भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

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Monday, August 10, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (तेरहम कड़ी )

ओना तs जहिया सs हम सब जमशेदपुर अयलहुँ आ बाबुजी के बुझल भेलैंह जे काका के मोन ख़राब रहैत छैन्ह बराबरि राँची जायत छलाह आ काका के डॉक्टर लग अपनहि लs कs जायत छलाह, मुदा एहि बेरक गप्प किछु आओर छैक। पिछला बेर डॉक्टर एन.के. झा एक मास बाद आबय लेल कहने छलथिन आ कहने छलथिन जओं एक मास मे ओ दवाई काज नहि केलकैन्ह तs काका के जमशेदपुर वा बम्बई लs जाय परतैन्ह। काका के कोन बिमारी छैन्ह से राँची के डॉक्टर के पता नहि चलैत छलैक। एहि बेर बाबुजी सोचि के जायत छलाह जे जओं डॉक्टर साहेब कहलथि तs काका के जमशेदपुर लs अनताह। जमशेदपुर मे बाबुजी के एतबहि दिन मे डॉक्टर सब सs जान पहचान भs गेल छलैन्ह आ काका के विषय मे डॉक्टर सब सs गप्प सेहो कयने रहथिन।

बाबुजी राँची सs लौट कs अयलाह तs हमर हिम्मत हुनका लग जयबाक नहि होयत छल। बाबुजी सs की पुछियैन्ह, की कहताह इ सोचि रहल छलहुँ कि माँ अयलीह आ अपनहि कहलीह जे काका सब दू तीन दिन बाद आबि रहल छथि, आब एहि ठाम हुनकर इलाज होयतैन्ह। राँची मे डॉक्टर सब के नहि बुझा रहल छैक जे हुनका कोन बिमारी छैन्ह। इ सुनतहि हमरा मोन मे तरह तरह के आशंका होमय लागल।

काका, मौसी, मधु, पपू, निक्की आ सोनू सभ गोटे आबि गेलथि। काका के देखि हम हुनका देखितहि रहि गेलहुँ। पहिल दिन जमशेदपुर हमरा सब सs भेंट करय लेल आयल छलथि ताहु सs बेसी कमजोर लागैत छलाह। हमरा किछु नहि फुराइत छलs जे हम की बाजियैन्ह। काका हमर मोनक गप्प अपनहि बुझि गेलाह आ कहलाह "पेट मे बड दर्द होयत अछि आब एहि ठाम भैया लग आबि गेलहुँ आब ठीक भs जायब"।

भोरे बाबुजी काका के लs कs टाटा मेन हॉस्पिटल गेलाह। करीब १२ बजे बाबुजी असगरे अयलाह आ माँ सs कहलथिन जे" जयनंदन के check-up करय के लेल भर्ती कs लेलकैन्ह अछि। बेर बेर अनाइ गेनाइ मे दिक्कत होइतैक ताहि चलते भरती करा देलियैन्ह। सब जाँचक बादे डॉक्टर बतायत जे हुनका की छैन्ह आ कोन दबाई चलतैन्ह"। साँझ मे माँ आ मौसी सेहो बाबुजी के सँग काका सs भेट करय लेल गेलिह। मधु पप्पु सब घर पर हमरा सब सँग छलथि।

काका के एक सप्ताह सs बेसी भs गेल छैन्ह हॉस्पिटल मे मुदा अखैन्ह धरि जाँच चलिए रहल छैन्ह। बिमारी कोन छैन्ह सेहो नहि बुझल छैक। बाबुजी के आजु एक गोटे सs कहैत सुनलियैन्ह जे आब एहि सप्ताह मे सब टा जाँच खतम भs जयतैक, तकर बाद हुनकर इलाज आरम्भ होयतैन्ह।

मौसी सब दिन अपना सँग सोनू के लs जायत छलिह। आय माँ आ मौसी सँग मधु पप्पु सेहो काका सs भेंट करय लेल गेल छथि। हमर मोन सेहो छलs जेबाक मुदा एक संगे बेसी लोग गेनाइ ठीक नहि, हम सोचलहुँ दोसर दिन जायब। सब चलि गेलथि तs मोन से नहि लागति छलs। रहि रहि कs बाहर जायत छलहुँ देखय लेल जे माँ सब अयलीह कि नहि।

माँ सब हॉस्पिटल सs लौट कs अयलीह तs माँ भनसा घर दिस चलि गेलिह, मौसी अपन बच्चा सब मे लागि गेलिह मुदा बाबुजी एकदम उदास बुझेलाह। हम चाय लs कs बाबुजी लग गेलहुँ आ हुनका चाय दs धीरे सs पुछलियैन्ह "काका के मोन केहेन छैन्ह"। किछु समय तक तs बाबुजी किछु नहि बजलाह मुदा फेर कहलाह "मोन ठीक नहि छैन्ह, आब सब रिपोर्ट आबि गेलैक अछि । जयनन्दन के कैंसर छैन्ह, सेहो अन्तिम स्टेज मे। अहाँ के मौसी के नहि बुझल छैन्ह आ नहि हुनका किछु कहबैन्ह । आय सs दवाई सेहो शुरू भs गेल छैक"। बाबुजी के हम किछु जवाब नहि दs सकलियैन्ह आ ओहि ठाम सs चलि गेलहुँ।

माँ सs हम पहिनहि कहि देने रहियैन्ह जे आजु हम काका के देखय लेल अवश्य जायब। हॉस्पिटल पहुँचि काका लग गेलहुँ तs देखि बुझायल जेना काका आओर कमजोर भs गेल छथि। अस्पताल सs अयलाक बाद हमरा किछु नहि फुराइत छल जे की करी। राति मे हमरा किछु नहि फुरायल तs हिनका चिट्ठी लिखय लेल बैसि गेलहुँ आ काका के स्वास्थ्य केर विषय मे सबटा लिखि देलियैन्ह।

