवं ठ. कृष्णाौनन्दु मातृक चक्र अपए म. म. उपा ठ. रामभद्र सुता ठ.हरिदेव महामहो ठ. (105/04) रामदेव महामहो ठ रतिदेव महामहो ठ. कृष्णकदेव महामहो ठ लक्ष्मी देवा हरिउम सै मणि सुत जगन्नामथ दौ (16/01) मौई सुतौ (25/07) गांगु हारू कौ सिसै सकo महेश्वहर दौ।। हारू सुता बासुदेव हलधर श्रीधर शिरू का: (शिरकता) माण्डार सै गुणे सुत गयन दौ (02/04) अपरा गुणेसुतौ गयन शोरेकौ पोरवरौनीटक बo (14/09)
(53)
दामोदर दौ।। मिश्र (20/06) गयन सुतौ होरे बाछेकौ हरिसिंहपुर निखूतिसै गोंढि़ सुत महिधर दौ गंगुआलसै गौरीपति द्दौणा (39/08) शिरू सुतो (55/07) नारायण शिवौ वलिया रूचि दौ।। चण्डे वश्वंर सुतो हरानन्द : टकoजीवे दौ हरानन्द सुतो (49/05) सुरानन्द) रूचि टकo शिरी दौ।। रूचि सुता धर्मादित्यि महादिल (63/04) रत्नदित्याा: नरउन सै तपन सुत यटाधर दौ विस्फी सै रविशर्म्मा द्दौणा (48/01) शिव सुता महो मणि (56/02) पोखू (32/07) गयणा: खौआलसै विभाकर दौ (14/05) अपरा साधुकर सुतो श्रीकर (31/06) शुचिकरौ करमहा सै नोनेसुत रामशर्म्मर दौ पकलिया सै मासौ द्दौणा (75/09) श्रीकर सुतो रामकर विभाकरौ गंगोर सै केशव सुत नोने दौ (07/09) अपरा विदू सुतो हरिनाथ: पालीसै हिंगू दौ।। हरिनाथ सुतो गौरीनाथ: सकo पदमपाणि दौ।। गौरीना सुतो शक्रिनाथ: भणुरिसमसै लखाई दौ शक्रिनाथ सुतो केशवनाथ: जगती सै वर्द्धन दौ।। केशवनाथ सुता नोने सुभाकर शुभकर रतिकरा: पालीसै दुर्गादित्य दौ (05/02) प्रितिकर सुतो पद्मकर ए सुतौ दुर्गादित्यर त्वादौरसै रत्ननेश्व र दौ।। ए सुतो धरादित्यि: (28/02) वलियास सै रामशर्म्मद दौ टकo वत्सेैश्व्र द्दौणा नोने सुता खौआल सै शुचिकर सुत हेलू दौ करमहा सै गौरी द्दौणा विभाकर (54/01) त्वयदौरसै रत्नेश्वौर दौ।। ए सुतौ धरादित्यी: (28/02) वलियास सै रामशर्म्म दौ टकoवत्सेोश्वुर द्दौणा नोने सुता खौआल सै शुचिकर सुत हेलू दौ करमहा सै गौरी द्दौणा विभाकर (54/01) सुता (81/04) शंकर मित्रकर (20/09) रविकर: (96/05) बहेराढ़ी सै ढोंढ़े दौ (09/04) अपरा रवि सुतो गांगुक: बेला सकराढ़ी सै भोगीश्वररसुत चक्रेश्वआर दौ मनपुरसैरेधर द्दौणा गांगूक (228/06) गाद सुतो धाम ढ़ोंढ़े कौ चुन्नीै वलियास सै दिनमणि दौ (11/03) दिनमणि सुतो रत्नाकर: टकo शुचिकरसुत थेघ दौ सकराढ़ी सै नयपति द्दौणा ढ़ोंढ़े सुता पिलखा माण्डीर (39/02) विभूसुत मानुकर दौ (09/06) विमु सुतो मानुकर: गंगोली सै जीवेश्वसर दौ मानुकर सुतो (53/06) वृद्धिका शुभंकरौ सकौना सै गोपालसुत गौरीपति दौ।। हरिहरसुतो गोपाल सुतो नन्दीनय (24/01) गोरीपति सरिसबसै धरणीधर दौ।। गौरीपति सुता दिघोय सै जादू द्दौणा एवं मणि मातृक चक्रं।। मिश्र मणि सुता जानू मुकुन्दम जगन्ना2थ उँमापतिय: सोदरपुर सै श्रीधर दौ।।
(54) ''19''
(18/10/0) रतिनाथ (24/04) सुतो डालू बाटू कौ दरिहरा सै विरेश्वुर सुत मूनी दौ (16/01) तल्हसनपुर सै लशर्म्मौक द्दौणा (31/07) वाटू सुतौ (128/04) हलधर श्री धरौ माण्डोर सै सुधाकरसुत होरे दो (09/03) सुधाकर सुता होरे (95/06) (48/07) शोरे नाई शिरूका: करमहा सै गंगेश्व(र दौ (02/08) खौआल सै आंगू द्दौणा।। होरे सुतो रत्नपाणि देवपाणि नरउन सै खातू दौ (08/02) डालू खांतू (30/04) रतिकरौ सकo जीवेश्वसरदौ खण्डौo जाई द्दौणा खांतू सुतो सुपन शुचिकरौ (49/08) (27/06) माण्डार सै बागेदौ (07/03) यमुगाम सै जीवेश्वमर द्दौणा।। श्रीधर सुतो वेणी (59/09) अन्दूदकौ वुधवाल सै शिरूदौ।। सदुपाध्याौय