भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

(c)२०००-२०२५. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतऽ लेखकक नाम नै अछि ततऽ संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Editor: Gajendra Thakur

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Thursday, May 14, 2009

'विदेह' ३३म अंक ०१ मई २००९ (वर्ष २ मास १७ अंक ३३)- part I

'विदेह' ३३ म अंक ०१ मई २००९ (वर्ष २ मास १७ अंक ३३)

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एहि अंकमे अछि:-

१. संपादकीय संदेश

२. गद्य

२.१ रामभरोस कापडि भमर-संचार एवं साहित्य क्षेत्रमे समावेशी स्वरुपक अपेक्षा

२.२. कथा-सुभाषचन्द्र यादव- दृष्टि

२.३. प्रत्यावर्तन - तेसर खेप- -कुसुम ठाकुर

२.४. बलचन्दा (संपूर्ण मैथिली नाटक)-लेखिका - विभा रानी (अन्तिम खेप)

२.५ १. कामिनी कामायनी - सूटक कपङा आ २.कुमार मनोज काश्यप-प्रतिरोध

२.६. मणिपद्म क संस्मरण-संसार- प्रेमशंकर सिंह

२.७. कथा-विधिक विधान- लिली रे

३. पद्य

३.१. अन्हारक विरुद्ध- भ्रमर

३.२. कामिनी कामायनी: लिखत

के प्रेम गीत

३.३. विवेकानंद झा-कविता आ की सुजाता/ चान आ चान्नी

३.४. सतीश चन्द्र झा- मध्य वर्गक सपना

३.५ मनक तरंग- सुबोध ठाकुर

३.६. ज्योति-महावतक हाथी

४. गद्य-पद्य भारती -सोंगर,मूल कोंकणी कथाः खपच्ची,लेखकः श्री. सेबी फर्नानडीस, हिन्दी अनुवादकः डॉ. चन्द्रलेखा डिसूजा,मैथिली रूपान्तरण : डॉ. शंभु कुमार सिंह

५. बालानां कृते-1देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स); 2. मध्य-प्रदेश यात्रा आ देवीजी- ज्योति झा चौधरी

६. भाषापाक रचना-लेखन - पञ्जी डाटाबेस (आगाँ), [मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.]

. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS (Festivals of Mithila date-list)

७.THE COMET- English translation of Gajendra Thakur's Maithili NovelSahasrabadhani translated by Jyoti.

विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link.

विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे

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१. संपादकीय

मैथिली पत्रिका मिथिला दर्शन". नव रूप-रंग मे संपूर्ण पारिवारिक पत्र जाहिमे आर्थिक लेखक संग नेना-भुटका लेल कथा-कविता, महिला स्तम्भक अन्तर्गत भानस-भात आ साज-श्रृंगार, समीक्षा-लेख, पोथी-परिचय, सुश्रुषामे डॊक्टरी सलाह आ नियमित कथा-कविता सम्मिलित अछि।

एहि पत्रिकाक स्थापना १९५३ ई.मे भेल रहए आ प्रतिष्ठाता सम्पादक- प्रोफेसर प्रबोध नारायण सिंह आ डॉ. अणिमा सिंह रहथि । आब एकर प्रधान सम्पादक- नचिकेता आ कार्यकारी सम्पादक- रामलोचन ठाकुर छथि। कला सम्पादक छथि डॉ. रमानन्द झारमण। श्री शम्भु कुमार सिंह आ श्री अजित मिश्र एहिमे सम्पादकीय सहयोग दए रहल छथि। आ सम्पादकीय उपदेष्टा छथि पन्ना झा, रामचन्द्र खान, भीमनाथ झा, सुभाष चन्द्र यादव आ कुणाल। चित्रकार छथि चन्दन विश्वास। डॉ. अणिमा सिंह द्वारा ई प्रकाशित आ मुद्रित कएल जा रहल अछि। ई पत्रिका अपन वेबसाइट http://www.mithiladarshan.com/ शीघ्र शुरु करत।

संगहि "विदेह" केँ एखन धरि (१ जनवरी २००८ सँ ०७ अप्रैल २००९) ७८ देशक ७८१ ठामसँ २०,९५१ गोटे द्वारा विभिना आइ.एस.पी.सँ १,६८,७०८ बेर देखल गेल अछि (गूगल एनेलेटिक्स डाटा)- धन्यवाद पाठकगण।

अपनेक रचना आ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे।

G Thakur

गजेन्द्र ठाकुर

नई दिल्ली। फोन-09911382078
ggajendra@videha.co.in
ggajendra@yahoo.co.in

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aum said...

excellent magazine

Reply05/04/2009 at 07:03 PM

२. गद्य

२.१ रामभरोस कापडि भमर-संचार एवं साहित्य क्षेत्रमे समावेशी स्वरुपक अपेक्षा

२.२. कथा-सुभाषचन्द्र यादव- दृष्टि

२.३. प्रत्यावर्तन - तेसर खेप- -कुसुम ठाकुर

२.४. बलचन्दा (संपूर्ण मैथिली नाटक)-लेखिका - विभा रानी (अन्तिम खेप)

२.५ १. कामिनी कामायनी - सूटक कपङा आ २.कुमार मनोज काश्यप-प्रतिरोध

२.६. मणिपद्म क संस्मरण-संसार- प्रेमशंकर सिंह

२.७. कथा-विधिक विधान- लिली रे

संचार एवं साहित्य क्षेत्रमे समावेशी स्वरुपक अपेक्षा
रामभरोस कापडि भ्रमर

रामभरोस कापडि भ्रमर’, अध्यक्ष ः साझाप्रकाशन, ललितपुर

संचार एवं साहित्य क्षेत्रमे समावेशी स्वरुपक अपेक्षा


वि.स. १९५८ मे प्रारंभ भेल गोरखापत्र समाचारपत्रक प्रकाशनसं नेपाली पत्रकारिताक विधिवत शुरुआत मानल जएबाक चाही । मुदा इहो समाचारपत्र मात्र नेपाली भाषा आ नेपाली भाषी सभक हेतु पृष्टपोषणक काज करैत आएल अछि । ई एक सय आठ वर्षक नेपाली पत्रकारिताक इतिहासेमे नुकाएल अछि समस्त नेपालक पत्रकारिताक व्यथा कथा । राजनीतिकर्मी लोकनि भले दू सय चालिस वर्षक गोरखासं लनेपालक शाह वंशीय राजघराना धरिक समय कालमे मधेशवासीक शोषणक बात करैत हो, सत्य तं ई अछि एहि समस्त अवधिसं लएखन धरिक गणतंत्र नेपालमे समेत अवस्था उएह छैक आ ओ चाहे राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक हुअए अथवा साहित्य एवं संस्कृति क्षेत्र हुअए । मधेश आन्दोलनक बाद जे किछु आंगुर पर गनबला परिवर्तनक संकेत आएल अछि से धन सन ।
हम पहिने संचार क्षेत्रक बात करी । गोरखापत्रक सय वर्षसं उपरक इतिहासमे पहिल बेर कोनो मधेशी किंवा मैथिल नि.प्रधान सम्पादकक जवावदेह पद पर जा सकलाह अछि । एहिस पूर्व सम्पादक आ काका अध्यक्षक वाते नहि आने महाप्रबन्धक । नीति निर्माणक तहमे मैथिल किंवा मधेशीक पहुंच शून्य रहल अछि । गणतन्त्रो नेपालक संचार कर्मी सभक हेंजमे जवावदेह पदपर मधेशी आबि पओताहतकर आशा कम्मे अछि । नेपाल टेलिभिजनक महाप्रबन्धक भले नोकरीक वरिष्ठताक कारणें कोनो मधेशी तपानाथ शुक्ला भजाथु । एखनो सरकारक मनोनयनमे सरकारी संचार क्षेत्र मधेशी विहिन अछि । कहियो काल देखएबालेल सचिवक अध्यक्षता बला संचालक समितिक सदस्यक रुपमे रेडियो नेपालमे कोनो मंगल झा किंवा रोशन जनकपुरी भले नियुक्त कदेल जाइत हो । ने अवधि पूर्ण ने नितिनिर्माणमे कोनो अहमियत । नेपाल टेलिभिजनक हालति सएह छैक । संचालक धरिमे कोनो मधेशी नहि । बड कठिनसं आ प्रायः घनघोर प्रसव वेदनाक संग राससक उचिते प्राप्तकर्ता महाप्रबन्धक पद पर महतोजी वैसाओल गेलाह अछि, मुदा का.मु.क संग । राससक अध्यक्षक कुर्सि सदैब मधेशी सभक हेतु आकासक तरेगन भरहि गेल अछि । प्रेस काउन्सिलक अध्यक्ष धरि मधेशीक पहुंच एखन धरि भनहि सकल अछि । ४१ वर्ष पूर्व गठन भेल प्रेस काउन्सिल तहियासं आइधरि उएह नेपाली भाषी सभक हाथमे राखल गेल आ वात कएल गेल काठमाण्डू आ तराईक पत्रपत्रिका विकासक । परिणाम भेलै एखनो धरि प्रेस काउन्सिल मधेशक पत्रपत्रिकाकें पक्षपातपूर्ण आ द्वैध चरित्र देखा दबबैत रहलैक अछि, सतबैत रहलैक अछि । प्रत्येक नियुक्तिमे एकआध गोटे मधेशी सदस्य बना देल जाइत छथि, जनिका सम्भवतः चलितो किछु नहि छन्हि ।
सरकारी संचार क्षेत्र जाहिने नेपालक आनोक्षेत्र खास कमधेशीक कर आ मालपोतक रकम लागल छैकमे कोनो समावेशी स्वरुपक अवधारणा शासक लोकनि किएक ने राखि सकलाह । गणतन्त्र नेपालक संचार मंत्री द्वारा गठित प्रेस काउन्सिल लगायत आन संचार क्षेत्र मधेशी पदाधिकारीसं किए शून्य भगेल अछि । नहि लगैए ? – समावेशी मात्र नारा आ सहमतिसमझौताक विषय भरहि गेल अछि । तकरा कार्यरुपमे परिणत करबाक कोनो प्रयोजन सत्तापक्ष नहि वुझैत अछि । सरकार सूचना आयोग बनौलक, एक्कोटा मघेशी किएक राखत । सरकारी संचार माध्यम जाहिपर सभक अधिकार मानल जाइत अछि, तकर ई हालति अछि तं निजी क्षेत्रक वाते करब की । एत्त तं आर दुर्गति छैक । मधेश, मधेशी, मैथिल, मिथिला आ मैथिलीक चर्च एहि निजी पत्रपत्रिका आ संचार माध्यमक हेतु कुनैनक गोली जकां गलामे अरघैत नहि छैक । तखन व्यवसायिक बाध्यतावश किछु मधेशी, मैथिल लोकनि किछु संचार माध्यमक महत्वपूर्ण पद पर आसीन राखल गेलाह अछि । नेपाली भाषी सभक नियंत्रणक ओहि प्रतिष्ठान सभमे हिनका सभकें की चलैत हयतनिअनुमान कएल जा सकैछ ।
आब आबी साहित्य दिश । नेपालमे तत्कालीन प्रधानमंत्री चन्द्रशमशेर ज.व.रा. (१९०११९२९, प्रधानमंत्रीत्व काल) जखन नेपालमे राणाशासन विरुद्ध सुगबुगाहट देखलनि आ चोरानुकी राणा विरोधी साहित्य प्रकाशनक बात महशूस कएलनि तं १९१३ ई. मे गोरखा भाषा प्रकाशिनी समितिनामक संस्थाक गठन कएलनि । फरमान जारी कएलनिकोनो साहित्य वा रचना एहि समितिक स्वीकृति विना प्रकाशित नहि हयत । एहि तरहें राणा प्रधानमंत्री जे अपन गद्यी बचएबालेल समिति बना नियम चलौलनि ओ आइधरि परिवर्तित रुपमे अर्थात् पहिने गद्यी बचएबा लेल आब मात्र नेपाली भाषा बचएबा लेल तेहने जालसभ विनल गेल अछि । ओ चाहे तत्कालीन राजा महेन्द्रक कृपासं गठन भेल नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान होए आ अथवा २०२१ सालमे गठन भेल साझा प्रकाशन होअए ।
नेपालक जनसंख्या अनुसार मैथिली भाषीक संख्या १३ प्रतिशत अछि २०५८ सालक तथ्यांक अनुसार । दोसर भाषा अछि नेपालीक बाद । मुदा सरकारी संरक्षण विहिन अवस्था छैक । तहिना भोजपुरी, अबधी, थारु आदि भाषा छैक, जकरा प्रारंभ सं उपेक्षाक शिकार होबपडल छैक । साहित्यक रक्षामे लागल प्रतिष्ठान सभ मे समेत ई अवस्था शाहीकाल सं एखन धरि छैक जे दुखद मानल जएबाक चाही । मधेशी सेहो संचारमंत्री भेल छथि, मुदा की कएलनि !
शुरुमे हम संचारक्षेत्रक बात कएल अछि । सरकारी संचार क्षेत्रक गोरखापात्र, रेडियो नेपाल, नेपाल टेलिभिजन आदिमे नियमित साहित्यिक प्काशन व प्रसारण होइत अछि । कतेक स्थान नेपाली इतर भाषा, साहित्यक छैक । गोरखापत्र एम्हर नयां नेपालपरिशिष्टमे देशक विभिन्न भाषाक पृस्ट देबलागल अछि । नीक प्रयास थिक । मुदा दू पृस्ट सं एक कदेल भाषाक ओ पृस्ट भाषाक विशिष्टताक आधार पर नहि समावेशीक नामपर हक अधिकारकें कटौती कदेल जा रहलैक अछि । आनो पृस्टपर छापबला रचना सभमे नेपाली भाषाक लेखकक अतिरिक्त आन भाषाभाषी लेखक किंवा उक्त भाषाक साहित्य सम्वन्धी आलेख छापबामे परहेज कएल जाइत रहल अछि । गोरखापत्रक शनिवारीय परिशिस्टांक आ मधुपर्क साहित्यिक रचनाक प्रकाशन अछि । जं नियमित पाठक छी तं महिनौंक वाद किछु मैथिल किंवा मधेशी लेखकक रचना अति उपेक्षित रुपें कोनो कोनमे अभरत । वस, तकरा बाद उएह देखलेपढले नाम आ भाषारचना सभ । कतबो समावेशीक बात केओ कलिअएमजाल अछि एहि पत्रिका सभमे मैथिली, भोजपुरी, अबधी, थारु भाषा साहित्यक रचना व विकास यात्रा सम्वन्धी आलेख छापालेब । कहियो काल भनसुनकएला पर भले अपवादमे देखि पडए ।
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक गप त आर निराला अछि । नेपाली भाषा वाहेक आन भाषामे काज नहि करबाक जेना सप्पत खएने होए एकर पदाधिकारी लोकनि । एकतं एहिमे पहिने तीसटामे एक मधेशी सदस्य आ उएह कार्यसमिति अर्थात् परिषद्मे राखल जाइत छलाह । से भाषा, संस्कृति, साहित्य आदि विधाक अन्तरगत । ताही महक किछु पाइ कबारि एक आधटा पुस्तक मैथिलीयोमे बहार भगेल अछि तं ई महान कृपा भेल छैक मैथिली पर । एकरालेल कोना विभाग छुटिआओल नहि गेल अछि । हालेमे गठित आ भंगठित प्रज्ञाप्रतिष्ठानसं पूर्वक गठनमे एकमात्र मधेशी मैथिली साहित्यकार अवसर पबितो परिषद्मे राखल नहि गेलाह । तथापि प्रज्ञाप्रतिष्ठानक इतिहासमे पहिल बेर आंगनगतगर पत्रिका मैथिलीमे निकलल । किछु काज आगां बढल रहय, परिषद् भंग आ दीर्घअन्तरालक बाद जं गठनो भेल तं एहन जे शपथग्रहण लेवासं पूर्वे तहसनहस भगेल । अदालत आ जनता दुनू द्वारा वहिष्कृत भरहि गेल अछि । तएएकरा सं ने पहिने आशा छल, आ ने आब करी से तकर वातावरण बनैत देखल जा रहल अछि । कोना डा. योगेन्द्र प्र. यादव जहिया एकर सदस्य रहथि तहियासं सयपत्रीपत्रिकाक प्रकाशन शुरु भेल रहय जे वास्तविक रुपमे समावेशी स्वरुप रहैक ।
आब साझा प्रकाशनक गप करी । पहिने चर्च भआएल अछि राणा प्रधान मंत्री अपना विरुद्धक साहित्यकें प्रकाशनसं रोकबाक हेतु १९१३ ई. मे जे गोरखा भाषा प्रकाशिनी समिति (नेपालके समीक्षात्मक इतिहासडा. श्री रामप्रसाद उपाध्याय, (२०५५), पृ३१७ साझा प्रकाशन)क गठन भेल उएह समिति तत्कालीन राणा प्रधानमंत्री जुद्धशमशेर द्वारा नेपाली भाषा प्रकाशन समिति (वि.स. १९९०)क रुपमे परिणत कदेल गेल तकरे उत्तराधिकारीक रुपमे २०२१ साल अगहन १७ गते साझा प्रकाशनक स्थापना भेल । एकरो संचालक लोकनि नेपाली वाहेक आन भाषामे प्रकाशन करब सोचने ने छलाह आ साझा प्रकाशन विगत ४५ वर्षसं नेपाली साहित्यक भण्डारकें विना कोनो सरकारी अनुदान, अपनेसं कमा कअथवा घाटा सहि क भरैत रहल अछि । जं कि एहि संस्थामे सरकारक लगानी ६० प्रतिशत अछि तएएकर अध्यक्ष लगायत तीन संचालक सरकार दिशसं मनोनित होइत रहलाह अछि । मुदा केओ एकरा नेपाली भाषा सं आगां लाबि नेपाली जनताक करक अंशसं चलैत एहि संस्थाकें समावेशी नहि बना सकल । सहकारीक कारणें ई कृषि मंत्रालय अन्तरगत अछि आ एहिसं पूर्वो वहुतो मधेशी कृषि मंत्री होइत रहलाक अछि । मुदा आय, लाभ शून्य साझा अध्यक्षक पद पर धरि कोनो मधेशीकें लएबाक जरुरति महशूस नहि कएल गेल । ४५ वर्षक बाद एहिबेर पहिल मधेशी एकर अध्यक्ष पदपर आएल अछि । साझाक नेपाली भाषा मुखी सम्पूर्ण क्रियाकलापकें समावेशी बनएबाक प्रयास जारी अछि । किछु प्रकाशनक तैयारी चलि रहल अछि । मैथिली व्याकरण, मैथिली वालकथा, मैथिली कथा संग्रह आदिक प्रकाशन प्रगति पर अछि तं महाकवि विद्यापतिक चित्र प्रकाशित भचुकल अछि । भोजपुरी, अवधी, थारु, नेपाल भाषा, तमाङ आदि भाषामे काज करबाक गृहकार्य चलि रहल अछि । मुदा ई सभ काज नगण्य स्तपरपर अछि नेपाली भाषाक काजक आगां ओत्त नेपाली मानसिकतासं उबरि सकबामे जे कठिनाइ लगबाक चाही, लागि रहल अछि । तथापि किछु साहित्यिक संचालक लोकनि समावेशीक वर्तमान रुपान्तरण मे साझाकें मात्र नेपालीक घेरामे राखब उचित नहि, कहि उदारता देखा रहलाह अछि । परिणाम दूर तं अछि मुदा पहुंचसं ततेक दुरो नहि ।
साझाक पत्रिका गरिमाएखन नेपालसं, प्रकाशित साहित्यक पत्रिकामे अग्रणी रखैत अछि । ओकरो समावेशी स्वरुपमे लाओल जा रहल अछि । लेखकीय घेराकें तोडैत मधेशक लेखक लोकनि द्वारा मैथिली, भोजपुरी, अवधी, थारु आदि साहित्य सम्वन्धी आलेख प्रकाशन प्रारंभ भचुकल अछि, आहवान कएल जा रहल अछि ।
एकर अतिरिक्त निजी क्षेत्रक पत्रपत्रिकामे समावेशी रचना सभक उपस्थापन कमजोर अछि । रचना’, ‘अभिव्यक्ति’, शारदा’ ‘मिर्मिरे,’ ‘नेपाललगायतक पत्रपत्रिका सभमे नियमित रुपमे भाषान्तरक रचना, साहित्यक समीक्षा समालोचना, अनुवाद, मौलिक आदि प्रकाशित होइत रहबाक चाही । एहि सम्वन्धमे उक्त पत्रपत्रिका द्वारा प्रयास कएल गेल हो से हमरा ज्ञात नहि अछि ।
एहि तरहें देखलापर स्पष्ट रुपें देखि पडैछ जे राजनीतिए जकां भाषा, साहित्य किंवा संचारक क्षेत्रमे मधेशी उपेक्षित रहल अछि । ओ राज्य द्वारा तं सभसं बेसी अछिए, निजी क्षेत्र द्वारा सेहो कम अबडेरल नहि गेल अछि । परिणाम छैक मैथिलीभाषा, साहित्यमे विभिन्न विधा आ धाराक गतिविधि चरम पर होइतो नेपाली संसार ताहिसं अनभिज्ञ अछि आ समकालीन साहित्य यात्राक उपलव्धि अपने धरि सिमित भरहि गेल अछि ।
तहिना संचारक्षेत्र एतेक आगां बढि गेल अछि, मुदा एहि क्षेत्रमे अपन योग्यता, क्षमता प्रदर्शित कसकबाक अवसर कोनो ज्ञानीमधेशी पाबि नहि रहलाह अछि । ई व्यक्तिक मात्रे नहि राष्ट्रकें क्षति सेहो भरहलैक अछि । आ तएराष्ट्रियताक सूत्र कहियोकाल ढील पडैत वूझि पडैत छैक । आबो समावेशी नहि त फेर कहिया !!!