आय इहो पहुँचि गेलाह। बाबा के नहि कहल गेल छैन्ह , दादी के किछु आओर कही बजा लेल गेल छैन्ह। काका, काकी, पीसा, पीसी सब तs पहिनहि सs आबि गेल छथि। काका के मोन दिन दिन ख़राब भेल जा रहल छैन्ह इ देखि परिवारक सभ गोटे चिंतित छथि। अस्पताल सs अयलाक बाद मौसी आ दादी मन्दिर गेल छथि। बाबुजी आ बाकी परिवारक सभ गोटे बैसि कs गप्प क रहल छथि। हम बाहर मे बैसल छी कि अचानक बाबुजी के कहैत सुनलियैन्ह "टिस्को (TISCO) के प्रबंध निर्देशक केर पत्नी के सेहो जयनन्दन वाला बिमारी छैन्ह आ ओ अमेरिका सs इलाज करा कs आयल छथि। हुनको अमेरिका के डॉक्टर जवाब दs देने छैन्ह, आब ओहो एहि ठाम अस्पताल मे छथि आ एके डॉक्टर दुनु गोटे के इलाज कs रहल छैन्ह। दवाई सेहो एके परि रहल छैन्ह। आब तs मात्र भगवान पर भरोसा अछि"। इ सुनलाक बाद मोन आओर छोट भs गेल सोचय लगलहुँ पता नहि आब काका ठीक होयताह की नहि।

परिवारक सभ कियो जमशेदपुर मे छथि मुदा बाबा आ बौआ के किछु नहि बुझल छैन्ह। बौआ के मेट्रिक परीक्षा छैन्ह इ सोचि हुनका किछु नहि बतायल गेल छैन्ह। बिचार भेलैक जे इ मुजफ्फरपुर जयबे करताह परीक्षा समय मे बौआ लग चलि जयताह।

भोर मे मामा सभ अयलाह आ इ मुजफ्फरपुर चलि गेलाह। हमरा कहैत गेलाह जे मेट्रिक के परीक्षा तक ओम्हरे रहताह कारण सभ गोटे जमशेदपुर मे छथिन्ह जओं बौआ के किछु काज भेलैंह तs एको गोटे के लग मे रहबाक चाहि।


क्रमशः ......................


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Saturday, August 08, 2009

नताशा 19 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।

त्याग पत्र-उषा किरण खान

विलास बाबा आइ पैंतीस
बरिसक उपरान्त मुखिया नहि रहलाह। मुखियाक पद ओ स्वेच्छासँ त्यागि देलनि। आब मोन
घोर भऽ
गेल छलनि। गामक समस्या सुरसाक
मुँह जकाँ बढ़ल चल जा रहल छलै। दस गामक मुखिया तँ छलाहे, दिशान्तरमे सेहो पर-पंचैती कर’क लेल बजाओल जा रहल छलाह। अपन हित-कुटुमक बाँट बखरा
होइ, कि जाति बन्हनक कोनो मामिला, विलास बाबाक गप्प लोक सुनै; लछुमन-रेखा जकाँ तीन डरीर पाड़ि कऽ ओ जे कहथिन से लोक हँसी-खुसी मानि लै।


बाल बच्चा सभटा कब्जामे छलनि विलास बाबाकेँ, पत्नी कहलमे रहनि। पाँच टा बेटामे सभसँ छोटका बेटा
बालुक पैकारी करैत छलनि, अपने पर-पंचैती आ गामक
डाक्टरी करैत छलाह। आर. एम. पी. के सर्टीफिकेट छलनि। माँझिल बेटा आ जमाइ ताहिमे
संग-साध देब’
लागल छलखिन। साँझिल दू टा
सहायक संगें ल’
कऽ बेनीपुरमे गाय महीसक बथान खोलि नेने छलाह। नीक कमाइ
होइ छलनि। ताहिसँ पैघ भाइ गूड़क व्यापार करैत रहनि, आ सभसँ पैघ बेटा अमीन छलनि, जे कतहु दक्खिनमे सरकारी
क्वार्टरमे रहै रहनि। सभक परिवार गामेमे रहनि। चैघरा हवेली छलनि। दुआरि पर
माल-महीस, कथूक कमी नहि। गामक स्कूलमे पोता-पोती पढ़ैत रहनि।
विलास बाबाकेँ बूझल छलनि जे अजुका समयमे बेटीकेँ सेहो पढ़ाएब जरूरी छै। नहि तँ ब’र-घ’र
नहिएँ टा भेटतै।


एके रंग समय विधना कहाँ ककरो लिखने रहै छथिन।
विलास बाबाक सरकारी अमीन बेटा बीमार पड़ि गेलखिन। पहिने तँ अधिक ख्याल नहि करै
गेलखिन। पछाति भेलनि कि कोनो असाध्य रोग छै। तखन बड़का डाक्टरसँ देखौलखिन। तावत रोग
हाथसँ बहार भऽ गेल छलै। रुपैया पैसा आ
डाक्टर वैद्य काज नहि अएलनि। बेटा हाथसँ चल गेलनि। विलास बाबाक शोक सांघातिक छलनि, मुदा ओ दीन-दुनिया देखने छलाह, बुझनुक लोक छलाह। सभटा काज छोड़ि सरकारी आॅफिसक चक्कर
काटए लगलाह। अनुकम्पाक आधार पर अमीन साहेबक बेटाकेँ सरकारी नोकरीक कागज भेटि गेलै।
एकटा काज सम्पन्न भेलनि। सवा बरिसक दौड़ा-दौड़ी काज देलकनि। बहुतो दिन बाद कतेक काल
धरि विलास बाबा दलानक चैकी पर अपन आश्वस्त मुद्रामे चितंग भेल पड़ल रहलाह। मोनमे
जड़िआएल पीड़ा आँखि बाटे बहए लगलनि। जाहि
पैघ बेटा पर हिनका सभसँ बेसी भरोस छलनि, से
एना चैरस्ता पर छोड़ि कऽ चल जेतनि, कहाँ जनै छलाह! गामे-गाम डाक्टरी करैत रहै छलाह, आ अपना करेजक टुकड़ीक गोर रंग पीयर भेल जा रहल छलनि, से नहि बुझल भेलनि। दलानक एक मुँह आँगनमे सेहो छलै।
ताहि दुरूखा बाटे अमीन साहेबक जेठकी बेटी प्रकट भेलनि आ कहलकनि-बाबा, खाइ ले आँगन चलबै, कि एत्तहि आनू?


