भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

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Monday, April 13, 2009

1. पूर्वजक जन्मभूमिकेँ शत-शत प्रणाम 2.आचार्य पंकज

1. पूर्वजक जन्मभूमिकेँ शत-शत प्रणाम-

३५० बरस पहिल हमर पूर्वज मिथिला जरूर छोड़ने छला किंतु मैथिल होबाक गर्व हम सब सब दिन महसूस केने छि.हम सब ओतने गर्वोन्नत मैथिल छि जेतना कौनो दोसर मैथिल होता।लगभग ३५० बरस स हमर परिवार आधुनिक झारखण्ड क देवघर जिला अंतर्गत सारथ थाना के खैरबनी ग्राम में रही रहल छे
३०० साल पहिने एक सिद्ध ज्योतिषी मिथिला सँ चलि आज के देवघर जिलाक सारथ ,जकरा पहिने सरहद कहल जाइत छल , राजदरबार मे राज ज्योतिषी स्थान ग्रहण केलन्हि .ध्यान देबा योग्य बात ई अछि जे राज दरबार मुस्लिम नबाबक रहए आ राज ज्योतिषी मैथिल ब्राह्मण बनलाह.तखनसँ आइ धरि ओ परिवार ओतहि रहि गेल जेना आइ हम दिल्लीक भेल जा रहल छी। मुदा ई तँ एक सामजिक आर ऐतिहासिक प्रक्रिया अछि .विस्थापन तथा परिभ्रमण इतिहासक अति महत्त्वपूर्ण घटना रहल अछि .लेकिन अपन धरती अपन देश--देसिल बयना ,सब जन मिट्ठा-- स्मृति हमरा आइयो मैथिल बनेने अछि .हमसभ अपन इलाकामे अपनाकेँ मैथिल ब्राह्मण कहैत छी मुदा एहिमे ब्राह्मण गौण रहैत अछि मैथिल प्रमुख भ' जाइत अछि। दोसर लोक हमरा सभक लेल मैथिल शब्दक प्रयोग करैत छथि। माने मैथिल शब्द हमर अस्मिता हमर अस्तित्वक द्योतक अछि .


2. आचार्य पंकज

पंकज जी
हम अमरनाथ झा,दिल्ली विश्वविद्यालयक स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज मे इतिहास विभाग मे अससोसिएत प्रोफ़ेसर छी । हम अहाँकेँ संताल परगना (झारखण्ड) मे हिंदी साहित्य आ हिंदी कविताक अलख जगेनिहार सैकड़ामे साहित्यकार पैदा करएवला ओहि महान साहित्यकार एवं हुनकर रचनासँ अवगत कराबए चाहैत छी जे अपन बहुमुखी प्रतिभाक बलपर समस्त संताल परगनाकेँ शिक्षाक लौ सँ रौशन केलन्हि। १९१९ मे जन्म लेल श्री ज्योतींद्र प्रसाद झा "पंकज" नामक एहि महामना द्वारा १९३४ मे देवघरक हिंदी विद्यापीठमे अध्यापनक कार्य शुरू कएल गेल आ अपन प्रकांड विद्वताक बलपर तत्कालीन हिंदी जगतक धुरंधरक ध्यान अपन दिस खिचलन्हि। १९४२ क भारत छोड़ो आन्दोलनक कमान एक शिक्षकक हैसियतसँ सम्हारलन्हि १९५४ मे ओ संताल परगना महाविद्यालय दुमका (ओहि समय भागलपुर विश्वविद्यालयक अंतर्गत )क संस्थापक शिक्षक एवं हिंदी विभागक अध्यक्ष बनि गेलाह। एहि बीच तत्कालीन पत्र-पत्रिकामे ओ "पंकज" क उपनामसँ कविता ,समीक्षा आ एकांकी लिखैत रहलाह ,जकर चर्चा होइत रहल। १९५८ मे हुनकर कविता संग्रह "स्नेहदीप" क नाम सँ छपल। १९६४ मे हुनकर दोसर कविता संग्रह"उदगार" क नामसँ छपल। १९६५ मे संताल परगनाक साहित्यकार सभ मिलि क’ एक बहुत पैघ साहित्यिक संगठनक निर्माण कएलन्हि जकर अध्यक्ष "पंकज"जी केँ बनाओल गेल आ एहि संगठनक नाम सेहो हुनके नाम पर "पंकज-गोष्ठी" राखल गेल। १९६५ सँ १९७५ धरि पंकज गोष्ठी संपूर्ण संताल परगनाक असगर आ सबसँ पैघ साहित्यिक आन्दोलन छल। सत्य तँ ई अछि जे ओहि दौर मे ओतए पंकज गोष्ठीक मान्यताक बिना कोनो साहित्यकारहि नहि कहाइत रहथि। पंकज गोष्ठी द्वारा प्रकाशित कविता संकलनक नाम छल "अर्पण" तथा एकांकी संकलनक नाम छल "साहित्यकार"। लक्ष्मी नारण "सुधांशु ",जनार्धन प्रसाद मिश्र "परमेश",बुद्धिनाथ झा"कैरव" क समकालीन एहि महान विभूति--प्रोफ़ेसर ज्योतींद्र प्रसाद झा "पंकज' क विद्वता,रचनाधर्मिता एवं क्रांतिकारिता सँ तत्कालीन महत्त्वपूर्ण हिंदी रचनाकार जेना--रामधारी सिंह"दिनकर",द्विजेन्द्र नाथ झा "द्विज",हंस कुमार तिवारी,सुमित्रानंदन"पन्त',जानकी वल्लभ शास्त्री नलिन विलोचन शर्मा आदि भली भांति परिचित छलाह । आत्मप्रचारसँ कोसो दूर रहए वाला "पंकज"जी केँ भले आइ हिंदी जगत बिसारि देलक अछि परन्तु ५८ साल कि अल्पायु मे १९७७ मे दिवंगत एहि आचार्य कविकेँ मृत्यक ३२ वर्षो बादो संताल परगनाक साहित्यकारे टा नहि वरन लाखों लोक अपन स्मृतिमे आइयो महान विभूतिक रूपमे जिन्दा रखने छथि। संताल परगनाक एहन कोनो गाम या शहर नहि अछि जतए "पंकज"जी सँ सम्बंधित किम्वदंति नहि प्रचलित होअए। की अहाँ हुन्अका आ हुनकर कृतिक ब्रिहद्तर हिन्दी जगतक समक्ष प्रस्तुत करबामे हमर सहायता करब ? अहाँक प्रतिक्रिया सादर आमंत्रित अछि। अभिवादनक संग -उत्तरापेक्षी,अमरनाथ ।