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Neelima Chaudhary said...

bhramar jik article bad nik,
madhesh ker janatak, mithilanchalak uttaree bhagak lokak samasya aa samadhan par tathya parak lekh

Reply05/04/2009 at 10:30 PM

कथा

सुभाषचन्द्र यादव-दृष्टि

चित्र श्री सुभाषचन्द्र यादव छायाकार: श्री साकेतानन्द

सुभाष चन्द्र यादव, कथाकार, समीक्षक एवं अनुवादक, जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल। आरम्भिक शिक्षा दीवानगंज एवं सुपौलमे। पटना कॉलेज, पटनासँ बी.ए.। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्लीसँ हिन्दीमे एम.ए. तथा पी.एह.डी.। १९८२ सँ अध्यापन। सम्प्रति: अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, पश्चिमी परिसर, सहरसा, बिहार। मैथिली, हिन्दी, बंगला, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, स्पेनिश एवं फ्रेंच भाषाक ज्ञान।

प्रकाशन: घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित।

भूतपूर्व सदस्य: साहित्य अकादमी परामर्श मंडल, मैथिली अकादमी कार्य-समिति, बिहार सरकारक सांस्कृतिक नीति-निर्धारण समिति।

दृष्टि

रातिक दस बजल अछि । अन्दाज लगबैत छी डेरा पहुँचय मे कम सँ कम एक घंटा अबस्से लागि जायत। पाइ केँ जेबीये गनय लगैत छी । बड़ कम अछि । डेरा लग एकटा टुटपुजिया होटल छैक, जे सस्ते मे खुआबैत छैक । लेकिन ओतऽ जाइत-जाइत एगारह बाजि जेतैक । ताधरि ओ होटल बंद नहि भऽ जाय, ई सोचि एकटा होटलमे घोसिया जाइत छी । एकटा टिनहा बोर्ड टांगल छैक, जाहि पर सभ वस्तुक दर लिखल छैक । हम मनेमन पैसाक मोताबिक हिसाब बैसा लैत छी आ आधा प्लेटक आर्डर दऽ दैत छी । किछु पाइ बचि जाइत अछि । मोन सिगरेट पीबा लेल नुड़िआय लगैत अछि आ बचलाहा पाइक सिगरेट लऽ लैत छी । मोन हल्लुक जकाँ बुझाइत अछि आ चालि किछु स्थिर भऽ जाइत अछि ।

रस्ता मे बहुत बात मोन पड़ैत रहैत अछि – 'ई हाले मे एम. ए. कयने छथि, बेचारा बड्ड गरीब छथि । कतहु कोनो नोकरी दिया दियौक ।

आब बड्ड घृणा भऽ गेल अछि एहि सभसँ । भरि दिन एम. एल. ए., एम. पी. सभक खुशामद, अपन हीनता-बोध आ सर्विस होल्डरक मौन व्यंग्यसँ मन कुंठित भऽ जाइत अछि । दिन भरि नोकरीक चक्करमे बौआइत छी आ राति केँ झमान भेल डेरा घुरैत छी। जीवनक यैह क्रम बनि गेल अछि । कहिया निस्तार होयत, तकर ठेकान नहि ।

कोठलीमे एकटा चिठ्टी फेकल अछि । चिठ्टी उठबैत छी । गामसँ आयल अछि । नोकरी भेटल कि नहि, से पूछल गेल अछि । मोन घोर भऽ जाइत अछि । बहुत उदास भऽ जाइत छी । चिठ्टी मे गाम अयबाक आग्रह सेहो अछि । गाम अयबाक बात मनकेँ सान्त्वना दैत अछि ।

मन होइत रहैत अछि गाम भागि जाय । एहिठामक भूख-प्यास, अपमान, दुख, निराशा कखनो काल बताह बना दैत अछि । ई शहर काटय दौड़ैत अछि । बुझाय लगैत अछि जे नोकरी एकटा मृगतृष्णा थिक । ओकरा पाछू बौआइत-बौआइत जीवन अकारथ चल जायत । गाम जेबाक निर्णय करैत छी । निर्णय पर दृढ़ रहय चाहैत छी लेकिन से होइत नहि अछि । गौंआघरूआक व्यंग्य आ उपहासक कल्पना कलेजामे भूर करैत रहैत अछि । 'देखही रौ, फलनाक बेटा बुड़िआय गेलै । एतेक पढ़ियोलिखि कऽ नोकरी नहि भेलै । आब गाम मे झाम गुड़ैत छै ।'

'धौ, पढ़तै कि सुथनी । पढ़ितिऐक तँ यैह हाल रहितैक ।'

'अरे अबरपनी कयने घुरैत हेतै ।'

एहन-एहन बिक्ख सन बोल सुनि केँ मन होइत अछि लोकक मुँह नोचि ली । लेकिन मरमसि कऽ रहि जाइत छी ।

नोकरी । पढ़बाकलिखबाक उद्देश्य लोक एक्केटा बुझैत अछि-नोकरी । जे नोकरी नहि करैत अछि, गाममे रहय चाहैत अछि, तकरा लोक उछन्नर लगा दैत छैक । कियैक ? मन मे बेर-बेर ई सवाल उठैत अछि । लोकक व्यवहारक प्रति मनमे क्रोधकं धधरा उठैत अछि ।

आइ भोर ओहि दक्षिण भारतीय पत्रकार सँ भेंट भेलाक बाद मन उद्वेगहीन आ शांत भऽ गेल अछि । सोचि लेने छी आब गामे मे रहब । खेती करब । पत्रकारक बात रहि-रहि कऽ मोन पड़ैत अछि- 'जँ आइ सभ पढ़ल-लिखल लोक नोकरिये करत तँ फेर खेतीक काज के करत । हमरा आश्चर्य होइत अछि जे आइकाल्हिक शिक्षित वर्ग केँ खेती करबामे लाजक अनुभव होयत छैक । जीवनक कोनो क्षेत्र होअय-कृषि, उद्योग अथवा व्यापार, एकटा महान आदर्श उपस्थित करबाक चाही । जीवन प्राप्तिक उद्देश्य केवल पेटे टा भरब नहि, किछु आरो अछि । आ ई की जे बी. ए. वा एम. ए. पास करू आ तुरन्त पेट पोसबा लेल कोनो नोकरी पकड़ि लिअऽ । भूख पर विजय प्राप्त करू, तखनहि कोनो महत् आदर्श स्थापित कऽ सकैत छी नहि तँ भूखे मे ओझरा कऽ रहि जायब ।'

लेकिन भूख पर कतेक दिन धरि विजय प्राप्त कयल जा सकैछ?' हम शंका राखलियैक ।

ओ बहुत गर्वित होइत बाजल – 'डू यू नो, डेथ केन नॉट कम ट्वाइस । आ जखन मृत्यु एक्के बेर भऽ सकैछ तँ हम सभ भूख सँ कहियो मरि सकैत छी?’ हमरा तखन बुझायल जेना इजोतक एकटा कपाट अचानक खुजि गेल हो । हम किछु आओर नहि सोचलहुँ आ गाम चल आयल छी।

गाम आबिते एकटा निराशा घेरि लेलक अछि । ओहि पत्रकारक प्रेरणा फीका आ बदरंग भेल जा रहल अछि। गामक जीवन, बहुत कठिन आ दुर्वह बुझाइत अछि । एहिठामक गरीबी, अशिक्षा, दंगा-फसादमे हम ठठि सकब ? हमरा सन सफेदपोश एहिठाम नहि रहि सकैछ । हमर निर्णय गलत रहय । हमर फैसला सुनिकेँ ककरो खुशी नहि भेलै । पत्नी पर तँ जेना वज्रपात भेलै । ओकर सभटा सपना चकनाचूर भऽ गेलैक । कतेक आस लगेने छल सब । पढ़त-लिखत, नोकरी करत, परिवार केँ सुख देत । लेकिन सब व्यर्थ । अपन अस्तित्व आब निरर्थक आ अप्रासंगिक बुझाय लागल अछि । की करी ? शहर घुरि जाय ? लेकिन ओतय करब की ? बस एत्तहि आबि कऽ अटकि जाइत छी । बुझाइत अछि शहर आ गाम हमरा लेल कतहु जगह नहि अछि । गाम अबैत छी तँ भागि कऽ शहर चल जयबाक मन होइत अछि आ शहरमे रहैत छी तँ भागि कऽ गाम चल अयबाक इच्छा होइत अछि । भरिसक हम चाहैत छी जे बैसले-बैसल सभ किछु भेटि जाय । लेकिन से कतहु भेलैए । उद्यम तँ करय पड़त । हमरा मे चारित्रिक दृढ़ता सेहो नहि अछि । छोट-छोट बात पर उखड़ि जाइत छी आ निर्णय बदलय लगैत छी । क्यो कहिये देलक जे 'पढ़ि-लिखि' कऽ गोबर भऽ गेलै, तँ की हेतैक । कहैत छैक तँ कहओ । एहि सँ दुखी भऽ कऽ शहर पड़ा जायब कोन बुद्धिमानी हेतैक । आइए एक गोटे 'हरबाह' कहलक तँ कुटकुटा कए लागल । मन भेल कतहु पड़ा जाय । एहि तरहक क्षणिक आवेश आ भावुकतामे गलब ठीक नहि अछि ।

मनकेँ अनेक तरहेँ शांत आ स्थिर करबाक प्रयास करैत छी । लेकिन फेर कोनो एहन बात भऽ जाइत अछि जाहिसँ अन्हार आ निराशा पसरय लगैत अछि ।

क्यो कहैत अछि – 'खेती मे कोनो लस छैक । कहियो रौदी, कहियो दाही....आ हमर मन डूबय लगैत अछि । भविष्यक चिन्ता आ डर खेहारय लगैत अछि । ई नहि सोचय लगैत छी जे सब जँ एहि डरेँ खेती छोड़ि दैक तँ अन्न एतै कतयसँ आ लोक खायत की ? आखिर एतेक आदमी तँ खेतीये सँ जिबैत अछि । पता नहि कियैक, मनमे खाली निराशाजनक भावना आ विचार अबैत रहैत अछि । साइत सुविधाभोगी हेबाक कारणे । हम श्रम सँ भागय चाहैत छी, सुविधाकामी छी तेँ भविष्य असुरक्षित आ अंधकारमय बुझाइत अछि । हरबाह-चरबाह आ जन-बोनिहार भविष्य सँ डेराइत नहि अछि । श्रमे ओकर भविष्य होइत छैक । श्रम, जे ओकर अपन हाथमे छैक । फेर कथीक चिन्ता आ कोन असुरक्षा ।

हम अचानक एकटा विचित्र तरहक आशा आ प्रसन्नताक अनुभव करय लगैत छी।

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Krishna Yadav said...

Subhash Chandra Yadav Jik Katha me kichhu gap rahait chhaik.

Reply05/05/2009 at 11:50 AM

उपन्यास

-कुसुम ठाकुर

प्रत्यावर्तन - (तेसर खेप)

आय भोरे बाबुजी असगर चलि गेलाह। माँ कs मोन नहि मानलन्हि जे ओ हमरा कानैत छोरि कsजैतथि। बाबुजी कs गेलाक बाद हमरा बड अफसोस होयत छलs जे माँ के हमरा चलते रहय परि गेलैन्ह, आ आब बच्चा सब के लs असगर जाय परतैन्ह।

कॉलेज जयबाक खुशी एतबे दिन मे समाप्त भs गेल, कियाक से नहि जानि। कॉलेज जाइ अवश्य मुदा जेना कतो आओर हेरायल रहैत छलहुँ।घर आबि तs घर मे सेहो एकदम चुप चाप जा अपन कोठरी मे परि रहैत रही। माँ सब सोचथि हम थाकि जायत होयब आ सुतल छी, मुदा हम घंटो ओहिना परल रहैत रही। हमरा अपनहु आश्चर्य होयत छलs। स्कूल गेनाई तs हम मोन ख़राब मे सेहो नहि छोरैत रही , फेर हमरा एहि तरहे कियाक भेल जा रहल छलs। काल्हि बाबुजी चलि गेलाह से आओर घर सुन लागैत छलैक ताहि पर कॉलेज जयबाक से मोन नहि होयत छलs। कहुना कॉलेज तs गेलहुँ मुदा ओहियो ठाम नीक नहि लागल।कॉलेज सs आपस अयलाक कs बाद नहि जानि मोन जेना बेचैन लागैत छलs। हमरा बुझय मे नहि अबैत छल जे एहि तरहे कियाक भsरहल अछि। जहिना हाथ पैर धो कs अयलहुं मौसी (जे की हमर काकी सेहो छथि) जलखई लss ठाढ़ रहथि आ हमरा आगूक जलखई दैत बजलीह जल्दी सs पहिने जलखई कs लिय। अहाँ सब दिन बहाना कs दैत छियैक जे भूख नहि अछि एतबहि दिन मे केहेन दुब्बर भs गेल छी। नीक सs खाऊ पिबू नहि तs ठाकुर जी अओताह तs कहताह एतबहि दिन मे सब हमर कनियाँ के दुब्बर कs देलैथ। ठाकुर जी नाम सुनतहि नहि जानि कतय सs हमरा मुँह पर मुस्की आबि गेल। बुझि परल जेना फूर्ति आबि गेल हो। मौसी के एकटा नीक मौका भेंट गेलैंह आ ओ तुंरत माँ के बजा कहय लागलिह "हे बहिन, अहाँ तs किछु नय बुझैत छियैक, कुसुम थाकय ताकय किछु नय छथि रोज तीन चारि बेर ठाकुर जी कs नाम लs नय लेल करू, सब ठीक रहतैक"। आब हमरा कोनो दोसर उपाय नहि बुझाइत छल, हम बिना किछु बजने चुप चाप मौसी के हाथ सs जलखई लsलेलियैन्ह।

सब राति हम आ काका विविध भारतिक हवा महल अवश्य सुनैत रही। हमरा दुनु गोटे कs इ कार्यक्रम बड़ पसीन छलs। सब सुति रहथि मुदा हम दुनु गोटे हवा महल के बाद सुतय लेल जाइत रही। हमरा कतबो पढ़ाई कियाक नहि हो सब दिन काका हमरा हवा महल काल अवश्य बजा लेत छलाह। आइयो हवा महल जहिना शुरू भेलैक मधु के भेजि कs हमरा बजा पठेलथि। हवा महल सुनलाक बाद हम अपन कोठरी मे सुतय लेल चलि गेलहुँ आ काका अपन कोठरी मे।

जहिना इ कहने रहथि, तहिना सब दिन हिनकर चिट्ठी आबैन्ह आ ओकर जवाब सब दिन राति मे सुतय काल लिखय चाहि मुदा हिनका हम की सम्बोधन कs चिट्ठी लिखियैन्ह इ हमरा बुझय मे नहि आबति छलs आ हम पुछबो किनका सs करितहुँ । हम अपन पहिल चिट्ठी जे हिनका बौआ सँग मुजफ्फरपुर पठौने रहियैन्ह ताहू दिन सोचैत- सोचैत जखैन्ह किछु नय फुरायल छलs s हम हिनका "ठाकुर जी" सम्बोधन कs चिट्ठी लिखि पठा देने रहियैन्ह। ओ चिट्ठी पता नहि कोना , हिनकर कोनो दोस्त देख लेने रहथि आ हिनका कहि देने रहथिन्ह जे अहाँक सारि चिट्ठी बड़ सुन्दर लिखति छथि।इ ओकर चर्च हमरा लग हँसैत हँसैत कयने रहथि। हमरा ओहि दिन अपना पर तामस अवश्य भेल छलs मुदा हमरा बुझले नय छलs जे लोग की संबोधन कs घरवाला के चिट्ठी लिखैत छैक। आब तs "ठाकुर जी "सम्बोधन कs सेहो नहि लिखि सकैत छलहुँ । जखैन्ह हम सुतय लेल अयलहुं तs इ सोचिये कs आयल छलहुँ जे, किछु भs जाय आइ हम चिट्ठी लिखबे करबैन्ह।हमरा अपने बहुत खराप लागैत छलs जे हम एकोटा चिट्ठिक जवाब नहि देने रहियैन्ह। बहुत सोचलाक बाद जखैन्ह हमरा सम्बोधनक कोनो शब्द नहि फुरायल तs हम ओहि भाग कs छोरि चिठ्ठी लिखय लगलहुँ । चिट्ठी मे कैयाक ठाम हम लिखिये जे हमरा मोन नहि लागति अछि जल्दी चलि आऊ मुदा ओ फेर हम काटि दियय । खैर बिना सम्बोधन वाला चिट्ठी लिखि कs हम एकटा किताब मे इ सोचि कs राखि देलियैक जे भोर तक किछु नय किछु फुरा जयबे करत। तखैन्ह ओ लिखि कsकॉलेज जाय काल खसा देबैक। पोस्ट ऑफिस हमर घरक बगल मे छलैक।

चिट्ठी लिखलाक बाद हम सोचलहुँ सुति रही मुदा कथि लेल नींद होयत। बड़ी काल तक बिछौना पर परल परल जखैन्ह नींद नहि आयल तs उठि कs पानि पीबि लेलहुँ आ फेर बिछौना पर परि कs हिनकर देल किताब "साहब बीबी और गुलाम पढ़य" लगलहुँ । दू चारि पन्ना पढ़लाक बाद किताबो सs मोन उचटि गेल आ जओं घड़ी दिस नजरि गेल तs देखलियैक भोर के चारि बाजति छलs। सोचलहुँ आब की सुतब, जाइत छी चिट्ठी पूरा कs तैयार भs जायब। इ सोचि जहिना उठि कs कलम हाथ मे लेलहुँ कि बुझायल जे कियो केबार खट खटा रहल छथि। हमरा मोन मे जेना एक बेर आयल कहीं इ तs नहि अयलाह। हम जल्दी सs आगू बढ़ि कs जहिना केबार खोलति छी तs ठीके इ एकटा बैग लेने ठाढ़ छलथि। हम किछु क्षण ओहिना ठाढ़ भs हिनकर मुँह ताकैत रही गेलहुँ अचानक मोन परल आ हिनका सs बिना किछु पूछने वा कहने ओहि ठाम स तुरन्त भागि गेलहुँ । ता धरि काका के छी करैत ओहि ठाम पहुँच गेलाह आ हमरा भागैत देखि पुछलथि" के छथि"?हम बिना किछु कहने ओहि ठाम सs भागि अपन कोठरी मे जा बैसि गेलहुँ। काका हिनका देखैत देरी अ हा हा ... ठाकुर जी आयल जाओ बैसल जाओ कहैत हिनका घर मे बैसा तुरंत ओहि ठाम सsजोर जोर सs भौजी भौजी करैत भीतर आबि सब के उठा देलथि। थोरबहि काल मे भरि घरक लोग उठि गेलथि। तुरंत मे चाह पानि सबहक ओरिओन होमय लागल। राँची मे तs हमर पितिऔत चारि भाई बहिन सेहो रहथि। जाहि महक तीन गोटे हिनका देखनेहो नहि रहथि, मधु टा विवाह मे छलिह। सब हिनका देखय लेल जमा भs जाय गेलथि। मौसी सs सेहो हिनका पहिल बेर भेंट भेल छलैन्ह। विवाह मे मौसी नहि रहथि नीलू दीदी कs विवाह के बाद सोनूक (छोटका बेटा) मोन खराप भs गेल छलैन्ह आ काका मौसी, सोनू, निक्की आ पप्पू के राँची छोरि आयल छलथि। हुनका एतबो समय नहि भेंटलैन्ह जे मौसी के फेर अनतथि।

हम अपन कोठरी मे चुप चाप बैसल रही, रतुका बेचैनी आब नहि छलs मुदा हमरा किछु नहि बुझाइत छलs जे हम की करी। इ सोचैत रही जे कॉलेज जाइ या नहि, जयबाक मोन तs नहि होयत छलs, ताबैत मौसी हमरा कोठरी मे कुसुम कुसुम करैत हाथ मे चाह लेने घुसलीह। हमरा देखैत कहय लगलीह "अहाँ अहिना बैसल छी, जल्दी सs चाह पीबि लिय आ तैयार भs जाऊ। हमरा इ सुनतहि बड़ तामस भेल, हमरा मोन मे भेल कहू तs इ अखैन्हे अयलाह अछि आ मौसी हमरा कॉलेज जाय लेल कहैत छथि हम धीरे सs कहलियैन्ह हमर माथ बड़ जोर सs दुखायत अछि। इ सुनतहि मौसी के मुँह पर मुस्की आबि गेलैन्ह आ कहलथि तैयार भs जाऊ मोन अपनहि ठीक भs जायत, आ आय कॉलेज नहि जयबाक अछि। इ सुनतहि हमरा भीतर सs खुशी भेल,बुझायल जेना हम यैह तs चाहैत रही, जे कियो हमरा कहथि अहाँ कॉलेज नहि जाऊ। हम जल्दी सs चाह पीबि तैयार होमय लेल चलि गेलहुँ।

ओना तs हमरा तैयार हेबा मे बड़ समय लागैत छलs मुदा ओहि दिन जल्दी जल्दी तैयार भsगेलहुँ। अपन कोठरी मे पहुँचलहुं तs मौसी हमरे कोठरी मे रहथि आ किछु ठीक करैत छलिह। हमरा देखैत बाजि उठलिह "बाह आय तs अहाँ बड़ फुर्ती सs तैयार भs गेलहुँ, आब माथक दर्द कम भेल"? हम हुनका दिस देखबो नही केलियैन्ह आ दोसर दिस मुँह घुमेनहि हाँ कही देलियैन्ह।