कने काल धरि बेबूझ जकाँ पोतीकेँ तकैत रहलखिन।
फेर कहलखिन-चलह, आइ
आँगनेमे खाएब।


आँगन जेना अनभोआड़ भऽ गेल छलनि। दुआरि पर बैसल विलास बाबा देखलखिन-बूढ़ी बड़ लटि गेल छथिन। नेना सभ पैघ भऽ गेल छै आ ई अमीनक दुनू बेटी चम्पा आ चमेली समर्थ भऽ गेल छै। आब तँ एकर सभक कन्यादानक सेहो जोगाड़ कर’क हैत।


-ई भानस के केलक?-बाबा पोतीसँ पुछलखिन।


-छोटकी आ नबकी काकी।


-तों सभ नहि करै छह?


-ई सभ इसकूल जाइ छै।
लिखिया पढ़ियासँ पलखति हेतै तखन ने।-बूढ़ी बजलखिन।


-तइयो, घर आश्रमक काज सीख’क चाही।


पोती सभ नजर नीचाँ कएने
ठाढ़ि रहलनि। बाबा एखन ने कतहु पंचैतीमे बैसथि आ ने दवाइक दोकान पर। राति दिन पोती
सभक बियाहक चिन्ता करैत रहथि। नव-नव तथ्य सभ बाबाक सोझाँ उजागर होमए लगलनि। जेठकी
चम्पा, अइ बेर मैट्रिकक परीक्षामे बैसलनि। पास सेहो कऽ गेलनि।


-बाबा, हमरा काॅलेजोमे नाम लिखा दैह।


-कत’ हए?


-किऐ, बेनीपुरमे।


-कोना जएबह?


-बहुत लोक जाइ छै। पछबारि
टोलक तीन टा लड़की जाइ छै। अइ बेर फेर दू टा जएतै।


-अच्छा?-बड़ अचरज भेलनि विलास बाबाकेँ। ई तँ नहि खेआल केलखिन
कहियो। अपना गामक कामति आ पासवानक बेटी सभ काॅलेज जाए लगलै? नीक भेलै। जौं चम्पा जाए चाहैत अछि, तँ कोन बेजाए। बेटाकेँ कहलखिन चम्पाक नाम काॅलेजमे
लिखा देब’ लेल।


-किऐ, कोन काज छै आगू पढ़बाक? कह’क सिलाइ स्कूलक ट्रेनिंग लेतह।-छोटका बेटा विचार देलकनि।


-एकरा आगाँ पढ़बाक मोन छै, पढ़ए दहक। की हेतै।


-नहि बाबू, काॅलेजमे
की पढ़ाइ होइ छै आ कोन फस्र्ट डिविजनसँ पास केलक अछि। थर्ड डिवीजन बाली की करतइ
आगाँ पढ़ि कए। घरमे काज सीखए आ सिलाइक ट्रेनिंग ल’ लिअए।


-तों तँ बड़ विचित्रा गप्प
कहै छह। तोहूँ बी. ए. पास कऽ कए
बालुक बेपारी भेल छह कि नहि? ई बी. ए. कऽ घरमे रहतै तँ की?


-बाबू काॅलेज सभ फार्स
छै। पढ़ाइ नहि होइ छै। खाली विद्यार्थी सभ एक ठाम जमा भऽ अड्डाबाजी करैत छै।


-नेना कहलक अछि। बाप नहि छै। आइ रहितै तँ अपना संग
राँची ल’ जैतै। हमरा उचित नहि बुझि पड़ैत अछि बरजब। नाम लिखा
दहक। पछवारि टोलक बचिया सभक संगें जएतै।


पिताक तर्कक सोझाँ बेटा
चुप भऽ
गेल। चम्पाक नाम काॅलेजमे लिखा
गेलै। चम्पा बेनीपुरक काॅलेज जाए लागल। एम्हर विलास बाबा गामे गाम ब’र तकैत घूरि रहल छलाह। एक ठाम एक टा ब’र पसिन पड़लनि। प्राइमरी स्कूलमे ओ मास्टर छलै। सरकारी
नोकरी छलै। बेटा सभकेँ बजा पठौलनि।


-बाबा-चम्पा छलैन।


-की?


-हम एखन बियाह नहि करब।


-किऐ?


-ओहिना!


-बताहि नहितन, तोहर बियाह करब तँ हमर कत्र्तव्य अछि।


-बाबा हम आगू पढ़ब। बी. ए.
पास करब।


-तँ पढ़िते छें, के मना करै छौ?


-बियाह करब तखन...।


-पढ़ुआ वर छौ, मास्टरी करैत छौ। तोरा पढ़’मे कोनो बाधा नहि रहतौ।


-ताहिसँ की, हम किन्नहुँ नहि करब।-पैर पटकैत चम्पा चल
गेलै।


विलास बाबा अवाक।


-हूँ, ई
छौंड़ी बड़ जिद्दी अछि। ककरो कहल की बूझै छै। जे कहलक से कहलक, हिनको बुझेने नहि बुझतनि। आब की करताह।-बूढ़ी दुरूखामे ठाढ़ि सभटा सुनैत रहथिन से बजलखिन।


-ऐं?-विलास बाबा सोचमे पड़ि गेलाह। अपन अति व्यस्त जिनगी आ सद्यः सोग हिनका ककरो दिस
तकबाक पलखति नहि देने छलनि। आब की करताह? बेटा
सभकेँ बजौने छथि। ओएह सभ किछु विचार देन्हि तँ देन्हि। कका सभ बेसी नीक जकाँ बुझा
सकै छै। ई ब’र छूटि जेतै तँ फेर भेटनाइ मसकिल। पीठहि पर चमेली छै।
ओहो अइ बेर काॅलेज जाए लागल अछि। राति भरि नीन नहि अएलनि। दोसर दिन बेरूक पहर तक
चारू बेटा आ जेठका पोता दन-दन कऽ जूमि
गेलनि। बाबाक चिन्तित चेहरा देखि बेटा सभ कने ठमकि गेलाह। फेर मोनमे अएलनि, आइ पहिले पहिल बेटा सभसँ मंत्राणाक बेर उपस्थित भेलनि
अछि, आ ताहिमे जेठ जन नहि छथिन, से विचारि बाबू उदास छथि।


-बाबू की गप्प छै?-छोटका पुछलखिन।


-हँ, ताही लेल तँ बजौलियह।
कुसीपुर गामक ब’र तकने छी। दस बीघाक जोत छै बापकेँ। छह बहिनिक बियाह भऽ गेल छै। सरकारी प्राइमरी स्कूलमे मास्टर छै। विचार
करह, की करबह?


