भालसरिक गाछ/ विदेह- इन्टरनेट (अंतर्जाल) पर मैथिलीक पहिल उपस्थिति

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Wednesday, April 15, 2009

सोमदेव: जकरे तकैत छी


जकरे तकैत छी- सोमदेव

जकरे तकैत छी सभ। अहीं सन लगैत अछि।

रसे रसे सभटा। बिन स्वादो अरघैत अछि॥1॥

एक आँखि काजर। आ’ एक आँखि नोरभरल।

कवि छी, तैं भाव जगा। हमरा ठकैत अछि॥2॥

ऐंठल सन पेट आर। चोटकल सरोज वैह।

गामक एकचारी पर सजमनि लगैत अछि॥3॥

नगरक सभ डगर डगर। डगर कात नगर नगर।

अहाँक सोह। आँखि पड़ल मारी लगैत अछि॥4॥

गामक सभ कास-कूस। मोन पड़ै धोन्हि बीच।

बिजुरीक राति। ‘सोम’ कते कन-कन लगैत अछि॥5॥

अनुप्रियाक दू गोट कविता- भगजोगनी आ देह

सुपौल (बिहार) मे जनमल अनुप्रियाक पढ़ौनी नवोदय विद्यालय, सुपौल मे भेल छैन्हि । हिन्दी कविता सँ अपन साहित्यिक यात्रा शुरू करय वाली अनुप्रिया हिन्दी कविताक युवा पीढ़ी मे बेस चर्चित छथि । शोभनाथ यादव राष्ट्रीय कविता सम्मान आ स्पेनिन सृजन सम्मान भेटल छैन्हि । भारती मंडन अंक-12 (नवम्बर, 2006) मे प्रकाशित भ’ चुकल हुनक ई दू गोट कविता प्रस्तुतत करबाक उद्देश्य अछि जे ब्लागक माध्यमे नवीन पाठक वर्ग हुनकर कविता सँ परिचित होयत आ अनेको पाठकक त्वरित प्रतिक्रिया सँ हुनकर मौथिली लेखनक गतिक तीव्र होयबाक संभावना बढ़ि जायत । प्रसंगवश बतबैत चली जे अनु मैथिलीक यशस्वी साहित्यकार रामकृष्ण झा किसुनक पोती छथि ।
www.maithilimandan.blogspot.com



भगजोगनी




हमरा लग ने दीप अछि
ने बाती
आर ने तेल
तैयौ जरौने छी
दीप उमेदक अपन
आँखि मे

किछु एहेन घर
किछु एहेन डगर
किछु एहेन बस्ती जतय
ढीठ भ’ जीबैत अछि अन्हार
ओतय देखने छी हम
टिमटिमाइत भगजोगनी
जेना अपन मिरियैल इजोत सं
ओ काटि देबय चाहैत होई
घुप्प अन्हार

वैह भगजोगनी
हमरा मन मे
गहैत अछि विश्वास
जे आब एतहु
मनायल जायत दिवाली

आउ झक इजोत लेल
एक-एक टा दीप जराबी ।

00000000000000000


देह


अहां हमरा गहय चाहैत छलहुँ
अपन बाँहि मे
आ हम चाहैत छलहुँ
अहाँक संग

अहाँ छूबय चाहैत छलहुँ
हमरा
आ हम अहाँक हाथ पकड़ि
पूरा करय चाहैत छलहुँ
जीवन-जतरा

हमरा लेल तेँ अहां
हमर आत्मा बनि गेल छलहुँ
मुदा अहांक लेल
हम- मात्र एकटा देह ।

Tuesday, April 14, 2009

अटकन-मटकन- बाल-कविता-4


एक टा पुरान मैथिली फकरा प्रस्तुत क रहल छी. दाय आ नानी के मुहं स सुनैत-सुनाबैत ई फकरा के एखनो गाम-घर के बच्चा गाईव क खेलाइत-धुपाइत अछि।


अटकन मटकन
दहिया चटकन
केरा कुश
महागर जोहागर
पुर्णि पत्ता

हिलय डोलय
माघ मास
करैला फरय
ई करैला नाम की
आमुन गोटी
जामुन गोटी
तेतरी सोहाग गोटी
बांस कटय
ठाँय ठाँय
नदी गोगियायल जाय
कमलक फूल दूनु
अलगल जाय
छोटी रानी
जेठी रानी
गेली नहाय
इछुवा बिछुवा
लय गेल चोर
आब कि पहिरती
कौवा के ठोर
कौवा के ठोर में पिलुवा
आव कि पहिरती सिलुवा।