काका के विवाहे बेर सs हिनका सँग खूब गप्प होयत छलैन्ह। हमर काका बड़ निक आ हंसमुख व्यक्ति, ओ हिनका सs कखनहु कखनहु कs हँसी सेहो कs लेत छलाह। हिनको काका सs गप्प करय मे बड़ नीक लागैत छलैन्ह। हम तैयार भs s पहुँचलहुं ता धरि ओ सब गप्प करिते छलाह। मौसी हमरे कोठरी सs काका के सोर पारि हुनका सs कहलथि" ठाकुर जी कs तैयार होमय लेल कहियोक नहि, थाकल होयताह "।किछुए कालक बाद इ हमर वाला कोठरी मे अयलाह,हम चुप चाप ओहि ठाम बैसल रही। हिनका देखैत देरी हमरा की फुरायल नहि जानि झट दय गोर लागि लेलियैन्ह।गोर लगलाक बाद हम चुप चाप फेर आबि कs बैसि रहलियैक। मोन मे पचास तरहक प्रश्न उठैत छल।इहो आबि कs हमरा लग बैसि रहलाह आ पुछ्लाह अहाँ कानैत कियाक रही, आ हमरा देखि कs आजु भागि कियाक गेलहुँ। अहाँक बाबुजी जखैन्ह सs इ कहलाह जे अहाँ कs कनबाक चलते माँ रही गेलीह, आ आब एक मास बाद जयतीह, तखैन्ह सs हमरो मोन बेचैन छलs। अहाँ के बाबुजी के गाड़ी मे बैसा सीधे हॉस्टल गेलहुँ आ ओहिठाम मात्र कपडा लs जे पहिल बस भेंटल ओहि सs सीधा आबि रहल छी। हिनकर इ गप्प सुनतहि हमर आँखि डबडबा गेल। हमरा अपनहु इ नहि बुझल छलs जे हम कियाक भागल रही आ नहि इ, जे हमरा कियाक कना जायत छल।

साँझ मे हम चाह लs s जखैन्ह घर मे घुसलहुं तs इ आराम करैत छलाह मुदा हमरा देखैत देरी उठि कs केबार बंद कs लेलथि आ हमरा लग आबि बैसैत कहलाह "अहाँ सs हमरा किछु आवश्यक गप्प करबाक अछि"। हम किछु बजलियैन्ह नहि मुदा मोन मे पचास तरहक प्रश्न उठैत छलs। चाह पीबि कप राखैत कहलाह "अहाँ सच मे बड़ सुध छी, अहाँ हमर बुची दाई छी"। हम तखनहु किछु नहि बुझलियैन्ह आ नय किछु बजलियैन्ह, मोने मोन सोचलहुं इ बुची दाई के छथि। हम सोचिते रही जे हिनका सs पुछैत छियैन्ह, इ बुची दाई के छथि ताबैत धरि इ उठि कs एकटा कागज लs हमरा लग बैसि रहलाह। हमरा सs पुछलाह हरिमोहन झा कs नाम सुनने छी? हम सीधे मुडी हिला कs नहि कहि देलियैन्ह, ठीके हमरा नहि बुझल छलs। ठीक छैक हम अहाँ के बुची दाई आ हरी मोहन झाक विषय मे दोसर दिन बतायब। पहिने इ कहू, अहाँ के तs हमरा देखि कs खुशी आ आशचर्य दूनू भेल होयत। हिनका देखि कs हमरा खुशी आ आश्चर्य तs ठीके भेल छलs मुदा हिनका कोना कहितियैन्ह हमरा कहय मे लाज होयत छलs, तथापि पुछि देलथि तs मुडी हिला कs हाँ कहि देलियैन्ह। इ अपन हाथ महक कागज़ हमरा दिस आगू करैत कहलाह, इ अहाँ के लेल हम किछु सम्बोधानक शब्द लिखने छी, अहाँ के अहि मे सs जे नीक लागय वा अहाँ जे संबोधन करय चाहि लिखी सकैत छी, मुदा आब चिट्ठी अवश्य लिखब। कोनो तरहक लाज, संकोच करबाक आवश्यकता नहि अछि। बादक गप्प के कहय हम तs इ सुनतहि लाज सs गरि गेलहुँ। हम सोचय लगलहुं हिनका हमर मोनक सबटा गप्प कोना बुझल भs जायत छैन्ह। थोरबे काल बाद इ हमरा अपनहि कहय लगलाह हम अहाँक किताब देखैत छलहुँ तs ओहि मे सs हमरा ओ चिट्ठी भेटल जे अहाँ हमरा लिखने छलहुँ। ओहि मे अहाँ हमरा संबोधन तs नहि कयने छी मुदा ओ हमरे लेल लिखल गेल अछि से हम बुझि गेलहुँ। कोनो कारण वश अहाँ नहि पठा सकल होयब इ सोचि हम पढि लेलहुँ। पढ़ला पर दू टा बात बुझय मे आयल, पहिल इ जे अहाँक मोन एकदम सुध आ निश्छल अछि, आ दोसर इ जे अहाँ मोन सs चाहैत छलहुँ जे हम आबि, आ देखू हम पहुँची गेलहुँ। अहाँ हमरा चिट्ठी एहि द्वारे नहि लिखी पाबैत छी नय जे अहाँ के सम्बोधनक शब्द नहि बुझल अछि,कोनो बात नहि।एहि मे लाजक कोनो बात नहि छैक, अहाँ के जे किछु बुझय मे नहि आबय आजु सs ओ अहाँ हमरा सs बिना संकोच कयने पुछि सकैत छी। ओहि दिन नहि जानि कियाक, हमरा बुझायल जे बेकारे लोक के घर वाला सs डर होयत छैक। पहिल बेर हुनक जीवन मे हमर महत्व आ स्थान केर आभास भेल आ हमरा मोन मे संकोचक जे देबार छलs से ओहि दिन पूर्ण रूपेण हटि गेल। नहि जानि कियाक, बुझायल जेना एहि दुनिया मे हमरा सब सs बेसी बुझय वाला व्यक्ति भेंट गेलैथ।

जाहि दिन हमर विवाह भेल छलs ओहि समय हमर बडकी दियादिन केर सेहो द्विरागमन नहि भेल छलैन्ह। आ ओ राँची अपन नैहर मे छलिह। दोसर दिन साँझ मे इ कहलाह जे काल्हि भौजी सsभेंट करय लेल जयबाक अछि आ ओकर बाद परसु मुजफ्फरपुर चलि जायब। आजु चलु राँची(राँची केर मुख्य बाज़ार मेन रोड के लोग राँची कहैत छैक) दुनु गोटे घूमि कs अबैत छी। बरसातक मास आ बादल सेहो लागल छलैक तथापि हम सब निकलि गेलहुँ। रिक्शा किछुएक दूर आगू गेला पर भेंट गेल। घर सs मेन रोड जयबा मे करीब आधा घंटा लागैत छलैक। हम सब आगू बढ़लहुं ओकर १५ मिनट केर बाद सs पानि भेनाइ आरम्भ भs गेलैक। विष्णु सिनेमा हॉल सs किछु पहिनहि हम दूनू गोटे पूरा भीजि गेलहुँ। सिनेमा हॉल लग पहुँची इ कहलाह, भीजि गयबे केलहुं,चलू सिनेमा देखि लैत छी तs आपस घर जायब, कपड़ा सिनेमा हॉल मे सुखा जायत।

राति मे अचानक माथक दर्द आ प्यास सs नींद खुजि गेल, बुझायल जेना हमर देह सेहो गरम अछि। उठि कs पानि पीबि फेर सुति गेलहुँ। भोर मे मोन ठीक नहि लागैत छलs मुदा हम किनको सs किछु कहलियैन्ह नहि, भेल कहबैक तs बेकार मे सब के चिंता भs जयतैन्ह। मोन बेसी खराब लागल तs जा कs सुति रहलहुं। जखैन्ह आँखि खुजल तs देखैत छी डॉक्टर हमरा सोंझा मे अपन आला लेने ठाढ़ छलथि। हमरा ततेक बुखार छल जे चादरि ओढ़ने रही तथापि कांपति छलहुँ।डॉक्टर की कहलैथ से हम किछु नहि बुझलियैक। हमरा थोर बहुत बुझय मे आयल जे कियो हमर तरवा सहराबति छलथि, आ कियो गोटे पानिक पट्टी दs रहल छलथि , मुदा हम बुखारक चलते आँखि नहि खोलि पाबति छलहुँ, हम बुखार मे करीब करीब बेहोश रही। जखैन्ह हमरा होश आयल आ आँखि खुजल तs प्यास सs हमर ओठ सुखायत छल, मुदा साहस नहि छलs जे उठि कs पानी पिबतहुं। जहिना करवट बदललहुं तs हिनका पर नजरि गेल। हिनका हाथ मे एकटा रुमाल छलैन्ह आ बिना तकिया सुतल छलथि। हमरा इ बुझैत देरी नहि भेल जे इ हमरा रुमाल सs पट्टी दैत दैत सुति रहल रहथि। हमरा हिम्मत तs नहि छल तथापि हम चुप चाप उठि जहिना हिनकर माथ तर तकिया देबय चाहलियय इ उठि गेलाह। हमरा बैसल देखि तुंरत कहि उठलाह अहाँ कियाक उठलहुं अहाँ परल रहु। इ सुनतहि हम फेर तुंरत परि रहलहुं।

भोर मे उठलहुं त कमजोरी तs छलs मुदा बुखार बेसी नहि छल। मौसी सs पता चलल जे चाय पिबय के लेल जखैन्ह मधु उठाबय गेलीह तs हम बुखार सs बेहोश रही। इ देखि तुंरत डॉक्टर के बजायल गेलैक। डॉक्टर के गेलाक बाद बड राति तक माँ आ इ दूनू गोटे बैसल रहथि आ ठंढा पानी सs पट्टी दs बुखार उतारबाक प्रयास मे लागल रहथि। माँ के बाद मे इ सुतय लेल पठा देलथि आ अपने भरि राति जागल रहथि कियाक तs बुखार कम भेलाक बादो हम नींद मे बड़ बड़ करैत छलियैक। दोसर दिन सs हमर बुखार कम होमय लागल मुदा हमरा पूर्ण रूप सs ठीक होयबा मे एक सप्ताह लागि गेल। हिनका कतबो कहलियैन अहाँ चलि जाऊ, क्लास छूटैत अछि मुदा इ कहलाह, अहाँ ठीक भs जाऊ तखैन्ह हम जायब।

एक सप्ताह इ कतहु नहि गेलाह हमरे कोठरी मे बैसि कs अपन पढ़ाई करथि। साँझ मे काका लग बैसि कs खूब गप्प होयत छलैन्ह। ओहि एक सप्ताह मे काका सेहो हिनका सs बहुत प्रभावित भsगेलथि आ इहो काका के स्वभाव सs परिचित भेलाह। साँझ मे परिचित सब हिनका सs भेंट करय लेल आबथि। एहि तरहे पूरा सप्ताह बीमार रहितहुँ हमरा खूब मोन लागल।

आइ भोर सs हमरा एको बेर बुखार नहि भेल। काल्हि भोर मे हिनका मुजफ्फरपुर जयबाक छैन्ह भरि दिन इ हमरा सँग गप्प करैत रहलाह। साँझ मे काका ऑफिस सs अयलाह तs इ हुनका लग बैसि हुनका सs गप्प करय लगलाह आ हम अपन कोठरी मे छलहुँ। माँ मौसी जलखई के ओरिआओन करैत छलिह बाकी भाई बहिन सब बाहर खेलाइत छलैथ। हमरा इ सोचि कs एको रति नीक नहि लागैत छलs जे काल्हि इ चलि जेताह आ ओकर किछु दिनक बाद माँ सेहो चलि जयतीह।

राति मे सुतय काल इ कहलाह भोरे तs हम जा रहल छी मुदा हमर ध्यान अहीं पर ता धरि रहत,जा धरि अहाँक चिट्ठी नही भेंटत जे अहाँ पूरा ठीक भs गेलहुँ अछि। एहि बेर माँ के जाय काल नहि कानब, ओ बड दूर रहति छथि हुनको अहिं पर ध्यान लागल रह्तैन्ह। अहि बेर रोज एकटा कs चिट्ठी अवश्य लिखब, आ हमरा दिस देखैत आ मुस्की दैत कहलाह आब तs अहाँ के चिट्ठी लिखय मे सेहो कोनो तरहक दिक्कत नहि हेबाक चाहि। हमहु हिनकर मुस्कीक जवाब मुस्की सs sदेलियैन्ह।

आजु साँझ मे माँ के अरुणाचल जेबाक छैन्ह। हमरा खराप तs लागि रहल अछि मुदा एहि बेर हम कानैत नहि छी। माँ बड उदास छैथ। एक तs हमरे छोरय मे हुनका नीक नहि लागैत छलैन्ह, आ आब तs बिन्नी के सेहो छोरय परि रहल छैन्ह।माँ बिन्नी के हमरा आ काका के कहला पर छोरि कs जा रहल छथि। पन्द्रह दिन सs बिन्नी के बुखार छलैन्ह ठीक तs s गेलैन्ह मुदा ओ बहुत कमजोर भs गेल छथि। डॉक्टर हुनका लs s ओतेक दूर जएबाक लेल मना कs देने छथिन्ह । बाबुजी के चिट्ठी आयल छलैन्ह हुनक मोन ख़राब छैन्ह। माँ के किछु नहि फ़ुराइत छलैन्ह जे ओ की करथि। जखैन्ह हम कहलियैन्ह जे अहाँ जाऊ बिन्नी के रहय दियौन्ह तs ओ अरुणाचल जयबाक लेल तैयार भs गेलीह।

निक्की बड ताली छथि हुनका कोनो काज काका स वा दोसर किनको सs करेबाक होयत छैन्ह तsततेक नय नाटक करय छथि जे लोग के ओ सच बुझा जायत छैक आ हुनका ओ काज करय लेल भेट जाइत छैन्ह। जखैन्ह सs माँ के जेबाक चर्च शुरू भेलैक निक्की माँ सँग जेबाक लेल हल्ला करय लगलीह।काका कतबहु निक्की के बुझेबाक प्रयास केलैथ मुदा ओ नहि मानलिह आ हुनकर नाटक के आगू सब के हुनकर बात मानय परलैन्ह। माँ निक्की के अपना सँग अरुणाचल लsजएबाक लेल तैयार भs गेलीह।

साँझ मे माँ सोनी, अन्नू, छोटू आ निक्की के लs मुजफ्फरपुर चलि गेलीह। इ कहने रहथिन्ह जे मुजफ्फरपुर बस अड्डा आबि जेताह आ ओहि ठाम सs माँ सब के अपन कॉलेज लs जयताह माँ सब भरि दिन कॉलेजक गेस्ट हाउस मे रहि साँझ के अवध आसाम मेल पकरि कs चलि जेतीह। माँ के गेलाक बाद सs घर एकदम सुन भs गेल छलैक। एहि बेर बहुत दिन माँ सँग रहल रहि से आओर खराप लागैत छल। राति मे काका बहुत उदास छलैथ, हुनका निक्की के बिना नीक नहि लागैत छलैन्ह।

आय रबि छैक हमरा कॉलेज नहि जएबाक छलs। भरि दिन प्रयास मे रहि जे बिन्नी के असगर नहि छोरियैन्ह। बेर बेर हुनका दिस देखियैन्ह जे ओ उदास तs नहि छथि। एक तs हमही छोट बिन्नी तs हमरो सs करीब नौ साल छोट छथि मुदा ओ हमरा पकरि मे नहि आबय दैथ जे हुनका माँ के याद अबैत छैन्ह। दिन भरि काका सेहो बिन्नी लग बैसल रहथि आ हुनका हंसेबाक प्रयास करैत रहलाह। राति मे काका कहलाह काल्हि तs अहाँक कॉलेज अछि अहाँ अपन समय पर चलि जायब।

सोम दिन हमर दू टा क्लास होयत छलs आ दुनु भोरे मे छल। हम कॉलेज जाय लगलहुं तs बिन्नी के समझा बुझा देलियैन्ह आ मौसी रहबे करथि। हमर क्लास १० बजे तक छलs, क्लासक बाद हम घर जल्दी जल्दी पहुँच सीधा अपन कोठरी मे गेलहुँ कियाक तs माँ के गेलाक बाद बिन्नी हमरे कोठरी मे हमरे सँग रहैत छलिह। जओं अपन कोठरी मे पहुँचति छी तs बिन्नी आ इ दूनू गोटे बिछाओन पर बैसि कs गप्प करैत आ हँसैत छलाह। हमरा देखैत देरी बिन्नी तुंरत कहय लगलीह, "दीदी निक्की बोमडिला(बोमडिला, अरुणाचल मे छैक) नहि गेलीह। ततेक नय नाटक केलिह जे ठाकुर जी कs पहुँचाबय लेल आबय परलैन्ह"।

साँझ मे काका बड खुश छलथि, निक्की आपस जे आबि गेल रहथि। दोसर दिन इ फेर मुजफ्फरपुर आपस चलि गेलाह।

(अगिला अंकमे)

1

VIDEHA GAJENDRA THAKUR said in reply to Technogati...

by devanagari you mean Hindi perhaps, but this site is in Maithili

Reply05/10/2009 at 01:12 PM

2

Technogati said...

Thanks.I hope Hindi will alive till next world.

Reply05/10/2009 at 12:54 PM

3

Kusum Thakur said in reply to sanjai Mishra...

Sanjai ji, please specify what do you mean by the "complicated language" here in this Novel.

Reply05/10/2009 at 12:12 PM

4

कृष्ण यादव said in reply to Jyoti Kumari Vats...

hamhu ehi se sahmat chhi

Reply05/06/2009 at 11:26 PM

5

sanjai Mishra said...

Went through the part of Novel.Really very nice way of presantation of fact.But I will request you not to use complicated language n facts in Novel if you want to draw the attaintion of mass through yr creation.
Sanjai Kumar Mishra@yahoo.co.in

Reply05/06/2009 at 04:53 PM

6

Subodh thakur said...

Apnek rachna padhla ke bad bujhayal jena madhyam vargak jingi ke parikrama kailaunh saripahun anant sapna puda karvake lel madhyam varg puda jingi ashavan rahait khepai chati

Reply05/06/2009 at 04:41 PM

7

Subodh thakur said...

Apnek rachna padhla ke bad bujhayal jena madhyam vargak jigi ke parikrama kailaunh saripahun anant sapna puda karvake lel madhyam varg puda jingi ashavan rahait khepai chati

Reply05/06/2009 at 04:39 PM

8

Kusum Thakur said...

Dhanyavaad. koshis karab ahaan sab ke niraash nahi kari.

Reply05/05/2009 at 02:23 PM

9

Vidyanand Jha said in reply to Jyoti Kumari Vats...

ehi pothik print form avashya ayebak chahi

Reply05/04/2009 at 09:09 PM

10

Jyoti Kumari Vats said...

एहि उपन्यासक जतेक बड़ाई भए रहल अछि से ठीके भए रहल अछि। ई प्रिंट रूपमे सेहो अएबाक चाही।

Reply05/04/2009 at 09:01 PM

11

Anshumala Singh said...

uttama, kono khep madhyam nahi

Reply05/04/2009 at 08:59 PM

12

Mohan Mishra said...

bad nik rachna sabh, ahank lekhni me flow achhi

Reply05/04/2009 at 08:58 PM

13

Manoj Sada said...