मैथिल आर मिथिला से जुड्लाक बाद हम बेहद प्रसन्नता के अनुभव के रहल छि| लगभग ३५० बरस स हमर परिवार आधुनिक झारखण्ड क देवघर जिला अंतर्गत सारथ थाना के खैरबनी ग्राम में रही रहल छे.परिणाम स्वरुप हम सब घर म मैथिलि नै बजे छि.हम सब विशुद्ध अंगिका सेहो ने बजे छि.हमर बोली में किछु मैथिलि आर किछु अंगिका के सम्मिश्रण छे.ते दुआरे मैथिलि लिखे में जे किछु त्रुटी होए ओकरा क्षमा करू।मुदा हमारा इ मंच पर आमंत्रित के क जे सम्मान हमरा अपने देलोंओकरा लेल हम धन्यवाद ज्ञापित करे छि.आशा छे इ सम्बन्ध समय क संग आर प्रगाढ़ होयत।मैथिल आर मिथिला क योगदान सराहनीय।
शुभकामना सहित 
अमरनाथ झा
दिल्ली विश्वविद्यालय. 

कविता- हे हमर प्रेयसी- आशीष अनचिन्हार

कविता

हे हमर प्रेयसी

जहिना
फूल झहरि-झहरि खसैत अछि
माटि पर
ओकरा सजबए लेल


मेघ हहरि-हहरि
बुन्नी बनि जाइत छैक
फसिलक लेल


सुगंध उड़ि-उड़ि
बसात मे मीलि जाइत छैक
ओकर सौन्दर्यक लेल


तहिना
हे हमर प्रेयसी, हे हमर सोन
आउ
हम दूनू मीलि जाइ
एक दोसरा मे
नव जिनगी , नव चेतनाक
लेल

अकाल- कीर्तिनारायण मिश्र

कीर्तिनारायण मिश्र- अकाल

सड़क पर हड्डी चिबबैत
छौंड़ा सभ
कुकूर आ पुलिसकें
डण्डा देखा रहल अछि
ऐंठल अंतड़ी वाली जनता
भूक-हड़तालक धमकी दऽ रहलि अछि।

बाँझ सरकार
विदेशक आश्वासन सँ
विवाह रचा रहलि अछि
’लूप’ लागल धरती
तथा निवीर्य्य अकाशक बीचमे
देशक नपुंसकता जोरसँ दहड़िमारि रहलि अछि।
आऽ समय एहि सभसँ असम्पृक्त्त
नशामे मातल
मैदानमे जा कए सूति रहल अछि।

