भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

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Thursday, March 13, 2008

नैहर मs ससुराल के बुराई करब ठीक नै अछि

हमर परोसी मधु हर महीना दु महीना म नैहर आबैत छली ! नैहर ऐला के बाद परिवार के बिच अपन ससुराल के बहुत बुराई करैत छथि ! हम सास एहेंन केल्खिंन, हमर ससुर ओहेंन केल्खिंन वगैरह - वगैरह ! दरअसल मधु क लागे छैन की हुनकर ससुराल वाला बहुत ख़राब छथिन ! मधु के माँ - बाबूजी सम्झेत छैथ की ओ अपन बेटी के विवाह गलत घर में के देल्खिंन ! ओ सब मधु के हर बात पर यकींन करैत छथिन, करबो किये न कर्थिन ? मधु हुनका सब के लाडली बिटिया छथिन न ! मधु ससुराज गेला पर नै त अपन सास - ससुर के बात मानैत छथिन नै अपन पति के बात ! हरदम अपन पति स हुनकर माँ - बाबूजी आर दियर - ननद के बारे म शिकायत करैत रहैत छथिन ! मधु के पति हुनका बहुत सम्झेल्खिन तयो मधु म कुनू सुधर नै भेलैन, अंत म मधु के पति हुनका स परेशान भे क हुनका तलाक दै के फैसला केलैठ ! आखिर आई तरहक नोबत किये एलैन ?

इ समस्या खाली मधुवे के नै बल्कि सब युवती के अछि ! जे ससुराल क कहियो मन स नै अपने पावैत छैथ ! लिहाजा ससुराल के सब सदस्य हुनका ख़राब नज़र आबैत छैन ! ओ छोट - छोट बात सब क अपन दिल मए अई तरह वैसे लैत छथिन की ससुराल हुनका जैल के समान महशुस होई छैन ! नतीजा इ की नैहर पहुचते सब के बुराई करब सुरु करैत छैथ ! ऐठाम हम कहे चाहब की यदि हम सब युवती सहनशीलता स काज ली त हमरा सब क ससुराल नैहरो स निक लागत ! यदि हम सब दुनु परिवार के बिच सेतु बने के प्रयाश करी त दुनु परिवार के संबंध म जीवन भर मिठास कायम राहत ! नैहर म माँ - बाबूजी क बेटी के हर शिकायत क गंभीरता स नै लेबाक चाही ! हुनका चाही की अपन बेटी क ससुराल जय स पहिने निक जेका सम्झाबैथ की शादी के बाद हुनकर सास - ससुर हुनकर माँ - बाबूजी छथिन ! आर ननद - देवर , भाई - बहिन ! हुनका बड़ा के सम्मान करबाक चाही ! बेटी क मानसिक रूप स अई तरह तैयार करबाक चाही की ओ ससुराल क अपन घर सम्झेथ !

सास - ससुर के फर्ज छैन की ओ बहू क बेटी सम्झेथ किये की कुनू लड़की के लेल ससुराल हुनकर नया घर होई छैन जते ओ नया सिरा स जीवन सुरु करैत छली !

आई - कैल नौकरी करे वाली युवती क अपन कमाई के अभिमान होई छैन ! हुनका अपन पद आर वेतन के अहंकार नै करबाक चाही अई स पति आर देवर - ननद स संबंध म तनाव के स्थिति बैन सकेत अछि ! बात फेर अलग होई के या तलाक तक पहुच सके य ! नैहर म युवती बहुत किछ करैत छली, ससुराल म हुनका अपन बहुत इच्छा मारे परैं छैन ! हुनका चाही की ओ सब के पसंद - नापसंद के ख्याल रखैत !

हर इन्शान एक समान नै होई छैथ ! हर एक के निक - अद्लाह आदत होई छैन ! ऐकरा झगरा के मुद्दा नै बनेबाक चाही ! अई सब के पीछा आहा के एक मात्र लक्ष्य होबाक चाही की धीरे - धीरे अपने क ससुराल के माहोल के अनुसार खुद क ढालना चाही, आर घर के प्यारी बहु बने के प्रयाश करबाक चाही ! एक दिन ओ समय एबे करत जहिया ससुराल वला आहा के बात क ध्यान स सुनता आर आहा के विचार - विमर्स क महत्व देता ! ससुराल आर नैहर के बिच के नाजुक डोर क सम्हैर क राखब अहि के हाथ म अछि.

Saturday, March 08, 2008

ज़िम्मेदारी

किछ महानुभाव अपन ज़िम्मेदारी कए बोझ समझेत छैथ आर किछ महानुभाव ओकरा अपन जीवन के उद्देश्य अपन कर्म आर कर्तव्य ! आइठंम सवाल इ नै अछि की के की मानैत छैथ, सवाल इ अछि की एके बात के लेल इ अलग -अलग नजरिया किये ?

बोझ या जीवे के उद्देश्य - हर काज के साथ जिम्मेदारी जुरल अछि ! बिना जिम्मेदारी कs पूरा केना कुनू काज मs सफलता के उम्मीद बैमानी अछि ! आब इ आहा क सोच्बाक अछि की काज जिम्मेदारी स करबाक चाही या बोझ समझ कs ....

जना की हम ककरो चर्चा करे छी त हुनकर छवि ध्यान मs आइब जैत अछि ! उधारण स्वरुप कुनू बच्चा के चर्चा करला पर ओकर मासूमियत, ओकर शरारत, ओका भोलापन सब स्मरण भो जाय यs ! बात कुनू मित्र के करू त हुनकर सज्जनता, आचरण व्यवहार सब हमरा सब के ध्यान म आइब जैत अछि ! ओहिना जखन कुनू कामयाबी के बारे म कुनू कामयाब आदमी के बारे म हमसब चर्चा करेत छलो त पबे छी सब के पाछा हुनकर जिम्मेदारी के हाथ छैन ! जखन - जखन स्वतंत्रता के चर्चा चले य तs ओई मए जै क्रांतिकारी के नाम बच्चा - बच्चा के जुबान पर होई छैन ओ खाली अई लेल की ओसब जे जे जिम्मेदारी लेलैथ रहे ओकरा बखूबी समझल्खिंन आर पूरा तन - मन आर जान न्योछावर करे हेतुओ ओ अपन जिम्मेदारी स कखनो पीछा नै हटलेथ !


हम त इये कहब कुनू भी काज कs जिम्मेदारी स करे के प्रयाश करी ! चाहे काज पैघ हुवे या छोट जिम्मेदारी स करल गेल काज के मज़े किछ आर होई य ! जिम्मेदारी स काज करै वला मए विवेकशीलता, आत्मविश्वास आर सकारात्मक सोच के अमूल्य धरोहर हुनकर मार्ग प्रशस्त करैत खुद हुनकर काज म कामयाबी के मिसाल बैन क सदैव हुनकर मनोबल उंचा राखे छैन ! आई जतेक अविष्कार हमरा सब के बिच अछि ओकरो करे वला कियो सधारने इन्सान रहथिन ! आई नव - नव तकनीक नव - नव अविष्कार, हर क्षेत्र म दिनोदिन प्रगति के नव नव रास्ता तखने खुलल य जखन हमरा सब क अपन अपन जिम्मेदारी के समझक अहसास भेल अछि !


आई कियोभी चाहे आदमी, संस्था, समाज या देश अपन जिम्मेदारी कए समझे बिना किछ भी हासिल नै के सके छैथ ! एक छोट सन क देश जापान जकरा पूर्ण रूप स तहस - नहस करे म कुनू कसर बांकी नै राखल गेल, ओ फेर आर पहिने स कही ज्यादा उन्नत रूप मए विश्व भैर म अपन स्थान बनेना अछि ! कुन दम पर ? यकीनन अपन जिम्मेदारी स उद्देश्य समेझ कs ....

अहिलेल कहेछलो आहू अपन जिम्मेदारी पूरा करे म कुनू कसर बांकी नै राखी ! यदि अपने क इ बोझ महसूस हुवे त यकीनन आहाके ओकरा बारे म आगा किछ भी सोच्बाक व्येथ अछि ! आहा ओई काज क ओहिठाम छोइर क चैन के निंद ली इये आहा के लेल बेहतर हेत ! कियेकी जखन आहा अपन आचरण आर व्यवहार मए कुनू बदलाव नै लाबे चाहे छी त कम स कम अपन समय बर्बाद नै करू ! पुरातन काल मए कतेक लड़ाई भेल, जते जिम्मेदारी स काज करल गेल ओते हुनका सब क जीत मिललैन आर जते जिम्मेदारी ठीक ढंग स पूरा नै भेल ओई ठाम परिणाम मए मिललैन - हार

अपने कs माने परत यदि आदमी कुनू जिम्मेदारी अपन इच्छा स लैत छैथ त ओ हुनकर ताकत आर जीवन जीवे के उद्देश्य बैन जाय छैन ! मुदा यदि कुनू जुम्मेदारी ज़बरन लिए परे त ओ बोझ महसूस हुवे लागे य ! सवाल जिम्मेदारी के अहसास के अछि ! जकरा संक्षेप्त म कहल जाय त अपन हालत आर हालात के जिम्मेदारी यदि आहा स्वयं पर ली तखने अई मs सूधार हेत !!

Friday, March 07, 2008

खिस्सा जीवनक ( मैथिली भाषा लघु कथा)


एक आदमीक घर एक सन्यासी पाहुन बनि कs एलखिन। रातिमे गपशपक बीच ओऽ संन्यासी आदमीसँ कहलखिन की अहाँ एहि ठाम ई छोट-मोट खेतीमे की लागल छी ! साइबेरियामे किछु दिन पहिने हम यात्रा पर रही, ओइ ठाम जमीन एतेक सस्ता अछि मानू अहाँकेँ मँगनीम्वे भेट जाएत! अहाँ अपन ई जमींन बेचि कऽ साइबेरिया चलि जाऊ ! ओहिठाम हजारो एकड़ जमीन भेट जाएत एतबे जमीनमे ! ओइ ठामक जमीन बड उपजाऊ छइ, आर ओइ ठामक लोक एतेक सीधा-साधा की करीब-करीब जमींन मुफ्तेमे दऽ देत! ओइ आदमीकेँ वासना जगलनि! ओऽ दोसरे दिन अपन सभ जमीन बेचि कऽ साइबेरिया चलि देलथि! जखन ओऽ साइबेरिया पहुँचला तँ सन्यासीक गप हुनका सत्य लगलनि! ओ ओइ ठामक आदमीसँ पुछलखिन की हम जमीन कीनय लय चाहए छी ! तँ हुनका जबाब भेटलनि, जमीन कीनए हेतु अहाँ जतेक पाइ अनलहुँ यऽ ओकरा राखि दियौ ; आर जीवनक हमरा लग खाली इएह उपाय अछि की जमीन बेचि दी! काल्हि भोर सूरज उगइ पर अहाँ निकलब आर साँझ सूरज अस्त होएबा धरि जतेक जमीन अहाँ घेर सकी घेर लेब ओऽ अहाँक भऽ जाएत!
बस चलैत रहब .........साँझ सूरज डूबए तक जतेक जमीन अहाँ घेर सकब घेर लेब ओऽ अहाँक भऽ जाएत! बस शर्त ई अछि की जतएसँ अहाँ चलब शुरू करब साँझ सूरज डूबएसँ पहिने अहाँकेँ ओही ठाम वापस आबए पड़त !
ओऽ आदमी राति भरि सूति नञि सकलाह, सत्य पुछू तँ यदि हुनका जगह पर अहूँ रहितहुँ तँ ओहिना होइतए; एहेन क्षणमे कियो सुति सकैत छथि? ओऽ आदमी राति भरि योजना बनाबैत रहलाह की कोन तरहसँ कतेक जमीन घेरल जाय! भोर होइते पूरा गामक लोक जमा भऽ गेलखिन। जहिना सूरज उगलथि ओऽ आदमी चलब शुरू केलाह ! चलएसँ पहिने ओऽ रोटी आर पानि सभ संगमे लऽ लेलथि रहए ! रास्तामे भूख प्यास लागै पर सोचने रहथि चलिते-चलिते भोजनो कऽ लेताह! हुनकर खाली इएह सोचब रहनि की कुनू भी स्थितिमे रुकनाइ नञि छइ ! चलैत-चलैत आब ओऽ दौड़ब शुरू कऽ देलखिन सोचलथि बेसी जमीन घेर लेब ! ओऽ दौगैत रहलाह, सोचने रहथि ठीक बारह बजे घुरि जाएब , ताकि सूरज डूबैत-डूबैत वापस पहुँचि सकी ! बारह बाजि गेलनि, ओऽ मीलो चलि चुकलथि रहए, मुदा वासनाक कोनो अंत छइ ? ओऽ सोचऽ लगलाह, बारह तँ बाजि गेलए आब लौटबाक चाही ; मुदा सोझाँ बला जमीन बड़ उपजाऊ छइ कनी ओकरो घेर ली! लौटेत समय कनी तेजीँ स दौगए पड़त आर की एके दिनक तँ बात छइ तेजीसँ दौग लेब !
दौड़ए के चक्करमे ओऽ भूख-प्यास सभ बिसरए देलखिन, नञि ओऽ किछु खेलथि नञि पिलथि बस दौगेत रहलाह! रास्तामे ओऽ रोटी पानि सभ फेक देलखिन ! बस लगातार दौगैत रहलाह। एक बाजि गेलनि मुदा हुनका घुरऽ के मोन नञि होइत रहनि, किएकी आगाँक जमीन आर सुन्दर-सुन्दर रहए ! मुदा आब ओऽ लौटएक प्लान बनेलथि; दु बजे ओऽ लौटब शुरू केलन्हि! हुनका डर सताबए लगलनि की घुरि सकब की नञि ! ओऽ अपन सभ ताकति वापस दौगएमे लगा देलथि ; लेकिन तागति ख़तम होइक करीब रहनि ! सुबहेसँ दौगैत-दौगैत हाँफऽ लगलाह, ओऽ घबराबऽ लगलाह की सूरज डूबए धरि घुरि सकब की नञि ! दुबारा अपन सम्पूर्ण तागति दौगएमे लगाऽ देलथि मुदा आब सुरजो डूबए लगलाह .......! बेशी दूरीयो आब नञि बचलनि, ग्रामीण सभकेँ ओऽ देखऽ लगलाह ! सभ गामक लोक हुनका आवाज़ पर आवाज़ दैत रहनि, सब हुनका उत्साहित करैत रहथिन आबि जाऊ ......आबि जाऊ। ओऽ आदमी सोचए लगलथि की अजीब आदमी एहिठामक छथि ! ओऽ अपन अंतिम दम लगाऽ देलथि, एम्हर सूरज डूबैत छथि आर ओम्हर ओ दौगैत छथि! सूरज डूबैत - डूबैत पाँच - सात गज पहिने ओऽ खसि पड़लाह, तैयो दम नञि तोड़लथि। आब हुनकासँ उठल नञि जाइ छनि, किछ दूरी बाँकी देखि ओऽ घुसकैत- घुसकैत पहुँचए के प्रयास करए लगलाह! सूरजक अन्तिम किरण विलिप्त होइसँ पहिने हुनकर हाथ ओहि जमीन पर पड़ि गेलनि जतएसँ ओऽ दौगब शुरू केलथि रहए ! एक तरफ सूरज डूबल दोसर तरफ हुनकर अंतिम साँस सेहो हुनकर साथ छोड़ि देलकनि। ओऽ मरि गेलाह, बहुत मेहनति केलखिन रहए ! शायद ह्रदयक दौरा पड़ि गेलनि ! ओइ ठाम जमा गामक सब सोझ-साझ कहाबए बला ओऽ दौगएक चक्करमे भूख-प्यास सभ बिसारि देलखिन नञि ओऽ किछ खेलथि नञि पिलथि बस दौगैत रहलाह ! रास्तामे ओऽ रोटी-पानि सभ फेक देलखिन ! बस लगातार दौड़ैत रहलाह। एक बाजि गेलनि मुदा हुनका घुरबाक मोन नञि होइत रहनि, किएकी आगाँक जमीन आर सुन्दर - सुन्दर रहए ! मुदा आब ओऽ लौटेबाक प्लान बनेलथि; दु बजे ओऽ लौटब शुरू केलाह ! हुनका डर लागऽ लगलनि की घुरि सकब की नञि ! ओऽ अपन सब ताकति वापस दौड़एमे लगाऽ देलथि ; लेकिन ताकत ख़त्म हेबाक करीब रहनि ! भोरेसँ दौड़ैत - दौड़ैत हाँफऽ लगलाह, ओऽ घबराबए लगलाह की सूरज डूबए तक घुरि सकब की नञि ! दुबारा अपन सम्पूर्ण तागति दौड़ैमे लगाऽ देलथि मुदा आब सुरजो डूबए लगलाह .......! बेशी दूरियो आब नञि बचलनि। ग्रामीण सबकेँ ओऽ देखए लगलाह ! सब गामक लोक हुनका आवाज़ पर आवाज़ दैत रहनि, सब हुनका उत्साहित करैत रहथिन आबि जाऊ ......आबि जाऊ। ओऽ आदमी सोचए लगलथि, की अजीब आदमी एहिठामक छथि ! ओऽ अपन अंतिम दम लगाऽ देलथि। एम्हर सूरज डूबैत छथि आर ओम्हर ओ दौड़ैतत छथि ! सूरज डूबैत - डूबैत पाँच - सात गज पहिने ओऽ खसि पड़लाह तैयोदम नञि तोड़लथि। आब हुनकासँ उठल नञि जाए छनि। किछु दुरी बाँकी देख ओऽ घुसकैत-घुसकैत पहुँचए के प्रयास करए लगलाह! हँसैत-हँसैत आपसमे बात करऽ लगलाह की अइ तरहक पागल आदमी आबिते जाइत रहैत छथि !ई कुनू नव घटना थोड़े अछि ! अक्सर लोग खबर सुनला पर आबैत रहथि आर अहिना मरैत रहथि ! ई कुनू अपवाद नञि, नियम रहए ओहि सब जमींदारक ! कियो ऐहन नञि भेलाह जे ओऽ जमीनकेँ घेरि कऽ ओकर मालिक बनलाह ! ई (लघु कथा) खाली कहानी मात्र न्ञि अछि ! ई घटना हमर, अहाँ आर सम्पूर्ण संसारक कहानी छी। हमर सभक जीवनक कहानी छी ! हुनके जेकाँ आइ हम सभ कऽ रहलहुँ-ए! हुनके जेकाँ जमीन घेरए के पाछाँ दौगि रहलहुँ-ए की कतेक जमीन घेर ली ! बारह बाजए-ए , दुफरिया होइ-ए, घुरए धरि समय भेलाक बाबजूद कनी आरक चक्करमे हम सब दौगि रहल छी ! ओकरा पाछाँ भूख प्यास सब बिसारि दए छी ! सत्य पुछू तँ हमरा अहाँक लग जीबए लेल समय नञि अछि ! हमसब चाहतक पीछाँ भागि रहलहुँ-ए! कहियो हमसब संतुष्ट नञि भऽ रहलहुँ-ए, हुनके जेकाँ हमर अहाँक सोच अछि, एहिसब चक्करमे गरीब - धनिक सब भूखे मरि रहलहुँ-ए कियो अपन जीनन जी नञि पबैत छ्थि ! जीबए हेतु कनी विश्रान्ति चाही ! जीबए लेल कनी समय चाही, जीवन मँगनी भेटए-ए बस ज्ञान भेनाय जरुरी अछि !!