-जे ब’र-घ’र
अहाँकेँ पसिन भेल, ओ कोनो काटैबला हेतै? अहाँ हमरा सभकेँ आज्ञा करिऔ। जे कहबै-माझिल छलै।


-बाउ, हमरा बूझल छल। तोरा लोकनि इएह गप्प कहब’। तैयो बजाएब हमर कत्र्तव्य छल, मुदा आब एकटा आर समस्या ठाढ़ भऽ गेल अछि।


-की बाबू-छोटका मुहलगुआ छलनि।


-चम्पा कहैत अछि जे ओ बियाहे ने करत, ओ बी. ए. पास करत।-छोटकाकेँ छोड़ि सभ बेटा
भकुआ जकाँ मुँह ताकए लगलनि। छोटका हँसए लगलनि।


-हौ बाबू, हम तोरा पहिने कहने रहियह। ओकरा गामसँ बाहर काॅलेज
कथी लए पठौलह। आब भोगह।


-मत्तोरी, काॅलेज तँ नितदिन जाइत अछि आ चल अबैत अछि, ताहिमे कोन...।


-इएह ने तों नहि बुझबहक।





ओम्हर चम्पा चमेलीक गप्प
भऽ रहल छलै। चम्पा मुँह चढ़ओने छल। चमेली पुछलकैक-आब? आब तँ सभटा काका आबि गेलै। छोटका काकाकेँ जखन
किछु-किछु बूझल हेतै, ओ तोहर भेद खोलि देतौ।
रहि जएबें मुँह बबैत।


-चमेलिया, तों हमर संग देबें से नहि, उनटे कपार खाइ छें।


-की संग दिअउ?


-बाबू आ कका सभकेँ कहि दही जे मुखियाक बेटा विजयसँ
चम्पाकेँ बियाह करक मोन छै।-चमेलीक सगर शरीर बसातमे डोलैत भालरि भऽ गेलै। कने काल बकार नहि फुटलै।


-कहि अबै छही की नहि।


-नहि।


-किऐ?


-हमरा लाज होइत अछि आ डर
सेहो।


-तोरा किऐ लाज होइ छौ? चम्पाक सोझाँ चमेली दबल-दबल रहै। ओकरा किछु नहि फुरैत रहै। विजय संगें चम्पाक
मेल जोल देखि ई तेहन ने ठिसुआएल रहए, जेना
चोरनी हो। चम्पा,
अपन प्रेमक व्याख्या
भाँति-भाँति सुनबए, चमेलीकेँ। आ स्वयं ओ ई
सब विजयसँ सीखए। भारी स्वरमे चम्पा पर विजयक कएल प्रेम रसक आलेपन तेहन भऽ गेल छलै जे ओ आगाँ-पाछाँ नहि विचारै। ओकरा विजयक
अतिरिक्त कहाँ किछु बुझाइत छलै।


-तों जा कऽ बाबाकेँ कहुन। नहि तँ हम स्वयं जा कऽ कहबनि।-चम्पा आवेशमे आबि गेल
छल।





बाबा, सभ बेटाक मुखाकृति एका एकी देखि बुझि गेलाह जे हिनका
सभसँ कोनो समाधानक आशा नहि कएल जा सकैत अछि। ई सभ आइ धरि कोनो स्वतंत्रा निर्णय
नहि नेने छथि। मुदा छोट जन बाजल-बाबू, चम्पासँ
पुछहक बजा कऽ,
किऐ जिद धएने छह।


चम्पा संग चमेली दलानमे आबि जूमल। साओनक बरखा
अपन सुर-ताल पर छम-छम बरसि रहल छलै। चमेली थर-थर कँपैत ठाढ़ि छलै।


चम्पा सोझे-सोझे बाबा आ
कका सभ दिस तकैत बाजल-कोन अतराहति बीति रहल अछि हमरा बियाहक। एखन हम अठारहम
बरिस पार नहि कएलहुँ आ अहाँ सब बैलाबए चाहै छी। दू बरिस आर अपन घरमे रहए नहि देब
बाबा-छओ मुण्ड आ बारह आँखि चम्पाक मुँह पर ताकए लागल।
निर्वाक्। चमेलीक थरथरी थम्हि गेलै; ओ
निसाँस छोड़लक। चम्पा काते-कात निमहि गेल।


-आब जखन तों एहन गप कहलह
तँ हम तोरा दू बरिस नहि टोकबह।-सब हरे हरे कऽ उठि गेलाह। मुदा छोट जन अपना मोपेडसँ बेनीपुर काॅलेजक जखन-तखन चक्कर काटए
लगलाह। चम्पा आ विजयक प्रेम काॅलेजक हत्तामे कहाँ भेल छलै। ओ तँ गामहिमे, नेनहिसँ फुलाइत छलै। विजय चम्पासँ दू बरिस पहिनहि
मैट्रिक पास कएने छलै, मुदा काॅलेज पढ़ए नहि
गेलै। गंजक गंज किताब पढ़ए, गामे गाम मिटिंग करैत
घुरए। चम्पाकेँ कहैक जे तोंहूँ दिन-दुनियाक खबरिक वास्ते नीक जकाँ प’ढ़-लिख। किछु अपन पढ़एबला किताब ओकरा दै, मुदा चम्पा लेखें ओ किताब जेना अरबी-फारसी होइ।
एक्कोटा शब्दक अर्थ ओकरा नहि बुझाइ। ओकरा विजय नीक लगै आ विजयकेँ चम्पा।


-विजय, देख त’, हमर
ई नब कर्णफूल केहन लगलौ।-चम्पा कहैक। विजय देखि कऽ हँसि दै।


-हँसै किए छें?