कुमार सौरभक टटका आलेख : प्रायश्चितक क्षण

लोकतांत्रिक राजनीति केर संदर्भ में मिथिला
प्रायश्चितक क्षण


1952 सॅ एखन धरि मिथिलाक कोनो समस्या,कोनो आकांक्षा प्रखर रूपें चुनावी मुद्दा बनि नहि उभरि सकल अछि । अशिक्षा, निजी स्वार्थ, जातिगत द्वेष आदि एकर प्रमुख कारण मानल जा सकैछ । एखन धरि मुख्यतः दलगत पूर्वाग्रह, जाति-पाति, व्यक्तिगत सम्बन्ध आ लाभ, दबंगइक दबाव, स्त्री उम्मीदवार केर देहक आकर्षण आदिक प्रभाव वा विकल्पक अभाव मे मतदान कयल जाइत रहल छैक । बिकासक मामला मे अहि क्षेत्रक उपेक्षाक लेल अहि तरहक प्रवृत्ति सबसं बेसी जिम्मेदार अछि । अहू से बेसी दुर्भाग्यपूर्ण थिक अहि क्षेत्र मे, विकासक काज आ आकांक्षा पूर करबाक प्रयास करय वाला व्यक्ति आ दल केर घनघोर उपेक्षा । चिर प्रतीक्षाक उपरांत मैथिलीक अष्टम् अनुसूची मे प्रवेश आ कोसीक पूब आ पच्छिम मे बंटल मिथिला के जोड़बाक महत्वाकांक्षी योजना- कोसी रेल सेतुक निर्माण लेल स्वीकृति देबय वाला गठबंधन सरकारक अहिठामक चुनाव मे चित बजार खसब, एकर उदाहरण थिक । अहि तरहक अनुभव सॅ नेता सबहक अकर्मण्य चरित्र बहुत बेसी प्रोत्साहित होइत छैक । कोनो क्षेत्रक प्रति ई धारणा जे अहिठाम काज करब नहि करब कोनो मुद्दा नहि थिक ओहि क्षेत्र लेल कतेक घातक भ सकैछ, सहजे अनुमान लगायल जा सकैत अछि । यैह कारण थिक जे मैथिल जनमानसक एकटा मान्य नेता बिहारक मुख्यमंत्री बनलाक बाद उचित अधिकारिणी मैथिली के कात क’, उर्दू के द्वितीय राज भाषा घोषित करबाक अक्षम्य कृत्य क’ पबैत छैथि । समाजवादी आंदोलनक पृष्ठभूमि मे उपजल जातिगत राजनीतिक धुरंधर एकटा गप्पी नेता मैथिली के बी.पी.एस.सी. सॅ बाहर करबाक दुस्साहस करैत छैथि । वैह नेता क्षेत्रक एकटा जाति विशेष के मोन भरि गरियाबैत छैथि आ निर्लज्जताक हद देखू जे बदलैत राजनीतिक परिदृश्य मे ओहि जाति के समाजक सबसॅ सज्जन जाति कहि आशीर्वाद मांगैत छैथि आ गप्पक राजनीति कतेक प्रभावी भ सकैत से देखा दैत छैथि ।

जूझि रहल अछि मिथिला

1.बाढि सॅ तबाही आ विस्थापनक समस्या.
2.कोसी क्षेत्र मे पीबाक पानिक समस्या (आइरनक अधिकता- स्वास्थ्य लेल सबसॅ पैघ संकट).
3 गरीबी आ भूखमरी.
4.खेतिहरक बदतर स्थिति.
5.अराजक सरकारी शिक्षा व्यवस्था आ विश्वविद्यालयी शिक्षाक कंडम हालत.
6.व्यापक बेकारी आ बेगारीक समस्या.
7.माछ-मखान उद्यमक अधोगति. कोनो तरहक लघु आ कुटीर उद्यम के प्रोत्साहनक घोर खगता.
8.बेमार स्वास्थ्य सेवा.
9.लचर पुलिसिया तंत्र..
10.जर्जर परिवहन व्यवस्था.
11.बिजली संकट.
12.दबंगई आ रंगदारी वसूली.
13.जड़ि तक पसरल भ्रष्टाचार.
14.मैथिली के समुचित इज्जति नहि भेटब.
15.किछु अहिन्दी भाषी राज्य मे एम्हुरका लोक सबहक संग अशोभनीय आ अमानुषिक व्यवहार.
16.नेपाल सीमा सॅ सटल क्षेत्र मे अंधाधुंध तस्करीक माध्यमे घटिया आ अहितकर भोज्य पदार्थ आ समान सॅ अंटल बजार.
17.बंगलादेशी घुसपैठिया सबहक पूर्वोत्तर सीमान्त मिथिला मे
गुपचुप ढ़ंगे पसरैत पैर.
18.पर्यटन क्षेत्रक रूप मे विकसित हेबाक संभावनाक अछैतो
सरकारी उदासीनता.
19. हिटलरी प्रशासनिक व्यवस्था.
20. बिकास काजक काउछ चैलि.