चलू किछ बात करी

बिना बात - चित के परिवारिक रिश्ता म करुवाहत आम बात अछि ! इये करुवाहत जन्म दै य अवसाद आर तनाव जेहेंन परेशानी क ! जरुरी अछि की परिवार के सब सदस्य स्वस्थ माहोल म किछ देर बैस क बातचीत करी ! एक दोसर स बात बाँटी ताकि रिश्ता टुकरा म बटे स बचे ! आई समाज के लगभग हर परिवार के सदस्य म तनाव देखई लए मिले य ! बेटा बाप स, बेटी माँ स, पत्नी पति स, त भाई बहिन स रुसल रहेत छैथ ! इ सब समस्या के मूल कारण अछि की किनको पास दु घडी बैस कए बातचीत करै के फुरसत नै छैन ! हम सब टीवी या अपन - अपन कमरा तक सीमित भेल जे रहलो य ! परिवार के बिच संवादहीनता परसल अछि जकरा कारण हम सब एक दोसर के भावनात्मक रूप सए वंचित छी ! माँ - बाबूजी आर बच्चा सब के बिच म एक शून्य उत्पन्न भेल जे रहल अछि ! माँ - बाबूजी बच्चा सब स अनावश्यक बातचीत करब नै चाहेत छैथ ! खाली जरुरी बात पुइछ क रैह जाई छैथ ! जखन की माँ - बाबूजी क बच्चा के हरेक बातक जानकारी होनै चाही ! बच्चा पर ध्यान राखब हर माँ - बाबूजी के फर्ज होई छैन ! जातक आहा अपन बच्चा स बात चित नै करबे त ओ अपने क अपन मन के बात कोना बतेत ? खाश के क युवावस्था प्राप्त करे बला आहा के बच्चा के लेल इ परम आवश्यक अछि की आहा हुनका स बात चित करैत रहू ! ताकि अपने क पता चले ओ कते जैत छैथ, की पहिनैत छैथ, हुनकर के के संगी - साथी छैन आर हुनकर कथी कथी म रूचि छैन इ सब जानकारी राखब हर माँ - बाबूजी के लेल परम आवश्यक अछि ! माँ - बाबूजी के फर्ज छियेंन की ओ अपन जायज बात बच्चा क बताबैथ ! अगर अपने गृहिणी छी त आई दिन म आहा की सब काज केलो, के के दिन म एलेथ आदि चर्चा सब करबाक चाही ! कतेक बेर त देखल गेल य की पत्नी - पति आपसे मए एक - दोसर क नै जानैत छथिन ! किये की ओ आपस म एक - दोसर के बिच कुनू चर्चा नै करैत छैथ ! या करैतो छैथ त कम - सम, पति - पत्नी के रिश्ता भोजन के लिया, कपड़ा धोई लिया बस अहि ठाम तक सीमित अछि ? आई स्थिति म रिश्ता म दुरी बढ़ने स्वाभाविक अछि ! किनको मुह स सुनलो की " हमर इये प्रयाश रहे य की जै घर म बाबूजी बैसल रहैत छैथ ओई घर म हम नै बैसी" याद राखु की इ स्थिति बुजुर्ग लोकैंन क परेशां करे य ! अहिलेल वृद्धावस्था मए हर बुजुर्ग क़ शिकायत रहै छैन की बच्चा माँ - बाबूजी के पास नै बैसैत छैथ !


याद राखी की संवादहीनता क वैचारिक मतभेद बढ़ई य जे अंत मए भावनात्मक दुरी म बदैल जैत अछि ! माँ - बाबूजी आर बच्चा के बिच यदि आरंभ स संवादहीनता के स्थिति पैदा नै हुवे त अंत तक वैचारिक आदान - प्रदान कायम रहत ! साथे नया पीढ़ी म पनैप रहल अवसाद, तनाव जेहेंन परेशानी के हल सेहो मिल जेत !!

Thursday, March 06, 2008

आहा के हँसब कमाल रहे साथी




आहा के हँसब कमाल रहे साथी !
हमरा आहा पर मलाल रहे साथी !!

दाग चेहरा पर दे गेलो आहा !
हम त सोच्लो गुलाब रहे साथी !!

रैत मs आबई अछि अहि के सपना !
दिन मs अहिके ख्याल रहे साथी !!

उइड़ गेल निंद हमर रैत के !
आहा'क एहने सवाल रहे साथी !!

करै लए गेल छलो दिलक सौदा !
कियो आयल छलैथ दलाल साथी !!

आहा के हँसब कमाल रहे साथी !
हमरा आहा पर मलाल रहे साथी !!

Wednesday, March 05, 2008

जीवन के उद्देश्य आर आहाक आत्मविश्वास

प्रिय मिथिला बंधूगन......
कुनू भी सफलता ओहिना हाथ नै लागै छई, ओकरा हेतु आवश्यक अछि की अहाक उद्देश्य स्पष्ट हुवे आर आहा क आत्मविश्वास हुवे की आहा जे रास्ता चुन्लो य ओई पर आहा तमाम व्यवहारिक - अव्यवहारिक रुकावट के बावजूद चलैत रहब !

मुदा की स्पष्ट आर आत्मविश्वासी होनै एतेक आसान अछि ? सकारात्मक सोच ओहिना विकसित नै होइत छल ! कतेक हीन भाव स आई के प्रतियोगिता पूर्ण समय मए युवा लोकेन ग्रसित रहैत छैथ ! सकारात्मक सोच के लेल सर्व प्रथम आवश्यक अछि अपने क जानै परत की आहा मए की कमि आर की खूबी अछि !

आत्मविश्वास बढेनैय खाली आहा के हाथ म अछि ! ओकरा लेल आहा क कनी सामाजिक आर मिलनसार बने परत ! लोग सब स मिल्योन, हुनकर सब बात सुनियोंन, अपन बिचार दियो, हुनकर बिचार सुनियो ! अई तरह स अपने क महसूस हेत की आहो क लोग सूनेत छैथ ! आहा के विचार क सम्झेत छैथ, आहा स ओ प्रभावित होइत छैथ ! लोग स गर्मजोशी स मिलल करू, लोग आहा स गर्मजोशी स मिलता त आहा क निक लागत ! हमर कहे के मतलब अपने क अपन आप म उद्देश्य के लेल ईमानदार होबाक चाही !

आहा अपन वर्तमान आर भविष्य सs लगाव राखु ! अपन सामर्थ्य क ध्यान म राखैत भविष्य के उद्देश्य निर्धारित करू ! अई लगाव क लगन मए बदले दियो ! हमर मतलब आहा पहिने अपन लक्ष्य सुनिश्चित करी तकर बाद तन - मन - धन स ओकरा हासिल करे मए जुटी !

लक्ष्य मिल्ला के बादो भविष्य के तरफ देखब बंद नै करी कारन आहाक सफलता कुंठित भे जेत ! सफलता के खाली एके सीढी नै होई छई, इ अंतहीन सिलसिला अछि जे हर सीढी के बाद आहा क नया आत्मविश्वास प्रदान करत ! जना की बच्चा पहिने एके कदम चालला पर गीर जैत छैथ, मुदा लगन के कारन चल्नै सिखेत छैथ ! पहिने दु फेर चैर फेर एक निश्चित दुरी ......... फेर किछ दिन म ओ दौरे लगेत छैथ ......... मुदा की ओ फेर चुप बैसैत छैथ ? नै किछ दिन के बाद ओ साईकिल चलाबैत छैथ .... मतलब इ सिलसिला कहियो रुके नै छैन !

निराशा सफलता के लेल सबसे बेसी घातक होई य ! निराश व्यक्ति समर्थ भेलो पर असमर्थ होइत छैथ ! निराशा स बचनै जरुरी अछि, चाहे ओकरा लेल अपन अहम त्यैग दोसर स मददे किये न लिए परे ! ज्ञानअर्जन के कुनू सीमा नै अछि, ज्ञान स आत्मविश्वास बढ़ैत अछि !

अगर आहा अपन उद्देश्य के प्रति समर्पित आर स्पष्ट छी त कुनू तरहक विरोध के परवाह नै करी ! आत्मविश्वास के बिज बचपन स मन म होई य, बस ओकरा सिंचेत - रोपैत रहे के जरुरत अछि ! ओ फल्बे - फुल्बे करत अई तरह स अपन लक्ष्य क निर्धारित करैत निराशा के उपेक्षा के क अपन उद्देश्य प्राप्त करे हेतु सक्रिय रहू, एक न एक दिन सफलता आहा के कदम चुम्बे करत॥


हम जीतमोहन जी के आभारी छियेंन जे ओ इ मैथिली ब्लोग
मैथिल और मिथिला " बनेलैथ आर ओई पर हमरो सब क लेखक के रूप म आमंत्रित केलैथ ! समस्त मिथिला वासी स हमर आवाहन अछि की अपनों मैथिली भाषा के प्रति जागरूकता देखाबी !!

धन्यवाद" जय मैथिली, जय मिथिला !!

Monday, March 03, 2008

छोट - छोट बात

अपन सबहक़ जीवन इश्वर के देल एक सर्वश्रेष्ठ उपहार अछि ! अई जीवन रूपी उद्यान क सुगंध सs परिपूर्ण बनाबई हेतु आर खुद क संतुष्ट राखै के लेल किछ बात ध्यान म राखब अति आवश्यक अछि ! अगर हम सब इ बात क सदैव ध्यान म राखी त निश्चित रूप स हम सबतरह सs आत्मिक शांति के सुख प्राप्त के सकब ! कखनो किनको स किछ प्राप्त करे के आशा नै करबाक चाही ! कियेकी इ जरुरी नै अछि की किनको पर करल गेल अपने के अपेक्षा हरदम पूरे हुवे ! आशा के विपरीत भेला पर यदि आहा के मन मए दुःख होई या त किनको दोसर स हम कुनू अपेक्षा करबे किये करब ?

हमेशा धीरज स काम लेबाक चाही, कियेकी रास्ता लम्बा जरुर होइत अछि मुदा अंतहीन नै ! कुनू कदम उठावे स पहिने भली भाति सोइच - विचैर लेबाक चाही

क्रोध क अपन वश म राखी कियेकी क्रोध मुर्खता स आरंभ आर पश्चाताप पर समाप्त होइत अछि !