विष्णु प्रभाकर जी क स्मृति मे


विष्णु प्रभाकर जी सादगीक प्रतिमूर्ति छलाह। .
१९९० क वर्ष हमरा लेल आब एहन लगैत अछि काफी महत्वूर्ण छल। ओहि समय हमरामे सकारातमक उर्जाक प्रबल आवेग हिलोर ल’ रहल छल. हम जे किछु समाजकेँ देलहुँ या सामजिक ऋण सँ उरिण होएबाक लेल जाहि कार्यकेँ सम्पन्न कएल ओहिमे बहुतोक शुरुआत ९० सँ भेल।ठीकसँ मोन नहि आबि रहल अछि जे की हम कोना आ ककरा संग सबसँ पहिने मोहन पैलेसक छत पर चलए वाला काफी हाउस मे पहुँचलहुँ .शाइत प्रो. राजकुमार जैन जीक संग गेल रही। ओ शनिक दिन रहए. ओतहि दिल्लीक चर्चित लेखक आ कलाकार-मंडली लागल छल. ओहि उस मंडलीक मध्य वयोवृद्ध खादी धरी,गाँधी टोपी पहिरने विष्णु प्रभाकर जी सुशोभित भ’ रहल छलाह। ओहि वातावरणमे हमरापर गजबक असर भेल.फेर हम सभ साँझ शनिकेँ ओहि शनिवारी गोष्ठीमे बैस’ लगलहुँ। ई सिलसिला १९९५ तक चलल,जखन विश्वविद्यालय परिसरका रीड्स लाइन हमर निवास रहल. एहि वर्षो मे नहि जानि कतेक नामी -गिरामी लेखक,कवि,कलाकार आ पत्रकारक साहचर्य रहल.पता नहि कतेक साहित्यिक गोष्ठिमे समीक्षक या वक्ताक हैसियतसँ शामिल भेलहुँ.ओहि समयमे हम दाढी रखैत छलहुँ आ पाईप पीबैत छलहुँ। ओहि समयमे उप-कुलपति प्रो.उपेन्द्र बक्षी साहब सेहो पाईप पीबैत रहथि। अतः लोक हमरापर कखनो-कखनो व्यंग्य सेहो करैत रहथि। “एक बक्षी साहब हैं की एक झा साहब हैं-दूर से पहचाने जाते हैं”. हमहुँ खादीक कुर्ता पायजामा पहिरैत छलहुँ। से हमर कोनो बैठकमे उपस्थिति अलग अंदाजमे होइत रहए। पढबैत इतिहास छी ,परन्तु ओहि दिनमे सेहो लोक हमरा हिन्दीक शिक्षक बुझैत रहथि। काफी हाउस सेहो एकर अपवाद नहि छल। हमर कॉलेजक डॉक्टर हेमचंद जैन अक्सर हमरा कहैत रहथि –अहाँ अपन बौद्धिक लुकसँ आतंकित करैत छी .देव राज शर्मा पथिक सेहो कहैत रहथि- “झा साहब आपमें स्पार्क है” .खैर हम एहि सभ गपक आदी भेल जा रहल छलहुँ.लेकिन काफी हाउस हम बस साहित्यिक मंडलीक साहचर्य सुख लेबा लेल जाइत रही। ओतए हमर एहन अदना सन व्यक्ति बड्ड बजैत रहए परन्तु वाह रे विष्णुजीक महानता , हमरा हमर छोटपनक कखनो अहसास तक नहि होमए देलन्हि । वल्कि हमरा लगैत रहए जे हमरा काफ़ी गंभीरतासँ ओ सुनैत रहथि.बहुत गर्वोन्नत महसूस करैत छलहुँ हम। हम एक-दू बेर हाथ पकड़ि कए भीड़ भरल सड़क पार करेबाक बहने हुनकर स्नेहिल स्पर्श आ सान्निद्ध्य प्राप्त करबाक अवसर प्राप्त केलहुँ। एकर संतोष अछि .१९९४ मे भारतीय भाषा लेल संघर्ष करबाक क्रम मे संघ लोक सेवा क बाहर धरना-स्थल सँ पुष्पेन्द्र चौहान समेत कतेको साथीक संग हमरो पुलिस गिरफ्तार कए तिहाड़ जेल भेज देलक .ज्ञानी जेल सिंह,अटल बिहारी वाजपेयी विशानाथ प्रताप सिंह,मुलायम सिंह यादव आर अन्य कतेक पैघ नेता आ साहित्यकार-पत्रकार,समाज सेवि एवं आन्दोलनकारिक दबाब मे एक सप्ताहक बाद हमारासभ उपर लादल सभ केस हटा हमरासभकेँ बिना शर्त रिहा कएल गेल। एकर बाद तँ काफी हाउसमे सेहो हमरासभ प्रति साथिसभक आदर भाव बढ़ि गेलन्हि। मुदा अपन आवारा स्वाभावक कारण हम १९९५ क बाद काफी हाउस जएबाक सिलसिला चालू नहि राखि सकलहुँ. एकर हमरा आइयो अफ़सोस अछि .आवारा मसीहाक लेखक केँ एकर भान धरि नहि भेल होएतन्हि जे एक यायावरी आवारा कोनो दोसर धुन मे उलझि रहल हएत। आइ हमर बीच नहि रहबाक बादो हुनकर स्मृति एतेक मृदुल अछि जे लगैत अछि कि विष्णु जी अखनो काफी हाउसक मंडलीक बनेने छथि .हुनकर स्मृतिकेँ कोटि-कोटि प्रणाम।

दयो करबाक बेर होइत छैक- कुलानन्द मिश्र/


दयो करबाक बेर होइत छैक - कुलानन्द मिश्र



पोखरि बेश फुला गेल छैक दोसर बेर जाल फेकबा सँ पहिने
मोहना जाल केँ झाड़लक तऽ एकटा छोट-छिन पोठिया
छटपटाइत कूदि गेलै पोखरि मे
मोहनाक मोन मे खुशी भेलैक
ओकरा नीक लगलै जे ओ कूदि गेलै
पड़ा गेलै जाल सँ
ओकरा ठोर पर चाकर मुसकी पसरि गेलै

ओ फेर जाल केँ पोखरि मे पसारलक
आ एहिबेर पहिलुक खेपसँ
पैघ-पैघ आ पुष्ट-पुष्ट माछ
जाल सङ्गे खिचाकऽ बाहर आयल
मोहनाक आँखिक आगाँ
ओ पड़ाइत पोठिया फेर नाचि गेलैक
ओ फेर बिहुँसल
आ सोचलक
दयो करबाक बेर होइत छैक!

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी(पाँचम कड़ी)


हम महदेव झा कs विषय में सोचति सोचति नहि जानि कतय ध्यान मग्न भs गेलहुं, अचानक हमर ध्यान खुजल तs देखति छी इ हमरा सोझां में ठाढ़ भs मुस्की दs रहल छथि। इ देखि कs हमरा लाज भs गेल, आ इ तुंरत हमरा दिस हाथ आगू कs कहलाह, " लिय, अहाँक लेल हम मुँह बजाओन अनलौंह अछि, ई हमरा दिस सs अहाँक लेल पहिल उपहार थिक। चतुर्थी दिन वाला तs दादक कीनल छलैन्ह, ई हमरा दिस सs अछि"। ई कहि हमरा दिस एकटा किताब आगू बढ़ा देलथि।



पँचमी दिन भोरे भोर दादी सभ गोटे कs उठा देलथिन। हिनको उठय परि गेलैन्ह, इहो भोरे भोर तैयार भs गेलाह, हिनको हमारा संग पूजा पर बैसय कs छलैन्ह। पूजा पर बैसैत बैसैत ९ बाजि गेलैक। दादी भरि गामक लोक कs हकार दियबोने रहथि मुदा पूजा काल गामक सभ गोटे नहि आयल छलथि हाँ, अपन दियादि महक सभ कियो अवश्य आयल रहथि। परंच भरि दिन लोकक एनाइ गेनाइ लागल छलय। पूजा आ कथा समाप्त होयत होयत १ बाजि गेलय। सब सs पहिने हिनकर भोजनक व्यवस्था कs हिनका खुआयल गेलैन्ह, तकर बाद अहिबाति सबहक खेनाइ कs ओरिओन कs हुनका सब कs बैसायल गेलैन्ह। हमरो हुनके सबहक संग बीच में बैसि कs खेबाक छलs। हमारा मिट्ठ खेबाक एको रत्ती इच्छा नहि होयत छलs। सब गोटे खेबाक लेल जिद्द कs देलैथ इ कहि जे बस एकर बाद आब मिट्ठ नहि खाय परत । दोसर साँझ भेला पर किछु नय खेबाक छल, कहुना कनि खीर खा कs उठि गेलहुँ