ई उपन्यास अपन स्थान राखत मैथिली उपन्यासक मध्य।

Reply05/04/2009 at 08:57 PM

14

preeti said...

ee bhag seho pachhila dunu bhag jeka, nik

Reply05/04/2009 at 08:55 PM

15

aum said...

upanyasa bad nik lagal, agila beruka pratiksha rahat

Reply05/04/2009 at 08:51 PM

बलचन्दा

(मैथिली नाटक)-अन्तिम खेप

विभा रानी

(वर्तमान। स्त्री मंच पर अबैत अछि।.... पार्श्र्व स' समदाओन चलैत अछि। स्त्रीक विवाहक बाद विदा लेबाक अभिनय। एकरा ओ अपन लाल ओढनी से प्रतिध्वनित करैत अछि। समदाओन सुनाइ पड़ैत अछि)

बड़ा रे जतन स' सिया धिया पोसल

सेहो सिया राम नेने जाए

आगू आगू रामचन्दर, पाछू पाछू डोलिया

तही पाछू लछुमन जे भाई

लाल रंगे डोलिया, सबुज रंग ओहरिया

लागि गेलै बत्तीसो कहार ।

(समदाओन धरि स्त्री मंचक एक ओर से दोसर दिसि जाइत अछि, जेना नइहर से सासुर पहुंचि गेल हुअए।

स्त्री सासुर पहुंचलाक बाद 'कनिया एलै', 'कनिया परीछू'क सोर भेलै। गाड़िये मे हमरा परीछि- तरीछि के सभ किओ हमरा आगं बढेलक। चंगेरी मे पएर दइत हम आगां बढलहुं। आइ-माइ-दाइ सभ फ़ेर गीत शुरु केलीह। गीत, धुन, बदलइत अछि। स्त्री जेना चंगेरी मे पएर राखैत आगां बढि रहल हुअए। गीतक स्वर)

दुल्हीन धीरे-धीरे चलियऊ ससुर गलिया

ससुर गलिया ओ भैंसुर गलिया

तोरे घँूघटा मे लागल अनार कलिया

स्त्री चंगेरी-यात्रा के बाद हम पाओल जे हम सभ एक गोट दूरा पर ठाढ छी- दूर छेकाइ लेल। रोहित सभ के यथायोग्य नेग-तेग देइत आगां बढलाह, आ पाछू-पाछू हम। कोहबरक बिध-बेबहारक बीच फ़ेर गीत उठलै- (कोहबरक गीत। स्त्री द्वारा कोहबरक बिध, खीर खुअएबाक आदिक अभिनय )

आज फूलों से कोहबर भरा जाएगा

आज दूल्हा ओ दुल्हन सजा जाएगा

जरा सा तो टीका पहन मेरी लाड़ो

तेरे बचवे पर सबका नजर जाएगा।

(प्रेमक प्रसंग.. स्त्री द्वारा प्रेमक नाना अभिव्यक्तिक आ चरम संतुष्टिक बाद गहीर नींद मे सुतबाक अभिनय... नीने मे जेना नवजातक परिकल्पना।.. स्त्री ओकरा गसिया लइत अछि.. चुम्मा लइत अछि.. अपन पेट के सोहरबइत अछि.. सोहरबइत-सोहरबइत चेहाइत अछि.. हमरा स' नञि भ' सकत, एहेन अभिनय.. कल्पने मे बच्ची के बेर-बेर पँजियबैत अछि.... ओ कनेक नर्वस अछि.. स्त्रीक पतिक पएर पड़बाक, रूसबाक, मनेबाक अभिनय.. प्रताड़ित हेबाक अभिनय.. स्त्री डेकरैत अछि.. )

स्त्री : बाउजी! हमरा बचा लिय'..। हमर बेटी के बचा लिय'। आइ धरि अहां हमरा अपना पुतरी मे सन्हियाक' राखलहुँ.. मुदा हम.. हम अपन बच्ची के.. (पति स') रोहित, रोहित,प्लीज.. अरे, कोना अहाँ एतेक निष्ठुर भ' सकै छी..? की फेदा अई जिनगी स'? एहेन जिनगी? हमर पढ़ाई बिच्चहि मे छोड़बा देलहुँ.. गामक पहिल लड़की के इंजीनियर बनबाक स्वप्न.. अधरस्ते मे दम तोड़ि देल.. संगे छलहुं ने हम दुनू, एके क्लास मे। अहाँ स' कम त' किन्नहुं नञि छलहुँ.. कखनो अहाँ फर्स्ट आबी, कखनो हम.. विवाह स'पहिने एतेक रास चर्चा, डिस्कशन्स, ज्वाइंट स्टडी.. आ विवाहक बाद सभटा सुड्डाह.. पूछला पर एक्कहि टा वाक्य- मायक इच्छा.. हुनका नोकरीबला पुतौहु पसिन्न नञि.. अंग्रेजी बाज-भूक'बला लड़की हुनका नञि चाहीं । त' जहन इयैह सभ छल, तहन विवाह स' पहिने कियैक ने कहल? .. गामक पहिल लड़की हम, जे प्रेम कएल.. भौजी सभ की-की सभ नञि सुनौलन्हि। भौजी सभ माय के सुना सुना के कहितथिन्ह- 'हम सभ जौं एना कएने रहितहुं, ' हमर बाउजी त' हमरा सभ के जीबिते खाल खींचि के भुसि भरबा देने रहितियन्हि।' ..फ़ेर ओ सभ हमरा खोंचारैथि- 'अयं ये प्रेमा दाय, कॉलेज इंजीनियएरीक पढाइ पढ' जाय छलहुं कि प्रेमक इंजीनियरी पढ' लेल..? हं ये, राधा कृष्णक रास कत' नञि होइत छैक.. अयं ये प्रेमा दाइ, रास मे सभ किछु द' देलियन्हि कि किछु बचाइयो के राखलियन्हिए कि नञि.. नीके छै, विवाहक पहिनही विवाहक सभटा मज़ा लूटि लिय'। बाद मे फ़ेर ई कन्हैया नयिं त' कोनो आन कन्हैया, रास रचैया त'भेटबे करताह.. हुनका ट्रेनिंग अहीं द' देबैन्हि, कहबन्हि जे इंजीनियरीक ई खास कोर्स छलै... (कनैत) ई सभटा अपमान हम चुपचाप सहि गेलहुं।.. मात्र एक्कहि टा उमेद पर,जे एक बेर बस, एक बेर अहां लग आबि जाइ, तहन त' फ़ेर सुखे सुख.. धन्य हमर बाउजी। वएह हमर सखा, वएह हमर सहायक.. सभटा विरोध सहितहुं हमर अन्तर्जातीय विवाह लेल पूर्ण सहमति देलन्हि.. अहाँक मायक सभटा सौख सरधा हमर बाउजी तिगुना चौगुना क' ' पूर्ण कएलन्हि। मुदा.. हुनका लेल हम एखनो धरि आनि जातिएक छौंड़ी छी..। घर परिवारक मर्जाद आ बाउजीक मुंह देखि चुप छी..। भरि दिन कोल्हूक बरद जकाँ खटैत छी.. मुदा चुप छी..। अहाँ स' दूटा गप्प कर' लेल तरसि जाइ छी.. मुदा चुप छी..। कतेक अरमान छल.. स'ख सिहंता छल.. अहाँ स' दुनिया जहान पर चर्च करब.. डिस्कशन्स करब, मुदा..(स्त्री के लागैत छै जे कोनो छोट बालिका ओकरा ल'ग आबि कनफुसकियाइत अछि -माँ! हम आबि रहल छी!

स्त्री : (स्त्री चेहाइत एम्हर-ओम्हर ताकैत अछि) के? के छी? कत' ' बाजि रहल छी?

बालिका : हम! अहींक बेटी! अहींक पेट स'..

स्त्री : (पेट पकड़ि के) नञि बाजू! चुप भ' जाऊ! आ सूति जाऊ! ई कोनो गप्प करबाक बेर छै?ई त' सुतबाक बेर छै। सूति रहू। देखिऐ, हमरो नींन आबि रहलए। हम्हूं सूति रहलहुं। ई देखियौ। (फोंफ कटबाक अभिनय। स्त्रीक बच्ची रूप मे हंसि आ कथन..)

बालिका : झूठ! बहन्ना! निन्नी नयिं। माँ! हम आएब, हमरा आब' दिय'

स्त्री : (पति स') रोहित, सुनू ने! प्लीज! ई अप्पन संतान अछि.. हमर-अहाँक प्रेमक प्रथम निशानी! ..बाउजी कहै छथि.. बेटा-बेटी में कोन फरक?.. मुदा नञि! बाउजी, फरक छै..। फ़रक नयिं रहितियन्हि त' हम एना अपने बच्चा लेल एतेक अंहुरिया कटितहुं? ओकरा अई धरती पर आन' में अपना के एतेक असहाय अनुभव करितहुँ..। हम सभ त' गुलाम छी । कहलो गेल छै- पराधीन सपनहुं सुख नाही। .. अम्मा जी.. मानि जाथु ने.. गोर पड़ै छी अम्मा जी, गोर पड़ै छी। अरे, आब अई मे हमर कोन दोख, यदि हमर कोखि मे बेटीए आएल त'? साइंस पढबइत काले टीचर हमरा सभ के बुझेलखिन्ह जे प्रजनन प्रक्रिया मे दू टा फ़ैक्टर होइत छै- एक्स आ वाई। स्त्री मे मात्र XXएटा होइत छै, आ पुरुख लग X Y दुनू। पुरुख X देलन्हि त' बेटी आ Y देलन्हि त' बेटा। अम्माजी,छोट मुंह, जेठ गप्प.. जदि हिनको पहिल बेर बेटीए भेल रहितियैक तहन..

सासु : (सासुक स्वर मे) तहन? तहन मारि देने रहितियैक। आ मारि देने रहितियैक नञि, मारि देलियई.. ओहो एकटा के नञि, तीन तीन टाके.. आ, ले, देख हमर हाथ.. देख, भगै कत' छें? ले देख, देख।

(दुनू हाथ भयानक तरीका स' सोझा देखबइत अछि। स्त्री चेहाक' आ डेरा क' दूर भगैत अछि.... स्त्री विक्षिप्त जकाँ करैत अछि..)

स्त्री हा.. हा.. स्त्री.. अभागल..। शास्त्र मे कहल गेल छै, 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तत्र देवा:!' फूसि, अनर्गल.. हम सभ त' मात्र दासी छी.. सेविका.. भूमिका मे बन्हल..'भोज्येषु माता, शयनेषु रम्भा:।' हम सभ मनुक्ख नञि, मात्र भूमिका छी.. भूमिका नीक.. हम नीक.. नीक-अधलाहक फ्ऱेम हुनकर.... त' जहन भूमिके छी, ' जीब' दिय'हमरा आओर के अपन भूमिका संग.. माँ.. माता.. जननी.. मुदा नयिं, हम सभ त'कठपुतरी भरि छी। डोरी आनक हाथ में आ नचै छी हुनका ताले। .... (स्त्री उन्मत जकाँ चिकरइत अछि) ले, ले, भोगि ले.. भोग्या छी हम.. आऊ, आऊ, आ मर्दन करू हमर इच्छा के, हमर मान के, हमर सम्मान के.. हे.. हे समस्त स्त्रीगण.. हे समस्त स्त्रीगण,आऊ, आऊ आ प्रस्तुत करू अपना के.., प्रस्तुत करू अपना के, प्रस्तुत करू अपना के,प्रस्तुत करू अपना के। (एक-एक वस्त्र उतारबाक अभिनय। अंतिम वस्त्र उतारैत मुंह नुका लइत अछि..) मात्र रम्भा, मात्र उर्वशी, मात्र मेनका.. अहिल्या, द्रौपदी, कुन्ती, तारा,मंदोदरी - ई प्रात: स्मरणीया पंचकन्या नञि.. रंभा, उर्वशी, मेनका-भोग्या।..सीता..त्याज्या। ..नञि, द्रौपदी नञि। पति आ समाज स' प्रश्न पूछ'बाली द्रौपदी नञि चाही हमरा समाज के.. मात्र सीता चाही हमरा.. सीताक भूमि पर सीते-सीता.. प्रश्न नञि.. मात्र सहू.. आ नञि सहि सकी त' सन्हिया जाऊ.. ।

बच्ची मां, मां, आब' द दिय' हमरा। हम आएब। मां, मां, हमरा बचा लिय', बचा लिय' हमरा।(बालिकाक चिकरनाइ)

(स्त्री के होइत छै जे किओ ओकरा बचिया के ओकर कोखि से बाहर घींचि रहलए। स्त्री द्वारा बालिका के बचब' लेल ओकरा दिस दौगनाई कि बिच्चहि मे ठमकि जाइत अछि आ बेहोश भ' जेबाक अभिनय करैत अछि, जेना ईथर सुंघाएल गेल हुअए..। फ़ेर कने चैतन्य भ' ' एम्हर-ओम्हर करोट फ़ेरैत अछि।.. हठात ओ चिकरैत अछि, जेना किओ ओकरा घिसिया रहल हुअए.. ओ दौग-दौग क' चारू कात स' भागबाक प्रयास करैत अछि, मुदा सभ ओर स' ओकर रास्ता बन्न अछि.. चारू कात स' निराश ओ पाछा मंचक देवाल/पर्दा दिस भागैत अछि आ ओत' टकराक' खसैत अछि.. ओ एक पएर पकड़ि क' चिकरैत अछि,जेना किओ ओकर एक टाँग काटि देने हुअए.. 'माँ...' स्त्री एके पएर से अपना के घिसियबइत भागबाक प्रयास करैत अछि कि फेर दोसर पएर पर प्रहार.. ओकर पुन: चीख..। तेज संगीत.. स्त्री दुनू पएर स'अशक्त फेर दोसर दिस भगैत अछि.. आब एक हाथ कटबाक अभिनय.. ओकर कननाइ- 'ई की क' रहल छी? हमर बेटी के कत' ' जा रहल छी? .. अरे, हमर बेटी अहांके की बिगाड़ने अछि?' स्त्रीक पुन: बच'लेल एम्हर-ओम्हर दौगनाई - एक हाथ आ दुनू पएर स' अशक्त.. कि दोसर हाथ कटबाक अभिनय आ ओकर चिकरनाइ.. 'एना जुनि करियउ हमर बेटी संगे। एना त' ओकर अंग-भंग क' ' नयिं मारियऊ हमर बेटी के। छोडि दियऊ हमर बेटी के।' .. (स्त्रीक बेचैनी बढ़ैत अछि.. ओ एम्हर स' ओम्हर दौगि रहल अछि.. लोथ-हाथ-गोर कटबाक अभिनय संगे.. अचानक जेना माथ पर प्रहारक अभिनय.. अभिनय स' पहिने जेना हथौड़ा माथ पर बरजैत देखने हुअए.. तदनुसार मां.. शब्दक चीख, छटपट आ भागबाक अभिनय..'माँ, मां, मां मां,.. देखब ई दुनिया.. हमरा आब' दे'.. कि माथ पर प्रहार आ ओ एकदम स' शांत.. स्त्री चक्कति खा के' खसि पड़ैत अछि। कनेक काल बाद ओकर शरीर मे हरकति होइत छै.. अशक्त भावे उठैत अछि आ विद्यापतिक गीत गबैत अछि।)

'कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ

दुखहि जनम लेल दुखहि गमाओल

नयन न तिरपित भेल', हे भोलानाथ..

(स्त्री लस्त पस्त अवस्था मे उठैत अछि.. ओ एखनो विभ्रम केर अवस्था मे अछि। अही अवस्था मे ओ अपना के निरेखइत अछि, पेट सोहरबइत अछि। पहिने लागै छै जे पेट मे किछु नयिं छै, मुदा फ़ेर पेट के सोहरबइत अछि। अई बेर ओकरा प्रतीत होइत छै जे ओकर गर्भ नष्ट नयिं भेलैये। ओ रसे- रसे अपना के सम्हारैत अछि ..कपड़ा, केश, विन्यास आदि सभटा ठीक करैत अछि.. मोन मे बेचैनी छै, जकरा एकटा दीर्घ श्र्वासक संगे बाहर करबाक प्रयास करैत अछि.. गमे- गमे चलि क' फ़ेर ओ ओहि स्थान पर पहुंचइत अछि, जत' ओ छलीह। ओकरा चेहरा पर फ़ेर विभ्रमक स्थिति अछि। ओ अपन शरीरक एक एक अंग देखैत अछि, फ़ेर अपन पेट के। वास्तविकताक भान भेला पर ओ अपन पेट के प्यार स' सोहरबैत अछि। एक गोट निश्चयक भाव ओकर चेहरा पर अबैत छै, जे भेलै बहुत, आब नञि। स्त्री रसे- रसे उठैत अछि,अपन संपूर्ण शरीर के निरखैत अछि, जेना ओकर संपूर्ण शरीरक एक एक टा अंग नव-नव हुअए। ....अपन स्वर के निश्चित बनबैत अछि। मुख पर दृढ़ निश्चयक भाव। )

स्त्री नञि संभव अछि हमरा स' .. अपने हाथे अपन संतानक हत्या.. धरती पर जनमल संतानक हत्या करितहँु त' जेल जइतहुं, राक्षसी कहबितहुं, मुदा ई अजनमल संतानक.. सेहो हिनका आओरक प्रसन्नता लेल?.. हिनक तथाकथित.. परम्पराक रक्ष लेल?े.. हमरा स' विवाह कएला सन्ते जे मर्जाद टूटल छल, तकर अभिशाप दूर कर' लेल?'.. (दर्शक स') ई हमर इंजीनियर पति..कहबाक लेल आधुनिक, मुदा आधुनिकता स' कोसो दूर.. अरे, आधुनिक त' हमर पिता छथि- ग्रामीण, कमे पढल-लिखल, मुदा विचार स'कतेक आधुनिक.. परन्तु ई हमर अजुका जुगक पढुआ पति? प्रेमी रूप मे कतेक नीक,कतेक समर्पित- आ प्रेमी स' पति बनितहि सभटा सुड्डाह? हिनका लेल हम मात्र पत्नी,मात्र भोग्या..। .. अपने त' मातृभक्त कहाब मे ई बड्ड गौरव बुझै छथि, ..मुदा..हमरा मातृत्व सुख स' वंचित कर' लेल आएल छथि.. (जेना संपूर्ण सृष्टि के ललकारैत) त'सुनू, हे सृष्टि, हे बिधाता, हे अई धरतीक समस्त नर- नारी! सुनू, हम तैयार छी.. अपन बेटीक उत्तरदायित्व वहन कर लेल.. हे, सुनने छलहुँ.. ओकर धड़कन.. डाक्टर सुनौने छल..कतेक मीठ, कतेक सोहनगर.. धक-धक, धक-धक, छुक छुक, छुक- छुक..जेना रेलगाड़ी चलैत हुअए। एहेन मीठ आ सोहनगर धड़कन के हम अपने हाथे.. बन्न क' दी?..आ जौं दोसरो बेर बेटिए एलीह, तहन फेर डाक्टर.. फेर हत्या। फ़ेर इय्ह सभ नाटक?..न.., बहुत भेल।..प्रेमी स' पति रूप मे परिवर्तित तथाकथित मातृभक्त हमर परम प्रिय प्राणपति परमेश्र्वर.. हँ, हम.. अई धरतीक कोमल, अबला, कमजोर, असहाय स्त्री, आई समाजक देल ई परिभाषा स' अपना के मुक्त करै छी। मुक्त करै छी अपना के अई सभ बंधन स'.. आ धारण करै छी अपन स्त्रीत्व के.. स्त्रीत्वक मान के, ओकर मर्याद के आ शप्पथि लइत छी अई धरती माता के छूबि के जे आब नञि.. आब नञि त' हम मरब,नञि हमर बेटी.. (स्त्री उत्तेजना स थर थर कंपैत अछि। स्त्री के लागै छै जे ओकरा कान मे ओकर बेटी कुहुकि रहल अछि। ओकरा चेहरा पर प्रसन्नताक भाव अबै छै। ओ प्रथम दृश्य मे मंचक पाछां रखल गुड़िया के उठा क' ' अबाय्त अछि। ओकरा कोरा मे नेने-नेने ओ मंचक बीच में बैसि जाइत अछि.. ओक्का-बोक्का खेल स्त्री आरंभ करैत अछि..)

'ओक्का बोक्का तीन तरोक्का

लउआ लाठी चंदन काठी

चंदना के नाम की?

रघुआ

खइल' कथी?

दूध भात

सुतल' कहाँ?

बोन मे

ओढ़ल' कथी?

पुरइन के पत्ता

ढोढ़िया पचक!

ढोढ़िया पचक पर स्त्री अपन तर्जनी प्यार स' गुडिया दिस आ फ़ेर अपने नाभि पर खोपैत अछि.. दुनू खिलखिलाइत अछि.. पार्श्र्व स' मृदुल, मद्घम सितारक अथवा जलतरंगक धुन.. स्त्रीक नाना बाल-कौतुक /मातृ सुलभ गतिविधिक संगे प्रकाश शनै: शनै: फेडआउट होबैत अछि.... ।

(समाप्त)

1

Preeti said...

बलचन्दाक धारावाहिक प्रस्तुतिक लेल धन्यवाद। अहाँक दोसर रचनाक आश रहत।

Reply05/06/2009 at 03:48 PM

2

Rahul Madhesi said...

Vibha Rani Jik Natak Bad Nik Lagal.

Reply05/05/2009 at 11:51 AM

'विदेह' ३२ म अंक १५ अप्रैल २००९ (वर्ष २ मास १६ अंक ३२)- part IV

इंग्लिश-मैथिली कोष/ मैथिली-इंग्लिश कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।
Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.)
Language: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.)
विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.
१.पञ्जी डाटाबेस २.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.पञ्जी डाटाबेस-(डिजिटल इमेजिंग / मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण/ संकलन/ सम्पादन-पञ्जीकार विद्यानन्द झा , नागेन्द्र कुमार झा एवं गजेन्द्र ठाकुर द्वारा)
जय गणेशाय नम: (1)
अथ पत्र पत्र्जी लिखते: अथ सरिसब ग्राम: देवादित्यज रत्नाकरापत्यव-छादन।। प्रज्ञाकरापत्यन-बनौली नम समेत।। नितिकर सन्तेति केशवापत्या-दनाद-गंगेश्वकरा पत्य- गौरि शौरि कुलपति-बधवास।। महिपाणि सन्तकति-खांगुड़ गयड़ा समेत।। ग्रहेश्वजरापत्यक-जोंकी।। गणेश्व रापत्यत-सकुरी।। सोने सन्‍‍तति-कटमा ओ सकुरी।। भवादित्यरपत्यर-सतैढ़।। रघुनाथापत्य्-उल्लू।।। कौशिक-उल्लूट।। गिरीश्वतरापत्य्-सतैढ़।। वास्तुथ सुत ऋषि-सतैढ़ सम्प्र ति-फरकीया शिवादित्यानपत्यि-रतवाल मतहनी।। हरादित्या्पत्या-बलिवास श्री करापत्यय-ननौरे।। शुचिकरापत्यद-जगन्ना थपूर हल्लैहश्वयर-रूद्रपुर पैकटोल।। केशब बागे बसुन्ध र-नरघोघ रामदेवापत्यद-सिंडोआ।। कामदेवापत्यल-डीगरी गढपाणि सन्त्ति-गौर वोड़ा।। अथ नजिबाक ग्राम भासे सन्तयति वलिया रातु-दिगउन्ध।।। कान्हा सन्तदति गोविन्द -भड़ाम।। सोम सन्तनति-नाहस।। सुपन वासू-देउथि।। नारायण पुराई-ब्रह्मपुर।। मिश्र रामापत्यन-अचौढ़ी।। शु‍चिकरा पत्य - बलिया ब्रह्मपुर।। छीतू पारू-पीलखा।। शिवाई-महूलिया जहरौली।। ईश्व।र नारू-नोहड़।। श्री धरापत्यर-दिमन्दररा-एते जजिवाल ग्राम-अय खण्ड्बल ग्राम ठ. हराई सन्‍‍तति-भखराइन।। सोमेश्वपरापत्यु-बुलवन कथुवा समेत।। ठ. अनन्तय हरि-लखनौर।। भोगीश्वसरापत्यस गोपाल सन्तपति-बथई-हरड़ी।। गढाघरापत्य -पौराम।। रत्नाकरापत्य--हलधर तेतरिया हरडी खण्डरबसा ।। ठ. दूबे सन्ततति भौर।। लाखूमौहिमति-बेहद यमुगाम।। योगीश्व रापत्यस-सोन्दूपुर सरपरब कुरहनी वासी द्वीट खण्डढबला।। शुभद्रत्तापत्य।-देशुआल।। झाझू सन्तरति-रैयाक गुरदी सोनकहमेरी।। वास्तुर, वागू, हिरू-देउरी गोपालापत्यश-गढ़।। देने सन्त ति-चनुआरी।। पक्षधरपल-तेतरिया।। दिनकरापत्यी-पोंसक, बथदी बिहारी-उभय गोरादी-साधु सन्रति-बथयी।। लक्ष्मीतपति सन्त्ति-खरसा गणेशवरापत्यब-गणेश्वयरापत्य।-गुलदी।। हल्लेतश्वतरापत्यी बेलारी।। जीवेश्व्रापत्यट-अलय।।