अहि सबहक अतिरिक्त आनो कतेक समस्या प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूपें मुंह बाबि ठाढ़ अछि जे हमर वैयक्तिक सीमाक कारणें इंगित नहि भ सकल अछि । अहि तरहक गंभीर समस्या सबहक निदान लेल हमरा सब कहिया राजनीतिक दृष्टि सॅ संगठित होयब ????????

मित्र, कमजोरी हमरे सबहक आत्मा मे पैसल अछि । जतय जैतुक (दहेज) सन निकृष्ट व्यापारक खुलल मंडी (Open Market) होइ, ओहि ठामक लोकक नैतिक चरित्रक केहेन आकलन कयल जा सकैत अछि ???? मौस, दारू, आ सौ-सौ केर एक दूइ टा नोट पर बिकि जाइ वाला हमसब बदलावक अपेक्षो कोन मुंहे करी ????
ब्लाग धरि पहुंच राखय वाला अपना सब एहेन तथाकथित बुधियार सबहक लेल यैह प्रायश्चित भ सकैत अछि जे अपन गामक आ प्रभावक लोक सबके हाथ जोड़ि जोहारि करी - “ भैया, कका, ददा बहुत भ गेले !!!! कम सॅ कम अहू बेर अपन चुनावी दायित्व बुझियौ !!!!!!!!!!!!!! ”

नीक होयत जे हम सब अहि बेर (लोकसभा चुनाव-2009 मे) सब तरहक पूर्वाग्रह सॅ उपर उठि , उम्मीदवारक व्यक्तिगत छवि आ विकास लेल प्रतिबद्धताक आधार पर मतदान करी आ बेसी सॅ बेसी संख्या मे मतदान लेल निकली ।

Sunday, April 12, 2009

मच्छर चलिसा- मदन कुमार ठाकुर


मच्छर चलिसा





दाेहा


अति आबस्यक जानी के हाेके अति लचार


बरणाे मच्छर सक्‍ल गुणाे दुख दायक ब्यबहार ।


बिना मसहरि दिन हॅू सुन्हूॅ सकल नर्रनार


मक्ष्छर चलिसा लिखक पढ़उ साेइच बिचैर ।।



चाैपाइर्


जय मच्छर भगवान उजागर ।


जय अर्नगिणित हे राेग के सागर ।।


नदियाॅ पाेखैर गंगा सागर ।


सबठाम रहते छी अही उजा गर ।।


नीम हकिम के अही रखबारे ।


डाक्‍टर के भेलाे अतिश्य प्‍यारे ।।


मलेरिया के छी अहा दाता ।


छी खटमल के प्‍यारे भा्रता ।।


जरी बुट्टी से काज नऽ बनल ।


अंग्रेजी दबाइर् जलदी फीट करल ।।


आउल आउट गुडनाइर्ट अपनेलाे ।


फेर अपन अहा जान बचेलाे ।।


दिन दुखि सब धुप में जरैत छैथ


राइर्ताे में बेचैन रहैत छैथ ।।


संझ भाेर अहा राग सुनाबी ।


गॅु र् गॅु कऽ के नाम कमाबी ।।


राजा छैथ या रंक फकिरा


सब के केलाे अपनेही मत धिरा ।।


रूप कुरूप अहा मानलाे


छाेटका बऱका नै अहा जनलाे ।।


नर छैथ या स्वगाेर्कऽ नारी


सब के समक्ष बनलाे अहा भारी।।


भिन्न भिन्न जे राेग सुनेला


डाकटर कुमार फेर शर्मेला ।।


सब दफ्‍तर में आदर पेलाेे


बिना इजाजत के अहा घुस गेलाे ।।


चाट परल जिन्गी से गेलाे


कनिते खिजते परिवार गमेलाे ।।


जर्यजर्यजय हे मक्ष्छर भगवाना ।


माफ करू सबटा जुर्माना ।।


छी अहा नाथ साथ हम चेरा ।


जल्दी उजारारू अहा अपनेही डेरा ।।



दाेहा


निश बंाशर शंकर करण मालिन महा अति कुर


अपन दल बल सहित अहा बसाे कहि जा दुर




मदन कुमार ठाकुर


पट्टिटाेल ह्यभैरर्बस्थान हृ


झंझारपुर ़ मधुबनी


बिहार – 847404


माेर् 09312460150




अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन









जितेन्द्र झा

११ अप्रैल २००९ ।

अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली परिषदक 19 म् सम्मेलनके उदघाटन करैत प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड कहलनि अछि जे भाषाक आधारमे संघीयताक एàतिहासिक निर्णय होब' लागल अछि । शनिदिन काठमाण्डूक ललितपुरमे शुरु भेल दुदिना 19 म अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलनके उदघाटन करैत प्रधानमन्त्री एहन निर्णय होब' लागल अछि से कहलनि ।