सदैव याद राखी की "मधुर वचन अछि औषधि आर कटू वचन अछि तीर" इ शब्द क ध्यान म रैख क बाजी !

शेक्सपियर कह्लाखिन रहे " संक्षेप बुद्धिमत्ता के आत्मा होइत अछि ! आवश्यकता स अधिक बात किनको सुने हेतु बाध्य नै कारियोंन ! कहल गेल अछि वार्तालाप जतेक लम्बा होइत अछि ओकर प्रभाव ओतेके कम होइत अछि !

अपन प्रशंसा करे के भूल नै करी ! आई स आहा दोसर पर प्रभाव नै डेल सकब, सामना बाला क खुद पता चले दीयोंन की आहा एहेंन सीधा सरल व्यक्तित्व कतेक गुण स परी पूर्ण छी ! हुनका आहाके बरे म खुद अनुमान लगबे दीयोंन !

परनिंदा, आलोचना नै करी, दोसर के दोष निकाले के पाछा नै रही ! इ सब आदत उन्नति आर सफलता म बाधक सिद्ध होइत अछि !

इष्या आदमी कs ओही तरह खोखला बनबैत अछि जय तरह लकड़ी क दीमक ! इ भावना नै हमरा प्रसन्नता देत अछि नै दोसर कए ! हमरा सब क दोसर के सुख म सुखी, आर दोसर के दुःख मए दुखी होबक चाही !

प्रेम जीवन के सब कठिनाई आर समस्या क आत्मसार करैत अछि ! सदैव प्रेम के भावना रख्बाक चाही !

हमेशा आत्मविश्वासी रही, आत्मविश्वास जीवन के हर क्षेत्र म सफलता के ले जरुरी अछि ! जखन धन , ज्ञान , साथ नै दै छई तखन आत्मविश्वास काज आबे य !

दोसर के हित म अपन हित देखल करू , किनको दोसर के दुःख म अपन सुख के त्याग बहुत संतोष दै छई ! इ सच्ची सेवा कह्लाबे य ! दोसर के सेवा करबाक चाही किये की हर मनुष्य म इश्वर विधमान रहे छथिन ! किन्कारो आंसू पोछब मुसीवत म सहायता करब इश्वर के प्रार्थना के तुल्य होई छई !

Friday, February 29, 2008

बजट भ गेल पेश

चलू, एही सरकार के,
अन्तिम बजट भ गेल पेश,
जे आशा छल, वैह भेटल,
बड नई लागल ठेस॥

गाडी-मोटर भ गेल सस्ता,
रोड पर बढ़त रेस,
धुआं उडेनाय महग भेलैन
जे सिगरेट लेता लेस॥

मोबाईल, कंप्यूटर, भ गेल सस्ता,
सब ब्लॉगर करू ऐश,
कर्जा माफी सं पता नई,
किसान के कते खत्म हतैइन क्लेश॥

देखी चुनाव अगिला बरख,
चिदंबरम धेलाईथ दानी के भेष,
देखल जाय महगाई स कहिया तक,
त्रस्त रहत ई देश॥

बजट के स्वाद लिय ....

बजट २००८ - २००९ (व्यापार)

आई दिनांक २९/०२/२००८ कs वित्तमंत्री पी.चिदंबरम २००८ / २००९ के बजट पेश केलैठ ! देखल जाई त बजट के मुख्य केन्द्र बिंदु रहा किसान आर अल्पसंख्यक वोट बैंक ! आगामी लोकसभा चुनाव कs ध्यान म राखेत कर्ज के दलदल मए डुबल किसान लोकेन के लेल ६० हजार कड़ोर रुपैया कर्ज माफ करे के घोषणा केलेथ वित्तमंत्री पी.चिदंबरम ! वेतन भोगी लोकेन कs आयकर म बहुत राहत मिललेंन दलित, पिछरल, आर अल्पसंख्यक के कल्याण के वास्ते योजना के लेल खजाना खोइल देल गेल अछि ! वित्तमंत्री पी.चिदंबरम संप्रग सरकार के बजट म चैर कड़ोर किसान के कर्ज माफ करे के ऋण राहत आर माफी योजना के घोषणा केलेथ ! कर्मचारी आर मध्य वर्ग कs खुश राखै के लेल डेढ़ लाख रुपैया सालाना के व्यक्तिगत आय कs कर सs पूर्ण रूप स मुक्त के देलखिन ! महिला क आब १.८० लाख आर बुजुर्ग क २.२५ लाख तक कुनू कर नै दिया परतेंन ! सही मायने म देखल जाए त इ बजट मए गरीब आर मध्य वर्ग लोकेन के लेल बहुत किछ करै के प्रयाश केलैथ वित्तमंत्री पी.चिदंबरम !


नीचा बजट के मुख्य अंश प्रस्तुत अछि !!

~* आयकर*~
* आयकर सीमा १ लाख ५० हजार भेल
* महिला के लेल आयकर सीमा १ लाख ८० हजार भेल
* बुजुर्ग के लेल आयकर सीमा २ लाख २५ हजार भेल
* ५ लाख स ऊपर ३० फीसदी टैक्स
* १.५ स ३ लाख तक १० फीसदी टैक्स
* ३ स ५ तक २० फीसदी टैक्स
* माँ - बाबूजी के इलाज पर १५००० के खर्च म ८० - डी के तहत छुट
* बैंक स पैसा निकाले पार टैक्स खत्म

~*सस्ता हेत*~

* जीवन रक्षक दवाई

* सेट टॉप बॉक्स

* डेयरी उत्पाद

* दोपहिया , तिपहिया वाहन

* बस आर कार

~*महग हेत*~

* सिगरेट, तम्बाकू , सॉफ्टवेयर


~*अन्य मुख्य बजट बिंदु*~

* रक्षा बजट १० फीसदी बैढ़ क १ लाख ५६ हजार कड़ोर भेल

* ३०० आई आई टी के विकास हेतु ७५० कड़ोर

* दु गो नया साइंस सेंटर खुलत

* बिजली उत्पाद पर जोर, २८ हजार कड़ोर के निवेश

* इंदिरा आवास योजना म हर आदमी के लेल ३५ हजार

* सिंचाई के लेल २० हजार कड़ोर के योजना

* बागवानी विकाश के लेल ११०० कड़ोर के योजना

* कृषि बीमा योजना के लेल ६४४ कड़ोर के योजना

* विज्ञान के छात्र के लेल ८५ कड़ोर के योजना

* बाल विकाश योजना के लेल ६३०० कड़ोर

* सर्वशिक्षा अभियान हेतु १३१०० कड़ोर

* दुपहर भोजन के लेल ८ हजार कड़ोर

* पोलिया अभियान हेतु १०२२ कड़ोर

* तीन नया आई आई टी खुलत

* आंध्र प्रदेश, राजस्थान, आर अपन बिहार म आई आई टी खुलत

* भारत निर्माण के लेल ३१ हजार कड़ोर के योजना

* ४१० कस्तूरबा गाँधी कन्या स्कूल बनत

केना बची आलोचना के तीर सs

मिथिला "बहिन"

लोकेन के लेल खाश"

समाज मs आहा कतो जाओ आहा क किछ लोग अई तरह के मिलये जेत जिनकर काजे सिर्फ दोसर के किछ नै किछ बुराई करब होई छैन ! इ हुनकर आदत होई छैन जकरा सूइन कs सायद आहा क गुस्सा होइत हेत ! हमर इ ब्लोग लिखे के मकसदे इ अछि की ओई समय आहा गुस्सा नै के क हुनकर बात कs नया मोड़ दीयोंन फेर हुनकर हालत देखु ! वास्तव मs अई तरहक लोग के उद्देश्य इये होई छैन की कुन तरह आहा के भाड़काबे ता की गुस्सा मs अपने हुनका किछ अनर्गल बात कैह दीयों ताकि हुनका आहा के बुराई दोसर लग करै के मोका मिलैंन ! ताहि लेल कहे छी यदि ओई समय आहा अपन गुस्सा पर काबू के लाई छी तस समझू आहा किला फतह के देलो ! किछ ऐहना हमर परोसी के संग भेल रहैंन, एक दिन ओ अपन ननद कs सबके सामना मए दुत्कारलखींन ताहिए सs हुनकर ख़ुशी क ग्रहण लैग गेलेंन ! दरअसल हुनकर ननद हुनका किछ स किछ गाहे - बगाहे सुनबैत रहथिन, बस एक दिन जखन घर म मेहमान रहैंन ओही समय ननद के कटाक्ष के ओ तहेंन जबाब देलखिन की ओही दिन सs ननद के नज़र म बुरा बैंन गेली ! सब मेहमान हुनकर बुराई केलखिन आर फेर त हर कियो हुनका स बात करे स पहिने इ धारणा बने लेल्खिं की ओ बहुत ख़राब छैथ ! हुनकर ककरो स नै बने छैन, हुनका स बात करबे बेकार अछि ! जखन की वास्तव म आई तरह के कुनू बात नै रहेंन ! दरअसल हर आदमी के तम्मना होई छैन की सब हुनका निक कहैंन ! असल म हम सब हमेशा इये समझे छी की सामनेवला जेहेंन हम चाहे छी ओहिना व्यवहार हमरा संग करैथ ! मुदा हमर सभक विरुद्ध कियो यदि किछ बाजेत छैथ ताए हमर सभक दिल तुइट जैत अछि ! हुनका स रिश्ता फीका परे लागे य ! यदि आहा अपन रिश्ता म खटास लाबे स बचे लाय चाहे छी, त किनको प्रति कुनू प्रतिक्रिया व्यक्त करे स पहिने इ जरुर सोइच ली की हुनका की पसंद छैन, आर की नापसंद, इ बात स अपने क खाली हुनकर खुबिया आर खामिया के बारे म पता नै चलत, बल्कि हुनका आहा स्वाभाविक गुण के साथ स्वीकारो के सकब ! आहा के अपेक्षा नै हेत नै टूटत, मगर एकर मतलब इ नै अछि की किन्कारो कुनू भी अनर्गल बात बर्दाश्त करेत रहू ! खाली आहा अपन मन म इ धारणा बने ली की आहा हुनकर बात कखन तक बर्दाश्त के सके छी ! बात सीमा पार होई स पहिने हुनका बाते दीयोंन की आहा हुनकर बहुत बात बर्दाश्त केलियेंन आब बर्दाश्त नै हेत ! आई स सामने बला क अपन गलती के अहसास भे जेतेंन आर आहा के रिश्ता बिगड़े स बैच जेत ! बहिन हमरा समझ स निक इये अछि की यदि कुनू तरहक विवाद स घिरल बात कियो कहा त निक इये हेत की अपने चूपी सैधली, सामने वला निराश भो क खुदे बाजब बंद के देती ! ओनैयो हर बात पार सवाल - जबाब करब कुनू निक बात थोरे न अछि ! एकर बावजुदो यदि अपने क गुस्सा आबे त अपन ध्यान कतो आर मोइड़ देल करू, जना की यदि घर म छी त बहर आँगन मए निकैल क किछ काज के लेल करू, टीवी खोइल क बैस सके छी ताकि ओई समय चलाई बला बात के रुख बदैल जाय ! कतेक बेर देखल गेल अछि की हम सब कुनू बात के प्रतिक्रिया क नकारात्मक ढंग स लैत छलो ! इ बात ठीक नै अछि ! ठंढा दिमाग स हमरा सब क सोच्बाक चाही की हम अपन आप कई कोना सुधारी कहावत अछि "आप भला तो जग भला" यदि कियो अपने स किछ कहेत अछि त पहिने हुनका बात पर नाराज़ होई के बदला अमल करैत सोचबाक चाही की बात म कतेक सत्यता अछि ! मिठास के संग जबाब दै के कला के साथे - साथ विनम्रता क अपन व्यक्तितत्व के अंग बनाबी इये हमर सब मिथिला बहिन स आग्रह अछि ! हमर धारणा यदि अपने क पसंद हुवे त टिप्पणी देब नै भुलब धन्यवाद !!

Wednesday, February 27, 2008

होली - कथा




होली उत्सव के उत्पति के कथा हिरण्यकश्यप के बहिन होलिका आर पुत्र प्रह्लाद सs जुरल अछि !!



इ पर्व के मुख्य संबंध बालक प्रह्लाद सs छैन ! जे रहैत तय विष्णु भक्त मुदा एहेंन परिवार मए जन्म लेलेथ रहा जकर मुखिया क्रूर आर निर्दयी रहथिन ! प्रह्लाद के बाबूजी अर्थात निर्दयी हिरण्यकश्यप अपनाआप कए भगवान सम्झैत रहथिन ! आर सब प्रजा सए इये उम्मीद करैत रहथिन की ओहो सब हुनका भगवान मानैत पुजैन ! जे हुनका नै पुजैत रहथिन ओकरा या तए माइर देल जैट रहेँन या कैद खाना मए बंद कैल जायत रहेँन ! जखन हिरण्यकश्यप कs पता चललैन की हुनकर पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त छैथ तs पहिने हुनका (प्रह्लाद) कए डरे - धमके कए आर अनेक प्रकार सs हुनका पर दबाब डाइल कए की ओ विष्णु भगवान कs छोइर हुनका (हिरण्यकश्यप) कs पुजैथ समझाबे के प्रयाश केलखिन ! मगर प्रह्लाद कए अपन भगवान विष्णु पर अटूट श्रद्धा रहेँन ओ बिना कुनू भय के हुनका पुजैत रहलाखिन ! सब प्रयाश के बावजूद जखन प्रह्लाद नै मानलखींन तए हिरण्यकश्यप बिचार्लैथ की प्रह्लाद कs जान सए मैर देल जाई ! एकरालेल ओ बहुत तरह के उपाय केलैथ मुदा हर बेर असफल रहलैथ ! अंत मए हिरण्यकश्यप अपन बहिन होलिका, जिनका अग्नि मs नै जले के वरदान प्राप्त रहैंन, हुनका बजेलखिन आर प्रह्लाद कए मारै के योजना बनेलखिन ! एक दिन निर्दै हिरण्यकश्यप बहुत सारा लकड़ी जमा केलेथ आर ओई मए आइग लगे देलखिन ! जखन लकड़ी तीव्रता सs जरे लग्लैन तए हिरण्यकश्यप अपन बहिन होलिका कए आदेश देलखिन की ओ प्रह्लाद कs गोद मए ले कs जडैत आइग मए बैसेथ ! होलिका हुनकर आज्ञा के पालन करैत ओहिना केलखिन ! दैवयोग सs प्रह्लाद बैच गेला आर होलिका वरदान के बावजूद ओही आइग मए जैल कs भस्म भे गेली ! तहिये सs प्रह्लाद के भक्ति आर असुरी राक्षसी होलिका के स्मृति मए इ त्योहार मनेल जैत अछि !



समस्त मिथिला वासी कs "मैथिल और मिथिला" ब्लोग के तरफ स रंगक त्योहार होली के हार्दिक शुभकामनाये !!!