(2) ''अ''
सोमकंठ-सरपरब।। रबि सन्त ति-गौर ब्रह्मपुर।। जयकर सन्ताति-सजनी।। भासे-डीह ।। देवेश्व्रापत्य -देशुआल।। पक्षीश्वौरापत्य -यमुगाम।। गिरीश्व।रा-मत्यव-देशुआल विन्येेश श्व'रापत्यु-वैकुण्ठपपुर।। शितिकंठ सन्त।ति-खुट्टी ।। रत्ननेश्व।रापसगुलदी।। अथ गंगोलीग्राम-महामहो सुपट सन्तवति-गोम कटमा।। होरे सन्त ति-बिसपी।। हारू सन्तुति- देशुआल।। हरि सन्तरति-डुमरा।। दिवाकरापत्य्-दिगउन्धन।। गौरीश्वरर सन्त्ति जगनाथापत्यर-धर्मपुर।। कुमर-गंगोली वासी।। कमलपानि-वैगनी, वड़ग्राम।। डालू सन्‍‍तति-सकुरी।। गयन सन्तयति-खरसौनी ।। एते गंगोली ग्राम।। ग्राम अपथपबौली ग्राम-रवि सन्तीति-बिरौलि।। उदयकरसन्त ति-सपता देशुआल11 महिपति सन्त ति-कोशीपार डुमराही।। हरियाणि सन्ताति-गोधनपुर लक्ष्मीीदत्तापत्यअ-गोनोली ।। नारू सन्त ति भतौनी डहुआ।। रूद सन्‍‍तति-बछौनी।। रूद सुत पाठक भीम-भीरडोआ।। जागू सन्तनति-रयपुरा विशो सन्तदति-चणौर।। बासु गौरि सन्‍‍तति-महरैल।। केशव गोविन्दाूपत्य -राजे।। दामोदरापत्यस-राजे शिवदत्तापत्य।-बढि़याम।। गोगे सन्त।ति-सहुड़ी।। यशोधरापत्य -मेयाम।। दामू सन्त्ति-अम्माश।। पुण्यािकरपत्यय: पैकटोल पनिहथ उँदयी सन्त।ति-धेनु।। मधुकर रत्नाकर प्रभा कर दियाकरापत्यअ जगति एते पर्वपल्लीतग्राम।। अथ सोदपुर ग्राम-ग्रहेश्व रापत्यन-धउल।। रूद्रेश्वररापत्यम-विरपुर।। धीरेश्व‍रापत्यथ सुन्दथर विश्वेरखरापत्ये भवे माधव-हसौली।। रामापत्यद-रमौली।। बाटू-बड़साम।। रूचि बासुदेव-कुसौली यटाधरापत्य -पचही।। गयनापत्यद: रोहाड़ बहेड़ा।। रति हरि-टाटी बास्तु् सन्तयति-तेतरिहार।। रूपे सन्तयति-तिमरिवार।। बसाउनापत्य कन्हौबली।। कामेश्वूर सुरेश्वुर राम।।

(3) नाथापत्य)-भौआल।। कान्हाेपत्ये-सुखेत।। त्रिपुरे-अकडीहा रतिनाथापत्यह डालू-कटका।। बाटू सुत हलधर श्रीधर-केउँटगामा सुधाकरा पत्ये-गौर।। म. म. उ. जीवनाथापत्यर-दिगउथ।। म. म. उ. भवनाथ प्र. अयाचीसुत म.म.उ. शंकर मटो महादेव महो मासे महोदारो सन्त।ति सरिसन अपरा भवनाथ प्र. अचाचीसुत शम्भुमनाथ रूद्रनाथापत्यर- बालि।। महामहो देवनाथापत्यध-दिगउन्धथ।। महो रघुनाथापत्य्-रैयाम जोर सन्तनति-विठौली मिसरौली गोपीनाथापत्यथ- मानी, जगौर।। म. म. उ. जीनेश्वार सुत गणपति हरिपति-महिया लोकनाथापत्यय-माझियाम खोरि। हरदत्त काधदापत्यु शहड़ सुहथरि।। देवे सन्त ति-महिया।। एते सोदरपुर ग्राम।। अथ गंगोरग्राम—बीनू वासू कुरूम भौआल केशवापत्य।-अहियारी-पोनद।। सनाथ सन्तंति-विरनी वासी।। भोरे सन्तपति महिन्द्र पुर विठू कादि बेकक।।
अय पल्लीए ग्राम-हलधर सन्ततति-बनाइनि।। महामहो उँमापति समौलि, वारी, जरहरिया।। रूपनाथ सन्त ति गिरपति-समौलि।। पशुपति-समौलि।। महाप्रबंधक।। रघुनाथापत्यद: दड़मपुरा नरहरि, रघुपति सन्त्ति-समौलि।। देवधरापत्यब- कछरा, देउरी।। गांगु सन्त ति-दोउरी।। दिवाकरापत्यग-देउरी, सकुरी, मोहरी-कटैया घोटक रवि सन्तीति-कटैया।। ग्रहेश्वदरापत्यय: कछरा।। रामकरापत्यम-भालय।। जितिवरापत्य -राजेसतिश्व।रापत्य -सिम्भुानाम।। कान्हा्पत्या-पड़ौलि।। विरममिश्रापत्यर-ततैल।। रामदत्त सुत केशव सन्तयति-कान्हर-हाटी।। महाई सन्तिति-फूलदाहा माधवापत्य्-दिवड़ा।। इबे सन्तमति-बेहरा।। नरसिंहापत्य हरिपुर-मुरा‍री सन्तपति-मुराजपुर।। भोगीश्वतर राजेश्वबरापत्यस पुरे सन्त ति-अलयी।। वंशधरापत्यु-अलय।। गोविन्दा पत्यप-रैयम।। कीसे सन्त‍ति राम सन्तवति वाटू सन्तेति-नंगवाल।। प्रभाकरापत्यद-पर्जुआरि।। हिताई सन्त।ति-विस्यावक्षापत्यन नकेसुता-बैकुंठपुर।। हारू सन्तपति-नैकंधा।। कविराज

(4) ''आ'' सन्त4ति-मछैटा।। सिंहेश्विरापत्य -ननौर।। मित्रकरापत्य्-ननौर-राजखंड, पाली ।। जयकरापत्य -कुसमाल, पिण्डाारूछ, बारहता, रताहास पाली कछरा।। माधवा।। पत्यख गौरीश्व्रापत्यप अहियारी, टूपाभारी।। गणपति, गांगु सन्ताति-अहियारी ।। यशु, डगरू सन्तशति-कुरूम।। बागू सन्ततति-रोहाल, कटैया।। गोविन्दा् पत्या हचलू सुत दिवाकरा पत्य्-सुदई, षनिहथ।। होराइ सन्तगति-अडि़यारी।। रूद्रेश्वबरा पत्यन-भड़गामा। बाटू सन्त ति-सन्दशलाही, पाली पाली, विशानन्दय पत्य्-ब्रह्मपुर थेतनि सन्ताति-जलकौर पाली।। चन्दौनत पाली दुर्गादित्यी पत्यल-महिषी।। देवादित्य।पत्या-बिहार, महिषी समेत।। रतनू प्रoरत्नादित्यन पत्य -महिषी।। रत्नाकरापत्य--यशारी।। ततो धोधनि सन्तैति-यशरि।। विशो, श्रीकर, शुचिकरापत्यद-पुरोठी।। जीवे सन्तिति-मोनि।। बादन सन्त‍ती आसी।। सुधाधरापत्य। मांगुसन्त्ति-मोनी।। भवदत्तापत्यि-पुरोही।। शुभंकरा पत्यर-(100/05) जमदौली।। पौथू सन्तुति-परसौनी, जरहटिया, सकुरी।। कुसमाकर सन्त‍ति-जमदौली।। यटाघरा पत्यल-सकुरी।। जीवधर, वंशीधरापत्यभ-सकुरी।। बुद्धिधरा पत्यस-ततैल।। कान्हा0पत्यट-अलय, सकुरी।। इनसन्तिति सकुरी।। मुरारी सन्ततति रामापत्यध-महिन्द्र वाड।। विशो सन्तपति रूद्रेश्वनरापत्य -कोलहा।। गणेश्विर नन्दी‍श्वहरापत्यव-महिन्द्र वाड़।। हरिपुर।। विरेश्व्र नरसिंहापत्यन-रादी श्रीधरापत्या बेलउँच राढ़ी।। गुणीश्वदरापत्यप-कोइलखा।। ग्रहेश्व्रापत्यर चहुँटा।। गोपालापत्यय-समैया।। हरिपाणि सन्तलति-समैया।। बाछ सन्ततति होरेश्वलर मतिश्वडर मंगरौनी।। बाटू सन्ततति-कटउना।। जसू, सन्त ति-सकुरी।। गणपति सन्तरति भगवसन्त।ति-पचाढ़ी-गुणाकरापत्यत-बरेहता सोन्द-वाड़।। पुरादित्याव पत्यम-मृगस्थेली एते पल्लीा ग्राम

(5) हरड़ी।। धनेश्वार-मझियाम, कनईल, लोहना समेत।। लाखू सन्ततति-कनइल।। चाण सन्त)ति रतिश्वेर-छामू।। रामकर कृष्णाढकर थुगाम वासी।। भोगे सन्त।ति शंकर गूदे-दिवड़ा।। इबे-जरहरिया।। देवे सन्तयति-रहड़ा।। गोढ़े-रहड़ा।। गोन्द्न चाण-।। पुरोहित गोपाल सन्तिति मारू-वरूआड़ सुपे संखवाड।। श्रीकर-पेकटोल।। गौरीश्व स्तेरकुना।। मिश्र भगव-पुरामनिहरा।। चक्रेश्वेर सन्तगति-दहुड़ा करूहरा। देहरि ततैल।। सोम-ततैल।। सान्हि सन्‍‍तति गोधनपुर।। देवे सन्त्ति-कादिकापूर। (ताइ-तत्रेव ।। ।। गोना सकराढ़ी-थितिकरापत्यश-आङ्त्रावासी-मझियाम समेत।। बुधौरा सकरादी, दूबा-सकरादी अन्हािर बरगामा समेत।। एके सेकराढ़ी ग्राम।। अथ दरिहरा ग्राम-त्रिपुरारि सन्त।ति-सिंहाश्रम।। हरिकर बु‍द्धिकर रूपनादि विजनपुर।। यशस्परति सन्त-ति गणपति भड़ैली।। गुणपति सन्त-ति-पठोङत्री)।। विद्यापति-पुडरीक-मछदी। केशव-अमरावती। शिरू-कुरूम सोने सन्तहति भौजाल।। शिव-यमुगाम।। गुणाकर पद्मकर मधुकरपट्टो। प्रजाकररापत्यु-कुसुमाक-उड़गाम।। मित्रकरापत्यम-जरहि‍टआ।। प्रसाद गौरीश्वतरापत्यर-भरउड़ा सन्हावा समेत।। दिवाकरापत्यक-अलई।। दिनकरापत्यय सोनतौला।। रतिशर्म्मा।वस-सकुरी।। भवशर्म्मामपत्यप-ब्रह्मपुर।। यटाधर-ब्रह्मपुर।। शशिधरापत्यम-पनिहारी।। बागू गांगू तरहट।। गोविन्द् कान्हत-पचही।। नारू-यशराजपुर।। बाटू-ब्रह्मपुर।। इन्द्रिपति-आग्नेतय।। झोंटपाली दरिहरा सिमसिम कोइलख विश्वकनाथापत्य। महिसान कोइलख समेत।। विधुपति-तत्रैव।। होरे उराढ़ वासी।। गांगू-कछरा।। रघुपति सेघ कठरा।। कान्ह कटैया जादू सरहरावासी कृष्ण़पति गुणीश्व-र: फूलमति।। सुन्दतर गांगू-तंत्रैव।। मतीश्वदरापत्यर-सुन्पारअलई समेत।। सुरपति-गोलहरी, अलय समेत।। गिरीश्वकरापत्यन-उडिसम।। पण्डोैलि दरिहरा-हरिकर सन्तपति सिहौली।। शंकरपरनामक गोदे-नवहथ।। कान्हार पत्यट-नवहथ। आसो-चिलकौरि।। भाइ सन्तिति-ततैल, तेतरिया, सिमरि।।

(6) ''उ'' कनसम।। गोढि़ सन्त'ति-बढि़याम। सुपन सन्तहति-गांगू मिट्टी।। विशो-तत्रैव।। हिक सावे-दीघीया।। धीरेश्व'र सन्त।ति-तारडीह, जलकौर-दरिहोश। मिश्र कान्हाेपत्यि-मतउना।। गंगेश्वगर सन्तरति मिश्र दुर्गादित्यािपत्यर-चडुआल।। देवधरापत्यि।। अग्निहोत्रिक महामहोहरि सन्तशति-नेतवाड़।। नारू सुत रूचि-महुआल।। विभाकरापत्यग-सिंधिया।। प्रभाकर सुत जुधे-पटसा।। नोने-जगवाल।। नारू सुत बाटू प्रभृति-अन्दो्ली।। गोढि़ सन्तयति-धनकौलि मिश्र हरि सुत चण्डेनश्वडर-चंडगामा।। नारायण-उने।। मिश्र मतिकर-बघोली।। धामू सन्‍‍तति-पोजारी।। शूलपाणि-रतौली नीलकंठ-पोखरिया रूपन-रतौली।। खांतर-बड़गाम।। बासू सन्त ति-बाली मुनिप्रo विरश्वनरापत्यद दिवाकर-राजनपूरा।। रविकर-छत्रनछ राजनपुरा, सीसब समेत।। गुणाकर सिढि़बाला।। प्रसिढि़वाल।। हरिकर-जरहरिया, ततैल समेत।। ब्रह्मेश्व।रापत्य़ रत्नाकरापत्यर-पंत्र्चारी।। विश्वारूपसन्त ति-पनिहारी।। शूलपाणिभ्राता नीलकंठ-बोथरिया।। रूपन सुत भोग गिरी-रतोली।। यवेश्वडर-जरहरिया-ब्रहमेश्वबर तत्रैव।। एते दरिहरा ग्राम।। अपथ माण्डिर ग्राम-गढ़ माण्डरर कामेश्वारापत्यह-बथया।। महत्तक जोर सन्तरति-बघांत।। सुइ भवादित्प-त्यड-कनैल, मुठौली समेत।। दिवाकरापत्य - जोंकी, मढि झमना।। हरदत्त सन्त ति-खनतिया।। गुणाकर, जयकर-खनतिया।। माधवापत्यठ-अरडिया।। रति, डालू-भौआल, दोलमानपुर।। बेगुडीहा।। खांतू। ठाकुर, सरवाई, केउट्रै सन्ततति-भौआल।। गदाई-दोलमानपुर-केशवापत्यं-असमौ।। कानहापत्य,-आसमा।। सूपे, विभू-कटमा विभू, भानुकर पिलरवा।। कविराज शुभंकरापत्यप-कटमा।। वागीश्वउरापत्यस-महिषी, गांगे।। रूपधरा पत्यल=मङत्र्रौनी।। रविदत्तापत्यज विशो-देउरी।।

(7)
हरिकर-विजहरा।। खांत-जरहरिया।। हरि-मङरौना।। होरे-केउँट गामा।। सुधाकर-वारी।। शुभंकर-सकुरी।। पशुपति सन्त।ति गुणपति-ओकी।। (18/09) (18/09) शिवपति इन्द्रिपति-रजौर। कृष्णणपति-पतौनी।। रघुपति-(18/03) जगौरा।। प्रजापति-अमरावती।। छीतर- जगौर।। आड़नि सन्त्ति कुलपति कटैया।। नरपति-दहुला।। रविपति-कटका।। महादेव-सिर खडि़या (श्रीखंड)।। रतिपति-(18/03)-सिहौलि)। दूबे-दुबौली।। पौखू-बिठुआला।। धनपत्याड- सरहद।। विधूपति-पतनुका।। सुरपति, रतन-कनखम।। सोम-बेहद।। भवे, महेश-कटैया।। गुणीश्ववर-कटाई।। पीताम्ब/रा पत्यस-कटाई, जमुआल।। देवनाथा पत्यब मिश्र नन्दीड सन्त ति-बेहटा।। जीवेश्वुरापत्य0-ओंराम।। सिंगाई-ननौरा।। दुगाई-तेतरिहार।। नगाई-कोइलख।। बागीश्‍वरापत्यप-सकुरी।। रूचिकराव शीरू-जरहरिया, मकुरी।। लक्षमीकांतापत्यी-त्रिपुरौली।। हरिकान्ताुपत्या दहिला।। उमाकन्ता- पत्यर ब्रहम्पु्र सुगन्धै सन्ताति-कनसी।। महेश्वारापत्यह मझौली।। गुणे मिश्रापत्यन-थुबे, खरका ।। सोरि मिश्रापत्य्-ब्रहमपुर।। गयन मिश्रा पत्य।, वीरमिश्रापत्यि-वारी सकुरी।। हरिशर्म्माकपत्यि सुधाकरादि-मृगस्थुली थेछ मिश्रापत्यर-अन्दौयली।। सुरेश्वमरापत्यु। ग्रहेश्वहरापत्य -कटउना।।हरि मिश्रापत्यथ-कटउना।। ऋषि मिश्रापत्यश-बेलउँजा।। यति मिश्रापत्यि-कटउना ।। कीर्तू मिश्राद मतीश्व्रापत्यग-गोआरी।। गिरीश्व्रा पख-मिश्ररौली।। हरे मिश्रापत्यम-खपरा ।। बाछेमिआपत्य -हरखौली।। हेलन, नरदेव-लेखद्विया।। शिवाई सन्तमति-वलियास, धयपुरा।। सर्वानन्दा-दलवय, सकुरी।। दलवय स्थित-असगन्धील।। चन्द्रेकरापल-कोवड़ा।। कुलधर, रामकरापत्यप-दिपेती, बेतावड़ी।। चोचू मोचू-पीहारपुर गोआरी समेत गोपाल सज्ज-न-ब्रह्मपुर, जगतपुर।। मित्रकरापत्य्, रूपनापत्यड-महिषी, सकुड़ी ।। सुथवय सन्तरति-अपोरवारि, जहरौली।। रतिधरशुमे-कनपोरवरितरौनी।। हरि सन्त‍ति-निकासी, यमुगाम।। एते माण्डिर ग्राम:।।

(8) ''ऊ''
अथ बलियास ग्राम।। भिखे, चुन्नी।, नितिकारपत्या-चुन्नी।।। दूबे सकुरी ।। सुरानन्दु-बैकक वासी।। रति सन्तखति-खड़का।। शिवादित्याू पत्यप मुराजपुर, ओगही, यमुथरि।। शुभंकरापत्य -ततैल, कमरौली 11 नन्दी् सन्तपति-भौआल, अलय, सतलखा।। सुधाकरापत्य -जरहरिमा।। राम शम्भरपित्यू-जादू धरौरा।। केशव-यमसम।। शक्ति श्रीधर-सकुरी महिन्द्रिपुर समेत।। मद्ध सन्तीति नारायण सिमरी, जालए, कड़का।। महन्थध सन्तीति माडर शिरू सन्ततति-बिशाढ़ी।। रूद्रादित्यारपत्य।-विठौली।। रूचि सन्तरति उदयकरापत्य्-नरसाम।। एते वलियास ग्राम:।। अथ सतलखा ग्राम: गुणाकर-डोक्हिरवासी।। विभू सन्तदति भाष्कररापत्य।-सतौलि।। दिवाकरापत्यर-सतौलि।। चन्द्रे श्वारापत्यू-कत्रडोली।। शंकरापत्यय-सतलरवा लोहरा पत्य।, नन्दीरश्वारापत्यल, यवेश्ववरापत्यप-कछरा।। अथ एकहरा ग्राम:-श्रीकर-तोड़नय।। जाटू सन्ताति-सरहद।। शुभेसन्त्ति-मैनी।। सोने सन्तयति-मण्ड‍नपुरा लक्षमीकरापत्यग-संग्राम।। रूद सन्त।ति-आसी।। धाम-नरौंध, जमालपुर।। गढकू-कसरउढ़।। बाटू-सिंधाड़ी।। थिते-खड़का ।। मिते-कन्हौसली।। गणपति पतउना।। जाने-ओड़ा।। कोचे-रूचौलि।। शुचिकरापत्यत मुराजपुर।। चित्रेश्वतरपत्या-नरौंछ।। एते एकहरा ग्राम।। अथ विल्व्पंचक (बेलउँच) ग्राम: धर्मादित्यातपत्यि-सिसौनी ।। रामदत्त हरदत्त, नोना दित्याख सन्त।ति- रतिपाड़।। शुधे सन्तरति-सुदई।। शिरू-द्वारम।। गयादित्यासपत्यत-ओगही।। महादित्यग कर्म्म़पुर बछौनी समेत।। जीवादित्यश-उजान।। रूद्रादित्यत-दीप सुदई।। सर्वादित-तडि़याड़ी।। देवादिल-ब्रह्मपुर।। स्त्ना दित्य।-काको।। मिचादित्याुपत्यत नारू-काको वासू-देड़ारिया प्राणादित्य- पस हरि, गयन-कन्होदली।। शुपे-कोलहट्टा।। रूकमादित्यू-ओझौली।। केउँदू-सकुरी।। महथू-सकुरी।। चौबे सन्तयति-सतलखा।।