मैथिली भाषा नेपालक दोसर पैघ भाषा होइतो उपेक्षित रहल कहैत प्रधानमन्त्री "भाषाक आधारमे संघीयता भेलाकबाद मैथिलीके न्याय भेटत" कहलनि । खस भाषा अन्य भाषाके अतिक्रमण क' रहल दाबी करैत प्रधानमन्त्री भाषाक आधारमे स्वायत्त प्रदेशक निर्माणके बाद आन भाषाक उत्थान हएत बतौलनि । मैथिली भाषा नेपाल आ भारतबीच सेतु रहल हुनक कहब रहनि।


मैथिली भाषाक महाकवि विद्यापतिक प्रतिमा काठमाण्डूमे स्थापित हुअए ताहिलेल सभाहलसं हुटिङ भेलाक बाद प्रधानमन्त्री राजधानीमे विद्यापतिक शालिक स्थापना कएल जएबाक प्रतिबद्धता व्यक्त कएलनि ।


सम्मेलनमे मधेशी जनअधिकार फ़ोरमक सह अध्यक्ष एवं कृषि तथा सहकारीमन्त्री जयप्रकाश प्रसाद गुप्ता मधेशीक मूल समस्या आन्तरिक औपनिवेशीकरण रहल बतौलनि । मधेशक समस्या समाधानक लेल एक मधेश एक प्रदेश अत्यावश्यक रहल कहैत गुप्ता कहलति लडाई एखन बांकी अछि । विगतमे लादल गेल 'एक भाषा एक भेष एक संस्कृति"द्वारे मैथिलीक विकास नर्इं भ' सकल भूमिसुधार तथा व्यबस्थामन्त्री महेन्द्र पासवानके कहब रहनि ।


नेपाल पत्रकार महासंघक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा देशमे संघीय राज्यप्रणाली हएबाक तय रहल अबस्थामे मिथिला राज्य पर जोड देल जएबाक चाही से कहलनि ।

अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली परिषदक उपाध्यक्ष तथा प्रवक्ता धनाकर ठाकुर कहलनि 'मिथिलावासीक संघर्षसं मात्र मिथिला राज्यक स्थापना हएत' । तहिना भारतसं आएल प्रतिनिधि डा राजमोहन झा नेपालमे जाधरि मिथिला राज्यक स्थापना नई हएत ताधरि देशमे कोनो विकास सम्भव नइ रहल दाबी कएलनि । मल्ले के सुन्दर नेवार आ मैथिली संस्कृति मिलैत जुलैत रहलाक कारणà मैथिली भाषा भाषीक लेल नेवारी समुदाय सेहो योगदान देत से आ·ाासन देलनि । एहिके लेल काठमाण्डूमे मैथिलीक महाकवि विद्यापतिके स्मारक बनएबामे सहयोग करबाक प्रतिबद्धता ओ व्यक्त कएलनि ।


ओहि अवसरमे प्रधानमन्त्री मैथिली भाषा, संस्कृतिमे योगदान देनिहार व्यक्तित्वके सम्मानित कएने रहथि । सम्मेलनमे संस्थागत सुदृढिकरणकर्ता मुखीलाल चौधरी, रंगकर्मी रन्जु झा आ मैथिली पढाइ उत्प्रेरक कार्यदल राजविराजके सम्मानित कएल गेल । तहिना भारत बिहारक रहिका निवासी मैथिली आन्दोलन अगुवा चुनचुन मिश्र आ लोकसाहित्यकार डा महेन्द्रनारायण रामके सम्मानित कएल गेलनि।


परिषदक अध्यक्ष भुवने·ार गुरमैताक सभापतित्वमे भेल उदघाटन कार्यक्रममे सम्मेलनक संयोजक रामरिझन यादवले सम्मेलनक औचित्यक विषयमे बाजल रहथि । तहिना कमलकान्त झा, वि·ानाथ पाठक,सम्मानित महेन्द्र नारायण राम, मुखिलाल चौधरीसहितक वक्ता मन्तव्य व्यक्त कएने रहथि । उदघाटन कार्यक्रमक बाद मैथिली सास्कृतिक कार्यक्रम भेल छल ।