Tuesday, February 26, 2008

बजट २००८ - २००९

रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव अइयो बेर लगातार पाँचवा साल किराया मs कुनू वृद्धि नै केलखिन ! लालू प्रसाद यादव भारतीय रेल के इतिहास म मंगलवार दिनांक २६/०२/२००८ कs एक नया कृतिमान स्तापित केलैथ ! उलटे ओ २००८ - २००९ के बजट मs किराया मs पाँच सs सात प्रतिशत के कमी के घोसना केलखिन, नीचा बजट के मुख्य अंश प्रस्तुत अछि !!

* ५० रुपैया सs उपर के किराया मए ५ फीसदी छुट

* एसी के तेसर दर्जा मए ३ फीसदी के छुट

* एसी के दोसर दर्जा मए ४ फीसदी के छुट

* एसी प्रथम श्रेणी मए ७ फीसदी के छुट

* महिला कए पाँच फीसदी नौकरी

* १० नया गरीब रथ चलत

* ५३ नया गाड़ी चलत

* १६ गाड़ी के विस्तार

* रेल कारखाना के लेल २०० करोड़

* केरल मए नया कोच फैक्ट्री बनत

* गैंगमैन कए गेटमैन बनेल जेत

* कुली कए गैंगमैन बनेल जेत

* चाइना रेलवे सs समझोता

* स्नातक छात्र के किराया मए रियायत

* पटना,सिकंदराबाद,मुम्बई,नईदिल्ली,स्टेशन विश्वस्तरीयबनत

* अशोक चक्र पास कए शताब्दी, राजधानी मs मान्यता

* वरिष्ठ नागरिक कए ५० फीसदी के छुट

* बोनस ६५ दिन सए बैठ क ७० दिन भेल

* ५७०० नया सुरक्षाकर्मी के भर्ती

* रेलगाड़ी मए इन्टरनेट के सुविधा मिलत

* विश्वस्तरीय स्टेशन के लेल १५ हजार करोड़

* १९५ स्टेशन पर पैदल यात्री पुल के निर्माण

* उड़ीसा के महानदी पर पुल बनत

* मोबाइल पर टिकट बुकिंग के सुविधा


उपयुक्त रेल बजट के धोसना केलैथ रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, अई बेर के बजट मs भारतीय रेल क २५ हजार करोड़ के मुनाफा आर पिछला ५ साल मए ६८ हजार करोड़ के मुनाफा करेलखिन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ! देखल जाए त पिछला पाँच साल सए भारतीय रेल कs घाटा सs उबैर देलखिन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ! ऐयतरह सs अई बेर बहुत निक रेल बजट पेश केलैथ रेल मंत्री, आब देख्बाक इ ऐच्छ की जतेक घोसना केलैथ या ओई मs पूरा की सब करैत छैथ रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव !!

Monday, February 25, 2008

मधुक एक ठोप ( मैथिली भाषा लघु कथा)


कुरुक्षेत्रक भीषण रक्तपातक बाद, अपन सभ पुत्र गवाँ चुकल शोकसँ संतृप्त धृतराष्ट्रक दुःख विदुरक समक्ष अश्रुधाराक रूपमे बहि निकललनि ! तखन ओऽ सेविका पुत्र (विदुर) हुनका समक्ष वर्तमान स्थितिक अनुकूल एक उपदेशात्मक नीति-कथाक वर्णन केलखिन !
विदुर कहलखिन "आइ एकटा ब्राह्मणक कथा अपनेकेँ बताबैत छलहुँ ! जे जंगली पशुसँ भड़ल जंगलमे पथ - भ्रमित भऽ गेलखिन रहए ! शेर आर चिता, हाथी आर भालूक चीख, चिंघाड़, आर गर्जनक एहन दृश्य जे मृत्युक देवता, यमोक मोनमे सिहरन पैदा कऽ दैतियनि! ब्राह्मणोकेँ ओऽ वातावरण डरा देलकनि रहए! हुनकर सम्पूर्ण शरीर भयसँ थरथराइत रहनि ! हुनकर मस्तिष्क आशंकासँ भरल रहनि आर हुनकर भयभीत मोन कुनू देवताकेँ व्याकुल भए तकैत रहनि, जे हुनकर प्राणकेँ भयावह वनचरसँ बचाऽ सकतियनि ! लेकिन ओइ बर्बर जानवरक गर्जनासँ सम्पूर्ण जंगल प्रतिध्वनित भऽ कs हुनकर उपस्थितिक आभास करबैत रहनि !ब्राह्मणकेँ एहन प्रतीत होइ छ्लनि की जतए-जतए ओ जाइत छथिन, जानवरक गर्जना हुनकर प्रतिच्छाया बनि कए हुनकर पीछा करैत छ्लनि ! अचानक हुनका लागलनि की ओऽ भयावह जंगल एक घन जाल बुनि कs हुनका आर डरा रहलनि-ए! जंगलक गहनता एक डराओन स्त्रीक रूप धरि, अपन दुनु हाथ पसारि कs हुनका अपनामे विलीन करएक निमंत्रण दऽ रहलनि-ए!जंगलक बीचमे एकटा इनार रहनि जे घास आर बड़का-बड़का लत्तीसँ झाँपल रहए ! ओऽ ओही इनारमे खसि गेलखिन आर लत्तीक सहारासँ कुनू पाकल आम जेकाँ लटपटा कs माथक भर उलटा लटकि गेलखिन ! हुनका लेल डरक बादल गहींर भेल जाइत रहनि! इनारक तलमे ओऽ एक राक्षसी सांप देखलथि, इनारक मुंडेर पर एक बड़का हाथी जकर छः मुँह आर बारह पैर रहनि , ओ मंडरबैत रहए ! आर लत्तीक बीचमे बनल मधुमाछीक छत्ताक चारू दिस विशालकाय मधुमाछी ओकर भीतर-बाहर भिनभिनाबैत रहए ! मधुमाछीक छत्तासँ टपकै बला मौधक किछु ठोप लटकल ब्राह्मणक मुँह पर खसलनि ! ओइ लटकल परिस्थितियोमे ओऽ ब्राह्मण शहदक ओऽ बूंद केँ नञि छोड़लखिन ! जतेक बूंद गिरैत रहनि, हुनका ओतेक संतोष प्राप्त होइत रहनि ! मुदा हुनकर इच्छा शांत नञि होइत रहनि ! ओऽ आर जीवित रहए लय चाहैत रहथिन ! जखन ओऽ शहदक मज़ा लैत रहथि तखने ओऽ देखलखिन की जै लत्ती पर ओऽ लटकल रहथिन ओइ लत्तीकेँ किछु उज्जर आर कारी मूषक (मूस) अपन धरगर दांतसँ काटि रहलनि-ए! हुनकर भय आर बढ़ि गेलनि ! ओऽ भयसँ चारूदिस घिरि गेलथि, कखनो हुनका मांसाहारी जानवरक भय, तँ कखनो डराओन स्त्री, राक्षसी सांप तँ कखनो ओइ लत्तीक भय होइत रहनि जकरा मूषक (चूहा) अपन दांतसँ कुतरैत रहए। भएक एहि बहावमे ओऽ माथक बल लटकल छथि ! अपन आशाक संग , मधुक रसास्वादक तीव्र आकांक्षा लऽ कs ओइ जंगलमे हुनका जीवित रहबाक आर प्रबल इच्छा रहनि!
विदुर धृतराष्ट्रसँ कहैत छथिन " ई जंगल एक नश्वर संसार अछि; एहि संसारक भौतिकता एक इनार आर अंधकारमय इनारक चारू दिसक स्थान कुनू व्यक्ति विशेषक जीवन चक्रकेँ कs दर्शाबैत अछि ! जंगली पशु रोगक प्रतीक अछि तँ डराओन स्त्री नश्वरताक द्योतक ! इनारक नीचां बैसल विशालकाय सांप ओऽ काल अछि, जे समयकेँ लीलए लऽ पर्याप्त अछि ! एक वास्तविक आर संदेहरहित विनाशकक तरह ! लत्तीक मोह - पाशमे ब्राह्मण लटकल छथि जे स्वरक्षित जीवनक मूल प्रवृति छथि, जकरासँ जीव बाँचल नञि अछि ! इनारक मुंडेर पर छः मुखी हाथीक प्रतीक ई अछि, छः मुख अर्थात छः ऋतु आर बारह पैर माने सालक बारह मास ! लत्तीक कुतरए बला मूस ओऽ दिन राति अछि, जे मनुष्यक आयुकेँ अपन धरगर दाँतसँ कुतरि-कुतरि कs कम क्ऽ रहल अछि ! यदि मधुमाछी हमर सबहक इच्छा अछि तँ मधुक एक बूंद ओऽ तृप्ति जे इच्छामे निहित अछि ! हम सब मनुष्य इच्छाक अथाह समुद्रमे शहद रूपी काम-रसक भोग करैत डूबि-उतरि रहलहुँ-ए!
एहि तरहेँ विद्वान लोक जीवन चक्रक व्याख्या केने छथि, आर ओकरासँ मुक्तिक उपाएसँ अवगत करेने छथि !

Saturday, February 23, 2008

आइबे रहल ऐच्छ फगुआ याऊ


गेल जाड़ मांस के कंपकंपी,
कूदू फान्दू बउवा येऊ,
मादक हवा कही रहल ऐच्छ,
आइबे रहल आइछ फगुवा यौ ॥

रंग-अबीर सं चमकत अंगना,
बल्जोरी के जोर चालत,
दू गिलास भांग के बाद,
बीस ता मल्पूआ यौ॥

नाक-भों जे कियो चढायब,
या की रंग पैइन सं घब्रायब,
जे करतेई बेसी लतपत,
रंग सं भ जीते थौवा यौ..

गोर्की भौजी, छोटका बउवा,
पहिरू पूर्ण अंगा, पुरना नुवा,
रंग-अबीर पोलिस सं,
सब गोते लागब कौवा यौ॥

बड नीक ई पाबैइन आइछ,
सबके मोंन के भाबैईत ऐच्छ,
एके रंग मैं सब रंगेतय ,
के धनीक, के बिल्तौवा यौ॥

फगुवा के यह मज़ा त छाई ,
तैयारी के ने आवश्यकता छाई,
रंग पैइन दुनु छाई सस्ता,
नई खर्चा हित दहौउअया यौ॥
फगुवा के तैयारी करू...

सुख - कोना सुखी रही ?



कोना सुखी रही ? मानव सभ्यता के आरंभ स इ प्रश्न मनुष्य क परेशान केना छई ! दार्शनिक, कवी, लेखक, विचारक, वैज्ञानिक आर नेता इ सब लोकेन अपन - अपन तरीका स अई प्रश्न के उत्तर के खोज आर व्याख्या केलखिन यए ! मुदा आइयो मनुष्य इ प्रश्न अनुत्तरिय अछि ! वर्तमान समय म आई जखन हमरा पास नया युग के आधुनिक चिंतन अछि, नई पीढ़ी के दार्शनिक, मैनेजमेंट मसीहा, आर सब समस्या के तुरंत निदान करै वाला विशेशग्य अछि ! आध्यात्मिक स्वर्ग के सुख दै वाला गुरु आर अई संसार त्वरित मोक्ष के अनुभूति दिलाबे बाला स्वामी सब छैथ ! मुदा सुखी केना रही इ प्रश्न ज्यों के त्यों अछि ! किछ दिन पहिने हम अई प्रश्न के बहुत रोचक आर सुखद आर दुःख पर प्रकाश डाले वाला उत्तर स रु ब रु भेलो जकरा हम अपने सब के बिच बांटे के इक्षुक छलो ! श्री श्री रवि शंकर जी द् आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के संस्थापक कहैत छथिन की " अई ठाम दु टा कारण अछि दुःख के ! अतीत के पछतावा आर भविष्य के चिंता ! कतेक पैघ गप कहाल्खिंन ओ ? हम सब अक्शर सोचेत छलो की काश हमर विवाह किनको और स हेतिया ! हम ओ दोसर बाला नोकरी किये न स्वीकार केलो ? आदि आदि ! हमर सब के मस्तिष्क हमेशा अतीत आर भविष्य के बिच उलझल रहैत अछि ! या त हम सब बैह गेल दूध के लेल दुखी होइत छलो या ओई पुल क पार करै के प्रयाश म जाकर तक हम पहुचो नै सके छी ! अनावश्यक रूप स भेल घटना पर अपन माथा पेच्ची करै छी या जे होई बाला य ओकर चिंता मए वर्तमान क व्यर्थ करैत छलो ! बीत चुकल कैल के पश्याताप आर आबे बाला कैल के उत्सुकता मए हम आई के अनमोल पल के हरेनाए जय छी ! त अहि कहू हम सब सुख कोना प्राप्त करब ? श्री श्री रवि शंकर जी के कथन अनुसार हमरा सब कए इ स्वीकार करै परत की वर्तमाने सब किछ अछि ! हमरा वर्तमान के क्षण क पूरा तरह जिवाक चाही आर वर्तमान म हम जे के रहलो य ओई म अपन पूरा क्षमता लगे कए ओही मए अपन पूरा ध्यान केन्द्रित करी ! हमरा सब कए आई आर एखन म विश्वास करैये परत ! की भेल आर की हेत म भो सके य इ बात अपने कए असंभव प्रतीत हुए ! सचमुच म इ सिख लेब कठिन अछि ! जखन भी एक बच्चा एक कागज पर किछ चित्रित करैत छैथ, कागज के नाव पैन मए तैरैत या एक पंक्षी क उडैत देखैत छैथ ! ओई समय म ओ अपन पूरा ध्यान ओही काज मए लगबैत छैथ ! हुनका तनिको चिंता नै रहैत छैन की कियो हुनका देख रहलेंन य या कियो हुनका पर हैस रहलें या ! ओकरा इयो बात परेशान नै करे छई की ओ किछ देर पहिना की केला रहा आर किछ देर बाद की करता ! ओ त खाली अपन काज म मगन रहैत छैथ ! हम सब इ प्रकृति प्रदत्त बिना स्वचेतन भेल बच्चा के तरह वर्तमान के क्षण म जिवई के इ गुण क हरे चुकलो य ! जखन की सबसे बेहतर तरीका अछि जीवन म ख़ुशी ढूढाई के बजाय ओकरा कए हम पैकेज्ड मोक्ष आर ब्रांडेड निर्वाण के लेल भागी !

इ छोट-मोट बात क ध्यान म राखैत जीवन म सदा सुखी रैहसके छी

Friday, February 22, 2008

एक अलग पहचान !

कतेक सुखद हेतीए, अगर लोग के बिच मs आहा के एक अलग पहचान रहतीए ? लोग अपने कs पसंद करैथ, अपने स मिलब पसंद करैथ, अपने के बात कs ध्यान सs सुनैथ, इ हर इन्शान के चाहत होइत अछि !!