मानूकर सुता महेश्व/र (491/01) गौरीश्वीर (36/06) विश्वेसश्वखरा: दरिहरा सै प्रितिशर्म्म। दौ (11/07) यमुगाम सै जीवेश्व र द्दौणा (26/07) महेश्विर सुतो शिरू (25/06) पोखूको माण्डवरसै अमतू सुत रविदत्त दौ (02/05) सदुपाध्याणय अमन्ति सुता रविदत्त (91/01) वासुदेव हरिदत्ता: खण्डैबला सै देहरि दौ।। रविदत्त सुता टकबाल सै बाटु दौ (09/04) नरवालसै यशु दौहित्र (27/09) शिरू सुता (35/09) लाखू (56/05) सीथू ( 30/04) मानेका: बेलउँच सै जीवादित्या सुत जोर दौ (10/03) महो जिवादित्यि सुता जोर मदन (83/08) दिनकर हरिकरा: बुधवालसै शुभंकर दौ विस्फी सै कीर्तिधर द्दौणा।। जोर सुतो कोने (252/01/) श्रीपति पवौली सै देवधर दौ (141/04) महिधर सुतो देवधर: सफo नयपति द्दौणा देवधर सुता वलियास सै भिखे सुत हिरम दौ (11/03) जालय सै द्दौणा।। एवं जगन्ना0थ प्रo जागे मातृक चक्रं (61/02) जगन्नापथ सुतो रामदेव कामदेवौ सोदरपुर सै बागे सुत सुपे दौ (15/04) विश्वेलश्व र सुतो यटाधर: खौआल भूले दौ। (03/05) (84/05) देवादित्यु सुतो पौखूक: ए सुतो भूलेक: खण्ड4बला सै शिवनाथ दौ।। भूले सुता पइम (21/01/0) राम केउटू का कुजौली सै राजू दौ।। गंगो सै केशव दौहित्र यटाधर सुतो बागेक: धोसोत सै रतिकान्तद सुत कीर्तिकर दौ।। धोसोतसै बीजी महामहोपाध्याैय वासुदेव: ए सुतौ दिवाकर ए सुतो खेइक: ए सुतो हे ए सुतौ (23/08) रूचिकर प्रज्ञाकरौ।। प्रजाकर सुतौ (29/04) विस्फीय सै धारेश्वुर दौ।। ए सुतौ रतिकान्तो सुपनौ माण्ड रसै सुत हरदत्त केउँटासमसै माने द्दौणा।।
(55)
रतिकान्त4 सुतो (25/07) गुणाकर कीर्तिकरौ खौआल सै शुचिकर दौ (03/06) (26/04) शुचिकर सुतौ नोने यवे कौ करमहा सै नितिकर दौ।। कीर्तिकरसुतौ इबे चौ को सुपरानी गंगोली सै होरे दौ (05/07) धीर सुतो होरेक: वलिo अशोमनि दौ।। होरे सुता पनिचोभ सै जीवेश्विर दौ (18/05) ब्रहमपुरा दिघोय सै मासौ (76/01) बागे सुतो सुपेक: पानिoग्रहेश्व र दौ (17/06) महेश्वशर सुता हरिश्व र ग्रहेश्वौर शिवा माण्डगर सै वागेश्वररसुत रूचिकर दौ पचटो जजिबाल सै भव द्दौणा (66/02) ग्रहेश्वनर सुता (44/06) अन्टू पुरखू रति मण्डना: सरिसब सै गणेश्वलर दौ।। (14/08) दामू सुता रामेश्व र माने (29/05) सोनेका: वरूआली सै सोखे दौ (27/03) माने सुतो ग्रहेश्वरर (38/07) (41/06) ब्रहमपुरा ढरिहरा सै भवशर्म्भ द्दौणा गणेश्वमर सुता विरेश्वहर यरेश्वनर बटेश्व रा (98/08) खनाम फनन्देह सै मुरारि दौ (05/03) गंगेश्वेर सुतो देवधर सकरा श्रीपति दौ।। ए सुतौ पुराई बलहावलियास सै रपाजो द्दौणा पुराई सुता दामू गयन बनू रेणुरधुका: (237/0341/03) पण्डौतलि दरिहरा सै धुतिकर सुत नाइ दौ दिघोसै साठ सुपे मातृक चक्रं।। सुपे सुता गाइ (74/05) राधव होरिल (66/03) वावू चिकू मतिय: रजौए माण्डदर सै दुखाडि सुत रतिकर दौ (18/09) इन्द्रापति सुतौ वाचस्यौति दुखाडि़ प्रसिद्ध नामा तरौनी करमहा सै वाराह दौ वाराह सुतो रवि देवे कौ खण्डरबला सै ज्ञानपति दौ वलियास सै बाढ़ द्दौणा (29/08) दुखडि़सुत (223/06) (73/01) शंकर मधुकर रतिकर मतिकरा: पाली सै रविनाथ दौ (14/03) (75/09) मुरारी सुतो रविनाथ: नरउन सै कोने दौ (14/05) सकराढ़ी सै जीवेश्व/र दौहित्र दौ रविनाथ सुता खौआल सै रविनाथ दौ (16/06) डालू सुतो बांतर: ए सुतौ विश्वकनाथ सरिसब सै पिथाई द्दौणा विश्वनाथ सुतौ माधवनाथ (21/04) रघुनाथों खण्ड बला सै भवेश्व(र द्दौणा माधव (24/02) माधव सुतौ रविनाथ: सुपरानी गंगोली सै धीर सुत पौखू दौ जालय सै होरे द्दौणा रविनाथ सुतौ (21/02)