पूजा पर सs उठला पर ततेक नय थाकि गेल रहि जे होयत छलs जे चुप चाप सुति रहि मुदा कनि कनि काल पर कियो नय कियो आबि जायत रहथि आ हुनका सब लग बैसय लेल तुंरत बजाहटि आबि जायत छल। दुपहर में हम सब फेर फूल लोढ़य लेल गेलहुँ ओहि दिन हम बहुत थाकल रहि, तथापि जेना जेना सभ गोटे फूल पत्ति तोरथि तहिना हमहुँ तोरि कs राखने जाइ, ओहि दिन बुझ परैत छलs सब थाकल रहथि, ओहि दिन हम सभ जल्दिये आपस भs गेलंहु।


प्रतिदिन हमसब फूल लोढ़य लेल जाइ आ एक पथिया करीब रोज फूल पात आनि। बारहम दिन हमसब कनि जल्दी जाs कs फूल जाहि जूही लs अनलियय ओहि दिन बहुत लोकक ओतहि पाहुन कs अयबाक छलैन्ह, किनको ससुर कs अयबाक छलैन्ह तs किनको वर कs। बारहम दिन धरि करीब खिड़की तक फुल पातक टालि लागि गेलैक, ताहि पर उपर सs दूध, जल प्रसाद चढायल जायत छलैक। कोहबर घर में ओना तs धूप दीप जरति छलैक मुदा तइयो कनेक मनेक गंध रहति छलैक। बारहम दिन साँझ में पूजा वाला सबटा फूल पात हटाs कs ओहि ठाम साफ करायल गेलैक, कियैक तs मधुश्रावणी दिन फेर सs सभटा फूल पात हटेलाक बाद ओतहि साफ कs फेर सs अरिपन परैत छैक। जखैन्ह फूल पात हटायल जायत छलैक तखैन्ह बुझय में आयल जे हमसभ कतेक फूल पात आ जाहि जूही तोरने रहि, खत्मे नहि होयत छलैक ।


साँझ में हमर ससुर अपने, हमर एकटा पितिऔत दियोर कs संग भार लs कs अयलाह। तखैन्ह सs घर में सबगोटे आओर व्यस्त भs जाय गेल्थिन।हमर दादी आ माँ भार देखबा आ देखेबा में व्यस्त छलिह। बिधक की सब आयल अछि की सब नहि। हमर ससुर सेहो विवाहक बाद पहिल बेर आयल छलाह। हिनको अपन दादा (पिताजी) सs विवाहक बाद पहिल बेर भेंट भेल छलैन्ह, गप्प सप में देरी भs गेलैक।


हम सुनने रहि जे मधुश्रावणी दिन कनिया कs सासुर सs बिधक सामान संग टेमी सेहो अबैत छैक आ ओहि सs कनिया कs दुनु ठेहुन कs डाहल जायत छैक। टेमी सs डाहलाक बाद ओकरा पर पान आ सुपारी दs ओकरा रगरि देल जायत छैक जाहि सs फोका अवश्य होय। फोका भेला सs निक मानल जायत छैक। सब दिन फुल लोढ़य काल इ सब गप्प होयत रहैत छलैक। हम सांझे सs डरल रहि आ जखैन्ह सs हमर ससुर आबि गेलाह तखैन्ह सs दर्दक कल्पना कs आओर डरि जायत रहि। दादी कs गप्प मोन परि जाय जे "मधुश्रावणी लोकक एके बेर होयत छैक"। किनको सs किछु पुछबो नय करियैन्ह।


राति में सुतय में देर तs भs गेल छलैक, भगवान भगवान कs सुतय लेल गेलहुं। हम ओनाहों कम बाजति छलौंह ओहि दिन आओर किछु नय बाजति छलियs इ हमरा सs दू तिन बेर पुछ्लाह किछु भेल अछि, हम सब बेर नय कहि दियनि मुदा हिनका बुझs में आबि गेलैन्ह कि किछु गप्प अवश्य छैक। जखैन्ह इ हमरा बहुत पुछ्लथि तs हम धीरे सs कहलियैन्ह, "हमरा डर होयत अछि"। हिनका किछु बुझय में नय अयलैन्ह, अचानक हमरा डर कियैक होयत छलs। इ हमरा बहुत निक सs बुझा कs पुछ्लाह "डरबाकs आखिर कोन गप्प छैक", अहाँ पहिने डरु नय आ हमरा कहु की गप्प छैक"? हम डरैत हिनका कहलियैन्ह "हमरा टेमी सs डर होयत अछि"। "टेमी... कियाक टेमी सs डर होइत अछि"? हम हुनका तुंरत सभटा कहि देलियैन्ह जे काल्हि कs लेल डरि रहल छलन्हु। इ हमरा कहलाह "अहाँ जुनि डरु एकतs हमरा बुझलि अछि जे हमारा ओतय टेमी नहि होयत अछि, दोसर जाओं होयतो होयत तs अहाँ कs नहि होमय देबैक, हमर गप्प के कियो नय काटतिह "। ओहि दिन पता नहि कोना आ कियाक, तुंरत हिनका पर पूर्ण रूपेण विश्वास भs गेल, हम निश्चिंत भs गेलहुं जे आब हमरा टेमी नहि परत। ओकर बाद हमरा मोन में कोनो डर नहि छलs।


भोरे उठी कs तैयार भेलन्हु मुदा मोन में कनिको डर नहि छलs। मधुश्रावणी दिन पूजा में कनेक आओर बेसी समय लगलैक, जखैन्ह टेमी देबाक भेलs तs जहिना हमर बिधकरि उठलथि इ तुंरत कहि देलथिन हमरा सब में टेमी नय होयत अछि। इ सुनतहि हमरा ततेक नय खुशी भेल जकर वर्णन नहि कयल जा सकति अछि। बिधकरि उठि कs एकटा टेमि आनि कहलथिन ठीके हिनका सभके शीतल टेमि होयत छैन्ह। एकटा टेमि में चंदन लगा ओहि सs हमर दुनु ठेहुन में लगा देल गेल।