मुदा अपने कs इ माने परत की इ सब एतबो आसान नै छै ! एक अलग शख्सियत के मालीक हेनै बहुत मुश्किल अछि ! खाली शारीरिक सुन्दरता, पद आर पैसा के बस के इ बात नै अछि ! आहा एक आम आदमी भेला के बावजूद भी खास बैन सके छी ! बशर्ते किछ छोट - मोट बात अगर याद राखी !

किछ याद राखै योग्य बात .........

* एक निक श्रोता बनू !

* निक वक्ता ओ कहलाबैत छैथ जे सब के बात क सुनैथ आर अंत मs सोइच कs अपन विचार रखैत छैथ !

* ज्यादा बाजब, डींग हाकब, व्यंग्य करब, अपने मुह मिया मिट्ठू बनब अई तरहक बात अपने के शख्सियत कs गलत साबित कैर सकेत अछि !

* हमेसा ओही तरहक बात करबाक चाही जे आहा के जीवन मs खरा उतरे ! जकरा आहा स्वयं व्यवहार मs लाबे छी !

* अपन बहुमूल्य राय किनको मांगला पर दीयोंन !

* सुतई समय अपन स्वविलेषण जरुर करी !

* अपन सिधांत बनाबू, आर ओई पर अमल करै के हर संभव प्रयास करू !

* हमेसा सकारात्मक सोच राखी ! मनोवैज्ञानिक के कहब छैन की आत्मविश्वास आर आशावादी व्यक्ति हर चुनोती के सामना करै मs सक्षम होइत छथिन !

* निक बनै के लेल निक सोचब जरुरी अछि ! दोसर के आचरण कs छोइर कs अपन आचरण पर ध्यान देबाक चाही !

* स्वभाव मs विनम्रता के साथ दृढ़ता आवश्यक होइत अछि ! कुनू गलत बात या प्रस्ताव पर नै कहब सिखु !

अई तरहक छोट - मोट बात कs अपन व्यवहार मए उतैर कs अपने सब के बिच अपन एक अलग, स्पष्ट पहचान बनाबे मs सफल भे सके छी ! पैसा आर प्रसिद्धि के पीछा भागब व्यर्थ अछि ! अपन क्षेत्र मs सफल व्यक्ति बनै के प्रयास करू ! कारन अहि सs अपन मिथिला के पहचान अछि !!


आब बाल ठाकरे देलखिन आइग कए हवा

मराठी बनाम उत्तर भारतीय के सवाल पर पिछला किछ दिन पहिने महाराष्ट्र म भड्कल आइग शांत होइए बला छले की ओकरा एक बेर फेर हवा दै के कोशिश शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे केलखिन य ! ओ मराठी अस्मिता के नाम पर हिंदी के खिलाप रुख दर्शाबैत बिहार के नेता आर रेल मंत्री लालू प्रसाद क सीधे निशाना बनेलखिन य ! बाल ठाकरे अपन पार्टी के प्रमुख्य पत्र 'सामना' के सम्पादकीय के जरिया लालू प्रसाद क तमिलनाडु के मरीन बिच पर छठ पूजा करै के बात क चूनोती देलखिन य ! अपने क मालूम हुए की लालू प्रसाद यादव महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा उत्तर भारतीय के खिलाप चलेल गेल आंदोलन के जबाब म कहलाखिन रहा कि अगला बेर ओ मुम्बई म छठ पूजा मनेता ! जबाब म शिव सेना सुप्रीमो बाल ठाकरे संपादकीय म लिखलाखिंन कि "तमिलनाडु म मुख्यमंत्री करूणानिधि सब स्कूल म तमिल क अनिवार्य के देलखिन य ! बिहार क नर्क बनाबे बला लालू म हिम्मत छैन त ओ केन्द्र म अपन सहयोगी के सरकार के विरोध करै के लेल तमिलनाडु जैथ आर ओई ठाम बिहारी के मजमा लगाबैथ" ! बाल ठाकरे उत्तर भारत के ओई स्थानीय कांग्रेश नेता सब क आड़े हाथ लेलखिन जे सब कथित रूप स मुम्बई के नगर निगम (बी एम सी) म हिंदी क आधिकारिक भाषा बनाबे के मांग करैत छथिन ! हुनका सब पर निशाना साधेत ठाकरे लिखला हा, "पहिने हिनका सब क चेन्नई, बेंगलूर, हैदराबाद, कोलकाता, आर गुवाहाटी म एहेंन करे के कोशिश करबाक चाही ! अई ठाम महाराष्ट्र के धरती पुत्र मराठी या मुम्बई के शान म कुनू गुस्ताखी बर्दाश्त नै कर्थिन !" बाल ठाकरे बी एम सी मए हिंदी क आधिकारिक भाषा के दर्जा दै जाई के मांग करै बला नेता के खिलाप कानूनी करवाई करै के आर हुनका जेल मए बंद करै के मांग केलखिन य ! ओ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुखो क नै बख्शलखींन हुनकर बयांन "मुम्बई के दरवाजा सब लए खुलल छई के विरोध मए ठाकरे बाजला 'भूमि पुत्र के कीमत पर मुम्बई के शोषण होइत अछि ! मुम्बई म भूमि पुत्र कए वाजिब हक नै मिल रहले य !

सच्चाई त इ छैन की बेचारा तिलमिलेल छैथ, कारन पहिने हुनकर अपन माटी आर आब अपन परिवार पर शासन नै रहलेंन ! परिवार क बिखरैत देख कए तिलमिलेबे करता आर हुनका सए हेबे की कर्तैन !!

Thursday, February 21, 2008

कुर्ता फाड़ होली के तैयारी म लालू

भारतीय रेल के कायापलट म अपन केन्द्रीय भूमिका के लेल वाहवाही बटोरे बला रेल मंत्री लालू प्रसाद कुर्ता फाड़ होली खेलै के तैयारी म छैथ ! उदार बजट पेश के क जानता के प्रशंसा बटोरे वला लालू प्रसाद क हर साल होली के बेसब्री स इंतजार रहैत छैन ! लालू प्रसाद आईएएनएस स बातचीत के दरमियाँन कहल्खिन की अपन ड्रीम बजट पेश करै के बाद ओ बहुत खुश छैथ ! आर अई बेर अपन खास अंदाज म होली मनेता ! हुनकर नेतृत्व म भारतीय रेलवे २०० अरब रुपैया के आमदनी केलकैन य ! अपन चिर परिचित शैली म ठहाका लगबैत लालू प्रसाद कहल्खिन की जखन होली के मौसम हुवे त कुर्ता के चिंता के करैत छैथ ! ओ अइयो बेर कुर्ता फाड़ होली खेलता ! हुनकर कहब छैन जे प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम आर देश के करोडो लोकेन हुनकर रेल बजट के तारीफ के चुकाल्खिन य ! तही ले क अई बेर हुनका लेल पूरा सुकून स होली मनेनै आसान छैन ! बिहार म सत्ता गवाबई के बाद लालू प्रसाद के लेल होली अधिक मजेदार नै रैह गेलेंन रहा, लेकिन एक बेर फेर ओ अपन पुरान अंदाज म आर मस्ती के संग इ त्यौहार मनाबई के तैयारी म छैथ ! रेल मंत्री लालू प्रसाद होली अपन पत्नी राबड़ी देवी के आधिकारिक निवास १० सर्कुलर रोड म मनेता ! राबड़ी देवी विधान सभा म विपक्ष के नेता छथिन ! लालू प्रसाद होली क रंगीन बनाबई म जुइट गेला य ! होली के मौका पर लालू प्रसाद अपन पार्टी के नेता सभक कपड़ा फैर क हुनका संग होली खेलैत छैथ ! जखन बिहार म लालू - राबड़ी दंपती के शासन रहेंन, त मुख्यमंत्री निवास के होली चर्चा के विषय रहैत रहेंन ! ढोल के थाप पर झुमैत लालू क कैमरा म कैद करै के लेल फोटो ग्राफर के बिच होड़ रहैत रहेंन किछ ओहिना अइयो बेर के होली हेतै लालू प्रसादक

Monday, February 18, 2008

आस्था या अंधविश्वास

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

करेड़ी वाली माँ

जिनकर मूर्ति स निकले छैन अमृतधारा ....
आस्था आर अंधविश्वास के इ कड़ी म हम आहा के बिच पैन निकले के चमत्कारक चर्चा करब ! जी हाँ, मध्य प्रदेश के शाजापुर जिला स आठ किलोमीटर दूर स्थित करेड़ी गाम म देवी माँ के मूर्ति स लगातार पैन निकैल रहलैन य ! ग्राम वासि के मानब छैन की इ पैन नै अमृत छिये ! हमर किछ दोस्त लोकेन के मुलाकात ओई गाम के सरपंच इन्द्र सिंह स भेलेंन ओ बतेलखिन जे माँ के मूर्ति बहुत प्राचीन छैन ! सरपंच के दावा एता तक छैन कि ओ मूर्ति महाभारत कालीन छिये ! हुनकर कहब छैन कि मूर्ति आराध्य देवी कर्णावती के छियेंन ! कहल्खिन जे माँ कर्णावती दानवीर कर्ण क रोज सौ (१००) मन सोना दैत रहथिन ! जकरा कर्ण प्रजा के भलाई के लेल दान करेत रहथिन ! ओई गामक लोक के कहब छैन कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य सेहो माँ के भक्त रहथिन ! आई कैल इ मंदिर क गाम के नाम स करेड़ी वाली माता के मंदिर कहल जै छैन ! जखन मूर्ति आर पैन के बबाद पूछताछ करल गेलेंन त चंदर सिंह (मास्टर जी) कहल्खिन कि किछ दिन पहिने माँ के मूर्ति स एकाएक पैन निकले लगलैन ! पहिने सभक मानब रहैंन की पैन मूर्ति के स्नान के समय भैर जैत छले जे बाद म निकले छैन, सब मिल क ओई जगह क साफ करलाखिन जै जगह पैन भैर जैत रहे ! मुदा देखल गेल की माँ के बांह के पास बनल एक छेद स वापस पैन भैर गेल ! बहुत बेर पैन साफ करल गेलेंन मुदा दुबारा किछ समय म भैर जैत छालेंन ! तखने स पूरा गाम वासी के कहबाक छैन की ओ पैन नै माँ के प्रसाद माँ के अमृत छिये ! बाद म मंदिर के अन्दर पहुच के देखल गेल की मंदिर के बहार एक बावड़ी (गढा) अछि ओहीठा माँ के मूर्ति के पास बनल एक छेद म पैन भरल अछि ! मंदिर के पुजारी कहलाखिन किछ दिन पहिने आई छेद स अपने आप पैन बहा लागले आर देखते देखैत पास के बावड़ी पैन स भैर गेले ! तखन स लगातार मूर्ति स पैन निकेल रहल छई ! फेर की बात काने कान इ बात पूरा ग्रामीण क पता चललाई तखन स श्रद्धालु के ताता लगातार मंदिर म बैढ़ रहलेंन या ! सभक मानब इ छई जे इ पैन नै अमृत छिये ! जकरा पीने स सब दुःख दूर होइत अछि, सभक कहब छैन जे गाम म बहुत प्राचीन मंदिर छैन ! गाम म जखन जखन नवनिर्माण हेतु खुदाई होई छई त प्राचीन मूर्ति के भग्नावशेष निकले छई !लेकिन पुरातत्व विभाग के ध्यान ओई तरफ नै छैन !मंदिर म खरा रैह क सामने देखल गेल की पुजारी मूर्ति स निकले बाला जल क वितरित केलखिन किछ देर म जल पुनः भैर गेले ! मंदिर पहुचे बला हर श्रद्धालु के कहब छैन की इ माँ के चमत्कार छियेंन ! माँ के मूर्ति बेहद पुरान छैन, आर जमीन म सेहों धसल छथिन! आब सच्चाई की अछि इ त विज्ञाने बतेता ! आई समबंध म अहक सोचब की अछि हमरा बताबू

Monday, February 11, 2008

केहेंन हुए आहा के जीवन साथी.....


मिथिला बहिन लोकेन के लेल खाश"

एक लड़की के लेल हुनकर विवाह बेहद महत्वपूर्ण क्षण होइत छैन ! अपन माँ - बाबूजी के साथ जीवन बिताबैं के पश्चात जखन ओ दोसर के जीवन संगिनी बैन क हुनकर घर जैत छैथ त निश्चित रूप स हुनका स किछ अपेक्षा रखैत छैथ ! जेय पर खरा उतरे के लेल हुनका एक आदर्श 'जीवन - संगनी ' के दायित्व निभाबे परेत छैन ! हुनकरे भूमिका पर घर के समृधि आर सुख - शान्ति काफी हद तक निर्भर करैत छैन ! कहल गेल अछि की सफल व्यक्ति के सफलता के पीछा स्त्री के हाथ होइत छैन ! अतः आहा एक आदर्श 'जीवन - संगिनी' भो साकेत छ्लो यदि आहा हर कदम पर अपन हम सफर के साथ दियेन आर परिवार म यदि सामंजस्य बनेना राखी ! आबू देखि कोना बनल जैय एक आदर्श 'जीवन - संगिनी'

* आर्थिक आधार पर अपन पति के ओरो स तुलना करब आहाके जीवन म जहर घोइल सके य ! अतः कखनो पाई क सुख आर समृधि के आधार नें समझे के गलती करू ! पाई स सोना के महल खरीद सके छी मुदा निंद नें ! बेहतर हेत यदि आहा अपन पति के जिम्मेदारी आर मज़बूरी क समझे के प्रयाश करी ! हुनकर काम म हाथ बटाबियोंन, अगर आहा पढ़ल - लिखल छी त आर्थिक सहयोग दे क हुनकर तनाव कम करे के प्रयाश करी ! आहक भावनात्मक नैतिक आर आर्थिक सहयोग हुनका आश्वस्त करतेंन की हुनकर जीवन-संगिनी दुःख - सुख म हुनकर साथ दें छैन ! बहिन सब स पैघ सहयोग होई छै भावनात्मक संबल जे एक पति क हुनकर जुझारू ऐवं सुलझल पत्नी के सिवा कियो नै दे सकेत छथिन ! माँ, बहिन के रिश्ता अपन जगह अत्यन्त महत्वपूर्ण होई छै ! खाली अहि के उपस्थिति हुनकर रिश्ता के पूर्ति नै करे छैन ! आहा क इ नै भुल्बाक चाही की हुन्करो अपन माँ - बाबूजी, भाई - बहिन छैन ! जिन्करो देखभाल हुनके केनेय छैन ! एहेंन स्थिति नै आबे दीयोंन की हुनकर परिवारक सदय्श अपना आप क उपेक्षित महसूस करैत !