(56) ''20''
शंकरनाथ पाली सै यशु दौ (05/05) मo मo बाछे सुता (21/05) रवि यशु वासूका एकमा खण्ड बला सै हरिनाथ दौ।। यशु सुतो (36/08) सुरथ: सुरगन सै विरेश्व)र दौ नरउन सै गणपति दौ रतिकर सुता शिरू रूचि मुरारी कृष्णा5: बेलउँच सै नोने दौ (10/04) मित्रादित्यी सुता (21/07) मित्रादित्यद सुता नारू (71/05) गोपी नोने चक्रपाणिय: (51/03) अहपुरकरमहा सै शुभंशर सुत मधुकर दौ लक्ष्मीिकर सुत शुभंकर सुतो मधुकर: नीo भीमदौ।। मधुकर सुतो आदित्य1: वलियास सै देवानन्दच सुत यशानन्द दौ अलय सै बागे द्दौणा नोने सुता श्री कुमार (159/04) (70/06) बसावन विलाश हिरइ (24/10) बेगम भानुकरौ वदिo पवौली सै देवदत्त दौ।। जगद्धर सुतो दिवाकर ए सुते सुपन: अलय सै भव दौ।। सुपन सुता (34/06) श्रीदत्त लक्ष्मी(दत्त हरदत्त हेवदत्ता: एकहरा सै धामसुत गणपति दौ सकo हरिहर द्दौणा।। देवदत्त सुतो (21/0) (40/09) गोगेक: फनन्दी विश्वेनाथ दौ (18/06) गुणे सुतो मोरीक: खण्डुबला सै धीर दौ मोरि सुता विश्वणनाथ हरिनाथ (76/07) शिवनाथा: माण्डनर सै गयन दौ (19/06) अपरागयन सुता (51/04) वीर सुरसर (22/02) गिरीश्वारा: (27/05) तिसउँत सै गयन सुत नरसिंह दौ दरिहरा सै मुनि द्दौणा विश्व्नाथ सुतो शुचिनाथ: (84/06) एकमा खण्ड बला सै मतिश्वार सुत शिवू दौ (11/01) थरिया सै रविनाथ द्दौणा।। एवं 6. हरिदेवादि मातृकचक्रं।। अपरा मo मo उo ठo भवदेव मo मo उपाo रामभद्र सुता मoमo उo ठo मधुसूदन उo ठo कामदेवा: खौआल सै श्रीधर दौहित्र दौ (19/08) मित्रकर (34/02) सुतो श्रीधर: कटमाहरिअम सै दिनू दौ (16/07) अपरा दिनू सुतो अमरूकमलूकौ ब्रहमपुरा जजिवाल सै कुश दौ (12/07) (25/08) नारू सुतो कुश: खौआल सै विश्वरनाथ दौ (20/01/) खण्ड)बला सै भवेश्व र द्दौणा।। कुश सुतो देहरि: कनसम मण्ड1र सै सुरपति दौ (18/02) अपरा म. म. उपाo बटेश सुतो (22/04) पक्षधर सुरपति खण्डेबला सै लोहर दौ सुरपतिसु (25/01) सुरपतित सु (28/21) (33/02) भवे सोम रत्नेश्व(र महेश्व7रा: एकमा खण्ड बला सै राजू दौ (11/02) रातू सुतो राजूक: दहनो सै धएई दौ (44/08) (22/09) राजू सुतो शान्ही0क: सकराढ़ी सै श्रीधर सुत शिरू दौ।।
(57)
एवं श्रीधर मात्रिक चक्रं।। श्रीधर सुतौ ज्योततिविर्वद (79/04) डीङर: महिया सोदरपुर सै महिपति दौ (15/09) जीवेश्व0र सुतौ गणपति (24/84) हेरदत्तो बलिया सै रतिकर दौ।। गणपति सुते वर्दन कान्होव विस्फी सै लड़ावन दौ।। (49/01) वर्द्धन सुतौ हरिनाथ लोकनाथो (57/05) माण्ड र सै छीतू सुत भवदत्त दौ (22/07) पौखू सुत छीतू सुतौ हरदत्त भवदत्तो अलय सै राम: (26/07) भवदत्त सुतौ केशव पबौलि सै गोढि दौ।। (23/10) हरिनाथ सुतौ नोनेक: दरिहरा सै राम दौ (15/09) वत्सेतश्वरर सुतौ एम: सकुरी सै देवपति दौ।। राम सुता पनिचोभ सै समढ़ सुत गोविन्दछ दौ (89/01) नो सुता सुपनदाशे (81/03) पशुपतिय: पाली सै विशो दौ (41/09) पुरूषौत्तम सुतौ आशा एमौ।। राम सुतो त्रिभुवन: ए सुतौ आदिदेव: ए सुतौ राजूक: ए सुतौ नारायण: ए सुतौ पराउँक: सकराढ़ी सै ब्रहमेश्वुर दौ।। पराउँ सुता देवे (23/11) नाहू हचलूका (31/01) नाउन सै दिवाकर दौ।। नाउ सुनौ वागूक: सरिसब सै चण्डेसश्वतर पाली सै महेश्वार द्दौणा।। बागू सुतौ रूद्र विशौकौ माण्ड/र सै सुरपति दौ (20/0/0) खण्ड:बला सै राजू द्दौणा।। विशो सुता रति (63/04) गुणे जाने (82/02) महाई साउलेका सोदरपुर सै