-नीक छौ, चम्पा
खूब पढ़ि-लिखि कऽ डिग्री ले, आ अपनाकेँ तैयार कर। हमरा संग चल’क छौ तँ अपना पर ठाढ़ हो। तखन दुनू गोटा संग भऽ कऽ असमानता
समाप्त करबै समाजक।


-धुर, से कतौ भेलै अछि।


-हेतै, सभटा
हेतै।-विजय उत्साहमे जे किछु कहै से अइ सम्पन्न विलास बाबाक
पोतीकेँ नहि बुझाइक। ओकरा ओकर मुद्रा, भंगिमा
आ ओजपूर्ण स्वर नीक लगै। सम्पूर्ण अस्तित्व रोमांचित भऽ जाइ।


-विजय-एक दिन चम्पा ओकरा कहलकै-बाबा आ कका सब हमर विवाह करएबाक तैयारीमे छथि।


-हूँ, ककरासँ?


-अपनामे गप करैत रहथि, हम सेहो बीचहिमे जूमि गेलिअनि तँ हमरोसँ गप भेलनि।


-की गप्प?


-हम कहलिअनि जे हम बी. ए.
पास कएलाक बाद बियाह करब।


-ठीक, सही कहलें।


-विजय, तोहूँ तावत कोनो रस्ता पकड़ि लेबें।


-हम? हम कोन नब रस्ता पकड़ब? हमर तँ सुनिश्चित गन्तव्य अछि। आ से तुरत कत्तए भेटए
बला? हमरा स्वयं सम्पूर्ण जीवने संघर्ष बुझि पड़ै अछि।
बुझलें?-चम्पाकेँ नाक पकड़ि डोला देलकै विजय।


-तखन बियाह कहिया करबें?


-कहियो नहि चम्पा, कहियो नहि। हमरा लेल बियाह बनले नहि छै।


चम्पाक आगाँ धरती आकाश घुमए लगलै। ओकरा मोन
भेलै जे ओ विजयकंे भरि पाँजकेँ ध’ लिअए
आ कहै-तों एहन गप्प किऐ करैत छें। हम तँ तोरे बल पर अपना
बाबाक सोझाँ ठाढ़ भऽ गेलौं। हम तँ जागल, सूतल तोरे सपना आँखिमे बन्न कएने रहै छी।-चम्पा एकटा सोझ गामक कन्या, ओकर सपना बिछिया-पायल
पहिरि मात्रा बियहुती होमक। ओ की जानए गेलै, जे
बनैया आगिक उड़ैत चिनगीसँ स्थायी प्रकाश नहि होइत छै। ओकरा आँचरमे समटल नहि जा सकैत
अछि।


-चम्पा की भेलौ, बड़ गुम-सुम छें।-चमेली ओकर मन्हुआएल
चेहरा देखि पुछए लगलै। चम्पा चुप्पे रहल। कोनो ने कोनो लाथ लगाए काॅलेज सेहो नहि
जाए। विलास बाबा कैक बेर पुछलखिन, किछु
जवाब नहि। चमेलीकेँ बजा कऽ पुछलखिन।
ओहो जवाब नहि देलकनि। पोखरि पर जामुन गाछ तर बैसि कऽ गप्प करैत कैक दिन छोटका कका विजय आ चम्पाकेँ देखने छलै, मुदा विजयक प्रकृति जानि ओ कोनो प्रकारक भाव नहि बुझि
सकल छलै। एक दिन चमेलीकेँ नहि रहल गेलै, आ
ओ कहि देलकै,
जे चम्पा विजयसँ बियाह करए
चाहै’ए। एखन की भेलै’ए
से ओ नहि जनै अछि। छोटका ककाकेँ तरबाक लहरि मगज पर फेकि देलकै। ओ सोझे दलान पर
जूमि गेलै।


-बाबू, आर सहकाबहक छौंड़ीकेँ, ओ ओइ दहियरबासँ बियाह करत’।


-ऐं?


-ऐं की?


-ऐं की के की मतलब? कहबह तखन ने बुझबै।


-की कहब’, ओइ सुमिरन दहियारक बेटा विजइया, चम्पासँ बियाह करत। किसनौतमे की लड़िकाक अकाल भऽ गेल छै। सिनेमा बुझि लेलक गामकेँ?


-हूँ-विलास बाबा मूड़ी नीचा कऽ कए
विचारए लगलाह।


-की विचारै छह, बाप दुधीक दही बेचि गुजर करैत छै आ बेटा गामे गाम
कमैटी बैसौने रहै अछि। जाइ छिऐ आइ हम ओकर कपार...।


-हौ बाउ, एना
आगुताबह जुनि;
तों आइ काल्हुक लोक छह, हम पुरान भेलहुँ। एहन कतोक पंचैती कैने छी। चम्पाकेँ
बुझा सुझा कऽ देखहक। ओ जिद्दी अछि।
जिदपनीमे कोनो ऊंच-नीच भऽ जेतैक।
अपयश होएतहु।


-तों करह पूछा-पूछी, हम ओइ छौंड़ाकेँ देखए जाइ छी।


-सुनह, अगुताह नहि।


-चम्पा कहतह आ जिद करतह
तँ ओकरासँ बियाहि देबहक।


-की हेतै, दहियार छै तँ। आइ-काल्हि तँ किसनौत सभमे बियाह करैत
अछि। सुुकुर मनाबह, जौं परजाति होइतै तखन?


-बाबा, तोहूँ जुलुम कैलह। ओइ विजैयाक ओतए सुपारी ल’ कऽ जेबह!


-की हेतै?