ओहि दिन फेर अहिबातिक संग खेबाक छलs। हमर ससुरक सौजनि सेहो छलैन्ह। पाबनि सs उठलाक बाद हिनकर भोजनक व्यवस्था आ हमर ससुरक सौजनि भेलैन्ह आ हम खेलाक बाद जहिना सोचलौन्ह आब आराम करैत छि कि माँ आबि कs कहलैथ तैयार होयबाक अछि हमर ससुर, दादा जी आबैत होयताह। दादा जी कs आदेश छलैन्ह जे ओ हमरा भगवति घर में देखताह। हम फेर तैयार भs भगवति घर चलि गेलंहु । दियोर आ दादा जी दुनु गोटे भगवति घर अयलाह आ कनि दूर ठाढ़ भs गेलाह। हमरा संग जे छलिह ओ हमरा जाs कs गोर लागय लेल कहलैथ, हम ठाढ़ भs दादा जी लग जा हुनका गोर लागि लेलियैन्ह आ ओहि ठाम बैसि गेलंहु, ओ तुंरत देखेबाक लेल कहलैथ आ हुनका जहिना देखा देल गेलैन्ह हमरा हाथ में एकटा गहना दs ओतय सs चलि गेलाह।


दादा जी साँझ में चलि गेलाह। हमारो सबके दू दिन बाद जेबाक छलs। हमर छोट भायक मुंडन छलैन्ह अरेराज मंदिर में, हुनकर मुंडन करा हमरा राँची में छोरति, छोटका भाय आ तिनु बहिन के संग माँ बाबुजी कs अरुणाचल जयबाक छलैन्ह बाबुजी कs छुट्टी से ख़तम भs गेल छलैन्ह। । हिनका सेहो मुंडन में उपस्थित रहबाक लेल माँ बाबुजी सब कहैत रहथि।


राति में इ हमरा सs हमर मोन जांचय लेल पुछ्लथि अहांक माँ बाबुजी हमरो मुंडन में उपस्थित होयबाक लेल कहैत छथि, हम की करि । हम पहिने त चुप रहि मुदा टेमी वाला बातक बाद स हमर कनि धाख टुटि गेल छल। हम धीरे सs कहलियनि छुट्टी अछि त अहुँ हमरे सब संग चलु , मुंडन कs बाद अहाँ मुजफ्फरपुर चलि जायब आ हम सब राँची चलि जायब। इ हमरा कहलथि हमर कॉलेज में हरताल चलैत अछि। जाहि दिन शुरू भेल छलैक ओहि दिन अहाँक बाबुजी पहुँचि गेलाह , हम सोचिते छलहुँ अयबाक लेल ताधरि हमरा बाबुजी कहि देलैथ छुट्टी अछि तs अहि ठाम कि करब चलु हमरा संग आ हम चलि आयल रहि। दोसर अहाँ चिट्ठी जे लिखने रही, हमरा ततेक नय ख़ुशी भेल जे हम तुंरत आबय चाहति रहि।


हम हिनकर गप्प सुनी कs मोने मोन बड खुश भेलहुँ , मुदा इ हमर मोनक गप्प कोना बुझि गेलाह से नहि जानि। इ हमरा अपने मोने कहय लगलाह राँची तs अहि ठाम स दूर छैक परंच हम कोशिश करब जखैन्ह छुट्टी होयत हम आबि जायब अहाँ चिंता जुनि करब, खूब मोन स पढ़ब। हम इ सुनतहि उदास भ गेलौहुं, तखनि हमरा लागल जे आब हमरा हिनका सs अलग रहय में निक नय लागत।


तेसर दिन हम दुनु गोटे, माँ बाबूजी, हमर भाय बहिन सब दादी बाबा कs संग गाम सs अरेराज कs लेल बिदा भs गेलहुँराति सबगोटे मोतिहारी में रुकि भोरे भोर हमसब मन्दिर पहुँची गेलहुँ आ मुंडन भेला पर सबगोटे मन्दिर दर्शन करय लेल जाय गेलियय, हम आ ई बाहरे सs भोला बाबा कs गोर लागि लेलियैन्ह। दादी कहने छलथि विवाहक एक बरख धरि लोग मन्दिर कs भीतर नहि जायत छैक। सबगोटे वापस फेर मोतिहारी आबि गेलहुँ, दादी बाबा गाम चलि गेलाह आ हमसब ओहि दिन मोतिहारी रुकि गेलहुं , दोसर दिन हमारा सब के मुजफ्फरपुर सs राँची के लेल रेल गाड़ी छलs।





क्रमशः ........


email- kusum_thakur@yahoo.com/

kusumthakur1956@gmail.com/

Monday, April 13, 2009

1. पूर्वजक जन्मभूमिकेँ शत-शत प्रणाम 2.आचार्य पंकज

1. पूर्वजक जन्मभूमिकेँ शत-शत प्रणाम-

३५० बरस पहिल हमर पूर्वज मिथिला जरूर छोड़ने छला किंतु मैथिल होबाक गर्व हम सब सब दिन महसूस केने छि.हम सब ओतने गर्वोन्नत मैथिल छि जेतना कौनो दोसर मैथिल होता।लगभग ३५० बरस स हमर परिवार आधुनिक झारखण्ड क देवघर जिला अंतर्गत सारथ थाना के खैरबनी ग्राम में रही रहल छे
३०० साल पहिने एक सिद्ध ज्योतिषी मिथिला सँ चलि आज के देवघर जिलाक सारथ ,जकरा पहिने सरहद कहल जाइत छल , राजदरबार मे राज ज्योतिषी स्थान ग्रहण केलन्हि .ध्यान देबा योग्य बात ई अछि जे राज दरबार मुस्लिम नबाबक रहए आ राज ज्योतिषी मैथिल ब्राह्मण बनलाह.तखनसँ आइ धरि ओ परिवार ओतहि रहि गेल जेना आइ हम दिल्लीक भेल जा रहल छी। मुदा ई तँ एक सामजिक आर ऐतिहासिक प्रक्रिया अछि .विस्थापन तथा परिभ्रमण इतिहासक अति महत्त्वपूर्ण घटना रहल अछि .लेकिन अपन धरती अपन देश--देसिल बयना ,सब जन मिट्ठा-- स्मृति हमरा आइयो मैथिल बनेने अछि .हमसभ अपन इलाकामे अपनाकेँ मैथिल ब्राह्मण कहैत छी मुदा एहिमे ब्राह्मण गौण रहैत अछि मैथिल प्रमुख भ' जाइत अछि। दोसर लोक हमरा सभक लेल मैथिल शब्दक प्रयोग करैत छथि। माने मैथिल शब्द हमर अस्मिता हमर अस्तित्वक द्योतक अछि .