भद्रेश्वर दौ (15/04) (30/02) ग्रहेश्व र सुता (57/01) नन्दीरश्व3र भद्रेश्वेर राम (39/09) कान्हुो का: नाउन सै डालू दौ (10/02) सकराढी सै जीवेश्व र द्दौणा।। भद्रेश्वीर सुतौ गोनन (33/1/) सोहनो गाउल करमरा सै गणवर्क जगद्धरसुत गयनसुतौ (300/11) गोरीपति सुरगन सै विरेश्व र दौ।। ए सुतौ बाइक: सुरगन सै गौरीदों।। बाइ सुता (39/1/0) रतिपति लक्ष्मीापति महिपति गणपतिय: तल्हेपुरह वीर दौ।। (210/01) वीर सुतौ (24/09) गोविन्दै: वभनियाम सै वीर दौ दरिoबाभन द्दौणा गणपति सुता डालू सुपनरूपना: (29/06) सकुरी गंगोली सै शोरे सुत राम दौ माण्ड्रहरिक एवं पशुपति मात्रिक चक्रं।। पशुपति सुतौ चिकू क: खौआल सै कमलू दौ (19/09) (28/09) राम सुता बाटू मति गहराई का: (31/05) फनन्द सै गौरी दो (20/06) माण्डदर सै गयन द्दौणा (58/0) मतिसु अमरू कमलू वेद लाखू का: (25/05) (84/01)
(58) ''21''
बाढ़ अलय सै वुद्धिधर प्रo वुधे दौ (8/02) वुधे सुता डीह दरिo नौरी पौत्र छीतू सुत गौरी दौ छीतर सुतौ गौरीक: सोदरपुर सै विश्वअनाथ दौ।। गौरी सुतौ राजू गिरीक: सकुरी सै यशु सुत लोचन सुत नारू दौ।। कमलू सुतौ परान रूपनौ पाली सै महाई दौ (14/03) केशव सुतों सदुपाध्या य गोढक: नरo कोने दौ पलिर्णभिखे द्दौणा सदुपाध्यालय गोढ़े सुता (32/05) कान्है लाखू (39/09) महाई का: खौआल सै रघुनाथ दौ (20/11) रघुनाथ सुता (33/05) धारू सोंसे विदूका: गंगोली सै केशव दौ महाई सुतौ जीवे चान्दोण खोआल सै गोविन्दथ दौ (03/01) लक्ष्मीोधर सुतौ कवि किठो प्रoकृष्णेपति।। कवि कृष्णयपति सुतौ भगव: सरिo इन्द्र दौ।। भगव सुतौ (32/09) (22/01) नारायण गोविन्दो पाली सै रवि दौ (20/0) (47/08) रवि सुतो हेलूक: बलियास सै सूर्यदर दौ (10/09) मछेटा सै गणेश्वोर द्दौणा।। गोविन्दा सुतों (52/09) रवि होरेकौ अलय सै श्रीकर दौ (15/03) (39/09) नारायण सुतों श्रीकर शुभंकरौ (39/07) सोदरoभोगीश्व र दौ (15/04) सकराढी सै विभूओं श्रीकर सुता बेलउँच सै मित्रादित्यत दौ (120/02) अपरा मित्रादित्य सुतो (101/105) वासुदेव केशवौ (34/03) सकराढ़ी सै राजा दौ।। एवम् मधुसूदन मात्रिचक्रं।। ठ. हरिदेव सुतो ठ. रघुपति: नहुआर करमहा सै केशव दौ (02/08) नरसिंह सुतो रतिकान्तव: एकमा वलियास सै शिवादित्यच दौ (10/05) साधुकर सुतौ (28/02) जीवेश्वैर: ए सुतौ शिवादित्यत: पालीसै दिवाकर दौ (33/08) शिवादित्यब सुता टकबाल सै लाखू दौ।। रतिकान्तैं सुतौ श्री कान्तस: दरिहरा सै रविकर दौ (16/011) रविकर सुतौ (32/04) बुद्धिकर गंगोर सै नोने दो (19/07) खौआल सै हेलू द्दौणा (128/04) श्री कान्ता सुता (75/05) महाई कृष्णसपति महो (72/08) हरपति महो (66/03) उँमापति महो जानपतिय: खौआल सै गोविन्दी दौ
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(21/05) अपरा गोविन्द5 सुतौ (32/02) हरि (62/07) गुणेकौ खण्डहबला सै नरहरि दौ (06/09) दिवाकर सुतौ साढूक:।। साढ़ सुतौ गोपाल:।। गोपाल सुतौ नरहरि श्रीहरि दरिहरा सै शिवादित्यो दौ।। नरहरि सुतो (69/04) गंगाहरि: नाउन सै डालू सुत चन्द्रोकर दौ माण्डार सै विगो द्दौणा (87/04) कृष्ण।