सम्मेलन आयोजक समितिक अनुसार नेपालमे सभस बेशी बाजल जाएबला दोसर भाषा मैथिली भारतमे 16 म् स्थानमे अछि । वि·ामें सभसं बेशी बाजल जाएबला भाषामे मैथिली 26 म स्थानमे अछि । वि·ाभरिमे मैथिली बजनिहार साढे चारि करोडसं बेशी रहल अनुमान कएल गेल अछि ।

jitumaithil@gmail.com

Saturday, April 11, 2009

नताशा 02 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)

ललकार -रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'


बाध-वन आ नदी -पहाड़
सउँसे सं आबय ललकार
बारम्बार तोरा धिक्कार
नहि सुनैत छए मिथिलाक चीत्कार ?
बधिर भेल छौ तोहर कान
केहन छए मिथिलाक संतान ?
आंखि रहितो भेल छए आन्हर
हाथ-पएर रहितो तों सब
छए एकदम सं लुल्ह -नांगर
बुद्धि रहितो भेल छए बेबुधिगर
कान कयने छए की तूर सं जाम ?
केहन छए मिथिलाक संतान ?
सीता जनमल एही माटि सं
आओर बनलथि पाहुन राम
यैह थिक राजा जनकक गाम
भेल एही ठाम मंडन-अयाची
आओर ने जानि कते विद्वान
एहन भेल मिथिलाक संतान ।
गबै छए समदाओन आ सोहर
कखन देखेबए अपन जोहर
ध्यान कतय छौ भटकल तोहर
पटना मे तोहर नहि मोजर
दिल्ली तोरा सं अनजान
केहन छए मिथिलाक संतान ?
गुंजल एतय विद्यापतिक गान
धरती अछि पावन मिथिलाधाम
करै एकर तों मान-सम्मान
रोशन कर जग मे एकर नाम
जाग आब भेलौ बिहान
केहन छए मिथिलाक संतान ?

Friday, April 10, 2009

लल्लन प्रसाद ठाकुर- 2



किछु पाठक गणक अनुरोध आ हमरा ई -मेल सेहो आयल छल जे श्री लल्लन प्रसाद जी कs विषय में तथा हुनक रचनाक जानकारी ब्लॉगक मध्यम किछु देबाक लेल। ओना हुनकर एकटा ब्लॉग छैन्ह जाहि केर लिंक छैक : www.lallanprasadthakur.blogspot.com/ मुदा पाठकगणक अनुरोध छैन्ह तs हम हुनक संक्षिप्त परिचय एही ब्लॉग पर सेहो दs रहल छी।


"श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर जी"ओना तs अभियंता छलाह मुदा एकटा अभियंता में एक संगे एतेक रास गुण बहुत कम देखबा में अबैत छैक। ई १९८१ कs गप्प थिक, देश भरि में मैथिलि कs अष्ठम सूचि में स्थानक लेल आन्दोलन चलैत छलैक। एही सन्दर्भ में निर्णय भेल छलैक जे देशक हर क्षेत्र सs प्रधानमन्त्री के नाम पत्र पठायल जायत । लाखक लाख पत्र देशक हर कोना सs मैथिलि भाषा भाषी लिखि कs प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी के पठौलखिन्ह। एही में जमशेदपुरक मैथिल भाषा भाषिक सेहो पूर्ण रूपेण सहयोग रहलैन्ह। विचार भेलैक जे एकटा छोट छीन कार्यक्रम कैल जाय, पोस्टकार्ड पहिनही घरे घर बाँटि देल जाय आ ओहि दिन जतेक तक भs सके पोस्टकार्ड लोक लs कs आबैथ आ जमा करैथ ।कार्यक्रमक भार श्री लल्लन प्रसाद जी के ई कही देल गेलैन्ह जे समय बहुत कम छैक परंच ओ जओं चाहिथिन्ह तs भs सकैत छैक।


समय कम की, बड़ कम छलैक, मुदा जाहि दिन निर्णय लेल गेलय कि कार्यक्रम होयतैक ओहि दिन अपन अभिन्न मित्र श्री बालमुकुन्द जी कs सँग बैसी कs ई निर्णय लs लेल्थिन्ह जे कोन तरहक कार्यक्रम होयतैक। निर्णय भेलैक जे एकटा मैथिलि संगीतक (ऑर्केस्ट्रा) कार्यक्रम कैल जाय, आ हम सब ओहि दिन के संकल्प दिवस के रूप में मनाबी । बालमुकुन्द जी के गेलाक बाद ओहि कार्यक्रमक पहिल गीत सेहो लिखा गेलय। करीब दू सप्ताहक समय छलैक, ओहि में गीत सबटा लिखि कs अपनहि धुन दs आ किछु गीत अपनहि गेनहो रहथिन्ह। बाकी गीत के सेहो कलाकार सब सs तैयारी करा निर्धारित तारीख कs कार्यक्रम भs गेलैक। कार्यक्रम खूब सफल रहलैक। ओहि कार्यक्रमक पहिल गीत वा स्वागत गीत अछि :