2. आचार्य पंकज

पंकज जी
हम अमरनाथ झा,दिल्ली विश्वविद्यालयक स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज मे इतिहास विभाग मे अससोसिएत प्रोफ़ेसर छी । हम अहाँकेँ संताल परगना (झारखण्ड) मे हिंदी साहित्य आ हिंदी कविताक अलख जगेनिहार सैकड़ामे साहित्यकार पैदा करएवला ओहि महान साहित्यकार एवं हुनकर रचनासँ अवगत कराबए चाहैत छी जे अपन बहुमुखी प्रतिभाक बलपर समस्त संताल परगनाकेँ शिक्षाक लौ सँ रौशन केलन्हि। १९१९ मे जन्म लेल श्री ज्योतींद्र प्रसाद झा "पंकज" नामक एहि महामना द्वारा १९३४ मे देवघरक हिंदी विद्यापीठमे अध्यापनक कार्य शुरू कएल गेल आ अपन प्रकांड विद्वताक बलपर तत्कालीन हिंदी जगतक धुरंधरक ध्यान अपन दिस खिचलन्हि। १९४२ क भारत छोड़ो आन्दोलनक कमान एक शिक्षकक हैसियतसँ सम्हारलन्हि १९५४ मे ओ संताल परगना महाविद्यालय दुमका (ओहि समय भागलपुर विश्वविद्यालयक अंतर्गत )क संस्थापक शिक्षक एवं हिंदी विभागक अध्यक्ष बनि गेलाह। एहि बीच तत्कालीन पत्र-पत्रिकामे ओ "पंकज" क उपनामसँ कविता ,समीक्षा आ एकांकी लिखैत रहलाह ,जकर चर्चा होइत रहल। १९५८ मे हुनकर कविता संग्रह "स्नेहदीप" क नाम सँ छपल। १९६४ मे हुनकर दोसर कविता संग्रह"उदगार" क नामसँ छपल। १९६५ मे संताल परगनाक साहित्यकार सभ मिलि क’ एक बहुत पैघ साहित्यिक संगठनक निर्माण कएलन्हि जकर अध्यक्ष "पंकज"जी केँ बनाओल गेल आ एहि संगठनक नाम सेहो हुनके नाम पर "पंकज-गोष्ठी" राखल गेल। १९६५ सँ १९७५ धरि पंकज गोष्ठी संपूर्ण संताल परगनाक असगर आ सबसँ पैघ साहित्यिक आन्दोलन छल। सत्य तँ ई अछि जे ओहि दौर मे ओतए पंकज गोष्ठीक मान्यताक बिना कोनो साहित्यकारहि नहि कहाइत रहथि। पंकज गोष्ठी द्वारा प्रकाशित कविता संकलनक नाम छल "अर्पण" तथा एकांकी संकलनक नाम छल "साहित्यकार"। लक्ष्मी नारण "सुधांशु ",जनार्धन प्रसाद मिश्र "परमेश",बुद्धिनाथ झा"कैरव" क समकालीन एहि महान विभूति--प्रोफ़ेसर ज्योतींद्र प्रसाद झा "पंकज' क विद्वता,रचनाधर्मिता एवं क्रांतिकारिता सँ तत्कालीन महत्त्वपूर्ण हिंदी रचनाकार जेना--रामधारी सिंह"दिनकर",द्विजेन्द्र नाथ झा "द्विज",हंस कुमार तिवारी,सुमित्रानंदन"पन्त',जानकी वल्लभ शास्त्री नलिन विलोचन शर्मा आदि भली भांति परिचित छलाह । आत्मप्रचारसँ कोसो दूर रहए वाला "पंकज"जी केँ भले आइ हिंदी जगत बिसारि देलक अछि परन्तु ५८ साल कि अल्पायु मे १९७७ मे दिवंगत एहि आचार्य कविकेँ मृत्यक ३२ वर्षो बादो संताल परगनाक साहित्यकारे टा नहि वरन लाखों लोक अपन स्मृतिमे आइयो महान विभूतिक रूपमे जिन्दा रखने छथि। संताल परगनाक एहन कोनो गाम या शहर नहि अछि जतए "पंकज"जी सँ सम्बंधित किम्वदंति नहि प्रचलित होअए। की अहाँ हुन्अका आ हुनकर कृतिक ब्रिहद्तर हिन्दी जगतक समक्ष प्रस्तुत करबामे हमर सहायता करब ? अहाँक प्रतिक्रिया सादर आमंत्रित अछि। अभिवादनक संग -उत्तरापेक्षी,अमरनाथ ।

मैथिल आर मिथिला से जुड्लाक बाद हम बेहद प्रसन्नता के अनुभव के रहल छि| लगभग ३५० बरस स हमर परिवार आधुनिक झारखण्ड क देवघर जिला अंतर्गत सारथ थाना के खैरबनी ग्राम में रही रहल छे.परिणाम स्वरुप हम सब घर म मैथिलि नै बजे छि.हम सब विशुद्ध अंगिका सेहो ने बजे छि.हमर बोली में किछु मैथिलि आर किछु अंगिका के सम्मिश्रण छे.ते दुआरे मैथिलि लिखे में जे किछु त्रुटी होए ओकरा क्षमा करू।मुदा हमारा इ मंच पर आमंत्रित के क जे सम्मान हमरा अपने देलोंओकरा लेल हम धन्यवाद ज्ञापित करे छि.आशा छे इ सम्बन्ध समय क संग आर प्रगाढ़ होयत।मैथिल आर मिथिला क योगदान सराहनीय।
शुभकामना सहित 
अमरनाथ झा
दिल्ली विश्वविद्यालय. 

कविता- हे हमर प्रेयसी- आशीष अनचिन्हार

कविता

हे हमर प्रेयसी

जहिना
फूल झहरि-झहरि खसैत अछि
माटि पर
ओकरा सजबए लेल


मेघ हहरि-हहरि
बुन्नी बनि जाइत छैक
फसिलक लेल


सुगंध उड़ि-उड़ि
बसात मे मीलि जाइत छैक
ओकर सौन्दर्यक लेल


तहिना
हे हमर प्रेयसी, हे हमर सोन
आउ
हम दूनू मीलि जाइ
एक दोसरा मे
नव जिनगी , नव चेतनाक
लेल

अकाल- कीर्तिनारायण मिश्र

कीर्तिनारायण मिश्र- अकाल

सड़क पर हड्डी चिबबैत
छौंड़ा सभ
कुकूर आ पुलिसकें
डण्डा देखा रहल अछि
ऐंठल अंतड़ी वाली जनता
भूक-हड़तालक धमकी दऽ रहलि अछि।

बाँझ सरकार
विदेशक आश्वासन सँ
विवाह रचा रहलि अछि
’लूप’ लागल धरती
तथा निवीर्य्य अकाशक बीचमे
देशक नपुंसकता जोरसँ दहड़िमारि रहलि अछि।
आऽ समय एहि सभसँ असम्पृक्त्त
नशामे मातल
मैदानमे जा कए सूति रहल अछि।