पति सुता रतिपति श्रीपति (89/04) रघुपतिय: जजिवाल सै सोम दौ (12/07) गोविन्दप सुतौ दामू सुयनो दरिहरा सै माइ दौ (25/02) दामू प्रo दामोदर सुतोसोम: हरिअम सै हारू दौ (181/01) माण्डिर सै गयन द्दौणा सोम सुता (84/09) (73/06) रूद रवि रामा: सरहद माण्डमर सै धनपति दौ (20/001) (39/06) पक्षधर सुता धनपति (33/08) विद्युपति शुभपतिय: पनिचोभ सै मधुकर सुत हरिकर दौ मधुकर सुत हरिकर सुतों श्रीकर: गंगोली सै पौखू दो।। धनपति सुतौ विष्णुसपति (62/05) हरिपति तिसूरी सै ग्रहेश्वरर सुत सीधू दौ जमुनी जामवाल सै गोपाल द्दौणा एवं रतिपति मात्रिक चक्रं।। रतिपति सुतौ (108/08) मुरारीकेशवो माण्ड र सै शुचि दे (09/05) शान्तिकरणीक (21/02) पौखू सुत रतिकर सुतौ डालूक: केउँट राम सै रूद दौ।। डालू सुता (30/09) (47/04) सवाई गदाइ हिराई का: सोदापुर सै गणपति दौ (21/01) विस्फी सै लड़ावन द्दौणा।। गढ़ाई सुता (38/04) दिनकर नन्दणन विदूका: कुजौली सै श्री वर्द्धन दौ (18/0111) श्री वर्द्धन सुतौ हरिहर: खौआल सै विश्वानाथ दौ पिढ़ सुतौं शुचिकर (70/04) रघुनाथौ खण्ड0बला सै सान्हीद दौ (20/0111) सान्हीह सुतौ (40/09) उधे प्रo उद्धव नोने प्रश्ना।रायणों सकo शिदू सुत देवे दौ थरिo सानू द्दौणा शुचिकरा विश्वानाथ भवनाथो बभनियामसै होरे दौ (06/06) गणिपतिसुत जयादित्यसुतौ साधुकर: ए सुतौ रतनाकर छादनसँ तत्तव चिनतामणि कारक
(60) ''22''
जगदगुरू गंगेश दौ।। रत्नाकर सुतौ ग्रहेश्व र: खण्डमबला सै ठ. सुपन दौ।। ग्रहेश्वमर सुतौ नोने होरे कौ सकराढ़ी सै भिक्रि सुत भिक्रिसुत शिरूदौ गंगुआल सै शिवाई द्दौहित्रदा (34/06) होरि सुतौ मेधवती: कटौना माण्ड।रसै जगति दौ (20/07) मिश्र सुरसर सुता ग्रहेश्वतर हरि (39/06) (41/05) ऋषि यति कीरतू (35/08) मतिश्वकरा: कुजौली सै राजू दौ (41/05) गंगोली सै पण्डित केशव द्दौणा (49/09) यति युवा करमाहा सै वुद्धिकर सुत लान्हि दौ दरिहरा सै जगन्नामथ द्दौणा केशव मात्रिक चक्रं।। केशव सुता रतौली दरिहरासै यशु सुत वाचस्य ति दौ (15/09) सिद्धेश्वगर सुता (30/06) सुपन रूपन ईश्वसरा: करमहा सै रघु दौ (26/03) रूपन सुतौ भोगेश्वैर प्रo भोगे गिरीश्व1र प्रo (25/06) गिरीकौ पालीसै रामदत्त दौ (14/02) पबौली सै बागे द्दौणा भोगे सुता ब.(5/11) (30/08) गोशे शिव (37/08) शिव ओहरि मनसुखा: (55/06) हारी सोदरपुर सै वाराह दौ (51/02) अपरा राजू सुत योगेश्वार सुतौ बाराह: कञ्जोलीसै धीरकंठ दौ।। वाराह सुतौ (28/08) रति हरि वलियास सै इबे सुत श्रीधर दौ पाली सै देवशर्म्मप द्दौणा मनसुख सुता पौखू यशु सुधी कान्हाठ: (65/04) उजान बुधवाल सै देवे दौ (11/03) (3/02) गुणीश्वार सुतो हरि देवे कौ एकहरा सै थानू दौ (13/02) रूचिकर सुतौ लक्ष्मी।कर (28/05) आनन्दबकरौ करमहा सै महिपति दौ।। आनन्दीकर सुतौ धानूक: गंगोली सै रामकर दौ।। यानू (26/06) (25/01) सुता थीत दिनेका: (371/05) दरिहरा सै प्रिति शर्म्म दौ (11/07) यमुगाम सै जीवेश्वथर द्दौणा।। देवे सुतौ सोम (38/04) नोनेकौ ओगही बेलउँचसै गयादित्यर दौ (10/03) महो गयादित्यम सुता रघुपति रतिपति कृष्ण पतिय: (29/08) भरेहा सै गुणपतिसुत केशव दौ सरगनसै देवनाथ द्दौणा एवम् यशु मात्रिकचक्र।। यशु सुतौ वाचस्य पति लाखू कौ सोदरपुरसै गदाधर दौ (18/01) मo मoउपाo विश्वचनाथ सुता मo मo उपाo रघुनाथ मo मo उपाo (27/07) रघुनाथ मo मo उपाo लक्ष्मीननाथा नरउनसै प्रितिशर्म्मल दौ करo नोने द्दौणा मo मo उपाo रविनाथ सुता मo मo उपाo (43/01) जीवनाथ मoमo उपाo पाठ भवनाथ परनामक अयाचीइबे महामहोपाo देवनाथा: भाण्डशर