(9)
अथ हरिअम ग्राम-लाखू सन्त ति-रखवारी।। केशव-दामू-मंगरौना।। मांगू-नरसिंह-शिवां।। (18/09)-हारू शिवा।। (27/05) नरहरिसन्तनति-वलिराजपुर चाण दिनू-कटमा।। परमू लाखू-आहिल।। रति गुणे-कटमा।। माधव सुत सन्तनति-अच्छी। ।। एते हरिअम मूलग्रामा।। अथ टंकवासटाम् कविराज लक्ष्मी।पाणि-नीमा।। सुरेश्व्रापत्य।, दामोदरापत्यप-पटनिया गंगोली।। रवि शर्मा खंग लक्ष्मी् शर्म्भा्-ब्रहमपुर।। पतरू, शीरू-पटनियाँ पोरवरौनी भौर, सकुरी ।। जागे सन्त्ति-रतनपुरा।। महाई सन्तसति-परिहार।। देवदत्तापत्यट-पीलखवाड़।। रविदत्तापत्य।-बहेड़ा।। पाँखूसन्ताति-सिरखंडिया (श्रीखंड)।। सुपन, मारू सन्तवति-नरधोध।। हराई, शुचिकर, प्रीतकरापत्यं-अकुसी।। हरिप्रहन- पोराम।। दोमोदरपत्य -बेहरा।। उँमापति सन्तकति-ततैल।। एते तंकवाल ग्रामा:।। अथ घोसोतग्राम: रतिकान्ह्-पचही।। रूचिकरापत्ये-नगवाड़।। रूद सन्ततति-यमुथरि।। रूद सन्त ति-गन्धाराइनि।। गणपति सन्तरति-घनिसमा।। कृष्णूपति सन्ततति-खगरी।। पृथ्वीोध्रारपत्यप-सकुरी।। रूद्र चन्द्र -डीह।। एते घोसोत ग्रामा:।। अथ करम्परख ग्राम इन्द्रकनाथा पत्यग कोई लख।। शोरिनाथापत्यर-दीघही।। रामशर्म्मािपत्य्-ब्रह्मपुर।। रतिकरापत्य -मझियामा बुद्धिकरापत्या सन्त ति कान्हा।पत्य् ककरौड़ हचलू सन्तधति-कनपोखरि।1 गणेश्वारापत्यय-केडरहम।। लान्हीश सन्त्ति-गोढि़-सैतालवासी।। सदु-रूचि सन्तखति हरदत्तापत्यन-घनकौलि।। नितिपत्यम-बछांत।। नोने सन्ततति-वेला।। लान्हि सन्तुति मुरदी।। सादू सन्तरति-ककरौड़।। मांगू सन्ततति-सोन,कोलखू, मघेता समेत।। मधुकरापत्यद-दोलमानपुर।। सदुo रूचि सन्ततति हरदत्तापत्ये-धनकौलि।। नितिपत्यर-बछांत।। नोने सन्तरति-वेला।। लान्हि सन्ततति मुरदी।। सादू सन्तोति-ककरौड़।। मांगू सन्ततति-सोन, कोलखू, मघेता समेत।। मधुकरापत्य -दोलमानपुर।। सदुoगिरीश्वनर सन्तिति नरसिंह नडुआर।। श्रीवत्सश सन्तलति-बेहट।। सदुo केशव-सिरखंडि़या (श्रीखंड)।। वराह सन्तंति-तरौनी।। रामावत्य‍-तरौनी।। कान्हम, श्रीधर-तरौनी।। रघुदत्त रूचिदत्त-रूचौलि।। सदुपाध्याुय

(10) ''इ''
माधवापत्यु-मझौरा।। सदु. रामापत्यत-झंझारपुर।। गुणीश्वररापत्यु-झंझारपुर।। सदुo भवेशवरापत्यर-अनलपुर।। हरिवंशापत्यर मुजौनिया।। शिववंशापत्यश-रोहाड़।। धूर्त्तराज म.म.उ. गोनू सन्तहति-पिण्डोनखडि़।। एते करम्बयहा ग्राम:।। अथ बूधवाल ग्राम: रविकरापत्यय-खड़रख सुरसर समेत ।। सुये सन्ततति-ब्रहमपुर।। राम चाण-मझियाम।। ढोढ़े-बेलसाम।। उगरू-सतलखा।। कान्हायपत्यण-वेलसाम।। दूबे, हरिकर-हरिना।। दामोदर-सकुरी।। राम दिनू-सुन्दारवाल।। गंगादित्यो विकम सेतरी।। सदुo भानुसुत गणेश्वपरापत्यर-परिणाम ।। गुणीश्वगरापत्यस उजान।। कोने-पीलखा।। गंगेश्वशर-मलिछाम।। रूचिकर रतिकर-गंगौरा।। महेश्वखर-फरहरा।। गौरीश्वपर-मदिनपुर।। विशो सुधाकर-डुमरी।। सूर्यकर सन्तगति-सिडरी।। ग्रहेश्वफर-महिषी ।। भोगीश्वमर-चिलकौलि बासू बोधाराम।। उदयकर-आड़ी।। पौथे धरमू-मुठौली।। कान्हा पत्यय-बुधवाल।। जगन्नामथापत्य--सिंधिया।। एते वुधवाल ग्राम।। अथ सकौना ग्राम-वाटन सन्तजति- सिंधिया।। हरिश्वपरपत्य -दिवड़ा।। सोमेश्वारापत्य्-बघांत।। बाबू सन्ताति डीहा।। रति गोपाल दिनपति-तरौनी।। रूद सन्तयति-जगन्ना।थपुर।। गुणे-महिपति-सरिरम।। शुचिनाथपत्यि परसा।। गुणे मासे-ततैल।। एते सकौना ग्राम: अथ निसउँत ग्राम:- पण्डित सुपाई सन्तयति-तरौनी तरौनी।। रघुपति-पतउना।। जीउँसर सन्त।ति-कुआ।। इतितिसॉं अथफनन्दनह ग्राम: श्रीकरापत्यि-बथैया।। कुसुमाकर, मधुकर, किठो सन्ताति, विठो ब्रहनपुर।। हाठू-चाण।। बसौनी-ब्रह्मपुर ।। सुखानन्दथ गुणे-सिसौनी गांगू-सकुरी।। सदुo गोंढि़-खनाम।। मतीश्व र, पौखू-चोपता।। शंकर-खयरा।। महेश्वार-डीहा सोम गोम माधव केशव-भटगामा।। विरेश्ववरापत्यप सिंहवाड़, सिन्हु।वार।। लक्ष्मीू सेवे-सकुरी।। भवाईरूद-वोरवाड़ी, भटुआल, दरिहरा, सिमरवाड़, मुजौना समेत।। एतेफनन्दिह राम:।।




(11) अथ अलय ग्राम।। बाढ़ अप्रलय, उसरौली, बोड़वाड़ी, सुसैला, गोधोखीच।। शंकरापत्यव-गोधनपुर सिंधिया समेत।। श्रीकरापत्यव-उजरा।। हेतू सन्तीति-सुखेत सुखेत मिश्र (रमिमांशक) हरि देवधरापत्यी-सिंधिया।। बासू सन्त ति: जरहरिया बाढ़ वासी। रविशर्म्मव-जरहरिया।। धारू सन्ततति-बेहरा।। शिरू-धमडिहा, कादिपूरा गोविन्दी सन्तदति-बेहद।। म.म.उ. गदाघर-उमरौली।। परभू वुद्धिकर-बैगनी।। रत्नघर सन्ततति भवदत्त-भटपूरा।। शिवदत्त-अजन्ताा।। मिश्रा भिमांशका सुधाधरपत्यि उसरौली।। लक्ष्मी धरापत्यत हलधर सन्तशति-यमुगम।। शशिधर, रघु, जाटू-अलयी।। यवेश्वतर-अलयी।। गंगाधरापत्यद-यमुगाम।। मिश्र मिनशक लाखू भूड़ी गणेश्विर-परमगढ़।। सिधू-वाड़वन।। दोदण्ड् अल्यी् लोआमवासी।। जसाई-डीहा।। रूद-खड़हर।। रमाई-राजे वासी।। विश्वे।श्वीर मतिश्वरर-उसरौली।। वेद सन्तनति-मलंगिया नान्य।पुर अलई, सिमरी, रोहुआसमेत गंगुआल बाथ राजपुर वासी।। कितिधरापत्य।-सकुरी जयकरापत्यर-कड़रायिनि।। सुधाकरापत्ये कड़रायिनि, मुराजपुर।। गोनन-कटमा गंगोली बेकक समेत। कोठों कटमा।। साठू विशादी दोलमानपूर।। रूद्र-गंगोली।। कुशल गुणिया-भरगामानालय समेत एते बभनियाम ग्राम:।।
अथ खौआल ग्राम: श्रीकरापत्यश-महनौरा।। रतिकर सुधाकरापत्य्-महुआ।। चन्द्र करापत्यव: महुआ।। रूचिकरापत्यि-महुआ मतिनुपुर।। स्थितिकरापत्यर: महिन्द्रा दिवाकरापत्यर-कोवोली।। हरिकरापत्यत-महुआ।। आदावन-परसौनी।। बाछे दोढ़े सन्तमति-रोहुआ।। वेणी सन्तलति: रोहुआ।। उँमापति सन्तसति-नाहस ।। विश्वहनाथापत्यद अहिल।। बुद्धिनाथ रूचिनाथापत्यत-खड़ीक।। रघुनाथापत्यत-द्वारम।। विष्णु् सन्तथति: द्वारम।। नोने जगन्नाथथापत्यय-वुसवन।। राम मुरारी शुक सन्त।ति-पण्डो्ली।।

(12) ''ई'' बाटू सन्ततति-ब्रह्मपुर तिरहर मौडु।। साधुकरापत्यत-दडिमा।। हरानन्दत, सन्तदति-अहियारी।। भवादित्यातपत्यर-नाहस देशुआल।। पॉंखू-बेहटा।। भवे सन्त।ति धर्मकरापत्य -देशुआल।। डालू सन्ततति-दडिमा।। दामोदरा पत्ये-तरहट बह्मपुर।। राजनापत्य‍-यगुआल।। प्रितिकरापत्य -पचाडीह (पचाढ़ी।। पतौना खौआल दिवाकरापत्यर-घुघुआ।। भवादित्या।पत्यत-ककरौड़ खंगरैढा समेत।। बैद्यनाथ प्रजाकारक रघुनाथ कामदेव-मौनी, परसौनी।। गोपालापत्यर कृष्णादपत्यर-कुमरि, खेलई।। शशिधरापत्यर नरसिंहापत्यत-बोड़वाड़ी कोकडीह, छतौनिया।। दामोदरापत्य्-कोकडीह।। नयादित्यामपत्यव-बेजौली।। द्वारि सन्ताति जयादित्या पत्यण सुखेत, सर्वसीमा।। शुचिकरापत्यल-दिगउन्धव।। आड़ू सन्तयति रघुनाथापत्य,-मुराजपुर ब्रह्मपुर।। जीवेश्वयरापत्य।-दिगुम्धत।। भवेसन्तउति-मिट्टी, सतैढ़, बेहट।। दूबे-सन्तजति-ब्रह्मपुर।। हेलु सन्तनति-सतैढ़ रविकर सन्तभति तत्रैव।। प्रसाद मधुकर सन्त्ति बेहदा।। दिवाकरापत्य। पिथनपुरा।। गंगेश्व‍रापत्यु-कुरमा, लोहपुर।। लम्बोुदर सन्ततति-कुरमा।। नाइ सन्ततति-पिथनपूरा।। राजपण्डित सह कुरूमा।। रामकर सन्ततति मिट्ठी खंगरैठा, गनाम।। आङत्रनि सन्तनति-सौराठ।। मति गहाई, केउँदू सन्तखति-सिम्वतरवाड़।। एते खैआल ग्राम:।।
अथ संकराढी ग्राम:-महामहोकारू सन्ताति भगद्धर गोविन्दि सकुरी।। प्रितिकर-कादिगामा।। शुभे सन्ततति-अलय महामहो हरिहरापत्यग-सुन्द रौ गोपालपुर।। जयादित्यागपत्सम-मलुनी सरावय।। परमेश्वतर-नेयाम।। सदु सुपे-हरड़ी।। रामधरापत्यस-अलय।। हरिशर्म्मा सन्तमति-सिधलमुरहदी।। रेकोरा संकख्दीआ-होरे-चांड़ो-परहट।। सोम-गोम-शक्रिरायपुर।। हरिश्व‍र-सकराढ़ी वासी।। जीवेश्वकरापत्यय-बेला आधगाउ।। गयन द्वारिकादि।।


(13) नोने विभू सिंधिया-गढ़ बेलउँच-सुपन अकुनौली।। कौशिक-कुसौली।। लक्षमीपाणि-सुशरी।। पाँवू-देयरही।। एते बेलउँचग्राम: अथ नरउनग्राम: बेलमोहन नरउन यटाधरापत्यय-मदनपुर।। रातूसन्तवति-करियन।। गर्व्वेुश्वशरापत्यौ: सिंधिया।। डालू सन्तरति रूचिकर: मलिछाम।। चन्द्र्कर टुने सन्तलति-सुलहनी।। विशोसन्त्ति-त्रिपुरौली।। हेलूसन्तूति भखरौली।। दिवाकरा पत्य्: सुरसर, कवयी।। दिनकरापत्य्-पुड़े।। खांतू कोने-वत्सलवाल।। शक्रिरायपुर नाउन-दामोदरापत्यी-जरहरिया। मुरारी=तेघरा।। योगीश्व्रापत्यौ-ओझोलि करियाम।। जगद्धरापत्यर-वोडियाल।। चक्रेश्व रापत्यर-शक्रिरायपुर।। नोने सन्तसति-मलंगिया, करहिया, पंचरूखी।। होरे सन्तशति नयूगामा।। कामेश्वुरापत्य। चकौती भवेश्वारापत्यग-मैलाम।। जौन सन्तरति-आहिल।। यशु आदितू डीहाआहिल।। वावू पाठकादि-मेलाम, कटउना विसपी समेत।। कामेश्व।रापत्यत पौनी, सकियाल।। देहरिसन्तवति-कनौती, तरौनी, लान्हूवसन्त ति-उल्लूय।। जगन्नालथापत्या हरदत्त-खड़का, वगड़ा बयना समेत।। आङनिसुत पदमादित्यानपत्यस-मंगनी, सिरखडिया, महालठी, लोही, चकरहट, कर्नमान तनकीसमेत।। हरिनाथापत्यव मखनाहा, कत्र्जोली।। चण्डेिश्व रापत्य। हरिवंश सुत रत्नाकरायपत्यि-बथैया ।। चक्रेश्वंर-कुरमा।। बाटू सन्तहति-चक्रहद, सिडली बासी।। विरपुर पनिचोम-रातू सन्तथति-सुन्दररवाल।। हारू सन्तसति करियन।। वास्तु् सन्त ति-मिट्टी।। महेश्वारापत्यय-देशुआल।। दिनकर मधुकरापत्यस-जरहरिया ।। रामेश्वारसन्त्ति चन्द्र।करापत्‍य-अलदाश।। विर सन्‍‍तति केशवापत्यस-भरौर, शहजादपुर, वलिया समेत।। वासुदेव सन्तदति ददरी।। सोनेसन्ताति-ब्रहमौलि।। धराई सन्‍‍तति-अमरावती-रात सन्तवति-करीहया, उसरौली आदित्यनडीह।। हरिश्वलरापत्यि-डीहा।। सोमेश्व र-बधांतडीह।। रधु: रामपुर डीटा रवि गोपाल-तरौनी।। हरिशर्म्मा पत्यि-महुआ।। बाटनापत्य।-तरौनी, बैगनी।। रूचिशर्म्मा -जगन्ना।थ, भरिरभ।। शुचिनाथापत्य।-ततैल ।। शशिधर-ब्रह्मपुर निहरा, भवनाथापत्या पुरसौली।। देवादित्यािपत्यश-पुरूषौली।। ऐते पनिचोभ ग्राम:।। अथ कुजौली ग्राम:-गोपाल सन्त।ति-हरिश यशोधर-बेहटा।। सुपन, नाँथू पौथू लक्ष्मीीकर-भरवरौली।। जीवे, जोर-मलंगिया।। मेधाकर-वनकुजौली।। रातू सिम्मुपनाम कन्धँराइन।। सुरपति।। वड़सामा गणपति-दिगउन्ध ।। लक्ष्मीशपति-महिन्द्र वाड़।। चण्डेथश्व।रहरि-दिगउन्द साने-लोड़ाम, महोखरि।। विष्णु कर-परसौनी।। रूपन-कन्धिरानि।। सोम-लोआम।। राजूसन्त्ति सुधाकर-सरावय।। लक्ष्मीौकर सुत प्रज्ञाकर अमृतकर-वेजौली। देवादित्य्-दिखौडि।। चन्द्र।करापत्या-खयरा।। प्रितिकर-बेलहवाड़।। वेदग्डी।ह कुजौली।। विरेश्वयर-रूदनिग्राम।। भव बैकक, मल्द‍डीहा।। परान्ति सन्त ति-नेत्राम।। ऐते कुजौली।।

(14) ''14''
अथ गोत्र पत्र्जी लिखयते।।:-शाण्डिल्येर दिर्धोष: सरिसब, महुआ, पर्वपल्लीच (पबौली) खण्डोबला, गंगोली, यमुगाम, करियन, मोहरि, सझुआल, भंडार:।। पण्डो(ली जजिवाल, दहिमत, तिलई, माहव. सिम्मुसनाम सिहांश्रम, ससारव: (सोदरपुर) स्तनलित कड़रिया, अल्लातरि, होईया, समेत तल्हुनपुर, परिसरा, परसंडा, वीरनाम, उत्तमपु कोदरिया, धतिमन, बरेबा मधवाल, गंगोरश्रय, भटौरा, बुधौरा ब्रह्मपुरा कोइयार, केरहिवार, गंगुआलश्चा, धोसियाम, छतौनी, मिगुआल ननौती, तपनपुरश्रवा।। इति शाणि अथ वत्सा गोत्र:-पल्लील (पाली) हरिअम्बो, तिसुरी, राउढ़ टंकबाल धुसौत, जजुआल, पहद्दी जल्लनकी (जालय) मन्दपवाल, कोइयार, केरहिवार, ननौर, उढ़ार प्रथि करमाहाबुधवाल, भड़ार लाही, सोइनि सकौना, फनन्द ह, मोहरी, बढ़वाल तिसउँत वरूआली पण्डो़लि, बहेरादी, बरैवा, भण्डा रिसम, बभनियाम, उचित, तपनपुरा, बिढुका नरवाल, चित्रपल्लीप, जरहरिया, रतवाल, ब्रह्मपुरा सरौनी।। एते वत्‍स गोत्रा।। अथ काशयप गाम दानशौर्य्य प्रतापैश्र्च प्रसिद्धा यत्र पार्थिवा: ओइनिसा सर्वत: श्रेष्ठाौ स्वशस्वि धर्म प्रवर्तिका:।। ओइनि, खौआला संकराढ़ी, जगति, दरिहरा, माण्डयर बलियास, पचाउट, कटाई, सतलखा पण्डुओआ, मानिछा मेरन्दी् मडुआल: सकल पकलिया बुधवाल, पिमूया मौरि जनक मूलहरी महा काशयमे छादनश्च्, थरिया, दोस्तील, मरेहा, कुसुमालंच, नरवाल, नगुरदहश्रप ।। एते काश्य्प गोत्रा:।।


(15) अथ पराशरं गोत्र:-नरउन सुरगन सकुरी सुइरी पिहवाल, नदाम महेशरि सकरहोनश्र्च सोइनि तिलै करेवाचापि।। एतेपराशरगोत्र अथ कात्याुयन गोत्र: कुजौली, ननोत, जल्लशकी, वतिगामश्र्च।। एते कात्यातयन गोत्रा:।। अथ सावर्ण गोत्र: सोन्द पुर, पनिचोभ करेवा नन्दोमर मेरन्दीा।। अथ अलाम्वु्काक्ष गोत्र: वक्ष्याौम्प्र लाम्बु काक्ष कटाई, ब्रह्मपुरा चापि। ।। अथ कौशिक गोत्रे-निखूति अथ कृष्णा्त्रयगोत्र: लोहना बुसवन सान्द्र पोदोनी चo।। अथ गौतम गोत्र:-ब्रह्मपुरा उत्तिमपुर कोइयारं चापि गौतमो।। अथ भारद्वाल गोत्र: एकहरा बेलउँच (विल्वदपंचक) देयामश्रापि कलिगाम भूतहरी गोढ़ार गोधोलिचो।। एते भारद्वाज गोत्रा अथ मोद्त्रल्यर गोत्र: मौदगल्यैम एतवालो मालिछस्ताथा दीर्घोषोपि काप्य जल्लीाकी तत्र वर्त्तते।। एते मोद्गल्थो गोत्रा।। अथ वशिष्ठ‍ गोत्र: कौशिल्येघ पुनश्चर कोथुआ विष्णु वृद्धि वाल।। एते वशिष्ठो गोत्रा:।। अथ कौण्डिल्य गोत्र: एकहटयूविशल्युे पाउन स्पीथ गोत्राश्र्च।। एते कौण्डिल्योगोत्र।। अथ परसातंडी गोत्र-केटाई।।


16 ''ऐ''
17
विशद कुसुम तुष्टाऐ पुण्डयरी कोप विष्टाो धवल वसन वेषा मालतीवद्ध केशा।। शशिधर कर वर्णा शुभ्रजातुङत्रवस्था‍ जयतिजीतसमस्ताक भारती वेणु हस्ताव।। सरस्वकती महामायै विद्याकमल लोचिनी। विश्वारूप विशालाक्षि विद्यान्दे हि परमेश्व‍री।। एकदन्तव महावु‍द्धिः सर्वाजोगणनायक: सर्वसिद्धि करादेवों गौरीपुत्र विनायक गंगोलीसैबीजीगंगाधर: ए सुतो वीर (05/04) नारायणों। तत्र नारायणसुत: (181/02) शूलपाणि। ए सुतो हाले शॉंईकौ।। थरिया सॅकान्ह दौ।। खण्डतबला ग्रामोपार्यक:।। साइँक: शकर्षणा परनामा ए सुता भद्रेश्वकर दामोदर (05/06) बैकुण्ठ/ नीलकंठ श्रीकंठ ध्याननकंठा ।। तत्र (09/0/) दामोदर एकमावासी बैकुण्ठव सन्तडति पाठक वासी।। नीलकंठ संतति संसारगुरदी गसी।। श्रीकंठ संतति गुरदी, हरड़ी सरपरब, और वासिन्य :।। श्रीकंठसुता श्या्मकंठ हरिकंठ नित्या‍नन्दा गंगेश्वुर देवानन्द़हरदत्त हरिकेशा: तत्रायो पत्र्चज्येसष्ठा सकराढ़ीसै डालू सुत दौपतौनाखौआलसै गणपति द्दौणा अन्यो‍ पतऔना खौआल सै गणपति दौ।। तत्र गंगेश्वयर सुता हल्लेलश्व्र चक्रेश्वदर पक्षीश्वपरा: सै सुत दौ सै द्दौणा हल्लेरश्व रो गुरदीवासी।। चक्रेश्व रौ हड़री वासी।। ए सुतो पद्मनाम:।। डीहभण्डाारिसम सै शौरि दौ।। तत्र पद्मनाम सुतो पुरूषोत्तम: गढ़बेउँचसैअभिनन्दह दौ।।