कुमार सौरभक टटका आलेख : प्रायश्चितक क्षण

लोकतांत्रिक राजनीति केर संदर्भ में मिथिला
प्रायश्चितक क्षण


1952 सॅ एखन धरि मिथिलाक कोनो समस्या,कोनो आकांक्षा प्रखर रूपें चुनावी मुद्दा बनि नहि उभरि सकल अछि । अशिक्षा, निजी स्वार्थ, जातिगत द्वेष आदि एकर प्रमुख कारण मानल जा सकैछ । एखन धरि मुख्यतः दलगत पूर्वाग्रह, जाति-पाति, व्यक्तिगत सम्बन्ध आ लाभ, दबंगइक दबाव, स्त्री उम्मीदवार केर देहक आकर्षण आदिक प्रभाव वा विकल्पक अभाव मे मतदान कयल जाइत रहल छैक । बिकासक मामला मे अहि क्षेत्रक उपेक्षाक लेल अहि तरहक प्रवृत्ति सबसं बेसी जिम्मेदार अछि । अहू से बेसी दुर्भाग्यपूर्ण थिक अहि क्षेत्र मे, विकासक काज आ आकांक्षा पूर करबाक प्रयास करय वाला व्यक्ति आ दल केर घनघोर उपेक्षा । चिर प्रतीक्षाक उपरांत मैथिलीक अष्टम् अनुसूची मे प्रवेश आ कोसीक पूब आ पच्छिम मे बंटल मिथिला के जोड़बाक महत्वाकांक्षी योजना- कोसी रेल सेतुक निर्माण लेल स्वीकृति देबय वाला गठबंधन सरकारक अहिठामक चुनाव मे चित बजार खसब, एकर उदाहरण थिक । अहि तरहक अनुभव सॅ नेता सबहक अकर्मण्य चरित्र बहुत बेसी प्रोत्साहित होइत छैक । कोनो क्षेत्रक प्रति ई धारणा जे अहिठाम काज करब नहि करब कोनो मुद्दा नहि थिक ओहि क्षेत्र लेल कतेक घातक भ सकैछ, सहजे अनुमान लगायल जा सकैत अछि । यैह कारण थिक जे मैथिल जनमानसक एकटा मान्य नेता बिहारक मुख्यमंत्री बनलाक बाद उचित अधिकारिणी मैथिली के कात क’, उर्दू के द्वितीय राज भाषा घोषित करबाक अक्षम्य कृत्य क’ पबैत छैथि । समाजवादी आंदोलनक पृष्ठभूमि मे उपजल जातिगत राजनीतिक धुरंधर एकटा गप्पी नेता मैथिली के बी.पी.एस.सी. सॅ बाहर करबाक दुस्साहस करैत छैथि । वैह नेता क्षेत्रक एकटा जाति विशेष के मोन भरि गरियाबैत छैथि आ निर्लज्जताक हद देखू जे बदलैत राजनीतिक परिदृश्य मे ओहि जाति के समाजक सबसॅ सज्जन जाति कहि आशीर्वाद मांगैत छैथि आ गप्पक राजनीति कतेक प्रभावी भ सकैत से देखा दैत छैथि ।

जूझि रहल अछि मिथिला

1.बाढि सॅ तबाही आ विस्थापनक समस्या.
2.कोसी क्षेत्र मे पीबाक पानिक समस्या (आइरनक अधिकता- स्वास्थ्य लेल सबसॅ पैघ संकट).
3 गरीबी आ भूखमरी.
4.खेतिहरक बदतर स्थिति.
5.अराजक सरकारी शिक्षा व्यवस्था आ विश्वविद्यालयी शिक्षाक कंडम हालत.
6.व्यापक बेकारी आ बेगारीक समस्या.
7.माछ-मखान उद्यमक अधोगति. कोनो तरहक लघु आ कुटीर उद्यम के प्रोत्साहनक घोर खगता.
8.बेमार स्वास्थ्य सेवा.
9.लचर पुलिसिया तंत्र..
10.जर्जर परिवहन व्यवस्था.
11.बिजली संकट.
12.दबंगई आ रंगदारी वसूली.
13.जड़ि तक पसरल भ्रष्टाचार.
14.मैथिली के समुचित इज्जति नहि भेटब.
15.किछु अहिन्दी भाषी राज्य मे एम्हुरका लोक सबहक संग अशोभनीय आ अमानुषिक व्यवहार.
16.नेपाल सीमा सॅ सटल क्षेत्र मे अंधाधुंध तस्करीक माध्यमे घटिया आ अहितकर भोज्य पदार्थ आ समान सॅ अंटल बजार.
17.बंगलादेशी घुसपैठिया सबहक पूर्वोत्तर सीमान्त मिथिला मे
गुपचुप ढ़ंगे पसरैत पैर.
18.पर्यटन क्षेत्रक रूप मे विकसित हेबाक संभावनाक अछैतो
सरकारी उदासीनता.
19. हिटलरी प्रशासनिक व्यवस्था.
20. बिकास काजक काउछ चैलि.

अहि सबहक अतिरिक्त आनो कतेक समस्या प्रत्यक्ष वा परोक्ष रूपें मुंह बाबि ठाढ़ अछि जे हमर वैयक्तिक सीमाक कारणें इंगित नहि भ सकल अछि । अहि तरहक गंभीर समस्या सबहक निदान लेल हमरा सब कहिया राजनीतिक दृष्टि सॅ संगठित होयब ????????

मित्र, कमजोरी हमरे सबहक आत्मा मे पैसल अछि । जतय जैतुक (दहेज) सन निकृष्ट व्यापारक खुलल मंडी (Open Market) होइ, ओहि ठामक लोकक नैतिक चरित्रक केहेन आकलन कयल जा सकैत अछि ???? मौस, दारू, आ सौ-सौ केर एक दूइ टा नोट पर बिकि जाइ वाला हमसब बदलावक अपेक्षो कोन मुंहे करी ????
ब्लाग धरि पहुंच राखय वाला अपना सब एहेन तथाकथित बुधियार सबहक लेल यैह प्रायश्चित भ सकैत अछि जे अपन गामक आ प्रभावक लोक सबके हाथ जोड़ि जोहारि करी - “ भैया, कका, ददा बहुत भ गेले !!!! कम सॅ कम अहू बेर अपन चुनावी दायित्व बुझियौ !!!!!!!!!!!!!! ”

नीक होयत जे हम सब अहि बेर (लोकसभा चुनाव-2009 मे) सब तरहक पूर्वाग्रह सॅ उपर उठि , उम्मीदवारक व्यक्तिगत छवि आ विकास लेल प्रतिबद्धताक आधार पर मतदान करी आ बेसी सॅ बेसी संख्या मे मतदान लेल निकली ।