-बाबा-चम्पा आबि कऽ ठाढ़ि भऽ गेलै। उदास आ पीयर मुखसँ। सभक दृष्टि ओम्हरे चल गेलै।


-बाबा, ई
चमेली अनेरे कहलक। हम विजयसँ बियाह कर’ लेल
उताहुल रही, ओ नहि। ओ तँ कहलक जे ओ कहियो बियाह नहि करतै, ओकर रस्ता अलग छै।


-बाबा, हमर
बियाह जत्त’ ठीक करै छलौं तत्तहि कऽ दिअ’, अही
शुद्धमे।-नहूँ नहूँ मुरछल सन चम्पा आँगन चल गेलै। बियाह दान
हेबाक छलै, भेलै। चम्पा सासुर गेल।


एहन केस? बिनु वादी-प्रतिवादीक, बिनु फैसलाक केस मरि
गेलै। विलास बाबा मुखियागिरीसँ त्यागपत्रा दऽ देलनि।
आब ओ खाली छथि।

मनोज कुमार झा कें भारत भूषण अग्रवाल सम्मान

मनोज कुमार झा हिन्दी आ मैथिलीक युवा पीढ़ीक बेस प्रतिभाशाली रचनाकार छथि । हिन्दी कविता 'स्थगन ' (कथन मे २००८ के प्रकाशित ) लेल हिनका प्रतिष्ठित 'भारत भूषण अग्रवाल सम्मान ' देबाक घोषणा कयल गेल अछि । अहि प्रतिभा पर विस्तार सं चर्चा बाद मे । ताबत ढ़ेर रास बधाई !

Wednesday, August 05, 2009

इन्फॉरमेशन सोसाइटी एवं सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा :अन्तस्सम्बन्ध:-निमीक जयन्तपुर आ मिथिक मिथिलानगरी

निमीक जयन्तपुर वर्तमान जनकपुरमे छल। तकरा बाद मिथी मिथिलानगरीक स्थापना कएलन्हि, जकर स्थान एखन धरि निर्धारित नहि भए सकल अछि। अनुमानित अछि जे ई जनकपुरक लगमे छल।



इन्फॉरमेशन सोसाइटी एवं सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा :अन्तस्सम्बन्ध

इन्फॉरमेशन सोसाइटी किंवा सूचना-आधारित-समाज एकटा ओहेन समाज अछि जाहिमे सूचनाक निर्माण, वितरण, प्रसार, उपयोग, एकीकरण आ संशोधन, एकटा महत्त्वपूर्ण आर्थिक, राजनीतिक आ सांस्कृतिक क्रिया होइत अछि। आ एहि समाजक भाग होएबामे समर्थ लोक अंकीय वा डिजिटल नागरिक कहल जाइत छथि। एहि उत्तर औद्योगिक समाजमे सूचना-प्रौद्योगिकी उत्पादन, अर्थव्यवस्था आ समाजकेँ निर्धारित करैत अछि। उत्तर-आधुनिक समाज, उत्तर औद्योगिक समाज आदि संकल्पना सँ ई निकट अछि। अर्थशास्त्री फ्रिट्ज मैचलप एकर संकल्पना देने छलाह। हुनकर ज्ञान-उद्योगक धारणा शिक्षा, शोध आ विकास, मीडिआ, सूचना प्रौद्योगिकी आ सूचना सेवाक पाँचटा अंगपर आधारित छल। प्रौद्योगिकी आ सूचनाक समाजपर भेल प्रभाव एतए दर्शित होइत अछि।


अनुच्छेद 18
प्रत्येक व्यक्तिकेँ विचार, विवेक आ धर्म रखबाक अधिकार छैक। एहि अधिकारमे समाविष्ट अछि धर्म आ
विश्वासक परिर्वतनक स्वतन्त्रता, एकसर वा दोसराक संग मिलि प्रकटतः वा एकान्तमे शिक्षण, अभ्यास,
प्रार्थना आ अनुष्ठानक स्वतन्त्रता।
अनुच्छेद 19
प्रत्येक व्यक्तिकेँ अभिमत एवं अभिव्यक्तिक स्वतन्त्रताक अधिकार छैक, जाहिमे समाविष्ट अछि बिना
हस्तक्षेपक अभिमत धारण करब, जाहि कोनहु क्षेत्रसँ कोनहु माध्यमेँ सूचना आ विचारक याचना, आदान
प्रदान करब।
अनुच्छेद 27
1. प्रत्येक व्यक्तिकेँ समाजक सांस्कृतिक जीवनमे अबाध रूपेँ भाग लेबाक, कलाक आनन्द लेबाक
तथा वैज्ञानिक विकासमे आतकर लाभमे अंश पएबाक अधिकार छैक।
2. प्रत्येक व्यक्तिकेँ अपन सृजित कोनहु वैज्ञानिक, साहित्यिक अथवा कलात्मक कृतिसँ उत्पन्न,
भावनात्मक वा भौतिक हितक रक्षाक अधिकार छैक।
अनुच्छेद 12
केओ व्यक्ति कोनो आन व्यक्तिक एकान्तता, परिवार, निवास वा संलाप (पत्राचारादि) मे स्वेच्छया हस्तक्षेप
नहि करत आने ओकर प्रतिष्ठा आख्याति पर प्रहार करत। प्रत्येक व्यक्तिकेँ एहन हस्तक्षेप वा
प्रहारसँ कानूनी रक्षा पएबाक अधिकार छैक।

सूचना समाजपर पहिल संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन दिसम्बर २००३ मे भेल जाहिमे मानवाधिकार आ सूचना प्रौद्योगिकीक बीचमे सम्बन्धकेँ मान्यता देल गेल छल।
अंकीय वा डिजिटल विभाजन एकटा ज्ञानक विभाजन, सामाजिक विभाजन आ आर्थिक विभाजन देखबैत अछि आ बिना भेदभावक एकटा सूचना समाजक निर्माण आवश्यकता देखाबैत अछि जाहिसँ सूचना प्रौद्योगिकीपर विकासशील देशमे सार्वभौम अधिकार रहए।

मानवाधिकार आ सूचना प्रौद्योगिकीक मध्य व्यक्तिक एकान्तक अधिकार सेहो साम्मिलित अछि। विद्वान, मानवाधिकार कार्यकर्ता आ आन सभ व्यक्तिक अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता, सूचनाक अधिकार, एकान्त, भेदभाव, स्त्री-समानता, प्रज्ञात्मक संपत्ति, राजनीतिक भागीदारी आ संगठनक मेलक संदर्भमे सूचना आ जनसंचार प्रौद्योगिकीक सन्दर्भमे एहि गपपर चरचा शुरू भेल अछि जे सूचना समाज मानवाधिकारकेँ बल देत आकि ओकरा हानि पहुँचाओत।