"संकल्प गीत "


संकल्प लिय संकल्प लिय
संकल्प लिय यौ,
बाजब मैथिलि
मिथिलाक लेल जियब यौ .....
संकल्प लिय .......२


शांतिमय प्रयास हमर ई ,
सुनिलिय देशक नेता.....३
सूचि अष्ठम में स्थान दियौ
आरो नय किछु कहब यौ ....
संकल्प लिय ........२ ।


लाखक लाख पत्र जाइत अछि
आंखि खोलि कs देखू .........३
आबि गेल समय इंदिरा जी ,
मिथिलाक मान राखू ...३
संघर्ष बढ़त जाँ बात ने मनबय
आरो ने हम सहब यै।
संकल्प ........३।

आ आब तs मैथिलिक स्थान अष्ठमसूचि में सेहो छैक जे की सम्पूर्ण मैथिलि भाषा भाषी कs प्रयास सs भेल छैक।

गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर
संगीतकार :लल्लन प्रसाद ठाकुर

E-mail:

kusum_thakur@yahoo.com
kusumthakur1956@gmail.com

Thursday, April 09, 2009

महग शिक्षा पर एक टा कार्टून

भ्रमित शब्द- सतीश चन्द्र झा


हेरा गेल छल हमर शब्द किछु
फेर आइ घुरिया क’ आयल।
बास भेलै नहि कतौ जगत मे
थाकि हारि क’ अपने आयल।
नुका गेल सब रही नीन्न मे
मोनक कागत सँ उड़िया क’।
केना ? कखन ? सब के ल’ भगलै
आन - आन भाषा फुसिया क’।
आतुर मोन उचटि क’ ताकय
बैसल बाट दूर धरि कखनो।
राति बिराति द्वार के खोलत
छी जागल अबेर धरि एखनो।
पसरल देखि हमर निर्धनता
भागि गेल छल सब उबिया क’।
खोजि रहल छल सुख जीवन केँ
भोग वासना मे बौआ क’।
अर्थ बाँटि सम्मान समेटब
छलै मोन मे इच्छा जागल।
मान प्रतिष्ठा के इजोत मे
भ्रमित भेल सबटा छल भागल।
शब्द अभागल चीन्हि सकल नहि
हम बताह कवि छी वसुधा मे।
बिसरि जाइत छी हम जीवन भरि
की अंतर छै गरल - सुधा मे।
नहि अछि लोभ अर्थ के हमरा
नहि चाही सम्मान जगत के।
निज भाषा केँ स्नेह,कलम सँ
निकलत धार रत्त अमृत के।
हम कविता सँ दिशा दैत छी
दृष्टिहीन व्याकुल समाज के।
जगा रहल छी जे अछि सूतल
गीत गावि क’ बिना साज के।
नहि छपतै कविता जनिते छी
पत्रा पत्रिाका के पन्ना मे।
छपतै नग्न देह नारी के
मुख्य पृष्ट ,अंतित पन्ना मे।
मुदा केना हम कलम छोड़ि क’
मौन भेल आँगन मे बैसू।
केना हेतै किछु व्यथा देखि क’
द्रवित मोन मे नहि किछु सोचू।
कोमल हृदय अपन अंतर सँ
प्रतिक्षण आगि उगलिते रहतै।
पढ़तै कियो लोक नहि तैयो
कलम हाथ केँ चलिते रहतै।

Tuesday, April 07, 2009

गजल - आशीष अनचिन्हार



गजल

इहो अहाँक प्रेम छल पछाति जानल हम
खाली मूहँक छेम छल पछाति जानल हम


आगि लागल घर मे चिन्ताक गप्प नहि
कारण अपने टेम छल पछाति जानल हम


सड़ैत देखलिऐक किच्छो के कादो मे
अपने घरक हेम छल पछाति जानल हम


पिबैत रहलहुँ सदिखन विदेशी शीतल पानि
तैओ गरमी कम्म छल पछाति जानल हम


किछु तत्व कए दैत छैक अनचिन्हार सभ के
कथन मे दम्म छल पछाति जानल हम

कलाकारक स्वागत

मैलोरंग अपन अगिला प्रस्तुति
जल डमरू बाजे नामक नाटक
जून महीनामे क' रहल अछि ।
एहिमे अभिनय करबाक इच्छुक अभिनेता आ
अभिनेत्रीक स्वागत छनि ।
अपन इच्छा मेल वा फोन सँ कहि सकैत छी.
9811774106, mailorang@gmail.com