18
पुरूषोत्तम सुतो ज्ञानपति: माउँबेहट सै हरिकर सुत बाटू दो।। ज्ञानपति सुतो उँमापति सुरपति एकमा बलियास सै आङनिसुत बाढ़ दौ।। एकमा वलियाससैबीजी धरणीधर। ए सुता पद्मनाम श्री निधि श्री नाथाः।। (15/04) पदमनाम सुतो शुक्लु हरिवंश (08/07) हरि शर्म्माणौ बरेबा सै पुरूषोत्तम दौ शुकलहरिवंश सुतो आङनिजगन्नाुथौ बाढ़ अपलयसै वर्द्धमान दौ।। आङनि जगन्नासथौ बाढ़ अपलयसै वर्द्धमान दौ।। आङनि सुतो बाढ़ूक: महुआसै जगन्ना।थ दौ।। बाढ़ सुता बरूआलीसै देहरि दौ वरूआली मराढ़सै बीजी दिवाकर: ए सुतो बाछ श्रीहर्ष:।। श्री हर्ष सन्त ति मराढ़वासी बाछ सन्‍‍तति बरूआली वासी।। बाछ सुतो।। ‘'आवस्थिक’’ चन्द्रनकर रत्नाकर (121/05) मधुकर साधुकर विरेश्व0र धीरेश्वार गिरीश्वजरा: धनौजसै जनार्दन दौ।। साधुकर सुतो धाम: पनिहारी दरिहरा सै गंगेश्व र दौ गंगेश्वजर दौ।। अपरौ देहरि: पनिचोभसै विध्नेकश्वछर दौ।। देहरि सुता दरिहरा सै गंगेश्वगर दौ।। ठ. सुरपति सुता दूबे ला (27) (34/08) महिपतिय: मंगरौनी माण्डगरसै पीताम्बौर सुत दामू दौ माण्डररसैवीजी त्रिनयनभट्ट: ए सुतो आदिभट्ट: ए सुतो उदयभट्ट: ए सुतो विजयभट्ट ए सुतो सुलोचनभट (सुनयनभट्ट) ए सुतो भट्ट ए सुतो धर्मजटीमिश्र ए सुतो धाराजटी मिश्र ए सुतोब्रह्मजरी मिश्र एसुतो त्रिपुरजटी मिश्र ए सुत विघुजयी मिश्र ए सुतो अजयसिंह: ए सुतो विजयसिंह: ए सुतो ए सुतो आदिवराह: ए सुतो महोवराह: ए सुतो दुर्योधन सिंह: ए सुतो सोढ़र जयसिंतर्काचार्यास्त्रु महास्त्र विद्या पारङ्त्रत महामहो पाध्या य: नरसिंह:।।




२.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
मैथिलीक मानक लेखन-शैली

1. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली आऽ 2.मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली


1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली

मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन

१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना-
अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।)
पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।)
खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।)
सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।)
खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।)
उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओलोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि।
नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोकबेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोटसन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽकऽ पवर्गधरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽकऽ ज्ञधरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।

२.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आनठाम खालि ढ लिखल जएबाक चाही। जेना-
ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि।
ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि।
उपर्युक्त शब्दसभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।

३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहिसभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।

४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएवला शब्दसभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, याबत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।

५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि।
प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि।
नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि।
सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्दसभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारूसहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि।
ए आ “य”क प्रयोगक प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।

६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।

७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।

८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि:
(क)क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमेसँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक।
अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक।
पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक।
(ख)पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह।
अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह।
(ग)स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि।
अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल।
(घ)वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि।
अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि।
(ङ)क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक।
अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ।
(च)क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि।
अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।

९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटिकऽ दोसरठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु(माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्दसभमे ई नियम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।

१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्दसभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषासम्बन्धी नियमअनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरणसम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्षसभकेँ समेटिकऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनिकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽवला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषीपर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़िरहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषतासभ कुण्ठित नहि होइक, ताहूदिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। हमसभ हुनक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ चलबाक प्रयास कएलहुँ अछि।
पोथीक वर्णविन्यास कक्षा ९ क पोथीसँ किछु मात्रामे भिन्न अछि। निरन्तर अध्ययन, अनुसन्धान आ विश्लेषणक कारणे ई सुधारात्मक भिन्नता आएल अछि। भविष्यमे आनहु पोथीकेँ परिमार्जित करैत मैथिली पाठ्यपुस्तकक वर्णविन्यासमे पूर्णरूपेण एकरूपता अनबाक हमरासभक प्रयत्न रहत।

कक्षा १० मैथिली लेखन तथा परिमार्जन महेन्द्र मलंगिया/ धीरेन्द्र प्रेमर्षि संयोजन- गणेशप्रसाद भट्टराई
प्रकाशक शिक्षा तथा खेलकूद मन्त्रालय, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र,सानोठिमी, भक्तपुर
सर्वाधिकार पाठ्यक्रम विकास केन्द्र एवं जनक शिक्षा सामग्री केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुर।
पहिल संस्करण २०५८ बैशाख (२००२ ई.)
योगदान: शिवप्रसाद सत्याल, जगन्नाथ अवा, गोरखबहादुर सिंह, गणेशप्रसाद भट्टराई, डा. रामावतार यादव, डा. राजेन्द्र विमल, डा. रामदयाल राकेश, धर्मेन्द्र विह्वल, रूपा धीरू, नीरज कर्ण, रमेश रञ्जन
भाषा सम्पादन- नीरज कर्ण, रूपा झा

2. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन
ठाम
जकर,तकर
तनिकर
अछि

अग्राह्य
अखन,अखनि,एखेन,अखनी
ठिमा,ठिना,ठमा
जेकर, तेकर
तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य)
ऐछ, अहि, ए।

2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय:भ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत:जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।

6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।

9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:-हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।

19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

20. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

21.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६



आब 1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आऽ 2. मैथिली अकादमी, पटनाक मानक शैलीक अध्ययनक उपरान्त निम्न बिन्दु सभपर मनन कए निर्णय करू।

ग्राह्य / अग्राह्य


1.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/ होएबाक
2. आ’/आऽ आ
3. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए
4. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल
5. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
6. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’
7. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करै बला/क’र’ बला
8. बला वला
9. आङ्ल आंग्ल
10. प्रायः प्रायह
11. दुःख दुख
12. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
13. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन
14. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
15. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
16. चलैत/दैत चलति/दैति
17. एखनो अखनो
18. बढ़न्हि बढन्हि
19. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ
20. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ
21. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
22. जे जे’/जेऽ
23. ना-नुकुर ना-नुकर
24. केलन्हि/कएलन्हि/कयलन्हि
25. तखन तँ तखनतँ
26. जा’ रहल/जाय रहल/जाए रहल
27. निकलय/निकलए लागल बहराय/बहराए लागल निकल’/बहरै लागल
28. ओतय/जतय जत’/ओत’/जतए/ओतए
29. की फूड़ल जे कि फूड़ल जे
30. जे जे’/जेऽ
31. कूदि/यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद
32. इहो/ओहो
33. हँसए/हँसय हँस’
34. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/नौ वा दस
35. सासु-ससुर सास-ससुर
36. छह/सात छ/छः/सात
37. की की’/कीऽ(दीर्घीकारान्तमे वर्जित)
38. जबाब जवाब
39. करएताह/करयताह करेताह
40. दलान दिशि दलान दिश
41. गेलाह गएलाह/गयलाह
42. किछु आर किछु और
43. जाइत छल जाति छल/जैत छल
44. पहुँचि/भेटि जाइत छल पहुँच/भेट जाइत छल
45. जबान(युवा)/जवान(फौजी)
46. लय/लए क’/कऽ
47. ल’/लऽ कय/कए
48. एखन/अखने अखन/एखने
49. अहींकेँ अहीँकेँ
50. गहींर गहीँर
51. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
52. जेकाँ जेँकाँ/जकाँ
53. तहिना तेहिना
54. एकर अकर
55. बहिनउ बहनोइ
56. बहिन बहिनि
57. बहिनि-बहिनोइ बहिन-बहनउ
58. नहि/नै
59. करबा’/करबाय/करबाए
60. त’/त ऽ तय/तए 61. भाय भै
62. भाँय
63. यावत जावत
64. माय मै
65. देन्हि/दएन्हि/दयन्हि दन्हि/दैन्हि
66. द’/द ऽ/दए
67. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम)
68. तका’ कए तकाय तकाए
69. पैरे (on foot) पएरे
70. ताहुमे ताहूमे


71. पुत्रीक
72. बजा कय/ कए
73. बननाय
74. कोला
75. दिनुका दिनका
76. ततहिसँ
77. गरबओलन्हि गरबेलन्हि
78. बालु बालू
79. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
80. जे जे’
81. से/ के से’/के’
82. एखुनका अखनुका
83. भुमिहार भूमिहार
84. सुगर सूगर
85. झठहाक झटहाक
86. छूबि
87. करइयो/ओ करैयो
88. पुबारि पुबाइ
89. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि
90. पएरे-पएरे पैरे-पैरे
91. खेलएबाक खेलेबाक
92. खेलाएबाक
93. लगा’
94. होए- हो
95. बुझल बूझल
96. बूझल (संबोधन अर्थमे)
97. यैह यएह
98. तातिल
99. अयनाय- अयनाइ
100. निन्न- निन्द
101. बिनु बिन
102. जाए जाइ
103. जाइ(in different sense)-last word of sentence
104. छत पर आबि जाइ
105. ने
106. खेलाए (play) –खेलाइ
107. शिकाइत- शिकायत
108. ढप- ढ़प
109. पढ़- पढ
110. कनिए/ कनिये कनिञे
111. राकस- राकश
112. होए/ होय होइ
113. अउरदा- औरदा
114. बुझेलन्हि (different meaning- got understand)
115. बुझएलन्हि/ बुझयलन्हि (understood himself)
116. चलि- चल
117. खधाइ- खधाय
118. मोन पाड़लखिन्ह मोन पारलखिन्ह
119. कैक- कएक- कइएक
120. लग ल’ग
121. जरेनाइ
122. जरओनाइ- जरएनाइ/जरयनाइ
123. होइत
124. गड़बेलन्हि/ गड़बओलन्हि
125. चिखैत- (to test)चिखइत
126. करइयो(willing to do) करैयो
127. जेकरा- जकरा
128. तकरा- तेकरा
129. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
130. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/करबेलहुँ
131. हारिक (उच्चारण हाइरक)
132. ओजन वजन
133. आधे भाग/ आध-भागे
134. पिचा’/ पिचाय/पिचाए
135. नञ/ ने
136. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय
137. तखन ने (नञ) कहैत अछि।
138. कतेक गोटे/ कताक गोटे
139. कमाइ- धमाइ कमाई- धमाई
140. लग ल’ग
141. खेलाइ (for playing)
142. छथिन्ह छथिन
143. होइत होइ
144. क्यो कियो
145. केश (hair)
146. केस (court-case)
147. बननाइ/ बननाय/ बननाए
148. जरेनाइ
149. कुरसी कुर्सी
150. चरचा चर्चा
151. कर्म करम
152. डुबाबय/ डुमाबय
153. एखुनका/ अखुनका
154. लय (वाक्यक अतिम शब्द)- ल’
155. कएलक केलक
156. गरमी गर्मी
157. बरदी वर्दी
158. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
159. एनाइ-गेनाइ
160. तेनाने घेरलन्हि
161. नञ
162. डरो ड’रो
163. कतहु- कहीं
164. उमरिगर- उमरगर
165. भरिगर
166. धोल/धोअल धोएल
167. गप/गप्प
168. के के’
169. दरबज्जा/ दरबजा
170. ठाम
171. धरि तक
172. घूरि लौटि
173. थोरबेक
174. बड्ड
175. तोँ/ तूँ
176. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
177. तोँही/तोँहि
178. करबाइए करबाइये
179. एकेटा
180. करितथि करतथि

181. पहुँचि पहुँच
182. राखलन्हि रखलन्हि
183. लगलन्हि लागलन्हि
184. सुनि (उच्चारण सुइन)
185. अछि (उच्चारण अइछ)
186. एलथि गेलथि
187. बितओने बितेने
188. करबओलन्हि/ करेलखिन्ह
189. करएलन्हि
190. आकि कि
191. पहुँचि पहुँच
192. जराय/ जराए जरा’ (आगि लगा)
193. से से’
194. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
195. फेल फैल
196. फइल(spacious) फैल
197. होयतन्हि/ होएतन्हि हेतन्हि
198. हाथ मटिआयब/ हाथ मटियाबय
199. फेका फेंका
200. देखाए देखा’
201. देखाय देखा’
202. सत्तरि सत्तर
203. साहेब साहब
204.गेलैन्ह/ गेलन्हि
205.हेबाक/ होएबाक
206.केलो/ कएलो
207. किछु न किछु/ किछु ने किछु
208.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ
209. एलाक/ अएलाक
210. अः/ अह
211.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन)
212.कनीक/ कनेक
213.सबहक/ सभक
214.मिलाऽ/ मिला
215.कऽ/ क
216.जाऽ/जा
217.आऽ/ आ
218.भऽ/भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक)219.निअम/ नियम
220.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
221.पहिल अक्षर ढ/ बादक/बीचक ढ़
222.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं
223.कहिं/कहीं
224.तँइ/ तइँ
225.नँइ/नइँ/ नञि
226.है/ हइ
227.छञि/ छै/ छैक/छइ
228.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
229.आ (come)/ आऽ(conjunction)
230. आ (conjunction)/ आऽ(come)
231.कुनो/ कोनो

https://www.blogger.com/comment.g?blogID=7905579&postID=513633139662640904


English Translation of Gajendra Thakur's (Gajendra Thakur (b. 1971) is the editor of Maithili ejournal “Videha” that can be viewed athttp://www.videha.co.in/ . His poem, story, novel, research articles, epic – all in Maithili language are lying scattered and is in print in single volume by the title“KurukShetram.” He can be reached at his email: ggajendra@airtelmail.in )Maithili Novel Sahasrabadhani translated into English by Smt. Jyoti Jha Chaudhary

Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor's choice award from www.poetry.comand her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London.



SahasraBarhani:The Comet translated by Jyoti



House was vacant. That was locked. Both brothers along with their mother started towards the village in that night of Shukla Paksha. Bus was stopped at the entrance of the Ganga Bridge. The list of names of dead workers was kept in the corner. Those were people who died while working in the Ganga Bridge Project. Aaruni got off the truck and saw the list. Uranw Jha and many workers, one Jha and rest were tribal adivasi people. Many were dead but Police used to throw the dead bodies into the river at night so only thirty names were listed there.
“People falling from the collapsing pillars, I spread the information to many people but no one took any action. I feel guilty as I couldn’t avail justice to those families.” Once Aaruni had read that part of Nand’s diary. He made his mind to search his father’s diary after returning from the village.
The truck moved forward. The Ganga Bridge was left behind. Ganga Bridge Colony came next, the witness of Aaruni’s childhood- school, home, playground, Ganga bridge godown. The stock was used to be smuggled from here many times. Sometimes those were caught by police. A big truck was caught one day. That truck had many wheels. People gathered there like it would be a fair. Kids were counting number of wheels- 14 or 16.
Aaruni had forgotten everything in race of his own life. Corruption, death of workers, father’s struggle everything was evoked suddenly.
“Everything has come to mind as a memory of father or this is a reminder of my father’s failure. Why did my father choose this name Aaruni for me?”
“Son! What did you say?” asked mother.
“Nothing, I just recalled the past by seeing that colony,” said Aaruni.
“Don’t see this colony.”
The memory of the Ganga Bridge colony had been an awful topic to be discussed while Nand was alive. Would that be continued for Aaruni as well? Aaruni’s mother was worried about that.
There was a long silence after that. The ice was broken when they reached village. The elder brother started crying to see the body of the younger.
“How can a younger brother leave the world before the elder one? You had never bother me for any reason while you were alive then why have you given me reason to cry?” bemoaned the elder brother.
The villagers started gathering. No body had cooked meal after hearing that terrifying news. No body knew who telephoned about that news and who received the news first.
(continued)
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महत्त्वपूर्ण सूचना (१):महत्त्वपूर्ण सूचना: श्रीमान् नचिकेताजीक नाटक "नो एंट्री: मा प्रविश" केर 'विदेह' मे ई-प्रकाशित रूप देखि कए एकर प्रिंट रूपमे प्रकाशनक लेल 'विदेह' केर समक्ष "श्रुति प्रकाशन" केर प्रस्ताव आयल छल। श्री नचिकेता जी एकर प्रिंट रूप करबाक स्वीकृति दए देलन्हि। प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (ISBN NO.978-81-907729-0-7 मूल्य रु.१२५/- यू.एस. डॉलर ४०) आ पेपरबैक (ISBN No.978-81-907729-1-4 मूल्य रु. ७५/- यूएस.डॉलर २५/-) मे श्रुति प्रकाशन, DISTRIBUTORS: AJAI ARTS, 4393/4A, Ist Floor,Ansari Road,DARYAGANJ. Delhi-110002 Ph.011-23288341, 09968170107.e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com
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महत्त्वपूर्ण सूचना:(३) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा' रहल गजेन्द्र ठाकुरक 'सहस्रबाढ़नि'(उपन्यास), 'गल्प-गुच्छ'(कथा संग्रह) , 'भालसरि' (पद्य संग्रह), 'बालानां कृते', 'एकाङ्की संग्रह', 'महाभारत' 'बुद्ध चरित' (महाकाव्य)आ 'यात्रा वृत्तांत' विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। - कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर

महत्त्वपूर्ण सूचना (४): "विदेह" केर २५म अंक १ जनवरी २००९, ई-प्रकाशित तँ होएबे करत, संगमे एकर प्रिंट संस्करण सेहो निकलत जाहिमे पुरान २४ अंकक चुनल रचना सम्मिलित कएल जाएत।

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दकचल देबाल (कथा-संग्रह) : बलराम प्रकाशन वर्ष2000 मूल्य रु. 40.00
सम्बन्ध (कथा-संग्रह) : मानेश्वर मनुज प्रकाशन वर्ष2007 मूल्य रु. 165.00
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अंतिका, मैथिली त्रैमासिक, सम्पादक- अनलकांत
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शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.100.00
नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष2007 मूल्य रु. 100.00
आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 90.00
कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.100.00
भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2007मूल्य रु. 90.00

शीघ्र प्रकाश्य

आलोचना

इतिहास : संयोग और सार्थकता : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर

हिंदी कहानी : रचना और परिस्थिति : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर

साधारण की प्रतिज्ञा : अंधेरे से साक्षात्कार : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर

बादल सरकार : जीवन और रंगमंच : अशोक भौमिक

बालकृष्ण भट्ïट और आधुनिक हिंदी आलोचना का आरंभ : अभिषेक रौशन

सामाजिक चिंतन

किसान और किसानी : अनिल चमडिय़ा

शिक्षक की डायरी : योगेन्द्र

उपन्यास

माइक्रोस्कोप : राजेन्द्र कुमार कनौजिया
पृथ्वीपुत्र : ललित अनुवाद : महाप्रकाश
मोड़ पर : धूमकेतु अनुवाद : स्वर्णा
मोलारूज़ : पियैर ला मूर अनुवाद : सुनीता जैन

कहानी-संग्रह

धूँधली यादें और सिसकते ज़ख्म : निसार अहमद
जगधर की प्रेम कथा : हरिओम

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१.पंचदेवोपासना-भूमि मिथिला- मौन
२.मैथिली भाषा-साहित्य (२०म शताब्दी)- प्रेमशंकर सिंह
३.गुंजन जीक राधा (गद्य-पद्य-ब्रजबुली मिश्रित)- गंगेश गुंजन
४.बनैत-बिगड़ैत (कथा-गल्प संग्रह)-सुभाषचन्द्र यादव
५.कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर
६.विलम्बित कइक युगमे निबद्ध (पद्य-संग्रह)- पंकज पराशर
७.हम पुछैत छी (पद्य-संग्रह)- विनीत उत्पल
८. नो एण्ट्री: मा प्रविश- डॉ. उदय नारायण सिंह “नचिकेता”
९/१०/११ 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर१.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-1 ३.पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर , नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा ।
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संदेश
१.श्री प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।
२.श्री डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह|
३.श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।
४.श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बाधाई आ शुभकामना स्वीकार करू।
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७.श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
८.श्री विजय ठाकुर, मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।
९. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका ’विदेह’ क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।
१०.श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका ’विदेह’ केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।
११.डॉ. श्री भीमनाथ झा- ’विदेह’ इन्टरनेट पर अछि तेँ ’विदेह’ नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।
१२.श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमर, जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत से विश्वास करी।
१३. श्री राजनन्दन लालदास- ’विदेह’ ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक एहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रि‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।
१४. डॉ. श्री प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भ' गेल।
विदेह

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(c) 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ' संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु

'विदेह' ३२ म अंक १५ अप्रैल २००९ (वर्ष २ मास १६ अंक ३२)- part III

विवेकानंद झा
सिंगरहार

कविता कविते हॊइत छैक
परीब हॊ की पूर्णिमा
इजॊरिया इजॊरिए हॊइत छैक
पांति दू हॊ की दस
कविता कविते हॊइत छैक
जखन
हम कहैत छी कविता
तऽ ओकर मतलब
हमर-तॊहर किछु नहि हॊइत छैक
बस हॊइत छैक एके टा मतलब
बस कविता
ओहि काल मऽन मे जे अबैत छैक
से अपन पूर्ण वैभव के संग
कविता हॊइत छैक
जेना एखन मऽन में
अबैत अछि
किछु पांति
'कहियॊ रहल हेतै
गुरु शिष्य परंपरा
छौ ताग तीन प्रवर
मुदा आब तऽ...'