ऑनलाइन पत्राचारक गोपनीयताक अधिकार, अन्तर्जालक सामग्रीक सांस्कृतिक आ भाषायी विविधता आ मीडिया शिक्षा। सूचना समाजक तकनीकी अओजार ओकर अधिकार आ स्वतंत्रतासँ लाभान्वित होइत अछि आ समाजक समग्र विकास, अधिकार आ स्वतंत्रताक सार्वभौमता, अधिकारक आपसी मतभिन्नता, स्वतंत्रता आ मूल्य निरूपणमे सहभागी होइत अछि।


एहिसँ सूचना, ज्ञान आ संस्कृतिमे सरल पइठक वातावरण बनैत अछि आ ई उपयोगकर्ताकेँ वैश्विक सूचना समाजक अभिनेताक रूपमे परिणत करैत अछि। कारण ई उपयोगकर्ताकेँ पहिनेसँ बेशी अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता आ नव सामग्री आ नव सामाजिक न्तर्जाल-तंत्र निर्माण करबाक सामर्थ्य दैत अछि। एहिसँ एकटा नव विधि, आर्थिक आ सामाजिक मॉडेलक आवश्यकता सेहो अनूभूत कएल जा रहल अछि जाहि मे साझी कर्तव्य, ज्ञान आ समझ आधार बनत। बच्चाक हित एकटा आर चिन्ता अछि जे पैघक हितसँ सर्वदा ऊपर रखबाक चाही। आधुनिक समाजक आर्थिक, सामाजिक आ सांस्कृतिक धनक एकत्र करबाक प्रवृत्ति सूचना समाजमे बढ़ल अछि आ प्रौद्योगिकी एकटा आधारभूत बेरोजगारी अनलक अछि। गरीबी, मजदूरक अधिकार आ कल्याणकारी राज्यक संकल्पना लाभ-हानिक आगाँ कतहु पाछाँ छूटल जा रहल अछि। आब मात्र किछुए अभिनेता चाही, प्रकाशक लोकनि सेहो मात्र किछु बेशी बिकएबला पोथीक लेखकक प्रचार करैत छथि। यैह स्थिति रंगमंच, पेंटिंग , सिनेमा आ आन-आन क्षेत्रमे सेहो दृष्टिगोचर भऽ रहल अछि। मुदा सूचना सर्वदा लाभकारी नहि होइत अछि। ई मात्र कला, ग्रंथ धरि सीमित नहि अछि वरन सट्टा बाजार आ प्रायोजित सर्वेक्षण रपट सेहो एहिमे सम्मिलित अछि। समय आ स्थानक बीचक दूरीकेँ ई कम करैत अछि आ दुनूक बीचमे एकटा सन्तुलन बनबैत अछि। मानवक गरिमा मानवक जन्म आधारित सामाजिक स्थानसँ हटि कऽ मानवक गरिमाक अधिकारपर बल दैत अछि। मुक्ति आ स्त्री-मुक्ति आन्दोलन एहि दिशाक प्रयास अछि। दुनू विश्वयुद्ध आ फासिज्मक चुनौतीक बाद १० दिसम्बर १९४८ केँ संयुक्त राष्ट्रसंघक महासभा द्वारा मानवाधिकारक सार्वभौम घोषणाक उद्घोषणा कएल गेल आ एकरा अंगीकार कएल गेल। ई घोषणा राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आ धार्मिक भेदभावरहित एकटा सामान्य मानदण्ड प्रस्तुत करैत अछि जे सभ जन-समाज आ सभ राष्ट्र लेल अछि। सूचनाक स्वतंत्र उपयोग सीमित अछि, लोकक एकान्त खतम भऽ रहल अछि। बिल गेट्ससँ जखन हुनकर भारत यात्राक क्रममे पूछल गेल छलन्हि जे माइक्रोसॉफ्टक एक्स-बॉक्स भारतमे पाइरेसीक डरसँ देरीसँ उतारल गेल तँ ओ कहने रहथि जे माइक्रोसॉफ्ट कहियो कोनो उत्पाद पाइरेसीक डरसँ देरीसँ नहि आनलक। स्पैम आ पाइरेसीक डर खतम होएबाक चाही।

सूचना समाज वैह समाज छी जकर बीचमे हम सभ रहि रहल छी। लोकतंत्र आ मानवाधिकारक सम्मान सूचना-समाज आ उत्तर सूचना-समाजमे होइत रहत। अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता, एकान्तक अधिकार, सूचना साझी करबाक अधिकार आ सूचना धरि पहुँचक अधिकार जे सूचनाक संचारसँ सम्बन्धित अछि, ई सभ राज्य द्वारा आ सूचना-समाजक बाजारवादी झुकावक कारण खतराक अनुभूतिसँ त्रस्त अछि।

अन्तर्जाल लोकक मीडिआ अछि आ एकटा एहन प्रणाली अछि जे लोकक बीच सम्वाद स्थापित करैत अछि। एहिसँ संचार-माध्यमक मठाधीश लोकनिक गढ़ टुटैत अछि। अन्तर्जालमे कोनो सम्पादक सामान्य रूपसँ नहि होइत छथि। एतए लोक विषयक आ सामग्रीक निर्माण कए स्वयं ओकर संचार करैत छथि। एहिसँ कतेक रास सामाजिक सम्वादक प्रारम्भ होइत अछि। मुदा कतेक रास समाज-विरोधी सामग्री सेहो अबैत अछि। तँ की ओहिपर प्रतिबन्ध होएबाक चाही। मुदा जे सॉफ्टवेयरक माध्यमसँ मशीनकेँ सामग्रीपर प्रतिबन्ध लगेबाक अधिकार देब तखन ई अभिव्यक्तिक स्वतंत्रतापर पैघ आघात होएत।