Sunday, April 12, 2009

मच्छर चलिसा- मदन कुमार ठाकुर


मच्छर चलिसा





दाेहा


अति आबस्यक जानी के हाेके अति लचार


बरणाे मच्छर सक्‍ल गुणाे दुख दायक ब्यबहार ।


बिना मसहरि दिन हॅू सुन्हूॅ सकल नर्रनार


मक्ष्छर चलिसा लिखक पढ़उ साेइच बिचैर ।।



चाैपाइर्


जय मच्छर भगवान उजागर ।


जय अर्नगिणित हे राेग के सागर ।।


नदियाॅ पाेखैर गंगा सागर ।


सबठाम रहते छी अही उजा गर ।।


नीम हकिम के अही रखबारे ।


डाक्‍टर के भेलाे अतिश्य प्‍यारे ।।


मलेरिया के छी अहा दाता ।


छी खटमल के प्‍यारे भा्रता ।।


जरी बुट्टी से काज नऽ बनल ।


अंग्रेजी दबाइर् जलदी फीट करल ।।


आउल आउट गुडनाइर्ट अपनेलाे ।


फेर अपन अहा जान बचेलाे ।।


दिन दुखि सब धुप में जरैत छैथ


राइर्ताे में बेचैन रहैत छैथ ।।


संझ भाेर अहा राग सुनाबी ।


गॅु र् गॅु कऽ के नाम कमाबी ।।


राजा छैथ या रंक फकिरा


सब के केलाे अपनेही मत धिरा ।।


रूप कुरूप अहा मानलाे


छाेटका बऱका नै अहा जनलाे ।।


नर छैथ या स्वगाेर्कऽ नारी


सब के समक्ष बनलाे अहा भारी।।


भिन्न भिन्न जे राेग सुनेला


डाकटर कुमार फेर शर्मेला ।।


सब दफ्‍तर में आदर पेलाेे


बिना इजाजत के अहा घुस गेलाे ।।


चाट परल जिन्गी से गेलाे


कनिते खिजते परिवार गमेलाे ।।


जर्यजर्यजय हे मक्ष्छर भगवाना ।


माफ करू सबटा जुर्माना ।।


छी अहा नाथ साथ हम चेरा ।


जल्दी उजारारू अहा अपनेही डेरा ।।



दाेहा


निश बंाशर शंकर करण मालिन महा अति कुर


अपन दल बल सहित अहा बसाे कहि जा दुर




मदन कुमार ठाकुर


पट्टिटाेल ह्यभैरर्बस्थान हृ


झंझारपुर ़ मधुबनी


बिहार – 847404


माेर् 09312460150




अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन









जितेन्द्र झा

११ अप्रैल २००९ ।

अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली परिषदक 19 म् सम्मेलनके उदघाटन करैत प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड कहलनि अछि जे भाषाक आधारमे संघीयताक एàतिहासिक निर्णय होब' लागल अछि । शनिदिन काठमाण्डूक ललितपुरमे शुरु भेल दुदिना 19 म अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलनके उदघाटन करैत प्रधानमन्त्री एहन निर्णय होब' लागल अछि से कहलनि ।


मैथिली भाषा नेपालक दोसर पैघ भाषा होइतो उपेक्षित रहल कहैत प्रधानमन्त्री "भाषाक आधारमे संघीयता भेलाकबाद मैथिलीके न्याय भेटत" कहलनि । खस भाषा अन्य भाषाके अतिक्रमण क' रहल दाबी करैत प्रधानमन्त्री भाषाक आधारमे स्वायत्त प्रदेशक निर्माणके बाद आन भाषाक उत्थान हएत बतौलनि । मैथिली भाषा नेपाल आ भारतबीच सेतु रहल हुनक कहब रहनि।


मैथिली भाषाक महाकवि विद्यापतिक प्रतिमा काठमाण्डूमे स्थापित हुअए ताहिलेल सभाहलसं हुटिङ भेलाक बाद प्रधानमन्त्री राजधानीमे विद्यापतिक शालिक स्थापना कएल जएबाक प्रतिबद्धता व्यक्त कएलनि ।


सम्मेलनमे मधेशी जनअधिकार फ़ोरमक सह अध्यक्ष एवं कृषि तथा सहकारीमन्त्री जयप्रकाश प्रसाद गुप्ता मधेशीक मूल समस्या आन्तरिक औपनिवेशीकरण रहल बतौलनि । मधेशक समस्या समाधानक लेल एक मधेश एक प्रदेश अत्यावश्यक रहल कहैत गुप्ता कहलति लडाई एखन बांकी अछि । विगतमे लादल गेल 'एक भाषा एक भेष एक संस्कृति"द्वारे मैथिलीक विकास नर्इं भ' सकल भूमिसुधार तथा व्यबस्थामन्त्री महेन्द्र पासवानके कहब रहनि ।


नेपाल पत्रकार महासंघक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा देशमे संघीय राज्यप्रणाली हएबाक तय रहल अबस्थामे मिथिला राज्य पर जोड देल जएबाक चाही से कहलनि ।

अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली परिषदक उपाध्यक्ष तथा प्रवक्ता धनाकर ठाकुर कहलनि 'मिथिलावासीक संघर्षसं मात्र मिथिला राज्यक स्थापना हएत' । तहिना भारतसं आएल प्रतिनिधि डा राजमोहन झा नेपालमे जाधरि मिथिला राज्यक स्थापना नई हएत ताधरि देशमे कोनो विकास सम्भव नइ रहल दाबी कएलनि । मल्ले के सुन्दर नेवार आ मैथिली संस्कृति मिलैत जुलैत रहलाक कारणà मैथिली भाषा भाषीक लेल नेवारी समुदाय सेहो योगदान देत से आ·ाासन देलनि । एहिके लेल काठमाण्डूमे मैथिलीक महाकवि विद्यापतिके स्मारक बनएबामे सहयोग करबाक प्रतिबद्धता ओ व्यक्त कएलनि ।


ओहि अवसरमे प्रधानमन्त्री मैथिली भाषा, संस्कृतिमे योगदान देनिहार व्यक्तित्वके सम्मानित कएने रहथि । सम्मेलनमे संस्थागत सुदृढिकरणकर्ता मुखीलाल चौधरी, रंगकर्मी रन्जु झा आ मैथिली पढाइ उत्प्रेरक कार्यदल राजविराजके सम्मानित कएल गेल । तहिना भारत बिहारक रहिका निवासी मैथिली आन्दोलन अगुवा चुनचुन मिश्र आ लोकसाहित्यकार डा महेन्द्रनारायण रामके सम्मानित कएल गेलनि।