हर्जे की- अनुजक नाम, काज अहींक थिक - रामलोचन ठाकुर

हर्जे की

चलू तिरंगा कने उड़ा ली हर्जे की।
आजादी के रश्म पुरा ली हर्जे की॥
आजादी के अर्थ कोश मे जुनि ताकी।
आजादी के जश्न मना ली हर्जे की॥
शुल्क-मुक्त आयात स्कॉच-सैम्पेन होइछ।
शिक्षा स्वास्थ्यक शुल्क वृद्धि मे हर्जे की॥
देशक प्रगति विकास विदेशी पूँजी स।
संसद हैत निलाम होउक ने हर्जे की॥
सौ-हजार भसि गेल बाढ़ि मे भसए दिऔ।
राता-राती शेठ बनत किछु हर्जे की॥
रौदी-दाही सबदिना छै रहए दिऔ।
जनता बाढ़ि अकाल मरत किछु हर्जे की॥
गाम-देहातक बात बैकवार्डक लक्षण।
मेट्रो प्रगति निशान देश के हर्जे की॥
नेता जिन्दावाद रहओ आवाद सदा।
देश चलै छै एहिना चलतै हर्जे की॥



अनुजक नाम/ काज अहींक थिक


खएबामे जत्ते
किएक ने होउक तीत
औषध
फल होइते छैक नीक
रोगी कें
बुझा देब ई बात
काज अहींक थिक

मैथिली हैकू- क्षणिका- हाइकू- रामलोचन ठाकुर- गजेन्द्र ठाकुर

1. रामलोचन ठाकुर किछु क्षणिका (हाइकू)

 


१.भोजक पान
सासुरक सम्मान
पुनिमाक चान


२.हाथीक कान
नटुआक बतान
एक समान


३.दूरक चास
गामक कात बास
कोन विश्वास


४.बाँझीक फूल
महकारीक फल
के कहै भल


५.दादुर-गान
डोकाक अभियान
वेथे गुमान


६.हिजरा-नाच
ओकिल केर साँच
की ६ की पाँच




2.गजेन्द्र ठाकुर

१२ टा हैकू आ तकर बाद एकटा हैबून



१.वास मौसमी,
मोजर लुबधल
पल्लव लुप्ता


२.घोड़न छत्ता,
रेतल खुरचन

मोँछक झक्का


३. कोइली पिक्की,
गिदरक निरैठ
राकश थान


४.दुपहरिया
भुतही गाछीक
सधने श्वास


५.सरही फल
कलमी आम-गाछी,
ओगरबाही


६.कोलपति आऽ
चोकरक टाल,
गछपक्कू टा


७.लग्गा तोड़ल
गोरल उसरगि
बाबाक सारा


८.तीतीक खेल
सतघरिया चालि
अशोक-बीया


९.कनसुपती,
ओइधक गेन्द आऽ
जूड़िशीतल


१०.मारा अबाड़
डकहीक मछैड़
ओड़हा जारि


११.कबइ सन्ना
चाली बोकरि माटि,
कठफोड़बा


१२.शाहीक-मौस,
काँटो ओकर नहि
बिधक लेल


हैबून १

सोझाँ झंझारपुरक रेलवे-सड़क पुल। १९८७ सन्। झझा देलक कमला-बलानक पानिक धार, बाढ़िक दृश्य। फेर अबैत छी छहर लग। हमरा सोझाँमे एकठामसँ पानि उगडुम होइत झझात बाहर अछि अबैत। फेर ओतएसँ पानिक धार काटए लगैत अछि माटि। बढ़ए लगैत अछि पानिक प्रवाह, अबैत अछि बाढ़ि। घुरि गाम दिशि अबैत छी। हेलीकॉप्टरसँ खसैत अछि सामग्री। जतए आयल जलक प्रवाह ओतए सामग्रीक खसेबा लए सुखाएल उबेड़ भूमिखण्ड अछि बड़ थोड़। ओतए अछि जन- सम्मर्द। हेलीकॉप्टर देखि भए जाइत अछि घोल। अपघातक अछि डर हेलीकॉप्टर नहि खसबैत अछि ओतए खाद्यान्न। बढ़ि जाइत अछि आगाँ। खसबैत अछि सामग्री जतए पानि बिनु पड़ैत छल दुर्भिक्ष, बाढ़िसँ भेल अछि पटौनी। कारण एतए नहि अछि अपघातक डर। आँखिसँ हम ई देखल। १९८७ ई.।

पएरे पार
केने कमला धार,
आइ विशाल

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