ढहल ढनमनायल गाम
हमरा दलानक सॊझां
साफ पानिक छॊट सन
पॊखरि मे
हेलैत छॊट-छॊट माछ
अहां
आब नहि देख सकब
आ नहि देख सकब
दूर तड्डिहा बान्ह धरि
लगातार पसरल खेत मे
लहलहाइत धान

आब ओ नहि रहल पुरनका गाम

खलिहान मे जे रमा
बिहुंसल छली
ओ पछिला दशकक
गप्प थिक
आब केओ
नहि दौड़ैत छै
खरिहान मे
केओ नहि हंसि पड़ैत छै
हमरा गाम मे

ओना
बिसंभर कका
भेट जयताह अबस्से
टुटलाहा चौकी पर
खॊंखी करैत
एक सॊह मे

भेट जायत अबस्से
बाहर जंग लागि कऽ
सड़ैत मिशीन सभ

दुर्लभ नहि छै
बरऽद बिहीन खूंटा आ लादि
चार खसल बरऽदक घर
मैल आ पुरान नूआ मे
हमर नवकी भौजी
असक्क काकी
आ खॊंताक छिरिआयल
समस्त खढ़

एम्हर विगत किछु बरख संऽ
केकर शापक छाह मे
हुकहुक कऽ रहल अछि
अप्पन गाम
आकि मरि गेल अछि अप्पन गाम
नहि बूझल
नहि बूझल इहॊ जे
बुढ़बा-बुढ़िया कएं भॊजन रान्हि कऽ
खुआवैत जवान नवकनियां
सुहासिनी
कखन धरि
बाट जॊहैत रहतीह
अप्पन-अप्पन मदनक
कखन धरि ?...!
२५ नवंबर ९४

अहांक मौलायल अस्तित्व
अपन
मज्जागत संस्कारक
मनहूस छांह मे
मौलायल
अहांक अस्तित्व
देखलहुं
अहिंक देहरी पर
आइ
बुझलहुं अहांकें
कमल
फुसिए बुझने रही
ओहि दिन
अहांमे
कमलक पांखुरि सन
शाश्वत प्रतीक
हॊएबाक दम
नहि अछि

०७ दिसंबर ९४

अरुणिमा आ इजॊरिया
आइ काल्हि
सदिखन
बॊझिल पलक पर
आकि अनिद्रा संऽ
फाटल आंखि मे

एकटा
छिटकल चानक इजॊत
एकटा धड़कैत व्याकुलता
अपना कॊर मे
लऽ लैत अछि
कखन

हमरा
नहि बूझल

आ फेर
प्रांगण मे प्रातः
किलॊल
करैत कऽल
मॊन पाड़ैछ
जे मुक्त हॊएब छौ
तॊरा
मुदा तखनहुं
टटका-टटकी आंखि मे
सांस लैत
अरुणिमा
कऽ दैछ तैयार
हमरा
पुनः एकटा मनॊहर इजॊरिया
लेल

खत्म करऽ चाहैत छी जिनगी
प्रिये !
हम मऽरऽ नहि चाहैत छी
सबहिक जॊकां
जीवऽ सेहॊ नहि
चाहैत छी हम
अहां बिनु
हम चाहैत छी
गाम में अपन दलान पर
हाथ मे ली गीता
आ आद्यांत खत्म करी

फेर उठाबी रामचरितमानस
महाभारत आ वाल्मीकि केर
गूंथल रामायण
खत्म करी
हम
खत्म करऽ चाहैत छी रामायणा आ महाभारत
लगातार
हम
खत्म करऽ चाहैत छी अपन जिनगी

हम जीवऽ नहि चाहैत छी
अहां बिनु

१८ नवंबर ९५


प्रिये !
प्रिये !
काल्हि हमर एकटा आर पूजा व्यर्थ भेल
अंतिम पुरइन हाथ संऽ
ससरि गेल
खसि पड़ल
वेगवती धार मे डूमल

हमर मॊन
अनचॊकहिं कानि उठल
व्यर्थहिं
अहांकें देखल
किछु बुन्न नॊर ढबकल

आ एकटा आर पूजा व्यर्थ भेल
अंतिम आश्वासन
आंखिक सॊझां बिलटि गेल
भेल प्रकंपित
हिल गेल
उदास मॊन डूमल

पुनः हमर प्रशस्ति
हमर याचना
खंडित भेल
हमर संपूर्ण अर्चना
एक सङ
काल-कवलित
हमरा समक्ष
हमर मनॊहर स्वप्न
भाङल

बेकल मॊन
पुनः कानि उठल
अवश स्तंभित नेत्र
पथरायल
नहि निकसल एक बुन्न नॊर
जड़ित वदन पर
झिलमिला गेल
एकटा पनिसॊह हंसी
अहां देखल

प्रिये !
काल्हि हमर प्रश्नक जे उत्तर अहां देल
ऒ हमर दरकार
नहि छल
अछि खूब अहांकें बूझल
हमरा अहांक कॊन
उत्तर चाही जे जी सकी हम
मुदा तखनहुं
एकटा आस तऽ बांचल
अछि कखनहुं
कि जायत अहांक मॊन बदलि
कि अहांकें हमही चाही

प्रिये !
ऐना कत्तहु हॊइत छै
जेना
प्रेम मे विकल्प...
दुनिया अपन चालि
खराप कऽ लिए
तें कि प्रेम
मुदा ई की भऽ गेल अछि
अनचॊकहिं
जे प्रेम मे
पूजा प्रारंभ कऽ देने
अछि मॊन हमर
अहांक चरण मंगैत अछि
आब अहां देवी
भऽ गेल छी
हमर

प्रिये !
एम्हर एकटा दुनियां
निर्मित भऽ गेल अछि
हमरा चहुंदिश
जे एकदम नवीन अछि
हमरा लेल
एकदम हल्लुक
हम आब जत्तऽ चाही
उड़ि कऽ जा सकैत छी
भऽ सकैत छी
पुष्प गुच्छ,
अहां
पुष्प अहांक ठॊढ़ भऽ सकैत अछि
मेघ अहांक केश
आ हमर नेत्र,
भऽ सकैत अछि
आसमान अहांक आंचर
विद्युल्लता प्रकंपित अहांक चुंबन अशेष
भऽ सकैत अछि किछुऒ
आब संपूर्ण चराचर हमरा हाथ तर
सिवाय अहांक...

१० अप्रैल १९९६

सिंगरहार
हम
अहांक श्वेत नूआ मे ललका कॊर जॊकां
हम अहांक स्मृति मे जाड़क भॊर जॊकां
हमही अहांक फूलडाली से उझिक कऽ खसल कनेर
हमही कॊशीक नव-जल भसिआयल कांट कुश अनेर
हमही अहांक कॊबर खसल लहठीक टूक छी
हमही अहांक हृदय-मर्यादल वासनाक हूक छी

हमही तऽ छी
अहांक पॊथी मे सहेज राखल फूल
हमही तऽ छी
अहांक एड़ी संऽ रगड़ि निकसल धूल

देखैत अहांक सौंदर्य मे ब्रह्माक विवेक हम
अहींक वाणी-वीणा मे मधुर गीतक टेक हम
हमही अहांक गौरी लग गाड़ल धूपकाठी छी

पॊखरि नहायल आयल रूपसी कन्या अहां
लसकि हृदय फांक भेल मनॊलॊकक कन्या अहां
केश संऽ झड़ैत बिंदु हम निर्विकार छी

मुंहे पर ठाढ़ हम गर्भ गृह पैसैत अहां
कॊनॊ विहंगम दृश्य सन मऽन मे बसैत अहां
बाबा पर ढेराइत हम अछिंजलक टघार छी

ग्रीष्मक दुपहरिया मे ठमकल बसात जॊकां
आततायी रौदक प्रचंडतम प्रमाद जॊकां
हुलसि आयल संजीवनि सिहकल बयार पर
मूनल विभॊर नैन भॊगक आधार छी

१९९६ मे कहियॊ०००


किएक प्रिये ?
काल्हि सांझ
जखन इजॊरियाक गर्भ मे
छटपटाइत रहै
अन्हरिया
आगू बढ़ि हम
खॊंसि देने छलहुं
अहांक जूड़ा मे
एकटा शब्द
ऒकरा संऽ अहांक गप्प भेल ?

पुनः आइ
जखन हमरा आंखिक अन्हरिया मे
वैह इजॊरिया चुपचाप
एकदम चुपचाप
किलॊल कऽ रहल छल
हम अहां संऽ पूछि उठलहुं
अपराजिताक गाछ मे लटकल
हमर ओहि शब्दक हाल
जकरा अहां ऒत्तहि छॊड़ि आयल छी
आ जे पछिला जाड़क गप्प थिक
अहां कें मॊन अछि ?
ऒ अन्हार
जखन हाथ हाथ संऽ अदेख
अजान छल
हमर प्राण
अपन केहन तऽ आंखि संऽ
एक दॊसरा कें तकैत-तकैत
कॊसीक दू छॊर भऽ गेल

प्रिये !
अन्यथा जंऽ नहि ली
तऽ पूछि एकटा गप्प ?
ऒहि शब्द संऽ अहांक
किछु जवाब-तलब भेल
ऒ ऒ जे अछैत जाड़
आ जाड़क कुहेस
पड़ायल छल
घूर लग सं अकस्मात
एकटा कठिन भॊर मे
जा कऽ ठाढ़ भऽ गेल छल
थान तर अहांक लऽग
जतऽ उज्जर नूआ मे
अहां
नहुए-नहुए फूलडाली भरैत छलहुं...?

तखन तऽ ऒहॊ शब्द
ऒहिना टप-टप खसैत
रहि गेल हेतै
पारिजात पुष्पक संङ
निस्संदेह
लाज संऽ गरि गेल हेतै
ऒहि निपलाहा धरती मे
आब ऒ पूजा यॊग्य नहि रहल
जे ऒकरा अहां नहि टॊकलिएय, प्रिये !

आ ऒकर की भेलै प्रिये !
ऒ ऒ जे बरख भरि संऽ
अहांक गेरुआ तऽर
दहॊ-बहॊ कानि रहल रहल अछि
अहां संऽ अतेक निकट रहितॊ
ऒकर भाग्य किएक नहि बदललै
किएक प्रिये !
एना किएक हॊइत छैक
हमरा शब्दहुं सङ
जेना हमरा सङत भेलै ...!

११ अप्रैल ९६
एना हॊइत रहतै
एक मुट्ठी अबीर
हाथ मे लऽ
एकटा निरर्थक आवाज निकालैत
हम हवा कें लाल कऽ दैत छिएय
अबीर उड़ै छै हवा मे
‌क्षण भरि
हवा हॊइत छै लाल
हम देखैत छिएय

हम देखैत छिएय
आ प्रयास करैत छिएय
ओहि जिनगी के लाल करबाक
जे जिनगी मुट्ठी मे
नहि अबैत छै

आ जतऽ इ नेनपनि हॊइत छै
ओत्तहि हॊइत छै
हम प्रेम
आ जतऽ हॊइत छै
हमर प्रेम
ओत्तहि हमर मूर्खता मे
एकटा सतरंगी परदा हॊइत छै
किछु स्मृति, किछु फूल, किछु कांट
आ ओहि सब संऽ
अपन अंग-वस्त्र बचबैत
अबैत
अहां हॊइत छिएय

पुनः
लहलहाइत खेतक मध्य
हमर स्मृति मे
कलकल बहैत एकटा धार
हॊइत छैक

एम्हर बहुत दिन संऽ
ओतऽ मृत्यु बसैत छैक
ई कतेक नीक छै
जे जतऽ नहि हॊइत छी अहां
ओतऽ भॊरक कुहेस जकां
खसैत छै ठरल मृत्यु
आस्ते-आस्ते
लॊक कें ई बूझक चाही
बूझल रहक चाही

जे एक बेर - दू बेर
हम खूब जॊर संऽ चिचिआयब
अबस्से
जे जा धरि सतरंगी परदाक पाछू संऽ
हमर मूर्खता मे
अहां अबैत रहब
हॊइत रहत अहिना
अगनित जन्म धरि
जे अहां रहब, हम रहब
लहलहाइत खेत सबहिक बीच संऽ
बहैत एकटा धार रहत
समयिक वज्रपात रहत
आ हम चिचिआयब
कि जाधरि
सतरंगी परदाक पाछू सऽ
अहां अबैत रहब
स्वप्ने मे बरू
एना हॊइत रहतै

१७ जनवरी ९७


बहुत दिनक बाद
आइ प्रातः
इजॊतक यात्रा संऽ पूर्व
हमर पदचाप सुनि
कनेके काल पहिने
सूतल
हमर मॊहल्लाक खरंजा
अपन गाढ़ निन्न संऽ
जागि उठलै
बहुत दिनक बाद
हमर आंखि मे
अरुणिमा
पहिने उलहन दैत

बाद मे
मुसकिआएत

बहुत दिनक बाद
मऽन पड़ल एकटा पांति
'अलस पंकज दृग
अरुणमुख
तरुण अनुरागी
प्रिय यामिनी जागी'
१२ अक्टूबर ९४
लालबाग, दरभंगा

हे सिंगरहार
कतेकॊ बेर सुनलहुं
अहांक मुंह संऽ‍
आ पढलहुं
कतेकॊ बेर
अहांक आंखि मे
घुमरैत
एकटा पांति
हम
हे सिंगरहारक फूल !

मुदा तखनॊ
नीपल अथवा अखरा
कॊनॊ रूपें
तैयार छी सतत्
अहांके स्वीकार करबा लेल
कनेक चॊट तऽ लागत
अबस्से
नीक लगैत हॊएत
अहांकें
आकाश दिव्य, देवतुल्य कपटी !
बुझल अछि
चाहियॊ कऽ शून्याकाश नहि भेट सकत
विश्राम दऽ सकब
हमहि
चाहे ओ जड़ता तॊड़ि
जड़ते मे आयब
किएक ने हॊए

कनेक चॊट तऽ पौरुषक
लगबे करत
देबक माथ चढ़ऽ लेल
चाहे फेर ओतऽ से मौला कऽ
बहि आबी
हमरे लऽग
किएक नहि ?
अंतिम निदान तऽ
धरतीए थिक ।

२९ अक्टूबर ९४

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बालानां कृते-
1.देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स); आ 2. मध्य-प्रदेश यात्रा आ देवीजी- ज्योति झा चौधरी

1.देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स)

देवांशु वत्स, जन्म- तुलापट्टी, सुपौल। मास कम्युनिकेशनमे एम.ए., हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्र्रिकामे कथा, लघुकथा, विज्ञान-कथा, चित्र-कथा, कार्टून, चित्र-प्रहेलिका इत्यादिक प्रकाशन।
विशेष: गुजरात राज्य शाला पाठ्य-पुस्तक मंडल द्वारा आठम कक्षाक लेल विज्ञान कथा “जंग” प्रकाशित (2004 ई.)

नताशा: मैथिलीक पहिल-चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स)
नीचाँक दुनू कार्टूनकेँ क्लिक करू आ पढ़ू)
नताशा पहिल

नताशा दू

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2.
मध्य प्रदेश यात्रा- ज्योति
आठम दिन ः
30 दिसम्बर 1991 ़ साेमदिन ः
हमसब आहि भाेरे 8ः40मे मचान कम्पलेक्स9 सऽ विदा लेलहुॅं।पुनः बसके लम्बा सफर जंगल आऽ पहाड़ीके बीच सऽ सनसनाइत बस।एक लम्बा सफर ऌ बीच र् बीच मंे हल्का फुल्का झपकी फेर गप सप अहि सब मे समय बीतैत गेल आर करीब साढ़े तीन बजे दुपहरियामे जबलपुर स्टेशन पहुॅंचलहुॅं।एक स डेढ़ घण्टा प््राीतीक्षा केलाक बाद ट्रेन सऽ पिपरिया दिस विदा भेलहुॅं।हमरा सबके पचमढ़ी जायके छल।फेर सऽ गप सप के कार्यक्रम प््रायारम्भ भेल। अपन संगी साथी सबहक पारिवारिक बात सब सेहाे बुझऽ लागल रही।सब अपन अपन परिवारक किस्सा सब सुनाबैत रहल।तकर बाद अगर काेनाे बात हाेइ तऽ एक दाेसर सऽ के पारिवारिक घटना माेन पारि।जे आेकर भाइर् बहिन अहिना कहै छै तऽ आेकर घरमे सेहाे आेहिना हाेइत छै। बहुत तरहक बात सीख भेटै छल अहि बीच मे । जॅं काेनाे गलत आदत हुए तऽ सब टाेकि र् टाेकि कऽ सुधारि दैत छल। अहिनामे एकगाेटाक नख चबाबक आदत हमसब सुधारि देलियै। जे बेसी लजकाेटर हाेइर् आ गपशप में नहिं शामिल हुए तकरा सब बड तंग करै। श्र्कय लड़काक नामे पड़ि गेल मृगनयनी कियैकि आे बस ट्रेन आदि पर चढ़िते देरी सूति जाइ छल आ उतरैकाल आेकर आॅंखि आेंघायल लागैत छल।जे बेसी मुॅंह खाेलि कऽ जाेर सऽ आवाज कऽ खाएत छल तकरा सब बकरी कहै छल।
हमसब 7 – 8 घण्टाक यात्राक बाद पिपरिया स्टेशन रातिक 12ः30मे पहुॅंचलहुॅं।अतेक ठंढ़ामे रातिमे सफर केनाइर् मुश्किल छल तैं स्टेशन के दू टा वेटिंग हाॅलमे अपन डेरा जमेलहुॅं। आइर् अपन बेडिंग अननाइर् सार्थक बुझाएत छल।नहितऽ अकर पूरा उपयाेग ट्रेनाे मे नहिं हाेएत छल आ बेकारमे लादिकऽ घुमैत रही।
देवीजी : ज्योति


देवीजी ः प््राछशासक दिवसमे पुरस्कार वितरण
आहि विद्यालयमे वार्षिक पुरस्कार समाराेह छल। वर्ष भरिक विभिन्न प््राहतियाेगिता तथा पढ़ाइर्मे उच्च स्थान आनैवला बच्चा सबके पुरस्कार दैके कार्यक्रम छल। जाहिमे शिक्षा विभागके उच्चाधिकारी सहित क्षेत्रके प््रा शासनके उच्चाधिकारीके मुख्य अतिथिक रूपमे आमंत्रित कैल गेल छल।दिवस सेहाे बड्ड विशेष छल।कारण 22 अप््राशिल के अहि वर्ष प््रारशासक दिवसके रूपमे मनाआेल जा रहल छल।ताहि लेल प््रा शासन विभागक अधिकारी के स्वागत विशेष रूप सऽ कैल गेल छल।अतिथि सेहाे बच्चा सबहक कार्यक्रम सऽ बहुत प््रावभावित छलैथ। बच्चाे सब एडमिनिस्ट्रेटिब जाॅब अर्थात् प््राहशासनि व्यवसायमे प््रा वेश काेना पाबि से जानकारी पाबैके उत्सुचकता देखेलक।सबके पुरस्कार सहर्ष प््रा दान केलाक उपरान्त आे बच्चा सबके मार्गदर्शन करऽ लगला।आे कहलखिन जे बारहवीं पास केलाक बाद प््रा वेश परीक्षा पास कऽ बी बी ए ह्यबैचलर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशनहृ़ के पढ़ाइर् कैल जा सकैत अछि आ तकर बाद एम बी ए ह्य़मास्टर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशनहृ़ अन्यथा स्नातक केलाक बाद सीधे एम बी ए वा विभिन्न विषयमे पी जी डिप्लाहेमा कैल जा सकैत अछि। अहि के अतिरिक्तए स्नातक डिग्री पाैलाक बाद यू पी एस सी वा राज्य स्तरीय प््रा शासनिक पद हेतु विभिन्न प््राएतियाेगिता परीक्षाके तैयारी कैल जा सकैत अछि।
परन्तु़ अहि लेल सब विषयमे नीक भेनाइर् आवश्यक अछि तथा पढ़ाइर् के अतिरिक्त सर्वांगिक विकासक आवश्यकता अछि तैं अखन सब विषयमे खूब समय दियऽ आ सब तरहक प््रावतियाेगिता मे हिस्सा लियऽ आऽ जीतैके प््राऽयास करू।अहि व्यवसायमे सफल हाेइर् लेल निर्णय लेबक हिम्मत तथा नेत्तृत्व क्षमता के अतिरिक्त् सबके संग लऽ कऽ समूह सऽ सामञ्जस्य बनाबैत काज करैके क्षमता हुअ के चाही।तदाेपरान्त़ अतिथि महाेदय विद्यालयके व्यवस्था सऽ खुश भऽ प््रााधानाध्यापक़ देवीजी़ सब शिक्षकगण सहित विद्यालयके प््रााशासनिक स्तर पर कार्यरत सब कर्मचारी के हार्दिक धन्यवाद देलखिन।हुन्कर कहब छलैन जे प््रारशासन के सुचारू रूप सऽ चलाबैमे प््राहत्येाक स्तर के कर्मचारी के याेगदान हाेइत अछि।अहि सऽ विद्यालय के आन कर्मचारी सबहक प््राेाेत्सारहन भेल।
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बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
१.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽ–बिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।

Help Alexa Learn Maithili

  Helping Alexa Learn Maithili:   Cleo Skill:  Amazon has a skill called "Cleo" that allows users to teach Alexa local Indian lang...