परिषदक अध्यक्ष भुवने·ार गुरमैताक सभापतित्वमे भेल उदघाटन कार्यक्रममे सम्मेलनक संयोजक रामरिझन यादवले सम्मेलनक औचित्यक विषयमे बाजल रहथि । तहिना कमलकान्त झा, वि·ानाथ पाठक,सम्मानित महेन्द्र नारायण राम, मुखिलाल चौधरीसहितक वक्ता मन्तव्य व्यक्त कएने रहथि । उदघाटन कार्यक्रमक बाद मैथिली सास्कृतिक कार्यक्रम भेल छल ।


सम्मेलन आयोजक समितिक अनुसार नेपालमे सभस बेशी बाजल जाएबला दोसर भाषा मैथिली भारतमे 16 म् स्थानमे अछि । वि·ामें सभसं बेशी बाजल जाएबला भाषामे मैथिली 26 म स्थानमे अछि । वि·ाभरिमे मैथिली बजनिहार साढे चारि करोडसं बेशी रहल अनुमान कएल गेल अछि ।

jitumaithil@gmail.com

Saturday, April 11, 2009

नताशा 02 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)

ललकार -रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'


बाध-वन आ नदी -पहाड़
सउँसे सं आबय ललकार
बारम्बार तोरा धिक्कार
नहि सुनैत छए मिथिलाक चीत्कार ?
बधिर भेल छौ तोहर कान
केहन छए मिथिलाक संतान ?
आंखि रहितो भेल छए आन्हर
हाथ-पएर रहितो तों सब
छए एकदम सं लुल्ह -नांगर
बुद्धि रहितो भेल छए बेबुधिगर
कान कयने छए की तूर सं जाम ?
केहन छए मिथिलाक संतान ?
सीता जनमल एही माटि सं
आओर बनलथि पाहुन राम
यैह थिक राजा जनकक गाम
भेल एही ठाम मंडन-अयाची
आओर ने जानि कते विद्वान
एहन भेल मिथिलाक संतान ।
गबै छए समदाओन आ सोहर
कखन देखेबए अपन जोहर
ध्यान कतय छौ भटकल तोहर
पटना मे तोहर नहि मोजर
दिल्ली तोरा सं अनजान
केहन छए मिथिलाक संतान ?
गुंजल एतय विद्यापतिक गान
धरती अछि पावन मिथिलाधाम
करै एकर तों मान-सम्मान
रोशन कर जग मे एकर नाम
जाग आब भेलौ बिहान
केहन छए मिथिलाक संतान ?

Friday, April 10, 2009

लल्लन प्रसाद ठाकुर- 2



किछु पाठक गणक अनुरोध आ हमरा ई -मेल सेहो आयल छल जे श्री लल्लन प्रसाद जी कs विषय में तथा हुनक रचनाक जानकारी ब्लॉगक मध्यम किछु देबाक लेल। ओना हुनकर एकटा ब्लॉग छैन्ह जाहि केर लिंक छैक : www.lallanprasadthakur.blogspot.com/ मुदा पाठकगणक अनुरोध छैन्ह तs हम हुनक संक्षिप्त परिचय एही ब्लॉग पर सेहो दs रहल छी।


"श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर जी"ओना तs अभियंता छलाह मुदा एकटा अभियंता में एक संगे एतेक रास गुण बहुत कम देखबा में अबैत छैक। ई १९८१ कs गप्प थिक, देश भरि में मैथिलि कs अष्ठम सूचि में स्थानक लेल आन्दोलन चलैत छलैक। एही सन्दर्भ में निर्णय भेल छलैक जे देशक हर क्षेत्र सs प्रधानमन्त्री के नाम पत्र पठायल जायत । लाखक लाख पत्र देशक हर कोना सs मैथिलि भाषा भाषी लिखि कs प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी के पठौलखिन्ह। एही में जमशेदपुरक मैथिल भाषा भाषिक सेहो पूर्ण रूपेण सहयोग रहलैन्ह। विचार भेलैक जे एकटा छोट छीन कार्यक्रम कैल जाय, पोस्टकार्ड पहिनही घरे घर बाँटि देल जाय आ ओहि दिन जतेक तक भs सके पोस्टकार्ड लोक लs कs आबैथ आ जमा करैथ ।कार्यक्रमक भार श्री लल्लन प्रसाद जी के ई कही देल गेलैन्ह जे समय बहुत कम छैक परंच ओ जओं चाहिथिन्ह तs भs सकैत छैक।


समय कम की, बड़ कम छलैक, मुदा जाहि दिन निर्णय लेल गेलय कि कार्यक्रम होयतैक ओहि दिन अपन अभिन्न मित्र श्री बालमुकुन्द जी कs सँग बैसी कs ई निर्णय लs लेल्थिन्ह जे कोन तरहक कार्यक्रम होयतैक। निर्णय भेलैक जे एकटा मैथिलि संगीतक (ऑर्केस्ट्रा) कार्यक्रम कैल जाय, आ हम सब ओहि दिन के संकल्प दिवस के रूप में मनाबी । बालमुकुन्द जी के गेलाक बाद ओहि कार्यक्रमक पहिल गीत सेहो लिखा गेलय। करीब दू सप्ताहक समय छलैक, ओहि में गीत सबटा लिखि कs अपनहि धुन दs आ किछु गीत अपनहि गेनहो रहथिन्ह। बाकी गीत के सेहो कलाकार सब सs तैयारी करा निर्धारित तारीख कs कार्यक्रम भs गेलैक। कार्यक्रम खूब सफल रहलैक। ओहि कार्यक्रमक पहिल गीत वा स्वागत गीत अछि :


"संकल्प गीत "


संकल्प लिय संकल्प लिय
संकल्प लिय यौ,
बाजब मैथिलि
मिथिलाक लेल जियब यौ .....
संकल्प लिय .......२


शांतिमय प्रयास हमर ई ,
सुनिलिय देशक नेता.....३
सूचि अष्ठम में स्थान दियौ
आरो नय किछु कहब यौ ....
संकल्प लिय ........२ ।


लाखक लाख पत्र जाइत अछि
आंखि खोलि कs देखू .........३
आबि गेल समय इंदिरा जी ,
मिथिलाक मान राखू ...३
संघर्ष बढ़त जाँ बात ने मनबय
आरो ने हम सहब यै।
संकल्प ........३।

आ आब तs मैथिलिक स्थान अष्ठमसूचि में सेहो छैक जे की सम्पूर्ण मैथिलि भाषा भाषी कs प्रयास सs भेल छैक।

गीतकार : लल्लन प्रसाद ठाकुर
संगीतकार :लल्लन प्रसाद ठाकुर

E-mail:

kusum_thakur@yahoo.com
kusumthakur1956@gmail.com

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