* वर्तमान युग म संयुक्त परिवार के विघटन होई के एक बहुत बड़ा कारन इ छलें की विवाह के उपरांत अलग गृहस्थी बनाबे के बिचार मस्तिष्क पर हावी भेल जे रहल अछि ! भौतिक प्रतिस्पर्धा, आधुनिक चकाचौध आर अधिक स अधिक वस्तु के संग्रह के क आरामदायी जीवन व्यतीत करे के चाह हमरा सब क रहे या आई पाछा हम सब अपन सब सम्बन्ध क भूले दैत छलो ! हमरा सब क इ सोच्बाक चाही की विवाह के उपरांत अपन सास - ससुर के प्रति उपेक्षा के भावे आई वृधाश्रम के संख्या बढे रहल अछि ! ताहि लेल निक हेत की आहा अपन सब आवश्यकता म संतुलन बनेना राखी ! परिवार क बिखरे स बचाबी !


* अपन पति के योग्यता आर हुनकर क्षमता के तुलना दोसर स नै करबाक चाही ! किये की हुनकर तुलना दोसर स केने स हुनकर स्वाभिमान क ठेस पहुचतैन ! एक बात क सदैव गाठ बैंध क चलुकी आहा के पति चाहे जेहेंन हुवे , हुनका ओही रूप म स्वीकारी ! आपसी सामंजस्य, बुद्धिमत्ता आर सूझबूझ स गृहस्थी के गाड़ी क आगा बढाबी ! हुनकर मेहनत के प्रशंसा कारियोंन आर कन्धा स कन्धा मिले क गृहस्थी के सुख एश्वर्य बनाबे म हुनकर साथ दीयोंन ! याद रहे जिम्मेदारी म साझापन आर विचार म सामंजस्य बनेना राखब पति - पत्नी दुनु के जिमेदारी छी ! आहा यदि इ गुण अपनाबी त कैल अपन मिथिला समाज के दोसरो बहिन आहा स प्रेरित हेती ! उम्मीद करेत छलो हमर ब्लोग आहा सब पसंद करब !


हम जीतमोहन जी के तहे दिल स आभारी छियेंन जे ओ इ मैथिली" ब्लोग बनेलेथ आर ओई पर हमरा किछ लिखे के आग्रह केलेथ !

Saturday, February 09, 2008

डॉ0 जनक किशोर लाल दाश जीक मैथिली भाषा कविता

प्रिय बंधू कविता पढे लेल कविता के पन्ना पर क्लीक करू !


१, मैथिली (कविता) सुपैन धार

२ , मैथिली (कविता) प्राचीन ऋण
३,मैथिली (कविता) नव साल आरे

४,मैथिली (कविता) मेघ दुत

५,मैथिली (कविता) मीत कीएक चुप छी

६,मैथिली (कविता) हमर पुतोहू


७,मैथिली (कविता) कोईलिक व्यथा



८,मैथिली (कविता) जुहू तट



९,मैथिली (कविता) जिद्दी चिरई

१०,मैथिली (कविता) गामे म रहैत छी



११,मैथिली (कविता) डायरिक पन्ना सं




१२,मैथिली (कविता) हम बूढ़ लोक छी

१३,मैथिली (कविता) बलिदान अहाँ के


उम्मीद करे छी कविता अपने पसंद करब !!

Wednesday, February 06, 2008

रिश्ता नै दोस्त बनाबू


हम जै समाजक परिवेश म रहेत छलो ! ओय म किछ रिश्ता के बंधन जन्म के साथे जुरल होईया ! पारिवारिक रिश्ता के साथ - साथ हमरा सभक जीवन म जे एक महत्वपूर्ण भूमिका अछि ओ छी दोस्ती के रिश्ता, जकरा हम सब अपन विवेक के द्वारा बनाबे छी ! जकरा सदा निम्हाबे के प्रयाश करे छी ! दोस्त के मुसीबत और दुःख म हम सदा हुनकर साथ दै के प्रयाश करे छी ! हुनकर दुःख क बांटे के भावना हमरा सभक मन क हमेशा प्रेरित करैत अछि ! सही मायने म अहि तरहक इंशान सच्चा दोस्त होई या दोस्त बनेनैय आर दोस्ती करब इ मानवीय स्वाभाव अछि ! हम सब जिम्हर नज़र घुमाबी ओही ठाम देखब की अई दुनिया म छोट बच्चा से लेके बुजुर्ग तक सब के दोस्त होइत अछि ! हमर मानू त बिना दोस्त के हमर सभक जीवन नीरस होई या ! सामाजिक वातावरण म बिना दोस्तक जिंदा रहब मुश्किल अछि !
आबू देखि किछ दोस्त बनाबे के टिप्स आर रिश्ता निम्हाबे के किछ टिप्स, जकरा अपने अपन दैनिक जीवन म उपयोग के क बने सके छी सच्चा दोस्त !

* अगर अपने अंग्रेजी म बातचीत करे के आदि छी आर यदि सामने वाला क अंग्रेजी समझ म नै आबे छैन त अपन अहं क एक तरफ छोइर क सामान्य भाषा म बातचीत शुरू करी !

* आदमी जखन खुद अपन दोस्त बैन जैत छैथ त हुनका दोस्त अपनेआप मिल जैत छैन ! कियेकी हुनकर स्वभाव हुनकर दोस्तक गिनती बढाबेत छैन !

* दोस्ती करैत समय सामने वाला स बातचीत म झिझकपन नै राखी !

* दोस्त स बातचीत के दोंरान अपन रुतबा या हैसियत के रोब देखबे के बजाय सामान्यजन बैन क बात करू !

* अपन परिचय के बाद हुनको बाजे के मौका दीयोंन !

* हमेशा एक दोसर के रूचि के बारे म जाने के प्रयाश करबाक चाही किये की इ दोस्ती के सब स पैघ नुस्खा अछि !

* अपन मन म हमेशा सहयोग के भावना राखी इ आगा जै क बहुत काम आबैत अछि !

* दोस्ती केला के बाद दोस्ती निम्हाबे के प्रयाश करी और छल - कपट, द्वेष भाव स हमेशा दूर रही !

* सब स आखिर आर महत्वपूर्ण बात इ की अगर अपने के दोस्त अपने के सामने किनकरो बुराई करा त बजाय हाँ म हाँ मिलबे के सरल शब्द म हुनका नै कैह दीयोंन !
अई तरहक टिप्स ध्यान म रैख क करल दोस्ती बहुत गहरा होई य ! आहो दोस्ती करे स पहिने इ टिप्स पर ध्यान जरुर देब !!

Tuesday, February 05, 2008

बड़ी मुश्किल स दोस्त मीलैत अछि !!


चाहूँगा मैं तुझे शाम सवेरे, फिर भी कभी अब नाम तो तेरे आवाज़ मैं न दूंगा !!


आहा के साथ किछ एहेंन भेल या की आहा अपन दोस्त क दिन - रैत याद करेत छलो मुदा कुनू मन मुटाव के कारन हुनका स बात नै करे चाहे छी ! आहा क अपन गहरी दोस्ती जरुर याद आबेत हेत , ओ मस्ती भरल शरारत, एक साथ बीतल ओ पल ॥ लेकिन जखन दोस्ती टूटे के याद आबेत हेत त फेर स मन कड़वाहट स भैर जैत हेत ! श्रीमान एहेंन के हेता जिनका अपन दोस्त स झगड़ा नै भेल हेतेंन ! दोस्ती त एहेंन चीज छिये की झगरा के बाद दोस्त स दूर रहेत एक पल चैन कहा होई छई ! मुदा इ हकीकत आइछ की जतेक दोस्ती गहरा होई य ओतेक मुश्किल बढे य ! झगरा के बाद दोस्त स कोना सुलह करबाक चाही जै स की दोस्तक" रिश्ता के मधुरता क बरक़रार राखी आर ओकरा फेर स जीवित करे के लेल आबू किछ बात करी किये की बड़ी मुश्किल स दोस्त मीलैत अछि !

दोस्ती म अहम क भूले दियो.......

अगर अपने अहम क हमेशा तवोज्जा देबेय त कुनू भी रिश्ता कायम राखब मुश्किल हेत ! दोस्ती म अपने क हमेशा पहला कदम बढ़बे के लेल तैयार रहबाक चाही ! यदि अपने स कुनू गलती हुए त ओकर स्थिति समझे के प्रयाश करबाक चाही आर अपन गलती महशुस करबाक चाही ! ऐहेन नै होबाक चाही की छोट - मोट बात पर टूटल दोस्ती के वजह स जिंदगी के कुनू मोड़ पर अपने एक खास दोस्त के कमी हमेशा महसूस करी ! यदि गलती हुनको स होइन त इ नै भुलू की ओहो अहि जाका एक इंसान छैथ ! इ बात यदि आहा जैन जाय त आहा के लेल सॉरी कहब सुलह के पहला कदम बधैब बहुत आसान भो जायत !


एकांत म खुद स किछ सवाल ......

एकांत म याद करी की झगरा के कारन की आइछ ? गलती किंकर छैन ? गलती यदि आहा स भेल आइछ त की आहा वाकई म गलती मनैत माफी मांगे चाहे छी ! आर यदि गलती अपने के दोस्त स भेल छलेन् त की अपने हुनकर गलती क भूले क हुनका माफ के सकैत छी ? अई तरहक सवाल पर बिचार के क सुलह के तरफ कदम बधाइल जे सके य !

बताबियोंन की दोस्ती आहा के लेल मायने राखै य .....


जखन आहा झगड़ा के बाद सुलह करै के लेल अपन दोस्त स मिलेय ल जाय छी त हुनका जताबियोंन की हुनकर दोस्ती आहा के लेल कतेक मायने रखे य आर आहा क हुनकर कतेक परवाह आइछ !

अपन गलती हुनका लग मानियोंन.....


अगर आहा अपन गलती मानेय लय तैयार छी त जखन आहा क दोस्त स मिले के मोका मिला त हुनका कहियोंन की अपने हुनका स माफी मांगे ल चाहे छी ! आर हुनका समझाबे के प्रयाश करू की अपने स ओ गलती कुन परिस्थिति म भेल छले !

दोस्ती चाहे छी ........


आहा दोस्त स कहियोंन की आहा हुनकर दोस्ती छोड़ब नै चाहे छी ! अई तरहक गलती दुबारा आहा स नै हेत ! तखन देखु आहा के दोस्ती कतेक परवान चढ़े य !

Monday, February 04, 2008

सात फेरा के सात वचन


इ ब्लॉग हमरा तरफ स हमर

मिथिला युवा बंधू के लेल खाश !!
हर साल अपन मिथिला म हजारो जोरा विवाह के अटूट बन्धन स बनधैत छैथ ! अई शुभ अवसर पर हम सब मिथिला वासी अपन होई बला (जीवन - शाथी) क एक स बैढ़ क एक अनोखा उपहार दैत छलो ! प्रेम आर विश्वास के इ बंधन पवित्र रिश्ता स शुरू होई या ! हमरा सब क़ सोचबाक चाही की अगर हम सब अपन नव विवाहिता क उपहार स्वरुप दी अनोखा सात फेरा के सात वचन जे हुनका बनाबें किछ खाश त कते निक हेत ? सात फेरा हम सब लगबे छी ! अहू आइ नै त कैल लगेबे करब त आओ मन म ठेंन लिया की जहिया आहा सात फेरा लगेब तहिया अपन जीवन शाथी क देवै उपहार स्वरुप सात फेरा के सात वचन ! आहक उपहार स्वरुप सात फेरा के सात वचन अई तरह के भो सके या ?
वचन - १, जीवन पथ पर चलैत - चलैत कखनो अगर कुनू तरहक तकरार पत्नी स हेत त पत्नी क मनाबे के लेल आहा अपन पुरुष अहं दूर रखैत हुनका मनाबे के पूरा कोशिश और अपन गलती माने के बरप्पन देखाबी ! अई स आहा दुनु के बिचक प्रेम दुगुनित हेत !
वचन - २, विवाह के दिन (Wedding Annivarsary) निक जका याद राखी अई स हुनकर (पत्नी) मन जीते म आसानी हेत ! फेर आहा साल भैर जे चाही के सके छी, अनायास आहा क आजादी मिल जेत !
वचन - ३, हम (पति) कखनो इ नै भूली की हम आर हमर नौकरिये सब किछ छी ! योजी महाराज अहाक खाली समय और छुट्टी पर हुनके (पत्नी) के अधिकार छैन !
वचन - ४, एक बात के ख़याल राखल करू की पत्नी के और हुनकर परिवारक सम्मान कारियोंन हुनका किनको सामने अपमानित नै कारियोंन !
वचन - ५, पत्नी आहाके परमेश्वर मनेथ इ उम्मीद नै करेत स्वयं निक इंसान हुनकर दृष्टि म बने के प्रयास करी, ओ अपने के हर ख़ुशी क़ अपन ख़ुशी मनेथ तयो इ कोशिश राखी की हुनका कुन बात स ख़ुशी मिलैत छैन जाने के प्रयाश करी !
वचन - ६, पत्नी अगर अर्धाग्नी कहलाबेत छैथ त हुनका सच्चा दोस्त मानेत हमराज़ बनाबे के प्रयाश कारियों, हुनका स कुनू बात, दुःख, परेशानी नै छुपाबियोंन ! इ कसम अग्नि क साक्षी मानेत खेबाक चाही !
वचन - ७, प्रेम आर विश्वास के इ बंधन एक पवित्र रिश्ता स शुरुवात होइत आइछ, जाकरा सवारे के दायित्व दुनु के होई या अतः कुनू तरहक अहं नै राखेत हुनका सदैव दोस्त मनैत अधिकार आर सम्मान बराबर देबाक चाही !
हम जाने छी इ बात हमर किछ युवा बंधू क पसंद नै हेत तयो अपने स अनुरोध जे इ बात क अपन जिन्दगी म उतैर क देखब ? बाद म देखियो आहा के जिन्दगी कतेक अनमोल बने या !!

Saturday, February 02, 2008

महा कवि विद्यापति मैथिली भाषा रत्न

(महा कवि विद्यापति क जन्म स्थान !)