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मo मo उo बटेश दौ (8/02) पनिचोभ सै जीवेश्वसर द्दौणा मo मo उपाo(39/07) भवनाथा परनामक अयाची दूबे सुता मo मo पाo शंकर महो (43/03) महादेव महोमासे महो दाशिका: (61/05) खौआल सै रघुपति दौ (07/09) सुतो इबे (35/07) दूबे शुभकौ (30/07) पनिo बाद दौ (17/06) खौआल सै राम द्दौणा मo मo उपाo (89/05) शंकर सुता महो गढाधा महो (37/09) गोविन्दे महो हरखूका: कुजौली सै सुपन दौ (18/01) वंशवर्द्धन सुता यशोधर (36/01) (43/03) सुपन रविकर लक्ष्मीसकरा: (35/01) जालय (जल्ल3की) सै मo मo उपाo रामेश्ववर दौ (12/010) सकराढ़ी सै धृतिकर द्दौणा सुपन (30/05) सुतनसुता नाथू पौथू सांथू का: उपति सै कानह दौ (06/02) थानू सुता होरे कान्हर गोपाला: पफलिया सै बाछे दौ।। कान्ह सुता गंगोली सै गंग देव सुत भवाई दौ नाउन सै चक्रेश्व5र द्दौणा महामहो गदाधर सुता उँमापति धनपति भूवन (51/01) (166/07) भूवन ध्रूवानन्दु भूवदानन्दा : विजनपुर दरिहरा सै नरपति दौ (06) महो धृतिपति सुतौ (25/09) भवशर्म्मा गोविन्द् शर्म्मणौ तिसउँत सै नोने दौ भवशर्म्मक (25/09) सुतौ वर्द्धमान यटाधरौ खण्ड बला सै सोम दौ।। बर्द्धमान सुतौ खांतू विभूकौ फनन्द्ह सै नरसिहं दौ (18/07) गंगोली सै साधुकर दैहित्र दौ खांतूसुता घनपति (47/06) कुलपति नरपति (76/05) चन्द्र पतिय: कुजौली सै सोमकर दौ (04/05) सोमकर सुतो मांगुक: सरिसब सै श्रीकर दौ।। नरपति सुतो मुथे (112/102) जनादिनों घुसौत सै हरि दौ (19/01/) रूचिकर सुतो शिवाईक: शिवदि सुतौ दामोदर: माण्डोर सै हरदत्त दौ (19/0) केउँटराम सै माने द्दौणा दामोदर सुतौ हरिअलूक: करमहा सै मधुकर दौ वलियास सै जसानन्दद द्दौणा हरिसुता सकo लाखू सुत श्री कर दौ भिगुआ सै माधव द्दौणा एवं वाचस्प ति मात्रिक चक्रं।। वाचस्यमति सुता महियासोदरपुर सै परान दौ (21/02) हरिनाथ सुतो रूचिनाथ कीर्तिनाथो (31/05) कुoवंशवर्द्धन दौ (23/03) जलाय सै रामेश्वमर द्दौणा रूचिनाक सुतो गोढेक: पालीसै गांगु दौ (21/05) देवेसुतो माधव: सकo सइ दौ।। माधवसुतौ।।
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गांगूक: माण्ड1र सै नन्दी श्वेर सुत वागीश्व र दौ खण्ड्बला सै गौढि द्दौणा गांगुसुतरति:सरिसक सै रूद दौ (71/04) रूद सुता सकराढ़ी सै जाई दौ (04/01) कुजौली सै राजू द्दौणा एवं गोढि़ मात्रिक चक्रं बo (20/05) गोढि़ सुतौ परानहृषिकेशों टकबाल सै रामकर सुत बाछे दौ नरधोध टकबाल सै बीजी शुचिकर: शुचिकर सुतौ थेद्य:।। रोध सुतौ प्रितिकर दामोदरो (64/08) कञ्जग्राम सकराढ़ी सै नरपति दौ।। प्रितिकर सुतौ रतिकर लाखू कौ खौआल सै महामहो देवादित्य सुत जीवे दौ सुरगन सै गंगाधर द्दौणा।। रतिकर (46/07) रतिकर सुता रामकर रविकर ढोंढेका सकराढ़ी सै भीम दौ (14/07) सदुण नाइ सुतौ भीम (64/06) सुरेश्वयरो नरउन सै गंगापाश दौ भीम सुतो गंगेश्वकर रतीश्वररौ अलय सै मo मoउपाo रामेश्वतर दौ (02/10) दरिहरा सै एति द्दौणा।। रामकर सुतौ बाछेक: नरउन सै श्रीकर दौ।। (08/07) (43/07) श्रीकर सुतो दूमे पर उकौ माण्ड्र सै महो रघुपति दौ (18/03) महो रघुपति सुता (57/09) (26/07) जानेपति विभापति प्रज्ञापतिय: सोदापुर सै महामहोपाध्यातय सरबए सुत खौतू दौ खौआल सै कृष्णवपति द्दौणा एवं बाछे मात्रिक चक्रं।। बाछे सुता दरिहरा सै सोने सुत सौरि दौ (11/06) महामहो कीर्तिशर्म्मत सुतौ केशव शिवौ बहेराढ़ी सै लड़ावन सुत सुपन दौ पबौली सै रूद द्दौणा केशव सुता बागे सोने कोने (38/02) ऋषय: पनिचोभ सै सोंसे दौ (08/05) सफराढी सै जीवेश्वीर दौहित्र दौ।। सोने सुता सिरू (35/02) (50/06) कारू चन्द्रच मोरि सौरिका: सोदरपुर सै रामनाथ दौ (18/10) (30/07) रामनाथ सुता वलियान सै भिखि सुत हिरमणि दो जल्लिकी सै भवेश द्दौणा सोरि सुतो (32/010) (81/09) दाशे दिनेकौ पालीसै रत्नपाणि दौ (05/04) (59/0) नरसिहं सुता श्रीधर गुणीश्वदर गोपाला: (31/06) एकहरा सै रूचिकर दौ गोयाल सुतौ रत्नपाणि