बौद्धिक सम्पदाक अधिकार लेखककेँ मृत्युक ६० बरख बादो प्रकाशन आ वितरणक अधिकार दैत अछि। अन्तर्जालमे सेहो पाइरेसीकेँ प्रतिबन्धित करए पड़त आ कमसँ कम लेखकक मृत्युक २० बरख बाद धरि लेखकक अधिकार ओकर सामग्रीपर रहए, से व्यवस्था करए पड़त। मुदा पेटेन्टक बेशी प्रयोग विकाशसील देशक सूचना अभिगमनमे बाधक होएत आ प्रौद्योगिकीक विकासमे सेहो बाधा पहुँचाओत। कॉपीराइटसँ सांस्कृतिक विकास मुदा होएत, जेना संगीत, फिल्म, आ चित्र-शृंखला(कॉमिक्स)क विकास। डिजिटल वातावरणमे प्रतिकृतिक बिना अहाँ अन्तर्जालपर सेहो सामग्री नहि देखि सकब, से ऑफ-लाइन कॉपीराइट आ ऑनलाइन कॉपीराइट दुनू मे थोड़बेक अन्तर अछि। ऑनलाइन कॉपीराइट प्रतिकृतिकेँ सेहो प्रतिबन्धित करैत अछि। आ प्रतिकृति कएल सामग्रीकेँ दोसर वस्तुमे जोड़ब वा संशोधित करब सेहो बड्ड सरल अछि। से नाम आ चित्र बिना ओकर निर्माताक अनुमतिक नहि प्रयोग होअए, दोसराक व्यक्तिगत वार्तालाप-चैटिंग-मे हस्तक्षेप नहि होअए आ दोसराक विरुद्ध कोनो एहन बयानबाजी नहि होअए जाहिसँ कोनो व्यक्तिक विरुद्ध गलत धारणा बनए।तहिना नौकरी-प्रदाता द्वारा कोनो प्रकारक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपन कर्मचारीक नियन्त्रण लेल लगबैत अछि तँ से अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संघक दिशा-निर्देशक अनुरूप होएबाक चाही। ई-पत्रमे अनपेक्षित सन्देश आ चिकित्सकीय रिपोर्टक अनपेक्षित संग्रह आ उपयोग सेहो मानवाधिकारक हनन अछि।
अन्तर्जालक उपयोग मुदा सीमित अछि कारण बहुत रास सामग्री आ तंत्रांश मंगनीमे उपलब्ध नहि अछि आ महग अछि, डिजिटल विभाजन शिक्षाक स्तरकेँ आर बेशी देखार करैत अछि। शारीरिक श्रमक बदलामे मानसिक श्रमक एतए बेशी उपयोग होइत अछि, से ई आशा रहए जे स्त्री-असमानता सूचना-समाजमे घटत मुदा सर्वेक्षण देखबैत अछि जे महिलाक पइठ सूचना प्रौद्योगिकीमे कम छन्हि।
इलेक्ट्रॉनिक लाइब्रेरी आ ब्रेल-इनेबल कएल/ ध्वनि-इनेबल कएल कम्प्यूटर स्क्रीन/ इलेक्ट्रॉनिक लाइब्रेरी विकलांग आ अन्ध विकलांग लेल घर पर रहि ई-वाणिज्य करबामे सहायता दैत। मुदा एहि क्षेत्रमे कएल शोध आ ओकर परिणाम महग रहबाक कारणसँ ओतेक लाभ नहि दऽ सकल अछि।
बाल, वृद्ध, विकलांग, स्त्री, कामगार, प्रवासी-कामगार आ दोसर सामाजिक रूपसँ अब्बल वर्ग सूचना समाजमे सेहो अपनाकेँ अब्बल अनुभव करैत छथि।

Tuesday, August 04, 2009

विद्यापतिक आँखि मे नोर -रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'


देखि हमरा चिंता भेल घोर,
विद्यापतिक आँखि मे नोर।

नही देखल ई स्वप्न मे ,
देखलहुं गिरीश पार्कक एक कात मे ,
हुनक श्वेत प्रतिमा जेना हो ,
पार्कक अन्य लता, पुष्प
ओ तरु सभ सं एकदम बारल,
कोनो व्यथा सं झामरल,
समय छल शीतकालक भोर।

पहिने विश्वास नहि भेल नजरि पर ,
देखलहुं निहारि क' प्रतिमा पर ,
हुनक नेत्र सं खसयबला छल नोर एक ठोप ,
कोढ धरकय लागल छल जेना चलल हो तोप,
भेल छल ई हुनक नोर नहि , भ' सकैछ शीतक बूंद,
तखने टप सं खसल महि पर नोरक एक बूंद,
विश्वास भेल, देखलियनि हुनक कांपति ठोर।

हम कहलियनि-की मामिला छैक ?
अहांक नेत्र सजल , किएक ?
की , अहांक यशोगान मे कतहु कोताही ?
ढेर उपलब्धि सभ अछि, आब कत्ते चाही ?
कहू , मिथिला- मैथिलीक स्वर अछि दबल ?
वा एकर विरोधी तत्व भेल अछि सबल ?
थिर होऊ, नहि छोड़ब कोनो कसरि कोर।

मिथिला- मैथिलीक स्वर अछि प्रबल,
की कहै छियह सुनह कलबल ,
आम मैथिल जाबे बुझत नहि मैथिलीक मोल,
ताबे की हेतह पीटने ढोल ?
ई भेलह जे जरि ठूंठ आ फुनगी हरियर ,
मुरही कम आ घुघनी झलगर,
खाली हमर गुण गएने किछु हेतह थोड़ ?

एतबे कहि ओ पुनः भए गेलाह पाथरक प्रतिमा ,
धोआ गेल छल हमर मोनक कालिमा ,
सूर्यक तीक्ष्ण रौद लागल, लेलहुं आंखि मुनि ,
किरण फाडि देने देने छल शीतक प्रभावे लागल धुनि,
पेट मे कुदकय लागल छल नमहर बिलाइ ,
इच्छा भेल किछु होटल मे डटि कए खाइ ,
गेलहुं खाय , दए दाम माछ-भातक संग फ्री झोर।

आ कि शीघ्र अंतर्मन देलक एक प्रश्न पर जोर ,
कोना सुखायत विद्यापतिक आंखि केर नोर ?

गजेन्द्र ठाकुरक स्थानीय कॉर्पस —मैथिली, अंग्रेजी आ मैथिली-अंग्रेजी द्विभाषी संस्करण

 📚 गजेन्द्र ठाकुरक स्थानीय कॉर्पस — मैथिली, अंग्रेजी आ मैथिली-अंग्रेजी द्विभाषी संस्करण विदेहक संग्रह ०० मे मैथिली, अंग्रेजी आ मैथिली-अंग्र...