आय स करीब 740 वर्ष पहिलॆ मिथिलाक आकाश‌ मॆं एकटा एहन तारा कॆ उदभव भॆल छल जिनका ल क आइय तक हम सब गौरव कॆ अनुभव क रहल‌ छी बंगाली लॊक कॊनॊ कसर नैय छॊड़लक हुनका बंगाली घॊषीत करवा मॆं लॆकिन धन्यबाद कॆ पात्र छैथ ग्रियर्सन बाबुअ जॆ कि ई तारा कॆ बिहारी मैथील घॊषीत/मान्यता कैला
आहाँ प्राय; बुझी गॆल हैबैय जॆ हम किनका बारॆ मॆं गप क रहल छी जी हम विद्यापती कॆ बारॆ मॆं गप क रहल छी विद्यापती कॆ जन्म 1360 ई. मॆं वर्तमान मधुबनी कॆ विष्फी प्रखंड मॆं भॆल छलैन हिनकर‌ पिता कॆ नाम गणपती ठाकुर और माता कॆ नाम हासिनी दॆवी छलैन हिनकर प्रांरंभीक शिक्षा मिथिलाक महान पण्डित हरिमिक्षक दॆख रॆख मॆं भॆलैन कपिलॆश्वर महादॆव कॆ कृपा स विद्यापति कॆ एक टा पुत्र रत्न‌ सॆहॊ प्राप्त भॆल‌ भैलैन विद्यापति जी कॆ पिता राजा गणॆश्वरक दरवार मॆं दरबारी छला ताही ल क विद्यापती सॆहॊ बचपन स हुनकर राज दरवार मॆं जाइत आबैत छला किछु समय बाद राजा गणॆश्वरक पुत्र क्रीर्ति सि‍ह राजा भॆलाह विद्यापति कॆ पहिल पुस्तक जॆ की क्रीर्तिकला अछी ऒ राजा राजा क्रीर्ति सिंह स काफी प्रभावित अछी या इ कही सकैत छियै जॆ ई पुस्तक हुनकॆ पर लिखल गॆल अछी एकर भाषा संस्कृत और प्राकृतिक भाषा दुनू मॆं मिलल जुलल अछी ऒकर बाद विद्यापति क्रीर्तिपुकार कॆ रचना कॆलाह




दॆसिल बयना सब जन भिट्ठा
तॆंहिसन जम्पऒ अभट्ठा (विद्यापति कॆ रचना क्रीर्तिपुकार स )

मतलब की दॆशी, अप्पन भाषा सब भाषा स मधुर हॊइत छैय ताहि ल क हम अप्पन रचना एहि भाषा मॆं कॆनौअ
एही दुनू ग्रन्थ कॆ अलाबा विद्यापति संस्कृत मॆं विद्यासागर, दानवाक्यावली, पुऱूषपरीक्षा, गंगावाक्यावली, दुर्गाभक्ति तरंगमिणी इत्यादी ग्रन्थ कॆ रचना कॆलैथ गॊरक्षविजय और मणिमच्चरि हुनक लिखल बहुत प्रसिद्य नाटक अछी ई सब पुस्तक विभंत्र तथ्य जॆना कि भुप्ररिक्रमा मॆं विभीत्र तिर्थस्थान कॆ त, लिखनावली मॆं पत्र लॆखन शैली कॆ विवरण कॆल गॆल अछी, तहिना पुऱूषपरीक्षा ललितकला कॆ रुप मॆं धार्मिक और राजनैतिक वर्णन अछी एहि प्रकार स हम सब कही सकैय मॆं सामर्थ‌ छि जॆ की विद्यापति एकटा गितकातकारॆ टा नैय अपितु ऒ कथाकार, निबन्धकार, पत्रलॆखक और नाटककार सॆहॊ छला लॆकिन हुनका सबस बॆसी प्रसिधी गितकार कॆ रुप मॆं भॆटलैन और ऒ ऒही रुप मॆं अमर भ गॆला विद्यापति कतॆकॊ राजा महाराजा कॆ दरवार मॆं रहला यथा गणेश्वर, भवॆश्वर, क्रीर्ति सिंह, दॆवी सिंह, शिव सिंह, पद्य सिंह, विश्वास दॆवी, रत्न सिंह, तथा धिर सिंह
विद्यापति कॆ गित ऒही समय कॆ समाज कॆ जॆ ज्वलंत मुद्दा रहैत छल ऒही पर लिखल अछी जैना की ऒही समय मॆं मिथिला समाज मॆं बहुविवाह कॆ प्रथा चलैत छल स्त्रि भॊग कॆ वस्तु मानल जायत छल कतॆक व्यक्ति बुढापा मॆं सॆहॊ विवाह कॆ इच्छुक रहैत छला एहि वृतांत‌ पर विद्यापति लिखैत छैथ

गॆ माइ हम नहिरहब ऎही आँगन मॆं
जौन बुढ हॊइत जमाय

तॆहिना ऒही समय मॆं दॆखल जायॆत छल जॆ पति सँ रुठी क पत्नि अप्पन बच्चा कॆ काँखी मॆं राखी क अप्पन नैहर बिदा भ जायत‌ छलैथ एहि चित्र पर विद्यापति लिखैत छैथ

चलती भवानी तॆजिअ मॆहरा
कॊर धए‌ क्रातिक गॊद‌ गणॆश

अर्थात विद्यापति कवि मात्र नैय ऒ त महाकवि छलाह हुनका जॆ प्रसिधी और सम्मान भॆटलैन सॆ बहुतॊ कवि कॆ सपना हॊइत छैयक विधी कॆ विधान त कियॊ नैह काटी सकैत छैयक मिथिलाक इ तारा 1450 ई मॆं परलॊक सिधाइर गॆल किछु इ गित गावैत

बढ सुख पाऒल तुअ तिड़ॆ
छॊड़ति निकट बह नीड़ॆ









चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

सु-स्वागतम.....मैथिल आर मिथिला मैथिली भाषा ब्लॉग

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

मैथिल और मिथिला ब्लॉग

पर अपनेक स्वागत अछि !!

प्रिय बंधू इ नया "मैथिल और मिथिला" ब्लॉग क मैथिली लेखक और कवी लोकेन के जरुरत अछि ! सदस्यता के लेल खाली अपन (ईमेल आईडी) हमरा
mrjitmohan@yahoo.com पर ईमेल करू हम आहा क सदस्यता प्रदान करे के लेल काटिबध्य छी ! हमरा अपने के ईमेल क इंतजार रहत आगा हम मैथिल और मिथिला पर आधारित ब्लोग सुरु केलो य, ताहि लेल सब स पहिने मिथिला के महान कवि विद्यापति के किछ गीत प्रस्तुत करे चाहब !!


(मैथिली पुत्र प्रदीप)
१, जगदम्ब अहीं अबिलम्ब हमर (मैथिली पुत्र प्रदीप)


जगदम्ब अहीं अबिलम्ब हमर

हे माय आहाँ बिनु आश ककर

जँ माय आहाँ दुख नहिं सुनबई

त जाय कहु ककरा कहबै

करु माफ जननी अपराध हमर

हे माय आहाँ बिनु आश ककर

हम भरि जग सँ ठुकरायल छी

माँ अहींक शरण में आयल छी

देखु हम परलऊँ बीच भमर

हे माय आहाँ बिनु आश ककर

काली लक्षमी कल्याणी छी

तारा अम्बे ब्रह्माणी छी

अछि पुत्र-कपुत्र बनल दुभर

हे माय आहाँ बिनु आश ककर

जगदम्ब अहीं अबिलम्ब हमर !!!


२, लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ


लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ

गरदनि लगा लिय माँ

हे माँ गरदनि लगा लिय माँ

हम सब छी धीया-पूता आहाँ महामाया

आहाँ नई करबै त करतै के दाया

ज्ञान बिनु माटिक मुरति सन ई काया

तकरा जगा दिया माँ

लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ

गरदनि लगा लिय माँ

कोठा-अटारी ने चाही हे मइया

चाही सिनेह नीक लागै मड़ैया

ज्ञान बिनु माटिक मुरुत सन ई काया

तकरा जगा दिया माँ.....

आनन ने चानन कुसुम सन श्रींगार

सुनलऊँ जे मइया ममता अपार

भवन सँ जीवन पर दीप-दीप पहार भार

तकरा हटा दिय माँ.....

लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ

गरदनि लगा लिय माँ

सगरो चराचर अहींकेर रचना

सुनबई अहाँ नै त सुनतै के अदना

भावक भरल जल नयना हमर माँ

चरनऊ लगा लिय माँ.....

लाले-लाले अर्हुल के माला बनेलऊँ

गरदनि लगा लिय माँ


प्रेम स कहू जय मैथिली, जय मिथिला

Sunday, January 06, 2008

मीत भाइ शृंखलाक कथा-व्यंग्य:http://www.videha.co.in/

मीत भाइककेँ पसीधक काँट नहि गड़लन्हि, ई काँट ककरो गड़ि गेल होए, ई सुनबामे नञि अबैत अछि। ई काँट किछु आन कारणसँ प्रसिद्ध अछि। पसीधक काँट मिथिलाक बोनमे आब साइते उपलब्ध छैक। हम जखन बच्चा रही तँ ई काँट देखने रही मुदा एहि बेर जे गेलहुँ तँ क्यो कहय जे आब ई काँट नहि भेटैत छैक। मुदा जयराम कहलन्हि जे बड़ मेहनतिसँ तकला पर भेटि जाइत छैक। जेना आगाँ कथा-व्यंग्यमे सेहो चर्च अछि, पसीधक काँट उज्जर बिखाह रसक लेल प्रसिद्ध अछि, जे पीलासँ मृत्यु धरि भए जाइत अछि, आऽ बेशी दिन नहि २५-३० साल पहिने धरि गाममे बेटा मायकेँ झगड़ाक बाद ई कहैत सुनल जाइत छलाह जे देखिहँ एक दिन पसीधक रस पीबि मरि जएबौक गञि बुढ़िया। आब सुनू मीत भाइक खोरष।-गजेन्द्र ठाकुर

पसीधक काँट: मीत भाइक दिल्ली यात्रा आऽ आगाँ

“यौ,लोक सभ यौ लोक सभ। लाल काका बियाह तँ कराऽ देलन्हि, मुदा तखन ई कहाँ कहलन्हि जे बियाहक बाद बेटो होइत छैक”।

आब मीत भाइ बेटाकेँ ताकए लेल आऽ बेटाक नहि भेटलाक स्थितिमे अपना लेल नोकरी तकबाक हेतु दिल्लीक रस्ता धेलन्हि।

मुदा एहि बेर तँ मीत भाइ फेरमे पड़ि गेलाह। बुधि जेना हेरा हेल छलन्हि, वा अपनासँ बेशी बुधियार लोकनिसँ सोझाँ-सोझी भए जाइत छलन्हि। अहाँ कहब जे पहिने की भेल से तँ कहबे नञि कएलहुँ तखन हमरा सभ कोना बुझब जे की भेल। तँ सुनू, एकर उत्तर सेहो हमर लग अछि। हम एहि कठाक कथाकार छी से हमरा सभटा बुझल अछि जे की होएबला अछि। ओना यावत हम कथा सुनबैत रहब तावत बीचोमे पुरनका प्लॉटसँ हटि कए हम कथा कहए लागब। मुदा विश्वास करू जे कठा चहटगर बनाबए लेल हम ई करब। हमर अपन कोनो स्वार्थ एहिमे नहि रहत।

तँ आगाँ बढ़ी। जखने दरभंगासँ ट्रेन आगू बढ़ल तँ मीत भाइक सरस्वती मंद पड़ए लगलन्हि। कनेक ट्रेन आगू बढ़ल तँ एकटा बूढ़ी आबि गेलीह, मीत भाइकेँ बचहोन्ह देखलखिन्ह तँ कहए लगलीह -

“बौआ कनेक सीट नञि छोड़ि देब”।

तँ मीत भाइ जबाब देलखिन्ह-,

“माँ। ई बौआ नहि। बौआक तीन टा बौआ”।

आऽ बूढ़ी फेर मीत भाइकेँ सीट छोड़बाक लेल नहि कहलखिन्ह।

मीत भाइ मुगलसराय पहुँचैत पहुँचैत शिथिल भए गेलाह। तखने पुलिस आयल बोगीमे आऽ मीत भाइक झोड़ा-झपटा सभ देखए लगलन्हि। चेकिंग किदनि होइत छैक से। ताहिमे किछु नहि भेटलैक ओकरा सभकेँ। हँ खेसारी सागक बिड़िया बना कए मीत भाइक कनियाँ सनेसक हेतु देने रहथिन्ह, लाल काकीक हेतु। मुदा पुलिसबा सभ एहिपर लोकि लेलकन्हि।

”ई की छी”।

”ई तँ सरकार, छी खेसारीक बिड़िया”।

”अच्छा, बेकूफ बुझैत छी हमरा। मोहन सिंह बताऊ तँ ई की छी”।

” गाजा छैक सरकार। गजेरी बुझाइत अछि ई”।

”आब कहू यौ सवारी। हम तँ मोहन सिंहकेँ नहि कहलियैक, जे ई गाजा छी। मुदा जेँ तँ ई छी गाजा, तेँ मोहन सिंह से कहलक”।

”सरकार छियैक तँ ई बिड़िया, हमर कनियाँ सनेस बन्हलक अछि लाल काकीक..........”

” लऽ चलू एकरा जेलमे सभटा कहि देत”। मोहन सिंह कड़कल।

मीत भाइक आँखिसँ दहो-बहो नोर बहय लगलन्हि। मुदा सिपाही छल बुझनुक। पुछलक
“कतेक पाइ अछि सँगमे”।

दिल्लीमे स्टेशनसँ लालकाकाक घर धरि दू बस बदलि कए जाए पड़ैत छैक। से सभ हिसाब लगाऽ कए बीस टाका छोड़ि कए पुलिसबा सभटा लऽ लेलकन्हि। हँ खेसारीक बिड़िया धरि छोड़ि देलकन्हि।

तखन कोहुनाकेँ लाल काकाक घर पहुँचलाह मीत भाइ।

मुदा रहैत रहथि, रहैत रहथि की सभटा गप सोचाऽ जाइत छलन्हि आऽ कोढ़ फाटि जाइत छलन्हि। तावत गामसँ खबरि अएलन्हि जे बेटा गाम पर पहुँचि गेलन्हि। मीत भाइ लाल काकी लग सप्पथ खएलन्हि जे आब पसीधक काँट बला हँसी नहि करताह। “नोकरी-तोकरी नहि होयत काकी हमरासँ” ई कहि मीत भाइ गाम घुरि कए जाय लेल तैयार भऽ गेलाह। मुदा लालकाकी दिल्ली घुमि लिअ, लाल किला देखि लिअ, ई कहि दू-चारि दिनक लेल रोकि लेलखिन्ह। मुदा असल गप हमरा बुझल अछि। लालकाकी हुनकासँ गामघरक फूसि-फटक सुनबाक लेल रोकने छलखिन्ह।