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रूद्रपाणि माण्ड र सै मिश्र गरान सुत वीर दौ राउढ़ सै श्रीमाथ द्दौणा (24) रत्नपाणिसुता महाई (50/05) विक्रम (55/03) (53/01) राम का: खौआल सै श्रीकर दौ (19/04) गंगोर सै नोने द्दौणा रापरान मात्रिक्रचकं परान सुतौ (96/09) अर्जुन कामदेवौ खडीक खौआल सै कुश सुत वेणी दौ (20/11) (48/08) माधवसुतौ रूचिनाथ: धुसौत सै धृतिकर सुत हरिकर दौ सरिसब सै सुधाकर द्दौणा रूचिनाथ सुता (56/10) लव कुश शिव (52/02) गौरी (35/09) केशवा पाली सै हरिकर दौ (10/05) प्राणधर सुता हरिकर सुधाकर (34/02) शुभकरा दरिहरा सै (63/05) रूद्र दौ (195/0) हरिकर सुतौ गुणाकर (29/0) (58/07) जोरो खौआल सै साधुकर दौ (19/02) करमहा सै रामशर्म्म( द्दौणा कुश सुतो वेणीक: सोदरपुर सै शिव दौ (19/01) डालू सुता शिव अफैल (42/08) (74/04) लाखू गाइका: (26/01) माण्डौर सै आङनि दौ (18/03) (27/09) आङनि सुतौ नरपति (40/07) (32/05) रविपति करमहा सै गंगेश्विर दौ (02/08) खौआलसै आडू द्दौणा शिव सुतौ उघोरणकाशी (51/03) सतलखा सै भाष्कार दौ सतलखा सै बीजी मतिकर: ए सुतौ सिधूक: ख सुतौ रत्नाकर: वुधवाल सै मधुकर दौ (11/01) खण्ड)बला सै ठ. सुपे द्दौणा रत्नाकर सुता (24/05) हरिकर भाष्कौर दिवाकर (39/09) (26/05) (33/09) चन्द्रोकर सकरा: बेलउँच सै धरादित्य् दौ (10/04) भरेहासै गणपति द्दौणा भाष्ककर सुतो थेध: वुधवाल सै शुभंकर सुत दामोदर दौ वलियासै नितिकर द्दौणा एवं वेणी मात्रिक चक्रं।। वेणी सुतौ पीताम्बार: टकबाल सै रूद सुत गांगु दौ (09/06) रूद सुतौ गांगुक: तल्हकनपुर सै जोर दौ गोविन्द सुतौ जोर: माण्डसर सै अमतू सुत हरदत्त दौ फनन्दाह सै शोरे द्दौणा गांगु सुतो नन्दी/पति बेलoहरिहर दौ (20/04) हिरइ सुतौ (65/06)
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हरिहर मधुसरवाइ (50/02) (145/03) राम का: पबौलि सै शिवदत्त दौ (20/05) देवदत्त (35/07) सुतौ सदुपाध्या य शिवदत्त भवदत्तौ: माण्ड0र सै गयन दौ (20/06) तिसुरी सै नरसिंह द्दौणा सदुपाध्याबय (30/08) शिवदत्त सुता जालय सै महामहक महिधर दौ (12/01) महामह कमहिधर सुता सोम (56/09) भोगा जीवेका: यमुगाम सै गनाई दौ।। हरिहर सुतावर्दन ठकरू भमरूक सकरादी से देवे दो (08/05) चांड़ो सुतौ गुणीश्व0र: गंगोली सै बराह दौ।। ए सुतौ रतीश्र् (39/10) मतीश्वनरौ गंगोली सै माने द्दौ।। रतीश्वपर सुता (34/09) (62/06) लाखू भोगे देमे गोढ़े का: (3/06) खण्डएबला सै मतिश्व र सुत सिधूदौ थरिया सै रविनाथ द्दौणा देवे सुता (63/06) (71/04) (61/09) नागे शिव महाईका: सोदरपुर सै शुभदत्त (21/01) हरदत्त सुतौ माधवदत्त: सकराढ़ी सै सैकुली दौ माधवदत्त सुतौ शुभदत्त: फरमहा सै मांगु दौ।। शुभदत्त सुता शिरू देवे (85/07) (47/08) सोमा: सतलखा सै सिधु सुत रत्नाकर दौ (24/07) अपरा रत्नाकर सुता पालीसै दुर्गादित्यर दौ (19/07) वलियास सै रामशर्म्मस द्दौणा एवम् ठ. रघुपति मात्रिक चक्रं।। ठ. रघुपति सुतो धराधर लक्ष्मी7धरौ चुड़े नरउन सै वावू दौ (08/03) दिवाकर सुतौ दिनकर: टकबाल सै प्रितिकर दौ (23/03) खौआल सै जीवेश्वोर द्दौणा दिनकर सुता (67/04) (60/04) (76/04) (36/05) (56/01) शंकर परभू वीर गिरू का: तत्राद्यास्त्र्य दरिहरा सै कुसुमाकर दौ अन्योर प्रथमापरौक्षे दरिहरासै कुसुमाकर सुत मितू दौ (11/08) (48/04) कुसुमाकर सुता रूचि मितू सिधू अन्दूवका: कनन्दाहसै सोरि सुत गोविन्दप दौ माण्डकरसै वागीश्वदर द्दौणा मित सुता नाथु पौथू महनू मानूका: पनिचोभ सै मधुकर दौ (18/05) मधुकर सुता वलियास सै रूचिकर सुत कुसुमाकर दौ एकहरा सै शुक्लस दौहित्र दौ।। अपरा (141/05) ठ. रघुपति सुता (69/03) सुता बुधवाल सै परान सुत नारायण दौ वलियास सै श्री राम द्दौणा
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एवम् गिरू मातृक चक्रं।। गिरू सुतौ सदुपाध्यारय जीवनाथ: माण्डौर सै (25) बसाउन दौ (20/0/1) सुरपति सुतौ गुणीश्वकर: पनिचोभ सै हरिकर दौ (22/05) गंगोली सै पौखू द्दौणा गुणीश्वथर सुता (65/06) राम बसाउन (32/01) पदूमदिनू का: (66/08) भराम जजिo दाम दौ (22/03) दामू सुतौ (39/05) पागुक: उचति सै माधव दौ (06/01) माधव सुतौ (68/02) शुचिकर: खौआल सै शुभे दौ (107/01) बसाउन सुतौ (93/06) रूचिनाथ गोपीनाथौ (132/06) सरिसब सै परान दौ (20/05) विरेश्व0र सुतौ परान: खौआल सै हरिपति दौ (07/09) (36/01) हरिपति सुतौ (47/05) कउरे क: सोदरपुर सै विश्वे श्व0र दौ (15/06) दरिo मुनि द्दौणा परान सुता बहेराढ़ी सै गदाधरदौ (07/10) (35/07) ठ. गदाधर सुतौ चाण: सुदई बेलo सदादित्य( दौ (10/03) रूद्रादित्यि सुतो होरेक: नरउन सै हरिश्वसर दौ (10/06) हरिश्विर सुता गंदाधर जगद्धर प्रo मुशे देवधर विस्फीु सै हरदत्त होराई दौ निखूतिसै महिधर द्दौणा एवम् जीवनाथ मत्रिचक्र सदुपाध्यांयजीवनाथ सुता रामचन्द्रा परनामक वावू महिनाथ (84/06) (85/04) रामभद्र (113/08) (156/03) अनिरूद्दा: हरिअम सै भवदत्त दौ (18/08) गांगु सुतौ केशव: (27/05) खौआल सै विश्वीनाथ दौ।। केशव सुता मांगु (31/08) (27/08) नरहरिसिंहा: ब्रहमपुरजवाल सै नारू दौ (20/09) नारू सुता बरूआरी सै रविकर दौ (121/06) रविकर सुतौ सुधाकर: खण्ड2o जाई दौ (09/02) मालिछ सै देहरि द्दौणा मांगुसुता पूरखू गोपाला: दरिहरा सै बासू द्दौणा (23/05) भवशर्म्मरसुतो बागूक: हरिo रति दौ।। वागू सुतौ बासूक: सोदरo मo मo रविनाथ दौ (22/01) माo मo मo बटेश वासू सुतो गढ़ धुसौतसै रतिकर सुत कुलपति दौ बलियासै मधुकर द्दौणा हरखू सुतौ भवदत्त: एकo बसापन दौ (22/08) मिते सुता केशव (76/06) महादे माधव लव कुश रतन् का: सतलखा सै रतनाकर दौ
गजेन्द्र ठाकुरक स्थानीय कॉर्पस —मैथिली, अंग्रेजी आ मैथिली-अंग्रेजी द्विभाषी संस्करण
📚 गजेन्द्र ठाकुरक स्थानीय कॉर्पस — मैथिली, अंग्रेजी आ मैथिली-अंग्रेजी द्विभाषी संस्करण विदेहक संग्रह ०० मे मैथिली, अंग्रेजी आ मैथिली-अंग्र...
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डाॅ. देव शंकर नवीन (जन्म: 2 अगस्त 1962) मैथिली तथा हिन्दी मे एम.एण्, पी-एच.डी., भौतिकी मे एमए स-सी. तथा पुस्तक प्रकाशन एवं अनुवाद मे पी.जी. ...
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"भालसरिक गाछ" Post edited multiple times to incorporate all Yahoo Geocities "भालसरिक गाछ" materials from 2000 onwards as...
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उमेश मंडल कोवर गीतश् (1) कोने बाबा बान्हल इहो नव कोवन हे जनकपुर कोवर। कोने अम्मा लिखल पूरैन हे जनकपुर कोवर। फल्लाँ बाबा बान्हल इहो नव कोवर फ...