Sunday, April 09, 2006

मैथिली भाषा SAHASRABADHANIhttp://www.videha.co.in/

अप्पनसभक गप्प करबा लेल हमरा लगमे समयक अभाब रहय लागल।किछु त  एकर कारण रहल हम्मर अप्पन आदति आ किछु एकर कारण रहल ह्म्मर एक्सीडेंट, जकर कारणवस हम्मर जीवनक  डेढ साल बुझा पडल जेना डेढ दिन जेकाँ बीति गेल।किछु एहि बातक दिस सेहो  हमारा ध्यान गेल जे डेढ सालमे जतेक समयक नुकसान भेल तकर क्षतिपूर्ति कोनाकय होयत। किछु त  भोरमे उठि कय समय बचेबाक विचार आयल मुदा आँखिक निन्द ताहि मे बाधक बनि गेल।तखन सामजिक संबंधकेँ सीमित करबाक विचार आयल। एहिमे बिना हमर प्रयासक सफलता भेटि गेल छल। कारण एकर छल हमर न हि खतम प्रतीत होमयबला बीमारी। एहिमे विभिन्न डॉक्टरक ओपिनियन,किछु गलत ऑपरेशन आ एकर सम्मिलित इम्प्रेसन ई जे आब हमरा अपाहिजक जीवन जीबय पडत। आनक बात त  छोडू हमरा अपनो मोनमे ई बात आबय लागल छल। लगैत छल जे डॉक्टर सभ फूसियाहिँक आश्वासन दय रहल छल। एहि क्रममे फोन सँ ल  कय हाल समाचार पूछ्नहारक संख्या सेहो घटि गेल छल। से जखन अचानके बैशाखी फेर छडी पर अयलाक बाद हम कार चलाबय लगलहूँ तँ बहूत गोटेकेँ फेर सँ सामान्य संबंध सुधारयमे असुविधा होमय लगलन्हि। जे हमरा सँ दूर नहि गेल रहथि तनिकासँ त   हम जबर्दस्तीयो संबंध रखलहूँ, मुदा दोसर दिशि गेल लोक सँ हमर व्यवहार निरपेक्ष रहि कय पुनःसंबंध बनेबासँ हतोत्साहित करब रहय लागल। दुर्दिनमे जे हमरापर हँसथि तनिकर प्रति ई व्यवहार सहानभूतिप्रदहि मानल जायत। एहिसँ समयधरि खूब बचय लागल।

शुरुमे त’  लागल जेना ऑफिसमे क्यो चिन्हत की नहि। मुदा जखन हम ऑफिस पहुँचलहुँ त’  लागल जेना हीरो जेकाँ स्वागत भेल हो। मुदा एहिमे ई बात संगी-साथी सभ नुका लेलक जे हमर छडी सँ चलनाई हुनका सभमे हाहाकार मचा रहल छन्हि। सभ मात्र हमर हिम्मतक प्रशंसा करैत रहैत छलाह। जखन हम छडी छोडि कय चलय लगलहुँ आ जीन्स शर्ट-पैंट पहिरि कय अयलहुँ, तखन एक गोटे कहलक जे आब अहाँ पुरनका रूपमे वापस आबि रहल छी। एहि बातकेँ हम घर पर आबि कय सोचय लगलहुँ।अपन चलबाक फोटोकेँ प्तनीक मदति सँ हैण्डीकैम द्वारा वीयोडीग्राफी करबयलहुँ।एकबेर तँ सन्न रहि गेलहुँ। चलबाक तरीका लँगराकय दौरबा सन लागल। बादमे घरक लोक कहलक जे ई त’  बहुत कम अछि, पहिने त’  आर बेसी छल। तखन हमरा बुझबामे आयल जे संगीसभ आ ओ’  सभ जे हमरासँ लगाव अनुभव करैत छलाह, तनिका कतेक खराब लगैत होयतन्हि। तकराबाद हमरा हुनकरसभक प्रोत्साहन आ’  हमर हिम्मतक प्रशंसा करैत रहबाक रहस्यक पता चलल । अपन प्रारम्भिक जीवनक एकाकीपनक बादमे नौकरी-चाकरी पकड़लाक बाद सार्वजनिक जीवनमे अलग-थलग पड़ि जयबाक संदेह , आशा , अपेक्षा किंवा अहसास-फीलिंगक बाद जे एहि तरहक अनुभव भेल से हमर व्यक्तित्वक भिन्न विकासकेँ आर दृढ़ता प्रदान केलक।


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सन~~ 1885 ई.। झिंगुर ठाकुरक घरमे एक बालकक जन्म भेल।एहि वर्षमे कांग्रेस पार्टीक स्थापना बादक समयमे एकटा महत्त्वपूर्ण घटनाक रूपमे वर्णित होमयवला छल। अंग्रेजी राज अपनाकेँ पूर्णरूपसँ स्थापित कए चुकल छल।राजा-रजवाड़ासभ अपनाकेँ अंग्रेजक मित्र बुझवामे गौरवक अनुभव करैत छलाह।शैक्षिक जगतमे कांग्रेस शीघ्रअहि उपद्रवी तत्वक रूपमे प्रचारित भय गेल। मिलाजुलाकेँ कांग्रेसी लोकनि अंग्रेजीराज आभारतीय रजवाड़ा सभक सम्मिलित शासनकेँ स्थायित्व आयथास्थिति निर्माणकर्त्ताक रूपमे स्थान भेटि चुकल छल। कांग्रेस अपन यथास्थितिवादी स्वरूपकेँ बदलबाक हेतु भविष्यमे एकटा आन्दोलनात्मक स्वरूप ग्रहण करयबला छल। संस्क़ृतक रटन्त विद्याक वर्चस्व छल। परंतु सरकारी पद बिना आङ्ल-फारसी सिखलासँ भेटब असंभव छल।सरकारी पदक तात्पर्य राजा-रजवाड़ाक वसूली कार्यसँ संबंधित आओतबहि धरि सीमित छल। मुदा किछु समयापरान्त अंग्रेजक किरानीबाबू लोकनि सेहो अस्तित्वमे अयलाह।

     तखन बालककेँ संस्क़ृत शिक्षाक मोहसँ दूर राखल गेल। मैथिल परिवारमे फारसी आअंग्रेजीक प्रवेश प्रायः नहियेक बराबर छल आताहि कारणसँ अधिकांश परिवार एक पीढ़ी पाछू चलि गेल छल। मुदा झिंगुर बाबू अपन पुत्रक हेतु मौलवी साहबकेँ राखि शिक्षाक व्यवस्था कएल। तदुपरांत दरिभङ्गामे एकटा बंगालीबाबू बालककेँ अंग्रेजीक शिक्षा देलखिन्ह। बालक कलित शनैः शनैः अपन चातुर्यसँ मंत्रमुग्ध करबाक कलामे पारंगत भगेलाह। जाहि बालककेँ झिंगुरबाबू अन्यमनस्क पड़ल आमात्र सपनामे हँसैत देखलखिन्ह, तकर बाद ठेहुनिया मारैत, फेर चलैत से आब शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करहल छथि। हुनका अखनो मोन पड़ि रहल छलन्हि जे कोना ठेहुनिया दैत काल, नेनाक हाथ आगू नहि बढैक आबेंग जेंकाँ पाछू सँ सोझे आगू फाँगि जाइत छलाह। पूरा बेंग जेकाँ-अनायासहि ओमुस्कुरा उठलाह। पत्नी पूछि देलखिन्ह जे कोन बात पर मुस्कुरेलहुँ, तँ पहिने तँ ना-नुकुर केलन्हि फेर सभटा गप कहि देलखिन्ह। तखनतँ गप पर गप निकलय लागल।
     “एक दिन कलितकेँ देखलहुँ जे ठेहुनियाँ मारने आगू जारहल छथि। आँगनसँ बाहर भेला पर जतय अंकर-पाथर देखल ततय ठेहुन उठा कय, मात्र हाथ आपैर पर आगू बढ़य लगलाह, पत्नीकेँ मोन पड़लन्हि।
     “एक दिन हम देखलहुँ जे ओदेबालकेँ पकड़ि कय खिड़की पर ठाढ़ हेबाक प्रयासमे छथि। हमरो की फूड़ल जे चलू आइ छोड़ि दैत छियन्हि। स्वयम प्रयास करताह। दू बेर प्रयासमे ऊपर जाइत-जाइत देवालकेँ पकड़ने-पकड़ने कोच पर खसि गेलाह। हाथ पहुँचबे नहि करन्हि। फेर तेसर बेर जेना कूदि गेलाह आहाथ खिड़की पर पहुँचि गेलन्हि आठाढ़ भगेलाह, झिंगुर बाबूकेँ एकाएक यादि पड़लन्हि।
     “एक दिन हम ओहिना एक-दू बाजि रहल छलहुँ। हम बजलहुँ एक तँ ई बजलाह, हूँ। फेर हम बजलहुँ दू तँ ई बजलाह, ऊ। तखन हमरा लागल जे ई तँ हमर नकल उतारि रहल छथि
     “ एक दिन खेत परसँ एलहुँ आनहा-सोना भोजन कय खखसि रहल छलहुँ। अहाहाकेलहुँ तँ लागल जेना कलित सेहो अहाहाकेलथि। घूरि कय देखलहुँ तँ ओगेंदसँ बैसि कय खेला रहल छलाह। दोसर बेर खखसलहुँ तँ पुनः ई खखसलाह। हम कहलहुँ किछु नहि, ई हमर नकल कय रहल छथि। दलान पर सभ क्यो हँसय लागल। फेर तँ जे आबय, कलित ऊहुहूँ, तँ जवाबमे ईहो ऊहूहूँ दोसरे तरीकासँ कहथि। उम्र कतेक हेतन्हि, नौ-वा दस महिना
     “ हम जे सुनेलहुँ ताहि समय कतेक वयस होयतन्हि, छकि सात मास। पत्नी सासु-ससुर वा बाहरी सदस्य नहि रहला पर सोझे-गप सुनलहुँवाई करू वाकरू बजैत छलीह। मुदा सासु- ससुरक सोझाँ तृतीया पुरुषमे-सुनैत छथिन्ह, फलना कहैत छलैक-। आफेर झिंगुर बाबू की कम छलाह. ओहो ओहिना गीताक काजक लेल काजक अनुकरणमे तृतीया पुरुषमे जवाब देथि। मुदा एकांतमे फेर सभ ठीक। पुनः मुस्कुरा उठलाह झिंगुर बाबू, ई प्रण मोने-मोन लेलथि जे कलितकेँ एहि जंजालसँ मुक्त करेतथि, ओहो तँ बूझताह जे पिता कोनो पुरान-धुरान लोक छथि। पनी पुनः पुछलथिन्ह जे आब कोन बात पर मुस्की छूटल। मुदा एहि बेर झिंगुर कन्नी काटि गेलाह। मुस्की दैत दलान दिशि निकलि गेलाह, ओतय किछु गोटे अखड़ाहाक रख-रखाबक बात करहल छलाह। भोरहाकातक अखड़ाहाक गपे किछु आर छल। भोरे-भोर सभ तुरियाक बच्चा सभ, जवान सभ पहुँचि जाइत छल। एकदम गद्दा सन अखड़ाहा, माटि कय कोड़ि आचूरि कय बनायल। बालक कलितकेँ छोड़ि सभ बच्चा ओतय पहुँचैत छल। झिंगुर बाबू कचोट केलन्हि तँ आन लोक सभ कहलखिन्ह जे से की कहैत छी। अहाँ हुनका कोनो उद्देश्यक प्राप्ति हेतु अपनासँ दूर रखने छी, तँ एहिमे कचोट कथीक। एकौरसँ ठाकुर परिवार मात्र एक घर मेंहथ आयल आआब ओहिसँ पाँचटा परिवार भगेल अछि। डकही माँछक हिस्सामे एकटा टोलक बराबरी ठकुरपट्टीकेँ भेट गेल छैक। कलितक तुरियाक बच्चाकेँ लकय आठटा परिवार अछि ठकुरपट्टीमे। अखनेसँ बच्चा सभकेँ मान्यता ददेल गेल छैक। तखने एकौरसँ एकटा समदी एलाह आभोजपत्रमे तिरहुतामे लिखल संदेश देलखिन्ह। झिंगुर बाबू अँगनासँ लोटा आएक डोल पानि हुनका देलखिन्ह आपत्र पढ़य लगलाह। प्रायः कोनो उपनयनक हकार छलन्हि। परतापुरक सभागाछी देखि कय जायब, ई आदेशपूर्ण आग्रह झिंगुर बाबू समादीकेँ देलखिन्ह, एकटा पूर्वजसँ मूल-गोत्रक माध्यमसँ जुड़ल दियादक प्रति अनायासहि एकत्वक प्रेरणा भेलन्हि। फेर आँगन जाय पत्र पढ़ब प्रारंभ कएल।
                         ॥श्रीः॥
     स्वस्ति हरिवदराध्यश्रीमस्तु झिंगुर ठाकुर पितृचरण कमलेषु इतः श्री गुलाबस्य कोटिशः प्रणामाः संतु। शतम~ कुशलम। आगाँ समाचार जे हमर सुपुत्र श्री गड़ेस आचन्द्रमोहनक उपनयन संस्कारक समाचार सुनबैत हर्षित छी। अहाँक प्रपितामह आहमर प्रपितामह संगहि पढ़लथि। अपन गोत्रीयक समाचार लैत-दैत रहबाक निर्देश हमर पितामह देने गेल छलाह। हर्षक वाशोकक कोनो घटना हमरा गामसँ अहाँक गाम आअहाँक गामसँ हमरा गाम नहि अयने अशोचक विचार नहि करबासँ भविष्यक अनिष्टक डर अछि। संप्रति अपने पाँचो ठाकुर गुरुजनक तुल्य पाँच पांडवक समान समारोहमे आबि कृतार्थ करी। अहींकेँ अपन ज्येष्ठ पुत्रक आचार्य बनेबाक विचार कएने छी। परतापुरक सभागछीक पंचकोशीमे अपने सभ गेल छी, तेँ बहुत रास लोक गप-शपक लालायित सेहो छथि। अगला महीनाक प्रथम सोमकेँ जौँ आबि जाइ तँ सभ कार्य निरन्तर चलैत रहत। बुधसँ प्रायः प्रारम्भिक  कार्य सभ शुरु भजायत। इति शुभम~
     बलान धारक कातमे परतापुरक चतरल-चतरल गाछ सभ आतकर नीचाँ सभागछी। बलानक धार खूब गहींर आपूर्ण शांत। ई तँ बादमे हिमालयसँ कोनो पैघ गाछ बलानमे खसल आहायाघाट लग सोझ रहलाक बदला टेढ़ भएकर धारकेँ रोकि देलक आएकटा नव धार कमलाक उत्पत्ति भेल। बलान झंझारपुर दिशि आकमला मेंहथ , गढ़िया आनरुआर दिशि। बलान गहींर आशांत, रेतक कतहु पता नहि; मुदा कमला फेनिल, विनाशकारी। बाढ़िक संग रेत कमला आनय लगलीह। ग्रीष्म ऋतुमे बलान पूर्वे रूप जेकाँ रहैत छथि, बिना नावक पार केनाइ कठिन, किंतु कमलामहारानीकेँ  पैरे लोक पार करैत रहथि। सभटा सभागछीक चतरल गाछ बाढ़िक प्रकोपमे सुखा गेल। चारूदिश रेत आसभागाछी उपटि गेल। चलि गेल सभटा वैभव सौराठ। मुदा झिंगुर बाबूक कालमे परतेपुरक ध्रुवसँ पंचकोशी नापल जाइत छल, से बादहुमे परम्परारूपमे रहल।
     कलित दरिभङ्गासँ परसू आबि जयताह

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